Author: NewseDay

  • नाम मिला Yuvraj Singh से, पहचान खुद बनाई: युवराज सामरा ने टी20 वर्ल्ड कप में रचा इतिहास

    नाम मिला Yuvraj Singh से, पहचान खुद बनाई: युवराज सामरा ने टी20 वर्ल्ड कप में रचा इतिहास

    नई दिल्ली
    युवराज सामरा चर्चा में हैं। कनाडा का ये क्रिकेटर मंगलवार को न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की नाक में दम कर दिया। टी20 विश्व कप में सबसे कम उम्र में शतक जड़कर इतिहास रच दिया। कनाडा मैच नहीं जीत पाया लेकिन युवराज ने लाखों क्रिकेटप्रेमियों का दिल जीत लिया। उनके पिता ने भारत के दिग्गज क्रिकेटर युवराज सिंह के नाम पर उनका नाम रखा था। उस समय उन्हें क्या पता कि एक दिन उनका बेटा भी क्रिकेट के सबसे बड़े मंच में से एक टी20 विश्व कप में नाम करेगा। बल्ले का ऐसा जौहर दिखाएगा कि गेंदबाजों की शामत आ जाएगी।

    टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक
    न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए कनाडा की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 173 रन का स्कोर खड़ा किया। ओपनर युवराज सामरा ने सिर्फ 65 गेंदों में 110 रनों की पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके और 6 छक्के जड़े। इसके साथ ही युवराज ने टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक जड़ने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने ये शतक 19 वर्ष और 141 दिन की उम्र में पूरा किया। युवराज सामरा ने कप्तान दिलप्रीत बाजवा के साथ पहले विकेट के लिए 116 रन की शानदार साझेदारी निभाई। बाजवा ने 36 गेंदों में 39 रन बनाए।

    युवराज सामरा के शतक पर भारी पड़ी ग्लेन फिलिप्स की पारी
    जवाब में न्यूजीलैंड ने प्लेयर ऑफ द मैच ग्लेन फिलिप्स की 36 गेंदों में खेली गई 76 रनों की नाबाद तूफानी पारी की बदौलत 29 गेंद बाकी रहते ही 8 विकेट से मैच जीत लिया।

    युवराज सिंह के नाम पर पिता ने रखा नाम
    युवराज सामरा का पूरा नाम युवराज सिंह सामरा है। उनके पिता बलजीत सिंह भारत से जाकर कनाडा में बस गए थे। युवराज का वही पर जन्म हुआ और उनके पिता ने उनका नाम दिग्गज ऑलराउंडर और भारत की विश्व विजयी टीम के हीरो युवराज सिंह के नाम पर रखा था।

    सिर्फ 15 गेंद में फिफ्टी भी जड़ चुके हैं युवराज सामरा
    युवराज सामरा ने पिछले साल जून में बहामास के खिलाफ महज 15 गेंदों में अर्धशतक जड़ा था। टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भारत के युवराज सिंह के नाम है। उन्होंने सिर्फ 12 गेंद में अर्धशतक जड़ा था। युवराज सामरा ने भी अपनी उस पारी से टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज अर्धशतक बनाने वाले कनाडाई बल्लेबाज का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उस मैच में कनाडा को जीत के लिए सिर्फ 53 रन चाहिए थे और सामरा ने फिफ्टी जड़ दी थी।

    युवराज सामरा के अब तक के करियर की बात करें तो उन्होंने 8 ओडीआई खेले हैं। इसमें उनके नाम 24.57 की औसत से 172 रन है। ओडीआई में उनका सर्वोच्च स्कोर 53 रन है। युवराज सामरा ने अब तक 19 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। इन मैचों में उन्होंने 37.93 की शानदार औसत से 569 रन बनाए हैं। टी20 इंटरनेशनल में उनके नाम 3 अर्धशतक और 1 शतक दर्ज हैं। सामरा युवराज सिंह की तरह गेंदबाजी भी करते हैं। वह राइट ऑर्म मीडियम फास्ट बोलर हैं। टी20 इंटरनेशनल में उनके नाम 2 विकेट भी दर्ज हैं।

  • मध्यप्रदेश में सियासी उथल-पुथल, BJP नेता की बेटी कांग्रेस में शामिल, राजनीति गरमाई

    मध्यप्रदेश में सियासी उथल-पुथल, BJP नेता की बेटी कांग्रेस में शामिल, राजनीति गरमाई

    इंदौर 
    मध्य प्रदेश के इंदौर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और मध्य प्रदेश खाद एवं ग्रामोद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस में शामिल हो गई है। कनुप्रिया ने आज भोपाल में कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

    कांग्रेस कार्यालय में हुआ सदस्यता ग्रहण

    भोपाल स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कनुप्रिया सत्तन को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत करते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के वरिष्ठ नेता के परिवार से जुड़ी यह एंट्री इंदौर और प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है।

    सियासी हलकों में चर्चा तेज
    कनुप्रिया सत्तन का कांग्रेस में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और कनुप्रिया सत्तन कांग्रेस संगठन में किस भूमिका में नजर आती हैं।

  • नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    प्रौद्योगिकी से सशक्त एमएसएमई: योगी सरकार ने यूपी को बनाया डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र

    उद्यम सारथी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आसान हो रहा कारोबार

    एमएसएमई चैम्पियनशिप और तकनीकी उन्नयन से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

    नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल से निवेश को गति

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय पहल की गति तेज कर दी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी उन्नयन और नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश के 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों को प्रतिस्पर्धी और बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया गया है। योगी सरकार के इन क़दमों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है और रोजगार सृजन को नई गति प्राप्त हुई है। 

    डिजिटल अवसंरचना, नीतिगत सरलता और वित्तीय सहयोग के संयोजन ने प्रदेश को अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने की आधारभूमि को तैयार करने का काम किया है। एमएसएमई  सेक्टर की योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार के बजट 2026-27 में 3,822 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वर्ष 2025-2026 की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। 

    ओडीओपी को मिला डिजिटल आयाम

    वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत मार्केटिंग डेवलपमेंट, टूलकिट वितरण और प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इसके माध्यम से एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के कारीगरों को तकनीक आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग से जोड़ने से स्थानीय वस्तुओं की पहुंच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ी है।

    तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त

    एमएसएमई चैम्पियनशिप इनीशिएटिव (चैंपियंस पोर्टल) के अंतर्गत चयनित इकाइयों को आधुनिक मशीनरी को अपनाने, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल टूल्स के उपयोग के लिए तकनीकी सहायता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को घटाकर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और विकसित करना है। लाखों इकाइयों को डिजिटल उन्नयन और विपणन सहयोग का लाभ मिल रहा है।

    उद्यम सारथी और आरएएमपी का सहारा

    उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 24  जनवरी, 2021 को लॉन्च की गई उद्यम सारथी ऐप के जरिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, योजनाओं की जानकारी और संचालन मार्गदर्शन एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उद्यमियों की सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों तक त्वरित पहुंच प्राप्त हो जाती है। प्रदेश में आरएएमपी (राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस) योजना विश्व बैंक समर्थित एक केंद्रीय पहल है, इसके अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे इकाइयों के विस्तार और आधुनिकीकरण को बल मिला है।

    नीतिगत सरलता और त्वरित संचालन
    वर्ष 2022 से लागू एमएसएमई नीति के माध्य
    म से प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। प्लग एंड प्ले मॉडल से 72 घंटे में संचालन शुरू करने की सुविधा दी गई है। क्रेडिट प्रवाह में वृद्धि और पांच लाख रुपये तक बीमा कवरेज जैसी व्यवस्थाओं ने उद्यमियों को जोखिम प्रबंधन में सहूलियत प्रदान करने का काम किया है। इन उपायों से निवेश वातावरण मजबूत हुआ है।

    बढ़ रहा है रोजगार और आर्थिक प्रभाव

    प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से इसमें नए अवसर जुड़े हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सप्लाई चेन से जुड़ने के कारण ग्रामीण और अर्धशहरी इकाइयों को व्यापक बाजार हासिल हुआ है।

  • विश्व मंच पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण, UN चीफ ने कहा – योगदान है जरूरी

    विश्व मंच पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण, UN चीफ ने कहा – योगदान है जरूरी

    नई दिल्ली

    संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में भारत का स्थायी योगदान 'हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण' है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक स्तर पर बढ़ती और सशक्त होती भूमिका एक 'सकारात्मक मेगा ट्रेंड' के रूप में उभर रही है।
    भारत को माना अहम शक्ति

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ये टिप्पणियां कृत्रिम मेधा पर 'ग्लोबल साउथ' में आयोजित होने वाले पहले शिखर सम्मेलन 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में भाग लेने के लिए नई दिल्ली रवाना होने से पहले कीं। गुतारेस ने यहां 'पीटीआई' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा, 'संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों के सभी पहलुओं मसलन शांति और सुरक्षा, सतत विकास पर चर्चा में भारत एक अत्यंत अहम शक्ति बन गया है। मुझे भारत द्वारा आयोजित जी20 की अध्यक्षता याद है जहां बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।'
    भारत का जताया आभार

    गुतारेस ने कहा, 'और एक लोकतांत्रिक देश के रूप में मानवाधिकारों के मामले में भी वह अहम शक्ति बन गया है, वो भी एक ऐसी दुनिया में जहां दुर्भाग्य से हम दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र को संकट में देखते हैं।' संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, 'सबसे पहले हम संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा में भारत की उपस्थिति के लिए उसके प्रति बहुत आभारी हैं। वर्तमान में लगभग 5000 भारतीय महिलाएं और पुरुष दुनिया भर में शांति रक्षा अभियानों में तैनात हैं।'
    इन मुद्दों पर भी की बात

    उन्होंने "शांति स्थापना में भारत के पहले पूर्ण महिला पुलिस दल'' पर भी प्रकाश डाला और उसे "उल्लेखनीय" करार दिया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के रूप में गुतारेस का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है। उन्होंने बढ़ते संघर्षों और बढ़ती असमानताओं के बीच दुनिया में उभर रहे कुछ 'सकारात्मक मेगा ट्रेंड' पर प्रकाश डाला।

    उन्होंने कहा, 'मेरा संदेश यह है कि चिंता करने के कई कारण हैं। हमने देखा है कि संघर्ष बढ़ रहे हैं, अन्याय और असमानताएं बढ़ रही हैं और दुनिया में गरीबी और भूख की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'हमने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद को पनपते और एक भयावह रूप में बदलते देखा है। इसलिए चिंता के कई कारण हैं, लेकिन कुछ सकारात्मक मेगा ट्रेंड भी हैं।'

    गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि "सबसे महत्वपूर्ण मेगा ट्रेंड" में एक भारत जैसे देशों और अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका से संबंधित है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विकसित देशों का समूह-जी7 और इसी तरह के अन्य देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी हर दिन कम होती जा रही है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें भारत एक प्रमुख स्तंभ है, विश्व की अर्थव्यवस्था में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं।'

    उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया प्रतिदिन जारी है और यही "मेगा ट्रेंड" समय के साथ ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देगा, जहां न्याय, समानता और शांति के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध होंगी।

  • दाग मिटाने की कोशिश में तारिक रहमान, कैबिनेट में हिंदू नेताओं की एंट्री से दिया बड़ा संदेश

    दाग मिटाने की कोशिश में तारिक रहमान, कैबिनेट में हिंदू नेताओं की एंट्री से दिया बड़ा संदेश

    ढाका
    बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है. 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें निताई रॉय चौधरी का नाम भी शामिल है. हालांकि पहले चर्चा थी कि चौधरी के समधी और अहम महकमों के मंत्री रह चुके गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी. वहीं दूसरे अल्पसंख्यक नेता का नाम दीपेन दीवान है.

    कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
    तृतीयोमात्रा डॉट कॉम के मुताबिक, 1949 में पैदा हुए निताई रॉय चौधरी एक बांग्लादेशी वकील और राजनीतिज्ञ हैं. निताई रॉय चौधरी, जो मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को सीधी टक्कर में मात दी है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की. निताई रॉय चौधरी को 147896 वोट मिले हैं. उन्होंने जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया है.
     
    कौन हैं दीपेन दीवान?
    दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान, बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. इन्होंने दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की एक सीट से जीत हासिल की. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं. दीवान ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को हराया.

    हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति और मां से नाता
    तारिक रहमान की कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर गोयेश्वर रॉय को लेकर थी, जो बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. खालिदा जिया सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) वो राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें जगह न देकर उनके समधी निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाया गया है. खालिदा जिया की पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्वपूर्ण पद न देती हो लेकिन खालिदा जिया के दो कार्यकाल में हिंदू मंत्री शामिल रहे –
    1991-1996 में गयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री (स्टेट मिनिस्टर) के रूप में शामिल थे. वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय के प्रभारी थे. अब वे बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा बन चुके हैं.
    2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती राज्य मंत्री के रूप में जल संसाधन मंत्रालय के प्रभारी थे. वे बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई कल्याण फ्रंट के कन्वेनर भी थे. तारिक रहमान ने भी मां की राह पर चलते हुए अपनी कैबिनेट में हिंदू चेहरों को शामिल किया है. उनकी मां की कैबिनेट में एक हिंदू मंत्री रहे लेकिन रहमान कैबिनेट में 2 अल्पसंख्यक चेहरे हैं, वो भी ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बना हुआ है.

    बांग्लादेश के दामन से खून का दाग धोएंगे तारिक रहमान?
    तारिक रहमान ऐसे वक्त में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे हैं, जब वहां अस्थिरता के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के लिए बेहद बुरे हालात हैं. अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं का खूब कत्लेआम हुआ. मॉब लिंचिंग की ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. खासतौर पर चुनावों की घोषणा होने के बाद से अलग-अलग इलाकों से लगभग हर रोज हिंदुओं की हत्या की खबरें आती रहीं. खासतौर पर नवंबर के अंत से फरवरी के पहले हफ्ते तक अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश का दामन रंग गया. क्या तारिक रहमान बदलाव के छोटे से कदम से अपने देश की इमेज सुधार पाएंगे?

    BNP कैबिनेट में किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी?
     
    BNP के सूत्रों के हवाले से एक लिस्ट हासिल की है, जिसमें बताया गया है कि किन मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे.

        मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय
        सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्रालय
        अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय
        मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय
        इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय
        AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण
        खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय
        अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
        मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय
        निताई रॉय चौधरी – सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय
        मोहम्मद असदुज्जमां – कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय
        काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय
        अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार
        खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय
        ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद
        उद्दीन चौधरी एनी – जल संसाधन मंत्रालय
        एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय
        अमीन उर ​​राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय
        अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय
        असदुल हबीब दुलु – आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय
        ज़कारिया ताहिर – आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय
        दीपेन दीवान – चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय
        सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल – स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय
        फकीर महबूब अनम – डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
        शेख रबीउल आलम, सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय.

  • राजस्थान में ACB की कार्रवाई, JJM घोटाले में शामिल 15 लोगों पर सख्ती

    राजस्थान में ACB की कार्रवाई, JJM घोटाले में शामिल 15 लोगों पर सख्ती

    जयपुर 

    राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार सुबह बड़ा एक्शन लिया। एसीबी की टीमों ने राजस्थान सहित कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च अभियान शुरू किया। कार्रवाई की जद में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी शामिल हैं।

    एसीबी सूत्रों के अनुसार, जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर के अलावा बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 स्थानों पर तड़के दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। टीमों ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
    बाड़मेर रेलवे स्टेशन से एक्सईएन हिरासत में

    कार्रवाई के तहत पीएचईडी जोधपुर में तैनात एक्सईएन विशाल सक्सेना को मंगलवार सुबह करीब 5 बजे बाड़मेर रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया गया। जानकारी के मुताबिक, सक्सेना विरात्रा माता मंदिर में दर्शन के लिए ट्रेन से बाड़मेर पहुंचे थे। एसीबी की टीम पहले से स्टेशन पर मौजूद थी। जैसे ही वे ट्रेन से उतरे, टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर जयपुर रवाना कर दिया।

    सूत्रों का कहना है कि विशाल सक्सेना की भूमिका टेंडर प्रक्रिया और फर्जी सर्टिफिकेट मामले में संदिग्ध पाई गई है। उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है।
    SIT चार अहम मामलों की जांच में जुटी

    जल जीवन मिशन से जुड़े इस कथित घोटाले में एसीबी द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) चार प्रमुख मामलों की जांच कर रहा है। करीब 20 हजार करोड़ रुपए के स्पेशल प्रोजेक्ट से जुड़े टेंडर्स में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। आरोप है कि टेंडर शर्तों में बदलाव कर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

    जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में साइट इंस्पेक्शन की विशेष शर्त जोड़ी गई थी, जिससे यह पहले से पता चल सके कि कौन-कौन सी फर्म भाग ले रही हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। हालांकि बाद में वित्त विभाग ने इन टेंडर्स को निरस्त कर दिया था। अब एसीबी उन इंजीनियर्स की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने यह शर्तें जोड़ी थीं।
    55 करोड़ का फर्जी भुगतान

    जांच में यह भी सामने आया है कि श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को बिना कार्य किए 55 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। इस मामले में कुल 139 इंजीनियर जांच के दायरे में हैं। इनमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल बताए जा रहे हैं।

    एसीबी इस बात की भी जांच कर रही है कि भुगतान किस स्तर पर और किन अधिकारियों की अनुमति से किया गया। प्रारंभिक जांच में कई स्तरों पर लापरवाही और मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
    इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट

    मामले का एक बड़ा पहलू इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर करीब 900 करोड़ रुपए के टेंडर जारी करने से जुड़ा है। ये टेंडर कथित तौर पर श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को दिए गए।

    जांच में यह भी आरोप है कि जब मामला उजागर हुआ तो एक्सईएन स्तर पर जांच के नाम पर केरल जाकर एक रिपोर्ट पेश की गई, जिसे अब झूठा बताया जा रहा है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि इरकॉन के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में किन-किन इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका रही।
    कई राज्यों में समन्वित कार्रवाई

    एसीबी की इस कार्रवाई को समन्वित ऑपरेशन माना जा रहा है, जिसमें राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी टीमों ने एक साथ दबिश दी। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही गुप्त जांच के बाद की गई है।

    एसीबी अधिकारियों का कहना है कि जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं। जांच एजेंसी पूरे प्रकरण में वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है, ताकि घोटाले की पूरी साजिश और नेटवर्क का खुलासा हो सके।

    जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासों का आधार बन सकती है।

  • ग्रहण काल में तुलसी दल व गंगाजल का प्रयोग क्यों किया जाता है? आस्था और विज्ञान का रहस्य

    ग्रहण काल में तुलसी दल व गंगाजल का प्रयोग क्यों किया जाता है? आस्था और विज्ञान का रहस्य

    पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्तों और गंगाजल का इस्तेमाल बहुत जरूरी माना गया है. शास्त्रों की मानें तो ग्रहण के समय जब सूर्य की रोशनी कम होती है, तो पूरी दुनिया में एक तरह की नकारात्मक ऊर्जा फैलने लगती है. ऐसे में तुलसी और गंगाजल दो ऐसी पवित्र चीजें हैं, जो इस बुराई को सोख लेती हैं और आसपास के माहौल को शुद्ध रखती हैं. माना जाता है कि इनके इस्तेमाल से घर और रसोई की पवित्रता बनी रहती है और हम पर ग्रहण का बुरा असर पड़ने की आशंका बहुत कम हो जाती है. यह हमारी प्राचीन परंपरा का एक अटूट हिस्सा है.

    खाने-पीने की चीजों में तुलसी का महत्व
    शास्त्रों और युर्वेद के अनुसार, तुलसी एक ऐसा पौधा है जिसमें कुदरती तौर पर हानिकारक किरणों को खत्म करने की अद्भुत शक्ति होती है. ग्रहण के समय हवा में कुछ ऐसे बारीक कीटाणु और अशुद्ध तरंगें बढ़ जाती हैं, जो खाने और पानी को खराब कर सकती हैं. अगर हम पके हुए खाने, दूध और पीने के पानी में तुलसी का पत्ता डाल दें, तो वह खाना पूरी तरह सुरक्षित रहता है. माना जाता है कि तुलसी की उपस्थिति से भोजन शुद्ध बना रहता है और ग्रहण खत्म होने के बाद भी हम उसे बिना किसी डर के इस्तेमाल कर सकते हैं. यह विधि हमारे आहार की सात्विकता का संचालन करती है.

    गंगाजल के छिड़काव से वातावरण की शुद्धि
    गंगाजल को हमारे धर्म में सबसे पवित्र जल माना गया है, जो कभी अशुद्ध नहीं होता. शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय घर के हर कोने और मंदिर में गंगाजल छिड़कने से वहां मौजूद नकारात्मक ऊर्जा तुरंत खत्म हो जाती है. गंगाजल में वातावरण को साफ-सुथरा रखने और मन में अच्छे विचार लाने की अद्भुत शक्ति होती है. ग्रहण के समय जब हम थोड़े डरे या परेशान होते हैं, तब गंगाजल का स्पर्श हमारे मन को शांत और पवित्र रखने में बड़ी मदद करता है. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और तनाव कम होने की संभावना बढ़ जाती है. गंगाजल का प्रयोग घर के वातावरण में सकारात्मकता भर देता है.

    ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धि का विधान
    जैसे ही ग्रहण खत्म हो, खुद को और घर को शुद्ध करने के लिए भी इनका बहुत बड़ा महत्व है. नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान करने से शरीर की सारी सुस्ती और दोष दूर हो जाते हैं. इसके बाद पूरे घर और भगवान की मूर्तियों पर भी गंगाजल छिड़कना चाहिए. ग्रहण के दौरान जिन चीजों में आपने तुलसी के पत्ते डाले थे, उन्हें इस्तेमाल करने से पहले पत्ते निकालकर किसी पौधे या साफ जगह पर रख दें. यह छोटी सी विधि आपके जीवन में फिर से सकारात्मकता लाने में मदद करती है.

  • पहला सूर्य ग्रहण और 12 राशियाँ: किसे मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान

    पहला सूर्य ग्रहण और 12 राशियाँ: किसे मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान

    कुंभ राशि में लगने वाला साल का पहला ग्रहण सामूहिक चेतना, नवाचार और भविष्य की योजनाओं में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है. भले ही यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का गोचर और उनकी स्थिति प्रत्येक जातक के लिए महत्वपूर्ण होती है. आइए विस्तार से समझते हैं कि इस ग्रहण का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है.

    राशियों पर ग्रहण का प्रभाव

    मेष राशि
    यह ग्रहण आपके सामाजिक जीवन और बड़े सपनों को प्रभावित कर सकता है. देखा जाए तो आप अपनी दोस्ती और काम-काज के रिश्तों को नए नजरिए से देख सकते हैं. पैसों को लेकर थोड़ी अस्थिरता महसूस हो सकती है, इसलिए निवेश या खर्च का कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें.

    वृषभ राशि
    करियर को लेकर यह समय थोड़ा संभलकर चलने का है. हो सकता है ऑफिस में काम का दबाव बढ़े या मेहनत का फल मिलने में थोड़ी देरी हो. अधिकारियों से उलझने के बजाय धैर्य रखें. ध्यान रहे, धीरे-धीरे ही सही लेकिन आपकी निरंतरता आपको बड़ी सफलता दिलाएगी.

    मिथुन राशि
    आपकी पढ़ाई, लंबी यात्राओं और भविष्य की सोच में कुछ बदलाव आ सकते हैं. मुमकिन है कि बनी-बनाई योजनाओं में फेरबदल करना पड़े. विशेष रूप से, इस दौरान आपकी आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, जो आपको खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी.

    कर्क राशि
    ग्रहण के प्रभाव से आपकी भावनाएं काफी गहरी हो सकती हैं. पैसों के लेन-देन, लोन या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें. बेमतलब की चिंताओं में न उलझें और मुश्किल समय में परिवार के साथ पर भरोसा रखें.

    सिंह राशि
    आपके रिश्तों और पार्टनरशिप के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा जैसा है. अगर बातचीत में अहंकार आया, तो गलतफहमियां बढ़ सकती हैं. दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और शांति से जवाब दें; यही आपकी समझदारी होगी.

    कन्या राशि
    अपनी सेहत और रोजमर्रा के काम पर ध्यान दें. काम के बोझ को खुद पर हावी न होने दें, नहीं तो तनाव बढ़ सकता है. अनुशासन बनाए रखें और काम के साथ-साथ आराम के लिए भी वक्त निकालें. सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

    तुला राशि
    आपका मन रचनात्मक कामों में लगेगा, लेकिन भावनात्मक रूप से ध्यान भटक सकता है. प्रेम संबंधों में एक-दूसरे से बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें. अपनी बात को साफ और स्पष्ट रखें ताकि किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश न रहे.

    वृश्चिक राशि
    यह समय आपके घर और परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. घर की चर्चाओं में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि पुरानी बातें फिर से उभर सकती हैं. कड़वी भाषा का प्रयोग करने से बचें और घर के माहौल को शांत रखने की कोशिश करें.

    धनु राशि
    बातचीत करने और नई चीजें सीखने के मामले में सावधानी जरूरी है. किसी को कुछ भी बोलने से पहले सोच लें ताकि गलतफहमी न हो. छोटे भाई-बहनों या पड़ोसियों के साथ व्यवहार में नरमी बरतें और सकारात्मक रहें.

    मकर राशि
    पैसों के मामले में अनुशासन बनाए रखना ही आपके लिए सबसे बड़ा मंत्र है. फिजूलखर्ची या रिस्की निवेश से फिलहाल दूर रहें. यह ग्रहण आपको अपनी बचत और खर्च करने के तरीकों को सुधारने का एक अच्छा मौका दे रहा है.

    कुंभ राशि
    यह ग्रहण आपकी ही राशि में है इसलिए यह समय ‘खुद को पहचानने’ का है. आप अपने स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों को लेकर दोबारा सोच सकते हैं. मन थोड़ा अशांत रह सकता है, इसलिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव न करें और खुद को समय दें.

    मीन राशि
    आपका झुकाव अध्यात्म की ओर ज्यादा रहेगा. आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं, लेकिन इसे नकारात्मक न होने दें. यह पुराने जख्मों को भरने और प्रार्थना व ध्यान के जरिए खुद को शांत करने का बहुत अच्छा समय है.

    ग्रहण के दौरान नकारात्मक प्रभाव कम करने के उपाय
    शास्त्रों में ग्रहण के प्रभाव को संतुलित करने के लिए कुछ विशेष मार्गदर्शन दिए गए हैं, जो सभी जातकों के लिए लाभकारी हैं:

        मंत्रों का आलंबन: स्पष्टता और सुरक्षा के लिए गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करें.
        दान और सेवा: चावल, दूध, तिल, पीले वस्त्र या अन्य वस्तुओं का दान करना सकारात्मकता लाता है.
        आध्यात्मिक साधना: ध्यान, मौन और प्रार्थना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
        संयम: अनावश्यक विवादों से बचें और मानसिक शांति बनाए रखने का प्रयास करें.

     

  • राजस्थान में बारिश के साथ गिरेंगे ओले, पश्चिमी विक्षोभ का 48 घंटे रहेगा असर

    राजस्थान में बारिश के साथ गिरेंगे ओले, पश्चिमी विक्षोभ का 48 घंटे रहेगा असर

    जयपुर.

    राजस्थान में अगले 48 घंटों के दौरान मौसम बड़ा बदलाव दिखा सकता है। 17 और 18 फरवरी को राज्य में सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान कई जिलों में मेघगर्जन, बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।

    आज इन संभागों में बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग ने बताया है कि आज जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में दोपहर बाद मौसम करवट ले सकता है। आसमान में बादल छाने और मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं। सुबह और दोपहर तक मौसम सामान्य रह सकता है, लेकिन बाद में अचानक बदलाव से लोगों को राहत भी मिल सकती है।

    कल का मौसम: ओलावृष्टि की चेतावनी
    विक्षोभ का सबसे ज्यादा प्रभाव 18 फरवरी को रहने की संभावना है। इस दिन बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर, कोटा संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ इलाकों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कहीं-कहीं ओले गिरने की भी संभावना है। ओलावृष्टि होने पर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    तापमान में गिरावट के संकेत
    फिलहाल राज्य के अधिकांश स्थानों पर न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। लेकिन मावठ के असर से अगले 2 से 3 दिनों में तापमान 2 से 4 डिग्री तक गिर सकता है। इसके बाद फिर से तापमान बढ़ने की संभावना जताई गई है।

  • महेश भूपति संग लारा दत्ता का रिश्ता, अभिनेत्री ने दिया दिलचस्प बयान

    महेश भूपति संग लारा दत्ता का रिश्ता, अभिनेत्री ने दिया दिलचस्प बयान

    मुंबई 
     अभिनेत्री लारा दत्ता पूर्व टेनिस प्लेयर महेश भूपति के साथ खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रही हैं।  कपल ने शादी के 15 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर लारा ने इंस्टाग्राम के जरिए पति महेश को शुभकामनाएं दीं। लारा ने महेश के साथ कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इन तस्वीरों में दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश और रोमांटिक नजर आ रहे हैं। लारा ने लिखा, "15 साल, मैं आग और वो हवा। मैं चिंगारी लगाती हूं, तो वे उसे और भड़का देते हैं, और हैरानी की बात ये है कि अब तक हमने घर नहीं जलाया।" अभिनेत्री ने आगे लिखा कि इतने सालों में दोनों ने एक-दूसरे को प्रोफेशनल तरीके से परेशान करना, ऐसे लड़ना जैसे कोई खेल हो, यह दिखाना कि हम बिल्कुल भी प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, और फिर भी हर दिन एक-दूसरे को ही चुनना सीखा है।

    अभिनेत्री की पोस्ट फैंस और उनके दोस्तों को काफी पसंद आ रही है। कई यूजर्स उनके मजाकिया अंदाज को काफी पसंद कर रहे हैं। अभिनेता गजराव ने हार्ट इमोजी के साथ शानदार प्रतिक्रिया दी।

    अभिनेत्री लारा दत्ता और महेश भूपति की पहली मुलाकात एंटरटेन्मेंट और स्पोर्ट्स को लेकर एक बिजनेस मीटिंग के दौरान हुई थी। काम के सिलसिले में दोनों के बीच दोस्ती हुई थी और धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई। 9 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद दोनों ने पहले 16 फरवरी 2011 को सिविल मैरिज की और उसके बाद गोवा में क्रिश्चियन रस्मों के साथ शादी की। इस जोड़े की एक बेटी सायरा भूपति है।
    अभिनेत्री लारा जल्द ही फिल्म 'वेलकम' के तीसरे पार्ट 'वेलकम टू द जंगल' में नजर आएंगी। फिल्म में उनके साथ अक्षय कुमार, दिशा पटानी, रवीना टंडन, फरदीन खान समेत अन्य स्टार्स प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।