Author: NewseDay

  • हरियाणा के BPL/AAY परिवारों के लिए बड़ी खबर, 104 लाख लीटर सरसों तेल की सप्लाई शुरू

    हरियाणा के BPL/AAY परिवारों के लिए बड़ी खबर, 104 लाख लीटर सरसों तेल की सप्लाई शुरू

    चंडीगढ़
    हरियाणा में गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरसों का तेल उपलब्ध कराने के पैकिंग प्रारूप में बदलाव किया गया है। अब इन परिवारों को पहले से निर्धारित पैक के स्थान पर 500 एमएल और एक लीटर के पैक में सरसों का तेल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों के लिए यह तेल वितरित किया जाना है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय की ओर से हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड (एचएआइसी) के प्रबंध निदेशक को जारी पत्र में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सरसों तेल की आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया तय की गई है।

    सप्लाई के 15 दिनों के भीतर एचएआइसी को भुगतान 174 रुपये प्रति लीटर की दर से किया जाएगा। इसके बाद रूटीन चक्र में भुगतान 15 दिन के बाद 180 रुपये प्रति लीटर की दर से होगा।

    15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक होगी
    विभाग के अनुसार अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में करीब 39.89 लाख बीपीएल/एएवाई परिवारों को सरसों तेल वितरित किया जाना है। अगस्त में 30 लाख लीटर, जबकि सितंबर और अक्टूबर में 37-37 लाख लीटर सरसों तेल की आवश्यकता बताई गई है।

    विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 10 से 15 अक्टूबर तक अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के लिए सभी जिलों में करीब 104 लाख लीटर सरसों तेल कानफेड के सभी फोकल प्वाइंट्स पर उपलब्ध करा दिया जाए। इसके बाद परिवहन ठेकेदार 15 से 20 अक्टूबर तक तेल की डिलीवरी डिपुओं तक करेंगे और 21 अक्टूबर 2026 से लाभार्थियों को इसका वितरण शुरू कराया जा सकेगा।

    विभाग ने आगे की व्यवस्था भी स्पष्ट की है। प्रत्येक महीने अगले माह के लिए सरसों तेल की मांग पिछले माह की 20 से 25 तारीख तक जिलों के कानफेड फोकल प्वाइंट पर भेजी जाएगी। परिवहन ठेकेदार 25 से 30 तारीख तक इसकी डिलीवरी डिपुओं तक कराएंगे और अगले महीने की एक तारीख से लाभार्थियों को वितरण शुरू कराया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सप्लाई के समय कोई भी बोतल खुली नहीं होनी चाहिए।

    इतनी बोतलों की होगी जरूरत
    माह -सरसों तेल की मात्रा -बोतलों की मात्रा
    अगस्त -30 लाख लीटर -करीब 8 लाख 500 एमएल व 26 लाख एक लीटर बोतल
    सितंबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल
    अक्टूबर -37 लाख लीटर -करीब 10 लाख 500 एमएल व 32 लाख एक लीटर बोतल

     

  • रोहित के साथी से टीम इंडिया के अंतरिम चीफ सिलेक्टर तक, जानें कौन हैं प्रज्ञान ओझा

    रोहित के साथी से टीम इंडिया के अंतरिम चीफ सिलेक्टर तक, जानें कौन हैं प्रज्ञान ओझा

    नई दिल्ली
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की चयन समिति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को अजीत अगरकर के पद छोड़ने के बाद कथित तौर पर अंतरिम इंटरीम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के लिए 24 टेस्ट मैच खेल चुके ओझा अब टीम इंडिया के आगामी दौरों के लिए स्क्वाड चुनने की अहम प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं।

    प्रज्ञान ओझा को मिली जिम्मेदारी
    हाल ही में गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए दूसरे वनडे मुकाबले से ठीक पहले प्रज्ञान ओझा ने चयन समिति के अन्य सदस्यों शिव सुंदर दास, अजय रात्रा और आरपी सिंह के साथ मिलकर मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ एक लंबी बैठक की। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के आगामी न्यूजीलैंड दौरे और बहुप्रतीक्षित टीम के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

    न्यूजीलैंड सीरीज पर ध्यान
    सेलेक्टर्स की इस बैठक का मुख्य ध्यान न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी पांच मैचों की टी20आई और वनडे सीरीज के साथ-साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम को अंतिम रूप देना था। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड दौरे पर जाने वाली इंडिया ए टीम के तीन टेस्ट मैचों के लिए भी खिलाड़ियों के चयन पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

    सचिन और रोहित से खास कनेक्शन
    पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा का अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद शानदार रहा है। वे सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक 200वें और अपने करियर के आखिरी टेस्ट मैच के हीरो रहे थे जिसमें उन्होंने 10 विकेट झटकर मैन ऑफ द मैच का खिताब जीता था। इसके अलावा, आईपीएल में वह रोहित शर्मा की कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स और मुंबई इंडियंस जैसी टीमों के लिए भी खेल चुके हैं। मैदान पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब वे भारतीय चयन समिति में इस नई भूमिका को बखूबी संभाल रहे हैं।

     

  • चंडीगढ़ मॉडल से सीखेंगे देशभर के मेयर, सुबह 5 बजे शहर का जायजा लेने की दी सलाह

    चंडीगढ़ मॉडल से सीखेंगे देशभर के मेयर, सुबह 5 बजे शहर का जायजा लेने की दी सलाह

    चंडीगढ़.

    मेयर का काम सिर्फ कार्यालय में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट लेना नहीं है। उन्हें सुबह पांच, छह या सात बजे उठकर बिना किसी अधिकारी को साथ लिए शहर की गलियों, बाजारों और पार्कों में जाना चाहिए।

    वहां देखना चाहिए कि सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं या नहीं, सड़क और नालियों की स्थिति क्या है और जनता को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जनता के बीच जितना घूमेंगे, उतना ही काम मिलेगा। यह सलाह यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने 118वें अखिल भारतीय मेयर्स काउंसिल सम्मेलन में देशभर से आए महापौरों को दी।

    कटारिया ने कहा कि जनप्रतिनिधि को जनता से सीधे जुड़ना होगा। जनसुनवाई को औपचारिकता बनाने के बजाय अधिक से अधिक लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। किसी बड़े व्यक्ति के आने पर चाय-पानी कराने में समय लगाने से बेहतर है कि आम आदमी को दो मिनट सुना जाए और उसकी समस्या के समाधान का रास्ता निकाला जाए।

  • टेनिस कोर्ट पर बड़ा उलटफेर: चीन ओपन से सबालेंका की विदाई, अलकराज सेमीफाइनल में

    टेनिस कोर्ट पर बड़ा उलटफेर: चीन ओपन से सबालेंका की विदाई, अलकराज सेमीफाइनल में

     बीजिंग
     विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर काबिज एरिना सबालेंका को रविवार को चीन ओपन के तीसरे दौर में चेक गणराज्य की निकोला बार्तुनकोवा ने सीधे सेटों में हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

    विश्व रैंकिंग में 34वें स्थान पर काबिज बार्तुनकोवा ने चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन सबालेंका को करीब डेढ़ घंटे में 6-4, 6-3 से मात दी। इसके साथ ही टूर्नामेंट के पहले ही सप्ताह में दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ी बाहर हो गईं।

    हाल ही में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी बनीं एलेना रिबाकिना शनिवार को ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई थीं और अब सबालेंका के बाहर होने के साथ बीजिंग में जारी डब्ल्यूटीए-1000 प्रतियोगिता से दोनों शीर्ष वरीय खिलाड़ियों की विदाई हो गई है। पि

    छले महीने यूएस ओपन में रिबाकिना के हाथों खिताब की हैटट्रिक से चूकने वाली सबालेंका ने पहले सेट में पांच ब्रेक पाइंट गंवाए। बीजिंग में उनका संघर्ष जारी रहा। 28 वर्षीय बेलारूसी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में कभी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सकी हैं। अब बार्तुनकोवा का सामना आस्ट्रिया की 24 वर्षीय सिंजा क्राउस से होगा, जिन्होंने इससे पहले दयाना यास्त्रेम्स्का को 6-1, 6-4 से हराया।

    अलकराज सेमीफाइनल में पहुंचे
    शीर्ष वरीयता प्राप्त कार्लोस अलकराज ने रविवार को जापान ओपन के सेमीफाइनल में जगह बना ली। चार महीने तक कलाई की चोट के कारण कोर्ट से दूर रहने के बाद उनकी शानदार वापसी जारी है। अलकराज ने अंतिम चार में जगह बनाई, क्योंकि उनके क्वार्टर फाइनल प्रतिद्वंद्वी डेनिस शापोवालोव को कूल्हे की चोट के कारण मुकाबले के दौरान रिटायर होना पड़ा।

    गत चैंपियन अलकराज 82 मिनट के खेल के बाद 7-6 (4), 2-1 से आगे थे, तभी कनाडाई खिलाड़ी ने मुकाबले से हटने का फैसला किया। अलकराज ने पिछले सप्ताह लेवर कप में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने सिंगल्स मुकाबले में टेलर फ्रिट्ज को हराकर यूरोप को खिताब दिलाने में मदद की थी।

    शापोवालोव ने पहले सेट में कड़ा मुकाबला किया और 5-4 के स्कोर पर सेट पाइंट भी हासिल किया। अलकराज ने शानदार ड्राप शाट लगाकर इस खतरे को टाला और इसके बाद प्रभावशाली टाईब्रेक जीतकर सेट अपने नाम कर लिया। सेमीफाइनल में अलकराज का सामना हमवतन जाउमे मुनार से होगा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    नई दिल्ली

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. वह अब भी अपने पद पर बने रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सस्पेंड करने का आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. जी हां, चुनाव आयोग और एसआईआर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज ज्ञानेश कुमार मामले पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    दरअसल, चुनाव आयोग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि अगर अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया तो देश जल उठेगा. याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है। 
    इस पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट सही भी हो सकती है और गलत भी. हम इस मामले को देख रहे हैं. सीजेआई सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली तीन जजों में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। 

    क्या है पूरा विवाद?
    मामला मुख्य रूप से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)से जुड़े फैसलों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग के कुछ फैसले ऐसे तरीके से लिए गए, जिनमें आयोग के अन्य दो सदस्यों, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या जानकारी नहीं थी। याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े कई फैसलों और आदेशों को लेकर दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है। हालांकि, यह आरोप अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं हुए हैं और निर्वाचन आयोग का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग नामक संवैधानिक संस्था में निहित है। उनका कहना है कि CEC आयोग के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन वे स्वयं पूरे आयोग के स्थान पर निर्णय लेने की शक्ति नहीं रखते।

    याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की?
    पटना निवासी राकेश कुमार सिंह और दिल्ली के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें CEC के कामकाज पर सवाल उठाते हुए विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच की मांग की गई है। एक याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने को अंतरिम राहत के तौर पर मांगा गया था। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने SIR तथा उससे जुड़े फैसलों को चुनौती दी है। दूसरी याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निलंबन क्यों नहीं किया?
    सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि केवल मीडिया रिपोर्टों या आरोपों के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ तत्काल अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने पहले निर्वाचन आयोग से जवाब और संबंधित रिकॉर्ड मांगने का रास्ता चुना है। पीठ ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से कानून के मुताबिक काम करने की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि विवादित फैसले सर्वसम्मति से, बहुमत से या केवल CEC द्वारा लिए गए थे। इससे आगे की सुनवाई में निर्णय प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर महत्वपूर्ण बहस हो सकती है।

    कोर्ट ने दिया अहम संकेत
    सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि यदि यह पाया जाता है कि निर्वाचन आयोग के किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो अदालत उस फैसले पर आगे कार्रवाई कर सकती है। यानी सोमवार का आदेश CEC को क्लीन चिट नहीं है। अदालत ने केवल तत्काल निलंबन जैसी अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार किया है और मामले में जवाब मांगा है। यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना है, लेकिन उन्हें गलत भी नहीं ठहराया है। मामले की अगली प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के जवाब और अदालत के सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।

    SIR भी विवाद के केंद्र में
    इस पूरे विवाद की एक बड़ी कड़ी मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ी है। याचिकाकर्ताओं ने SIR की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि यदि यह प्रक्रिया निर्धारित कानूनी अधिकार और प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी, तो उससे जुड़े फैसलों और कदमों को निरस्त किया जाए। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ निर्णय और चुनावी सॉफ्टवेयर या दिशानिर्देशों में किए गए बदलाव आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना किए गए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने पहले कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना असामान्य नहीं है और उसके आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं।

    अब आगे क्या होगा?
    सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद अब निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। खासतौर पर यह स्पष्ट करना होगा कि जिन फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वे किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और उनमें CEC तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की क्या भूमिका थी। अदालत यह भी देख सकती है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के तहत आयोग के सामूहिक निर्णय की क्या सीमा है और CEC की अध्यक्षीय भूमिका तथा आयोग की सामूहिक शक्ति के बीच कानूनी अंतर किस तरह लागू होता है।

    ECI से मांगा जवाब
    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि CEC ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे और सुप्रीम कोर्ट ने उनके तत्काल निलंबन का अंतरिम आदेश नहीं दिया है। साथ ही, मामले की न्यायिक जांच जारी रहेगी और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा गया है। इसलिए सोमवार का आदेश मामले का अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि आगे की सुनवाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। यानी, ‘CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी’ कहना भी सही नहीं होगा और ‘कोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया’ कहना भी गलत होगा। सही स्थिति यह है कि अदालत ने तत्काल अंतरिम निलंबन से इनकार करते हुए निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है और आरोपों की जांच का रास्ता खुला रखा है।

    मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम बातें
        मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' के किसी भी बदले हुए वर्शन को मंजूरी नहीं दी है।

        पीठ ने पूछा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित कर दिया जाता है तो निर्वाचन आयोग का कामकाज कौन संभालेगा और “चुनाव कौन कराएगा?” पीठ ने कहा कि किसी भी आदेश से पहले संबंधित पक्षों का जवाब लेना आवश्यक है।

        सीजेआई ने कहा कि कानून अनिवार्य है और कोर्ट उम्मीद करता है कि उसका पालन किया जाएगा। यदि कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो कोर्ट संबंधित फैसलों को निरस्त कर सकता है।

        जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सवाल किया कि क्या प्रतिवादियों को सुने बिना ऐसा आदेश पारित किया जा सकता है।
        उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि कोई निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था तो कोर्ट उस निर्णय पर रोक लगा सकता है और उसे अधिकारातीत (ultra vires) घोषित कर सकता है। लेकिन केवल इस आधार पर कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए थे, प्रतिवादियों को सुने बिना निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    क्या है मामला?
    कोर्ट वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में यह तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग, जो कई सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था है, उसे मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा है।

    यह विवाद एक अंग्रेजी अख की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार मतदाता सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

    SC की अहम टिप्पणी
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि संबंधित फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो कोर्ट उन आदेशों को रद्द कर देगा. कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए केंद्र और ECI से जवाब मांगा है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। 

  • SING FORUM में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं पर CM साय ने की चर्चा, निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा

    SING FORUM में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं पर CM साय ने की चर्चा, निवेशकों को दिया सहयोग का भरोसा

    रायपुर.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन SING FORUM के मंच पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया और उन्हें छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने राज्य की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया.

    साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब खनिज और पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, नवाचार और वैश्विक निवेश के लिए भी तेजी से उभर रहा है. सरकार संसाधनों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सिंगापुर की तकनीकी दक्षता और शहरी विकास का अनुभव छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता के साथ मिलकर नई विकास संभावनाएं खोल सकता है. राज्य सरकार निवेशकों को अनुकूल नीतिगत वातावरण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

    बैठक में टेक्नोलॉजी एंव प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, औद्योगिक अधोसंरचना और शहरी विकास के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा हुई. साय ने कहा कि छत्तीसगढ़-सिंगापुर साझेदारी से निवेश के साथ रोजगार, कौशल विकास और तकनीकी हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिलेगा.

  • फ्री बस सफर के लिए दस्तावेज जरूरी, दिल्ली की क्लस्टर बसों में महिला यात्रियों-कंडक्टरों के बीच दिखी नोकझोंक

    फ्री बस सफर के लिए दस्तावेज जरूरी, दिल्ली की क्लस्टर बसों में महिला यात्रियों-कंडक्टरों के बीच दिखी नोकझोंक

    नई दिल्ली
    'भैया, हमारे पास दिल्ली का आधार कार्ड नहीं है, फ्री टिकट दे दो ना…', 'दो स्टॉप पर ही जाना है, पिंक कार्ड घर पर भूल आए', 'आधे पैसों में टिकट दे दो भैया', दिन के करीब 11:45 पर मधु बिहार से महरौली जा रही क्लस्टर बस में रविवार को कुछ इसी तरह की आवाजें सुनाई दीं। महिलाओं के मुफ्त सफर को लेकर नए नियमों के बीच टिकट लेने के दौरान महिला यात्री और कंडक्टर आमने-सामने नजर आए। कोई मुफ्त यात्रा के लिए दस्तावेज दिखाने की बात कर रहा था तो कोई पिंक कार्ड घर पर छूट जाने का हवाला दे रही थी।

    • बस में चढ़ते ही महिलाओं की ओर से मुफ्त सफर को लेकर सवाल शुरू हो गए। कंडक्टर एक-एक यात्री को समझाने और टिकट काटने में उलझे रहे थे।
    • कई बार एक महिला को समझाने में इतना समय लग रहा था कि पीछे खड़े यात्रियों को इंतजार करना पड़ा।
    • कंडक्टर का कहना था कि सिर्फ उन्हें ही मुफ्त टिकट मिलेगा जिने पास पिंक कार्ड है।
    • एनबीटी रिपोर्टर से कंडक्टर ने कहा कि उन्हें पहले यह देखना पड़ रहा है कि महिला यात्री मुफ्त सफर की पात्रता पूरी करती है या नहीं, इसके बाद ही टिकट जारी किया जा रहा है।

        यह आदेश जारी हो चुके हैं। इस बीच बस कुछ पुरुष यात्रियों की टिप्पणी से महिलाओं में नाराजगी दिखी।

    दूसरे राज्य की महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत
    नई व्यवस्था से सबसे अधिक परेशानी उन महिलाओं को हो रही है जो दूसरे राज्यों से हैं और दिल्ली में रहती हैं या काम करती हैं। महिलाओं ने बताया कि वे दिल्ली में लंबे समय से रह रही हैं, लेकिन उनके पास दिल्ली का आधार कार्ड या मांगे जा रहे दस्तावेज नहीं है। ऐसे में उन्हें मुफ्त यात्रा का लाभ लेने में दिक्कत आ रही है। एनसीआर के शहरों से दिल्ली आकर रहने वाले लोगों की भी यही शिकायत थी। एक महिला यात्री ने कहा कि हम कई साल से दिल्ली में रह रहे हैं। अगर किसी दस्तावेज की जरूरत है तो इसकी जानकारी पहले से साफ तौर पर मिलनी चाहिए।

     

  • एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने हर खिलाड़ी को दी बधाई

    एशियन गेम्स में भारत का दमदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने हर खिलाड़ी को दी बधाई

    नई दिल्ली
    एशियन गेम्स-2026 खत्म हो चुके हैं और भारत ने कुल 85 मेडल्स के साथ अपना सफर खत्म किया। हालांकि, पिछले संस्करण के मुकाबले ये संख्या काफी कम है, लेकिन मेडल टैली में भारत फिर भी चौथे स्थान पर रहने में सफल रहा। इस सफलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी है।

    भारत ने चीन में खेले गए पिछले एशियन गेम्स में कुल 106 मेडल जीते थे। इस बार भारतीय खिलाड़ी 100 के आस-पास भी नहीं पहुंच सके। भारत के हिस्से कुल 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। भारत ने इस बार कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं जिनमें आर्चरी और मुक्केबाजी सहित हॉकी ने अहम योगदान दिया।

    पीएम मोदी की बधाई
    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए खिलाड़ियों के जुनून, जज्बे की सराहना की है और हर किसी को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, "एशियन गेम्स-2026 खत्म हो गए हैं और ऐसे में मैं भारतीय दल के हर सदस्य को प्रतिबद्धता, जुनून और बेहतरीन खेल भावना के साथ इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बधाई देता हूं। सभी मेडल विजेताओं को बधाई जिनकी सफलता ने देश को खुशी के पल दिए। उम्मीद करता हूं कि इन खेलों में मिली सफलता आने वाले सालों में कई और उपलब्धियों को प्रेरित करेगी। उम्मीद करता हूं कि ये उपलब्धियां जमीनी स्तर पर खेलों को मजबूत करने में योगदान देंगी।"
     
    आखिरी दो दिन में हुआ कमाल
    भारत ने इन खेलों में आखिरी दो दिन में शानदार कमाल किया और 11 गोल्ड मेडल अपने नाम किए जिससे मेडल टैली में उसके स्थान में गजब का इजाफा हुआ। भारत पहले टॉप-10 में नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे भारतीय खिलाड़ियों ने मेडल जीते और भारत को आगे बढ़ने का मौका दिया। चीन 341 मेडल के साथ पहले स्थान पर रहा जिसमें 169 गोल्ड, 89 सिल्वर और 83 ब्रॉन्ज मेडल हैं। उसके बाद मेजबान जापान है जिसने कुल 269 मेडल जीते हैं। इसमें से जापान के हिस्से 83 गोल्ड, 95 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं। साउथ कोरिया कुल 160 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है। इस देश के हिस्से 39 गोल्ड, 43 सिल्वर और 68 ब्रॉन्ज मेडल आए हैं।

  • मोकामा के नए रेल पुल को CRS की हरी झंडी, उत्तर-दक्षिण बिहार के बीच रेल परिचालन होगा आसान

    मोकामा के नए रेल पुल को CRS की हरी झंडी, उत्तर-दक्षिण बिहार के बीच रेल परिचालन होगा आसान

     पटना
    मोकामा में गंगा नदी पर राजेंद्र पुल के समानांतर बनाए गए नए डबल लाइन रेल पुल के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है।

    रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), पूर्वी सर्किल कोलकाता गुरु प्रकाश ने शनिवार व रविवार को नवनिर्मित पुल, राजेंद्रपुल-हाथीदह ऊपर-रामपुर डुमरा रेलखंड तथा टाल स्टेशन का दो दिवसीय संरक्षा निरीक्षण पूरा कर लिया।

    सीआरएस से प्राधिकार प्राप्त होते ही नया रेल पुल माल और यात्री ट्रेनों का परिचालन के लिए सोमवार से उपलब्ध हो गया है। रविवार रात रेलवे की इस उपलब्धि की जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने इंटरनेट मीडिया हैंडल एक्स पर साझा की।

    रेल मंत्री नए रेल पुल पर ट्रायल का एक वीडियो पर पोस्ट किया है। रविवार को नए पुल से ट्रेन का अलग अलग स्पीड में ट्रायल किया गया। जिसके बाद रविवार रात सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट दी।

    करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह नया रेल पुल वर्तमान राजेंद्र सेतु के समानांतर, पटना छोर की तरफ करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है।

    इस पर दोहरी रेल लाइन बिछाई गई है। करीब 15.5 किलोमीटर लंबे पूरे प्रोजेक्ट में गंगा नदी पर 1.9 किलोमीटर का मुख्य पुल शामिल है। मुख्य पुल में गंगा के ऊपर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं। इसके अलावा 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ लघु पुल, दो सड़क उपरि पुल और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है।

    एक पुराने पुल के साथ दो नई लाइनें, अब गंगा पर कुल तीन लाइनें
    नए डबल लाइन पुल के चालू होने के बाद पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेलवे परिचालन जारी रहेगा। इस तरह राजेंद्र पुल क्षेत्र में कुल तीन रेल लाइनों की उपलब्धता हो जाएगी।

    इससे मोकामा-राजेंद्र पुल रेलखंड की क्षमता में बड़ी वृद्धि होगी और उत्तर तथा दक्षिण बिहार के बीच ट्रेनों के संचालन को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    नए पुल के दोनों छोर के स्टेशन वर्तमान रेल नेटवर्क से ही जुड़े रहेंगे। उत्तर दिशा में हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा तथा दक्षिण दिशा में राजेंद्रपुल और बरौनी स्टेशन से इसका संपर्क रहेगा। नए पुल का निर्माण इस तरह किया गया है कि मौजूदा पुल के एप्रोच में न्यूनतम बदलाव करना पड़े।

    उत्तर-पूर्व के लिए भी मजबूत होगा रेल संपर्क
    नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के बीच रेल संपर्क को भी मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त दोहरी लाइन उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन में भी सुविधा होगी।

    रेलवे के अनुसार, इस परियोजना के बाद इस क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता में अनुमानतः 2.5 गुना तक वृद्धि हो सकती है।

    अतिरिक्त रेल लाइन मिलने से ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा। मालगाड़ियों के परिचालन में समय और लागत कम होने की उम्मीद है, जिसका असर व्यापारिक गतिविधियों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही पर भी पड़ेगा।

  • IT रेड पर रकुल प्रीत सिंह ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 20 साल

    IT रेड पर रकुल प्रीत सिंह ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 20 साल

    बॉलीवुड की टैलेंटेड एक्ट्रेस रकुल प्रीत सिंह और उनके ससुर वासु भगनानी बीते कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में हैं. दरअसल, टैक्स चोरी और फिल्मों के नाम पर विदेशों में पैसे भेजने के मामले में उनका नाम सामने आया था, जिसके सिलसिले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT) ने छापेमारी भी की थी. अब रकुल प्रीत सिंह ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है.

    क्या बोलीं रकुल?
    रकुल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट शेयर करके सफाई दी है. उन्होंने कहा कि वो बीते कई सालों से रेगुलरली टैक्स भर रही हैं और उनका किसी भी विदेशी लेन-देन से ताल्लुक नहीं है.

    एक्ट्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा- यह काफी दुखद है कि खुद को रिपोर्टर कहने वाले और कुछ मैनस्ट्रीम मीडिया के पत्रकारों में बिना फैक्ट्स चेक किए ही खबरों को सनसनीखेज बनाकर पेश करने का चलन बढ़ता जा रहा है.

    'इसलिए हमेशा के लिए सच साफ बता देती हूं. वो रेड यानी तलाशी मुझसे जुड़ी हुई नहीं थी. यह बात सब जान लें कि मैं आर्म्ड फोर्सेस बैकग्राउंड से हूं और इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉडफादर नहीं था. मैं कड़ी मेहनत से आगे आई हूं और एक जिम्मेदार, कानून मानने वाली नागरिक के तौर पर 20 साल की उम्र से अपना टैक्स भर रही हूं.'

    रकुल ने अपनी सफाई देते हुए आगे कहा कि वो किसी भी प्रोडक्शन हाउस की तरफ से किसी भी तरह के गैर-कानूनी विदेशी लेन-देन का हिस्सा नहीं हैं. रकुल बोलीं- मैं यह भी कहना चाहूंगी कि देश या विदेश में कहीं भी मेरे पास किसी की कोई बेनामी संपत्ति नहीं है. न ही कभी किसी ने मुझे कोई प्रॉपर्टी गिफ्ट में दी है और न ही मैं सिद्धांतों के तौर पर ऐसे महंगे तोहफे स्वीकार करती हूं.

    रकुल ने की खास अपील
    मीडिया संस्थानों से अपने पोर्टल से गलत जानकारी वाली खबरें हटाने की अपील करते हुए रकुल ने कहा- मैं उन सभी से गुजारिश करती हूं, जिन्होंने ये झूठी और मनगढ़ंत खबरें छापी हैं, वो इन्हें तुरंत हटा लें और सही फैक्ट्स सामने लाएं. मैं समझती हूं कि मीडिया बिजनेस चलाने वालों पर कमर्शियल प्रेशर होता है, लेकिन यह सब फैक्ट्स की कीमत पर नहीं हो सकता. किसी दूसरे की इमेज या रोजी-रोटी की कीमत पर तो बिल्कुल भी नहीं.

    रकुल प्रीत सिंह की बात करें तो वो जल्द ही नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' में शूर्पणखा के किरदार में नजर आएंगी. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में दिखाई देंगे. यह फिल्म दीवाली 2026 के मौके पर रिलीज होगी