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  • उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज, दिल्ली HC ने सुनाया फैसला

    उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज, दिल्ली HC ने सुनाया फैसला

     नई दिल्ली

    दिल्ली दंगे से जुड़े साजिश वाले केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। दोनों करीब 6 साल से जेल में बंद हैं और जमानत के लिए निचली से सबसे ऊपरी अदालत तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

    फरवरी 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों को लेकर दर्ज 'वृहत साजिश' वाले यूएपीए केस में जमानत के लिए दोनों आरोपियों ने जमानत की अर्जी दायर की थी। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और दिनेश भट्ट की बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से इस केस में दायर तीसरी याचिका खारिज की। बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के फैसले को नहीं बदल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों से कहा गया था कि वे गवाही पूरी होने या आदेश पारित होने की तारीख से एक साल की अवधि पूरी होने, इनमें से जो भी पहले हो, उसके बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर उपजे विरोध प्रदर्शन के बाद हुए सांप्रदायिक दंगे में 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि 700 से अधिक लोग जख्मी हुए थे। उमर खालिद और शरजील इमाम पर दिल्ली पुलिस ने दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्ट खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन जैसे अन्य लोगों पर भी वृहत साजिश केस में आरोप लगे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच कर रही है।

    2020 में हुई थी गिरफ्तारी
    इससे पहले निचली अदालत ने भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की हैं, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था। इमाम को इस मामले में 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में इन याचिकाओं का विरोध करते हुए दावा किया कि दोनों दंगों के 'मुख्य साजिशकर्ता' हैं।

  • अदालत में पुलिस का दावा: दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड हैं उमर खालिद और शरजील इमाम, SC का भी किया जिक्र

    अदालत में पुलिस का दावा: दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड हैं उमर खालिद और शरजील इमाम, SC का भी किया जिक्र

     नई दिल्ली

    पिछले कई सालों से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर विरोध किया है। 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े 'वृहत साजिश' के मामले में खालिद और इमाम की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए पुलिस ने उन्हें हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है। मंगलवार को दायर हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा कि जमानत याचिकाएं गलतफहमी पर आधारित और कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं हैं। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से जनवरी में जमानत से इनकार किए जाने का जिक्र करते हुए बताया कि सर्वोच्च अदालत ने उनकी भूमिका को 'कमांड अथॉरिटी'वाला बताते हुए कहा था कि उनकी संलिप्तता दूसरे सह-आरोपियों से अलग थी।

    पुलिस की ओर से कहा गया, 'नीचे दिए जा रहे आधारों को देखते हुए जमानत की याचिका गलत और गैर कानूनी है: मौजूदा याचिकाकर्ता दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड्स में से एक हैं। इसलिए इनकी भूमिका को अन्य सह-आरोपियों की तुलना में 'कमांड अथॉरिटी'की श्रेणी में रखा गया।' उमर खालिद और शरजील इमाम ने ट्रायल कोर्ट की ओर से 4 जुलाई को जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने पिछले महीने उनकी अपील पर नोटिस जारी किया था और 27 अगस्त की तारीख तय की थी। हालांकि, 27 अगस्त को अदालत में अवकाश था इसलिए यह मामला अब सोमवार को सूचीबद्ध होगा।

    फरवरी 2020 में दिल्ली में भड़के दंगे में में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की थी। शरजील इमाम और उमर खालिद गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में बंद हैं और इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

    क्या थी उमर और शरजील की दलील और पुलिस का खंडन
    अपनी याचिकाओं में उमर खालिद और शरजील इमाम ने सैयद इफ्तिकार अंद्राबी बनाम एनआईए मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दलील देते हुए कहा है कि परिस्थितियों में बदलाव हुआ है और इसलिए उन्हें जमानत पर रिहाई मिलनी चाहिए। उस मामले में सर्वोच्च अदालत ने खालिद और इमाम की जमानत नामंजूर करते समय दी गई दलीलों पर गंभीर आपत्तियां जताईं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस दलील को खारिज करते हुए दलील दी कि दोनों ने अंद्राबी फैसले का जिक्र करके अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। हलफनामे में कहा गया है कि यह फैसला असंबंधित केस का है और इसका दिल्ली दंगों या उनकी कथित भूमिका से लेनादेना नहीं।