Author: NewseDay

  • स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम: दिल्ली के चिड़ियाघर में QR कोड से मिलेगी वन्यजीवों की जानकारी

    स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम: दिल्ली के चिड़ियाघर में QR कोड से मिलेगी वन्यजीवों की जानकारी

    नई दिल्ली

    चिड़ियाघर में घूमने आए विजिटर्स अब वन्यजीवों के बाड़े के बाहर QR कोड वाले साइन बोर्ड से वन्यजीवों की सारी जानकारी तुरंत पढ़ सकेंगे। रेनोवेशन और विजिटर्स की सुविधा के लिए नए साइन बोर्ड बदलने के साथ पहली बार कई साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। 1000 से अधिक साइन बोर्ड लगाने का काम शुरू हो चुका है।

    नाम के साथ लगे होंगे QR कोड
    20 बीटों के 72 बाड़ों में 96 प्रजातियों के करीब 1300 वन्यजीव रह रहे हैं। नए साइन बोर्ड में उस जानवर के नाम की जानकारी के साथ QR कोड लगे होंगे। मोबाइल से कोड स्कैन करने पर जानवरों की सारी जानकारी मिल जाएगी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि इससे वाइल्डलाइफ और पर्यावरण के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाने के उद्देश्य में सफलता मिलेगी।

    चिड़िया घर में लगाए जाएंगे नए बोर्ड
    चिड़ियाघर के ज्यादातर साइन बोर्ड बहुत पुराने हो चुके थे। कई बोर्ड में ठीक से पढ़ा भी नहीं जा पा रहा था। खतरनाक जानवर की सूचना देते हुए बाड़े की रेलिंग से दूर रहने आदि के करीब 100 वॉर्निंग साइन बोर्ड, बाड़ों में बंद जानवरों के नाम के 200 से अधिक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे।

    रिक्शा स्टॉप पर भी बोर्ड
    बैटरी रिक्शा स्टॉप पर भी नए साइन बोर्ड लगेगे। अभी उनकी हालत बहुत ठीक नहीं है। कई जगह साइन बोर्ड नहीं है। लेकिन विजिटर को बैटरी रिक्शा लेने के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। चिड़ियाघर के कई रास्तों की जानकारी देते हुए भी बोर्ड लगाए जा रहे है। किस रास्ते पर किस जानवर का बाड़ा है, इसकी जानकारी भी साइन बोर्ड से दी जाएगी। इससे चिड़ियाघर घूमने आए लोगों को अपना रूट तय करने में आसानी मिलेगी। उन्हें अपनी पसंद के जानवरों को ढूंढ़ने में अब ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा।

    हाथी से बाघ तक, एक दिन के लिए भी ले सकेंगे गोद
    चिड़ियाघर अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए ‘वन्यजीव गोद’ योजना में बड़े सुधार करने जा रहा है। अब आप किसी वन्यजीव को एक दिन के लिए भी गोद ले सकते हैं। तिमाही और छमाही समय तक के लिए भी गोद लिया जा सकता है। मार्च से यह योजना चालू हो रही है। इसके तहत वन्यजीव की खुराक और रखरखाव का खर्चा शामिल है। 2022 में शुरू हुई वन्यजीव गोद योजना के तहत एक साल और दो साल की अवधि के लिए वन्यजीवों को गोद लिया जा सकता था।

    आमदनी बढ़ाने के लिए बदला जा रहा टाइम
    योजना सफल नहीं रही। गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों ने ही बामुश्किल आधा दर्जन वन्यजीवों को गोद लिया था। अफ्रीकी शंकर हाथी को भी गोद लिया गया था, जिसकी पिछले साल मौत हो चुकी है। चिड़ियाघर के डायरेक्टर डॉ संजीव कुमार ने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए वन्यजीव गोद योजना की समय अवधि को बदला जा रहा है।

  • जिद्दी स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाएँ – वो भी घर पर आसानी से

    जिद्दी स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाएँ – वो भी घर पर आसानी से

    प्रेग्नेंसी और वजन घटने या बढ़ने की वजह से अक्सर शरीर के कई हिस्सों पर स्ट्रेच माक्र्स हो जाते हैं। वहीं कई लोगों में हॉर्मोनल चेंजेस की वजह से भी ऐसे निशान पड़ जाते हैं। सफेद रंग के ये जिद्दी दाग यूं तो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। पर हम आपको कुछ ऐसे घरेलू तरीके बता रहे हैं, जिससे इन निशानों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

    पौष्टिक भोजन
    स्वस्थ त्वचा के लिए विटामिन सी और ई, जिंक, सिलिका और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुरता वाला संतुलित और पौष्टिक आहार चुनें। खाने में स्ट्रॉबेरी, जामुन, पालक, गाजर, हरी बींस, साग और बादाम शामिल करें।

    नींबू का रस
    नींबू का रस एक प्राकृतिक अम्ल है, जो स्ट्रेच माक्र्स को हल्का करता है। नींबू के रस को स्ट्रेच माक्र्स पर लगाएं और 10 मिनट बाद धो लें।

    चीनी
    अपने प्राकृतिक सफेद रूप में चीनी स्ट्रेच माक्र्स हटाने का काफी कारगर उपाय है। एक चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर उसे स्ट्रेच माक्र्स पर लगाने से काफी असर होता है।

    वनस्पति तेल से मसाज
    गर्भवती महिलाओं को वनस्पति तेल से मसाज करना चाहिए। इससे स्ट्रेच माक्र्स के निशान कम हो जाते हैं।

    एलोवेरा जेल
    एक कप एलोवेरा में 2 चम्मच विटामिन ई का तेल मिलाइए। इस मिश्रण को तब तक लगाइए जब तक त्वचा इसे पूरी तरह सोख न ले। रोजाना लगाने से त्वचा में फर्क महसूस होगा।

    कोकोआ मक्खन
    स्ट्रेच माक्र्स पर कोकोआ मक्खन लगाने से दाग कम होते हैं। स्ट्रेच माक्र्स वाले भागों पर दिन में दो बार कोकोआ मक्खन से मसाज करें। एक महीने में ही फर्क आएगा।

     

  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर

    रायपुर

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भर

    सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है।
              
    छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की  रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं।

    बिहान से मिली आर्थिक तरक्की की राह
      
    रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।
          
    रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।
         
    आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

  • जनगणना 2027 अपडेट: घर बैठे भरें डिटेल, एक गणनाकर्मी करेगा 800 लोगों का सर्वे

    जनगणना 2027 अपडेट: घर बैठे भरें डिटेल, एक गणनाकर्मी करेगा 800 लोगों का सर्वे

    भोपाल
    Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा।

    जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया।

    10 लाख घरों की होगी मैपिंग
    01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।
     
    यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने 'डोर टू डोर' सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।

     

  • कब रिलीज होगी गबरू? सनी देओल की फिल्म में सलमान खान के कैमियो की चर्चा तेज

    कब रिलीज होगी गबरू? सनी देओल की फिल्म में सलमान खान के कैमियो की चर्चा तेज

    मुंबई

    ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के बाद सनी देओल के तमाम फैंस को उनकी अगली फिल्म ‘गबरू’ का इंतजार है, जिसे शशांक उदापुरकर ने डायरेक्ट किया है. कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में सनी ने बताया था कि ये फिल्म उनके दिल के बहुत करीब है. माना जा रहा है कि इस फिल्म में सनी का बिल्कुल अलग अवतार देखने को मिलेगा. ये पिक्चर 13 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तय की गई थी. मगर कुछ समय पहले एक रिपोर्ट में ऐसा बताया गया था कि अब ये फिल्म 13 मार्च को रिलीज नहीं होगी. उसके बाद से फैंस नई रिलीज डेट का इंतजार कर रहे थे. अब रिलीज डेट को लेकर जानकारी सामने आ गई है.

    मेकर्स की तरफ से तो अभी रिलीज डेट को लेकर जानकारी शेयर नहीं की गई है, लेकिन वैरायटी इंडिया की एक रिपोर्ट की मानें तो अब ये फिल्म 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी. मेकर्स ने अभी ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही ऐलान किया जाएगा. सनी देओल के साथ इस फिल्म में सिमरन और प्रीत कमानी भी हैं. सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा हैं. रिपोर्ट की मानें तो सलमान इसमें कैमियो रोल में दिखने वाले हैं.

    एक्शन-ड्रामा फिल्म है ‘गबरू’
    सनी देओल और सलमान दोनों ही बॉलीवुड का बड़ा नाम हैं. दशकों से दोनों फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. ऐसे में दोनों स्टार्स को एक साथ एक फिल्म में देखना काफी दिलचस्प होगा. शशांक उदापुरकर ने डायरेक्ट करने के साथ-साथ इस एक्शन-ड्रामा फिल्म की कहानी भी लिखी है. ओम छंगाणी और विशाल राणा इसके प्रोड्यूसर हैं. मिथुन ने इसमें म्यूजिक दिया है. वहीं सईद कादरी ने फिल्म के गानों के लिरिक्स लिखे हैं.

    गबरू के पोस्टपोन होने को लेकर मेकर्स की तरफ से कोई वजह तो नहीं बताई गई. पर ऐसा माना जा रहा है कि रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ की वजह से इसे पोस्टपोन करने का फैसला किया गया. ‘धुरंधर 2’ 19 मार्च को रिलीज होने वाली है. इसके पहले पार्ट को बॉक्स ऑफिस पर जिस तरह की सफलता मिली, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि दूसरा पार्ट भी बंपर कमाई करने वाला है. यश की ‘टॉक्सिक’ भी 19 मार्च को ही रिलीज हो रही है. ऐसे में ‘गबरू’ को नुकसान हो सकता था. कहा जा रहा है कि इसी वजह से सनी देओल की फिल्म को पोस्टपोन कर दिया गया.

  • अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

    अखिलेश की PDA बनाम बीजेपी का मास्टर प्लान, 2027 में किसकी बनेगी सरकार?

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है।
    दलित वोट बैंक है जरूरी
    यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है।

    यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे।

    2027 के लिए डी पॉलिटिक्स
    यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है।

    बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है।
    लगातार संपर्क पर जोर
    बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

  • भोर में आने वाले सपनों का क्या अर्थ है? ब्रह्म मुहूर्त का आध्यात्मिक रहस्य

    भोर में आने वाले सपनों का क्या अर्थ है? ब्रह्म मुहूर्त का आध्यात्मिक रहस्य

    अक्सर कहा जाता है कि सुबह का सपना सच होता है. हम में से कई लोगों ने बचपन से ही बड़े-बुजुर्गों से यह बात सुनी है. लेकिन क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तर्क है या यह महज एक लोक मान्यता है? विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपनों को लेकर भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व दिया गया है. आइए स्वप्न शास्त्र के अनुसार जानते हैं सुबह के सपनों का क्या मतलब है और इनके पीछे छिपा रहस्य क्या है.

    क्या होता है ब्रह्म मुहूर्त?
    हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना गया है. यह समय सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है. मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक होती है और मन शांत एवं निर्मल रहता है. इसलिए इस समय पूजा-पाठ, ध्यान और जप करना बेहद शुभ माना गया है.

    क्यों खास होते हैं सुबह के सपने?
    ज्योतिष और स्वप्न शास्त्र के अनुसार, रात के आखिरी पहर यानी ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपने ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं. इसके पीछे कुछ कारण बताए गए हैं. इस समय मन गहरी नींद से हल्की अवस्था में आ जाता है. अवचेतन मन सक्रिय रहता है. आसपास का वातावरण शांत और ऊर्जा से भरपूर होता है. इसी वजह से इस समय देखे गए सपने भविष्य के संकेत माने जाते हैं.

    शुभ सपनों के संकेत
    स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर ब्रह्म मुहूर्त में ये चीजें दिखें तो इसे शुभ माना जाता है.

        मंदिर, देवी-देवता या भगवान का दर्शन
        साफ पानी या नदी में स्नान
        फूल, दीपक या उजाला
        सफेद वस्त्र पहने लोग

    ऐसे सपने सुख, सफलता और शुभ समाचार का संकेत देते हैं.

    अशुभ सपनों का क्या मतलब?
    अगर सुबह के समय बुरे या डरावने सपने आएं, जैसे गिरना, रोना, अंधेरा या तूफान, झगड़ा तो इस तरह के सपनों को मानसिक तनाव या आने वाली चुनौती का संकेत माना जाता है.

    क्या हर सपना सच होता है?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में देखा गया सपना कुछ ही दिनों में फल दे सकता है. लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे मन की कल्पना और मानसिक स्थिति से जोड़कर देखता है. इसलिए हर सपना सच हो, यह जरूरी नहीं है.

    क्या करें अगर सुबह सपना याद रहे?
        भगवान का स्मरण करें.
        सकारात्मक रहें और किसी भी डर को मन में न बसने दें.

     

  • क्यों कमजोर इम्युनिटी और गलत जीवनशैली बढ़ा रही है टीबी का जोखिम? जानिए लक्षण और रोकथाम

    क्यों कमजोर इम्युनिटी और गलत जीवनशैली बढ़ा रही है टीबी का जोखिम? जानिए लक्षण और रोकथाम

    सर्दी-खांसी हो या बुखार, कुछ लोग इसे मामूली मानकर लंबे समय तक अनदेखा करते रहते हैं, या फिर कुछ एंटीवायरल दवाओं या घरेलू उपाय से इसे ठीक करने का प्रयास करते हैं। उक्त समस्याओं के साथ अगर अचानक वजन में कमी आ जाए या भूख कम लगे, तो देर किए बगैर विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

    डॉ. राकेश कुमार, एडि. प्रोफेसर, सेंटर फार कम्युनिटी मेडिसिन, एम्स, नई दिल्ली बताते हैं कि ये सभी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। जागरूकता नहीं होने के कारण ही आज टीबी की समस्या तमाम प्रयासों के बावजूद कम नहीं हो रही है।

    दरअसल, वैश्विक स्तर पर टीबी को 2030 तक और भारत में वर्ष 2025 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था, पर बीते कुछ समय से अनेक जगहों पर टीबी मरीजों  की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टीबी ऐसा संक्रामक रोग है जो दुनियाभर में होने वाली मौत के 10 शीर्ष कारणों में शामिल है।

    समझें टीबी के जोखिम को
    टीबी का संक्रमण बड़ी आबादी में हो सकता है, पर वह बीमारी में बदल जाए जरूरी नहीं। प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो शरीर संक्रमण के खिलाफ कार्य करता है और बीमारी से बचाता है। इसलिए, टीबी का कारण कमजोर प्रतिरोधी क्षमता ही है। यह पोषण की कमी का परिणाम है। मधुमेह, एचआइवी ग्रस्त लोगों में टीबी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है।

    कितने हैं प्रकार
    वयस्कों में दो प्रकार के टीबी होतें हैं- पल्मोनरी व एक्स-पल्मोनरी। पल्मोनरी में फेफड़े में संक्रमण होता है। इसके लक्षण खांसी व बुखार हैं। संक्रमण बढ़ने पर वजन में कमी आने लगती है। वहीं, एक्स-पल्मोनरी में फेफड़े के अलावा अन्य अंगों जैसे, हड्डी, पेट, लिंफ नोडस, दिमाग आदि में टीबी हो सकता है।

    पोषण का रखें ध्यान
    पोषण की कमी भारत में टीबी के बड़े कारणों में से एक है। खराब खानपान व जीवनशैली से शुगर की शिकायत हो सकती है। यह भी शरीर में पोषण की कमी कर सकता है और आपकी प्रतिरोधी शक्ति कम होने लगती है। इससे टीबी का संक्रमण होना आसान हो जाता है और पर्याप्त ध्यान न दें तो यह जानलेवा भी हो सकता है। बता दें कि यदि खानपान सही है तो टीबी की आशंका कम हो सकती है। इसके अलावा, अल्कोहल व तंबाकू से भी दूरी बनाने का प्रयास करना चाहिए।

    दो घंटे में रिपोर्ट
    बच्चों में पहचान कम होती है। जांच में लापरवाही, समाज में टीबी को लेकर गलत धारणाएं इलाज में बड़ी अवरोधक हैं। आज इसका निदान आसान है। दो घंटे में टीबी की रिपोर्ट मिल जाती है व इलाज शुरू कर सकते हैं।

    कोर्स पूरा करें
    टीबी के मरीजों के उपचार के लिए प्राय: एंटीबायोटिक दी जाती है। कई मरीजों में देखा गया है कि वे दवा का कोर्स इसलिए भी पूरा नहीं करते क्योंकि दवा लंबे समय तक लेना पड़ता है। कुछ लोग आर्थिक कारण या इसके परिणामों से अनभिज्ञ रहने के कारण दवा बीच में ही छोड़ देते हैं। इससे इलाज और कठिन हो सकता है। दवा प्रतिरोधी होने से इलाज कठिन और अधिक महंगा हो सकता है।

    ये हैं मुख्य लक्षण
        लगातार 2-3 सप्ताह तक खांसी
        कभी-कभी कफ में खून आना।
        बुखार आना और यह रात में बढ़ जाना।
        रात में पसीना आना।
        लगातार थकान व कमजोरी
        सांस में तकलीफ, सीने में दर्द आदि।

    बचाव के उपाय
        संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें।
        खांसते या छींकते समय रुमाल या टिश्यू पेपर रखें ताकि बैक्टीरिया न फैले।
        भीड़ में मास्क का प्रयोग करें।
        बच्चों को बीसीजी का टीका लगवाएं।
        संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम व पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें।
        लक्षण दिखें तो इलाज में देरी न करें।

     

  • एपल करने जा रहा है स्पेशल इवेंट का आयोजन, नए प्रोडक्ट्स से उठेगा पर्दा

    एपल करने जा रहा है स्पेशल इवेंट का आयोजन, नए प्रोडक्ट्स से उठेगा पर्दा

    नई दिल्ली

    एपल एक खास और स्पेशल इवेंट का आयोजन करने वाला है, इस इवेंट में आप लोगों के लिए कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए जा सकते हैं. इवेंट के दौरान सस्ते iPhone 17e, नए कम कीमत वाले Macbook, iPad प्रोडक्ट्स की जानकारी मिल सकती है. ऐसा लगता है कि कंपनी स्पेशल Apple एक्सपीरियंस पर फोकस करते हुए एक स्पेशल गैदरिंग कर रही है, इसलिए हो सकता है कि ऑनलाइन इवेंट होस्ट करते या बड़ी घोषणा न की जाए. कंपनी इन डिवाइस को न्यूयॉर्क शहर और दुनिया के दूसरे हिस्सों में कुछ खास लोगों को दिखा सकती है.

    9to5Mac और कुछ और सोर्स की रिपोर्ट में इस इवेंट के इनवाइट का जिक्र किया गया है. दावा किया गया है कि Apple iPhone 17e, बजट MacBook, M5 Pro MacBook Pro और कुछ iPad मॉडल्स के अपग्रेड की घोषणा हो सकती है.

    ये प्रोडक्ट खीचेंगा सबका ध्यान

    बजट MacBook हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचेगा, उम्मीद है कि मैकबुक का सस्ता मॉडल iPhone 16e की तरह नहीं होगा और लाखों लोगों के लिए ये एक मजबूत ऑप्शन बनेगा. यहां आईफोन 16ई का जिक्र इसलिए किया गया है क्योंकि 16ई लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आया है.

    Apple ने iPhone को कई लोगों के लिए आकर्षक बना दिया है. बजट MacBook की भारत में कीमत लगभग 60,000 हजार रुपए ($599) हो सकती है. अर्फोडेबल मैकबुक मॉडल को ए18 प्रो बायोनिक चिपसेट के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इस डिवाइस में 12.9 इंच एलसीडी डिस्प्ले दी जा सकती है और इस मॉडल को ब्लू, येलो और पिंक कलर ऑप्शन्स में ग्राहकों के लिए उतारा जा सकता है.

    M5 MacBook Pro वर्जन में हार्डवेयर अपग्रेड होने की संभावना है लेकिन फिलहाल इस मॉडल के अगले महीने लॉन्च को लेकर किसी भी तरह का कोई संकेत नहीं मिला है.

  • उन्नत तकनीक से खेती कर किसान चिंतामणी ने बढ़ाई अपनी आमदनी

    उन्नत तकनीक से खेती कर किसान चिंतामणी ने बढ़ाई अपनी आमदनी

    रायपुर 

    रायपुर : ग्राफ्टेड बैगन से 16 लाख रूपए की आमदनी

    किसान वैज्ञानिक पद्धति, उन्नत बीज और सही मार्गदर्शन के साथ खेती करें, तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड के ग्राम करही के किसान चिंतामणि बंजारे ने नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया है। उन्होंने परंपरागत सब्जी खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 10 एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर लगभग 1100 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें करीब 16 लाख रुपये की आमदनी हुई है।  

    कृषक चिंतामणी ने बताया कि सामान्य फसल की तुलना में ग्राफ्टेड बैगन में लागत अपेक्षाकृत कम आती है, जबकि उत्पादन अधिक मिलता है, परिणामस्वरूप आय दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है। ग्राफ्टेड बैंगन की विशेषता इसकी मजबूत जड़ प्रणाली, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादन है। पहले वे सामान्य सब्जियों की खेती करते थे, जिसमें लाभ सीमित और जोखिम अधिक था। किंतु उद्यान विभाग के प्रोत्साहन, तकनीकी सलाह और उन्नत पौध सामग्री के उपयोग ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी। उचित सिंचाई प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और नियमित देखभाल से फसल की गुणवत्ता बेहतर रही, जिससे बाजार में उन्हें अच्छा मूल्य प्राप्त हुआ। आज वे आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनके परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ गांव में आधुनिक कृषि की नई सोच को भी प्रोत्साहित किया है।