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  • स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    स्मार्ट और ग्रीन सिटी पर फोकस, डिजिटल गवर्नेंस समेत कई मुद्दों पर होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    शहरी विकास, निवेश, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण अनुकूल शहरों सहित विभिन्न विषयों पर आधारित होगा अर्बन कॉन्क्लेव

    इंदौर

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव 28 अक्टूबर को आयोजित होगा। नगरीय विकास को नई गति देने, शहरी अधोसंरचना में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहरों को अधिक सुविधायुक्त और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कॉन्क्लेव में राज्य सरकार के विजन को साझा किया जाएगा।

    श्रेणी-2 के शहरों के विकास एवं डिजिटल गवर्नेंस पर विचार-मंथन

    कॉन्क्लेव में महानगरों से आगे बढ़कर श्रेणी-2 के शहरों के विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुनःघनीकरण, परिवहन आधारित विकास (टीओडी), टीडीआर, आवास, पुनर्विकास, मास्टर प्लान, विकास गलियारे, रेरा स्वीकृतियां, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनापत्ति प्रमाण-पत्रों में कमी (एनओसी) तथा एफएआर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

    नगरीय प्रशासन में सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर केंद्रित सत्र में स्वचालित भवन अनुज्ञा अनुमोदन प्रणाली (एबीपीएएस), ऑनलाइन एनओसी एवं विकास अनुज्ञा प्रणाली, कॉलोनी अधिनियम, डिजिटल गवर्नेंस, जीआईएस आधारित नियोजन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा परियोजना प्रबंधन सूचना प्रणाली जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और ग्रीन फाइनेंसिंग

    जलवायु अनुकूल शहर, जल सुरक्षा और सर्कुलर एकॉनामी विषय पर आयोजित सत्रों में विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में शहरी जल पुनः उपयोग एवं जल प्रबंधन, अमृत 2.0, बीआरएसआर फ्रेमवर्क, नमो हरित नगर योजना, सिटी फॉरेस्ट एवं सेंट्रल पार्क, वायु गुणवत्ता सुधार की पहल, ईज ऑफ लिविंग एवं लिवेबिलिटी इंडेक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, एमआरएफ, कचरे से ऊर्जा, सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा सीबीजी इकोसिस्टम शामिल हैं।

    कॉन्क्लेव में शहरी निवेश, वित्तीय संसाधन, साझेदारी और वैश्विक विशेषज्ञता के अवसरों पर भी मंथन होगा। इसमें अर्बन चैलेंज फंड की परियोजनाएं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), वित्तीय मॉडलिंग, टेंपल बॉन्ड, ग्रीन बॉन्ड, नगर पालिका बॉन्ड, संयुक्त उपक्रम, बहुपक्षीय बैंकों से वित्त पोषण, अनुदान और वायबिलिटी गैप फंडिंग सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028: विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के निर्माण पर होगा विशेष सत्र

    कॉन्क्लेव में सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें नियोजन, प्राथमिकता वाली अधोसंरचना में निवेश, टेंपल बॉन्ड, सीएसआर, डिजिटल ट्विन मॉडलिंग तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी। साथ ही तकनीक आधारित भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं आयोजन प्रबंधन को भी सत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। अर्बन कॉन्क्लेव प्रदेश में नगरीय अधोसंरचना, नवाचार, टिकाऊ शहरी विकास और रोजगार सृजन को एक नई दिशा एवं गति प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

     

  • बिहार में तेज होगा शहरीकरण, ग्रामीण इलाकों को नगर निकाय में शामिल करने पर होगा फैसला

    बिहार में तेज होगा शहरीकरण, ग्रामीण इलाकों को नगर निकाय में शामिल करने पर होगा फैसला

     पटना
    बिहार में नगर निकायों की सीमा और स्वरूप बदलने की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। सरकार ने जिलों से नगर निकायों के विलय, सीमा विस्तार, दर्जा बढ़ाने और नए नगर निकाय बनाने के प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रस्तावों पर पहले जिला स्तर पर समीक्षा होगी।

    प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होगी प्रस्तावों की समीक्षा
    नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है। डीएम अपने जिले के प्रभारी मंत्री से जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक बुलाने का अनुरोध करेंगे। बैठक में नगर निकायों से जुड़े सभी प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी।

    चार तरह से बदल सकता है नगर निकायों का स्वरूप
    सरकार के स्तर पर चार प्रमुख बदलावों पर विचार किया जा रहा है। दो या अधिक नगर निकायों का विलय कर एक नया निकाय बनाया जा सकता है। नगर निकाय से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को भी उसकी सीमा में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार होगा।

    पुराने निकायों का बढ़ेगा दर्जा, नए भी बनेंगे
    जरूरत के अनुसार छोटे नगर निकायों को बड़े निकाय में मिलाने या उनका दर्जा बढ़ाने पर भी विचार होगा। तेजी से शहरीकरण वाले ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकाय का दर्जा देने की संभावना है। इससे नए नगर निकायों के गठन का रास्ता भी खुल सकता है।

    शहरीकरण वाले इलाकों पर रहेगा खास फोकस
    विभाग ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को चिह्नित करेगा जहां आबादी और शहरी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन क्षेत्रों को नजदीकी नगर निकाय में शामिल करने या नया निकाय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। इससे शहरों की सीमा का विस्तार होगा।

    15 सितंबर तक विभाग को भेजने होंगे प्रस्ताव
    जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की अनुशंसा के बाद जिलाधिकारी प्रस्ताव निर्धारित प्रपत्र में विभाग को भेजेंगे। इसके लिए सरकार ने 15 सितंबर 2026 की समय-सीमा तय की है। प्रस्तावों के आधार पर बिहार में नगर निकायों के पुनर्गठन की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।