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पंजाब का बिजली संकट बना सियासी मुद्दा, किसान-उद्योगपति का प्रदर्शन; पावरकॉम CMD पर गिरी गाज

जालंधर

पंजाब में बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मच गया है। बिजली कटों से परेशान लोगों सड़कों पर उतर आए। वहीं राजनीतिक दलों ने भी सरकार का विरोध किया। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने पीएसपीसीएल के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को हटा दिया और उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त कर दिया। 

सरकार का दावा-संकट खत्म
वहीं विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि पंजाब ने बिजली संकट पर काबू पा लिया है। 13 सितंबर सुबह सात बजे से बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिल रही है। 

सौंद के अनुसार, दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों की तकनीकी खराबियां दूर कर दी गई हैं और एक अन्य निजी प्लांट से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी शुरू हो गई है। किसानों को सिंचाई के लिए आठ के बजाय 10 घंटे बिजली देने का भी दावा किया गया। उन्होंने बिजली संकट के लिए केंद्र से कोयले में कटौती और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने को भी कारण बताया। मंत्री ने कहा कि राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है।

जगह-जगह फूटा गुस्सा
सोमवार को पटियाला में पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेसियों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। जगरांव में किसानों ने चार घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग जाम कर दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया। 
 
लुधियाना में डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम किया। उन्होंने रोजाना करीब 14 घंटे बिजली कटौती का आरोप लगाया। उद्योगपतियों के अनुसार इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और श्रमिक फैक्टरियां छोड़ रहे हैं। उन्होंने बिजली की दर करीब आठ से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट होने और एक फैक्टरी का बिल 15 लाख से बढ़कर 18 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया।

रिकॉर्ड 17,405 मेगावाट मांग, 1,478 मेगावाट उत्पादन ठप
पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज हुई थी। मांग के दबाव के बीच करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी से हाइडल की पांच इकाइयां बंद रहीं। पावरकॉम के मुताबिक इसके बावजूद उद्योग, शहर और गांव में कोई कट नहीं लगाया गया।   

 

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