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  • PM मोदी ने BRICS समिट में उठाया UNSC सुधार का मुद्दा, कहा- अब बदलाव को टालना संभव नहीं

    PM मोदी ने BRICS समिट में उठाया UNSC सुधार का मुद्दा, कहा- अब बदलाव को टालना संभव नहीं

    नई दिल्ली

    PM Modi BRICS Summit: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए भारत ने दुनिया में अपनी कूटनीति की फिर से धाक दिखाई है. इस समिट के स्वागत संबोधन में ही पीएम मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश देते हुए साफ कहा कि- 'UNSC में सुधार अब टाला नहीं जा सकता.' दरअसल पीएम मोदी ने भारत मंडपम में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के स्वागत के बाद अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बड़ी मांग को उठाया. पीएम मोदी ने रिप्रंजेटेशन की बात करते हुए दो-टूक कहा कि यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में रिफॉर्म अब और टाला नहीं जा सकता. निश्चित समयसीमा में ठोस नतीजों से इसे जोड़ना होगा। 

    'विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा'
    18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "…आज, ग्लोबल साउथ वैश्विक संगठनों में तो आगे की कतार में है, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे की कतार में ही रहता है. हमें 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना होगा. जहां हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो, और हर कोशिश के केंद्र में मानवता की प्रगति हो. इसके लिए, मेरा प्रस्ताव है कि हम मिलकर वैश्विक शासन में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिन्हें हम अगले शिखर सम्मेलन तक 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' का रूप देने की कोशिश कर सकें। 

    तीन प्रमुख बातें- प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाना
    पीएम मोदी ने आगे कहा कि इस रोडमैप को तैयार करते समय हमें तीन मुख्य स्तंभों पर ध्यान देना होगा: प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाना. सबसे पहले, प्रतिनिधित्व के बारे में, मैं यह कहना चाहता हूँ कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों में अब और देरी नहीं की जा सकती. इस मामले में, लिखित बातचीत को एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट, ठोस नतीजों से जोड़ा जाना चाहिए. इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक हकीकत के अनुरूप होनी चाहिए। 

    सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत 
    भारत की मेजबानी में दिल्ली में हो रहे इस समिट में रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील सहित सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इस समिट से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह सामने आई है कि सभी सदस्य देशों के बीच साझा घोषणापत्र के एजेंडे को लेकर सहमति बन गई है. साझा घोषणापत्र में सभी सदस्य देशों के बीच एकतरफा युद्ध के खिलाफ प्रस्ताव पर सहमति बन गई है. आज दोपहर दो बजे के बाद सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि भारत मंडपम पहुंचे. जहां पीएम मोदी ने सभी सदस्य देशों के प्रतनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। 

    भारत मंडपम में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतनिधियों का औपचारिक स्वागत करने के बाद सभी देशों के प्रतनिधियों को पीएम मोदी ने संबोधित भी किया. पीएम मोदी ने सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के ब्रिक्स समिट में स्वागत करते हुए अपने संबोधन में कहा- मुझे आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स के लिए 350 से अधिक बैठकों का आयोजन, 30 शहरों में आपकी टीम का स्वागत करने का हमे अवसर मिला. भारत को ब्रिक्स समिट का आयोजन करने में आप सभी के मदद के लिए धन्यवाद। 

  • UNSC चुनाव में भारत की दावेदारी, चीन की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक चर्चा

    UNSC चुनाव में भारत की दावेदारी, चीन की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक चर्चा

    नई दिल्ली
    UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता के दावे पर अब चीन ने भी प्रतिक्रिया दे दी है। पड़ोसी मुल्क ने कहा है कि वह इस तरह की खबरों पर गौर कर रहा है। खास बात है कि पहले ही कई बड़े देश भारत का साथ दे रहे हैं। चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।

    क्या बोला चीन
    चीन ने गुरुवार को कहा कि उसने 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी से जुड़ी खबरों पर गौर किया है। सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने की भारत की घोषणा पर चीन के रुख के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है।'

    क्या बोले जयशंकर
    विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'शांति अर्थात मानदंडों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिये समग्र प्रगति सुनिश्चित करने' पर आधारित है। उन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत के संभावित कार्यकाल की प्राथमिकताओं का भी विस्तार से उल्लेख किया था।

    चीन नहीं करता भारत का समर्थन
    चीन सुरक्षा परिषद के वीटो अधिकार प्राप्त पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है लेकिन उसने अभी तक भारत की दावेदारी का समर्थन नहीं किया है। इसके विपरीत, पांच स्थायी सदस्यों में शामिल अन्य चार देश-अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस-सुधार के बाद गठित होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट रूप से समर्थन कर चुके हैं।

    किस देश से है मुकाबला
    सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे। इसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।

    भारत पिछली बार 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना था। यह संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय इस शक्तिशाली निकाय में भारत का आठवां कार्यकाल था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।

    सुरक्षा परिषद में नहीं हुआ खास सुधार
    भारत का कहना है कि UNSC का 80 साल पुराना ढांचा मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। और इसी वजह से यह वैश्विक संस्था दुनिया भर में जारी संघर्षों से हो रही मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी साबित नहीं हुई। भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए वैश्विक वित्तीय ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए।

    स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा, 'हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों में सुरक्षा परिषद प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर पाई है।'

  • UNSC में गूंजा भारत का जवाब, पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी; कहा- ‘पाखंड की हद’

    UNSC में गूंजा भारत का जवाब, पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी; कहा- ‘पाखंड की हद’

     नई दिल्ली

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा हुई. चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान को जमकर घेरा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए अफगानिस्तान में घुसकर किए गए उसके हमले को नरसंहार करार दिया. भारत के प्रतिनिधि ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन किया है। 

    भारत ने यूएनएससी में कहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर हमले किए, जिसमें आम नागरिक मारे गए. पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है. यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने इसे पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि नरसंहार करने वाला उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे दे, तो ऐसा करने वाला उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। 

    यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 372 आम नागरिक वहां मारे जा चुके हैं. अधिकतर लोग रमजान के पाक महीने में मारे गए थे. उन्होंने अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान उसके व्यापार मार्गों में भी बाधाएं डाल रहा है। 

    पी हरीश ने यूएनएससी में कहा कि अफगानिस्तान के सामान पर प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है. उन्होंने भारत की ओर से अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया और कहा कि साल 2021 के बाद 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, 40 हजार लीटर कीटनाशक वहां भेजे जा चुके  हैं। 

    यूएनएससी में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि इस साल अप्रैल महीने में ही बाढ़ राहत के लिए जरूरी सामान और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी. नई दिल्ली ने मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान में सभी 34 प्रदेश के विकास के लिए भी बहुत मदद दी है. अफगानिस्तान में भारत की करीब 500 से ज्यादा परियोजनाएं चल रही हैं. पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिक का निर्माण भारत ने कराया है। 

    पी हरीश ने कहा कि काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन कराने के साथ ही ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण भारत ने कराया है. उन्होंने कहा कि भारत द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की मेजबानी कर रहा है. पी हरीश ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मानते हैं कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं।