Author: NewseDay

  • सोनीपत में जमीन मालिकों को ₹1.28 करोड़ का मुआवजा

    सोनीपत में जमीन मालिकों को ₹1.28 करोड़ का मुआवजा

    सोनीपत.

    हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. इससे गांव के आसपास भी प्रॉपर्टी के दामों में खासा उछाल देखने को मिल रहा है.ऐसे में जिन जमीनों के दामल छह-सात साल पहले एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास थे, अब सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक कीमत जा पहुंची है.

    गोहाना में 1 करोड़ की जमीन अब 10 करोड़ में-
    हरियाणा में एक्सप्रेसवे और हाईवे की वजह से गांव की तस्वीर बदल रही है. दरअसल, रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी)  की ओर से दो सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं और इस वजह से आसपास की जमीन के रेट ब़ढ़ गए हैं. अब बाईपास और दो हाईवे के साथ कनेक्टिंग की वजह से नगर, बड़ौता, सिकंदरपुर माजरा और आसपास के गांवों की जमीन पर प्रापर्टी डीलरों की नजर है. यहां पर दीनदयाल आवासीय क्षेत्र भी विकसित किया जा रहा है. इस वजह से लोग भी जमीन की खरीद फरोख्त में रुचि दिखा रहे हैं. इसके अलावा, पानीपत-रोहतक हाईवे के बाईपास और गोहाना- सोनीपत हाईवे के आसपास एग्रीकल्चर लैंड है. लेकिन हाईवे और बाइपास और सेक्टरों के चलते अब जमीन की कीमतें बढ़ी हैं. क्योंकि प्राइम लोकेशन के तौर पर यह इलाका उभर रहा है. अहम बात है कि रजिस्ट्री के दौरान कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन नकद में कैश लिया जाता है. लोकेशन के अनुसार सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक जमीन के रेट पहुंच रहे हैं. हैं। हाईवे से नजदीकी, सड़क की पहुंच और प्रस्तावित शहरी विकास के कारण जमीन के भाव में अंतर है. कुछ जगह हाईवे से दूरी और जमीन की स्थिति के अनुसार भाव कम हैं.

    अवैध कब्जे के भी मामले
    उधर नगर और बड़ौता के क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आने पर जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग कार्रवाई कर चुका है. कई जगह अवैध रास्तों और निर्माणों पर बुलडोजर भी चलाया गया. क्योंकि लोग जमीन पर इसलिए भी अवैध निर्माण करने की फिराक में हैं, ताकि बाद में उंचे दाम पर खरीदफरोख्त कर सकते हैं.

    क्विक आंसर्स
    हरियाणा के गोहाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे और हाईवे के विकास के कारण छह-सात साल पहले जो जमीनें एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ बिकती थीं, उनके दाम अब बढ़कर सात से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गए हैं। रोहतक-पानीपत हाईवे के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टरों के विकास, बाईपास निर्माण, दो हाईवे की कनेक्टिविटी और दीनदयाल आवासीय क्षेत्र के विकसित होने से यह इलाका प्राइम लोकेशन बन गया है, जिससे जमीन के दाम बढ़े हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग ने नगर और बड़ौता क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग के मामलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, जिसके तहत बुलडोजर चलाकर अवैध सड़कों और निर्माण कार्यों को गिराया गया है।

  • शैक्षणिक प्रमाणपत्र पर कार्रवाई का मामला, हाईकोर्ट ने डीएसई का आदेश किया निरस्त

    शैक्षणिक प्रमाणपत्र पर कार्रवाई का मामला, हाईकोर्ट ने डीएसई का आदेश किया निरस्त

    रांची
    झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ की ओर से पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने और मानदेय नहीं देने के आदेश को निरस्त कर दिया है. डीएसइ ने संबंधित आदेश शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने का हवाला देते हुए दिया था. इससे पहले हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में मामले में सुनवाई हुई. पारा शिक्षकों की ओर से मानदेय रोकने और काम से हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गयी थी. अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान किया जाये.

    डीएसइ के आदेश को याचिका के जरिए दी गयी चुनौती
    प्रार्थी मेरी मुर्मूव अन्य की ओर से याचिका दायर कर डीएसइ के आदेश को चुनौती दी गयी थी. पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में सुनवाई के दौरान प्रार्थ की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने पक्ष रखा था.

    विवादित प्रमाणपत्र पर पारा शिक्षकों के खिलाफ हुई कार्रवाई
    इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी विद्यापीठ देवघर आदि संस्थानों से मैट्रिक व इंटरमीडिएट का सर्टिफिकेट वाले पारा शिक्षकों (कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ) पर कार्रवाई की गयी थी. उनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं बताते हुए काम से हटाने और मानदेय रोकने को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था. इसके आलोक में पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ ने पारा शिक्षकों को काम से हटाने एवं मानदेय रोकने का आदेश दिया था.

  • हरमनप्रीत-अभिषेक ने दिलाई जीत, जापान को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

    हरमनप्रीत-अभिषेक ने दिलाई जीत, जापान को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

     नई दिल्ली
    भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। टीम इंडिया एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की प्रबल दावेदार है। शनिवार को खेले गए मुकाबले में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत ने जापान को 2-0 से तो हराया, लेकिन प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा।

    अभिषेक और हरमनप्रीत सिंह के गोलों की बदौलत भारत ने जीत तो हासिल कर ली, लेकिन सच कहें तो उनका प्रदर्शन देखने लायक नहीं था। उन्होंने कई मौके गंवा दिए। कुछ पेनल्टी कॉर्नर के मौकों पर तो वे बुनियादी चीजें भी ठीक से नहीं कर पाए। यकीन करना मुश्किल है। खैर, अब यह तथ्य है कि इस जीत के साथ भारत एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में पहुंच गया है, हालांकि, उसे आगे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

    विश्व कप के बाद भारत की दमदार वापसी
    बता दें कि भारत के लिए इस साल की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी। एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम 8वें स्थान पर रही थी। इस अभियान के बाद टीम इंडिया ने सही समय पर अपनी लय वापस पा ली है। एशियन गेम्स में उन्होंने अब तक चार मैचों में चार जीत दर्ज की हैं और वर्तमान में 12 अंकों के साथ पूल ए तालिका में जापान से आगे शीर्ष पर हैं। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया (13-1), श्रीलंका (16-1) और दक्षिण कोरिया (8-2) पर शानदार जीत के साथ की। यह प्रदर्शन एशियन गेम्स में भारतीय टीम के दबदबे को दिखाता है।

    आज के मैच का ऐसा रहा हाल
    पूल ए में आज खेले गए मुकाबले की बात करें तो भारत के लिए पहले क्वार्टर में के आखिरी मिनटों में अभिषेक ने गोल करके एक शून्य से टीम इंडिया को बढ़त दिला दी। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में किसी भी टीम ने कोई गोल नहीं किया। हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे रहा। लेकिन इसके बाद तीसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने मैच के 40वें मिनट में गोल कर दिया। भारत 2-0 से आगे हो गया। हालांकि, इसके बाद चौथे क्वार्टर में कोई गोल नहीं हो सका। भारत के पास गोल करने के बहुत से मौके आए, लेकिन टीम इंडिया के खिलाड़ी चूक गए। भारत के लिए यह प्रदर्शन जीत में जरूर तब्दील हुआ लेकिन आगे आने वाले बड़े मुकाबलों में जिनमें फाइनल और सेमीफाइनल हैं, यह प्रदर्शन आईडियल बिल्कुल नहीं है।

    भारत बनाम जापान फुल टाइम स्कोर
    भारत -2

    जापान- 0

    भारत ने जापान को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

  • दिल्ली-अंबाला रूट पर रेल यातायात ठप, हजारों यात्री फंसे

    दिल्ली-अंबाला रूट पर रेल यातायात ठप, हजारों यात्री फंसे

    सोनीपत.

    दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर राजलू गढ़ी रेलवे स्टेशन के पास ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) टूटने से शुक्रवार रात रेल यातायात बाधित हो गया। लाइन टूटने और ट्रिपिंग होने के कारण अप और डाउन लाइन पर ट्रेनों का आवागमन बाधित हो गया।

    रेल यातायात बाधित होने से करीब आधा दर्जन मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन अलग अलग स्टेशनों पर खड़ी रही। जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    OHE लाइन टूटने से यात्री परेशान
    दिल्ली से चलकर अंबाला जाने वाली गाड़ी संख्या 64453 पैसेंजर ट्रेन रात 8.20 बजे जब राजलू गढ़ी स्टेशन पर पहुंची, तभी ओएचई टूट गई, इससे अप लाइन पर चार पैसेंजर ट्रेनें राजलू गढ़ी, सांदल कलां, सोनीपत और हरसाना स्टेशनों पर खड़ी रही। वहीं, सूबेदारगंज से चलकर कतरा जाने वाली जम्मू मेल को नरेला स्टेशन पर रोकना पड़ा।

  • 45 वर्षों की शांति और मानवीय सेवा के लिए न्यू जर्सी में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का सम्मान

    45 वर्षों की शांति और मानवीय सेवा के लिए न्यू जर्सी में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का सम्मान

    न्यू जर्सी
    पिछले 45 वर्षों से गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने विविध समुदायों और संस्कृतियों के बीच शांति, मानवीय मूल्यों और मानव-हृदयों के बीच आत्मीय जुड़ाव को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य किया है। न्यू जर्सी की अपनी हाल की यात्रा के दौरान उनकी साढ़े चार दशक लंबी इस मानवसेवा और शांति-निर्माण की यात्रा को न्यू जर्सी राज्य विधानमंडल तथा एडिसन और फ्रैंकलिन टाउनशिप ने औपचारिक रूप से सम्मानित किया। यह सम्मान शांति-स्थापना, जन-कल्याण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की स्वीकृति है।

    इन सम्मानों के साथ उत्तरी अमेरिका में गुरुदेव को प्राप्त नागरिक सम्मान की एक सुदीर्घ श्रृंखला में एक और अध्याय जुड़ गया है। अब तक अमेरिका और कनाडा के 54 शहरों ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के सम्मान में ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित किए हैं। ये घोषणाएँ उनके मानवीय सरोकारों, शांति के प्रयासों और अधिक सुदृढ़ एवं संवेदनशील समुदायों के निर्माण में उनके योगदान की सार्वजनिक स्वीकृति हैं।

    23 सितंबर को न्यूयॉर्क स्थित सेंट जॉन द डिवाइन कैथेड्रल में खचाखच भरे सभागार को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा, “एकाकीपन लोगों की अनुपस्थिति नहीं है; यह उस आत्मीय उपस्थिति के अनुभव का अभाव है, जिसे हृदय महसूस कर सके।”

    आंतरिक शक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक सामर्थ्य भीतर से प्रस्फुटित होता है। परिस्थितियाँ कितनी ही विषम क्यों न हों, अपने भीतर केंद्रित और संतुलित बने रहने की क्षमता ही उस शक्ति की सच्ची अभिव्यक्ति है।

    न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में अपने हालिया सार्वजनिक संवादों के दौरान गुरुदेव ने निरंतर इस विचार को रेखांकित किया कि आंतरिक कल्याण को सामूहिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। एक शांत और संतुलित व्यक्ति ही शांत परिवार की नींव रखता है, और शांत परिवारों से ही शांतिपूर्ण समुदायों का निर्माण होता है। अंततः यही आंतरिक शांति और मानवीय संवेदना मिलकर एक अधिक शांतिपूर्ण विश्व की आधारभूमि तैयार करती है।

  • सुनील कुमार की कप्तानी में भारत चैंपियन, फाइनल में ईरान को दी मात

    सुनील कुमार की कप्तानी में भारत चैंपियन, फाइनल में ईरान को दी मात

    नई दिल्ली
     भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीत लिया है। ईरान के खिलाफ हुए फाइनल में भारत को 40-34 से जीत मिली। उम्मीद के मुताबिक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले हाफ में ईरान के पास 18-17 की बढ़त थी। इसके बाद दूसरे हाफ ने टीम इंडिया ने दमदार वापसी की और गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

    सुनील कुमार टीम के कप्तान
    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम की कप्तानी सुनील कुमार कर रहे हैं। 29 साल के सुनील हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले हैं। वह 2022 एशियन गेम्स में भी टीम का हिस्सा थे। वह मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप में खेलते हैं। सुनील नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के प्रिंसिपल चीफ कमर्शियल मैनेजर के ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करते हैं।

    पीकेएल में सुनील का दमदार रिकॉर्ड
    प्रो कबड्डी लीग में सुनील यू मुंबा के लिए खेलते हैं और टीम के कप्तान भी हैं। सुनील प्रो कबड्डी लीग के इतिहास के तीसरे सबसे सफल डिफेंडर हैं। 179 मैचों में उनके 442 टैकल पॉइंट्स हैं। उन्होंने 35 सुपर टैकल किए हैं तो 27 मैचों में हाई 5 भी किया है। 2015 और 2016 में जूनियर नेशनल जीतने के बाद सुनील को पीकेएल सीजन 4 के लिए पटना पाइरेट्स ने चुना। इसके बाद में वे जयपुर पिंक पैंथर्स में चले गए। 2022 उनकी कप्तानी में जयपुर की फ्रेंचाइजी चैंपियन बनी।

    सुनील कुमार के कबड्डी का सफर उनके गांव से ही शुरू हुआ था। उनके चाचा के लड़के कबड्डी के खिलाड़ी थे। उन्हें देखकर ही सुनील ने इस खेल में कदम रखा था।

  • ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के दौरान हादसा, 3 की गई जान

    ट्रांसफॉर्मर मरम्मत के दौरान हादसा, 3 की गई जान

    बेमेतरा.

    बेमेतरा जिले के दाढ़ी थाना क्षेत्र के ग्राम हेमाबंद खार में ट्रांसफार्मर फटने से गर्म तेल की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे पिता-पुत्र एवं एक अन्य किसान की हादसे के छठवें दिन उपचार के दौरान मौत हो गई। तीनों घायलों को रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया था।

    घटना 20 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे के बीच हुई थी। हादसे में हुई ग्रामीणों की मौत पर स्थानीय विधायक और मंत्री दयालदास बघेल ने शोक जताया है। मिली जानकारी के अनुसार, बिजली बंद होने के कारण ग्राम मोहतरा निवासी किसान राधेश्याम चंद्राकर (50), उनके पुत्र छन्नू चंद्राकर (32) और किसान ईश्वर पटेल ट्रांसफार्मर देखने के लिए पहुंचे थे। वे ट्रांसफार्मर में डीओ (ड्रॉप आउट फ्यूज) चढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान ट्रांसफार्मर फट गया। तेज धमाके के साथ निकला गर्म तेल किसानों के ऊपर गिर गया, जिससे तीनों गंभीर रूप से झुलस गए। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन व ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्हें बेमेतरा जिला अस्पताल ले गए। यहां प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को रायपुर रेफर कर दिया गया। इस पर परिजन उन्हें रायपुर के निजी अस्पताल ले गए। दो दिनों तक चले इलाज के बाद भी आशाजनक सुधार नहीं होने पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने उन्हें आंबेडकर अस्पताल में शिफ्ट करा दिया था। यहां 25 सितंबर की सुबह राधेश्याम चंद्राकर और छन्नू चंद्राकर की मौत हो गई। वहीं किसान ईश्वर पटेल ने इसी दिन दोपहर में दम तोड़ दिया।

    फसल बचाने बिजली चालू करने पहुंचे थे ग्रामीण
    ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में अटल ज्योति योजना के तहत दी गई बिजली लंबे समय से बंद थी। इससे सिंचाई प्रभावित हो रही थी। ग्रामीणों ने विद्युत कंपनी के अधिकारियों को बिजली बंद होने की जानकारी देकर आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी। इसके बाद भी बिजली चालू नहीं होने पर किसान परेशान थे। किसान रामकुमार पटेल ने बताया कि इसके चलते ही तीनों खुद बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने का प्रयास कर रहे थे, इसी दौरान हादसा हो गया। मृतक पिता-पुत्र बहुत गरीब परिवार के हैं। राधेश्याम के तीन पुत्र हैं, जिनमें से एक की मौत हो गई। मृतक छन्नू के भी दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।

    अधिकारी ने शिकायत से झाड़ा पल्ला
    सीएसपीडीसीएल उप संभाग दाढ़ी में पदस्थ सहायक यंत्री चंद्रकांत साहू ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर कनिष्ठ यंत्री को भेजा गया था। विद्युत कंपनी ने उसी दिन घटना की सूचना दाढ़ी थाने में लिखित में दे दी थी। मुआवजे के लिए प्रकरण तैयार कर विद्युत कंपनी की उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि लाइन बंद होने की सूचना ऑफलाइन अथवा लिखित में नहीं दी गई थी। कॉल सेंटर में भी किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं है। ग्राम बटार में पदस्थ लाइन की देखरेख प्रेम साहू करते हैं। किसानों द्वारा बिजली बंद होने की शिकायत या सूचना विद्युत कंपनी उप संभाग दाढ़ी कार्यालय में दर्ज नहीं है। 

  • एंटी-इनकंबेंसी पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, चुनावी रिकॉर्ड पर नजर

    एंटी-इनकंबेंसी पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, चुनावी रिकॉर्ड पर नजर

    नई दिल्ली
    एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ताधारी के खिलाफ माहौल. जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा चुनाव से पहले या फिर चुनाव परिणामों के विश्लेषण में की जाती है. खासतौर पर तब, जब कोई पार्टी चुनाव में अपनी सत्ता न बचा पाई हो. लेकिन, जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से लोकसभा चुनाव ही नहीं, विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा जिस शब्द के इर्द-गिर्द होती है, वह है- प्रो इनकंबेंसी. खासकर उत्तर भारत, और उसमें भी हिंदी पट्टी वाले राज्यों में. राहुल गांधी इसे असाधारण मानते हैं. कहते हैं यह स्वाभाविक नहीं है. ये साजिश है. चुनाव आयुक्तों के खुलासे के बाद यह साबित हो गया है। 

    राहुल गांधी कहते हैं कि देश के बड़े-बड़े राजनेता एंटी-इनकंबेंसी का शिकार बने हैं. चुनाव हारते रहे हैं. लेकिन, मोदी और शाह अपने भाषणों में 50 साल, 30 साल, 15 साल सरकार में बने रहने की बात करते हैं. ऐसा क्या है कि इनके मामले में एंटी-इनकंबेंसी काम नहीं करती. वे इसके पीछे चुनाव आयोग की कथित बेइमानी को दोष देते हैं। 

    DUSU का सबक

    लेकिन, उनका ये लॉजिक हफ्ताभर पहले आए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव नतीजों (DUSU election results) में धराशायी हो जाता है. जहां कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI चारों पदों पर चारों खाने चित्त हो जाती है. उस ABVP के सामने जो लंबे अरसे दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ पर काबिज है। 

    ये भी नहीं कहा जा सकता कि चुनाव में धांधली हुई है. क्योंकि, DUSU के चुनाव तो ज्ञानेश कुमार वाला चुनाव आयोग नहीं करवाता. यानी, तमाम Gen-Z आंदोलन, पेपर लीक के मुद्दे, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बावजूद बीजेपी समर्थित ABVP अपनी बात छात्रों तक पहुंचाने में कामयाब रहता है. और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों की झड़ी लगा देने वाले राहुल गांधी की पार्टी नाकाम. ऐसा इसलिए क्योंकि, सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी से चुनाव नहीं जीता जाता. चुनाव मैनेजमेंट से जीता जाता है. जिसमें उम्मीदवारों का चयन, सत्ता पक्ष के खिलाफ गठबंधन, और भी कई गुणा-भाग काम आता है। 

    दूसरों पर एंटी-इनकंबेंसी मढ़ना भी कला
    कोई जरूरी नहीं कि किसी सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी हो ही. या, उसने ऐसा कुछ बुरा किया हो जिसे एंटी-इनकंबेंसी कहा जा सके. लेकिन, यह विपक्ष की खूबी होती है कि वह सत्ता पक्ष के सिर पर कोई ऐसा ठप्पा मढ़ दे, जो उसे जनविरोधी साबित कर दे. जैसे, 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने काफी हद तक ये नैरेटिव चलाने में कामयाबी हासिल की कि यदि नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आई तो वह संविधान बदल देगी। 

    जहां एंटी-इनकंबेंसी ‘आउट ऑफ कोर्स’ है
    राहुल गांधी अपने भाषण में राजस्थान, हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु जैसे राज्यों का हवाला देते हैं, जहां पहले हर चुनाव में वोटर सत्ताधारी पार्टी को बदल देते थे. लेकिन, बार-बार सत्ता में पार्टियों को बदलना चुनाव की आदर्श स्थिति नहीं है. इसका मतलब यह है कि उनके पास एक स्थायी ऑप्शन नहीं है. वह जल्दी-जल्दी ऊब जाते हैं. ऐसा यूपी, बिहार ही नहीं, देश के कई राज्यों में होता रहा. फिर, वोटरों को जिस भी पार्टी या नेता में उन्हें स्थायी समाधान मिला, उन्होंने लंबे समय तक उन्हें सत्ता सौंप दी। 

    जैसे, गुजरात में नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह, बिहार में नीतीश कुमार, यूपी में योगी आदित्यनाथ, त्रिपुरा में माणिक सरकार, ओडिशा में नवीन पटनायक. ये भी अलग-अलग पार्टियों के नेता था, लेकिन इन्होंने एंटी-इनकंबेंसी को ‘आउट ऑफ कोर्स’ शब्द बना दिया. यूपी में योगी को अगर ‘बुल्डोजर बाबा’ कहा जाता है, तो उसका फायदा उन्हें प्रो-इनकंबेंसी के रूप में मिलता है। 

    कुल मिलाकर, एंटी-इनकंबेंसी एक पेड़ पर लगा हुआ फल है. जिसे नेताओं को चुनाव से पहले मेहनत करके डाली पर चढ़कर तोड़ना होता है. बहुत किस्मत वालों की झोली में ही यह सीधा आकर गिरता है. होशियार सत्ताधारी अपनी एंटी-इनकंबेंसी के इस फल को पेड़ पर ही या तो सड़ा देते हैं, या फिर अपने नैरेटिव के पत्तों में छुपा लेते हैं. राहुल गांधी को एंटी-इनकंबेंसी का फायदा चुनाव से पहले मेहनत और सियासी गणित से हासिल हो सकता है. चुनाव हार गए तो सिर्फ इनकंबेंसी के एंटी बातें ही रह जाती हैं. जो राहुल फिलहाल कर रहे। हैं। 

    हालांकि, बीजेपी ने संविधान बदलने की कोई मंशा जाहिर नहीं की थी, सिवाय उसके कुछेक नेताओं के बयान के. बीजेपी ने बहुत भरोसा दिलाया कि ऐसा कुछ नहीं होगा. लेकिन, दलित वोटरों ने विपक्ष का नैरेटिव स्वीकार किया, और यूपी जैसे राज्य में बीजेपी को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 

    ‘मिस्टर बंटाधार’, ‘जंगल-राज’, ‘माफिया-राज’ का ठप्पा
    अब आते हैं कि यूपी, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की ओर जहां बीजेपी या एनडीए दल लगातार सत्ता पर काबिज हैं. बेशक, इन सरकारों के कई पहलू एंटी-इनकंबेंसी का कारण बन सकते थे. लेकिन, यहां पर बीजेपी और एनडीए दल अपने विरोधियों की पुरानी सरकारों की एंटी-इनकंबेंसी वोटरों के मनमस्तिष्क में ऐसी बैठाई है कि हर चुनाव में सत्ता पक्ष पर हमलावर होने के बजाय विपक्ष अपने खिलाफ नैरेटिव की ही सफाई देता रह जाता है। 

    मध्य प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बहुत बुरी पराजय हुई. चुनाव जीतने वाली उमा भारती ने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम रख दिया- ‘मिस्टर बंटाधार’. दिग्विजय और कांग्रेस पर यह लेबल इतना बुरा चिपका, कि अगले कई चुनावों तक बीजेपी यही दोहराती रही कि यदि कांग्रेस जीती तो मिस्टर बंटाधार वाला दौर वापस आ जाएगा. ये बिल्कुल वैसा ही है, जैसे बिहार के हर चुनाव में बीजेपी और एनडीए के नेता राजद और लालू के दौर वाले ‘जंगल राज’ की याद दिलाते हैं और यूपी के हर चुनाव में मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी के दौर का ‘माफिया राज’ चर्चा में आ जाता है. और बीजेपी के इस नैरेटिव ने उसकी कांग्रेस, राजद और सपा जैसी पार्टियों को डिफेंसिव बना दिया। 

    चैलेंजर का सरेंडर
    अब आते हैं उस ट्रेंड पर, जहां एंटी-इनकंबेंसी को भुनाना तो छोड़िए, विपक्षी दल के रूप में पार्टियों ने सत्ता पक्ष के आगे सरेंडर ही कर दिया. तमिलनाडु में कांग्रेस की सरकार आखिरी बार 1967 में बनी थी. उसके बाद वह न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, वह चैलेंजर भी नहीं रही. पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस का यही हाल हुआ. 1977 में वामपंथी दलों ने वहां की सत्ता पर ऐसा कब्जा जमाया कि वह कांग्रेस हाशिये से भी बाहर हो गई. गुजरात, ओडिशा जैसे राज्यों में भी कांग्रेस ने अपना वजूद खो दिया। 

  • डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    डीपफेक से कोर्ट तक बढ़ी चुनौती! ग्वालियर में जजों का सम्मेलन, AI और नए कानूनों पर हुई चर्चा

    ग्वालियर 

    ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि न्यायदान केवल कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है। उनके अनुसार, केवल जानना अमूर्त है, जबकि समझना उस ज्ञान का वास्तविक उपयोग है।

    उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है। सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (बॉम्बे), गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक, रजिस्ट्री के अधिकारी और चारों राज्यों के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    अनुभव से ज्यादा जरूरी नई परिस्थितियों को समझना

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा किसी निश्चित पाठ्यक्रम या सिलेबस तक सीमित नहीं है। इसका दायरा न्यायाधीश की सोच और समझ पर निर्भर करता है। वर्षों का अनुभव यह बताता है कि अतीत में क्या देखा है, लेकिन सच्ची शिक्षा यह सिखाती है कि अब तक सामने नहीं आई परिस्थितियों से कैसे निपटना है।

    उन्होंने कहा कि समाज लगातार बदल रहा है, इसलिए न्यायपालिका को भी अपने वैचारिक दायरे का विस्तार करते रहना होगा।

    डीपफेक के दौर में असली-नकली साक्ष्य पहचानना चुनौती

    तकनीक के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि आज अदालतों के सामने ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना अधिकांश न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत में नहीं किया था। सोशल मीडिया, यूट्यूब और डीपफेक तकनीक के कारण वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है।

    उन्होंने कहा कि साक्ष्य कृत्रिम हो सकते हैं और उन्हें अदालत में पेश करने वाले भी तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में न्यायपालिका को आधुनिक डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं को समझना होगा।

    पुराने कानूनों की नई व्याख्या की जरूरत

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि अपराधी जब तकनीक के इस्तेमाल में अधिक सक्षम और शातिर हो रहे हैं, तो न्यायाधीशों को भी दशकों पुराने कानूनों की व्यावहारिक और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या तलाशनी होगी।

    उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश और समाज के सामने जब भी नई चुनौतियां आई हैं, न्यायपालिका ने मजबूती से उनका सामना किया है और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभाई है।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश, मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक दिनेश चंद्र लाल सहित जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और चारों राज्यों के न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

    इन मुद्दों पर चल रहा मंथन

    •     न्यायिक शिक्षा को बदलती कानूनी और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर।
    •     जजों को कानून के साथ सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को समझने की जरूरत।
    •     न्यायिक प्रशिक्षण में निष्पक्षता, समानता और संवेदनशीलता को शामिल करने की बात।
    •     जजों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखते रहने की जरूरत।
    •     न्यायिक शिक्षा में Ethics, Logic और Psychology को शामिल करने पर जोर।
    •     DNA रिपोर्ट, वॉयस सैंपल और डिजिटल सबूतों की समझ के लिए तकनीकी प्रशिक्षण जरूरी।
    •     डिजिटल दौर में अपराधों की जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट अहम सबूत।
    •     इलेक्ट्रॉनिक सबूत की विश्वसनीयता समझने के लिए जांच और न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण जरूरी।
    •     फॉरेंसिक लैब, पुलिस जांच और जेल व्यवस्था समझने के लिए ज्यूडिशियल अधिकारियों की फील्ड ट्रेनिंग का सुझाव।
    •     मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का उल्लेख।
    •     Judicial Academy में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर।
    •     ADR और Mediation को बढ़ावा देने की जरूरत।
  • अलवर अस्पताल की मैस में गंदगी पर एक्शन, संचालक को नोटिस; तेल-मसालों के सैंपल लिए

    अलवर अस्पताल की मैस में गंदगी पर एक्शन, संचालक को नोटिस; तेल-मसालों के सैंपल लिए

    अलवर
    स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजकीय और निजी अस्पतालों के अंदर और आसपास चल रहे रेस्टोरेंट व अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की लगातार जांच की जा रही है। इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को जेल सर्किल स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की मैस का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मैस में रखी खाद्य सामग्री की स्थिति देखकर टीम भी हैरान रह गई। सीएमएचओ डॉ. योगेन्द्र शर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी दल ने मैस में रखे खाने-पीने के सामान की जांच की। इस दौरान करीब 70 किलो आटा, मैदा, बेसन, अरहर दाल और मूंग दाल में इल्लियां मिलीं। खाद्य सामग्री में इल्लियां मिलने के बाद टीम ने इन सभी सामान को मौके पर ही नष्ट करवा दिया, ताकि इनका इस्तेमाल खाने में न किया जा सके।

    फंगस लगी ब्रेड भी मिली
    जांच के दौरान मैस में फंगस लगी पुरानी ब्रेड और पाव भी मिले। टीम ने इन्हें भी मैस से हटवाया और मौके पर ही नष्ट करा दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने वहां इस्तेमाल किए जा रहे सोयाबीन तेल और मसाले के एक-एक नमूने लिए। दोनों नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्थिति और साफ होगी।

    निरीक्षण के दौरान मैस में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सुरक्षा टीम ने इस पर मैस संचालक को नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों और उनके आसपास खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर इस तरह की जांच आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।

    रेस्टोरेंट और ढाबों से भी लिए नमूने
    टेल्को सर्किल के समीप एक रेस्टोरेंट की किचन में भी साफ-सफाई ठीक नहीं मिली। संचालक को नोटिस देने के साथ रेस्टोरेंट से सर्विलांस के तहत दो नमूने लिए गए। भगत सिंह सर्किल के पास एक रसोई से सोयाबीन तेल तथा आसपास के ढाबों से लाल मिर्च पाउडर और दही के नमूने जांच के लिए लिए गए। संबंधित प्रतिष्ठानों को साफ-सफाई सुधारने के लिए इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए। इस दौरान केशव गोयल, विश्व बंधु गुप्ता, जय सिंह यादव, अशोक लखेरा, नीरज रावत, अंजली मीणा, अलका, नितेश और राजेश पूनिया मौजूद रहे।