बिहारराज्य

25 साल पहले पंजाब से आया था मोरों का जोड़ा, अब 500 से अधिक मोरों के संरक्षण की तैयारी

 सहरसा
जिले के आरण गांव को सरकार ने राष्ट्रीय पक्ष्री मोर के संरक्षण हेतु मयूर विहार (अभ्यारण्य) के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दिया है। इस गांव में वर्तमान में पांच सौ से अधिक मोर है। आवारा कुत्तों व जंगली जानवरों से इसपर खतरा बना रहता था। 

वर्ष 2016 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस स्थल का भ्रमण किया था। इस बीच अभ्यारण्य के लिए तैयारी शुरू कर दिया गया है। 

जिलाधिकारी व वन विभाग के अधिकारियों ने जमीन चयन के लिए प्रक्रिया तेज कर दिया है। आनेवाले दिनों में इस स्थल को मयूर का अभ्यारण्य के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे यह इलाका प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है।

कहां से आया आरण गांव में मोर
आरण के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार आज से लगभग 25-26 वर्ष पहले गांव के कारी झा, अरविंद यादव अभिनंदन यादव आदि पंजाब में काम करने गए थे। पंजाब में काम करने के दौरान उनलोगों को मोर का झुंड काफी पसंद आया। वे लोग वहां से मोर- मोरनी का एक जोड़ा लेकर गांव आ गए। 

धीरे- धीरे इसकी संख्या बढ़ती गई आज वह लगभग पांच सौ पर पहुंच गई है। मोर गांव में लोगों के दरवाजा, आंगन आदि में विचरण करता है, लोग इसको परेशान नहीं करते, परंतु जानवरों से खतरा बना हुआ है।

अभ्यारण्य बनाने के लिए तेज हुई प्रशासनिक तैयारी
आरण गांव में राज्य स्तरीय ''मयूर विहार'' (मयूर अभ्यारण्य) विकसित करने की प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। वर्षों से इलाके के लोगों की मांग वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस स्थल का निरीक्षण कर मयूर अभ्यारण्य बनाने की बात कही थी। उसके बाद से हालांकि यह मामला ठंडा पड़ गया है, परंतु इस बीच सरकार और जिला प्रशासन ने इसके लिए तैयारी तेज कर दिया है। 

मयूर अभ्यारण्य के विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगभग दो एकड़ सरकारी जमीन को चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने स्वयं अंचलाधिकारी व वन विभाग के अधिकारियों की टीम ने स्थल का मुआयना कर उपयुक्त सरकारी भूखंड तलाशने का निदेश दिया।

प्राकृतिक बसेरा का किया जाएगा निर्माण
मयूर विहार के लिए चिह्नित भूमि पर मोरों के प्राकृतिक रहन-सहन के अनुकूल पेड़-पौधे और झाड़ियां विकसित की जाएगी। इसके साथ ही पानी के लिए तालाब का निर्माण किया जाएगा, ताकि मोरों के लिए पानी और प्राकृतिक भोजन (कीट-पतंगे) की उपलब्धता बनी रहे। 

मयूर विहार परिसर में मोरों की देखरेख के लिए विशेष गार्ड और पशु चिकित्सकों की भी तैनाती की जाएगी। वन विभाग को इस कार्ययोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने का निर्देश दिए गया हैं। सहरसा जिला मुख्यालय से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित आरण गांव में इस अभ्यारण्य के बनने से यह क्षेत्र बिहार के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा। ऐसी संभावना है।

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