Author: NewseDay

  • चांदी की कीमत में ₹16000 की कमी, सोना भी नहीं बचा: क्या है बाजार की स्थिति?

    चांदी की कीमत में ₹16000 की कमी, सोना भी नहीं बचा: क्या है बाजार की स्थिति?

     इंदौर 

    सोना-चांदी की कीमतें क्रैश (Gold-Silver Price Crash) होने का सिलसिला जारी है. बजट के दिन भर-भराकर टूटने के बाद सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुएं और सस्ती (Gold-Silver Cheaper) हो गईं. एक ओर जहां 1 Kg Silver Price झटके में करीब 16,000 रुपये गिर गया, तो वहीं दूसरी ओर 10 Gram 24 Karat Gold का वायदा भाव एमसीएक्स पर 4000 रुपये से ज्यादा कम हो गया. 

    इतना रह गया 1 किलो चांदी का भाव
    चांदी की कीमतें बीते सप्ताह के गुरुवार को इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के पार निकलने के बाद से ही लगातार क्रैश (Silver Price Crash) हो रही हैं. रविवार को Budget 2026 वाले दिन करीब 9 फीसदी से ज्यादा टूटने के बाद सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जब MCX पर कमोडिटी ट्रेडिंग की शुरुआत हुई, तो चांदी खुलते ही और भी सस्ती हो गई. 

    बीते कारोबारी दिन सिल्वर प्राइस तगड़ी गिरावट और फिर रिकवरी के बाद अंत में 2,65,652 रुपये पर क्लोज हुआ था और सोमवार को जैसे ही कारोबार ओपन हुआ, तो ये गिरकर 2,55,652 रुपये प्रति किलो पर आ गया और फिर इसके कुछ ही मिनटों बाद ये 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि चांदी वायदा 15,943 रुपये और सस्ती हो गई.

    अपने हाई से अब इतनी सस्ती Silver
    चांदी में जिस रफ्तार से बीते कुछ दिनों में तेजी देखने को मिली थी, उससे तेज रफ्तार इसके फिसलने की है. बता दें कि पिछले गुरुवार को एमसीएक्स पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी के वायदा भाव ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते 4,20,048 रुपये के नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था, लेकिन इस स्तर से अब तक Silver Price 1,70,335 रुपये कम हो चुका है. 

    सोने का भी चांदी जैसा हाल
    Silver Price Crash होने से साथ ही सोना भी धड़ाम नजर आ रहा है. बजट वाले दिन ये भी 13,000 रुपये तक टूट गया था, हालांकि फिर थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली थी. रविवार को ये 1,47,753 रुपये के लेवल पर क्लोज हुआ था और सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही ये फिसलकर 1,43,321 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. यानी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 4432 रुपये तक सस्ता हो गया. 

    हाई से अब कितना सस्ता Gold
    सोने की कीमत ने भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए बीते गुरुवार को अपना नया हाई लेवल छुआ था और तूफानी तेजी के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गई थी. इस स्तर पर पहुंचने के बाद Gold Rate बिखरता हुआ चला गया और अब तक ये 49,775 रुपये सस्ता मिल रहा है. 

  • बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

    बलोच विद्रोह की चुनौती: BLA के सामने क्यों कमजोर पड़ती दिख रही है पाकिस्तानी फौज?

    लाहौर 
    बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन यहां सालों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. बलूच लोग खुद को पाकिस्तानी सरकार से अलग मानते हैं. अपने संसाधनों पर ज्यादा हक मांगते हैं. इस आंदोलन की मुख्य ताकत है बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), जो पाक सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रही है. बीएलए को पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है, लेकिन बलूच इसे आजादी की लड़ाई बताते हैं. 

    बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) क्या है?

    बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक बलूच राष्ट्रवादी सशस्त्र संगठन है, जो बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने के लिए लड़ रहा है. बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला और अविकसित प्रांत है, प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज और तटीय संपत्तियों से समृद्ध है.

    BLA और स्थानीय लोग दावा करते हैं कि पाकिस्तान सरकार इन संसाधनों का शोषण करती है, जिसका फायदा स्थानीय बलूच लोगों को नहीं मिलता. BLA का कहना है कि बलूचों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित किया जा रहा है. वे इसके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं.

    पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने BLA को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जबकि BLA खुद को बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाला संगठन मानता है.

    बलूचों के पास कितने लड़ाके हैं?

    बलूच अलगाववादियों की कुल संख्या का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि ये संगठन गुप्त रूप से काम करती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे रहते हैं. बलूचिस्तान में कई समूह सक्रिय हैं, जैसे बीएलए, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF), बलूच राष्ट्रीय सेना (BNA) और यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA). इनमें से बीएलए सबसे बड़ा और सक्रिय है.

    बीएलए के लड़ाकों की अनुमानित संख्या: 2020 में बीएलए के करीब 600 सक्रिय लड़ाके बताए जाते थे. लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3000 हो गई है. बीएलए के कुल सदस्य कई हजार हैं, जिसमें लड़ाके, समर्थक और भर्ती करने वाले लोग शामिल हैं. ऑपरेशन हेरोफ में 3000 से ज्यादा बलूच लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं. 

    अन्य बलूच समूहों के लड़ाके: बीएलएफ ने 2025 में दावा किया कि उसके 42 लड़ाके मारे गए, लेकिन कुल संख्या का अनुमान नहीं है. जेयश अल-अदल जैसे अन्य समूहों के 500-600 लड़ाके हैं. सभी बलूच अलगाववादी समूहों के लड़ाकों की संख्या 5000 से 10000 के बीच हो सकती है, लेकिन यह बदलती रहती है क्योंकि भर्ती और नुकसान दोनों होते हैं. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसने 2025-2026 में 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया है. 

    सही संख्या ज्यादा या कम हो सकती है क्योंकि ये छिपकर काम करते हैं. बलूच युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भर्ती किया जाता है, जहां वे राष्ट्रवाद और पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों की कहानियां सुनाते हैं.

    BLA की चोट के बाद पाकिस्तानियों का उठ गया भरोसा 

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी हिंसक टकराव के बीच अब देश के भीतर से ही सेना और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं. पाकिस्तानी पत्रकार ओसामा बिन जावेद ने अपने लेख में साफ कहा है कि पाकिस्तान की सेना अकेले बलूचिस्तान के लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर सकती.

    पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में BLA के कोऑर्डिनेटेड हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इन झड़पों में करीब 200 लोग मारे गए, जिनमें 31 आम नागरिक, 17 सुरक्षाकर्मी और 145 BLA लड़ाके शामिल हैं. इनमें से 100 से ज्यादा लड़ाके सिर्फ एक दिन में मारे जाने का दावा किया गया. हालांकि, सेना ने BLA के उस दावे को खारिज किया है जिसमें 84 सुरक्षाकर्मियों की मौत की बात कही गई थी.

    ओसामा बिन जावेद लिखते हैं कि बलूचिस्तान की पहाड़ियों में लड़ी गई यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही नाराजगी, राजनीतिक भेदभाव और आर्थिक अन्याय की कहानी है. उन्होंने किसी सूत्र के हवाले से कहा है, "एक मिलिट्री एक मिलिटेंट को खत्म कर सकती है, लेकिन किसी शिकायत को खत्म नहीं कर सकती."

    BLA पाकिस्तान सरकार के लिए आतंकी नेटवर्क

    पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि सरकार जहां BLA को सिर्फ एक आतंकी नेटवर्क के तौर पर देखती है, वहीं बलूच समाज के कई लोग इन्हें अपने बेटे और भाई मानते हैं जिन्होंने हथियार उठा लिए हैं.

    पत्रकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि हालिया हिंसा में आम लोगों की मौत इस विद्रोह की सबसे दुखद सच्चाई को उजागर करती है, क्योंकि यह लड़ाई उन्हीं लोगों को नुकसान पहुंचा रही है जिनके नाम पर इसे लड़ा जा रहा है. उन्होंने पाकिस्तान सरकार की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसमें हर हमले के पीछे "विदेशी साजिश" और "भारत के उकसावे" की बात कही जाती है. ओसामा के मुताबिक, इस नैरेटिव से असली मुद्दे राजनीतिक हाशिए पर डालना, गरीबी और संसाधनों की लूट दब जाते हैं.

    चाय की दुकानों पर होती है गरीबी की चर्चा

    लेख में यह भी कहा गया है कि बलूचिस्तान जैसे खनिज संपन्न प्रांत में आज भी गरीबी क्यों है, यह सवाल आम लोग चाय की दुकानों पर फुसफुसाकर पूछते हैं. ग्वादर पोर्ट और 46 अरब डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को भी कई स्थानीय लोग विकास का वरदान नहीं, बल्कि इस्लामाबाद और बीजिंग के फायदे का सौदा मानते हैं.

    पाकिस्तानी सेना के खिलाफ BLA की रणनीति क्या है?

    बीएलए पाकिस्तानी सेना से सीधे टकराव से बचती है क्योंकि सेना की ताकत ज्यादा है. यह एसिमेट्रिक वॉरफेयर की रणनीति अपनाती है, जिसमें छोटे-छोटे हमले करके दुश्मन को थकाया जाता है. यह रणनीति अफगानिस्तान में तालिबान की तरह है, जहां हिट-एंड-रन का इस्तेमाल होता है. बीएलए की रणनीति समय के साथ विकसित हुई है. 

    गुरिल्ला युद्ध की मुख्य रणनीतियां

    हिट-एंड-रन हमले और घात: बीएलए लड़ाके पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर सेना की चौकियों, गश्ती दलों और काफिलों पर अचानक हमला करते हैं. वे IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी घरेलू बम, रॉकेट और छोटे हथियारों का इस्तेमाल करते हैं. फिर जल्दी भाग जाते हैं ताकि सेना जवाब न दे सके.

    आत्मघाती हमले: मजीद ब्रिगेड आत्मघाती बम हमले करती है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं. ये हमले सेना के कैंपों, चेकपोस्टों और महत्वपूर्ण जगहों पर होते हैं. 2025 में ऐसे कई हमले हुए, जैसे नोशकी और पंजगुर कैंपों पर, जहां बीएलए ने तीन दिन तक इलाका कब्जे में रखा.

    कॉर्डिनेटेड अटैक: बीएलए एक साथ कई जगहों पर हमला करती है ताकि सेना की ताकत बंट जाए. जैसे ऑपरेशन हेरोफ (ब्लैक स्टॉर्म), जिसका दूसरा चरण 2026 में शुरू हुआ. इसमें 10 शहरों में हमले हुए. राजमार्ग बंद किए गए और पाकिस्तानी झंडे हटाकर बलूच झंडे लगाए गए. 2025 में बीएलए ने 521 हमलों का दावा किया, जिसमें 1060 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. 
     
    टारगेट: बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना, पुलिस, बुनियादी ढांचे (जैसे गैस पाइपलाइन, रेलवे), चीनी परियोजनाओं (सीपीईसी) और गैर-बलूच निवासियों को निशाना बनाती है. वे चीनी इंजीनियरों और मजदूरों पर हमले करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान उनके संसाधनों का शोषण कर रहा है. 

    डिजिटल और प्रचार रणनीति: बीएलए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है. टेलीग्राम, व्हाट्सएप और रंबल जैसे प्लेटफॉर्म पर वे हमलों के वीडियो, प्रचार सामग्री और शहीदों की कहानियां शेयर करते हैं. इससे भर्ती आसान होती है. वे स्थानीय शिकायतों का फायदा उठाते हैं, जैसे जबरन गायब करना और संसाधनों का शोषण.

    जब बढ़े हमले: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

    हाल के विकास: 2025-2026 में बीएलए की रणनीति ज्यादा आक्रामक हुई है. ऑपरेशन हेरोफ में उन्होंने ड्रोन, टावर और वाहन नष्ट किए. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि ये हमले भारत की मदद से हो रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं दिया. बीएलए का लक्ष्य लंबे समय तक छोटे हमलों से सेना को थकाना है, फिर बड़ा हमला (ब्लिट्ज) करके इलाका कब्जा करना.

    क्या प्रभाव पड़ रहा है?

    यह संघर्ष बलूचिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है. पाकिस्तानी सेना बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चला रही है, लेकिन अलगाववाद रुक नहीं रहा. विशेषज्ञ कहते हैं कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी; राजनीतिक बातचीत और विकास की जरूरत है.

    बलूचिस्तान में अशांति के कारण

    बलूचिस्तान में दशकों से चल रहा यह विद्रोह कई कारणों से भड़क रहा है…

        आर्थिक शोषण: बलूचिस्तान के संसाधनों का दोहन बिना स्थानीय लोगों को लाभ दिए किया जा रहा है.
        राजनीतिक हाशिए पर: बलूच लोगों को उनके अधिकारों और स्वायत्तता से वंचित रखा गया है.
        मानवाधिकार उल्लंघन: अमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, हजारों बलूच कार्यकर्ता, पत्रकार और छात्रों को जबरन गायब किया गया या मार डाला गया.

     

     

  • राजस्थान में ₹2,585 प्रति क्विंटल है समर्थन मूल्य,  शुरू हुई गेहूं की सरकारी खरीद

    राजस्थान में ₹2,585 प्रति क्विंटल है समर्थन मूल्य, शुरू हुई गेहूं की सरकारी खरीद

    जयपुर.

    राजस्थान के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। रबी विपणन सीजन 2026-27 के तहत गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया आज 1 फरवरी से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। भारत सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर और सुनिश्चित मूल्य मिल सकेगा।

    राज्य सरकार ने खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली लागू की है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुसार किसान 1 फरवरी से 25 जून 2026 तक गेहूं बिक्री के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवा सकेंगे। इसके लिए “गेहूं खरीद के लिए किसान रजिस्ट्रेशन पोर्टल” शुरू किया गया है। किसान घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं या फिर नजदीकी ई-मित्र केंद्र की सहायता ले सकते हैं। पंजीकरण के लिए अद्यतन जन आधार कार्ड अनिवार्य रखा गया है।

    सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। किसानों द्वारा बेचे गए गेहूं का पैसा सीधे जन आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान में देरी की समस्या भी नहीं आएगी। विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपने बैंक खाते को जन आधार से लिंक करा लें।

    राज्य में गेहूं की खरीद 10 मार्च से 30 जून 2026 तक की जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में 383 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर भारतीय खाद्य निगम (FCI), राजफेड, तिलम संघ, नाफेड, एनसीसीएफ तथा इस वर्ष से राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से खरीद की जाएगी। सभी केंद्रों पर सुचारु व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    किसानों को पंजीकरण, खरीद तिथि और अन्य सूचनाएं एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएंगी। किसी भी समस्या या जानकारी के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 14435 जारी किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान को उसकी उपज का सही मूल्य समय पर मिले और खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।

  • खुलने वाला है राज! साध्वी प्रेम बाईसा मौत केस में आश्रम पहुंची SIT-FSL टीम

    खुलने वाला है राज! साध्वी प्रेम बाईसा मौत केस में आश्रम पहुंची SIT-FSL टीम

    जोधपुर

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। इस मामले की तह तक जाने के लिए गठित SIT की टीम पूरी सक्रियता के साथ जांच में जुटी हुई है। इसी कड़ी में एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम भी आज एक बार फिर साध्वी के आश्रम पहुंची, जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आश्रम परिसर से अहम साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, ताकि मौत की असल वजह का पता लगाया जा सके।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कारण का नहीं हुआ खुलासा

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साध्वी की मौत का साफ कारण नहीं निकल पाया है। मगर मेडिकल सूत्रों के मुताबिक उनकी छोटी और बड़ी आंत में लाल निशान मिले हैं, जो अक्सर जहर के असर से होते हैं। अगर सच में जहर का शक सही है, तो आगे की जांच में यह साफ होगा। अब उनके आंतरिक अंगों (जैसे फेफड़े, यकृत, गुर्दा, आंत) की रासायनिक जांच हो रही है। FSL की रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि शरीर में कोई जहरीला पदार्थ था या नहीं और अगर था, तो वह कैसे पहुंचा।

    पुलिस ने आश्रम के बाहर दो अस्थालाइन की बोतलें भी बरामद की हैं। इसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या साध्वी को अस्थमा की दिक्कत थी। अस्थमा के मरीजों को अक्सर डेक्सोना इंजेक्शन दिया जाता है, जो स्टेरॉयड है और फेफड़ों की सूजन कम करता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में यह खतरनाक भी हो सकता है।

  • ‘संस्कृति की पहचान और अपनत्व का प्रतीक है गोहाना का जलेबा’, सूरजकुंड मेले में उपराष्ट्रपति ने चखा स्वाद

    ‘संस्कृति की पहचान और अपनत्व का प्रतीक है गोहाना का जलेबा’, सूरजकुंड मेले में उपराष्ट्रपति ने चखा स्वाद

    फरीदाबाद.

    सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के पहले दिन ही गोहाना का जलेबा ने मेले की चौपाल पर मिठास भर दी। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंच पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण को जलेबा का स्वाद लेने के लिए जलेबा परोसा। सीएम ने कहा कि इसकी मिठास अपनत्व का प्रतीक है।

    उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जलेबा का स्वाद लेते हुए का कि यह मिठाई नहीं बल्कि हरियाणा की संस्कृति की पहचान और आत्मनिर्भरता की गौरव गाथा है। क्योंकि यह खास जलेबा सिर्फ इसी प्रदेश में मिल सकती है। उपराष्ट्रपति की इस बात पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जलेबी हमारे प्रदेश की लोकसंस्कृति से भी जुड़ी है। मंच पर मौजूद पर्यटन मंत्री ने कहा कि जलेबा का स्वाद ही ऐसा हैं। जो इसको पूरे देश में खास बना देता हैं। सूरजकुंड मेला हर प्रोडेक्ट को लोकल टू ग्लोबल बना देता हैं। इस मेले में आकर ही गोहाना का जलेबा राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा।

    उन्होंने कहा कि गोहाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। गोहाना की जलेबी से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। इस दौरान इजिप्ट के एंबेसडर कामिल जायद गलाल और डिप्टी एंबेसडर दालिया तांतवे ने भी जलेबा का स्वाद लिया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और दर्शकों ने इसे हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बताया।

  • हरियाणा को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी, राखीगढ़ी 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल

    हरियाणा को टूरिज्म हब बनाने की तैयारी, राखीगढ़ी 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल

    चंडीगढ़/हिसार.

    हरियाणा की धरती पर बसी सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान राखीगढ़ी अब एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर है। केंद्रीय बजट में किए गए एलान के बाद राखीगढ़ी को देश के 15 ‘आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों’ की सूची में शामिल करने की घोषणा हुई है। इस फैसले के साथ ही राखीगढ़ी केवल खुदाई और शोध का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि इसे संरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल मानी जा रही है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को आम लोगों से जोड़ने के लिए चयनित पुरातात्विक स्थलों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसी नीति के तहत हिसार जिले की राखीगढ़ी को आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए पाथ-वे, सूचना तंत्र और गाइड की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आने वाले लोग सभ्यता के अवशेषों के साथ उसका ऐतिहासिक संदर्भ भी समझ सकें।

    बजट से पहले भी बनी थी जमीन
    यह पहला मौका नहीं है जब बजट में राखीगढ़ी का जिक्र हुआ हो। केंद्रीय बजट 2025-26 में पहले ही राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की जा चुकी है। उस घोषणा के बाद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यहां खुदाई और संरक्षण के कार्यों को गति मिली, जिससे इसके ऐतिहासिक महत्व को और मजबूती मिली है।

    इन बिंदुओं से समझें बजट के बाद राखीगढ़ी को मिलने वाली नई पहचान को

    1. – देश के 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों में शामिल किया जाएगा
    2.  – संरक्षित टूरिज्म साइट के रूप में विकास, पाथ-वे और गाइड की व्यवस्था
    3. – पहले से घोषित 500 करोड़ के आवंटन से संरक्षण और खुदाई को बल
    4. – सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े केंद्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा

    टूरिज्म के नजरिये से क्या बदलेगा
    बजट के बाद राखीगढ़ी में केवल खोदाई स्थल नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यटन ढांचा विकसित करने की योजना है। परिसर के भीतर पाथ-वे बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी। प्रशिक्षित गाइड नियुक्त किए जाएंगे, जो सभ्यता, खुदाई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी देंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्राचीन जीवन-शैली को समझाने का प्रयास किया जाएगा।

    क्यों खास है राखीगढ़ी
    राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। यहां अब तक हजारों साल पुराने मानव कंकाल, मकानों की दीवारें, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके, मोहरें और जल निकासी व्यवस्था के प्रमाण मिल चुके हैं। इन अवशेषों से संकेत मिलता है कि यह नगर सुव्यवस्थित शहरी योजना और तकनीकी समझ के साथ विकसित हुआ था।

    नदी से नगर तक की कहानी
    इतिहासकारों के अनुसार राखीगढ़ी प्राचीन सरस्वती नदी प्रणाली के किनारे बसा था। माना जाता है कि इसी नदी की सहायक धाराओं के सूखने के बाद इस नगर का पतन हुआ। खुदाई में मिले सूखे नदी-तल, कुएं और जल संरचनाएं इस थ्योरी को मजबूती देती हैं।

  • राज्यपाल पटेल ने नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का लोकार्पण किया

    राज्यपाल पटेल ने नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का लोकार्पण किया

    भोपाल
    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भक्तिभाव और विधि-विधान के साथ नवीनीकृत लोकभवन मंदिर का शुभ लोकार्पण किया। यह पावन समारोह रविवार को श्रद्धा, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच संपन्न हुआ। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ हुए समारोह में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री  पटेल का मंदिर परिसर आगमन पर पारंपरिक सनातन रीति से स्वागत किया गया। उन्होंने कलश के साथ मंदिर में मंगल प्रवेश कर विधि-विधान से कलश एवं ध्वज का पूजन किया। उन्होंने भगवान के श्री चरणों में पूजा-अर्चना कर प्रदेश के विकास के लिए प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण के मध्य माँ सरस्वती की पावन प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा और भक्तिभाव से दीप प्रज्ज्वलित किया और प्रदेशवासियों के मंगल की कामना की। उन्होंने प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राज्यपाल ने मंदिर में हुए नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों का अवलोकन किया। इसे आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

    राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि समग्र विकास कार्य मंदिर परिसर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लक्ष्य के साथ किया गया है। नवीनीकरण की संपूर्ण परियोजना 84 लाख 13 हजार 100 रुपये की लागत से संपन्न हुई है। इस कार्य में करीब 76 लाख 96 हजार रुपये के सिविल निर्माण तथा लगभग 7 लाख 16 हजार रुपये के विद्युत संबंधी कार्य कराए गए है। मंदिर परिसर में लगभग 2,700 वर्गफुट क्षेत्रफल का विशाल हॉल, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु 1,120 वर्गफुट क्षेत्र में भोजनशाला एवं भंडारा कक्ष और 560 वर्गफुट क्षेत्र में सुसज्जित रसोईघर भी तैयार किया गया है।

    इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव, मुख्य अभियंता लोक निर्माण श्री संजय मस्के, अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण श्री हरी शंकर जयसवाल, नियंत्रक हाऊसहोल्ड लोकभवन श्रीमती शिल्पी दिवाकर, लोक निर्माण विभाग की सिविल, इलेक्ट्रिकल शाखा और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि सहित लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • कल से शुरू हो रहा है साल का अंतिम महीना: सुख-समृद्धि चाहते हैं तो इन भूलों से बचें

    कल से शुरू हो रहा है साल का अंतिम महीना: सुख-समृद्धि चाहते हैं तो इन भूलों से बचें

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2 फरवरी 2026 से साल के अंतिम महीने यानी फाल्गुन माह की शुरुआत हो रही है. यह महीना न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वसंत के आगमन के लिए जाना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है. फाल्गुन का समापन 3 मार्च 2026 को होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में भगवान विष्णु, शिव जी और श्री कृष्ण की उपासना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. फाल्गुन के महीने में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही कल्याणकारी होता है, क्योंकि इसी माह में शिव-शक्ति के मिलन का उत्सव महाशिवरात्रि मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस माह का महत्व, पूजा विधि और वे गलतियां जिनसे आपको बचना चाहिए.

    फाल्गुन माह का विशेष महत्व

    फाल्गुन माह को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है. इसी महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं. चंद्रमा का जन्म भी इसी माह में माना जाता है, इसलिए मानसिक शांति के लिए इस महीने में चंद्र देव की पूजा फलदायी होती है.

    भूलकर भी न करें ये गलतियां!

    फाल्गुन के महीने में कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, ताकि घर की सुख-शांति बनी रहे.

    देर तक न सोएं: इस महीने से मौसम बदलने लगता है. सुबह देर तक सोना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है.

    नशीले पदार्थों से परहेज: फाल्गुन में तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. यह भक्ति का महीना है.

    साफ-सफाई का अभाव: इस महीने में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. गंदे कपड़े पहनना या घर में गंदगी रखना दरिद्रता को आमंत्रण देता है.

    क्रोध और वाद-विवाद: यह प्रेम का महीना है. किसी का अपमान न करें और न ही घर में झगड़ा होने दें, वरना लक्ष्मी जी रुष्ट हो सकती हैं.

    शीतल जल का त्याग न करें: स्वास्थ्य की दृष्टि से इस महीने से ठंडे पानी से स्नान करना और अधिक पानी पीना शुरू कर देना चाहिए.

    फाल्गुन माह की पूजा विधि

    इस पवित्र माह में अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं.

    ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें.

    सूर्य को अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, रोली और फूल डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें.

    श्री कृष्ण की उपासना: फाल्गुन में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप या राधा-कृष्ण की पूजा करें. उन्हें अबीर-गुलाल और पीले फूल अर्पित करें.

    दान पुण्य: इस महीने में अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, कपड़े या शुद्ध घी का दान जरूरतमंदों को करें.

    फाल्गुन में क्या करें?

        रंगों का प्रयोग: भगवान को प्रतिदिन गुलाल चढ़ाएं और स्वयं भी तिलक लगाएं.
        मंत्र जाप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नियमित जाप करें.

     

  • केंद्रीय बजट से निराश भूपेश बघेल, कहा—नीतियों का असर बाजार पर साफ दिखा

    केंद्रीय बजट से निराश भूपेश बघेल, कहा—नीतियों का असर बाजार पर साफ दिखा

    रायपुर

    केंद्रीय बजट पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया भी आ गई है. उन्होंने इस बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि देश में इस बजट से किसी को कुछ नहीं मिला है, और छत्तीसगढ़ को अडानी के लिए छोड़ दिया गया है.

    पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में कहा कि केंद्रीय बजट का प्रतिगामी असर दिखाई दे रहा है. न कृषि, ना उद्योग, न रोजगार और न ही मजदूरों के लिए इसमें कुछ है. यही वजह है कि शेयर मार्केट के साथ सब कुछ भी धराशाई हो गया है. मिडिल क्लास के लिए भी कुछ नहीं है. इनकम टैक्स के स्लैब में बदलाव नहीं किया गया है. शराब महंगी हो गई है और मछली सस्ता हो गया है, बस यही बजट में दिखा है. शराब की दुकानें बढ़ा दी, ऊपर से शराब महंगी हो गई. इसका मतलब अब अवैध शराब और बढ़ेगी.

    प्रदेश में डबल इंजन की सरकार धान खरीदी नहीं कर पाई. 31 तारीख निकल गई, किसान सड़कों पर थे. वहीं प्रदेश में धान खरीदी पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेता अपना बचत धान नहीं बेच पाए तो दूसरों का क्या ही होगा. मोदी खुद बोले थे कि ये मोदी की गारंटी है कि 31 सौ क्विंटल में सबका धान खरीद जाएगा, लेकिन किसी का धान बिक नहीं पाया. छोटे किसानों को समर्पण कराया गया, और बड़े किसानों को टोकन नहीं मिला, स्थिति यह है.

  • जालंधर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, डेरा सच्चखंड बल्लां में की अरदास; आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण गुरु रविदास के नाम

    जालंधर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, डेरा सच्चखंड बल्लां में की अरदास; आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण गुरु रविदास के नाम

     जालंधर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आदमपुर एयरपोर्ट का नाम महान संत श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने का उद्घाटन किया। इस मौके पर डेरा सचखंड बल्लां सहित विभिन्न स्थानों से पहुंची संगत और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट के नए नाम का औपचारिक ऐलान किया, पूरा परिसर रविदास शक्ति के नारों से गूंज उठा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हलवारा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी का जीवन समरसता, समानता और सामाजिक न्याय का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों से समाज को नई दिशा दी और भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। आदमपुर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखना, उनकी शिक्षाओं के प्रति सम्मान और आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास है।

    इस अवसर पर पंजाब के सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, संगत और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। संगत ने गुरु रविदास जी की तस्वीरों और झंडों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान का संगम साफ नजर आया।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी के नाम पर किया जाना पंजाब की दलित राजनीति और सामाजिक चेतना के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इसे राज्य में सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    सुबह से ही डेरा परिसर में रौनक बढ़ने लगी और दूर-दराज़ से पहुंची संगत प्रधानमंत्री के स्वागत और देखने को लेकर बेसब्री से इंतजार करती नजर आई। डेरा प्रबंधन और संगत की ओर से पूरे परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं और संदेशों से जुड़े बैनर-पोस्टर लगाए गए, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए।

    प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना से जुड़े बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। डेरा सच्चखंड बल्लां, जो गुरु रविदास जी महाराज की विचारधारा का प्रमुख और प्रभावशाली केंद्र है, वहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी को संगत ने सम्मान और मान्यता के प्रतीक के रूप में लिया। जय गुरु रविदास के उद्घोष के साथ संगत डेरा परिसर में जुटती रही और पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।

    वहीं लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट का भी पीएम मोदी उद्घाटन करेंगे। हलवारा एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू और मुख्यमंत्री भगवंत मान कुछ ही देर में पहुंचने वाले हैं, वाटर प्रूफ टेंट में विशाल मंच सज चूका है और मेहमानों का आना निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदमपुर एयरपोर्ट से 3.45 पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हलवारा का वर्च्युअल उद्घाटन करेंगे।

    सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता
    प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

    एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। यहां वे इस एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट रखने की घोषणा करेंगे। इसके अलावा वे लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे। सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री के दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार पीएम डेरा सचखंड बल्लां में लगभग 40 मिनट रुकेंगे। इस दौरान वे डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से मुलाकात कर करेंगे। वह एक संक्षिप्त संबोधन भी दे सकते हैं। इस दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी डेरा बल्लां पहुंच सकते हैं।

    जालंधर नो फ्लाइंग जोन घोषित, डीजीपी ने लिया सुरक्षा का जायजा
    प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। सुरक्षा के मद्देनजर 30 जनवरी से 1 फरवरी तक जालंधर को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। इस अवधि में जिला सीमा के भीतर ड्रोन, हेलिकॉप्टर और अन्य नागरिक विमानन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। जालंधर-पठानकोट हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा।