Tag: vegetable

  • सब्जियों पर कलरफुल लाइट पड़ी भारी, बार-बार नियम तोड़ा तो लाइसेंस होगा सस्पेंड

    सब्जियों पर कलरफुल लाइट पड़ी भारी, बार-बार नियम तोड़ा तो लाइसेंस होगा सस्पेंड

    चंडीगढ़ 

    चंडीगढ़ में लगने वाली सब्जी मंडियों में वेंडरों की ओर से रंगीन लाइटों का प्रयोग करने पर एक्शन की तैयारी हो गई है। हरी, पीली या अन्य रंगों की लाइटें लगाने वाले वेंडरों के लाइसेंस तक कैंसिल किए जाएंगे। इस संबंध में निगम की कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया। 

    इस बार होने वाली हाउस की मीटिंग में यह एजेंडा लाया जाएगा। नगर निगम की समिति के मेंबर व पार्षद गुरप्रीत गाबी का कहना है कि लोग पैसे देकर फ्रेश और साफ-सुथरी सब्जियों के लिए आते हैं। लेकिन मार्केट में वेंडर रंग-बिरंगी लाइटें लगा देते हैं। वे सब्जियों पर हरी लाइट्स और फ्रूट पर येलो या रेड लाइट का प्रयोग करते हैं।

    इससे व्यक्ति मार्केट से सब्जी हरी समझकर खरीदकर ले आता है, लेकिन घर में आकर वह खराब या पीली निकलती है। यह धोखाधड़ी है। यह लोगों के खाने पर भी डाका है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वेंडर प्लास्टिक बैग और गंदगी फेंककर चले जाते हैं।

    चालान का सिस्टम भी किया तैयार गाबी ने बताया कि चालान का सिस्टम भी बनाया गया है। इसके तहत कानून तोड़ने वाले वेंडर का चालान होगा। तीन बार चालान होने पर छह महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। आईडी कार्ड में परिवार का ब्यौरा भी रहेगा। इसमें उसका पूरा एड्रेस रहेगा।

    किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी इस कार्य का फायदा होगा कि उसे पूरी तरह से कवर किया जाएगा। लोकल किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यह छूट मंडी फीस में मिलेगी। यह छूट उन किसानों को मिलेगी, जिनके पास उनकी जमीन की फर्द और आईकार्ड होगा।

    कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है। इस कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद हैं। अक्टूबर माह की मीटिंग में यह प्रस्ताव आएगा। अगर सब कुछ सही रहा तो निगम की मीटिंग के बाद प्रशासन की मंजूरी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा।

  • रायपुर में सब्जी कारोबारियों को हटाने पहुंचा अमला, विरोध के बाद लौटा

    रायपुर में सब्जी कारोबारियों को हटाने पहुंचा अमला, विरोध के बाद लौटा

    रायपुर.

    भाठागांव पानी टंकी के पास रोड किनारे व फुटपाथ पर रोजाना सब्जी बेचने वालों को खदेड़ने गये निगम के दस्ते को विरोध के चलते अपने बुलडोजर के साथ वापस लौटना पड़ गया. यहां नगर निगम द्वारा लगभग 1 करोड़ 29 लाख रुपये की लागत से चबूतरे वाला सब्जी बाजार बनाया गया है.

    इस चबूतरे का आवंटन पूर्व में चिन्हित सब्जी बेचने वालों को लॉटरी सिस्टम से निगम मुख्यालय के बाजार विभाग ने कर दिया. आवंटन करने के बाद आसपास और नदी पार से सब्जी बेचने के लिए आने वाले ग्रामीण जो रोड किनारे पसरा बिछाकर दुकानदारी करते थे, उन्हें खदेड़ने निगम का दस्ता बुलडोजर व पुलिस के साथ पहुंच गया. इसका सब्जी बेचने वालों ने विरोध कर वापस लौटा दिया. पूर्व पार्षद सतनाम सिंग पनाग और छाया पार्षद ब्रम्हा सोनकर ने बताया कि चबूतरा आवंटन में जमकर अनियमितता बरती गई है. कई लोगों के वाजिब नाम को व्हाइटनर लगाकर मिटाने के बाद दूसरों का नाम डाला गया है. यह किसके दबाव में हुआ, यह भाठागांव के नागरिक जानना चाहते हैं.

    सतनाम सिंग पनाग ने बताया कि इस बाजार का निर्माण कांग्रेस के पूर्व कार्यकाल में हुआ था, क्योंकि इस बाजार में स्थानीय के साथ ही गांव के कृषक भी अपनी सब्जी बेचने आते थे. छाया पार्षद सोनकर ने बताया कि बाजार आवंटन में अलग-अलग नंबर दिया गया है. इन नंबरों के हिसाब से किसी को 8 तो किसी के लिए 6 फीट जगह की मार्किंग की गई है. वहीं छाया पार्षद ब्रम्हा ने कहा कि एक ही परिवार के तीन-तीन अथवा चार-चार सदस्यों को स्थान आवंटित कर देने से यहां के वास्तविक सब्जी बेचने वालों को जगह नहीं मिली. साथ ही वार्ड के बाहर के लोगों को भी स्थान दिए जाने की शिकायत सामने आई है. इसके लिए वोटर आईडी और आधार कार्ड के माध्यम से स्थानीय और बाहरी की पहचान निगम प्रशासन पहले करे, फिर चबूतरा व जगह आवंटित करे. इस मामले में पीड़ित सब्जी व्यापारी निगम आयुक्त से 22 सितंबर को सुबह 11 बजे मुलाकात के लिए जाएंगे.

  • महंगाई के बीच दुर्ग नगर निगम का तोहफा, अब किफायती दाम में मिलेगी सब्जी की टोकरी

    महंगाई के बीच दुर्ग नगर निगम का तोहफा, अब किफायती दाम में मिलेगी सब्जी की टोकरी

    दुर्ग.

    नगर निगम दुर्ग द्वारा शहरवासियों को किफायती दरों पर ताजी, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण फल-सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में एक अभिनव पहल की गई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत रायपुर नाका स्थित वार्ड 21 के पंचरत्न गार्डन में ‘सब्जी की टोकरी’ केंद्र का शुभारंभ मेयर अलका बाघमार ने किया।

    महापौर ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत निगम द्वारा जनहित में यह अभिनव पहल शुरू की गई है। सब्जी की टोकरी का उद्देश्य आमजन को उनके आसपास ही ताजी, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती दरों पर फल-सब्जियां उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहरवासियों को बेहतर गुणवत्ता की ताजी सब्जियां एवं फल आसानी से उपलब्ध होंगे। निकट भविष्य में कीटनाशक एवं रसायन मुक्त फल- सब्जियां उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे। निगम का उद्देश्य शहरवासियों को सुविधाजनक, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना है। पंचरत्न गार्डन, रायपुर नाका, वार्ड 21 में दोपहर 2 बजे से सुविधा उपलब्ध होगी। इस अवसर पर एमआईसी सदस्य लीना दिनेश देवांगन, वार्ड पार्षद विद्यावती सिंह, अरुण सिंह, चंद्रिका चन्द्राकर, कुमुद बघेल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

    मेयर ने कहा कि सब्जी की टोकरी केवल फल-सब्जी उपलब्ध कराने की पहल नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का माध्यम भी है। प्रत्येक केंद्र पर दो महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि दुर्ग नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर एवं स्मार्ट बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। सब्जी की टोकरी भी इसी दिशा में एक जनहितकारी पहल है, जिसका लाभ शहरवासियों को सीधे मिलेगा। इससे नागरिकों को उचित एवं किफायती दरों पर ताजी सब्जियां और फल उपलब्ध होने के साथ ही स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

    नाना-नानी पार्क सहित 10 अन्य स्थान चिन्हित
    मेयर ने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर के लगभग 10 विभिन्न स्थानों पर किफायती सब्जी एवं फल की दुकानें शुरू की जाएंगी। इसके लिए वार्ड 51 स्थित नाना-नानी पार्क सहित अन्य स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है, जहां जल्द ही ऐसी दुकानें प्रारंभ की जाएंगी। निगम प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि यदि वे सस्ती, ताजी एवं गुणवत्तापूर्ण फल सब्जियां खरीदना चाहते हैं, तो सेवा संकल्प सब्जी टोकरी केंद्र का लाभ उठाएं।

  • केला, अंगूर, अनार और सब्जियां… दुबई में 1000 कंटेनर सड़ रहे, भारत को हुआ बड़ा नुकसान

    केला, अंगूर, अनार और सब्जियां… दुबई में 1000 कंटेनर सड़ रहे, भारत को हुआ बड़ा नुकसान

     नई दिल्‍ली

    मिडिल ईस्‍ट में संघर्ष के कारण महाराष्‍ट्र के किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. एग्री प्रोडक्‍ट्स से जुड़े 800 से 1000 कंटेनर दुबई के जेबल अली बंदरगाह पर फंसे हुए हैं. 28 फरवरी से ही इनका कामकाज ठप है. कंटेनर अलग-अलग देशों या क्षेत्रों में एक्‍सपोर्ट नहीं हो पा रहे हैं, जिस कारण लाखों-करोड़ों के सामान खराब हो रहे हैं।

    दुबई का जेबेल अली पोर्ट मिडिल ईस्‍ट का एक प्रमुख बंदरगाह, जो खाड़ी क्षेत्र में कृषि उत्पादों के वितरण का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. हालांकि, संघर्ष के कारण कामकाज पूरी तरह से ठप हो चुका है. इस कारण दुबई पहुंच चुके या भारत से आ रहे कई शिपमेंट बंदरगाह पर ही फंसे हुए हैं।

    निर्यातकों को भारी नुकसान
    फंसे हुए कंटेनरों में मुख्य रूप से केले, अंगूर, अनार, तरबूज, पत्तेदार सब्जियां और प्याज जैसे कम समय तक टिकने वाले कृषि उत्‍पाद हैं. यह महाराष्ट्र से निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पाद भी हैं. कंटेनर फंस जाने के कारण ये खराब हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि निर्यातकों को भारी नुकसान होगा. कंटेनर ऐसे समय में भी फंसे हैं जब खाड़ी देशों में रमजान के दौरान इन फलों, विशेष रूप से अंगूर और अनार की मांग चरम पर होती है. इसलिए कारोबार कम होने की भी आशंका है।

    घाटे में बेचना पड़ सकता है अंगूर
    वॉर के कारण कंटेनर तो फंसे ही हैं, जिससे मांग पूरी नहीं हो पा रही है. दूसरी ओर, खाड़ी देशों में फलों की मांग में परंपरागत रूप से वृद्धि देखी जाती है. वहीं किसान इस मौसमी बदलाव के अनुसार अपनी फसल की कटाई की योजना बनाते हैं. हालांकि, इस वर्ष संघर्ष के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. बंदरगाहों पर मौजूद लगभग 5,000 से 6,000 टन अंगूर प्रभावित होने की आशंका है और खेतों में मौजूद निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले 10,000 टन अंगूरों को अब स्थानीय स्तर पर घाटे में बेचना पड़ सकता है।

    बंदरगाह पर भीड़भाड़ के कारण और देरी 
    मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (JNPT) पर दुबई जाने वाले अंगूर के लगभग 80 कंटेनर अभी तक अनलोड नहीं किए गए हैं. नासिक से निर्यात के लिए आ रहे 200 से अधिक कंटेनर बंदरगाह के बाहर फंसे हुए हैं, जिससे भारी जाम लग गया है. स्थिति गंभीर है और निर्यातकों का कहना है कि जब तक जहाजरानी सर्विस फिर से शुरू नहीं हो जातीं, तब तक यह समस्या बनी रहेगी. इंडियन ग्रेप एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के निदेशक मधुकर क्षीरसागर के अनुसार, फंसे हुए हर कंटेनर से भारी नुकसान होता है, जिससे लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान होता है।

    किसानों ने सरकार से अपील की
    किसान संगठन तत्काल सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने सरकार से प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की सब्सिडी देने के साथ-साथ फंसे हुए कंटेनरों के लिए बंदरगाह शुल्क और विलंब शुल्क माफ करने का अनुरोध किया है. इसके अलावा, निर्यातकों की सहायता के लिए एक अस्थायी खरीद योजना शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि माल की निकासी होने तक उन्हें सहायता मिल सके।

    निर्यातकों ने खेप वापस मंगाई
    कुछ निर्यातकों ने पहले ही अपने माल को वापस मंगाना शुरू कर दिया है. प्रमुख निर्यातक प्रकाश गायकवाड़ ने बताया कि लंबे समय तक देरी के कारण उन्हें जेएनपीटी से केले और प्याज के कंटेनर वापस मंगाने पड़े, क्योंकि देरी से फसल खराब हो रही थी. नासिक सीमा शुल्क को भेजे गए प्याज के एक शिपमेंट को मंजूरी मिलने में चार दिन लग गए, तब तक पूरा माल खराब हो चुका था।

    कृषि आयात और निर्यात पर व्यापक प्रभाव
    इस रुकावट का असर खाड़ी देशों और ईरान से आयात पर भी पड़ा है. सेब, कीवी और खजूर जैसे उत्पादों से भरे लगभग 600-700 कंटेनर ईरानी बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. फल व्यापारी सुयोग ज़ेदे के अनुसार, इन कंटेनरों का मूल्य काफी अधिक है, जिनमें कीवी के कंटेनरों का मूल्य 30-32 लाख रुपये और खजूर के कंटेनरों का मूल्य 45 लाख रुपये है।

    इसके अलावा, भारत के चीनी निर्यात अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं. केंद्र ने इस सीजन में 20 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी, लेकिन निर्यातकों का अनुमान है कि मौजूदा व्यवधानों के कारण केवल लगभग 5 लाख टन चीनी ही बाजार तक पहुंच पाएगी।