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  • UPI फीस पर बड़ा अपडेट, 2027 तक टल सकता है फैसला; Paytm समेत पेमेंट कंपनियों के शेयर लुढ़के

    UPI फीस पर बड़ा अपडेट, 2027 तक टल सकता है फैसला; Paytm समेत पेमेंट कंपनियों के शेयर लुढ़के

    नई दिल्ली

    देश में 2,000 रुपये से ज्‍यादा के UPI ट्रांजैक्‍शन पर 15 अक्‍टूबर से लगने वाले MDR चार्ज को इस साल टाला जा सकता है. व्‍यापारियों के संगठनों ने इस संबंध में NPCI को प्रस्‍ताव भेजा है. व्‍यापारियों ने आग्रह किया है कि 15 अक्‍टूबर से लागू होने वाले UPI-MDR चार्ज को फेस्टिव सीजन या फिर इससे भी आगे 31 दिसंबर तक टाल‍ दिया जाए. आग्रह है कि अगले साल की शुरुआत से ये चार्ज लागू किया जाए। 

    हालांकि, NPCI ने सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है.सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है. अगर व्‍यापारिक संगठनों का प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो ये व्‍यापारियों के लिए त्‍यौहारों के मौसम में बड़ी राहत होगी. कारण कि इस दौरान बंपर सेल होती है और बड़ी संख्‍या में लोग UPI से शॉपिंग करते है। 

    वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
     एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए। 

    वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए। 

    कितना MDR देना होगा?
    पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से ज्यादा के कुछ लेनदेन पर 0.4 फीसदी यानी 40 बेसिस प्वाइंट MDR तय किया था. MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया के लिए मर्चेंट की तरफ से संबंधित बैंक या भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को दिया जाता है. आसान उदाहरण से समझें तो ₹2,000 के लेनदेन पर 0.4 फीसदी के हिसाब से ₹8 और ₹10,000 के लेनदेन पर ₹40 का शुल्क बनता है. हालांकि यह शुल्क किन लेनदेन पर लागू होगा और किस श्रेणी में कितनी दर होगी, यही फिलहाल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी उलझन बनी हुई है। 

    जनवरी तक टालने की मांग क्यों?
    पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि यूपीआई में कार्ड पेमेंट की तरह एक समान फी स्ट्रक्चर नहीं है. यूटिलिटी बिल, लोन की किस्त और कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इन अलग-अलग श्रेणियों और उनके नियमों को लेकर कंपनियों और मर्चेंट्स के बीच भ्रम है. यही वजह है कि पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई संगठन चाहते हैं कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले तैयारी के लिए कुछ और समय दिया जाए। 

    फेस्टिव सीजन भी बड़ी वजह
    15 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने की तारीख ऐसे समय पड़ रही है, जब देश में त्योहारी खरीदारी शुरू हो चुकी होगी. एक सूत्र के मुताबिक, पेमेंट इंडस्ट्री के कई निकायों और मर्चेंट्स ने NPCI से कहा है कि MDR लागू करने की तारीख को फेस्टिव सीजन खत्म होने तक टाल दिया जाए. इंडस्ट्री को चिंता है कि महंगाई के दबाव के बीच त्योहारी बिक्री के दौरान कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर उनकी कमाई और ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है. यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ कारोबारी MDR का बोझ किसी न किसी तरीके से ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकते हैं। 

    UPI और कार्ड पेमेंट में क्या फर्क?
    कार्ड पेमेंट में हर मर्चेंट की एक कैटेगरी होती है. कार्ड नेटवर्क इसी आधार पर लेनदेन को प्रोसेस और उसकी जांच करते हैं. कार्ड में MDR की दरें भी अपेक्षाकृत एक जैसी व्यवस्था में होती हैं. यूपीआई में स्थिति थोड़ी अलग है. यहां अलग-अलग तरह के पेमेंट के लिए अलग नियम और शुल्क की व्यवस्था बनाई गई है. इनमें से कुछ ऐसे भुगतान भी हैं, जिन्हें कार्ड के जरिए किया ही नहीं जा सकता. यूपीआई के लोकप्रिय होने से पहले लोन की किस्त या कैपिटल मार्केट से जुड़े कई भुगतान नेट बैंकिंग, IMPS, NEFT और RTGS जैसे माध्यमों से किए जाते थे. इन माध्यमों पर शुल्क की अलग व्यवस्था थी। 

    लोन रीपेमेंट को लेकर सबसे ज्यादा उलझन
    लोन की किस्त के भुगतान को लेकर भी MDR व्यवस्था में पेमेंट इंडस्ट्री के बीच सवाल हैं. कुछ मामलों में बैंक पैसे भेजने वाले और पाने वाले, दोनों पक्षों से शुल्क लेते थे. कैपिटल मार्केट से जुड़े पक्षों का तर्क है कि ब्रोकिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट की तरह है. इसलिए ब्रोकिंग कंपनियों पर MDR नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इस तरह के लेनदेन से उन्हें सीधे कमाई नहीं होती। 

    मैनुअल लोन पेमेंट पर भी सवाल
    छोटी रकम वाले कई लोन में ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है. इसकी एक वजह यह होती है कि ग्राहक के बैंक खाते में तय समय पर पर्याप्त बैलेंस नहीं होता. इसके बाद ग्राहक खुद मैनुअल तरीके से लोन की किस्त जमा करता है. यहीं से नया सवाल खड़ा होता है. मैनुअल पेमेंट को फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पेमेंट माना जाता है, तो उस पर 0.4 फीसदी MDR लग सकता है. वहीं NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे पेमेंट पर ₹5 की फ्लैट फीस का प्रावधान है. अब बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर्स के सामने यह सवाल है कि लोन रीपेमेंट और सामान्य फाइनेंशियल सर्विस ट्रांजैक्शन में अंतर कैसे किया जाए. इसी वजह से नई व्यवस्था के लागू होने से पहले नियमों को लेकर और स्पष्टता की मांग की जा रही है। 

    अब NPCI के फैसले पर नजर
    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अक्टूबर से MDR लागू होगा या इसे जनवरी 2027 तक टाल दिया जाएगा. इंडस्ट्री की मांग NPCI तक पहुंच चुकी है और वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा जारी बताई जा रही है. अगर NPCI तारीख नहीं बदलता है, तो तय नियम के मुताबिक 15 अक्टूबर से पात्र ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू हो जाएगा. वहीं अगर मांग स्वीकार होती है, तो कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों को तैयारी के लिए कुछ और समय मिल सकता है. अब अगले दो दिनों में NPCI के फैसले पर सबकी नजर है. इसी से साफ होगा कि 15 अक्टूबर की डेडलाइन बरकरार रहती है या यूपीआई MDR पर जनवरी 2027 तक राहत मिलती है। 

    UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
    NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है। 

    इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। 

    ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है। 

    2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
    2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा। 

    रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा। 

    अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
    सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। 

    इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा। 

  • दुकानदार ने UPI के लिए मांगा अतिरिक्त चार्ज तो ग्राहक करेंगे किनारा, 76% ने कहा- बदल देंगे पेमेंट मोड

    दुकानदार ने UPI के लिए मांगा अतिरिक्त चार्ज तो ग्राहक करेंगे किनारा, 76% ने कहा- बदल देंगे पेमेंट मोड

    नई दिल्ली

    यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है। 

    ₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67%
    LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है। 

    अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं। 

    MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका
    2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे। 

    अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं.

    भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा। 

    UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान
    LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है। 

    इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

    ### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क
    MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। 

    सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा। 

    सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा
    सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए। 

    ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं
    LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे। 

    LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं। 

    जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव
    प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा। 

    सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता। 

    नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR लगेगा। 

    कारोबारी संगठनों ने किया विरोध
    प्रस्तावित MDR का कारोबारी संगठनों ने भी विरोध किया है. उनका कहना है कि मर्चेंट बिल को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकते हैं, ग्राहकों को बैंक ट्रांसफर की ओर भेज सकते हैं या अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। 

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस व्यवस्था का विरोध किया है, जबकि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने इसे वापस लेने की मांग की है. 30 सितंबर को CAIT के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की थी, जिसके बाद प्रस्तावित 'नो UPI डे' प्रदर्शन वापस ले लिया गया। 

    LocalCircles ने सुझाव दिया है कि शुरुआत में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR सिर्फ बड़े कॉरपोरेट मर्चेंट्स पर लागू किया जाए और MSMEs को इससे बाहर रखा जाए. संगठन का अनुमान है कि इससे संभावित MDR राजस्व का करीब 98% हासिल किया जा सकता है, जबकि छोटे कारोबारियों पर असर भी सीमित रहेगा। 

  • UPI पेमेंट पर चार्ज का असर! 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका, बड़े ट्रांजैक्शन पर भी पड़ेगा असर

    UPI पेमेंट पर चार्ज का असर! 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका, बड़े ट्रांजैक्शन पर भी पड़ेगा असर

    नई दिल्ली

    UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की तैयारी है। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू हो सकता है। इसमें UPI P2P यानी ग्राहक से व्यापारी वाले भुगतान शामिल होंगे। यह चार्ज व्यापारी को देना है। लेकिन, सवाल यह है कि अगर व्यापारी या दुकानदार यह खर्च ग्राहकों पर डाल देते हैं, तो क्या होगा? लोकल सर्कल्स के नए सर्वे में इसका बड़ा असर दिख रहा है। सर्वे में 291 जिलों के 67,000 से ज्यादा UPI यूजर्स ने जवाब दिए।

    ग्राहक क्या करेंगे अगर UPI पर फीस लगे?
    सर्वे के मुताबिक, अगर व्यापारी UPI पेमेंट पर अलग से फीस जोड़ते हैं, तो…

        14 प्रतिशत लोग कहते हैं वे UPI से ही पेमेंट करेंगे और फीस भी देंगे।
        27 प्रतिशत लोग कैश से पेमेंट करेंगे।
        26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड पर शिफ्ट हो जाएंगे।
        14 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड इस्तेमाल करेंगे।
        4 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
        नौ प्रतिशत लोग व्यापारी से कोई और ऐसा पेमेंट ऑप्शन मांगेंगे जिस पर अलग चार्ज न हो।
        2 प्रतिशत लोग खरीदारी टाल देंगे या करेंगे ही नहीं।
        4 प्रतिशत लोग तय नहीं कर पाए कि वे क्या करेंगे।

    ₹2,000 से ऊपर की खरीद में कौन से पेमेंट मोड का करेंगे इस्तेमाल ?
    जब लोगों से पूछा गया कि अगर UPI पर अलग चार्ज लगे तो ₹2,000 से ऊपर की खरीद में वे सबसे ज्यादा कौन सा तरीका इस्तेमाल करेंगे तो उनका जवाब कुछ ऐसा रहा..

        26 प्रतिशत लोग क्रेडिट कार्ड चुनेंगे।
        26 प्रतिशत लोग कैश चुनेंगे।
        13 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड चुनेंगे।
        11 प्रतिशत लोग बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS चुनेंगे।
        सिर्फ 20 प्रतिशत लोग UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।
        4 प्रतिशत लोग अनिश्चित हैं।

    यानी LocalCircles का मानना है कि 76 प्रतिशत UPI यूजर्स बड़े पेमेंट के लिए UPI छोड़ सकते हैं, अगर उस पर अतिरिक्त शुल्क लगता है।

    क्या व्यापारी भी MDR नहीं देना चाहते?
    सर्वे में व्यापारियों की राय भी सामने आई है। 242 जिलों के 32,000 से ज्यादा व्यापारियों ने ये जवाब दिए…

        सिर्फ 17 प्रतिशत व्यापारी ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR देने को तैयार हैं।

        41 प्रतिशत व्यापारी कोई भी MDR देने को तैयार नहीं हैं।

        9 प्रतिशत व्यापारी UPI ही नहीं लेते।

        15 प्रतिशत व्यापारियों ने 0.04 प्रतिशत को अधिकतम सीमा बताया।

    UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत क्यों गिर सकती है?
    लोकल सर्कल्स का अनुमान है कि 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने के बाद पहले पूरे महीने में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 10 प्रतिशत तक घट सकती है। दरअसल, ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट संख्या में बहुत कम हैं। मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 5 प्रतिशत से भी कम, लेकिन वैल्यू के हिसाब से ये करीब 67 प्रतिशत हैं, यानी लगभग ₹6 लाख करोड़ महीना। यह कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब एक-पांचवां हिस्सा है।

    अनुमान है कि UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 4 प्रतिशत गिर सकती है। इसमें 1 पर्सेंटेज पॉइंट सीधा नुकसान MSME व्यापारियों पर होगा और 3 पर्सेंटेज पॉइंट नेटवर्क इफेक्ट से, क्योंकि लोग उन व्यापारियों के साथ कुल UPI इस्तेमाल भी कम कर सकते हैं।

    चूंकि 83 प्रतिशत व्यापारी 0.4 प्रतिशत MDR खुद नहीं झेलना चाहते, इसलिए हो सकता है कि वे यह खर्च सरचार्ज, प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाकर, या ग्राहकों को दूसरे पेमेंट मोड की तरफ मोड़कर वसूल करें। अगर ऐसा हुआ, तो 76 प्रतिशत ग्राहक ₹2,000 से ऊपर की खरीद में दूसरा पेमेंट मोड चुन सकते हैं।

  • ‘No UPI Day’ को लेकर दो गुट आमने-सामने, CTI तैयार तो CAIT पीछे

    ‘No UPI Day’ को लेकर दो गुट आमने-सामने, CTI तैयार तो CAIT पीछे

      नई दिल्ली

    आज  2 अक्टूबर है यानी गांधी जयंती, अगर आप किसी दुकान पर खरीदारी करने के जाएं और वहां पर दुकानदार आपसे कैश मांगे, यानी यूपीआई पेमेंट लेने से मना कर दे, तो परेशान मत होना. दरअसल, सरकार के 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर के विरोध में व्यापिरियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का ऐलान किया है. हालांकि, इसे लेकर अब व्यापारियों में आपस में ही मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं और वे दो ग्रुप में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। 

    ऐसा इसलिए क्योंकि नो यूपीआई डे को लेकर 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने व्यापारियों से गांधी जयंती के दिन UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स ढककर सिर्फ कैश में भुगतान लेने की अपील की है. तो वहीं कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने इससे दूरी बना ली है। 

    CAIT का ऐलान- नहीं होंगे शामिल
    बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई वाली कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि वह 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' नहीं मनाएगी और न ही उसने इसके लिए व्यापारियों से किसी तरह की कोई अपील की है. कैट ने साफ किया है कि संगठन ने इसमें शामिल होने के बारे में कोई फैसला, प्रस्ताव या आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 

    CTI फैसला वापस लेने को तैयार नहीं
    एक ओर जहां कैट इससे दूरी बनाए हुए है, तो वहीं दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने यूपीआई पेमेंट पर MDR लगाने के विरोध में 2 अक्टूबर को No UPI Day मनाने का ऐलान किया है. CTI का कहना है कि व्यापारियों ने अपना फैसला वापस नहीं लिया है. संगठन से जुड़े व्यापारी दिल्ली और पूरे देश में इसे मनाएंगे. इसमें 100 से ज्यादा बड़े व्यापारी संगठन शामिल रहेंगे। 

    सीटीआई को उम्मीद है कि देश भर में 2000 से ज्यादा जगहों पर 'नो UPI डे' मनाया जाएगा. संगठन ने दिल्ली और देश के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 2 अक्टूबर को अपनी UPI मशीनों को काले कपड़े से ढक लें और सिर्फ कैश में लेन-देन करें। 

    सरकार से UPI MDR हटाने की मांग
    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि सरकार 2000 रुपये से ज्यादा के UPI लेन-देन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को वापस ले. इसके पीछे बड़ा तर्क देते हुए सीटीआई ने कहा है कि इसका बोझ 6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा। 

    इसके साथ ही संगठन की ओर से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर कहा गया कि इससे UPI Payment में 50% की गिरावट आ सकती है. देश में कैश का चलन फिर से बढ़ सकता है। 

    कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
    गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। 

  • UPI का दबदबा कायम, सितंबर में रोजाना करीब ₹97,913 करोड़ का डिजिटल पेमेंट

    UPI का दबदबा कायम, सितंबर में रोजाना करीब ₹97,913 करोड़ का डिजिटल पेमेंट

     नई दिल्ली
    आजकल छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक पेमेंट का तरीका तेजी से बदल रहा है. कुछ रुपये की चाय हो या हजारों रुपये की खरीदारी, मोबाइल निकालकर QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है. सितंबर के UPI आंकड़े भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं. इस महीने यूपीआई पर कुल 24.07 बिलियन यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही. यानी औसतन हर दिन करीब 802 मिलियन यानी 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। 

    खास बात यह है कि ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर नया MDR फ्रेमवर्क लागू होने वाला है. हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा. यानी आप अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या रिश्तेदारों को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगेगा. नई व्यवस्था सिर्फ मर्चेंट यानी दुकानदारों या व्यापारियों को किए जाने वाले पेमेंट पर लागू होगी. यहां भी जानना जरूरी है कि MDR चार्ज पेमेंट करने वाले पर नहीं बल्कि रिसीव करने वाले पर लागू होगा। 

    हर दिन 80 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन

    नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी. वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. सितंबर में हर दिन औसतन ₹97,913 करोड़ के यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. यानी रोजाना ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी कुल रकम, दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. अगर सिर्फ महीने के कुल आंकड़े देखें तो सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन अगस्त के मुकाबले थोड़े कम रहे। 

    अगस्त में 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे और उनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ थी. लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सितंबर में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार कमजोर हुई. कैशफ्री के को-फाउंडर रीजू दत्ता के मुताबिक अगस्त में 31 दिन थे, जबकि सितंबर में 30 दिन. इसलिए दोनों महीनों के कुल आंकड़ों की तुलना करते समय दिनों की संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है। 

    सितंबर में बड़े UPI ट्रांजैक्शन बढ़े
    रीजू दत्ता के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच यूपीआई पर एवरेज डेली ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब ₹96,000 करोड़ रही थी. सितंबर में यह बढ़कर करीब ₹98,000 करोड़ पहुंच गई. इसकी एक वजह सितंबर में अपेक्षाकृत ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन होना भी बताया जा रहा है. महीने के बीच में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी पड़ा, जिससे खरीदारी और उपभोक्ता खर्च को सहारा मिला. सितंबर के आंकड़ों को आने वाले फेस्टिव सीजन के लिए भी अहम माना जा रहा है। 

    अक्टूबर में बड़ी फेस्टिव सेल्स शुरू होने की उम्मीद है, जबकि नवंबर में दिवाली का त्योहार आएगा. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Fibe के एमडी और ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक ₹29.37 लाख करोड़ की रकम वाले 24.07 बिलियन मंथली यूपीआई ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि डिजिटल पेमेंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी मजबूती से शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक फेस्टिव सीजन में पेमेंट, कर्ज और तकनीक को जोड़ने से वित्तीय सेवाओं की पहुंच और बढ़ सकती है। 

    छोटे शहरों तक है UPI की पहुंच
    यूपीआई की बढ़ती पहुंच सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. PayNearby के फाउंडर आनंद कुमार बजाज के मुताबिक छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और मोहल्ले की दुकानों में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यानी डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ बड़े मॉल या ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहा. स्थानीय दुकानदार और छोटे कारोबारी भी तेजी से यूपीआई से जुड़ रहे हैं। 

    IMPS लेनदेन में भी हुई बढ़ोतरी
    सितंबर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS)
    के जरिए भी लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसकी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹7.06 लाख करोड़ रही, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी ज्यादा है. सितंबर में IMPS पर रोजाना औसतन 11.80 मिलियन यानी करीब 1.18 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इनकी औसत दैनिक वैल्यू ₹23,530 करोड़ रही। 

    UPI की रफ्तार पर पड़ेगा MDR का असर?
    फिलहाल जानकारों का मानना है कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम या वैल्यू पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन ₹2,000 तक के दायरे में आते हैं और इस सीमा तक जीरो MDR जारी रहेगा. अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके लिए सस्टेनेबल इकोनॉमिक मॉडल जरूरी होगा. उनके अनुसार मामूली MDR से यूपीआई को चलाने में जो इंफ्रास्ट्रक्चर लगता है, उसको मेंटेन करने के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा. अब नजर 15 अक्टूबर पर है, जब नया MDR फ्रेमवर्क लागू होगा। 

  • UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक नहीं लगाई लेकिन सरकार-RBI से किए कई सवाल

    UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, रोक नहीं लगाई लेकिन सरकार-RBI से किए कई सवाल

    नई दिल्ली

    UPI पर 0.4 फीसदी MDR ( Merchant Discount Rate) लगाने का सरकार का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. यूपीआई से भुगतान पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर (MDR) लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. सोमवार यानी 28 सितंबर 2026 को कोर्ट ने इस मामले में RBI और यूपीआई का प्रबंधन देखने वाली संस्था NPCI को नोटिस जारी किया. हालांकि नए MDR स्ट्रक्चर पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया. माने 15 अक्टूबर से लागू होने वाला नया नियम फिलहाल अपनी तय समयसीमा के मुताबिक आगे बढ़ेगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत 15 अक्टूबर से 2,000 से ज़्यादा के कुछ खास UPI 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाना है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कई सवाल जरूर किए हैं। 

    MDR से कौन कमाई करेगा?
    सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने पूछा है कि आखिर इस एमडीआर से कमाई किसे हो रही है और यह चार्ज कोई फीस है या फिर एक तरह का टैक्स? आजतक की अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने पूछा है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगाए जाने वाले इस चार्ज से कौन कमाई करेगा? इसमें कौन सी टैक्स देने वाली संस्था शामिल है? कोर्ट ने चार हफ्तों में सरकार से स्थिति साफ करने को कहा है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने बहस में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन पेश हुए। 

    यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के सवालों का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिनका जवाब सरकार से मांगा गया है. कोर्ट ने सरकार और केंद्रीय बैंक से MDR को लेकर ये भी पूछा है कि अगर एक टैक्सपेयर से दूसरे टैक्सपेयर के पास कैश जाता है, तो उस पेमेंट का कानूनी स्वरूप आखिर क्या होगा?

    UPI MDR पर वित्त मंत्री ने दी थी ये सफाई
    बता दें कि यूपीआई एमडीआर से जुड़ा नोटिफिकेशन ने
    शनल पेमेंट बैंक कॉर्पोरेशन (NPCI) की ओर से जारी किए जाने के बाद विपक्ष इसे लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए नजर आई. बीते सप्ताह खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ट्रांजैक्शन चार्ज को तस्वीर साफ की थी। 

    वित्त मंत्री ने साफ किया था कि यह 2,000 रुपये से कम के यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा था, 'UPI Payment MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई सेस है. यह पैसा भारत के कंसोलिडेटेड फंड में जमा नहीं होगा, बल्कि यह सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा सिस्टम को बेहतर बनाने और अच्छी सर्विस देने के लिए लगाया जाने वाला चार्ज है, छोटे ट्रांजैक्शन के लिए तो बिल्कुल नहीं.' FM के मुताबिक, यह एमडीआर ऑपरेटर्स के बीच का चार्ज है, इसका बोझ कंज्यूमर पर नहीं डाला जाएगा। 

    कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
    गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। 

    किसने लगाई है याचिका?
    यूपीआई पर MDR लगाने के विरोध में एडवोकेट अंजन दत्ता ने PIL दाखिल की है. याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है. याचिका में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में किए गए बदलाव की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाया गया है। 

    क्या है MDR?
    15 अक्टूबर से 2000 रुपये के 'पर्सन-टू-मर्चेंट' पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. हालांकि ये चार्ज ग्राहक को नहीं, बल्कि दुकानदार को देना होगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के पेमेंट पर 5 रुपए का फ्लैट MDR लगेगा. वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है. पर्सन टू पर्सन यानी एक-दूसरे को यूपीआई से लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं है। 

  • UPI पेमेंट पर व्यापारियों का विरोध, स्कैनर पर बांधेंगे काला कपड़ा

    UPI पेमेंट पर व्यापारियों का विरोध, स्कैनर पर बांधेंगे काला कपड़ा

    भोपाल/इंदौर / ग्वालियर

    मध्य प्रदेश में आज 'नो-UPI डे' रहेगा। भोपाल, इंदौर समेत पूरे प्रदेश के व्यापारी ₹2000 से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेंगे।अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल मध्य प्रदेश ने यह आह्वान किया है।हालांकि, किसी भी व्यापारी से जोर-जबर्दस्ती नहीं की जाएगी। भोपाल में यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढांककर सांकेतिक विरोध भी जताएंगे।इससे पहले इंदौर में मंगलवार रात को टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन के नेतृत्व में रीगल स्क्वायर पर हुए प्रदर्शन में 150 से ज्यादा व्यापारी शामिल हुए। व्यापारियों ने ‘यूपीआई बंद करो, यूपीआई पर चार्ज बंद करो’ के नारे लगाए।

     अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाया है। सभी व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं।सरकार के इस फैसले का विरोध शहरभर के व्यापारी व उनके संगठन 23 सितंबर बुधवार को नो-यूपीआई डे मनाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

    साथ ही वे अपने-अपने प्रतिष्ठान व दुकान पर यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढंककर रखेंगे। नो यूपीआई डे मनाने का आह्वान शहर की व्यापारिक संस्था चैंबर ऑफ कॉमर्स व मध्यप्रदेश व्यापारी संघ ने किया है।

    चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष डॉक्टर प्रवीण अग्रवाल सहित सभी पदाधिकारियों का कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्सन पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लगाना गलत निर्णय है, क्योंकि इसका असर व्यापारियों पर पड़ेगा।

    इसके बाद इसका असर कहीं न कहीं आम लोगों पर ही आएगा। अभी सभी व्यापारी अपने कामकाज को सही तरीके से लिखा पढ़ी में ले आए हैं। इस निर्णय से फिर से नकद लेनदेन शुरू होगा और पहले जैसी टैक्स चोरी व कालाधन जैसी समस्याएं पैदा होंगी।

    यूपीआई से नहीं करेंगे लेनदेन
    इसलिए बुधवार को संस्था के सदस्यों सहित अंचल के सभी व्यापारिक एवं औद्योगिक संगठनों से अपील की गई है कि व्यापारिक ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज लिए जाने का विरोध करते हुए सभी नो यूपीआई डे मनाएं और अपने-अपने स्कैनरों को काले कपड़े से ढंक कर रखें और यूपीआई से लेनदेन न करें।

    व्यापार संघ के अध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि व्यापार संघ थाटीपुर के नेतृत्व में क्षेत्र के सभी व्यापारी एकजुट होकर विरोध दर्ज कराएंगे। सभी व्यापारी इसकी फोटो संघ के ग्रुप में भेजेंगे, जिसे प्रदेश की वेबसाइट पर अपलोड कर सरकार तक व्यापारियों की नाराजगी पहुंचाई जाएगी।

    सरकार का निर्णय व्यापारियों पर आर्थिक बोझ

    व्यापार मंडल के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने बताया कि सरकार का यह निर्णय सीधे तौर पर व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालेगा। अधिकतम राशि 300 रुपए तक वसूली जाएगी।

    यदि व्यापारी एक दिन में 2 हजार रुपए से ज्यादा के 10 ट्रांसजेक्शन भी लेता है तो उसे 3 हजार रुपए देना पड़ सकते हैं। थोक किराना समेत जितने भी थोक व्यापार है, उनके लिए परेशानी ज्यादा बढ़ेगी। किराना में ही 90 प्रतिशत से ज्यादा लेन-देन 2 हजार रुपए से ज्यादा का होता है।

    अग्रवाल ने बताया कि वे खुद थोक तेल के कारोबारी है। यदि किसी ने 15 लीटर का एक जार भी लिया है तो उसकी कीमत 2200 रुपए तक है। जब ग्राहक ट्रांसजेक्शन करेगा तो मुझे सीधे तौर पर एमडीआर देना पड़ेगा।

    15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम बता दें कि 15 अक्टूबर से ₹2,000 रुपए से ज्यादा के पर्सन टु मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75000 और उससे ज्यादा के लेन-देन पर चार्ज ₹300 रुपए होगा।

    प्रदेश के 4700 पेट्रोल पंप पर भी यह फैसला मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने 16 अक्टूबर से 2 हजार से ज्यादा के बिल पर UPI पेमेंट नहीं लेने का फैसला किया है। इससे पहले बुधवार को होने वाले सांकेतिक विरोध प्रदर्शन में भी वे शामिल होंगे।

    व्यापारियों के खिलाफ सरकार-खण्डेलवाल
    खण्डेलवाल ने कहा सरकार ने यह शुल्क थोपकर डिजिटल इंडिया को सफल बनाने वाले व्यापारी वर्ग की कमर तोड़ने का काम किया है।

    कैट का नो यूपीआई डे कल राजीव प्लाजा मेंकंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) बुधवार को नो यूपीआई डे राजीव प्लाजा में दोपहर एक बजे से आंदोलन के रूप में मनायेगा।

    कैट के जिलाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस अवसर पर सभी मोबाइल व्यवसायी धरना प्रदर्शन करेंगे। साथ ही कैट मध्यप्रदेश के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन सभा को संबोधित करेंगे।

    कैट के महामंत्री रामकुमार गोयल, कोषाध्यक्ष नितिन गोयल, कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया ने सभी कैट पदाधिकारी और सदस्यों को नो यूपीआइ डे में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है।

  • इंदौर में UPI MDR का विरोध तेज, व्यापारियों ने लगाए पोस्टर; सरकार पर लगाए आरोप

    इंदौर में UPI MDR का विरोध तेज, व्यापारियों ने लगाए पोस्टर; सरकार पर लगाए आरोप

    इंदौर/ग्वालियर
    केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं। 

    इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक
    इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ''यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ''अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। 

    इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशाना
    इंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला। 

    अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशान
    विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ''जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है।

    एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मार
    कांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी। 

    एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांग
    मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ''डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए। 

     

  • पेट्रोल पंपों पर UPI को लेकर नया विवाद, ऑनलाइन पेमेंट से दूरी और कैश पर जोर

    पेट्रोल पंपों पर UPI को लेकर नया विवाद, ऑनलाइन पेमेंट से दूरी और कैश पर जोर

    नई दिल्ली
     देशभर में UPI पर चार्ज के खिलाफ अब विरोध तेज होता जा रहा है। दिल्ली-NCR समेत देशभर में कई जगहों पर अब "No UPI, Only Cash" के पोस्टर लगा दिए गए हैं। दिल्ली के कई पेट्रोल और सीएनजी पंप से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां पर ये पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। ग्राहकों से पेमेंट कैश या कार्ड में लेने की मांग की जा रही है। आपको बता दें कि पेट्रोल पंप एसोसिएशन ट्रेड यूनियन समेत कई संगठनों ने इस चार्ज का विरोध किया है और कहा है कि चार्ज लगेगा तो धीरे-धीरे सभी जगहों पर "No UPI, Only Cash" का बोर्ड लग जाएगा।

    दिल्ली के व्यापारियों ने किया विरोध
    दिल्ली के कश्मीरी गेट मार्केट के व्यापारियों ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए अपनी दुकानों पर 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगाए हैं। व्यापारियों का ये विरोध प्रदर्शन गुरुवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के नेतृत्व में हुआ। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने क्लियर कर दिया है कि इस चार्ज से ग्राहकों की ही परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि पहले से ही काफी कम मार्जिन मिलता है। एक और बोझ पेट्रोप पंप मालिक नहीं संभाल पाएंगे और यूपीआई का ट्रांजेक्शन कम करना पड़ जाएगा।

    होलसेल कारोबारी भी खिलाफ
    दिल्ली के होलसेल मार्केट के कारोबारी भी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज के खिलाफ हैं। दुकानदारों ने 'नो यूपीआई' के पोस्टर लगा दिए हैं। नए चार्ज के खिलाफ प्रोटेस्ट किया गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष ने कहा कि ये फैसला डिजिटल इंडिया की मुहिम को बड़ा झटका साबित हो सकता है। ग्रेटर नोएडा के एक सीएनजी पंप से भी नो यूपीआई ओनली कैश के पोस्टर लगा वीडियो सामने आया है। जहां यूपीआई से पेमेंट लेने पर पेट्रोल पंप की ओर मना करते हुए सिर्फ कैश देने की अपील की गई। व्यापारियों ने कहा कि सरकार को चार्ज लगाने के बजाय UPI ट्रांजैक्शन के लिए सब्सिडी देनी चाहिए और चेतावनी दी कि अगर प्रस्तावित MDR लागू किया गया तो वे आंदोलन करेंगे। 

    उत्तराखंड में भी व्यापारियों का विरोध
    दून उद्योग व्यापार मंडल और अन्य स्थानीय व्यापारी संगठनों ने कहा कि व्यापारी पहले से ही इनकम टैक्स और GST दे रहे हैं और UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त लागत उठाने को तैयार नहीं होंगे। पलटन बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष पारस गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने सरकार के डिजिटल ट्रांजैक्शन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के बाद UPI पेमेंट अपनाना शुरू किया था। उन्होंने कहा, "जैसा कि सरकार शुरू से कहती आ रही है, हम पारदर्शिता लाने के लिए UPI पेमेंट स्वीकार करेंगे, ऑनलाइन काम करेंगे और ऑनलाइन पेमेंट लेंगे। लेकिन इसके बावजूद, अगर टैक्स सिर्फ हम कारोबारियों पर लगाया जाएगा और इसका नुकसान कारोबारियों को ही उठाना पड़ेगा। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।"

    UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज
    बता दें कि जगह-जगह से ये प्रतिक्रियाएं तब आई हैं, जब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क पेश किया, जिसके तहत 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जबकि ग्राहक UPI का इस्तेमाल करके मुफ़्त में ट्रांजैक्शन करते रहेंगे। संशोधित UPI MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और यह केवल चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। नए फ्रेमवर्क के तहत, 2,000 रुपये से ज़्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जिसमें प्रति ट्रांजैक्शन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। 

  • UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत! ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर शुल्क लगेगा, फिर भी ग्राहक रहेंगे बेफिक्र

    UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत! ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर शुल्क लगेगा, फिर भी ग्राहक रहेंगे बेफिक्र

    नई दिल्ली

    यूपीआई चार्ज को लेकर सियासी घमासान है. सरकार साफ कर चुकी है कि यूपीआई फीस का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा. बावजूद इसके गफलत की स्थिति है. लोगों को डर सता रहा है कि आखिरकार इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा. यूपीआई फीस भले ही मर्चेंट पर लागू हो, मगर यूजर्स से ही इसकी वसूली होगी. यही कारण है कि यूपीआई चार्ज को लेकर सरकार के इस फैसले पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. बहरहाल, 2000 रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर चार्ज का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश में लगी है. सूत्रों की मानें तो सरकार पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि यूपीआई फीस का बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े। 

    दरअसल, नया नियम यह है कि अब ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा. सरकार यह साफ कर चुकी है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, कारोबारियों से लिया जाएगा. यानी आम यूजर्स के लिए पेमेंट सिस्टम पहले की तरह ही होगा. उसके ऊपर फीस का कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. मगर अब क्योंकि लोगों में डर है कि कंपनियां इस चार्ज की वसूली आम यूजर्स से कर सकती है. इसलिए सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था बना रही है कि दुकानदार या कारोबारी यूपीआई फीस का यह बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया
    सरकारी सूत्रों ने  बताया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई इकोसिस्टम में पेमेंट एग्रीगेटर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए। 

    मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही सरकार
    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है ताकि यह देखा जा सके कि मर्चेंट इस फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें. ऐसी चिंताएं हैं कि नए चार्ज से बड़े पेमेंट के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है। 

    15 अक्टूबर से बदल रहा यूपीआई पेमेंट नियम
    दरअसल, नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, ग्राहक नहीं. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा। 

    वित्त मंत्रालय का क्या अनुमान
    इस बीच वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं।