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  • चीन का Bilibili हुआ ग्लोबल! YouTube को टक्कर देने के लिए दुनियाभर से क्रिएटर्स की तलाश

    चीन का Bilibili हुआ ग्लोबल! YouTube को टक्कर देने के लिए दुनियाभर से क्रिएटर्स की तलाश

    बीजिंग 

    चीन का लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म Bilibili अब अपने घरेलू बाजार से बाहर तेजी से विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने और YouTube जैसी स्थापित वीडियो सेवाओं के सामने एक मजबूत विकल्प खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए Bilibili ने अपने इंटरनेशनल ऐप को फिर से लॉन्च किया है, English-language वेबसाइट तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है और कई देशों में कम्युनिटी तथा क्रिएटर ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारियों की भर्ती कर रही है। कंपनी की मौजूदा ग्लोबल विजन से जुड़ी नौकरी पोस्टिंग भी इस विस्तार की पुष्टि करती हैं।

    बिलिबिली का मुख्य आकर्षण उसका क्रिएटर-फर्स्ट और कम्युनिटी-ड्रिवन मॉडल है। कंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर क्रिएटर्स और मानकों के बीच मजबूत कम्युनिटी संबंध हैं। 2026 की पहली तिमाही में बिलिबिली के मासिक एक्टिव मानकों की संख्या 376 मिलियन से ज्यादा रही, जबकि डेली एक्टिव मानकों के करीब 115.2 मिलियन तक पहुंच गए। औसत यूजर रोज लगभग 119 मिनट प्लेटफॉर्म पर समय बिता रहा था।

    ग्लोबल विस्तार के तहत कंपनी अंतरराष्ट्रीय क्रिएटर्स को यह अवसर देना चाहती है कि वे नए दर्शकों तक पहुंच सकें और अपने कंटेंट से कमाई कर सकें। Bilibili पहले से ही कंटेंट क्रिएटर्स के लिए विज्ञापन, लाइव स्ट्रीमिंग, फैन सपोर्ट और अन्य कमर्शियल माध्यमों का इस्तेमाल करता है। कंपनी की 2025 ESG रिपोर्ट के मुताबिक उस साल करीब 4 मिलियन मासिक सक्रिय कंटेंट क्रिएटर्स प्लेटफॉर्म पर थे और हर महीने लगभग 24 मिलियन वीडियो सबमिट किए जा रहे थे।

    Bilibili के ग्लोबल विस्तार की खास बातें

        इंटरनेशनल यूजर्स के लिए Bilibili के ऐप को नए स्वरूप में पेश किया जा रहा है।
        English-language वेबसाइट पर काम चलने की रिपोर्ट सामने आई है।
        कंपनी विदेशी क्रिएटर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ने और उनकी कम्युनिटी विकसित करने पर फोकस कर रही है।
        अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कम्युनिटी से जुड़े पदों पर भर्ती की जा रही है।
        क्रिएटर्स को नए दर्शकों तक पहुंच और कंटेंट monetisation के अवसर देने पर जोर है।
        कंपनी अपने चीन-केंद्रित प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    बिलिबिली की भर्ती भी उसके अंतरराष्ट्रीय प्लान की ओर संकेत करती हैं। कंपनी ने लॉस एंजिल्स, लंदन, मैक्सिको सिटी, साओ पाउलो, इस्तांबुल और टोक्यो जैसे शहरों में सामुदायिक प्रबंधन और क्रिएटर ऑपरेशंस से संबंधित भूमिकाएं निकाली हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों के लिए भी क्रिएटर ऑपरेशन से जुड़ी नौकरियां दिखाई देती हैं। कंपनी के लिए यह विस्तार पूरी तरह नया कदम नहीं है। बिलिबिली का इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पहले से दक्षिण-पूर्व एशिया के कई बाजारों में उपलब्ध है। कंपनी की ग्लोबल वेबसाइट के अनुसार उसकी सेवा इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर और मलेशिया सहित कई बाजारों में मौजूद है। यहां एनीमे के साथ क्रिएटर वीडियो और यूजर-जनरेटेड कंटेंट भी प्लेटफॉर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    नए ग्लोबल प्रयास में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए साइन-अप प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान की जा रही है। नमूनों के अनुसार नए इंटरनेशनल ऐप में विदेशी स्तरों के लिए पहले मौजूद कुछ पहचान सत्यापन आवश्यकताओं को हटाया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और क्रिएटर्स के लिए प्लेटफॉर्म पर पहुंच आसान बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    कंपनी का मोटो- ग्लोबल विस्तार में मजबूती
    बिलिबिली का बड़ा यूजर बेस कंपनी को ग्लोबल विस्तार में मजबूत शुरुआती स्थिति देता है। 2026 की पहली तिमाही में कंपनी ने 376 मिलियन से अधिक मासिक सक्रिय गुणा दर्ज किए। इसी अवधि में कंपनी का कुल राजस्व 7.47 अरब चीनी युआन रहा और विज्ञापन से आय सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़कर 2.59 अरब युआन पहुंची। इससे साफ है कि बिलिबिली के पास केवल बड़ा दर्शक वर्ग ही नहीं, बल्कि मजबूत मुद्रीकरण पारिस्थितिकी तंत्र भी मौजूद है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विस्तार Bilibili के लिए आसान नहीं होगा। YouTube जैसे स्थापित प्लेटफॉर्म पहले से ही दुनिया के अधिकांश बड़े डिजिटल वीडियो बाजारों में मजबूत पकड़ रखते हैं। बिलिबिली को नए देशों में क्रिएटर्स को आकर्षित करने के साथ-साथ दर्शकों को भी यह भरोसा दिलाना होगा कि वह उन्हें पर्याप्त reach, engagement और कमाई के अवसर दे सकता है।

    इसके अलावा चीन से जुड़ी किसी भी बड़ी टेक कंपनी के ग्लोबल विस्तार के साथ रेगुलेटरी जांच भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। सामग्री मॉडरेशन, सेंसरशिप, यूजर डेटा और डेटा सिक्योरिटी जैसे सवाल अलग-अलग देशों में कंपनी के लिए चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। चीन की कंपनियों के स्वामित्व वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म को पहले भी इन मुद्दों को लेकर कई बाजारों में नियामकीय सवालों का सामना करना पड़ा है। बिलिबिली के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग देशों के नियमों और स्थानीय डिजिटल संस्कृति के बीच संतुलन बनाने की होगी। जिस कम्युनिटी कल्चर ने इसे चीन में मजबूत बनाया है, उसे अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य बाजारों में उसी रूप में लागू करना आसान नहीं होगा। स्थानीय भाषा, सामग्री पसंद, मॉडरेशन पॉलिसी और क्रिएटर मोनेटाइजेशन को हर बाजार के अनुरूप ढालना कंपनी के ग्लोबल प्लान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

    अगर कंपनी ने अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय विस्तार की अंतिम समयसीमा या सभी देशों की विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन इंटरनेशनल ऐप, अंग्रेजी वेबसाइट की तैयारी और विभिन्न देशों में क्रिएटर तथा कम्युनिटी रोल्स के लिए भर्ती से संकेत मिलता है कि बिलिबिली अब वैश्विक वीडियो बाजार में अपनी पहचान को जुटा से बढ़ाना चाहती है। यदि कंपनी अपने बड़े यूजर बेस और क्रिएटर-सेंट्रिक मॉडल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलतापूर्वक दोहरा पाती है, तो YouTube समेत अन्य वीडियो प्लेटफॉर्म के लिए प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

  • YouTube का बड़ा फैसला: Monetization के लिए बढ़ी शर्तें, 1,000 सब्सक्राइबर के साथ ये टारगेट करना होगा पूरा

    YouTube का बड़ा फैसला: Monetization के लिए बढ़ी शर्तें, 1,000 सब्सक्राइबर के साथ ये टारगेट करना होगा पूरा

    मुंबई 
    YouTube ने अपने YouTube Partner Program यानी YPP के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी के मुताबिक 2018 के बाद इतना बड़ा बदलाव किया जा रहा है. नए नियमों के तहत YouTube Partner Program में शामिल होने के लिए नए क्रिएटर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा वॉच टाइम या Shorts व्यूज हासिल करने होंगे. नए नियम 1 फरवरी 2027 से लागू होंगे। 

    2027 से YPP में शामिल होना होगा मुश्किल
    YouTube ने बताया कि 1 फरवरी 2027 से YouTube Partner Program में आवेदन करने वाले नए क्रिएटर्स को पिछले एक साल में कम से कम 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स हासिल करने होंगे. इसके अलावा Shorts के जरिए YPP में शामिल होने वाले क्रिएटर्स के लिए पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज की शर्त रखी गई है। 

    ये मौजूदा नियमों की तुलना में बड़ा बदलाव है. फिलहाल YPP में शामिल होने के लिए क्रिएटर के पास 1,000 सब्सक्राइबर और पिछले 365 दिनों में 4,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स होने चाहिए. Shorts के मामले में 1,000 सब्सक्राइबर के साथ पिछले 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज की जरूरत होती है. हालांकि, YouTube ने साफ किया है कि फैन फंडिंग और शॉपिंग प्रोडक्ट्स के लिए एंट्री थ्रेशोल्ड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

    Shorts से कमाई के लिए भी बदले नियम
    YouTube ने Shorts से होने वाली कमाई के नियमों में भी बदलाव किया है. नए नियमों के तहत Shorts से विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू शेयरिंग पाने के लिए क्रिएटर्स को पिछले 90 दिनों में कम से कम 1 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज हासिल करने होंगे. ये नियम भी 1 फरवरी 2027 से लागू होगा. हालांकि, अगर किसी क्रिएटर के Shorts व्यूज इस लाइन तक नहीं पहुंचते हैं, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह YouTube Partner Program से बाहर हो जाएगा. ऐसे क्रिएटर्स YPP का हिस्सा बने रह सकते हैं और लंबे वीडियो यानी लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट से मिलने वाले रेवन्यू के लिए एलिजिबल रहेंगे। 

    YouTube ने क्यों बदले नियम?
    कंपनी का कहना है कि ये बदलाव YouTube के तेजी से बढ़ते प्लेटफॉर्म को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं. YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर अब हर दिन 200 अरब से ज्यादा Shorts व्यूज आते हैं. इसके अलावा टीवी स्क्रीन पर हर दिन 100 करोड़ घंटे से ज्यादा YouTube कंटेंट देखा जाता है। 

    कंपनी का मानना है कि प्लेटफॉर्म के बढ़ते स्तर और क्रिएटर इकॉनमी में बदलाव के साथ Partner Program की शर्तों को भी अपडेट करना जरूरी है. YouTube ने ये भी कहा है कि 2027 में वह क्रिएटर्स को 2026 की तुलना में और ज्यादा पेमेंट करने की उम्मीद कर रहा है। 

    YouTube Partner Program की मौजूदा शर्तें-

        1,000 सब्सक्राइबर
        पिछले 365 दिनों में 4,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स

    या

        1,000 सब्सक्राइबर
        पिछले 90 दिनों में 1 करोड़ Shorts व्यूज

    1 फरवरी 2027 से नई शर्तों के तहत-

    पिछले एक साल में 8,000 क्वालिफाइड वॉच आवर्स

    या

    पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ क्वालिफाइड Shorts व्यूज
    हालांकि, ये साफ नहीं किया गया है कि नई शर्तों के साथ 1,000 सब्सक्राइबर की मौजूदा शर्त भी उसी रूप में जारी रहेगी या उसमें कोई अलग बदलाव होगा। 

    Premium Lite प्लान भी हुआ उपलब्ध
    YouTube ने Partner Program के नियमों में बदलाव के साथ Premium Lite प्लान को भी ज्यादा क्षेत्रों में उपलब्ध कराने की घोषणा की है. कंपनी के मुताबिक Premium Lite अब "सभी देशों" में उपलब्ध है. इस प्लान में यूजर्स को ज्यादातर कंटेंट पर कम विज्ञापन देखने को मिलेंगे. इसके अलावा यूजर्स वीडियो डाउनलोड करके ऑफलाइन देख सकेंगे और बैकग्राउंड प्लेबैक की सुविधा भी मिलेगी। 

    2026 में YPP के 20 साल पूरे
    YouTube ने 2006 में Partner Program शुरू किया था. इस हिसाब से 2026 में YouTube Partner Program को शुरू हुए 20 साल पूरे हो रहे हैं. इन वर्षों में कंपनी ने क्रिएटर्स के साथ रेवेन्यू शेयरिंग के नियमों में कई बदलाव किए हैं. अब 2018 के बाद पहली बार YPP की शर्तों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है. नए नियम खास तौर पर उन क्रिएटर्स को प्रभावित करेंगे जो YouTube से विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन के जरिए कमाई शुरू करना चाहते हैं. Shorts पर निर्भर नए क्रिएटर्स के लिए 2 करोड़ व्यूज का नया टारगेट पहले की तुलना में काफी ज्यादा है। 

  • यूट्यूब ला रहा है Auto Speed और On-the-go फीचर, वीडियो देखने का तरीका बदलेगा

    यूट्यूब ला रहा है Auto Speed और On-the-go फीचर, वीडियो देखने का तरीका बदलेगा

    यूट्यूब अपने प्रीमियम यूज़र्स के लिए एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए-नए प्रयोग करता रहता है और नए फीचर्स को पेश करता रहता है. इस बार यूट्यूब दो नए फीचर्स को टेस्ट कर रहा है, जिसका नाम "Auto Speed" और "On-the-go" को टेस्ट करना शुरू किया है, जो खासतौर पर मोबाइल यूज़र्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. फिलहाल, ये दोनों फीचर्स एंड्रॉयड ऐप में एक्सपेरिमेंटल रूप में उपलब्ध हैं और यूज़र्स को इन फीचर्स को मैनुअली ऑन करना होगा.

    पहला अपकमिंग फीचर
    "Auto Speed" फीचर वीडियो देखने के तरीके और एक्सपीरियंस को पूरी तरह से बदल सकता है. अभी तक यूज़र्स को खुद से 1.5x या 2x जैसी स्पीड चुननी पड़ती थी, लेकिन इस नए फीचर में वीडियो की स्पीड आप कंटेंट के अनुसार बदलती रहती है. इसका मतलब है कि जहां वीडियो में स्लो और समझने वाली जानकारी होगी, वहां स्पीड सामान्य रहेगी और जगां पर कम जरूरी जानकारी या रिपीट होने वाला हिस्सा होगा, वहां पर स्पीड अपने-आप तेज हो जाएगी. यह फीचर कई लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, खासतौर पर कुकिंग, ट्यूटोरियल या एक्सप्लेनेशन वीडियो देखने वाले यूज़र्स इसका काफी फायदा उठा सकते हैं.

    ऐसे यूज़र्स कई बार वीडियो की प्लेबैक स्पीड को फास्ट करके वीडियो देखते हैं, लेकिन उसी वीडियो में किसी जरूरी हिस्से को समझने के दौरान उन्हें प्ले स्पीड को स्लो करनी पड़ती है. ऐसे में अब ऑटो-स्पीड नाम का फीचर यूज़र्स की इस समस्या को खत्म कर सकता है.

    दूसरा अपकमिंग फीचर
    यूट्यूब प्रीमियम में आने वाले दूसरे फीचर का नाम "On-the-go" है. इस फीचर का भी टेस्ट किया जा रहा है. इस फीचर को कंपनी ने उन यूज़र्स के लिए डिज़ाइन किया है, जो चलते-फिरते वीडियो देखते हैं. यह फीचर फोन की मूवमेंट को पहचानकर अपने आप एक्टिव हो सकता है, या फिर यूज़र इसे मैन्युअली भी ऑन कर सकते हैं. एक्टिव होने के बाद वीडियो का इंटरफेस काफी सरल हो जाता है, जिससे प्ले, पॉज़ और टाइमलाइन जैसे जरूरी कंट्रोल्स आसानी से एक्सेस किए जा सकते हैं. इसके अलावा डाउनलोड जैसे ऑप्शन भी ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखाई दे सकते हैं.

    हालांकि, ये दोनों फीचर्स अभी टेस्टिंग स्टेज में हैं, इसलिए इनकी परफॉर्मेंस और स्टेबिलिटी पूरी तरह फाइनल नहीं है. रिपोर्ट्स के अनुसार "Auto Speed" ठीक से काम कर रहा है, जबकि "On-the-go" अभी थोड़ा अनस्टेबल लग रहा है. यूट्यूब ने इन्हें सीमित समय के लिए उपलब्ध कराया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 27 अप्रैल के बाद फैसला लेगी कि इन फीचर्स को सभी यूज़र्स के लिए रोलआउट किया जाएगा या नहीं.