एक गोल ने बदली बाजी! रोमांचक फाइनल में स्पेन को हराकर जर्मनी ने फिर उठाई वर्ल्ड कप ट्रॉफी

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 एरेना 
बेलफियस एरेना में खेले गए एक बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में जर्मनी ने स्पेन को 1-0 से हराकर लगातार दूसरी बार मेंस हॉकी वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही जर्मनी ने कुल चौथी बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाकर रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। सह-मेजबान बेल्जियम को हराकर फाइनल में पहुंची दोनों टीमों ने बेहतरीन डिफेंसिव खेल दिखाया, लेकिन अंत में जर्मन टीम का धैर्य और आक्रामक रणनीति उस पर भारी पड़ी।

तीसरे क्वार्टर में लगा इकलौता गोल
मैच का सबसे निर्णायक क्षण तीसरे क्वार्टर के आखिरी पलों में आया, जब स्पेन की डिफेंस से एक दुर्लभ चूक देखने को मिली। हानेस मुलर ने स्पेनिश सर्कल के टॉप पर मिली लूज बॉल को लपका और बायलाइन की ओर मौजूद मिशेल स्ट्रूथॉफ को बेहतरीन रिवर्स पास दिया। पॉल-फिलिप कॉफमैन के सहयोग से मिले इस मौके को स्ट्रूथॉफ ने खाली नहीं जाने दिया और स्पेनिश गोलकीपर लुईस काल्जादो को चकमा देते हुए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया।

फैंस को दिखी कांटे की टक्कर
मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। मैच के पहले 90 सेकंड में ही जर्मनी ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर दबाव बनाया, लेकिन बेनेडिक्ट श्वार्जहॉप्ट के ड्रैगफ्लिक को काल्जादो ने शानदार ढंग से रोक दिया। इसके बाद जोर्डी बोनास्ट्रे की अगुआई में स्पेनिश डिफेंस ने जर्मन फॉरवर्ड्स को गोलपोस्ट पर ज्यादा शॉट्स नहीं लेने दिए। वहीं स्पेन को भी तीसरे क्वार्टर में लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन जर्मन डिफेंडर थियो हिंरिच्स के निडर फर्स्ट रश और स्पेनिश कप्तान मार्क मिरालेस व पेपे कुनिल की चूक के कारण वे बराबरी का गोल दागने में नाकाम रहे।

आखिरी मिनट तक रोमांचक रहा मैच
मैच खत्म होने से करीब चार मिनट पहले स्पेन ने जोखिम उठाते हुए गोलकीपर काल्जादो को मैदान से बाहर बुला लिया और अतिरिक्त आउटफील्ड खिलाड़ी उतारा, लेकिन जर्मनी की मजबूत डिफेंस को भेद पाना उनके लिए नामुमकिन साबित हुआ। इस हार के साथ ही स्पेन का अपना पहला वर्ल्ड कप खिताब जीतने का सपना एक बार फिर टूट गया और 1971 और 1998 के बाद उन्हें एक और फाइनल में निराशा हाथ लगी।

 

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