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  • पात्र परिवारों को बेटी के विवाह के लिए सीधे बैंक खाते में मिल रहे 20 हजार रुपये

    पात्र परिवारों को बेटी के विवाह के लिए सीधे बैंक खाते में मिल रहे 20 हजार रुपये

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एक लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए

    210 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 107.092 करोड़ रुपये की सहायता वितरित

    लखनऊ
    आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी परिवारों की बेटियों के विवाह में सहायता के लिए संचालित शादी अनुदान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 53 हजार से अधिक पात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। योगी सरकार की इस पहल से जरूरतमंद परिवारों को बेटी के विवाह के दौरान होने वाले खर्च में राहत मिल रही है। सरकार का उद्देश्य पात्र परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराकर बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोग देना है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत 1 लाख 5 हजार पात्र लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 210 करोड़ रुपये का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। अब तक योजना के अंतर्गत 1,09,697 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 53,546 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा चुका है। इन लाभार्थियों को कुल 107.092 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।

    पात्र परिवारों को 20 हजार रुपये की मदद
    शादी अनुदान योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रूपये तक है। विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। योजना की आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग, विधवा, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे योजना का लाभ उन परिवारों तक पहुंचाने पर विशेष जोर है, जिन्हें विवाह के खर्च को पूरा करने में अधिक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    प्रदेश सरकार का लक्ष्य पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से सहायता उपलब्ध कराना है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे में शादी अनुदान योजना उनके लिए आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। सरकार की इस पहल को जरूरतमंद परिवारों के लिए राहतकारी कदम माना जा रहा है, जिससे बेटियों के सम्मानजनक विवाह में सहयोग मिलने के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कम हो रहा है।

    शादी अनुदान योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत
    पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक अस्मिता लाल ने बताया कि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 53,546 पात्र लाभार्थियों को 107.092 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी के विवाह के लिए 20 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 1 लाख 5 हजार लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देना और पात्र परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराना है।

  • 10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा और बीएससी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ले सकेंगे हिस्सा

    10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा और बीएससी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ले सकेंगे हिस्सा

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए चलाए जा रहे रोजगार मिशन को लगातार गति मिल रही है। इसी क्रम में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), अलीगंज, लखनऊ में आगामी 16 अक्टूबर 2026 को वृहद रोजगार मेले (कैंपस प्लेसमेंट) का आयोजन किया जा रहा है। प्रातः 10 बजे से आयोजित होने वाले इस रोजगार मेले में प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनियों द्वारा कुल 800 रिक्त पदों पर युवाओं का चयन किया जाएगा।

    रोजगार मेले में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी बैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएंगी। यह पहल प्रदेश के युवाओं को उनके तकनीकी कौशल और शैक्षिक योग्यता के अनुरूप सीधे उद्योगों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    हीरो मोटोकॉर्प में 300 पदों पर चयन
    हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड द्वारा अप्रेंटिसशिप योजना एवं प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के तहत कुल 300 पदों पर चयन किया जाएगा। इनमें 150 पद पुरुष और 150 पद महिला अभ्यर्थियों के लिए हैं।आईटीआई अप्रेंटिस के 150 पदों पर फिटर, टर्नर, एमएमवी, मशीनिस्ट, वेल्डर और इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई उत्तीर्ण 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन होगा। चयनित अभ्यर्थियों को ₹17,060 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलेगा। एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप के बाद एक वर्ष टीटीएस के तहत ₹18,060 प्रतिमाह वेतन देय होगा।

    वहीं पीएमआईएस-स्टूडेंट ट्रेनी के 150 पदों पर 10वीं/12वीं उत्तीर्ण गैर-आईटीआई अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को कुल ₹23,321 प्रतिमाह का लाभ मिलेगा, जिसमें ₹15,221 कंपनी तथा ₹8,100 केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में दिए जाएंगे।

    बैक्स एनर्जी में 500 पदों पर रोजगार
    नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत बैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 500 पुरुष अभ्यर्थियों का कंपनी रोल्स पर चयन किया जाएगा। इसके लिए 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी पात्र होंगे।

    द्वारका (गुजरात) सोलर प्रोजेक्ट तथा तमिलनाडु-कर्नाटक विंड पावर प्लांट के लिए आईटीआई तकनीकी एवं बीएससी ग्रेजुएट अभ्यर्थियों का टेक्नीशियन/हेल्पर पद पर ₹17,000 मासिक सीटीसी तथा मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा धारकों का ट्रेनी/टेक्नीशियन पद पर ₹18,000 मासिक सीटीसी पर चयन किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को पीएफ, ईएसआईसी सहित अन्य लागू सुविधाएं भी मिलेंगी।

    युवाओं के लिए रोजगार के साथ सुविधाएं भी
    हीरो मोटोकॉर्प में चयनित अभ्यर्थियों को रेवाड़ी, हरियाणा स्थित प्लांट के लिए तीन दिन का होटल स्टे, यूनिफॉर्म, सुरक्षा जूते, कैंटीन सुविधा, ₹1 लाख का मेडिक्लेम, सवेतन अवकाश और अनुभव प्रमाण पत्र जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। चयन में निर्धारित शारीरिक मानकों के साथ ड्राइविंग लाइसेंस धारकों को वरीयता दी जाएगी।

    16 अक्टूबर को आईटीआई अलीगंज में पहुंचें अभ्यर्थी
    प्लेसमेंट अधिकारी एम. ए. खां ने बताया कि इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी 16 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे राजकीय आईटीआई, अलीगंज, लखनऊ परिसर में पहुंचकर साक्षात्कार में शामिल हो सकते हैं। अभ्यर्थियों को अपने साथ 10वीं, 12वीं, आईटीआई अथवा डिप्लोमा की अंकतालिका व प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की छायाप्रति, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति तथा चार पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य होगा। हीरो मोटोकॉर्प से संबंधित जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 9118561562 जारी किया गया है।

  • 74 अभ्यर्थियों का यूपीपीएससी में हुआ चयन,  युवाओं को मिली नई उड़ान

    74 अभ्यर्थियों का यूपीपीएससी में हुआ चयन, युवाओं को मिली नई उड़ान

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में समाज कल्याण विभाग की पहल रंग ला रही है। इसी क्रम में रविवार को गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में पहली एल्यूमिनाई मीट का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सफल अभ्यर्थियों से अपने अनुभव और ज्ञान को दूसरे विद्यार्थियों के साथ साझा करने का आह्वान किया। इस वर्ष समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित कोचिंग संस्थानों से यूपीपीएससी में 74 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। यह उपलब्धि विभाग की तैयारी संबंधी व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों के परिश्रम को दर्शाती है।

    सफलता के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान
    मंत्री असीम अरुण ने कहा कि भागीदारी भवन से सफलता हासिल करना कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। वास्तविक सफलता तभी सार्थक होती है, जब उससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने सफल अभ्यर्थियों से ‘गिव बैक टू सोसाइटी’ की भावना के साथ आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि चयनित अधिकारी वर्तमान विद्यार्थियों को नियमित मार्गदर्शन दें और अपनी तैयारी के अनुभव साझा करें, ताकि अधिक से अधिक युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें।

    मेंटरशिप और डिजिटल शिक्षा से मजबूत होगी तैयारी
    कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन मेंटरशिप सत्र आयोजित करने, मॉक इंटरव्यू कराने तथा अध्ययन सामग्री और परीक्षा रणनीति से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभाशाली युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन पहुंचाने के लिए ऑनलाइन कक्षाओं, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से निरंतर ‘चेन रिएक्शन’ व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके तहत सफल अभ्यर्थियों से मिले मार्गदर्शन का लाभ आगे अन्य विद्यार्थियों तक पहुंचाने की परिकल्पना की गई है।

    पारदर्शी प्रशासन और युवाओं के सहयोग का संकल्प
    एल्यूमिनाई मीट में चयनित अभ्यर्थियों ने जरूरतमंद विद्यार्थियों को निरंतर मेंटरशिप देने और अध्ययन सामग्री, परीक्षा रणनीति तथा साक्षात्कार के अनुभव साझा करने के लिए स्थायी नेटवर्क तैयार करने का संकल्प लिया। मंत्री ने प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों से वंचित, ग्रामीण और जरूरतमंद वर्गों की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने तथा निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ दायित्व निभाने की अपेक्षा की। इस दौरान समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव, एडिशनल एसपी संजय सागर, उप निदेशक आनंद कुमार सिंह, जॉइंट कमिश्नर (राज्य कर) सुरेंद्र सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी पवन कुमार यादव और शैलेश राम सहित कई अधिकारी, शिक्षक एवं अभ्यर्थी उपस्थित रहे।

  • दशहरा-दीपावली पर स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की तैयारी में जुटी योगी सरकार

    दशहरा-दीपावली पर स्वच्छता, सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की तैयारी में जुटी योगी सरकार

    लखनऊ
    योगी सरकार आगामी दशहरा, दीपावली सहित अन्य त्योहारों पर प्रदेशवासियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयारियों में जुट गई है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में व्यापक साफ-सफाई, सड़कों को गड्ढामुक्त करने, जल निकासी, कूड़ा निस्तारण, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। साथ ही मंदिरों, पूजा पंडालों और मूर्ति विसर्जन मार्गों पर विशेष सफाई अभियान चलाने तथा सड़कों की मरम्मत समय से पूरी कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने नगर आयुक्तों से त्योहारों की तैयारियों की जानकारी लेकर व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा है।

    विद्युत सुरक्षा और निर्बाध आपूर्ति पर विशेष जोर
    ऊर्जा मंत्री ने त्योहारों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के साथ विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूजा पंडालों का निरीक्षण कर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने और जुलूस व शोभायात्राओं के मार्गों पर बिजली के तारों का सर्वेक्षण कराने के भी निर्देश दिए। मंत्री ने ढीले या नीचे लटके तारों को तत्काल दुरुस्त करने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया है।

    ऊर्जा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान रात के समय भी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने कुशल संविदा कर्मियों को फिर सेवा में रखने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए, ताकि विद्युत व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में अनुभवी कर्मियों की सेवाएं ली जा सकें।

  • यूपी में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की तैयारी, विभागीय जांच के लिए तय हुए नए नियम और 10 जरूरी बिंदु

    यूपी में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की तैयारी, विभागीय जांच के लिए तय हुए नए नियम और 10 जरूरी बिंदु

    भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह

    जांच प्रक्रिया में एकरूपता के लिए लागू हुआ मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची

    हर आरोप का अलग परीक्षण, साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दर्ज होगा स्पष्ट एवं कारणयुक्त निष्कर्ष

    जांच की हर प्रक्रिया का होगा अभिलेखीकरण, कमियों वाली रिपोर्ट को पूर्णता के लिए लौटाया जाएगा

    जांच और दंड निर्धारण की भूमिका अलग, सक्षम प्राधिकारी ही करेगा नियमों के तहत अंतिम निर्णय

    समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने जारी किया शासनादेश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विभागीय जांच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है। समाज कल्याण विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची लागू की है। विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। 

    जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता

    योगी सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभागीय जांच प्रक्रिया को स्पष्ट एवं व्यवस्थित किया है। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत जांच अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण करना होगा। इससे जांच आख्या की गुणवत्ता बेहतर होगी और शासन स्तर पर मामलों के परीक्षण में भी स्पष्टता आएगी।

    प्रत्येक आरोप का होगा स्वतंत्र और साक्ष्य आधारित परीक्षण

    नई व्यवस्था की खास बात यह है कि आरोप-पत्र में दर्ज प्रत्येक आरोप का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा। जांच अधिकारी को आरोप, संबंधित अधिकारी के उत्तर, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के साथ मौखिक सुनवाई का विवरण भी दर्ज करना होगा। इसके आधार पर प्रत्येक आरोप के संबंध में स्पष्ट और कारणयुक्त निष्कर्ष दिया जाएगा। इससे विभागीय जांच प्रक्रिया अधिक तथ्यपरक और निष्पक्ष बनेगी।

    10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची से मजबूत होगी व्यवस्था

    जांच आख्या के साथ 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची और अनुपालन प्रमाण-पत्र संलग्न करना जरूरी होगा। इसमें आरोप-पत्र की तामीली, लिखित उत्तर, अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर, गवाहों की जिरह और मौखिक सुनवाई सहित आवश्यक प्रक्रियाओं का विवरण शामिल होगा। निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा पालन नहीं होने पर जांच आख्या को पूर्णता के लिए वापस भेजा जा सकेगा। इससे जांच प्रक्रिया में गुणवत्ता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी।

    जांच और दंड निर्धारण की भूमिका स्पष्ट, निष्पक्षता को मिलेगा बल

    योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे। दंड के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार लिया जाएगा। इससे विभागीय जांच में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया मजबूत होगी।

  • गोमती के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का राहत अभियान तेज

    गोमती के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का राहत अभियान तेज

    लखनऊ

    गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों में योगी सरकार के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार तेज किए जा रहे हैं। बुधवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने पूरे दिन जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने जोन-6 के सैठा तथा जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    12 अस्थायी रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों को आश्रय

    नगर आयुक्त ने जलभराव की स्थिति के साथ नावों के संचालन, पेयजल, स्वच्छता, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और राहत सुविधाओं की समीक्षा की। प्रभावित इलाकों में करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। साथ ही 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है। जलभराव प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं, इनमें दाउद नगर में 10 तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक अस्थायी रैन बसेरा शामिल है। जबकि जोन-6 में करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 26 लोग रैन बसेरे में रह रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। रैन बसेरों में बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, प्रकाश व्यवस्था और मोबाइल के लिए 12 चार्जिंग पॉइंट की सुविधा दी गई है।

    प्रभावित इलाकों में 90 नावों से रेस्क्यू अभियान

    राहत कार्यों के तहत जिला प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हैं। नगर निगम की टीमें राहत सामग्री की लोडिंग, अनलोडिंग और वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रही हैं। दाउद नगर में दो शिफ्टों में 25-25 कर्मचारियों तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में 25-25 कर्मचारियों को लगाया गया है। जोन-6 के सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों में नावों एवं स्टीमर से लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य जारी है। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे एक नाव विशेष रूप से राहत सामग्री वितरण के लिए लगाई गई है।

    250 सफाईकर्मियों के साथ फॉगिंग अभियान तेज

    स्वच्छता और बीमारी से बचाव के लिए यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है। इसमें जोन-3 और जोन-6 के क्षेत्र शामिल हैं। जलभराव वाले ऐसे स्थानों, जहां सामान्य मशीनों से पहुंचना कठिन है, वहां ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया जा रहा है। छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के अलावा एलएसए की दो बड़ी मशीनों से भी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।

    अस्थायी भंडार केंद्र का भी किया निरीक्षण

    निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती युनिवर्सिटी में बनाए गए अस्थायी भंडार केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था देखी तथा सामग्री के व्यवस्थित रख-रखाव और आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों तक समय से पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।

    पानी उतरते ही शुरू होगा विशेष सफाई अभियान

    नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान राहत कार्यों के साथ ही जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी भी पूरी रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें निर्धारित की जा रही हैं। पानी उतरते ही इन टीमों द्वारा सड़कों और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे एवं गंदगी की सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर, एंटी लार्वा और आवश्यक दवाओं का छिड़काव तथा फॉगिंग कराया जाएगा। इसका उद्देश्य जलभराव के बाद संक्रामक एवं मच्छरजनित बीमारियों के संभावित प्रसार को नियंत्रित करना है।

  • जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    जमीन का Land Use बदलवाने के नियम बदले, 6000 वर्गमीटर तक बोर्ड देगा मंजूरी; फीस

    लखनऊ
    यूपी में लैंड यूज बदलवाना अब आसान और सस्ता हो गया है। अगर आप 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू-उपयोग परिवर्तन कराना चाहते हैं तो आपको लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना होगा। योगी सरकार ने 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल सीमा तक के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों के बोर्ड को दे दिया है। शासन ने एक और बड़ी राहत यह दी है कि अब भू-उपयोग परिवर्तन का शुल्क भी काफी कम कर दिया है। ये दरें पांच प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गईं हैं। हालांकि इस बड़ी राहत के साथ यह भी शर्त रखी है कि किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही परिवर्तन बोर्ड कर सकता है।

    अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए सारी फाइलों को शासन को ही भेजना पड़ता था। केडीए बोर्ड बस इसकी संस्तुति करता था। जब तक भू-उपयोग परिवर्तन होता था या इसके आवेदनों की फाइलों को निरस्त कर दिया जाता था तब तक विकास कार्यों से संबंधित सामग्रियों की दरें भी काफी बढ़ चुकी होती थीं। शासन ने 6000 वर्ग मीटर तक की जमीनों के आवेदकों को प्राधिकरण बोर्ड स्तर से ही हरी झंडी देने का अधिकार दे दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद का आदेश कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भी पहुंच गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है।

    परिवर्तन शुल्क की किस्तों में भी राहत
    अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की किश्तों में भी राहत दी गई है। पहले इस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से साधारण ब्याज के साथ एक वर्ष में दिया जा सकता था मगर अब चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर प्लस वन प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष को आवेदन करने पर यह अवधि एक वर्ष और बढ़ सकती है।

    ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं में बदलाव नहीं
    शासन ने यह भी शर्त रख दी है कि ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जाएगा। मसलन जो जमीन एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क आदि के लिए मास्टर प्लान में निर्धारित की गई है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित किया जाना है उसमें भी मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो।

    लैड यूज बदलने के लिए इस तरह से देना होगा चार्ज
    केडीए के सचिव अभय कुमार पांडेय के अनुसार शासन का आदेश आ चुका है। नोटिफिकेशन में दिए गए नियमों और संशोधित किए नियमों का पालन कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। केडीए बोर्ड को 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू उपयोग बदलने का अधिकार मिल गया है। इसके अनुपालन की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है।

  • योगी सरकार के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से मिलेगी नई गति

    योगी सरकार के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से मिलेगी नई गति

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, नवाचार और तकनीकी विकास को लगातार गति दे रही है। इसी क्रम में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की भूमिका को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को योजना भवन, लखनऊ में विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री श्री सुनील कुमार शर्मा ने की।

    बैठक में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न नीतियों, योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तकनीक आधारित विस्तार देने की आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। आईटी नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग नीति, सेमीकंडक्टर नीति, डेटा सेंटर नीति, स्टार्टअप नीति और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) से जुड़े प्रावधानों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई।

    आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को विकास का प्रमुख आधार बनाने पर जोर

    बैठक में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और स्टार्टअप जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा के दौरान इन क्षेत्रों के माध्यम से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी नीतियों और योजनाओं का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। नई पहलों और प्रोत्साहन योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में अंतिम रूप देकर धरातल पर लागू करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसका लाभ निवेशकों, कंपनियों और प्रदेश के युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए।

    निवेश के साथ रोजगार और कौशल विकास पर भी फोकस

    मंत्री ने आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित तकनीकी विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में होने वाला निवेश प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी तैयार करेगा।

    निवेश प्रस्तावों की स्वीकृति और प्रोत्साहन वितरण में तेजी के निर्देश

    बैठक में निवेश प्रस्तावों की स्वीकृति, प्रोत्साहन वितरण और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं के बीच नियमित समन्वय स्थापित करते हुए योजनाओं की प्रगति की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना और परियोजनाओं को समय से धरातल पर उतारना आवश्यक है।

    तकनीकी रूप से सशक्त उत्तर प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ेगा विभाग

    बैठक में आगामी कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश, नवाचार, रोजगार, स्टार्टअप और तकनीकी विकास को और गति देने पर जोर दिया गया।

    बैठक में लिए गए निर्णयों के माध्यम से प्रदेश को डिजिटल एवं तकनीकी रूप से और सशक्त बनाने तथा योगी सरकार के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के योगदान को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया गया।

    बैठक में प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार, आईएएस, विशेष सचिव/प्रबंध निदेशक यूपी डेस्को आकांक्षा राणा, आईएएस, विशेष सचिव/प्रबंध निदेशक यूपीएलसी जसजीत कौर, आईएएस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • योगी सरकार का उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा, लगातार चौथे महीने बिजली बिल में राहत

    योगी सरकार का उपभोक्ताओं को बड़ा तोहफा, लगातार चौथे महीने बिजली बिल में राहत

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की नीति का असर बिजली उपभोक्ताओं के बिलों पर दिखाई दे रहा है। विद्युत क्रय लागत में कमी का लाभ प्रदेश के उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हुए अक्टूबर माह के बिजली बिल में 5.24 प्रतिशत की राहत दी जाएगी। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं।

    यूपीपीसीएल के निदेशक वाणिज्य प्रशांत वर्मा ने बताया कि अक्टूबर माह के लिए ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की दर (-)5.24 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ऋणात्मक एफपीपीएएस का लाभ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित किया जाएगा। इससे प्रदेशभर के विद्युत उपभोक्ताओं को करीब 424 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।

    उन्होंने बताया कि एफपीपीएएस के माध्यम से यह लगातार चौथा महीना है, जब बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है। इससे पहले जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर में 7.93 प्रतिशत की राहत दी जा चुकी है।

    प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप यूपीपीसीएल विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के साथ ही विद्युत क्रय लागत में होने वाले अनुकूल बदलाव का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहा है। एफपीपीएएस व्यवस्था के तहत बिजली और ईंधन की खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का समयबद्ध समायोजन बिलों में किया जाता है। लागत घटने पर उसका लाभ भी इसी व्यवस्था के जरिए उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है।

  • योगी सरकार में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को नई रफ्तार, 1548 करोड़ रुपये से 8,397 परियोजनाएं ला रहीं बदलाव

    योगी सरकार में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को नई रफ्तार, 1548 करोड़ रुपये से 8,397 परियोजनाएं ला रहीं बदलाव

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि का योगी सरकार में व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। वर्ष 2017 से अगस्त 2026 तक प्रदेश में इस निधि से कुल 8,397 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर अब तक 1548 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे से लेकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के कल्याण तक विभिन्न क्षेत्रों में इन परियोजनाओं का सुधारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

    भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के मुताबिक खनन से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन निधि का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत अवैध खनन और परिवहन पर रोक के लिए चेकिंग रोड का निर्माण और समय-समय पर मरम्मत, वृक्षारोपण व रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे कार्य भी कराए गए हैं।

    शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर

    योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों से अधिक में डीएमएफ निधि से प्रत्येक जनपद में शिक्षा से जुड़ी 3,419 परियोजनाओं के तहत प्राथमिक विद्यालयों का जीर्णोद्धार कराया गया। स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, स्पेस लैब, कंप्यूटर सिस्टम समेत आधुनिक सुविधाएं व तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए गए। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 323 परियोजनाओं के तहत अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक एवं नवीन उपकरण उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है।

    गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

    ग्रामीण खनन प्रभावित क्षेत्रों में 516 भौतिक अवस्थापना परियोजनाओं के तहत सामुदायिक भवनों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास, स्वच्छता, सौर प्रकाश, पेयजल, कृषि और सिंचाई से जुड़ी परियोजनाएं भी संचालित हैं।

    महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए 3,070 परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, वजन मापने की मशीन, लंबाई मापने के लिए टेप जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। वहीं बुजुर्गों के लिए रात्रि केंद्र, किचन और हैंडपंप जैसी सुविधाओं पर भी काम किया गया। पैदल यात्रा के लिए फुटपाथ निर्माण जैसी योजनाएं भी जिला खनिज फाउंडेशन के माध्यम से कई जनपदों में पूरी हो गईं हैं।

    कौशल विकास से रोजगार के अवसर

    प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और अन्य लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण, डेयरी फार्मिंग में रोजगार सृजन, कौशल विकास प्रशिक्षण और सिलाई प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।