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  • वंदे मातरम् के 150 साल पर भव्य आयोजन! भोपाल में एक मंच से 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड का होगा प्रयास

    वंदे मातरम् के 150 साल पर भव्य आयोजन! भोपाल में एक मंच से 3 वर्ल्ड रिकॉर्ड का होगा प्रयास

     भोपाल

    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के मौके पर भोपाल में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विविधा कलायम सांस्कृतिक समिति की ओर से 1 सितंबर को डीबी सिटी मॉल में ऐसा सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम शाम 4 बजे से शुरू होगा। आयोजन में संगीत, सामूहिक गायन और शास्त्रीय कथक नृत्य के जरिए ‘वंदे मातरम्’ को केंद्र में रखते हुए भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना को विश्व मंच तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    40 से ज्यादा वाद्य यंत्रों से ‘वंदे मातरम्’
    पहले रिकॉर्ड प्रयास के तहत इंटरनेशनल म्यूजिशियन अभय तिवारी 40 से अधिक अलग-अलग वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल करते हुए ‘वंदे मातरम्’ की विशेष संगीतमय प्रस्तुति देंगे। एक ही प्रस्तुति में इतने वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।

    200 से ज्यादा विद्यार्थी एक साथ गाएंगे राष्ट्रीय गीत
    दूसरे रिकॉर्ड प्रयास में विविधा अकादमी के 200 से अधिक विद्यार्थी एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि इसके जरिए बच्चों और युवाओं को राष्ट्रीय गीत, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    150 से ज्यादा छात्राएं करेंगी कथक
    तीसरे रिकॉर्ड प्रयास में 150 से अधिक छात्राएं ‘वंदे मातरम्’ पर सामूहिक कथक नृत्य की प्रस्तुति देंगी। खास बात यह होगी कि कथक की प्रस्तुति लाइव म्यूजिक के साथ होगी। शास्त्रीय नृत्य, संगीत और देशभक्ति को एक मंच पर पिरोकर प्रस्तुति तैयार की गई है।

    रिकॉर्ड से ज्यादा संस्कृति और राष्ट्रभावना पर जोर
    आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम का मकसद केवल विश्व रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र हासिल करना नहीं है। इसके जरिए ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, युवाओं में राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव की भावना मजबूत करने तथा भारतीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।

    कार्यक्रम की प्रोफेशनल वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इससे पूरे प्रयास को प्रमाणिक रूप से दर्ज कर डिजिटल और मीडिया माध्यमों के जरिए व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा।

  • वंदे मातरम् विवाद पर BJP आक्रामक, नितिन नवीन की बैठक में कांग्रेस को घेरने की बनी रणनीति

    वंदे मातरम् विवाद पर BJP आक्रामक, नितिन नवीन की बैठक में कांग्रेस को घेरने की बनी रणनीति

     नई दिल्ली
    नई दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के सभी छह छंदों के पूर्ण गायन के साथ हुई।

    बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में पार्टी की आगामी रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई। वहीं पहली बैठक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी भी की गई।

    बैठक में बीजेपी ने कांग्रेस कार्यसमिति के वंदे मातरम् के फैसले के खिलाफ 10 बिंदुओं का कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित किया। बीजेपी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए पूरे देश में राजनीतिक प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाने का एलान किया है।

    तुष्टीकरण और स्वाभिमान का अपमान
    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित शीर्ष नेतृत्व ने कांग्रेस के वंदे मातरम् को लेकर पार्टी के रुख की तीखी आलोचना की है।

    बीजेपी ने कांग्रेस के कदम को राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय स्वाभिमान और देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सीधा अपमान करार दिया।

    वंदे मातरम् के सम्मान से समझौता नहीं
    बैठक में बीजेपी द्वारा पारित प्रस्ताव में स्पष्ट कहा गया है कि राजनीतिक फायदे या वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से कोई समझौता मंजूर नहीं किया जाएगा।

    पार्टी ने महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को भी देश भर में प्रचारित करने का संकल्प लिया है, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को साम्राज्यवाद-विरोधी नारा और शुद्धतम राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत उद्घोष बताया था।

    बीजेपी का लक्ष्य इस देशव्यापी अभियान के जरिए राष्ट्रगीत के पूरे स्वरूप के इतिहास, महत्व और गौरवशाली विरासत को भारत के हर कोने तक पहुंचाना है।

    कांग्रेस ने दिया 1937 के प्रस्ताव का हवाला
    कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने अपने फैसले में कहा था कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में केवल शुरुआती दो पद ही गाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि पार्टी 1937 के उसी ऐतिहासिक प्रस्ताव और परंपरा का पालन कर रही है, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनाया गया था।

    कांग्रेस के अनुसार, यह फैसला अक्टूबर 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं की आपसी सहमति से लिया गया था।

    कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि वे उसी परंपरा का सम्मान कर रहे हैं जिसे देश के संस्थापकों ने तय किया था।

    'वंदे मातरम्' को वैधानिक सुरक्षा का नया कानून
    वंदे मातरम् पर राजनीतिक घमासान जारी है। हाल ही में वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून पहले ही देश में लागू हो चुका है।

    संसद में मंजूरी: यह ऐतिहासिक विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित हुआ था।

    कानूनी दर्जा: अगस्त के शुरुआती सप्ताह में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इसने आधिकारिक कानून का रूप ले लिया।

    3 साल तक की जेल का प्रावधान
    इस नए कानून के तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को अब राष्ट्रगान जन गण मन के समान ही वैधानिक सुरक्षा और सम्मान प्राप्त है। कानून के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा उत्पन्न करता है या इसका सार्वजनिक रूप से अपमान करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई के तहत 3 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

     

  • वंदे मातरम् विवाद ने पकड़ा तूल, अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना; सोनिया गांधी पर लगाया बड़ा आरोप

    वंदे मातरम् विवाद ने पकड़ा तूल, अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना; सोनिया गांधी पर लगाया बड़ा आरोप

    नई दिल्ली
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदेमातरम विवाद को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस ने वोट बैंक की खातिर वंदे मातरम को भुला दिया और अब जब 80 साल बाद ये गान फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है तो कल यानी 15 अगस्त के दिन कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से गीत रोकने के लिए कह दिया। उन्होंने इसे कांग्रेस की बेशर्मी करार देते माफी मांगने मांग की है

    चित्तौड़गढ़ में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, आजादी के 80 साल बाद लाल किले की प्राचीर पर और देशभर में जहां-जहां ध्वजारोहण हुआ, वहां पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गान हुआ। वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम् को भुला दिया था। ‘वंदे मातरम्’ के 150वां वर्ष में मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ को फिर से नया आयुष्य दिया है। लेकिन उनकी (कांग्रेस की) बेशर्मी देखिए। कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया जा रहा था। गीत के दौरान, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष से गाना रोकने को कहा। हम सब बस टीवी पर देखते रह गए।

    कांग्रेस से की माफी मांगने की मांग
    उन्होंने आगे कहा, सोनिया जी, 140 करोड़ लोग आपको देख रहे हैं। आपने जो पाप किया है, उसे देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत को अधूरा छोड़ने का सपना भी कैसे देख सकता है? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा, कांग्रेसियों में अगर जरा भी शर्म बची है, तो उन्हें बंकिम बाबू की अमर आत्मा से माफी मांगनी चाहिए।

    अमित शाह चित्तौड़गढ़ में 'अटल गौरव स्मृति समारोह' में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का ज़िक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदेमातरम् का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा,बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम्, भारत माता की मैं वंदना करता हूं, यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।

    वाजपेयी जी प्रतिमा का लोकार्पण
    इससे पहले शाह ने निम्बाहेड़ा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रतिमा का लोकार्पण किया। उन्होंने राजस्थान सरकार के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद थे।

  • नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नए नियम: वंदे मातरम् उल्लंघन पर जेल, मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया

    नई दिल्ली

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सम्मान को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव के बाद अब वंदे मातरम के गायन में बाधा डालना या उसका अपमान करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। अब राष्ट्रीय गीत को भी वही कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा जो राष्ट्रगान जन गण मन को मिला हुआ है।

    तीन साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान
    मौजूदा कानून के तहत अभी तक केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर ही सजा का प्रावधान था। झंडे को जलाने, विकृत करने या राष्ट्रगान में जानबूझकर बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है। अब नए संशोधन के बाद, वंदे मातरम के साथ भी ऐसी ही हरकत करने पर समान सजा का सामना करना पड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, संसद की मुहर लगते ही यह नया कानून प्रभावी हो जाएगा।

    सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की ओर कदम
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए इसे करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बताया। ठाकुर ने कहा कि वह लंबे समय से वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नियम 377 के तहत यह मुद्दा उठाया था। उनका मानना है कि इस कदम से हमारी सांस्कृतिक विरासत पर होने वाले जानबूझकर हमलों को रोका जा सकेगा।

    गायन के लिए नया प्रोटोकॉल तय
    इसी साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के लिए एक विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। इसके अनुसार, आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम की छह पंक्तियां गाई जाएंगी, जिनकी अवधि तीन मिनट 10 सेकंड होगी। महत्वपूर्ण यह है कि किसी भी समारोह में जहां राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होने हों, वहां वंदे मातरम पहले गाया जाएगा। राष्ट्रपति के आगमन और ध्वजारोहण जैसे मौकों पर वंदे मातरम के समय सभी को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। 

    कानून में बदलाव और सजा का प्रावधान
    सरकार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बदलाव कर रही है। इसके लिए कानून की धारा 3 में संशोधन किया जाएगा। इस धारा के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान गाने में बाधा डालता है या उसे रोकता है, तो उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

    दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान है। संशोधन के बाद यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे।

    सरकार ने जारी की गाइड लाइन
    केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल के लिए गाइडलाइन जारी की। गाइड लाइन के अनुसार, वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए।

    इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं।

    पहले ‘राष्ट्रगीत’ गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’
    अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’।दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें।

    वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह
    गृह मंत्रालय ने स्कूल-कॉलेज और महत्वपूर्ण संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है।इस कदम का उद्देश्य स्टूडेट्स और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता और सम्मान को प्रोत्साहित करना है। यह भी बताया गया है कि जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए।

    सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए छूट
    साथ ही, मंत्रालय ने सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है। निर्देश के अनुसार, फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि मनोरंजन स्थलों में दर्शकों को खड़े होने के लिए मजबूर करने से देखने का अनुभव बाधित हो सकता है और संभावित रूप से दर्शकों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।

    चुनाव में ‘वंदे मातरम्' बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
    बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया गया। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश किया था। पार्टी ने इसके 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यभर में सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया।साथ ही, बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया गया।

    बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
    भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

    1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।

    ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

    केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।

    ये अधिनियम क्या कहता है?
    1971 के राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम में राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के साथ राष्ट्रगान के लिए नियम हैं. इनमें राष्ट्रगान के लिए कहा गया है कि जो कोई व्यक्ति जानबूझकर भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी सभा में व्यवधान पैदा करता है उसे तीन वर्ष तक के कारावास, या जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा। 

    अगर कोई दूसरी बार ये अपराध करता है तो उसके लिए जेल का प्रावधान है. अधिनियम के अनुसार, जो कोई व्यक्ति, जिसे धारा 2 या धारा 3 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए पहले ही दोषसिद्ध ठहराया गया हो, ऐसे किसी अपराध के लिए फिर से दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो उसे दूसरी बार के या उसके बाद के हर बार के अपराध के लिए कम से कम एक वर्ष के कारावास से दंडित किया जा सकेगा। 

    वंदे मातरम् की स्थिति में क्या होगा?
    अब जब वंदे मातरम् भी इस अधिनियम में शामिल हो जाएगा तो राष्ट्रगान वाले नियम इस पर लागू होंगे. यानी इसके अपमान पर सजा का भी प्रावधान है.  अब जानते हैं कि इसे लेकर नियम क्या है…

    – दिशा-निर्देशों के अनुसार, वंदे मातरम् का संपूर्ण आधिकारिक संस्करण, जिसमें छह श्लोक हैं और जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट और 10 सेकंड है. इसे प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत या बजाया जाना चाहिए. इनमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आधिकारिक कार्यक्रमों में औपचारिक आगमन और प्रस्थान समारोह और ऐसे समारोहों में उनके निर्धारित भाषणों से पहले और बाद के कार्यक्रम शामिल हैं। 

    – एक जरूरी बात यह है कि अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘राष्ट्रगान’ दोनों होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘राष्ट्रगान’. दिशा-निर्देशों में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दर्शकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्मान के प्रतीक के रूप में दोनों प्रदर्शनों के दौरान सावधान मुद्रा में खड़े रहें। 

    – जब वंदे मातरम् का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाता है, तो उससे पहले ढोल की थाप या बिगुल की ध्वनि से औपचारिक रूप से गायन की शुरुआत का संकेत दिया जाना चाहिए। 

    – सिनेमा हॉल और फिल्म स्क्रीनिंग के लिए विशिष्ट छूट प्रदान की है. फिल्म के साउंडट्रैक के हिस्से के रूप में वंदे मातरम् बजाए जाने पर दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी। 

  • वंदे मातरम पर विवाद: कांग्रेस बैकफुट पर, चुप्पी से अल्पसंख्यक नेता नाराज, भाजपा ने लिया आक्रामक रुख

    वंदे मातरम पर विवाद: कांग्रेस बैकफुट पर, चुप्पी से अल्पसंख्यक नेता नाराज, भाजपा ने लिया आक्रामक रुख

    इंदौर 

    इंदौर के नगर निगम सम्मेलन में ‘वंदे मातरम्’ विवाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने और विवादित बयान देने पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने दोनों महिला पार्षदों का बचाव नहीं किया। इससे कांग्रेस पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेता नाराज़ हो गए हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है, जबकि भाजपा अब इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार को इंदौर के कई वार्डों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पुतले जलाए और ‘वंदे मातरम्’ गीत गाया।

    विवाद सामने आने के बाद इंदौर शहर कांग्रेस ने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत अनिवार्य कर दिया है। पार्षद रुबीना इक़बाल के खिलाफ निष्कासन का प्रस्ताव भी भोपाल भेज दिया गया है। उधर, इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी चुप्पी साध रखी है। छतरपुर दौरे में मीडियाकर्मियों ने जब उनसे इस मामले में सवाल पूछा, तो पटवारी ने हाथ जोड़ लिए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।
     
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधना कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। फिलहाल, जीतू पटवारी की इस चुप्पी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है। 

    कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इसे कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने पर है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस में उसकी विचारधारा से जुड़े हैं। सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। इसे इस तरह अनिवार्य करना अनुचित है। देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक एहसास है।

    निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र
    इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं।

    'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए'
    एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए।

    कांग्रेस में मतभेद
    वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए।

    जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध
    राष्ट्रगीत का अर्थ:
    'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं।

    मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है।

    विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं।

    इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था