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  • UP के पूर्व खिलाड़ियों के लिए योगी सरकार की सौगात, हर महीने मिलेगी आर्थिक सहायता

    UP के पूर्व खिलाड़ियों के लिए योगी सरकार की सौगात, हर महीने मिलेगी आर्थिक सहायता

    योगी सरकार ने पूर्व खिलाड़ियों को दिया सम्मान, मिल रही मासिक आर्थिक सहायता

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में 223 पूर्व खिलाड़ियों को मिली आर्थिक सहायता

    अर्जुन पुरस्कार विजेताओं से लेकर राज्य स्तरीय खिलाड़ियों तक को लाभ

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले भूतपूर्व खिलाड़ियों के सम्मान और उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए भी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में खेल विभाग की भूतपूर्व खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता योजना पूर्व खिलाड़ियों के लिए बड़ा संबल बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 223 पूर्व खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

    इस योजना का लाभ अर्जुन, द्रोणाचार्य, ध्यानचंद और खेल रत्न पुरस्कार विजेताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय खिलाड़ियों को भी मिल रहा है। इस तरह सरकार की इस पहल से न केवल खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है, बल्कि उनके योगदान को सम्मान भी प्राप्त हो रहा है। खेल जगत इसे खिलाड़ियों के प्रति योगी सरकार की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण उदाहरण मान रहा है।

    52 अर्जुन पुरस्कार विजेताओं को 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता मिली

    प्रदेश सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, ध्यानचंद पुरस्कार और खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ियों तथा खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के आधार पर पद्मश्री एवं पद्मभूषण सम्मान प्राप्त खिलाड़ियों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित खिलाड़ियों के लिए किसी प्रकार की आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 52 अर्जुन पुरस्कार विजेताओं को प्रतिमाह 20-20 हजार रुपये की सहायता दी गई।

    राज्य से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के पूर्व खिलाड़ियों को मिल रही सहायता

    इसी प्रकार 9 द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं, 5 ध्यानचंद पुरस्कार विजेताओं और 2 पद्मश्री सम्मानित खिलाड़ियों को भी प्रतिमाह 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। योजना का लाभ केवल राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने उन खिलाड़ियों को भी इस योजना में शामिल किया है जिन्होंने विभिन्न स्तरों पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इसके तहत राज्य स्तर के 126 भूतपूर्व खिलाड़ियों को प्रतिमाह 4 हजार रुपये, राष्ट्रीय स्तर के 24 खिलाड़ियों को 6 हजार रुपये प्रतिमाह और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 5 भूतपूर्व खिलाड़ियों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी गई।

    हॉकी, तैराकी, फुटबाल समेत कुल 31 खेल शामिल

    इन खिलाड़ियों के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए उनकी मासिक आय 20 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही खिलाड़ी का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। योजना के संचालन की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी बनाई गई है। खेल विभाग संबंधित जिलों के खेल अधिकारियों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराता है। जनपद स्तर के खेल अधिकारी लाभार्थी खिलाड़ियों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता हस्तांतरित करते हैं। 

    इसमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, नेटबाल, टेनिस, हॉकी, तैराकी, टेबल टेनिस, तलवारबाजी, जिम्नास्टिक, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, वुशू, फुटबाल, हैंडबाल, क्रिकेट, बॉक्सिंग, कबड्डी, कुश्ती और शूटिंग समेत कुल 31 खेल शामिल हैं।

    सरकार का प्रयास, हर पात्र पूर्व खिलाड़ी को योजना का लाभ मिले- निदेशक

    यूपी के खेल निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के सम्मान, कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ इस योजना का संचालन कर रहा है और पात्र खिलाड़ियों के बैंक खातों में प्रतिमाह सीधे धनराशि हस्तांतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक पात्र भूतपूर्व खिलाड़ी को इस योजना का लाभ समयबद्ध ढंग से मिले। यह योजना खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

  • यूपी की लाखों महिलाओं के लिए खुशखबरी, CM योगी देंगे मुफ्त मकान और स्वास्थ्य सुरक्षा का फायदा

    यूपी की लाखों महिलाओं के लिए खुशखबरी, CM योगी देंगे मुफ्त मकान और स्वास्थ्य सुरक्षा का फायदा

     लखनऊ

    उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए योगी सरकार बड़ी तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में पात्र महिलाओं को मुफ्त आवास और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है. इसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. महिला कल्याण विभाग लाभार्थियों का डाटा जुटाने में लगा है। 

    सरकार की योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिया जाएगा. इसका उद्देश्य उन महिलाओं को नई शुरुआत का अवसर देना है, जो सामाजिक या पारिवारिक संकटों के कारण असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। 

    किन महिलाओं को मिलेगा लाभ

    सरकारी तैयारी के अनुसार तीन श्रेणियों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. जिसमें पहले तीन तलाक से प्रभावित महिलाएं, दूसरे पर एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं और तीसरे पर निराश्रित एवं बेसहारा महिलाएं होंगी. इन महिलाओं को आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की व्यापक योजना पर काम शुरू हो चुका है. सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सम्मानजनक जीवन के लिए स्थायी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। 

    मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिका
    रियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसी महिलाओं की पहचान की जाए जो गंभीर सामाजिक संकटों का सामना कर चुकी हैं और जिनके पास रहने के लिए सुरक्षित घर नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा था कि तीन तलाक और एसिड अटैक जैसी घटनाओं से प्रभावित महिलाओं को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके तहत पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 

    महिला कल्याण विभाग जुटा रहा विस्तृत डाटा
    सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए महिला कल्याण विभाग ने व्यापक स्तर पर डाटा संग्रहण अभियान शुरू कर दिया है. विभाग तीन तलाक, एसिड अटैक और निराश्रित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित कर रहा है. इसके लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र महिला सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए. अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की पहचान के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा. इसके लिए शासन स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। 

    क्यों खास है यह पहल?
    विशेषज्ञों का मानना है कि एसिड अटैक और तीन तलाक जैसी घटनाएं किसी महिला के जीवन को पूरी तरह बदल देती हैं. एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, प्लास्टिक सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता पड़ती है. वहीं तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं अचानक आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा के दायरे में आ जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों में यदि उन्हें सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है तो वे दोबारा आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकती हैं. यही वजह है कि सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि महिलाओं को स्थायी सुरक्षा देने के लिए बहुआयामी योजना पर काम कर रही है। 

    आवास के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा भी
    सरकार की इस योजना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सुरक्षा है. कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के पास इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते. आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को लाखों रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है. वहीं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. सरकार चाहती है कि जिन महिलाओं को आवास मिलेगा, उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी समान रूप से उपलब्ध हो ताकि वे भविष्य को लेकर निश्चिंत रह सकें। 

    जानकारी के अभाव में नहीं छूटेगा कोई लाभार्थी
    महिला कल्याण विभाग का कहना है कि अक्सर कई पात्र लोग केवल जानकारी के अभाव या जटिल प्रक्रियाओं के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते. इसी समस्या को देखते हुए विभाग विभिन्न जिलों से डाटा जुटा रहा है और पात्र महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है. सरकार का प्रयास है कि लाभार्थी महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें एकीकृत व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ मिल सके।