Author: NewseDay

  • 40 से 50 गायों से रोजाना 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन, डेयरी बनी परिवार की मजबूत आजीविका

    40 से 50 गायों से रोजाना 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन, डेयरी बनी परिवार की मजबूत आजीविका

    रायपुर

     पीढ़ियों से चले आ रहे गौपालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से जोड़कर लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत दोरना निवासी राजनाथ यादव ने इसे सफल डेयरी व्यवसाय का रूप दिया है। पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और बेहतर पशु प्रबंधन को अपनाकर उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को विस्तार दिया है। आज उनकी डेयरी में 40 से 50 गायों से प्रतिदिन करीब 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और यह परिवार के लिए नियमित एवं मजबूत आजीविका का साधन बनी है।

    कृत्रिम गर्भाधान से अपने फार्म में तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया

    राजनाथ यादव बताते हैं कि उनके परिवार में उनके पिता के समय से ही गौपालन किया जाता रहा है। पहले परिवार स्थानीय नस्ल की गाय और भैंस पालता था। समय के साथ उन्होंने पशुपालन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और एचएफ नस्ल की गायें खरीदीं। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से उन्नत नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराना शुरू किया।

    इसका परिणाम यह हुआ कि अब उनके डेयरी फार्म में ही बेहतर नस्ल की बछिया तैयार हो रही हैं। इससे उन्हें डेयरी के विस्तार के लिए बार-बार बाहर से गाय खरीदने की आवश्यकता कम हुई है।

    नस्ल सुधार से बढ़ा दुग्ध उत्पादन, सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफा

    राजनाथ बताते हैं कि उन्नत नस्ल की बछिया तैयार होने और पशुओं के बेहतर प्रबंधन से उनकी डेयरी की क्षमता बढ़ी है। वर्तमान में उनके पास लगभग 40 से 50 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 300 से 350 लीटर तक दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे परिवार को नियमित आमदनी मिल रही है। राजनाथ के अनुसार डेयरी व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।

    पशु चिकित्सा विभाग का मार्गदर्शन बना डेयरी विकास का आधार

    राजनाथ बताते हैं कि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर उनके पशुओं की देखरेख के लिए पहुंचते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित आवश्यक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। विभागीय सहयोग से बेहतर नस्ल की बछिया तैयार करने और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद मिली है।

    उन्नत किसान के रूप में सम्मान से बढ़ा उत्साह

    राजनाथ को उन्नत किसान के रूप में सम्मान भी मिला है, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पशुधन विकास और डेयरी गतिविधियों को मिल रहे प्रोत्साहन से पशुपालकों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर दिए जा रहे मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

    परंपरा से व्यवसाय तक का सफर

    सेवा संकल्प अभियान के तहत राजनाथ यादव की ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि परंपरागत गौपालन में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर आजीविका को नया स्वरूप दिया जा सकता है। उन्नत नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर पशु प्रबंधन और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे राजनाथ ने गौपालन को अपने परिवार के लिए व्यवस्थित और लाभकारी डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।

  • देवास के पुंजापुरा में प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से वड़नगर जा रहे सेवा संकल्प बाइक राइडर्स से करेंगे वर्चुअली संवाद

    देवास के पुंजापुरा में प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी से वड़नगर जा रहे सेवा संकल्प बाइक राइडर्स से करेंगे वर्चुअली संवाद

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत देवास जिले के पुंजापुरा में बाइक राइडर्स के साथ मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी से वडनगर के लिए निकाली गई ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ में शामिल बाइक राइडर्स से वर्चुअली संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 35.42 लाख हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 212.57 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित करेंगे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी उपस्थित रहेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ अंतर्गत वाराणसी से वडनगर तक विशेष बाइक यात्रा निकाली जा रही है, जो 17 सितंबर को वाराणसी से रवाना हुई है। यात्रा में 250 बाइकों पर 500 सेवा यात्री शामिल हैं। यात्रा विभिन्न राज्यों के अनेक जिलों एवं गांवों से होकर वडनगर (गुजरात) पहुंचेगी।

    यात्रा के दौरान सेवा, जनसंवाद और राष्ट्रीय एकता से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। यात्रा में विभिन्न स्थानों पर प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन एवं उपलब्धियों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने वाले वाहन भी शामिल हैं।

    कार्यक्रम में सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, बागली विधायक मुरली भंवरा एवं राय सिंह सेंधव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में आमजन भी सहभागिता करेंगे।

     

  • सोशल मीडिया ने प्रस्तुत किया अर्धसत्य का नया तथ्य: सीएम योगी

    सोशल मीडिया ने प्रस्तुत किया अर्धसत्य का नया तथ्य: सीएम योगी

    गोरखपु

    गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य जीवन में व्यक्ति यह तय नहीं कर पाता है कि सत्य क्या है और असत्य क्या है। आज के समय में सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने सत्य और असत्य के बीच एक नया तथ्य प्रस्तुत कर दिया है, अर्धसत्य का, जो कभी सत्य नहीं होता। ऐसी स्थितियों में पूरी दुनिया की मानवता अवसाद की शिकार है, उसके सामने चुनौती है।

    सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार अपराह्न श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में व्यासपीठ का पूजन करने के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज विज्ञान भले ही कितना ही आगे बढ़ चुका हो, लेकिन जीवन में स्थायी शांति के लिए विश्व की मानवता केवल भारत भूमि को ही देखती है। भारत भूमि पर पावन कथाओं की परंपरा कठिन चुनौतियों में व्यक्ति का मार्ग सुगम बनाने के लिए मार्गदर्शन करती है। पवित्र कथाओं के वाचन और श्रवण की परंपरा, हजारों वर्षों की विरासत को समझने का भी अवसर होती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में जब आचरण और विचार के बीच साम्यता प्रभावकारी होती है। व्यक्ति जब मनसा, वाचा, कर्मणा से एक दिशा में चलता है तो उसे सफलता प्राप्त होती है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता न रहने पर भ्रम की स्थिति पैदा होती है। क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसे लेकर भ्रम पैदा होने पर ‘न घर का, न घाट का’ वाली स्थिति बन जाती है। श्रीमद्भागवत की कथा मनुष्य के इसी भ्रम को दूर करती है।

    भक्ति, ज्ञान और निष्काम कर्म की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा

    कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेंद्रदास जी महाराज का गोरक्षपीठ में स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के वाचन और श्रवण की परंपरा 5000 वर्ष पुरानी है। भारत का श्रद्धालु इस कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति व निष्काम कर्म की प्रेरणा प्राप्त करता है। जीवन के उद्देश्य व रहस्यों को समझने के लिए यह कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। 5000 वर्ष पहले शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को इस कथा का श्रवण कराया, तबसे एक लंबा कालखंड बीत गया। सनातन संस्कृति ने सम-विषम परिस्थितियों सहित तमाम चुनौतियों का सामना किया। उत्थान-पतन की कहानियों के बीच भी यह कथा हम सबकी स्मृतियों में बची रही। यह कथा जीवन की वास्तविकता का एहसास करते हुए अज्ञानता से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

    मुख्यमंत्री के संबोधन के उपरांत व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, वृंदावन से पधारे मलूकपीठाधीश्वर श्रीमदजगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। कथा प्रतिदिन अपराह्न 3 बजे से शाम 6 बजे तक सुनाई जाएगी। इसका विराम 29 सितंबर को होगा। 

    वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली श्रीमद्भागवत महापुराण की शोभायात्रा

    श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ से पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में मुख्य मंदिर से कथा स्थल (दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार) तक शंख ध्वनि की गूंज तथा वेदपाठी विद्यार्थियों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महापुराण की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर अखंड ज्योति स्थापित की गई। पोथी प्रतिष्ठा और कथा व्यास के विराजमान होने के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य यजमान ने व्यासपीठ और कथा व्यास की पूजा की। इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी सुग्रीव किलाधीश अयोध्या के विश्वेश प्रपन्नाचार्य, रामलला सदन अयोध्या के जगद्गुरु राघवाचार्य, स्वामी श्रीधराचार्य, महंत नारायण गिरी, अवधेश दास, रामलखन दास, राजू दास, रामानंद दास, बालक दास, जयबख्श दास सहित अनेक संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

    पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

    रायपुर

    हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना ऐसा घर हो, जहां परिवार सुरक्षित वातावरण में रह सके और मौसम की चुनौतियों की चिंता न हो। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए सहायता मिल रही है, जिससे कच्चे और असुरक्षित मकानों से निकलकर अनेक परिवार अपने पक्के आशियाने में पहुंच रहे हैं।

    शहरों में योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव बताते हैं कि पक्का मकान मिलने से उनके रहन-सहन में सकारात्मक बदलाव आया है। कोरबा के पोड़ीबहार निवासी  आनंद राम लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहे थे। बारिश के दिनों में टपकती छत, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर परिवार की परेशानी बढ़ाता था। आवास स्वीकृत होने और किश्तों में सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने निर्माण शुरू किया। आज उनका पक्का घर परिवार को सुरक्षा और सुकून दे रहा है। वे इसे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव बताते हैं।

    कोसाबाड़ी की मती ललिता रजक ने भी बरसों से पक्के घर का सपना संजोया था। खराब आर्थिक परिस्थितियों के कारण मकान निर्माण कठिन था। योजना के सहयोग से उनका यह सपना पूरा हुआ और परिवार को स्थायी आवास के साथ सुरक्षा, सुविधा एवं आत्मविश्वास का अनुभव मिला। वे अपने पक्के घर को परिवार की खुशियों और सुरक्षित भविष्य का आधार मानती हैं।

    काशीनगर निवासी मती गुंजा साहू का परिवार भी लंबे समय तक कच्चे मकान में रहा। बारिश के दौरान पानी टपकने और सीलन की समस्या के साथ सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। पीएम आवास (शहरी) 2.0 के तहत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत राशि के साथ उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में सुकून से रह रहा है।

    छुरीकला नगर पंचायत के  सुनील कुमार तिवारी के परिवार की कहानी भी आवास योजना से आए बदलाव को सामने रखती है। वे मिट्टी से बने दो कमरों के मकान में पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। सीमित आय के बीच पक्का मकान बनाना कठिन था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में केंद्रांश और राज्यांश की सहायता प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका पक्का घर तैयार हुआ। वे कहते हैं कि योजना ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है।

    पथर्रीपारा निवासी  सनातन प्रसाद पाठक भी पहले कच्चे मकान में रहते थे। ठेका मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाले  पाठक के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उनका पक्का मकान तैयार हुआ और परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली। इसी क्षेत्र के  धरम लाल ध्रुव के परिवार ने भी योजना के सहयोग से अपना पक्का घर बनाया। उनका कहना है कि मजबूत छत और दीवारों वाले घर में अब परिवार सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।

    लाभार्थी परिवारों ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति योजना के संचालन तथा जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से नगरीय निकायों के आर्थिक रूप से कमजोर अनेक परिवारों को आवास निर्माण का सहारा मिल रहा है। किसी के लिए यह वर्षों पुराने सपने का पूरा होना है, तो किसी के लिए परिवार की सुरक्षा और स्थायित्व की नई शुरुआत। पक्के आशियाने के साथ इन परिवारों के जीवन में सुविधा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जुड़ रही है।

  • उद्योगों की विद्युत संबंधी समस्याओं पर एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने किया सीधा संवाद

    उद्योगों की विद्युत संबंधी समस्याओं पर एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने किया सीधा संवाद

    भोपाल

    वित्तीय वर्ष 2027-28 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव को दाखिल किए जाने से पूर्व उद्योग जगत की विद्युत संबंधी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने के लिए एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) ने बुधवार को भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में औद्योगिक संगठनों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता एमपीपीएमसीएल के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले ने की।

    औद्योगिक प्रतिनिधियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ वर्तमान कंडक्टरों को कवर्ड कंडक्टरों से बदलने, उच्च ऊर्जा एवं डिमांड चार्जेस, विद्युत चोरी एवं एटी एंड सी हानियों में कमी, न्यूनतम शुल्क समाप्त करने, एचटी श्रेणी में लोड फैक्टर आधारित ऊर्जा शुल्क व्यवस्था तथा आधारित बिलिंग सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव एवं अपेक्षाएं रखीं।

    आगामी औद्योगिक पार्कों के विकास को लेकर भी सम्मेलन में चर्चा हुई। औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और विद्युत व्यवधान तथा तकनीकी हानियों को कम करने के लिए भूमिगत विद्युत केबलिंग अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

    एमपीपीएमसीएल के मुख्य महाप्रबंधक रेवेन्यू मैनजमेंट शैलेंद्र सक्सेना ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उद्योगों से संबंधित विभिन्न टैरिफ एवं विद्युत विषयों की जानकारी दी। वहीं, मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने विभिन्न श्रेणियों के उद्योगों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों, रियायतों एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी दी।

    औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने ARR प्रस्ताव दाखिल किए जाने से पूर्व उद्योग जगत के साथ प्रत्यक्ष संवाद की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे उद्योगों से जुड़े विद्युत एवं टैरिफ संबंधी विषयों को सीधे विद्युत क्षेत्र के अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर मिला।

    एमपीपीएमसीएल के प्रबंध संचालक श्री गढ़पाले ने औद्योगिक प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए विषयों एवं सुझावों को सुना और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर व्यावहारिक समाधान की दिशा में कार्य करने पर बल दिया। सम्मेलन में उद्योग जगत और विद्युत क्षेत्र के अधिकारियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श एवं सुझावों का आदान-प्रदान हुआ। भविष्य में भी उद्योगों से संबंधित विद्युत विषयों पर निरंतर संवाद एवं समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।

    सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के करीब 25 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें ऑल इंडिया स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ एम.पी. चैंबर ऑफ कॉमर्स, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज देवास, मध्यप्रदेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन, रतलाम औद्योगिक एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज, एम.पी. स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज ऑर्गेनाइजेशन, लघु उद्योग भारती, महाकौशल उद्योग संघ तथा विंध्य चैंबर ऑफ कॉमर्स, सतना सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मध्यप्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों, मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन तथा मुख्य विद्युत निरीक्षक एवं विद्युत सुरक्षा कार्यालय के अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित रहे।

     

  • ‘जो कृष्ण का नहीं हुआ वो किसी का नहीं हो सकता’- डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर जोरदार निशाना

    ‘जो कृष्ण का नहीं हुआ वो किसी का नहीं हो सकता’- डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर जोरदार निशाना

    लखनऊ

    अयोध्या में अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ीकरण को लेकर हो रही बुलडोजर कार्रवाई का सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने विरोध किया है। जिसको लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने तीखा पलटवार किया है। ब्रजेश पाठक ने सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए अयोध्या और काशी के विकास को रोकने का दावा किया। पाठक ने अखिलेश यादव से मथुरा को लेकर उनका रुख स्पष्ट करने को भी कहा।

    ‘जो राम का नहीं हुआ वो कृष्ण का नहीं हो सकता’

    डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब यूपी में सपा सरकार थी, तुष्टीकरण की हद हो गई थी और अयोध्या-काशी के विकास को रोक दिया गया था। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी से पूछना चाहिए कि उनका मथुरा पर क्या स्टैंड है? मैंने पहले भी कहा था कि जो राम का नहीं हुआ वो कृष्ण का नहीं हो सकता। जो कृष्ण का नहीं हो सकता वो किसी का नहीं हो सकता।”

    अयोध्या-काशी के विकास पर अखिलेश को घेरा

    अखिलेश यादव की ओर से अयोध्या और काशी के विकास पर सवाल उठाए जाने को लेकर डिप्टी सीएम ने कहा कि अखिलेश यादव हमेशा अयोध्या, काशी के विकास पर सवाल उठाते हैं लेकिन एक बार वो अपने गिरेबां में झांके और बताएं जब सपा सत्ता में थी तो अयोध्या और काशी के विकास में कितना खर्च किया था।

    उन्होंने योगी सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “आज यूपी में हमारी सरकार अयोध्या को वर्ल्ड क्लास सिटी के तौर पर विकसित कर रही है। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का चोड़ीकरण किया जा रहा है। लेकिन सपा सरकार ने 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर प्रतिबंध लगाने तक का काम किया था।”

    ‘सपा को सनातन संस्कृति से कोई लेना देना नहीं’

    ब्रजेश पाठक ने सपा पर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव को सनातन संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है। ये सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण करना जानते हैं और ये अयोध्या के विकास को रोकने का रास्ता खोजते रहे हैं।”

    ‘सपा गुंडों और अपराधियों की पक्षधर पार्टी’

    ब्रजेश पाठक ने सपा पर अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सपा गुंडों और अपराधियों की पक्षधर पार्टी है। आज यूपी की सभी जेलों में खुशी मनाई जा रही है। अपराधी, गुंडे और माफिया उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अखिलेश यादव सत्ता में आएंगे तो गुंडे बाहर आ जाएंगे।” उन्होंने कहा कि सपा जब-जब सत्ता में आई है, गुंडे माफिया सड़कों पर आए हैं।

    वहीं अखिलेश यादव के चुनाव आयोग पर आरोप लगाने को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “अखिलेश यादव हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं। ये जब चुनाव जीतते हैं तो चुनाव आयोग अच्छा हो जाता है लेकिन जब हार मिलती है तो तरह-तरह के आरोप लगाते हैं।” उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से निष्पक्ष राजनीति की पक्षधर रही है।

  • रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

    रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

    रायपुर

     विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रूचि, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर द्वारा गणित शिक्षण को सरल, रूचिकर, गतिविधि-आधारित एवं रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से 22 एवं 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के नेतृत्व में किया गया।

    कार्यक्रम के प्रथम दिवस 22 सितंबर को रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान एवं गणित विषय के लगभग 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की। रायपुर जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों तथा दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया गया। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दूसरे दिन 23 सितंबर को बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें एससीईआरटी के बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बी.एड. विद्यार्थी तथा आईटीईपी के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, गतिविधि-आधारित एवं व्यावहारिक पद्धतियों से परिचित कराना रहा, ताकि वे भविष्य में कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी एवं आनंददायक तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय न बनाकर सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए भावी शिक्षकों को कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

    ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच बी. एन. राव ने प्रशिक्षण के दोनों दिवसों पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए गणित शिक्षण की नवीन एवं गतिविधि-आधारित विधियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, गणितीय खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार गणितीय अवधारणाओं को सरल और आनंददायक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल उत्तर बताने के बजाय स्वयं सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया।

    सत्र के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से वर्तमान शिक्षकों के साथ-साथ भावी शिक्षकों को भी गणित शिक्षण की नवीन पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की टीम, संबंधित अधिकारियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

     

  • एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

    एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

    रायपुर

     मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की शिकायतों की पहुंच और उनके समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त एक शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया है। 
    कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अवैध रेत खनन एवं परिवहन के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सीएम हेल्पलाइन में अवैध रेत परिवहन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर खनिज विभाग की टीम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोलबिर्रा, पथर्रा एवं मटियाडाड़ क्षेत्र में जांच एवं कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध रेत परिवहन में संलिप्त पाए गए 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया।

    जब्त किए गए सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। मामले में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के आधिकारिक डिजिटल सेवा तंत्र में शिकायत पटल और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक शासकीय सेवाओं और शिकायतों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। खनिज विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रेत परिवहन पर निगरानी और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। जिले में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • योगी सरकार में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बदलेंगे यूपी के आईटीआई, आठ शहरों के क्लस्टर में लागू होगा पीएम-सेतु मॉडल

    योगी सरकार में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बदलेंगे यूपी के आईटीआई, आठ शहरों के क्लस्टर में लागू होगा पीएम-सेतु मॉडल

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रही है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उद्योग-आधारित कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके पहले चरण में प्रदेश के आठ शहरों- कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों में उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। योजना का उद्देश्य आईटीआई में दिए जाने वाले प्रशिक्षण और उद्योगों की मौजूदा व भविष्य की कौशल जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना है। इसके लिए उद्योगों को केवल रोजगार देने वाली इकाई के बजाय प्रशिक्षण व्यवस्था के सक्रिय भागीदार के रूप में जोड़ा जाएगा। उद्योग पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मानकों को अपडेट करने, आधुनिक तकनीक और उपकरणों को शामिल करने, प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण तक में भूमिका निभाएंगे। इससे युवाओं को ऐसा कौशल उपलब्ध कराने पर जोर होगा, जिसकी सीधे उद्योगों में मांग है।

    यूपी के आठ शहरों में बनेगा इंडस्ट्री-आईटीआई इकोसिस्टम

    प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के क्रियान्वयन के लिए योगी सरकार ने कानपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और आगरा के राजकीय आईटीआई क्लस्टरों को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इन क्लस्टरों के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स (एआईपी) की पहचान और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार की मंशा है कि इन शहरों के औद्योगिक स्वरूप और स्थानीय स्तर पर रोजगार की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए। इससे आईटीआई से निकलने वाले युवाओं के कौशल और स्थानीय उद्योगों की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।

    एंकर इंडस्ट्री पार्टनर संभालेंगे अहम जिम्मेदारी

    पीएम-सेतु मॉडल की खासियत उद्योगों की सीधी भागीदारी है। प्रत्येक क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की व्यवस्था की गई है। एंकर इंडस्ट्री पार्टनर राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण मानकों को अपडेट करने, उद्योगों की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम विकसित करने और प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने में भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही आधुनिक मशीनों एवं उपकरणों की उपलब्धता, प्रशिक्षकों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, एप्रेंटिसशिप, ऑन द जॉब ट्रेनिंग, प्लेसमेंट लिंकेजेस और आरपीएल क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों में भी उद्योगों की भागीदारी होगी। यानी आईटीआई में दाखिले से लेकर प्रशिक्षण और रोजगार तक की पूरी व्यवस्था को इंडस्ट्री से जोड़ने का प्रयास होगा।

    200 से अधिक कर्मचारियों वाले उद्योग बन सकेंगे भागीदार

    उत्तर प्रदेश में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स की पहचान के लिए उद्योगों की भागीदारी आमंत्रित की गई है। ऐसे पात्र उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), उद्योग संगठन और अन्य संस्थाएं इसमें भागीदारी कर सकती हैं, जिनमें कर्मचारियों की संख्या 200 से अधिक हो। चयन में संबंधित क्लस्टर की औद्योगिक एवं कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योग की भूमिका को महत्व दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार की कोशिश प्रत्येक क्लस्टर को वहां मौजूद उद्योगों और भविष्य में पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों के अनुरूप विकसित करने की है।

    ₹60 हजार करोड़ से बदलेगी देश के आईटीआई की तस्वीर

    पीएम-सेतु के तहत अगले पांच वर्षों में देशभर के राजकीय आईटीआई के रूपांतरण के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 30 हजार करोड़ रुपये, राज्य सरकारों की 20 हजार करोड़ रुपये और उद्योगों की हिस्सेदारी 10 हजार करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इस प्रकार निवेश में केंद्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत, राज्यों की 33 प्रतिशत और उद्योगों की करीब 17 प्रतिशत होगी। योजना के तहत देशभर में करीब 1,000 राजकीय आईटीआई को हब एंड स्पोक मॉडल से विकसित करने की परिकल्पना है। इनमें लगभग 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे।

    हब एंड स्पोक मॉडल से एक-दूसरे से जुड़ेंगे आईटीआई

    पीएम-सेतु के तहत राजकीय आईटीआई को अलग-अलग संस्थानों के बजाय क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। हब एंड स्पोक व्यवस्था में किसी भौगोलिक या औद्योगिक क्लस्टर के भीतर मौजूद संस्थानों को एक एकीकृत कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में जोड़ा जाएगा। हब आईटीआई को मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक उपकरणों, उद्योग संबंधों और प्रशिक्षक विकास सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। वहीं अन्य स्पोक आईटीआई को इससे जोड़कर प्रशिक्षण की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। इससे महंगे उपकरण, प्रयोगशालाएं, विशेषज्ञ प्रशिक्षक और अन्य संसाधन केवल एक संस्थान तक सीमित न रहकर कई आईटीआई के लिए उपयोगी हो सकेंगे।

    प्रशिक्षण से प्लेसमेंट तक उद्योगों की भागीदारी

    योगी सरकार की योजना इस मॉडल के जरिए आईटीआई प्रशिक्षण को केवल कक्षा और प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय रोजगार से सीधे जोड़ने की है। उद्योगों की भागीदारी से छात्रों को एप्रेंटिसशिप और ऑन द जॉब ट्रेनिंग के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा। उद्योग क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण की जरूरत पहचानने, पाठ्यक्रम विकसित करने और प्रशिक्षित मानव संसाधन को रोजगार देने तक की प्रक्रिया में शामिल होंगे। इससे प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं और उद्योगों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने में मदद मिलने की अपेक्षा है।

    उद्योगों के साथ संवाद बढ़ाएगी योगी सरकार

    प्रदेश सरकार ने संबंधित जिलों में उद्योगों और एमएसएमई की पहचान कर उनसे संवाद स्थापित करने और पीएम-सेतु में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में भी प्रक्रिया शुरू की है। जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय उद्योगों तक पहुंच बनाने और योजना से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इस पूरी कवायद का लक्ष्य प्रदेश में आईटीआई- इंडस्ट्री इकोसिस्टम को मजबूत करना है, ताकि प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और युवाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराया जा सके।

    युवाओं के रोजगार के साथ उद्योगों को मिलेगा प्रशिक्षित मैनपावर

    पीएम-सेतु के माध्यम से योगी सरकार प्रदेश में औद्योगिक विकास और कौशल विकास को एक-दूसरे का पूरक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। योजना से एक ओर युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को उनकी जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे कानपुर से वाराणसी और मेरठ से गोरखपुर तक अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय जरूरत के अनुरूप कौशल तैयार करने का रास्ता खुलेगा। सरकार का जोर ऐसा परिणामोन्मुखी कौशल विकास तंत्र तैयार करने पर है, जिसमें सरकारी निवेश, उद्योगों की भागीदारी और संस्थागत प्रशिक्षण को एक साथ जोड़कर युवाओं को बदलती औद्योगिक एवं रोजगार आवश्यकताओं के लिए तैयार किया जा सके।

  • यूडाइज प्लस एवं प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डेटा के प्रभावी उपयोग की दी गई जानकारी

    यूडाइज प्लस एवं प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक पर तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला में डेटा के प्रभावी उपयोग की दी गई जानकारी

    भोपाल 

    राज्य शिक्षा केंद्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, यूनिसेफ एवं एनआईसी के सहयोग से 21 से 23 सितंबर तक आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित यूडाइज प्लस एवं पीजीआई इंडेक्स 2025-26 की तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का समापन हो गया। कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को यूडाइज प्लस में डेटा प्रविष्टि, सत्यापन एवं प्रबंधन तथा पीजीआई और पीजीआई-डी के माध्यम से शैक्षिक प्रदर्शन के विश्लेषण की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने डेटा की शुद्धता, प्रमाणिकता और समयबद्ध अद्यतन को प्रभावी शैक्षिक नियोजन के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यालयों से प्राप्त डेटा अब केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकताओं की पहचान, संसाधनों के बेहतर नियोजन और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्ययोजनाएं तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

    सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल ने कार्यशाला में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में बेहतर योजना निर्माण, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और निरंतर सुधार के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आंकडों और उनके विश्लेषण की बात हो तो UDISE+ और PGI इंडेक्स को समझना और उनका प्रभावी उपयोग सभी मैदानी अधिकारियों के लिए आवश्यक है। सचिव डॉ. संजय गोयल ने शैक्षणिक प्रबंधन में डेटा की भूमिका को रेखांकित करते हुए जिला अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़ों को केवल रिपोर्टिंग तक सीमित न रखते हुए विद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने और सुधार की दिशा तय करने में उपयोग करने का आह्वान किया।

    कार्यशाला में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के.पी. श्रेयस्कर, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री हरजिन्दर सिंह, अपर मिशन संचालक सुश्री काजल जावला, समग्र शिक्षा की अपर परियोजना संचालक सुश्री नंदा भलावे कुशरे, सीनियर डायरेक्टर NIC दिल्ली श्री सबा अख़् तर एवं यूनिसेफ भारत के शिक्षा विशेषज्ञ श्री गणेश निगम, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र डॉ. अरुण सिंह सहित विभागीय अधिकारी, यूनिसेफ एवं एनआईसी के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। राज्य शिक्षा केंद्र के यूडाइस प्रभारी श्री सुमनकांत जैन और प्रशासक डॉ. राकेश दुबे ने कार्यशाला का समग्र समन्वय किया।

    प्रदेश में 1.20 लाख स्कूलों का डेटा

    स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग भारत सरकार के उप महानिदेशक डॉ. पंकज के.पी. श्रेयस्कर ने UDISE+ एवं PGI से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डेटा की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रविष्टियों और शिक्षा क्षेत्र में आंकड़ों के व्यवस्थित उपयोग के महत्व पर बताया कि यूडाइज प्लस 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश में लगभग 1.20 लाख विद्यालय, 1.53 करोड़ विद्यार्थी और 7.29 लाख शिक्षकों से संबंधित आंकड़े दर्ज हैं। डॉ. श्रेयस्कर ने कहा कि इतने व्यापक स्तर पर संकलित डेटा में छोटी-सी विसंगति भी योजना निर्माण और संसाधन नियोजन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए डेटा को वास्तविक स्थिति के अनुरूप दर्ज करने और नियमित सत्यापन करना आवश्यक है।

    पीजीआई से चिन्हित होंगे सुधार के क्षेत्र

    यूनिसेफ नई दिल्ली के शिक्षा विशेषज्ञ श्री गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना, उद्देश्य एवं उपयोग विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने पीजीआई इंडेक्स के विभिन्न संकेतकों को समझने और उनके आधार पर जिलों और विद्यालयों की प्राथमिकताओं को चिह्नित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यूडाइज प्लस डेटा कैप्चर फॉर्मेट 2026-27 के प्रावधानों के साथ विद्यालय, भवन, सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों, शिक्षकों एवं अन्य मानव संसाधनों से जुड़े डेटा की जानकारी दी। डॉ. गणेश निगम ने पीजीआई की संरचना और ग्रेडिंग प्रणाली पर के बारे में जानकारी दी। प्रदेश के विभिन्न जिलों के पीजीआई रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक के प्रदर्शन का विश्लेषण कर आंकड़ों के आधार पर सुधार के क्षेत्र चिन्हित करने की प्रक्रिया समझाई गई।

    शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सांख्यिकी अधिकारी श्री संतन सिंह ने पीजीआई के विभिन्न डोमेन और संकेतकों की जानकारी दी, जबकि श्री जगदीश कुमार ने पीजीआई-डी 2025-26 के अंतर्गत 70 संकेतकों और 600 अंकों के आधार पर जिलेवार प्रदर्शन के आकलन की प्रक्रिया बताई। इस दौरान सीखने के परिणाम, प्रभावी कक्षा शिक्षण, अधोसंरचना एवं सुविधाएं, विद्यार्थी हितलाभ, विद्यालय सुरक्षा एवं बाल संरक्षण, डिजिटल लर्निंग एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

    यूडाइज प्लस मॉड्यूल का व्यावहारिक प्रशिक्षण

    NIC दिल्ली के सीनियर डायरेक्टर श्री विकास जैन एवं श्री सर्वेन्द्र तरुण द्वारा UDISE + पोर्टल का लाइव डेमो के माध्यम से उसके प्रावधान के बारे में बताया। साथ ही जिलों एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान भी किया। उन्होंने विद्यालय निर्देशिका, प्रोफाइल एवं सुविधा, शिक्षक प्रबंधन और विद्यार्थी मॉड्यूल में डेटा प्रविष्टि, अद्यतन, सत्यापन और प्रबंधन की प्रक्रिया भी समझाई। जीपीएस मैपिंग, विद्यालयों के विलय एवं बंद होने की प्रक्रिया, शिक्षक एवं विद्यार्थियों की जानकारी एवं दैनिक डेटा सिंक्रोनाइजेशन का भी प्रदर्शन किया गया।

    विश्वसनीय डेटा एवं सटीक विश्लेषण जरूरी

    संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री हरजिंदर सिंह ने UDISE+ एवं PGI इंडेक्स से प्राप्त जानकारी का उपयोग विद्यालयी शिक्षा में सुधार के लिए प्रभावी ढंग से करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और परिणामों के आकलन के लिए विश्वसनीय डेटा तथा उसके विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका है। सही और प्रमाणित डेटा बेहतर योजना, संसाधनों के प्रभावी नियोजन और लक्षित शैक्षिक सुधार का आधार है। पीजीआई एवं पीजीआई-डी रिपोर्ट का उपयोग केवल प्रदर्शन के आकलन के लिए नहीं, बल्कि सुधार के क्षेत्रों की पहचान कर साक्ष्य-आधारित कार्ययोजना तैयार करने के लिए किए जाने पर भी बल दिया गया।

    कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, अपर परियोजना समन्वयक, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, जिला प्रोग्रामर, विकासखण्ड एमआईएस समन्वयक सहित राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी उपस्थित रहे।