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  • मेहनत लाई रंग! हरमनप्रीत ने UPSC CAPF में मारी बाजी, 78वीं रैंक के साथ बनीं असिस्टेंट कमांडेंट

    मेहनत लाई रंग! हरमनप्रीत ने UPSC CAPF में मारी बाजी, 78वीं रैंक के साथ बनीं असिस्टेंट कमांडेंट

    मानसा.

    पंजाब के मानसा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर एक बेटी ने देश स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहराया है। गांव साधुवाला की रहने वाली हरमनप्रीत कौर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सीएपीएफ (CAPF) परीक्षा में 78वीं रैंक प्राप्त की है।

    हरमनप्रीत कौर ने जिले के छोटे से गांव से उठकर यूपीएससी की आल इंडिया स्तर पर होने वाली परीक्षा में 78 वां रैंक हासिल करके न सिर्फ अपने परिजनों का सिर गर्व से ऊंचा किया है, वही मानसा जिले का नाम भी रोशन किया है। बेटी की इस सफलता के बाद उसके परिवार को बधाई मिल रही है।

    हरमनप्रीत कौर ने UPSC में प्राप्त की 78वीं रैंक
    जिले के गांव साधुवाला के समाजसेवी डा. बिक्करजीत सिंह साधुवाला की बेटी हरमनप्रीत कौर ने यूपीएससी की सीएपीएफ अफसर (सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स) भर्ती परीक्षा पास करके पूरे भारत में 78 वां रैंक हासिल किया है। यूपीएससी से सीएपीएफ की परीक्षा द्वारा असिस्टेंट कमांडेंट की भरती की जाती है, जो ग्रुप ए गैजेटेड अफसर का पद है। जिस तरह चुने गए अधिकारी सीएपीएफ के विभिन बल बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आइटीबीपी और एसएसबी मैं बतौर अधिकारी सेवा कर सकते हैं।

    कड़ी मेहनत से प्राप्त किया लक्ष्य
    हरमनप्रीत कौर की प्राथमिक शिक्षा सरदूलगढ़ के गांव कौड़ीवाड़ा की अकाल एकेडमी से हुई है। इसके बाद बठिंडा और चंडीगढ़ में अपनी बीए तक की पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ चंडीगढ़ और दिल्ली से कोचिंग ली गई।

    सोशल मीडिया का किया सही इस्तेमाल
    हरमनप्रीत कौर ने बताया कि उसके इस मुकाम तक पहुंचने में उसके माता-पिता का सपोर्ट मिला और उनकी गाइडेंस से ही वे इस मुकाम तक पहुंची है। हरमनप्रीत कौर के मुताबिक सोशल मीडिया का सहारा उसने अपनी पढ़ाई तक ही सीमित रखा। हरमनप्रीत कौर की इस उपलब्धि के बाद क्षेत्र के लोगों और उनके रिश्तेदारों की ओर से हरमनप्रीत कौर के पिता डा. बिक्करजीत सिंह साधुवाला और माता डा वीरपाल कौर साधुवाला को बधाई दी जा रही है। हरमनप्रीत कौर के पिता और माता दोनों ही सरकारी अध्यापक है।

  • गरीबी ने बदली राह, मेडिकल टॉपर शेना अग्रवाल ने UPSC में किया टॉप

    गरीबी ने बदली राह, मेडिकल टॉपर शेना अग्रवाल ने UPSC में किया टॉप

    चंडीगढ़ 

    यूपीएससी और नीट यूजी को देश की दो सबसे ज्यादा कड़े मुकाबले वाली परीक्षाएं माना जाता है। यूपीएससी में जहां 8-9 लाख युवाओं में से सिर्फ करीब हजार का चयन हो पाता है, वहीं नीट यूजी देने वाले 20 लाख बच्चों में से सिर्फ 1.30 लाख को ही एमबीबीएस मिल पाता है। लाखों अभ्यर्थी सालों साल इन परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं और बार बार अटेम्प्ट देते हैं। लेकिन इन्हीं में से कुछ ऐसे होनहार छात्र भी होते हैं जो इन दोनों परीक्षाओं को अच्छी रैंक के साथ क्रैक करते हैं। यहां हम एक ऐसी अद्भुत प्रतिभा वाली शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने न सिर्फ एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा सीबीएसई पीएमटी (अब इसका नाम नीट यूजी हो गया है) में टॉप किया बल्कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में भी टॉप किया। ये कहानी है हरियाणा की आईएएस बेटी डॉ. शेना अग्रवाल की जिन्होंने देश की दोनों सबसे चुनौतिपूर्ण परीक्षाओं में टॉप कर साबित कर दिया कि छोरियां भी किसी से कम नहीं।

    अपनी कामयाबी से शेना ने हरियाणा के उन लोगों को उन लोगों को कड़ा संदेश दिया जो बेटियों को गर्भ में मार देते हैं और उन्हें बोझ समझते हैं। बेहद खराब लिंगानुपात के लिए बदनाम हरियाणा की बेटी ने अपने टैलेंट से यह बता दिया कि बेटियों को किसी भी तरह से बोझ नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि वह परिवार, समाज और राष्ट्र का गौरव हैं। लड़कियां हर वह मुकाम हासिल कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं। आज शेना अग्रवाल पंजाब कैडर की 2012 बैच की आईएएस अफसर हैं। वर्तमान में वह जॉइंट डेवलपमेंट कमिश्नर, IRD और एडिशनल कमिश्नर, NREGA के तौर पर काम कर रही हैं।

    यमुनानगर की रहने वाली, पिता डॉक्टर
    आईएएस शेना अग्रवाल मूल रूप से हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली हैं। उनके पिता डॉ. केसी अग्रवाल एक डेंटिस्ट हैं।

    बचपन से ही पढ़ाई में होनहार
    शेना स्कूल दिनों से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं। उन्होंने अपनी 10वीं की पढ़ाई संत निश्चल सिंह पब्लिक स्कूल (यमुनानगर) से की। 10वीं में उनके 95 फीसदी अंक आए। फिर 12वीं की पढ़ाई दयानंद पब्लिक स्कूल (नाभा) से की जिसमें 92 फीसदी अंक हासिल किए।

    एमबीबीएस एंट्रेस में टॉपर
    शेना ने 2004 में सीबीएसई प्री मेडिकल टेस्ट में पूरे देश में टॉप किया। एम्स (AIIMS) प्रवेश परीक्षा में उनकी 19वीं रैंक आई। उन्होंने दिल्ली एम्स से एमबीबीएस किया और डॉक्टर बन गईं। एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद प्रैक्टिस शुरू की। लेकिन उन्हें जल्द ही महसूस हुआ कि गरीबी से बड़ी कोई बीमारी नहीं है।

    डॉक्टरी छोड़ी, यूपीएससी करने का फैसला
    एम्स से एमबीबीएस करने के बाद जब शेना एक गांव में अपनी इंटर्नशिप कर रही थीं, तो उन्होंने देखा कि देश में गरीबी स्वास्थ्य समस्याओं से भी बड़ी बीमारी है। उन्हें लगा कि एक डॉक्टर के रूप में वे सीमित इलाज कर सकती हैं, जबकि आईएएस अधिकारी बनकर वे सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्हें अहसास हुआ कि जब तक वे किसी बड़े प्रशासनिक पद पर नहीं होंगी, तब तक वे इस सामाजिक समस्या का व्यापक इलाज नहीं कर सकतीं। इसी सोच के साथ उन्होंने आईएएस बनने का संकल्प लिया।

    दूसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक, तीसरे प्रयास में टॉपर
    उन्होंने एमबीबीएस की इंटर्नशिप करते हुए साल 2009 में पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी। इसमें वे प्रीलिम्स भी पार नहीं कर सकीं इसे उन्होंने निराश होने के बजाय परीक्षा को समझने का एक अवसर माना।

    दूसरा अटेम्प्ट साल 2010 में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर काम करते हुए दिया। इस बार वह कामयाब रहीं और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में सेलेक्शन हुआ। दूसरे प्रयास में उन्होंने 305वीं रैंक हासिल की और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ।

    तीसरे प्रयास में यूपीएससी ऑल इंडिया टॉप
    शेना अग्रवाल आईआरएस की ट्रेनिंग के लिए नागपुर जाने की तैयारी कर ही रही थीं कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2011 का रिजल्ट आ गया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की।

  • राजस्थान का अनोखा परिवार! एक-एक कर कई सदस्यों ने क्रैक की UPSC, लोग कहने लगे ‘IAS फैक्ट्री’

    राजस्थान का अनोखा परिवार! एक-एक कर कई सदस्यों ने क्रैक की UPSC, लोग कहने लगे ‘IAS फैक्ट्री’

    नई दिल्ली

    आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर बनाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। हर साल करीब 8 से 10 लाख अभ्यर्थी सालोंसाल तैयारी कर इसका फॉर्म भरते हैं लेकिन करीब 1000 का ही चयन हो पाता है। यानी सक्सेस रेट 0.1 फीसदी से 0.2 फीसदी तक ही। लेकिन राजस्थान के एक घर में ये तथ्य और आंकड़े लागू नहीं होते। सवाई माधोपुर जिले के बामनवास स्थित नाहरसिंहपुरा गांव का एक परिवार इन दिनों 'IAS फैक्ट्री' के नाम से जाना जा रहा है। इस परिवार ने अब तक 6 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी देश को दिए हैं।

    अर्नब प्रताप सिंह ने यूपीएससी 2022 परीक्षा में ऑल इंडिया 430वीं रैंक हासिल की थी। अर्नब का सफर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के साथ शुरू हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), लखनऊ और दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), दिल्ली से हुई। अर्नब प्रताप सिंह के पिता बाबूलाल मीणा 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश में सेवारत हैं। परिवार की मुखिया वीना मीणा भी 1993 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। वीणा मीणा भी उत्तर प्रदेश कैडर में सेवारत हैं।

    ताऊजी ने शुरू की थी IAS बनने की परंपरा
     खबर के मुताबिक अर्नब के ताऊ डॉ. बट्टीलाल मीणा भी सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने परिवार में इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अर्नब के ताऊजी की बेटी और उनके एक अन्य चाचा की बेटी शेफाली ने 2016 में यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनीं। ये प्रतिभाशाली बहनें अब गुजरात कैडर में कार्यरत हैं।

    यूपी का मिश्रा परिवार भी है मिसाल
    राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज कस्बे का मिश्रा परिवार सिविल सेवा परीक्षा में अपनी ऐतिहासिक सफलता के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इस परिवार के चार भाई-बहनों ने UPSC परीक्षा पास कर IAS और IPS अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी सफलता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस सफलता की शुरुआत योगेश मिश्रा ने वर्ष 2013 में की, जब उन्होंने UPSC परीक्षा पास की।

    इसके बाद बहन माधवी मिश्रा ने वर्ष 2015 में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। फिर बड़ी बहन क्षमा मिश्रा ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए वर्ष 2016 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई। सबसे छोटे भाई लोकेश मिश्रा ने भी बाद में UPSC परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनकर परिवार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को पूरा किया। आज मिश्रा परिवार की सफलता पूरे प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय है।

  • हरियाणा: एकांश ढुल ने यूपीएससी में तीसरा स्थान हासिल किया, BJP नेता के बेटे ने पूरा किया IAS अफसर बनने का सपना

    हरियाणा: एकांश ढुल ने यूपीएससी में तीसरा स्थान हासिल किया, BJP नेता के बेटे ने पूरा किया IAS अफसर बनने का सपना

    चंडीगढ़
     यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएसई) की तरफ से सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया है. हरियाणा के भाजपा नेता के बेटे एकांश ढुल का देश भर में तीसरा रैंक हासिल किया है।जानकारी के अनुसार, भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ढुल पहले भी दो बार यूपीएससी में चयनित हो चुके हैं और लगातार उन्होंने तीसरी बार चयन हुआ है।

    पंचकूला के सेक्टर-12 के रहने वाले भाजपा नेता कृष्ण ढुल के बेटे एकांश ने पिछली बार 2025 में यूपीएएसपी एग्जाम में 295वीं रैंक हासिल की है. वहीं, 2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है।

     2024 में एकांश ने 342वीं रैंक हासिल किया था. हालांकि, अब उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अब तीसरा रैंक हासिल किया है।

    गौर रहे कि एकांश ढुल ने चंडीगढ़ के भवन विद्यालय सेक्टर-27 से 10वीं और सेंट कबीर स्कूल सेक्टर-26 से 12वीं की पढ़ाई की थी और फिर इसके बाद श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स दिल्ली से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की है और दिल्ली में कोचिंग भी ली थी. वह लगातार यूपीएएसी का एग्जाम दे रहे थे और थर्ड टॉपर बने हैं. उधऱ, सीएम नायब सिंह सैनी ने एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल को फोन पर बधाई दी. इस दौरान सीएम ने एकांश ढुल की मां से भी फोन पर बात की और कहा कि वह घर आकर बेटे को बधाई दें. एकांश ढुल के पिता कृष्ण ढुल ने सीएम से कहा कि आपके भतीजे ने हरियाणा का नाम रौशन किया है. आपकी सरकार ने बिना खर्ची और पर्ची के बिना नौकरियां मिल रही हैं।

    कौन हैं एकांश के पिता कृष्ण ढुल
    गौरतलब है कि कांश के पिता कृष्ण ढुल भाजपा के वरिष्ठ नेता है और माता निर्मल ढुल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल सेक्टर-19 पंचकूला में बतौर प्रिंसिपल हैं. कृष्ण ढुल हरियाणा राज्य चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पूर्व जनरल सेक्रेटरी भी रहे हैं और अभी भाजपा प्रवक्ता हैं. इसके अलावा, हरियाणा आर्चरी एसोशिएसन के अध्यक्ष भी हैं।