Author: NewseDay

  • सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    सेवा की कहानी : बिहान से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आई आत्मनिर्भरता की नई सुबह

    मेहनत, हौसले और अवसर ने बदली तस्वीर, खेत से व्यवसाय तक महिलाओं ने लिखी ‘लखपति दीदी’ बनने की कहानी

    स्व-सहायता समूहों से मिला साथ, बचत और ऋण से आजीविका को मिला विस्तार

    रायपुर, 
    कभी घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। किसी ने खेत में नई फसल उगाकर आय का रास्ता बनाया, किसी ने सब्जी उत्पादन को व्यवसाय का रूप दिया तो किसी ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया। यह बदलाव केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता बढ़ने की कहानी भी है।

    छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी महिलाओं को बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से उपलब्धि में बदल रही हैं। यही प्रयास उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे हैं और अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही ‘सेवा की कहानियां’ में इन महिलाओं का सफर इस बात का उदाहरण है कि जब शासन की योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंचती हैं और उसके प्रयासों को सही दिशा मिलती है, तो बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि परिवारों और जीवन में दिखाई देता है।

    छोटी बचत से बड़े सपनों तक

    ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित रही। छोटी जरूरतों के लिए भी परिवार को दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को संगठित होने, नियमित बचत करने और सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दिया।

    नियमित बचत ने आर्थिक अनुशासन बढ़ाया तो समूह की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं के लिए ऋण और आजीविका गतिविधियों के रास्ते खोले। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अपनी रुचि और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप आय का साधन अपनाया।

    छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव में बदलती गई। घर की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब अपनी आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    खेत से बाजार तक पहुंची कल्पना सिंह की आत्मनिर्भरता

    अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह की कहानी इस बदलाव की सशक्त मिसाल है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं।

    कल्पना के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्य स्वयं आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं।

    खेती से मिली आय ने उनके भीतर यह विश्वास मजबूत किया है कि यदि मेहनत के साथ सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिला अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। खेत से बाजार तक का उनका सफर आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक आत्मविश्वास की भी कहानी है।

    मजदूरी से अपने व्यवसाय तक पहुंचीं मति बाई

    उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। कभी उनके परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह से जुड़कर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

    समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से शुरू हुआ यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।

    आज वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर उम्मीद भी मजबूत हुई है।

    मति बाई की कहानी बताती है कि आजीविका का एक छोटा अवसर भी यदि महिला की मेहनत और निरंतर प्रयास से जुड़ जाए तो वह परिवार की आर्थिक दिशा बदल सकता है।

    ‘लखपति दीदी’—आय के साथ बढ़ा आत्मसम्मान

    ‘लखपति दीदी’ की पहचान इन महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें उन्होंने निर्भरता से आत्मनिर्भरता, संकोच से आत्मविश्वास और अभाव से अवसर की ओर कदम बढ़ाए हैं।

    आज ये महिलाएं परिवार के खर्च में योगदान दे रही हैं, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आय अर्जित करने के साथ उनके निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    अब वे बैंक जा सकती हैं, ऋण संबंधी प्रक्रिया समझ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और अपनी मेहनत से अर्जित आय के उपयोग का निर्णय स्वयं ले सकती हैं। यह परिवर्तन महिला सशक्तिकरण का वह स्वरूप है, जिसका असर घर से लेकर समाज तक दिखाई देता है।

    बिहान ने खोले आजीविका के अनेक रास्ते

    बिहान से जुड़े स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। कृषि एवं सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, दुग्ध व्यवसाय, सिलाई और अन्य आयमूलक गतिविधियां उनके लिए आमदनी बढ़ाने के अवसर बन रही हैं।

    स्व-सहायता समूह महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देते, बल्कि साथ चलने का भरोसा भी देते हैं। समूह की बैठकों में महिलाएं अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे से सीखती हैं। प्रशिक्षण से उन्हें नई जानकारी मिलती है, जबकि बैंक और बाजार से जुड़ाव उनके निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है।

    इस तरह बिहान महिलाओं के लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सीखने, संगठित होने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को आकार देने का मंच बन रहा है।

    एक महिला की आय से मजबूत होता पूरा परिवार

    जब कोई महिला आय अर्जित करती है तो उसका लाभ केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। बच्चों की शिक्षा, बेहतर खान-पान, घर की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को पूरा करने में अतिरिक्त सहारा मिलता है।

    इसके साथ महिलाओं में अपने भविष्य को लेकर नया भरोसा पैदा होता है। उन्हें यह विश्वास होता है कि वे व्यवसाय चला सकती हैं, बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ सकती हैं, बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं और परिवार के आर्थिक फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

    यही बदलाव महिला सशक्तिकरण को परिवार की मजबूती से जोड़ता है। सशक्त महिला केवल स्वयं आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसके साथ पूरा परिवार आगे बढ़ता है।

    संघर्ष से सफलता तक—छोटे प्रयासों की बड़ी कहानी

    इन महिलाओं की सफलता की कहानियों में बड़े संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण है लगातार प्रयास करते रहने का हौसला। किसी ने बचत से शुरुआत की, किसी ने समूह से ऋण लेकर पहली बार व्यवसाय शुरू किया, किसी ने खेत में नई फसल लगाई तो किसी ने पशुपालन या मुर्गी पालन को आय का साधन बनाया।

    शुरुआत छोटी थी, लेकिन सपने बड़े थे। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और घर की तस्वीर बदलने लगी। आर्थिक परेशानियों के बीच उम्मीद मजबूत हुई, बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने आकार लेने लगे और महिलाओं के चेहरे पर अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास दिखाई देने लगा।

    सशक्त महिला से सशक्त परिवार और सशक्त समाज

    बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का यह सफर महिला सशक्तिकरण की उस भावना को मजबूत करता है, जिसमें महिला को केवल सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है।

    स्व-सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं को यह विश्वास दिया है कि वे अकेली नहीं हैं। साथ मिलकर बचत करना, सीखना, व्यवसाय करना और आगे बढ़ना संभव है। यही सामूहिकता उनके आत्मविश्वास की बड़ी ताकत बन रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आ रही कल्पना सिंह और मति बाई जैसी महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि बदलाव केवल किसी योजना के लाभ से नहीं आता, बल्कि अवसर, सहयोग और मेहनत के मिलन से बदलाव की स्थायी तस्वीर बनती है।

    आज गांवों में महिलाएं केवल परिवार की खुशहाली की सहभागी नहीं हैं, बल्कि अपनी मेहनत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। ‘लखपति दीदी’ के रूप में उनकी पहचान उस बदलाव का प्रतीक है, जहां महिला की मेहनत परिवार की ताकत और समाज की प्रगति का आधार बन रही है।

    बिहान ने ग्रामीण महिलाओं के हाथों को केवल काम नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय करने का आत्मविश्वास और साहस भी दिया है। यही है सेवा संकल्प की एक ऐसी कहानी, जिसमें एक महिला की आत्मनिर्भरता से पूरे परिवार के जीवन में नई सुबह आती है।

  • ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर चलाया गया टिकट जांच अभियान

    ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर चलाया गया टिकट जांच अभियान

    ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर चलाया गया टिकट जांच अभियान

    बिना टिकट /अनियमित टिकट एवं अनाधिकृत सामान लेकर यात्रा करने वालों में मचा हड़कंप

    ग्वालियर

               मंडल रेल प्रबंधक झाँसी श्री अनिरुद्ध कुमार के मार्गदर्शन व वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अमन वर्मा के निर्देशन में बिना टिकट यात्रियों की रोकथाम ग्वालियर-भिंड रेलखंड पर ट्रेनों में बिना टिकट/अनियमित यात्रा / गंदगी फ़ैलाने वालों के खिलाफ सघन टिकट जांच बहियाँ चलाया गया I जांच अभियान के अंतर्गत 17 यात्रियों से 9735 रूपए जुर्माना स्वरुप  रेल राजस्व वसूल किया गया I सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्री आर के वर्मा  के नेतृत्व में चलाए गए उक्त जांच अभियान में मुख्य वाणिज्य निरीक्षक दिग्विजय सिकरवार, टिकट निरीक्षक कृष्ण कुमार, दौलत राम, ब्रिजेन्द्र कुमार तथा रेल सुरक्षा बल से के एल मीना द्वारा अहम् योगदान प्रदान किया गया तथा  ।
    इस प्रकार के जांच अभियान निरंतर जारी रहेंगे । अतः यात्रियों से अनुरोध है कि वह उचित यात्रा टिकट लेकर एवं निर्धारित सीमा से अधिक सामान को बुक कराकर ही यात्रा करे तथा रेल परिसर में धुम्रपान एवं गंदगी न फैलाए ।

  • लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    ​"लोग पहले कहते थे बेचारी,अब देती है,लोगो को काम

    ‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

    रायपुर, 

           ​हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है।

    ​जब थम सी गई थी जिंदगी

           ​पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।
            ​दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा
    ​घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।
           ​दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई।

    छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक

           ​ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।
          ​सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं।

    ​"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"

           ​आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं।

    ​समाज के लिए नई मिसाल

          ​सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।

  • आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

    आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

    आस की कच्ची छत से विश्वास के पक्के मकान तक

     सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी

    ​रायपुर

         प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।
          ​सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। ​लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।
          ​अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
            ​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

  • पानी उतरते ही सामने आई तबाही, बिहार में सड़क-पेयजल व्यवस्था को भारी नुकसान

    पानी उतरते ही सामने आई तबाही, बिहार में सड़क-पेयजल व्यवस्था को भारी नुकसान

     पटना
     बिहार में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने के साथ ही तबाही की तस्वीर सामने आने लगी है। बाढ़ से सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

    ग्रामीण कार्य विभाग को 17 बाढ़ प्रभावित जिलों से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 1050 से अधिक ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं।

    इनकी कुल लंबाई करीब 2000 किलोमीटर है। इन सड़कों की मरम्मत में शुरुआती आकलन के मुताबिक करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।

    ग्रामीण कार्य विभाग के निर्देश पर जिलों से ग्रामीण सड़कों की स्थिति की दैनिक रिपोर्ट मंगाई जा रही है। फिलहाल बड़ी संख्या में सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। पानी उतरने के बाद ही पूरी तरह हालात स्‍पष्‍ट होंगे।

    ग्रामीण सड़कों की स्थिति सीधे गांवों के प्रखंड, बाजार और अन्य प्रमुख इलाकों से संपर्क पर असर डालती है, इसलिए क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द दुरुस्त करना चुनौती होगी।

    भागलपुर में सबसे अधिक सड़कें प्रभावित
    प्रारंभिक रिपोर्ट में भागलपुर और पटना में ग्रामीण सड़कों पर बाढ़ का सबसे अधिक असर बताया गया है। भागलपुर में 151 और पटना में 140 ग्रामीण सड़कें पानी में डूबी

    पटना जिले में अकेले दानापुर क्षेत्र में 44 सड़कें प्रभावित बताई गई हैं। अन्य जिलों में भोजपुर की 134, सारण की 101, समस्तीपुर की 86, वैशाली की 82, कटिहार की 60, लखीसराय की 54, बेगूसराय की 49, मुंगेर की 48 और खगड़िया की 36 ग्रामीण सड़कें पानी की चपेट में हैं।

    इसी तरह अरवल की 21, सहरसा की 20, मधेपुरा की 18, पूर्णिया की 18, पश्चिम चंपारण की 16 और अररिया की 10 ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुई हैं।

    पानी उतरने के बाद सामने आएगा वास्तविक नुकसान
    विभाग के अनुसार अभी अधिकांश आंकड़े प्रारंभिक हैं। कई सड़कें लगातार पानी में डूबी हुई हैं, इसलिए उनके वास्तविक नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है।

    पानी पूरी तरह उतरने के बाद सड़क की सतह, पुल-पुलिया, संपर्क मार्ग और अन्य संरचनाओं को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद मरम्मत के लिए आवश्यक राशि और काम की प्राथमिकता तय की जाएगी।

    3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं भी प्रभावित
    बाढ़ ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। पिछले महीने आई बाढ़ के बाद 75 प्रखंडों की 307 पंचायतों में करीब 3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं प्रभावित होने की जानकारी मिली है।

    आपदा प्रबंधन विभाग को पीएचईडी से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई चापाकल कई दिनों तक पानी में डूबे रहने के कारण खराब हो गए हैं।

    ऐसे स्थानों पर नए चापाकल लगाने की जरूरत पड़ सकती है। पेयजल योजनाओं को दुरुस्त करने और नए चापाकल लगाने में करीब 24.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    पानी कम होते ही प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।

    भागलपुर में 760 चापाकल प्रभावित
    पेयजल व्यवस्था में सबसे अधिक नुकसान भागलपुर पीएचईडी प्रमंडल  में बताया गया है। यहां 760 चापाकल प्रभावित हुए हैं।

    इसके बाद खगड़िया में 450, पटना पूर्वी और पश्चिमी प्रमंडल में 294, किशनगंज में 206, हाजीपुर में 136 और बेगूसराय में 134 चापाकल खराब होने की जानकारी है।

    बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब विभागों के सामने सड़क संपर्क बहाल करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को जल्द सामान्य करने की चुनौती है।

     

  • नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    ​सेवा का संकल्प, विकास की धार

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    ​रायपुर
           जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।
            ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
            ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।
          ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।

  • 181 हेल्पलाइन पर शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा, अधिकारियों को दिए संतुष्टि के निर्देश

    181 हेल्पलाइन पर शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा, अधिकारियों को दिए संतुष्टि के निर्देश

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन केन्द्र का निरीक्षण कर सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न जिलों के परिवादियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली

    वीडियो कॉल के माध्यम से आमजन से सीधे संवाद
    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल के तहत एक अभिनव पहल की गई है। इसके माध्यम से प्रशासनिक सचिव प्रतिदिन वीडियो कॉल के जरिए आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं तथा उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस नवाचार से सरकार को आमजन की समस्याओं के स्वरूप और उनकी वास्तविक कठिनाइयों को सीधे समझने में भी मदद मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित हो, जिससे उनका संतुष्टि स्तर बढ़े तथा समस्याओं का प्रभावी, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि 181 हेल्पलाइन के माध्यम से शासन और आमजन के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रशासन अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और आमजन के प्रति तत्पर बन सके।

    ‘नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क’ की दिशा में बढ़ रहा राजस्थान संपर्क
    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार के सुशासन के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान संपर्क को नेक्स्ट जेन जनसम्पर्क के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाकर शिकायतों के त्वरित, सार्थक एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।

    परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि को सुनिश्चित करें
    मुख्य सचिव ने सभी जिला स्तरीय एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसामान्य से जुड़े विभागों से संबंधित परिवादों के निस्तारण में परिवादियों की अधिकतम संतुष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन परिवादों के निस्तारण के बाद परिवादी की असंतुष्टि सामने आती है, उन पर जिला स्तरीय एवं विभागीय उच्चाधिकारी विशेष ध्यान दें तथा अपने स्तर से उनके संतोषजनक समाधान का प्रयास करें। साथ ही, परिवादों के निराकरण के दौरान सामने आने वाली कमियों को जानकर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि आमजन को अधिकतम राहत मिल सके।

    परिवादियों से किया सीधा संवाद
    मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परिवादियों से स्वयं संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने बीकानेर के अशोक कुमार, जयपुर के मोहनलाल तथा टोंक के आसाराम सहित अन्य परिवादियों से बातचीत की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परिवादियों की समस्याओं और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग दिनेश कुमार, आयुक्त, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग हिमांशु गुप्ता सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • नितिन नवीन बोले- राष्ट्र प्रथम रखें युवा, 100 करोड़ युवा बदल सकते हैं देश की तकदीर

    नितिन नवीन बोले- राष्ट्र प्रथम रखें युवा, 100 करोड़ युवा बदल सकते हैं देश की तकदीर

    मेरठ
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी के मेरठ में हैं। यहां सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य कन्वेंशन सेंटर में नितिन नवीन ने जेएनजी से संवाद करते हुए नितिन नवीन ने उन्हें रील के बजाय रियल में जीने की अपील की है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि युवा नशे और शॉर्टकट से दूर रहें।

    करीब 11 बजे सुभारती विवि पहुंचे नितिन नवीन ने शहीद स्मारक में पहुंचकर सबसे पहले शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद शक्ति केंद्र सम्मेलन पश्चिमी क्षेत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित किया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आजकल युवा को सबसे ज्यादा नशा और शॉर्टकट प्रभावित कर रहा है। इसलिए युवाओं को इन दोनों से बचना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नशे के खिलाफ शुरू किए गए अभियान का हवाला देते हुए दूसरों को भी नशे से बचाने की अपील की।

    सौ करोड़ निष्ठावान और ऊर्जावान युवा देश की तकदीर बदल सकते
    नितिन नवीन ने युवाओं से अपील की कि वे रील की दुनिया से बाहर निकलकर 'रियल' को जिएं और राष्ट्र प्रथम को आगे रखें। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि दुनिया में बड़े बदलाव हमेशा युवाओं के कंधों पर सवार होकर हुए हैं। भारत युवाओं का देश है और यही ताकत देश की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दे रही है। अंतरिक्ष से स्टार्टअप और खेल से तकनीक तक युवा अपनी प्रतिभा का लोहा देश-दुनिया में मनवा रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सौ करोड़ निष्ठावान और ऊर्जावान युवा देश की तकदीर बदल सकते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रत्येक कार्य में राष्ट्र प्रथम की भावना, अनुशासन एवं निरंतरता और सामाजिक समरसत को जीवन में सर्वोपरि रखने की अपील की। कार्यक्रम में मंच पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे।

    दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे नितिन नवीन का भव्य स्वागत
    आपको बता दें कि नितिन नवीन का सोमवार को उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली से मेरठ पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा से लेकर सुभारती विश्वविद्यालय तक कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन का स्वागत किया। मार्ग में जगह-जगह पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़, ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी और भाजपा के झंडे नजर आए।स्वागत कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कई स्थानों पर कतार में खड़े किए गए बुलडोजर रहे। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और मेरठ के महापौर हरिकांत अहलूवालिया की अगुवाई में खड़े किए गए बुलडोजरों से नितिन नवीन के काफिले पर पुष्पवर्षा की गई। एक स्थान पर क्रेन के जरिए माला लटकाकर भी उनका स्वागत किया गया।नवीन के मेरठ आगमन के दौरान एक्सप्रेसवे से लेकर शहर के प्रवेश मार्ग तक कई स्थानों पर कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। भाजपा अध्यक्ष का काफिला वहां पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और पुष्पवर्षा की।

  • रीवा के खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी, स्लीमनाबाद टनल का काम पूर्णता की ओर

    रीवा के खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी, स्लीमनाबाद टनल का काम पूर्णता की ओर

    स्लीमनाबाद टनल का काम पूर्णता की ओर, शीघ्र ही रीवा जिले के खेतों को मिलेगा नर्मदा जल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    रीवा में हुए बलराम कृषि महोत्सव में आए किसानों से किया संवाद

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती-किसानी विशेषकर उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती में रीवा का जवाब नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और लगन से यहां धान, गेहूं, चना, मसूर, अलसी और सोयाबीन का भरपूर उत्पादन हुआ है। इससे रीवा जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रीवा जिले में हुए बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कहा कि स्लीमनाबाद टनल का काम तेजी से पूरा होने की ओर है। इस टनल के पूरा होते ही रीवा जिले के खेतों तक नर्मदाजी का पावन जल पहुंचेगा। इससे क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि रीवावासियों को त्योंथर, लोंही, सिरमौर और सेमरिया की सिंचाई परियोजनाएं पूरी होने पर करीब एक लाख 32 हजार हैक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को बताया कि जिनके पास भूमि के पट्टे हैं परंतु रजिस्ट्री नहीं है, ऐसे सभी पट्टेधारकों को राज्य सरकार रजिस्ट्री कराकर नि:शुल्क प्रदाय करेगी। ऐसे 50 लाख पट्टों की रजिस्ट्री का शुल्क (करीब 4 हजार करोड़ रुपए) राज्य सरकार वहन करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के जनप्रतिनिधियों और 4 प्रगतिशील किसानों से आत्मीय संवाद कर उनके द्वारा परम्परागत खेती से अलावा वर्तमान में की जा रही नवाचारी खेती के बाद तब और अब के अनुभवों की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि उन्नत कृषि यंत्रों से तकनीकी खेती करने और जैविक खाद के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती करने में ज्यादा फायदा होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले भर से आए किसानों से प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, श्रीअन्न, पशुपालन और फसल विविधीकरण अपनाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए रीवा जिले में एक हजार हैक्टेयर क्षेत्र को नैचुरल फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। बसामन मामा गो-अभयारण्य हमारे गौ-संवर्धन और ग्रामीण स्वावलंबन का एक बड़ा केन्द्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौशाला में संचालित 'प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र' से यहां के सभी किसान भाइयों को जीवामृत, घन जीवामृत और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकें सीखने और अपनाने में बड़ी मदद मिल रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परम्परागत खेती से आगे बढ़कर रीवा के किसान उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रीवा में अमरूद, आंवला और कटहल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, जो यहां की कृषि विविधता को दर्शाता है। रीवा श्रीअन्न उत्पादन में भी आगे बढ़ रहा है। खेती में विविधता लाने के लिए राज्य मिलेट मिशन अन्तर्गत कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज की फसलों का विस्तार किया जा रहा है। श्रीअन्न की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ हमारे परिवारों की पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों को तेजा दशमी, डोल ग्यारस और गणेशोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं।

    रीवा में हुए बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भी किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर मप्र राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, विन्ध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पांचूलाल प्रजापति, उपाध्यक्ष प्रवीण त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रीवा श्रीमती नीता कोल, सिद्धार्थ, कपिल यार्दे, वीरेन्द्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में किसानबंधु उपस्थित थे।

     

  • चंडीगढ़ में VVIP मूवमेंट का असर, स्कूलों के बाहर सड़क पर जाम

    चंडीगढ़ में VVIP मूवमेंट का असर, स्कूलों के बाहर सड़क पर जाम

    चंडीगढ़.

    शहर में यदि कोई व्यक्ति सड़क पर गाड़ी खड़ी कर दे तो ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान कर देती है और यही नहीं उसकी गाड़ी को उठाकर ले जाती है। यह रूल्स सिर्फ आम नागरिकों पर लागू होते नजर आते हैं। बात नेताओं और वीवीआईपी की आ जाती है तो पुलिस बेबस दिखती है।

    इसका उदाहरण सोमवार को सेक्टर-26 के स्ट्रॉबेरी फील्ड स्कूल और सेंट कबीर स्कूल के बाहर देखने को मिला। स्कूलों के बाहर मेन सड़क पर दो या तीन लेन में अफसर और नेताओं की गाड़ियां खड़ी थी, जिसकी वजह से जाम में फंसकर लोग परेशान हो रहे थे।

    ट्रैफिक लाइट पड़ी बंद
    शहर में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी आमतौर पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की होती है, लेकिन बुधवार दोपहर सेक्टर-19/27 की ट्रैफिक लाइट खराब होने के बाद एक ऑटो चालक ने ट्रैफिक लाइट बंद होने और मौके पर कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होने के कारण चौराहे के आसपास सड़कों पर लंबा जाम लग गया। जाम में फंसे सैकड़ों वाहन चालकों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सवारी छोड़कर लौट रहे थे, जाम देखकर रोक दिया ऑटो
    सेक्टर-19/27 के पास ट्रैफिक लाइट खराब होने के कारण चारों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। मौके पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी नजर नहीं आया। जाम लगातार बढ़ता जा रहा था और वाहन चालक परेशान हो रहे थे। अलग-अलग दिशाओं से आ रहे वाहनों को बढ़ाकर यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास शुरू किया।