Author: NewseDay

  • iPhone 18 Pro Max Review: ₹1.79 लाख के फोन में क्या बदला? कैमरा और A20 Pro खास

    iPhone 18 Pro Max Review: ₹1.79 लाख के फोन में क्या बदला? कैमरा और A20 Pro खास

    इस साल ऐपल ने iPhone 18 लॉन्च नहीं किया. iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और iPhone Duo लॉन्च हुए हैं. iPhone 18 Pro सीरीज की बिक्री शुरू है, लेकिन Duo मार्केट में अक्टूबर के आखिर में आएगा. iPhone 18 Pro Max शुरुआती यूज में कैसा परफॉर्म कर रहा है इस रिव्यू में जानेंगे. साथ ही ये भी जानेंगे कि पुराने प्रो मॉडल्स के मुकाबले इस बार क्या बदला है या नहीं बदला है.

    iPhone7 सीरीज से लेकर अब तक जितने भी iPhone रिव्यू किए हैं एक पैटर्न दिखता है. ऐपल कई सालों तक एक ही डिजाइन को चलाता है और लॉन्च पर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर फोकस्ड रहता है. यही इस बार भी हुआ है. iPhone 17 Pro Max वाला ही डिजाइन है, एल्यूमिनियम यूज किया गया है और कमोबेश यूज करने पर भी iPhone 17 Pro Max जैसा ही लगता है. लेकिन… कुछ चीजें हैं जो इसे पुराने फोन से अलग बनाती हैं. जाहिर है नए पुराने में कुछ तो फर्क रखना ही होगा.

    भारत में आईफोन 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 256 जीबी मॉडल के लिए ₹1,79,900 है और यह 2TB तक स्टोरेज के साथ आता है. यानी यह फोन सिर्फ महंगा नहीं है, बल्कि ऐपल के सबसे महंगे आईफोन में से एक है.

    डिजाइन में बड़ा बदलाव नहीं
    पहली नजर में iPhone 18 Pro Max को देखकर यह बताना मुश्किल है कि यह पिछले मॉडल से कितना अलग है. 6.9 इंच का OLED डिस्प्ले, प्रोमोशन 120Hz और डायनेमिक आइलैंड अभी भी मौजूद हैं. हालांकि इस बार डायनैमिक आइलैंड छोटा है, इस वजह से डिस्प्ले एरिया थोड़ा बढ़ गया है. डिस्प्ले की क्वालिटी शानदार है और बाहर तेज रोशनी में भी स्क्रीन पढ़ने में कोई खास परेशानी नहीं होती.

    ऐपल ने इस बार एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग भी दी है, जो धूप में काफी काम आती है. लेकिन एक चीज ऐसी है जिसे इस्तेमाल करते ही महसूस किया जा सकता है – वजन.

    iPhone 18 Pro Max का वजन 249 ग्राम है. यह iPhone 17 Pro Max से ज्यादा है और लंबे समय तक एक हाथ में फोन इस्तेमाल करते हुए इसका वजन महसूस होता है. बड़े डिस्प्ले और बड़ी बैटरी के साथ यह एक समझने लायक समझौता है, लेकिन हल्का फोन चाहने वालों के लिए यह इसकी बड़ी कमी है.

    कैमरा इस फोन की सबसे बड़ी वजह है
    अगर मुझे iPhone 18 Pro Max में एक सबसे बड़ा अपग्रेड चुनना हो, तो मैं कैमरा चुनूंगा. 48 मेगापिक्सल कैमरे में वेरिएबल अपर्चर दिया गया है. यानी कैमरा सिर्फ सॉफ्टवेयर के भरोसे नहीं है, बल्कि लेंस से आने वाली रोशनी को भी ज्यादा कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए अलग-अलग अपर्चर विकल्प मिलते हैं. हालांकि ये कितना प्रैक्टिकल है और लोग इसे कितना यूज करते हैं वो आने वाले समय में ही पता चलेगा.

    अगर आपको याद हो तो कंपनी ने एक बार कैमरा कंट्रोल बटन लॉन्च किया था जो अब तक है, लेकिन इसे ज्यादातर लोग यूज नहीं करते हैं. रोजमर्रा की तस्वीरों में इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि तस्वीरों पर ज्यादा कंट्रोल मिलता है. दिन में फोटो बहुत साफ और नैचुरल आती हैं और कम रोशनी में भी कैमरा अच्छा काम करता है. लेकिन सबसे दिलचस्प बदलाव तब दिखता है जब आप कैमरा को ऑटो से बाहर निकालकर खुद सेटिंग्स इस्तेमाल करते हैं.

    पीछे तीनों कैमरे 48 मेगापिक्सल के हैं. अल्ट्रा वाइड कैमरा 120 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू देता है, जबकि टेलीफोटो कैमरा 4 गुना ऑप्टिकल जूम और ऑप्टिकल क्वालिटी 8 गुना जूम तक जाता है. डिजिटल जूम 40 गुना तक है.

    iPhone 18 Pro Max में  A20 Pro चिप है. इसमें 6-कोर सीपीयू, 7-कोर जीपीयू और 16-कोर न्यूरल इंजन दिया गया है. ऐपल ने साथ में नया वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम भी दिया है, जिसका मकसद लंबे समय तक भारी काम करने पर परफॉर्मेंस को स्थिर रखना है. ये पहला 2nm आर्किटेक्चर वाला प्रोसेसर है जो बेंचमार्क स्कोर में दूसरों से कहीं आगे हैं. लेकिन फिर से मैं कहूंगा कि परफॉर्मेंस रिपोर्ट डिटेल से फुल रिव्यू में जो लंबे समय यूज करने के बाद करूंगा.

    रोजमर्रा के इस्तेमाल में फोन बेहद तेज है. ऐप खोलना, फोटो एडिट करना, 4के वीडियो काटना या भारी गेम चलाना – कहीं भी फोन रुकता हुआ महसूस नहीं होता. लेकिन यहां एक बात और  है. नॉर्मल यूजर को A20 Pro की पूरी ताकत हर दिन महसूस नहीं होगी. यह चिप उन लोगों के लिए ज्यादा मायने रखती है जो गेमिंग, वीडियो एडिटिंग, एआई और दूसरी भारी चीजें करते हैं.

    ऐपल इंटेलिजेंस और Siri AI अभी कहानी का कमजोर हिस्सा है
    कई सालों से ऐपल आईफोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड फीचर्स तो दे रहा है, लेकिन कंपटीशन के मुकाबले पीछे है. Siri में AI काफी लंबे समय से पेंडिंग था, लेकिन अब आ चुका है. iPhone 18 Pro Max में iOS27 के साथ ऐपल इंटेलिजेंस और नया सिरी एआई दिया गया है. सिरी अब ज्यादा बातचीत करने वाला और पर्सनल एक्सपीरिएंस देने की कोशिश करता है और फोन में AI का इस्तेमाल पहले से ज्यादा जगह दिखाई देता है. लेकिन यहां मेरी उम्मीदें थोड़ी ज्यादा थीं. उम्मीद है अपडेट के साथ कंपनी इसे और बेहतर करे. कुछ हफ्ते यूज करने के बाद मैं आपको इसका भी पूरा रिपोर्ट दूंगा.

    एक और चीज जो मुझे पसंद आई
    डायनेमिक आइलैंड छोटा हुआ है और फेस आईडी के कुछ हिस्सों को डिस्प्ले के नीचे ले जाने से स्क्रीन पर ज्यादा जगह मिलती है. यह ऐसा बदलाव नहीं है जिसके लिए आप नया फोन खरीदें, लेकिन रोज इस्तेमाल में फोन थोड़ा ज्यादा साफ और आधुनिक महसूस होता है. इसके अलावा Apple ने 18 मेगापिक्सल सेंटर स्टेज फ्रंट कैमरा दिया है. इसमें ऑटोफोकस, सेंटर स्टेज और बेहतर वीडियो फीचर्स मिलते हैं. वीडियो कॉल करने वालों के लिए यह अच्छा अपग्रेड है. फोकस ट्रैकिंग भी अच्छा फीचर जो काम आ सकता है.

    अपग्रेड कैसा है?
    यहीं सवाल थोड़ा मुश्किल हो जाता है. अगर आपके पास iPhone 17 Pro Max है और आपका कैमरा, बैटरी और परफॉर्मेंस पहले से ठीक चल रहा है, तो iPhone 18 Pro Max में आने के लिए कोई एक ऐसा बदलाव नहीं है जो हर यूजर के लिए जरूरी हो.

    लेकिन अगर आप iPhone 14, 15 या उससे पुराने मॉडल से आ रहे हैं, तो अंतर काफी बड़ा महसूस होगा. आपको बेहतर कैमरा, ज्यादा तेज चिप, बेहतर बैटरी, 2TB तक का स्टोरेज ऑप्शन, बेहतर वीडियो कंट्रोल और ज्यादा कैपेबल AI फीचर्स एक साथ मिलते हैं.

    और अगर आप फोन से वीडियो बनाते हैं, कैमरा इस्तेमाल करते हैं या लंबे समय तक एक ही फोन चलाना चाहते हैं, तो iPhone 18 Pro Max ज्यादा समझ में आता है.

  • ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद मेकर्स से माफी मांग रहे बॉलीवुड के लोग, प्रोड्यूसर ने बताया कारण

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद मेकर्स से माफी मांग रहे बॉलीवुड के लोग, प्रोड्यूसर ने बताया कारण

    नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश 50 दिनों में इतिहास रच चुकी है. मेकर्स ने जो प्रॉफिट इससे कमाया है, वो हर बड़ी बजट की फिल्म से कई गुना बड़ा है. हालांकि उनका मकसद अभी पूरा खत्म नहीं हुआ है. वो चाहते हैं कि फिल्म 100 दिनों तक थिएटर्स में लगी रहे. इतनी बड़ी सक्सेस के बीच बॉलीवुड के कुछ लोग भी फिल्म के मेकर्स से माफी मांग रहे हैं. लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है? इसका खुलासा खुद प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने किया है.

    सिद्धार्थ कन्नन संग बातचीत में फिल्म हनुमान अंश प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बताया कि डायरेक्टर ने कई बड़े लोगों से इस फिल्म मैं पैसा लगाने के लिए मुलाकात की थी. हालांकि तब किसी ने उनकी मदद नहीं की. लेकिन अब चूंकि फिल्म इतनी बड़ी सक्सेस बन गई, तो वही लोग डायरेक्टर-प्रोड्यूसर को कॉल करके माफी मांग रहे हैं.

    सफलता से पहले छोड़ा साथ
    अनुप्रिया ने कहा- शुरुआत से ही, मेरे फिल्म से जुड़ने से पहले भी हनुमान अंश की टीम पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए कई लोगों के पास इनवेस्टमेंट मांगने गई थी, लेकिन किसी ने भी पैसे लगाने के लिए हामी नहीं भरी. जबकि इसके लिए बहुत बड़े इनवेस्टमेंट की जरूरत भी नहीं थी.

    'फिल्म रिलीज होने से पहले कुछ ही लोगों ने हमारा साथ दिया था, लेकिन ज्यादातर लोगों को इस प्रोजेक्ट पर भरोसा नहीं था. उन्हें लगता था कि ये छोटे बजट की फिल्म है, डायरेक्टर की ये पहली फिल्म है और कलाकार भी नए हैं. उन्हें लगा कि फिल्म आएगी और चली जाएगी. लोगों को इस फिल्म की कामयाबी पर भरोसा नहीं था.'

    बॉलीवुड को हुआ अफसोस
    प्रोड्यूसर ने आगे फिल्म की रिलीज के बाद बदले माहौल पर कहा- बहुत से प्रोड्यूसर्स ने हमसे कॉन्टैक्ट किया है, जो हमारे लिए बहुत अच्छी बात है. उन्होंने हमें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी है. कुछ तो मेरे पास आए और बोले कि सबसे पहले मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूं, क्योंकि ये फिल्म हमारे पास आई थी. हमें अफसोस है कि हम आपके साथ नहीं जुड़ पाए. ये मेरी सबसे बड़ी गलती थी.

    'आपने हमें ये एहसास कराया है कि एक छोटी फिल्म भी बहुत कुछ हासिल कर सकती है. आपने पूरी इंडस्ट्री को एक बड़ी सीख दी है. आपको जो भी मदद चाहिए, हम आपके साथ हैं. हालांकि मैं उन्हें इसके लिए दोष नहीं देती, क्योंकि उस वक्त यह बहुत छोटे बजट की फिल्म थी.'

    बात करें फिल्म हनुमान अंश की, तो इसने अभी तक 370 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का वर्ल्डवाइड कलेक्शन कर लिया है. अब ये 400 करोड़ पार जाने की तैयारी में है.

  • रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, पंजाब की 69 ट्रेनें प्रभावित

    रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर, पंजाब की 69 ट्रेनें प्रभावित

    जालंधर.

    अगर आप अगले दो-तीन दिनों में ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं या किसी सफर पर निकलने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर जांच लें, क्योंकि आपकी ट्रेन रद, डायवर्ट या लेट हो सकती है।

    रेलवे प्रशासन द्वारा साहनेवाल-अमृतसर रेल सेक्शन में लूप लाइन के निर्माण कार्य को लेकर तीन दिनों का मेगा ब्लॉक लिया गया है। इस वजह से 25 सितंबर से 27 सितंबर तक कुल 69 रेल गाड़ियों का आवागमन प्रभावित रहेगा। रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

    वैकल्पिक साधनों का उपयोग
    रेलवे डिवीजन फिरोजपुर की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार ट्रेन नंबर 74686 भगतांवाला–पट्टी तथा ट्रेन नंबर 74685 खेमकरण–पट्टी–भगतांवाला की सेवा 27 सितम्बर तक रद्द रहेगी। इस मौके पर रेलवे स्टेशन मास्टर पट्टी अरुण कुमार ने बताया कि रेलवे द्वारा यात्रियों से अपील की गई है कि उक्त अवधि के दौरान अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इस जानकारी को ध्यान में रखें कि ट्रेन सेवाएं बंद होने के कारण इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का उपयोग करना होगा।

    उन्होंने कहा कि पट्टी-खेमकरन रेल यात्रियों के लिए अहम सूचना है कि रेल सेवा 7 दिनों तक बंद रहेगी और पट्टी रूट पर दो ट्रेनें 21 से 27 सितंबर तक कैंसिल कर दी गई हैं। रेलवे विभाग ने यात्रियों को सूचित किया है कि वे ऊपर बताई गई तारीखों में इन ट्रेनों में यात्रा करने की योजना न बनाएं और अपनी यात्रा के लिए दूसरे उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करें। 

  • 26 सितंबर को बनेगा नवपंचम योग, इन 4 राशियों को धन-करियर में लाभ के संकेत

    26 सितंबर को बनेगा नवपंचम योग, इन 4 राशियों को धन-करियर में लाभ के संकेत

     वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर और आपस में बनने वाले शुभ योगों का विशेष महत्व होता है. 26 सितंबर 2026 की सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर चंद्रमा जैसे ही मीन राशि में प्रवेश करेंगे, वैसे ही कर्क राशि में विराजमान देवगुरु बृहस्पति के साथ उनका एक अत्यंत शुभ और कल्याणकारी 'नवपंचम योग' बन जाएगा.

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, भाग्य, समृद्धि और संतान का कारक माना गया है, जबकि चंद्रमा मन, सुख और आर्थिक स्थिति के प्रतीक हैं. जब गुरु और चंद्रमा एक-दूसरे से पांचवें और नौवें (त्रिकोण) भाव में स्थित होते हैं, तो नवपंचम राजयोग का निर्माण होता है. यह योग जातकों के जीवन में अपार सुख-समृद्धि, बौद्धिक क्षमता में वृद्धि और अचानक धन लाभ के योग बनाता है. आइए जानते हैं कि 26 सितंबर को बनने वाले इस नवपंचम योग से किन राशियों की किस्मत चमकने वाली है.

    वृषभ राशि (Taurus)
     आय में जबरदस्त बढ़ोतरी और इच्छाओं की पूर्ति
    कैसा रहेगा प्रभाव: चंद्रमा आपकी राशि से एकादश (आय व लाभ) भाव में संचार करेंगे.

    मिलेंगे ये फायदे
     आपकी दैनिक और मुख्य आय में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा. आय के नए-नए स्रोत बनेंगे. विदेश से जुड़ा व्यापार करने वालों को या बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने वाले लोगों को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है.

    कर्क राशि (Cancer)
     समाज में मान-सम्मान और व्यापार में बंपर मुनाफा
    कैसा रहेगा प्रभाव: गुरु आपकी ही राशि (लग्न) में हैं और चंद्रमा आपके भाग्य (नवम) भाव में विराजमान होकर यह योग बनाएंगे.

    मिलेंगे ये फायदे
     गुरु और चंद्र का यह त्रिकोण संबंध आपके भाग्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. कार्यस्थल पर आपके मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. बिजनेस में बड़े सौदे (Deals) फाइनल हो सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होगी.

    वृश्चिक राशि (Scorpio)
    अचानक धन लाभ और भाग्य का पूरा साथ
    कैसा रहेगा प्रभाव: चंद्रमा आपकी राशि से पंचम भाव में रहेंगे और गुरु आपके भाग्य (नवम) भाव में विराजमान हैं.

    मिलेंगे ये फायदे
    शेयर बाजार, पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से अप्रत्याशित धन लाभ हो सकता है. रचनात्मक और शैक्षणिक कार्यों से जुड़े लोगों को बड़ी पहचान मिलेगी. परिवार के साथ धार्मिक यात्रा के योग बन रहे हैं और मन प्रसन्न रहेगा.

    मीन राशि (Pisces)
     मानसिक शांति और करियर में बड़ी छलांग
    कैसा रहेगा प्रभाव: चंद्रमा आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में गोचर करेंगे और गुरु आपके पंचम (बुद्धि व संतान) भाव से नवपंचम संबंध बनाएंगे.

    मिलेंगे ये फायदे
    आपके लंबे समय से अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. मानसिक तनाव दूर होगा और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी. जो छात्र उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.

    नवपंचम योग के शुभ प्रभाव बढ़ाने के आसान उपाय
    – 26 सितंबर को पूर्णिमा तिथि भी है, इसलिए सुबह स्नान के बाद भगवान सत्यनारायण या श्री हरि विष्णु की पूजा करें और पीले फल/मिष्ठान का भोग लगाएं.

    – "ऊं बृं बृहस्पतये नमः" और "ऊं सोमाय नमः" मंत्रों का 108 बार जाप करें.

    – किसी जरूरतमंद को चने की दाल, हल्दी, या पीले वस्त्र का दान करना शुभ फलदाई रहेगा.

  • दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    दीनदयाल जी ने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

    शुक्रवार को मनाई गई पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती 

    मुख्यमंत्री ने 'अंत्योदय' के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर किया पुष्पार्चन

    उपाध्याय जी का चिंतन आज भी समावेशी, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण का प्रेरणास्रोत: मुख्यमंत्री

    लखनऊ
     'अंत्योदय' के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती शुक्रवार को मनाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की। 

    मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर पं. दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने लिखा कि 'एकात्म मानववाद' एवं 'अंत्योदय' के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य, श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।

    पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित विकास की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को आज भी समावेशी, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण का प्रेरणास्रोत बताया।

  • नवंबर में खुलेगा आधुनिक नक्षत्रशाला, CM योगी देखेंगे पहला शो; जानें खासियतें

    नवंबर में खुलेगा आधुनिक नक्षत्रशाला, CM योगी देखेंगे पहला शो; जानें खासियतें

    गोरखपुर
     महंत अवेद्यनाथ ज्ञान-विज्ञान पार्क और वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के पुनरुद्धार का काम पूरा होने के बाद अब उद्घाटन की तैयारियां तेज हो गई हैं। नवंबर के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नक्षत्रशाला के उद्घाटन की तैयारी है।

    उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री नक्षत्रशाला का पहला शो भी देखेंगे। इससे पहले गुरुवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने दोनों परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और निर्माण में लगी तीनों फर्मों को तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए।मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में सभी कार्य पूरे होने चाहिए, गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

    महंत अवेद्यनाथ ज्ञान-विज्ञान पार्क के निर्माण पर 18.60 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मंत्री ने प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पंधारी यादव और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निदेशक-सचिव रमेश चंद्र के साथ पार्क के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया।

    उन्होंने एन्सिएंट इंडियन साइंस गैलरी, इनोवेशन लैब, फन साइंस और स्पेस साइंस गैलरी के निर्माण की प्रगति देखी। इसके अलावा आउटडोर साइंस माडल, एंट्रेंस प्लाजा, कैफेटेरिया, पाथवे, ओपन एयर थिएटर, बस पार्किंग और डायनोटोरियम के माडल स्थापना कार्य का भी जायजा लिया।

    मंत्री ने एस्ट्रोनामी एंड इंडियन स्पेस प्रोग्राम गैलरी तथा एल्युमिनियम डोम की स्थापना की प्रगति भी देखी। कहा कि पार्क में इंटरैक्टिव साइंस माडल और आधुनिक वैज्ञानिक प्रदर्शनियों के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया है।

    46.88 करोड़ से नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण
    वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण पर 46.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निरीक्षण के बाद मंत्री ने जीडीए और निर्माण में लगी मेसर्स चंद्र इवेंट्स एंड प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स खुशी इंटरप्राइजेज तथा मेसर्स इंफोविजन टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। शेष कार्यों की समीक्षा करते हुए समयसीमा के भीतर उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए।

    मंत्री ने कहा कि आधुनिकीकृत नक्षत्रशाला में खगोल एवं अंतरिक्ष विज्ञान को नई तकनीक के माध्यम से सरल और रोचक ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। निरीक्षण के दौरान जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, मुख्य अभियंता किशन सिंह, सहायक अभियंता राजबहादुर सिंह, नक्षत्रशाला के वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

     

  • कुम्हारी में बिजली संकट, नपा के पंप हाउस और स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन कटे

    कुम्हारी में बिजली संकट, नपा के पंप हाउस और स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन कटे

    भिलाई नगर.

    कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में विद्युत विभाग ने 8 करोड़ बकाया बिल के चलते कार्रवाई करते हुए लगभग 20 प्रमुख स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया। बिजली कटने की वजह से शहर में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और खेल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान कुम्हारी नगर पालिका पर विद्युत विभाग का बकाया बिल लगभग 5 करोड़ रुपये था। समय पर भुगतान न होने और बकाया राशि जमा न किए जाने के कारण यह राशि बढ़कर अब लगभग 8 करोड़ रुपये हो चुकी है। विद्युत विभाग द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान न किए जाने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 23 सितंबर को बिजली काटने की कार्रवाई की है। बिजली कनेक्शन काटे जाने का सीधा असर स्थानीय युवाओं पर पड़ा है।

    अटल परिसर तथा बैडमिंटन कोर्ट का बिजली कनेक्शन काट दिए जाने के कारण यहां रोजाना बैडमिंटन खेलने और अभ्यास करने आने वाले दर्जनों युवा साथी खेल सुविधाओं से वंचित हो गए हैं। वहीं कुम्हारी के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक, स्टेशन चौक स्थित ओवरब्रिज के नीचे पूरी तरह से अंधेरा पसरा हुआ है, जिससे रात के समय आवाजाही करने वाले लोगों को दुर्घटना और सुरक्षा का भय सताता रहता है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगी कई स्ट्रीट लाइटें भी पिछले कई महीनों से बंद पड़ी हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

    बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा असर:
    बिजली विभाग की इस कार्रवाई की गाज शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी गिरी है। कुम्हारी के सभी सार्वजनिक शौचालयों, पंप हाउसों और अन्य लगभग 20 महत्वपूर्ण स्थानों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। पंप हाउस बंद होने से कई वार्डों में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों ने कहा है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान निकाला जाए और बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जाए।

  • एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन

    एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन

    यूपी के उत्पादों पर बढ़ा दुनिया का भरोसा, निर्यात दो लाख करोड़ के पार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
     
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ

    एक ही ई-कार्ट से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ट्रेड शो का अवलोकन
     
    मुख्यमंत्री बोले- जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है
     
    यूपी में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी, सही माहौल देकर हुनर को बाजार से जोड़ा: मुख्यमंत्री योगी
     
    टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को बनाया ग्लोबल ब्रांड: मुख्यमंत्री योगी
     
    यूपी के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर दुनिया को भरोसा: मुख्यमंत्री योगी
     
    79 उत्पादों को मिला जीआई टैग, 75 और नये उत्पादों के लिए किया गया आवेदन: मुख्यमंत्री योगी
     
    90 देशों से 600 से अधिक बायर्स पहुंचे, डेढ़ लाख बी2बी विजिटर्स के शामिल होने की संभावना

     
     ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश के परंपरागत हुनर से लेकर आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तक की ताकत शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में दुनिया के सामने दिखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदार पहुंचे हैं, जबकि 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स अपने उत्पादों के साथ ट्रेड शो में हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और यहां के उद्यमियों की विश्वसनीयता पर आज पूरी दुनिया को भरोसा है। आज प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि चार वर्षों में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो प्रदेश में तैयार होने वाले उत्पादों को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच बन गया है। पिछले वर्ष 72 देशों के 550 बायर्स इसमें शामिल हुए थे। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक बायर्स पहुंचे हैं और करीब डेढ़ लाख बी2बी विजिटर्स के आयोजन में शामिल होने की संभावना है। यह बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश के कारीगरों के हुनर, युवाओं के इनोवेशन, एमएसएमई सेक्टर और अन्नदाता किसानों की मेहनत के प्रति बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाती है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इसका उदाहरण है। यह ट्रेडिशन और टेक्नोलॉजी, हेरिटेज और इनोवेशन के साथ हुनर और बाजार की ताकत को एक साथ देखने का अवसर है।
     
    अमित शाह ने पहचानी थी परंपरागत उद्यमों की ताकत
    मुख्यमंत्री ने अमित शाह को प्रदेश के परंपरागत उद्यमों को नई पहचान देने की सोच का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के लोक कल्याण संकल्प पत्र के निर्माण के दौरान प्रदेश के परंपरागत उद्यमों की ताकत को पहचाना था। उनका मानना था कि जिस दिन उत्तर प्रदेश अपनी इस ताकत को पहचान लेगा, उसे मैन्युफैक्चरिंग के नए हब के रूप में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा। सरकार बनने के बाद इसी सोच को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के रूप में ब्रांड दिया गया। 
     
    गांव के हुनर को मिला दुनिया का बाजार
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी। जरूरत उस क्षमता को पहचानने, सही माहौल देने और उसे बड़े बाजार तक पहुंचाने की थी। आजादी के बाद दशकों तक कारीगरों को जरूरी संसाधन, सही दिशा, बाजार और मंच नहीं मिला। इसका असर यह हुआ कि नई पीढ़ी अपने पुश्तैनी हुनर से दूर होने लगी। सरकार ने जिलों, गांवों और स्थानीय क्लस्टर में मौजूद हुनर को पहचानकर आगे बढ़ने का अवसर दिया।
     
    उन्होंने कहा कि टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया। गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार के अनुरूप तैयार किया गया। एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट, फ्रेट कॉरिडोर और औद्योगिक ढांचे के विस्तार ने स्थानीय उत्पादों के लिए बड़े बाजार तक पहुंच आसान की है।
     
    79 उत्पादों को जीआई टैग, 75 और कतार में
    मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और 75 नए उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की सिल्क साड़ियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत अब करोड़ों रुपये के कारोबार वाले ब्रांड में बदल चुकी है। ओडीओपी, पीएम विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं से कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा गया है। ट्रेड शो में कारीगर और उद्यमी सीधे ग्लोबल बायर्स तक पहुंच रहे हैं।
     
    छह देशों के पवेलियन, कारोबार के नए रास्ते
    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री के रूप में जुड़े हैं। इनके विशेष पवेलियन भी लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन देशों की भागीदारी से द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी। रणनीतिक साझेदारी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ज्वाइंट वेंचर के रास्ते भी खुलेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के कई बड़े देशों के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यहां उत्पादन करने और यहीं से वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर दे रहा है।

    एक ही ई-कार्ट से शाह और योगी ने देखा ट्रेड शो
    कार्यक्रम की शुरुआत अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की। मुख्यमंत्री ने अमित शाह को फिरोजाबाद के ओडीओपी के तहत ओपल ग्लास से बनी राधा-कृष्ण की प्रतिमा भेंट की। इसके बाद दोनों नेता ई-कार्ट से ट्रेड शो में लगे स्टॉल देखने पहुंचे। अलग-अलग स्टॉल पर रुककर उत्पाद देखे और उद्यमियों से उनकी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अमित शाह की मौजूदगी में ‘एक जनपद एक व्यंजन’ ओडीओसी पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
     

    एक करोड़ से अधिक एमएसएमई दे रहीं तीन करोड़ से अधिक को रोजगार
    एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उत्तर प्रदेश का ब्रांड बन चुका है। यहां विभिन्न देशों के खरीदारों के साथ बी2बी बैठकें होंगी और प्रदेश के छोटे उत्पादों को ग्लोबल एक्सपोजर मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। ओडीओपी और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से अब तक छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण और उन्नत टूलकिट का लाभ मिला है। 14 नए ट्रेड जोड़कर अब 25 ट्रेड को प्रशिक्षण और उन्नत टूलकिट से जोड़ा गया है। उद्यमियों को बिना ब्याज और गारंटी के ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
     
    कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे मौजूद
    उद्घाटन समारोह में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, बृजेश सिंह, सांसद डॉ. महेश शर्मा और सुरेंद्र नागर समेत मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। जापान के राजदूत ओनो केईची, भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त सायमन वोंग और बेलारूस के राजदूत मिखाइल कास्को समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, विदेशी खरीदार, एग्जीबिटर्स और उद्यमी भी समारोह में शामिल हुए।

  • सड़क चौड़ीकरण में CM यादव और बहन का मकान प्रभावित होगा

    सड़क चौड़ीकरण में CM यादव और बहन का मकान प्रभावित होगा

    उज्जैन 

     सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। विस्तारीकरण मार्ग में आड़े आ रहे मकानों को तोड़ा जा रहा है। इस जद में सीएम मोहन यादव का भी मकान आ गया है। उनके पैतृक मकान का कुछ हिस्सा टूटेगा। इसके साथ ही उनकी बहन कलावती यादव का मकान भी इस जद में है।

    खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा तक चौड़ीकरण
    दरअसल, उज्जैन के खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण होना है। यह मार्ग करीब 730 मीटर लंबा है इसे 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की जद में 272 इमारतें आ रही हैं। इसमें सीएम मोहन यादव का पैतृक मकान और उनकी बड़ी बहन एवं नगर निगम सभापति कलावती यादव का घर भी शामिल है।

    मध्यप्रदेश में सिंहस्थ महाकुम्भ 2028 की तैयारी के सिलसिले में उज्जैन में बड़े पैमाने पर सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है। अब इस काम की जद में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनकी बड़ी बहन व निगम सभापति कलावती यादव का पैतृक मकान का भी आ गया है। जिसके बाद नगर निगम की टीम ने उनके मकानों की नप्ती कर लाल निशान लगा दिए हैं। उधर सीएम के परिजन भी शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं।

    बता दें कि उज्जैन में साल 2028 में लगने वाले सिंहस्थ महाकुम्भ को देखते हुए उज्जैन की प्रमुख सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसमे इंदौर रोड सहित कई स्थानों पर पुल के निर्माण किए जा रहे हैं, वहीं शहर के भीतर करीब 62 प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा शहर के सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी डैम और खान डायवर्सन सहित कई बड़े प्रोजेक्ट भी सिंहस्थ की तैयारियों का हिस्सा हैं। इसी के तहत शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर करीब 29 किमी लंबे घाट भी विकसित किए जा रहे है।

    730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना बाकी
    इसके साथ ही उज्जैन में कई मंदिरों व मस्जिदों सहित कई धर्म स्थलों के कुछ हिस्सों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है, इसमे कंठाल, तेलीवाड़ा, सर्राफा, पाटनी बाजार जैसे कुछ इलाकों में सड़कों का चौड़ीकरण पूरा हो चुका है। अब खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाली 730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसकी जद में 272 इमारतें आ रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान और उनकी बड़ी बहन नगर निगम सभापति कलावती यादव का घर भी शामिल है।

    सीएम के घर पर लगाए लाल निशान
    नगर निगम की टीम ने प्रभावित मकानों की नपती कर लाल निशान लगाए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिजनों का कहना है कि शहर के विकास और सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए वे मकान के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए तैयार हैं।

    दादा ने बनवाया था मकान
    बताया जा रहा है कि सीएम मोहन यादव के दादा रामचंद्र यादव ने वर्ष 1974 में यह मकान बनवाया था। इसी मकान में उनके दोनों बेटे पूनमचंद्र यादव और शंकरलाल यादव समेत परिवार के सदस्यों का बचपन बीता। पूनमचंद्र यादव के पांच बच्चों में नंदलाल यादव, नारायण यादव, मुख्यमंत्री मोहन यादव, ग्यारसी बाई और नगर निगम सभापति कलावती यादव शामिल हैं।

    अब यहां नहीं रहता है कोई
    हालांकि इस घर में अभी कोई नहीं रह रहा है। परिवार के सदस्य दूसरी जगह रहते हैं। लेकिन उनका आना-जाना लगा रहता है। नगर निगम की कार्रवाई को लेकर परिवार को कोई एतराज नहीं है। निगम ने लाल निशान लगा दिए हैं, जल्द ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

    किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा
    नगर निगम सभापति कलावती यादव ने कहा कि खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक होने वाले सड़क चौड़ीकरण में उनका पैतृक मकान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में रहने वाले सभी लोग उनके परिवार जैसे हैं और किसी के साथ भाजपा-कांग्रेस या हिंदू-मुस्लिम के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रभावित नागरिकों की समस्याओं को अधिकारियों से चर्चा कर दूर कराने का प्रयास किया जाएगा। सभी लोग सहयोग भी कर रहे है।

    सिंहस्थ के लिए पूरे शहर में बदल रहा यातायात ढांचा
    सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में केवल इस 730 मीटर मार्ग पर ही काम नहीं हो रहा है। शहर के कई प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण और यातायात ढांचे में सुधार की योजनाएं चल रही हैं। अगस्त में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के विभिन्न कार्यों का निरीक्षण भी किया था और अधिकारियों को निर्माण कार्य समय सीमा तथा गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों द्वारा अपने मकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रभावित हिस्से हटाने में दिए जा रहे सहयोग का भी उल्लेख किया था। कंठाल, सती गेट, गोपाल मंदिर और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी चौड़ीकरण तथा यातायात सुधार से जुड़े काम किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य पुराने शहर और नए शहर के बीच संपर्क को बेहतर बनाना और सिंहस्थ के दौरान यातायात के दबाव को व्यवस्थित करना है।

    सिंहस्थ के दौरान क्यों महत्वपूर्ण है यह मार्ग?
    उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक नगरों में शामिल है और महाकाल मंदिर के कारण यहां वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। सिंहस्थ के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में शहर के पुराने हिस्से की संकरी सड़कें, बाजार क्षेत्र, धार्मिक स्थल और घनी आबादी वाले इलाके यातायात प्रबंधन के लिहाज से चुनौती बन जाते हैं। सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा करने का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना है। चौड़े मार्ग से वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने, पैदल यात्रियों के लिए अधिक स्थान उपलब्ध कराने और आपात स्थिति में पुलिस, एंबुलेंस तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही सड़क चौड़ीकरण को केवल सिंहस्थ के कुछ महीनों की जरूरत के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन बढ़ने के साथ यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसलिए शहर में किए जा रहे कई निर्माण कार्यों का उद्देश्य सिंहस्थ के साथ-साथ लंबे समय के लिए यातायात ढांचे को मजबूत करना भी है। मुख्यमंत्री ने हाल के निरीक्षण में भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षित आवागमन को विकास कार्यों की प्राथमिकताओं से जोड़ा था।

    272 भवनों के सामने भी बदलाव की चुनौती
    सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 272 भवनों के लिए यह प्रक्रिया व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगी। पुराने शहर में कई मकान और दुकानें वर्षों से एक ही स्थान पर हैं। ऐसे में सड़क की सीमा में आने वाले हिस्से को हटाना संबंधित परिवारों और कारोबारियों के लिए आसान निर्णय नहीं होता। इसके बावजूद उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के लिए कई स्थानों पर नागरिकों और व्यापारियों द्वारा अपने निर्माण का प्रभावित हिस्सा हटाने का सहयोग सामने आया है। अगस्त में मुख्यमंत्री ने भी सड़क चौड़ीकरण के दौरान स्थानीय लोगों के सहयोग की सराहना की थी। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान का इस परियोजना में आना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह वही प्रक्रिया है जिसमें शहर के अन्य लोगों की संपत्तियां भी प्रभावित हो रही हैं। परिवार की ओर से प्रभावित हिस्सा हटाने की सहमति जताए जाने के बाद अब परियोजना के अगले चरण में नगर निगम और प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।

    विकास बनाम विरासत की चुनौती
    उज्जैन के पुराने हिस्से में सड़क चौड़ीकरण अपने साथ एक दूसरी चुनौती भी लेकर आता है। यहां बड़ी संख्या में पुराने मकान, बाजार, धार्मिक स्थल और ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतें मौजूद हैं। इसलिए सड़क का विस्तार करते समय यातायात जरूरतों के साथ पुराने शहर की पहचान और स्थानीय लोगों की संपत्तियों से जुड़े पहलुओं का संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा। खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक प्रस्तावित 730 मीटर का मार्ग इसी पुराने और घने शहर का हिस्सा है। 15 मीटर चौड़ाई हासिल करने के लिए 272 भवनों का प्रभावित होना बताता है कि परियोजना का असर काफी व्यापक है। प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि निर्माण और चौड़ीकरण का काम समय पर पूरा हो, लेकिन साथ ही प्रभावित परिवारों और दुकानदारों के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया भी पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

    उज्जैन में बड़ा आधारभूत बदलाव
    सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में जिस बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है, उसमें सड़क चौड़ीकरण महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान और उनकी बहन के घर का प्रभावित होना इस परियोजना को और चर्चा में ले आया है। फिलहाल नगर निगम की ओर से नपती और चिन्हांकन की प्रक्रिया सामने आई है और परिवार ने सार्वजनिक रूप से प्रभावित हिस्से को हटाने में सहयोग की बात कही है। आगे की कार्रवाई परियोजना की स्वीकृत सीमा, प्रशासनिक प्रक्रिया और सड़क निर्माण की प्रगति के अनुसार होगी।

    1974 में बना था मकान, CM का बचपन बीता
    प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दादा रामचंद्र यादव ने 1974 में यह मकान बनवाया था और इस मकान में ही उनके दोनों बेटे पूनमचंद्र यादव और शंकरलाल यादव सहित सभी परिजनों का बचपन बीता। पूनमचंद्र यादव के 5 बच्चे हैं। इनमें नंदलाल यादव, नारायण यादव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बेटी ग्यारसी बाई और उज्जैन की नगर निगम सभापति कलावती यादव शामिल हैं। फिलहाल, इस मकान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चाचा शंकरलाल यादव का परिवार रहता है। सड़क चौड़ीकरण में इस मकान के साथ कलावती यादव के मकान का भी करीब 15 फीट हिस्सा आ रहा है।

    'शहर के विकास के लिए प्रभावित हिस्से को तोड़ने को तैयार'
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बहन और निगम सभापति कलावती यादव का कहना है कि वे शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क चौड़ीकरण में हमारा पैतृक मकान भी आ रहा है। इस इलाके में रहने वाले सभी लोग हमारे परिवार जैसे हैं। किसी के साथ भाजपा-कांग्रेस, हिंदू-मुस्लिम के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिन नागरिकों के मकान प्रभावित हो रहे हैं, उनकी समस्याओं को अधिकारियों से चर्चा कर दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।

  • रामायण से लोककला और काशी की विरासत तक, यूपी में होंगे 3 बड़े कला शिविर

    रामायण से लोककला और काशी की विरासत तक, यूपी में होंगे 3 बड़े कला शिविर

    लखनऊ
    प्रदेश में कला और संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए पर्यटन व संस्कृति विभाग की ओर से अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में तीन बड़े कला आयोजन होंगे।

    अयोध्या में राम और रामायण की सांस्कृतिक परंपरा, लखनऊ में देश की लोक एवं पारंपरिक कला शैलियों और वाराणसी में गंगा-काशी की विरासत को कलाकार अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। इन आयोजनों में देशभर के वरिष्ठ कलाकारों के साथ युवा कलाकार और कला विद्यार्थी भी हिस्सा लेंगे।

    अयोध्या में 22 से 26 अक्टूबर तक डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के सहयोग से राम की पैड़ी और गुप्तार घाट पर राम, रामायण और अयोध्या राष्ट्रीय कार्यशाला एवं व्याख्यान श्रृंखला होगी। इसमें 25 कलाकार और 10 विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यशाला में राम, रामायण और अयोध्या की सांस्कृतिक परंपरा को कला के माध्यम से समझने और प्रस्तुत करने पर जोर रहेगा।

    लखनऊ में 18 से 22 नवंबर तक राज्य ललित कला अकादमी की ओर से लोकधारा लोक एवं पारंपरिक कला शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 35 से 40 लोक एवं पारंपरिक कला साधक हिस्सा लेंगे।

    लखनऊ और आसपास के संस्थानों के 25 चयनित वरिष्ठ कला विद्यार्थी भी शिविर में शामिल होंगे। शिविर में गोंड, भील, गोदना, पिथौरा, राजस्थानी, कोहबर और मधुबनी जैसी कला शैलियों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    वाराणसी में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में गंगा तट पर चार दिवसीय काशी फ्लो अंतरराष्ट्रीय कला शिविर एवं प्रदर्शनी होगी। इसका आयोजन गंगा महासभा और राज्य ललित कला अकादमी के संयुक्त सहयोग से किया जाएगा।