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  • कर्नल सोफिया मामले में विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश मंजूर की

    कर्नल सोफिया मामले में विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश मंजूर की

    भोपाल 
    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों के बीच लाने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अब आगे मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। कैबिनेट की अनुशंसा पर एमपी के राज्यपाल की मुहर लग चुकी है। अब इस केस को आगे बढ़ाने की अनुमति न देने की रिपोर्ट प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट भेजी जाएगी।

    बता दें कि, कैबिनेट की अनुशंसा पर मंगलवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी मुहर लगा दी है। वहीं, गृह विभाग ने अपने स्तर पर मामले का परीक्षण कराकर आदेश प्रारूप मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। एक-दो दिन में यहा से हरी झंडी मिलते ही गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति न देने संबंधी आदेश जारी कर उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेज देगा।
    क्या है पूरा मामला?

    आपको बता दें कि, मोहन कैबिनेट में मंत्री विजय शाह ने पिछले साल यानी 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। मंच को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि, उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उन्हीं की बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेज दिया।' विजय शाह के इस बयान के बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जन ने भी उनकी शब्दावली पर सवाल उठाए थे। जमकर बवाल मचने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया था।

    कर्नल सोफिया पर टिप्पणी करके विवादों में आए थे विजय शाह
    भारत ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर चलाकर आतंकवादियों की कमर तोड़ दी और पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए थे. इसके बाद भारत की तरफ से मीडिया ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने हिस्सा लिया था. तब विजय शाह ने कथित तौर पर उनको लेकर विवादित टिप्पणी कर दी थी. बाद में विजय ने अपने बयान के लिए माफी भी मांगी थी और उन्होंने कहा था कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया था। 

    खामोश हो गए विजय शाह
    इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और राहत की खबरों के बीच जब मीडिया ने भोपाल में मंत्री विजय शाह से सवाल पूछे, तो उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध ली. इस दौरान उनके चेहरे पर एक राहत भरी मुस्कान बनी रही. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि नौ कमेंट्स. वह अब इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। 

    लगातार 8 बार से विधायक है कुंवर विजय शाह
    कुंवर विजय शाह मकराई रियासत शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं. बताया जाता है कि उनके परिवार ने कई सदियों तक मकराई पर शासन किया. वह हरसूद विधानसभा से लगातार 8 बार से विधायक हैं और कांग्रेस उनके अभेद किले को जीत नहीं पाई है. उनकी गिनती बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है और उनकी अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। 

    कर्नल सोफिया कुरैशी पर कथित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी राहत मिली है. कैबिनेट ने उनके खिलाफ मुकदमा न चलाने का फैसला लिया था, जिसे अब राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी मंजूरी दे दी है. इसके बाद राज्य सरकार का गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट भेजेगा कि मंत्री के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए। 

    कैबिनेट रिपोर्ट के अनुसार, विजय शाह अपने बयान के लिए लिखित और मौखिक रूप से चार बार से अधिक माफी मांग चुके हैं. इसके अलावा, सरकार के पांच सूत्रीय स्पष्टीकरण में कहा गया है कि इस मामले में किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, उन्होंने कर्नल सोफिया का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था और उनका इरादा सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने या उनका अपमान करने का नहीं था। 

    पिछले साल भारत द्वारा आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में हिस्सा लिया था. इस दौरान मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने उन पर कथित तौर पर विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 

    SIT ने सौंपी रिपोर्ट
    मंत्री विजय शाह की इस टिप्पणी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी के निर्देश दिए। आगे मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई। एसआईटी ने जांच करके सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश की। साथ ही, विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी। लगातार मामला टलने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को शीघ्र निर्णय करने के निर्देश दिए थे।

    कैबिनेट की अनुशंसा पर राज्यपाल की मुहर
    पिछली बार 31 अगस्त को सुनवाई से पहले 25 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में राज्यपाल (सक्षम प्राधिकारी) से मुकदमा न चलाने संबंधी अनुशंसा का फैसला लेकर प्रस्ताव भेजा, जिसे अनुमोदन के साथ उन्होंने लौटा दिया है। सूत्रों की मानें तो गृह विभाग ने विधि एवं विधायी विभाग से आदेश के प्रारूप का परीक्षण कराकर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। यहां से स्वीकृति मिलते ही विभाग सरकार के फैसले के आधार पर आदेश जारी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेजेगा।

  • कर्नल सोफिया विवाद में विजय शाह पर केस का रास्ता बंद, सरकार ने अभियोजन की मंजूरी देने से किया इनकार

    कर्नल सोफिया विवाद में विजय शाह पर केस का रास्ता बंद, सरकार ने अभियोजन की मंजूरी देने से किया इनकार

    भोपाल
     मध्य प्रदेश सरकार ने सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में अपने कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है।मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सरकार अब इस फैसले के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पांच सूत्रीय जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

    राज्यपाल की मंजूरी के बाद तैयार सरकारी जवाब में पहला तर्क दिया गया है कि विजय शाह के बयान के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।सरकार की दलील है कि मंत्री ने अपने पूरे बयान में कहीं भी कर्नल सोफिया कुरैशी के नाम का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया था।

    सरकार ने क्या वजह बताई
    सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि विजय शाह की टिप्पणी के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। सरकार का यह भी कहना है कि शाह ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम नहीं लिया था। उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए कई बार माफी मांगी और उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था।सरकार ने यह भी दावा किया है कि शाह की टिप्पणी से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित नहीं हुआ और न ही ऐसा करने की उनकी मंशा थी।

    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    बीते सोमवार को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है। उन्होंने कहा था कि मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही अपना जवाब अदालत में पेश कर सकती है।

    क्या हुआ था
    विजय शाह तब विवादों में आए थे, जब मई 2025 में उनका एक वीडियो सामने आया। जिसमें उन्होंने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई थी और पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

    इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को अपने पास ले लिया था और राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने माफी मांगी थी। हालांकि, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वह उसके धैर्य की परीक्षा न लें। इसके बाद शाह ने कई बार माफी मांगी।

    सरकार के अनुसार, मंत्री का इरादा किसी को ठेस पहुंचाने या अपमानित करने का नहीं था और उनके इस बयान से समाज में कोई सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ा।जवाब में यह भी रेखांकित किया गया है कि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने कई बार सार्वजनिक और लिखित रूप से माफी मांगकर खेद व्यक्त किया है।सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

     

  • विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी और माफी पर होगी चर्चा

    विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी और माफी पर होगी चर्चा

    भोपाल
     मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में आज, 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार पहले ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। अब अदालत के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं। सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के रुख और संभावित निर्देशों को देखते हुए कानूनी, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है।

    दिल्ली में मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक

    सुनवाई से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास पर थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मंत्री विजय शाह को लेकर बने राजनीतिक और कानूनी हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले थे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री शाह को लेकर बने हालात पर चर्चा की। सीनियर वकीलों से भी इस मामले में सलाह ली गई है, ताकि कोर्ट में सरकार अपना पक्ष मजबूती से रख सके।

    सरकार कुछ मामलों में जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग कोर्ट से कर सकती है। इस मुद्दे पर भी पार्टी और सरकार स्तर पर मंथन हुआ है। दो दिन पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन से मिले थे।

    इसके बाद ही मंत्री विजय शाह को फिर से माफी मांगने के लिए कहा गया था। इसके बाद 7 फरवरी को मंत्री शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसका वीडियो भी जारी किया गया।

    पूरे मामले में यह उनकी चौथी माफी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सुनवाई को देखते हुए सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कोर्ट के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    बता दें, मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।

    बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ वकीलों से भी सलाह ली है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके। सरकार यह भी विचार कर रही है कि कुछ बिंदुओं पर जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग अदालत से की जाए। इस पहलू पर पार्टी और सरकार, दोनों स्तरों पर मंथन हुआ है।

    प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात और माफी का दबाव

    इस पूरे घटनाक्रम से पहले, दो दिन पूर्व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह से एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया।

    इसी क्रम में 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। यह इस पूरे विवाद में उनकी चौथी माफी थी।

    क्या है पूरा विवाद?

    मामले की जड़ 11 मई 2025 की है, जब मंत्री विजय शाह ने महू के रायकुंडा क्षेत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। इस बयान को सेना, महिलाओं और एक समुदाय के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया गया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

    पहली और दूसरी माफी:

    विवाद बढ़ने पर मंत्री विजय शाह ने 13 मई 2025 को पहली बार माफी मांगी। उन्होंने कहा, “सोफिया बहन ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। दुखी मन से और इतनी विपरीत परिस्थितियों में अगर मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया है, तो मैं दस बार माफी मांगने को तैयार हूं।”

    अगले दिन, 14 मई 2025 को लगभग इसी शब्दों में उन्होंने दोबारा माफी दोहराई। हालांकि, इन दोनों माफियों को लेकर यह सवाल उठता रहा कि क्या वे पर्याप्त और बिना शर्त थीं।

    तीसरी माफी: 23 मई 2025 का विस्तृत बयान

    23 मई 2025 को मंत्री विजय शाह ने एक लंबा बयान जारी करते हुए तीसरी बार माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए जघन्य हत्याकांड से उनका मन विचलित था और उसी मानसिक स्थिति में उनसे भाषाई भूल हुई।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे भारतीय सेना, कर्नल सोफिया कुरैशी तथा देशवासियों से पूरी तरह क्षमा प्रार्थी हैं।

    चौथी माफी: 7 फरवरी 2026, कोर्ट की सुनवाई से पहले

    सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले, 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने चौथी बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके शब्द देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकल गए थे, जो उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप नहीं थे।

    उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है, इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है और भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर

    अब पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई से तय होगी। अदालत यह निर्णय कर सकती है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी या राज्य सरकार की दलीलों और माफियों को देखते हुए कोई अन्य रास्ता अपनाया जाएगा।

     

  • कर्नल सोफिया विवाद: मंत्री विजय शाह ने मीडिया से दूरी बनाई, 9 फरवरी को होगी मामले की सुनवाई

    कर्नल सोफिया विवाद: मंत्री विजय शाह ने मीडिया से दूरी बनाई, 9 फरवरी को होगी मामले की सुनवाई

    भोपाल 

    भाजपा प्रदेश मुख्यालय में  समस्याएं सुनने पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह उस वक्त असहज नजर आए, जब मीडिया ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण को लेकर सवाल पूछ लिया. सवाल सुनते ही मंत्री विजय शाह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गए. हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल को अकेले प्रेस ब्रीफिंग की.

    मंत्री शाह और पटेल ने सुनी समस्या

    भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश मुख्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है. प्रतिदिन दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेशभर से कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव होता है, उनका मौके पर निराकरण किया जाता है, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजा जाता है. शुक्रवार को यह जिम्मेदारी मंत्री विजय शाह और मंत्री शिवाजी पटेल को सौंपी गई थी.

    मीडिया के सवालों से बचते दिखे विजय शाह

    कार्यकर्ताओं की सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों मंत्री कार्यालय से बाहर निकले, मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर सवाल किया. सवाल सुनते ही मंत्री बिना कुछ कहे वाहन में बैठकर निकल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. इसलिए अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है.

    सरकार को 3 दिन में देना होगा जबाव

    20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है. कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन का निर्णय लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है, जबकि कार्यदिवसों के आधार पर सरकार के पास अभी लगभग तीन दिन का समय बचा है.

    सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।

    सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख शुरुआत से मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का भी रहा है।

    पार्टी और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा सूत्रों के अनुसार, इस मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटार्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली गई है। लंबी चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि सरकार 9 फरवरी की सुनवाई में समय विस्तार की मांग कर सकती है, जिससे सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है।

    सरकार ने रिपोर्ट दिल्ली भेजी मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी मंशा से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। इस संबंध में एसीएस गृह शिवशेखर शुक्ला, सचिव गृह कृष्णा वेणी देशावतु और अतिरिक्त सचिव मनीषा सेंतिया दिल्ली गए थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदु पर सुनवाई संभावित है, जबकि 11 फरवरी को मामले के अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है।

    तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच विजय शाह प्रकरण की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है।

    विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।'

    शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।'

    बजट सत्र के बाद हो सकती है कार्रवाई

    एसआईटी छह माह पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि करते हुए मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है. अब अंतिम निर्णय सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा लिया जाएगा. माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद सरकार और पार्टी मंत्री विजय शाह के खिलाफ एकशन ले सकते हैं.