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  • UCC पर गुजरात में बड़ा बदलाव, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून

    UCC पर गुजरात में बड़ा बदलाव, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून

    अहमदाबाद 

    गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. गुजरात सरकार के UCC विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद राज्य सरकार ने कानून से जुड़ी राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात में UCC को लागू करने की दिशा में अहम कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया तेज होगी. सरकार की ओर से लाए गए इस कानून में विवाह से लेकर तलाक और उत्तराधिकार तक कई अहम नियम शामिल हैं. यानी आने वाले समय में परिवार और निजी कानून से जुड़े कई मामलों में लोगों को नए नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 

    UCC में महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति तथा उत्तराधिकार के मामले में समान अधिकार देने का प्रावधान है. बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. वहीं अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से बाहर रखा गया है. विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने के साथ लिव-इन संबंधों को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे के लिए भी नए प्रावधान हैं. ऐसे में गुजरात में UCC लागू होने के बाद विवाह और परिवार से जुड़े मामलों में क्या बदलाव आएंगे इसे समझना जरूरी है। 

    राज्य के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC-2026) बिल को देश की राष्ट्रपति की तरफ से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद गुजरात सरकार ने इसे 'गुजरात एक्ट नंबर 15 ऑफ 2026' के रूप में अधिसूचित करते हुए 1 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक गुजरात गजट (Gazette) में प्रकाशित कर दिया है।

    यह कानून राज्य सरकार द्वारा जारी की जाने वाली आगामी अधिसूचना की तिथि से पूरे गुजरात में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां समान नागरिक संहिता लागू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    1. विवाह का पंजीकरण होगा जरूरी

    UCC के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. कानून लागू होने के बाद सभी विवाहों का निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराना होगा. दी गई जानकारी के मुताबिक यह अवधि 60 दिन है. तय समय में पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान है. विवाह के समय पुरुष की उम्र कम से कम 21 वर्ष और महिला की उम्र 18 वर्ष होना जरूरी होगा. खास बात यह है कि UCC पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को खत्म नहीं करता. अलग-अलग धर्मों में विवाह की जो परंपराएं हैं वे जारी रह सकती हैं. हालांकि विवाह का कानूनी पंजीकरण जरूरी होगा। 

    गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं.
    2. एक से ज्यादा विवाह पर रोक

    UCC में एकविवाह का नियम रखा गया है. यानी पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता. इसका मतलब है कि वैवाहिक स्थिति में रहते हुए दोबारा विवाह करने पर कानूनी दिक्कत हो सकती है. तलाक और विवाह से जुड़े मामलों के लिए भी कानून में प्रक्रिया तय की गई है. इसके अलावा विवाह का पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी दस्तावेजों या रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति बदलने पर भी असर पड़ेगा. ऐसे मामलों में पहले विवाह का पंजीकरण जरूरी होगा। 

    3. लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नए नियम
    गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. लिव-इन में रहने वाले या ऐसा संबंध शुरू करने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार के सामने संयुक्त बयान देकर पंजीकरण कराना होगा. यानी ऐसे संबंधों को लेकर सरकार के पास आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा. लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर भी रजिस्ट्रार को इसकी जानकारी देनी होगी. यह सूचना संयुक्त रूप से या किसी एक पक्ष की ओर से दी जा सकती है. इस तरह लिव-इन संबंधों को भी कानून के दायरे में लाने की कोशिश की गई है। 

    4. बेटा-बेटी को संपत्ति में बराबर अधिकार
    UCC में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. बिना वसीयत बनाए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी बच्चों और माता-पिता को संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलेगा. बेटे और बेटी के बीच उत्तराधिकार में भेद नहीं किया जाएगा. इसके अलावा विवाह के बाहर जन्मे बच्चों और सरोगेसी या गोद लेने के जरिए परिवार में आए बच्चों को भी जैविक बच्चों के समान कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी अधिकार दिए गए हैं. महिलाओं को भी संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में पुरुषों के बराबर अधिकार देने का प्रावधान है। 

    5. आदिवासी समुदाय को कानून से छूट
    गुजरात UCC का एक अहम प्रावधान अनुसूचित जनजातियों से जुड़ा है. संविधान के अनुच्छेद 366(25) और 342 के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से छूट दी गई है. संविधान के भाग 21 के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले कुछ समूह भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे. इसके अलावा विवाह या तलाक से जुड़े विवादों में अदालत जाने से पहले मध्यस्थता का विकल्प रखा गया है. यानी विवाद को अदालत तक ले जाने से पहले आपसी समाधान की कोशिश की जा सकती है. राष्ट्रपति की मंजूरी और राजपत्र अधिसूचना के बाद अब UCC के प्रावधानों को लागू करने से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

    शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों में अनिवार्य; भारी जुर्माने का प्रावधान
    गुजरात UCC-2026 के लागू होने के बाद विवाह (Marriage) और तलाक (Divorce) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव आएगा:

    60 दिनों की सीमा: विवाह संपन्न होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए मेमोरेंडम जमा करना अनिवार्य होगा।

    लापरवाही पर जुर्माना: निर्धारित समय में शादी का पंजीकरण न कराने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    नोटिस के बाद भी अनदेखी: यदि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर ₹25,000 तक हो सकती है।

    लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम
    UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को भी कानूनी दायरे में लाते हुए इसके रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है:

    कानूनी दर्जा व भरण-पोषण: लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चे को वैध/कानूनी संतान का पूर्ण दर्जा प्राप्त होगा। इसके अलावा, यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ता है, तो महिला को भरण-पोषण मांगने का कानूनी अधिकार होगा।

    गलत जानकारी देने पर सजा: लिव-इन रजिस्ट्रेशन के दौरान झूठी या गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल या ₹25,000 तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।

    नाबालिगों के लिए रोक: किसी भी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को लेकर अत्यंत सख्त और दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    अनुसूची जनजातियों (ST) को छूट और पुराने कानूनों पर प्रभाव
    अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को छूट: संविधान के Part XXI के तहत संरक्षित परंपरागत अधिकारों वाले समूहों और अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस UCC कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

    पुराना कानून रद्द: इस नए कानून के लागू होते ही 'Gujarat Registration of Marriages Act, 2006' को निरस्त (Repeal) कर दिया जाएगा। साथ ही, शादी व तलाक से जुड़े पुराने व्यक्तिगत कानूनों की असंगत धाराएं UCC के प्रभाव से बेअसर हो जाएंगी।

    मार्च 2026 में विधानसभा में पास हुआ था बिल
    गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने मार्च 2026 में UCC बिल को राज्य विधानसभा में पेश कर पास कराया था। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी और हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया था। राष्ट्रपति की मोहर लगते ही अब गुजरात में UCC-2026 लागू होने का ऐतिहासिक रास्ता साफ हो गया है।

  • ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    लखनऊ
    पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। शामली के आयुष मलिक प्रकरण को सामने रखते हुए सोम ने कहा कि पहले लव जिहाद लड़कियों के साथ चलता था, अब लड़कों के साथ हो रहा है। इसीलिए UCC जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अच्छे परिवारों के लड़कों का बड़े स्तर पर ‘माइंडवॉश’ किया जा रहा है और इसके पीछे फंडिंग से लेकर एक खास नैरेटिव तैयार करने तक का काम हो रहा है।

    सोम ने कहा कि शामली का मामला इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में विदेशी और ‘सो-कॉल्ड सेक्युलर’ लोग भी शामिल हैं। उनके मुताबिक यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़े स्तर पर फंडिंग करके युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सोम ने इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया।

    यूसीसी ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा
    संगीत सोम ने यूसीसी को इसका समाधान बताते हुए कहा कि समान नागरिक कानून ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक कानून लागू होना चाहिए और जिस मजबूती के साथ इसे लागू करने की जरूरत है, उसी तरह इसे लागू किया जाना चाहिए। एक दिन पहले भी सोम ने यूसीसी का विरोध करने को लेकर अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोला था।

    ‘मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी’
    सोम ने अपने बयान में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। सोम ने तीनों नेताओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और दावा किया कि शामली का प्रकरण इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश, राहुल और ओवैसी देश में शांति नहीं चाहते और हमेशा देश को बांटने की राजनीति करते हैं। सोम ने कहा कि सनातनी इसे समझ चुके हैं और 2027 में इनकी औकात पता चलेगी।

    दंगा करेंगे तो सात पुश्तें याद रखेंगी
    प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा कि यूपी में धार्मिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद इन लोगों को पता है कि दंगा करेंगे तो ऐसा इलाज होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी। सोम ने एक वर्ग की बढ़ती आबादी को भी चिंता का विषय बताते हुए यूसीसी को पूरी दमदारी से लागू करने की मांग की।

  • बिहार में UCC पर आमने-सामने JDU-RJD, जीतन राम मांझी ने समर्थन में रखी बात

    बिहार में UCC पर आमने-सामने JDU-RJD, जीतन राम मांझी ने समर्थन में रखी बात

    पटना
    बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है। इस बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने यूसीसी पर अपनी बात रखते हुए इसे लागू किए जाने का समर्थन किया है। दरअसल केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कुछ दिनों पहले कहा था कि साल 2029 से पहले भाजपा शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। अमित शाह के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू विधायक श्याम रजक ने कह दिया था कि बिहार में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, बाद में जदयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यूसीसी के प्रावधानों पर विमर्श के बाद पार्टी कोई निर्णय़ लेगी।

    अब केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी ने UCC को लेकर एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जीतन राम मांझी ने तीन तलाक और धारा 370 पर भी अपना रुख साफ किया है। जीतन राम मांझी ने एक्स पर लिखा, 'बाबा साहेब का संविधान देश के धर्मनिरपेक्षता की नीति पर आधारित है जो हमें समानता का भी अधिकार देता है। UCC के अनुपालन में किसी प्रकार के दांव पेच की बात करना मेरी समझ में गैर संवैधानिक है जिसे मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ने काफी सोच समझकर लागू करने का निर्णय लिया है।

    वैसे देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर UCC अनुपालन हेतु हमारी सरकार को निर्देशित किया था जिसे पुरानी सरकारों ने कभी तव्वजो नहीं दिया। पर हम हर संवैधानिक व्यवस्था को लागू करने के पक्षधर हैं चाहें वह ट्रिपल तलाक़ का मामला हो या धारा-370 का। वैसे मैं सरकार के मंत्री होने के नाते एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ना तो किसी का चेहरा देखकर काम करेगी ना ही किसी ख़ास को खुश करने के लिए।

    “अब तालाब के पानी पर सबों का अधिकार होगा”
    बराबरी का अधिकार मतलब UCC…

    हम हर वह फ़ैसला ले रहें हैं जो राष्ट्रहित में हैं।

    क्योंकि हम रहें या ना रहें ये देश रहना चाहिए।

    धन्यवाद मोदी जी,धन्यवाद अमित शाह जी।

    आप हैं तो देश निश्चित है,देश के अवाम को भरोसा है।'

    तेजस्वी यादव यूसीसी पर क्या बोले
    बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद ) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। मंगलवार को तेजस्वी यादव ने आरोप था लगाया कि बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के सवाल पर स्पष्ट रुख अपनाने से हिचकिचाकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की मौजूदा स्थिति के लिए यादव ने उसके राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को जिम्मेदार ठहराया था।

    पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से कहा था कि संजय झा ने जदयू को बर्बाद कर दिया है। वह भाजपा की इच्छा के अनुसार पार्टी चला रहे हैं। अब जदयू केवल भाजपा के इशारे पर काम करती है। इस मामले में भी वही हुआ है। तेजस्वी यादव ने दोहराया कि हम इस तरह के कानून के विरोध में रहे हैं और हर स्तर पर इसका विरोध करते रहेंगे।

  • यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    'मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा', यूसीसी पर अमित शाह के बयान का भूपेंद्र चौधरी ने किया स्वागत

    महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    लखनऊ
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का संकल्प पत्र 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता को शामिल किया था और संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप इसे राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत लागू करने की बात कही थी।

    महिलाओं की समानता की दिशा में मजबूत कदम 'यूसीसी'

    उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश में एक आधुनिक, प्रभावी और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान इसी दिशा में सरकार की मंशा और संकल्प को दर्शाता है।

    पीएम मोदी की गांरटी पर देश को विश्वास

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य का स्वागत करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो गारंटी है, उस पर देश को विश्वास है और केंद्र सरकार अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो वादे देश की जनता से किए हैं, उन्हें पूरा करने का काम लगातार किया जा रहा है और समान नागरिक संहिता भी उसी संकल्प का हिस्सा है।

    गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी पार्टी के रुख को दोहराते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

  • नीतीश कुमार के नाम पर जदयू का नाम बदलने के सवाल पर बोले विजय चौधरी- राष्ट्रीय परिषद लेगी इस पर अंतिम निर्णय

    नीतीश कुमार के नाम पर जदयू का नाम बदलने के सवाल पर बोले विजय चौधरी- राष्ट्रीय परिषद लेगी इस पर अंतिम निर्णय

    पटना 

    विजय चौधरी ने यूसीसी पर जदयू का पक्ष रखा है।

    भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता लागू किए जाने को लेकर हाल ही में देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि यूसीसी को बीजेपी शासित राज्यों में लागू किया जाएगा। लेकिन इसके बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने कह दिया था कि राज्य में यूसीसी को किसी भी कीमत पर लागू नहीं किया जाएगा। जदयू की तरफ से अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूसीसी को लेकर पार्टी का पक्ष रखा है।

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल के प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। उसके प्रावधानों को देखने के बाद उसपर पार्टी विमर्श करेगी। अगर कोई विवाद का मामला होगा, तब पार्टी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेगी। उपमुख्यमंत्री मंगलवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में ये बातें कही।

    बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोमवार को कहा था कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही शाह से मुलाकात करेंगे और फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। अमित शाह ने रविवार को कहा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की 21 राज्यों की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू करेंगी। संजय झा ने इस विषय पर 'पीटीआई-भाषा' से कहा था कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

    इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक जदयू के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा था कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। श्याम रजक ने कहा था कि इस मुद्दे पर हमारे नेता ने बहुत पहले ही पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हमारी पार्टी संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन कर रही है, लेकिन बिहार में इसे लागू किए जाने के पक्ष में नहीं है।

    वैसे, जद(यू) अब तक सैद्धांतिक रूप से यूसीसी के खिलाफ रही है। पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार ने बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जनवरी, 2017 में विधि आयोग को पत्र लिख कर कहा था कि विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच आम सहमति के अभाव और स्पष्ट रूपरेखा न होने के कारण समान नागरिक संहिता को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए।

    JDU का नाम 'जनता दल नीतीश' करने पर क्या बोले

    जनता दल (यूनाइटेड) का नामकरण नीतीश कुमार के नाम पर किये जाने पर कहा कि जदयू राष्ट्रीय परिषद इस पर निर्णय लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आई बाढ़ से हुई क्षति का आकलन करने केंद्रीय टीम आ रही है। हमलोग आशान्वित हैं कि केंद्र सरकार मदद करेगी। इधर यूसीसी की चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर केंद्रीय पंचायती राज मंत्री लालन सिंह आदि नेता उनसे मिलने पहुंचे थे।

  • UCC को लेकर OP चौधरी ने गिनाईं मुस्लिम महिलाओं की मुश्किलें, कहा- समान कानून से परंपराएं रहेंगी सुरक्षित

    UCC को लेकर OP चौधरी ने गिनाईं मुस्लिम महिलाओं की मुश्किलें, कहा- समान कानून से परंपराएं रहेंगी सुरक्षित

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को 2029 तक भाजपा शासित राज्यों में लागू करने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने यूसीसी को संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों का हिस्सा बताते हुए इसे भाजपा के घोषित एजेंडे का हिस्सा बताया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में विपक्षी दलों के कुछ मुख्यमंत्रियों के शामिल नहीं होने पर भी सवाल उठाए। भारत-चीन संबंधों और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी सेना पीएलए की तैनाती में कमी की खबरों पर भी चौधरी ने केंद्र की कूटनीति की सराहना की।

    अमित शाह के बयान का किया समर्थन
    अमित शाह के 2029 तक भाजपा शासित प्रदेशों में समान नागरिक संहिता लागू करने के बयान पर ओपी चौधरी ने कहा कि शाह अपने संकल्पों को दृढ़ता से लागू करने के लिए जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने यूसीसी को अपने घोषित एजेंडे और चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता की दिशा में आगे बढ़ना है।
    विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है

    उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूसीसी नहीं होने के कारण मुस्लिम समाज की महिलाओं को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने संपत्ति में अधिकार, तीन तलाक और बहुविवाह जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी वर्ग की महिलाओं को समान अधिकार मिलना जरूरी है। यूसीसी को लेकर आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति पर उठने वाली आशंकाओं को खारिज करते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि विपक्षी ताकतों की ओर से इस संबंध में भ्रम और अफवाह फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आदिवासी परंपरा को कोई नुकसान नहीं
    उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता से आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति को कोई नुकसान नहीं होगा। आदिवासी समुदाय को इस मुद्दे पर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। भाजपा यूसीसी को एक प्रगतिशील और समान अधिकारों वाले समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है। इसके माध्यम से महिलाओं को अधिक समान और उचित अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

  • अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    अमित शाह के UCC ऐलान के बाद JDU एक्टिव, संजय झा गृह मंत्री से करेंगे मुलाकात; रखेंगे पार्टी का पक्ष

    नईदिल्ली 

    समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार में एनडीए के भीतर शुरू हुई बयानबाजी के बीच जेडीयू ने बड़ा बयान दिया है.जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा UCC के मसले पर जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. बता दें कि अमित शाह के 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने वाले बयान के बाद बिहार में दो अलग-अलग सुर सुनाई दिए. जदयू विधायक श्याम रजक ने कहा बिहार में UCC किसी कीमत पर लागू नहीं होगा. वहीं सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने कहा अमित शाह ने कहा है तो अच्छी बात होगी, लागू हो सकता है. बताया जा रहा है कि अब इस खींचतान को खत्म करने के लिए संजय झा मोर्चा संभालेंगे। 

    UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद JDU की पहल
    बता दें कि हाल में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 से पहले भाजपा और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. इस बयान के बाद बिहार में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. वहीं जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने साफ-साफ कह दिया था कि जदयू बिहार में यूसीसी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देगी। 

    लेकिन, अब जब जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व से कहा गया है कि अमित शाह से मुलाकात करके पार्टी अपना पक्ष रखेगी तो इसको डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, जदयू का मानना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना सभी समाजों से बातचीत के फैसला नहीं होना चाहिए. जेडीयू ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत करेगी. जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जल्द ही अमित शाह से UCC के मसले पर बातचीत करेंगे। 

    संजय झा अमित शाह के सामने रखेंगे पार्टी का पक्ष
    राजीव रंजन के बयान से साफ है कि जेडीयू इस मुद्दे को सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के जरिए आगे बढ़ाना चाहती है. संजय झा की अमित शाह से मुलाकात में बिहार की स्थिति और पार्टी के रुख पर चर्चा होने की संभावना है. बता दें कि जेडीयू पहले ही संकेत दे चुकी है कि संसद में किसी विधेयक का समर्थन करना और उसे अपने राज्य में लागू करने का फैसला करना दो अलग-अलग विषय हैं। 

    बिहार में UCC को लेकर JDU का रुख अलग
    जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने हाल ही में साफ कहा था कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा. उनका कहना था कि पार्टी ने संसद में कानून का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी समय यह भी स्पष्ट कर दिया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा. ऐसे में संजय झा की अमित शाह से प्रस्तावित मुलाकात को बिहार के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह मुलाकात गठबंधन के भीतर इस संवेदनशील मुद्दे पर समन्वय की कोशिश भी हो सकती है। 

  • MP UCC Draft: आज रविवार को कैबिनेट की हरी झंडी संभव, विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े बड़े प्रस्ताव

    MP UCC Draft: आज रविवार को कैबिनेट की हरी झंडी संभव, विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े बड़े प्रस्ताव

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को तीन खंडों में तैयार अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। आज  रविवार को जगदीशपुर में प्रस्तावित विशेष कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदा विधेयक पर विचार कर उसे मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसके बाद सरकार मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। 

    कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे क्या होगा?
    यदि कैबिनेट मसौदे को मंजूरी देती है तो कानून विभाग अंतिम विधेयक तैयार करेगा। इसके बाद इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद ही यूसीसी प्रदेश में लागू होगी। 

    समिति की प्रमुख सिफारिशें
    समिति की अंतिम रिपोर्ट में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके लिए विवाह के बाद एक से दो माह की समय-सीमा निर्धारित करने की सिफारिश है। मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि तलाक केवल न्यायालय की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मान्य होगा। मौखिक तलाक को कानूनी मान्यता नहीं देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, पति या पत्नी के जीवित रहते तथा वैधानिक तलाक के बिना दूसरी शादी को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव भी शामिल है। 

    लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या है प्रस्ताव?
    प्रस्तावित यूसीसी मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकरण अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। बिना पंजीकरण के साथ रहने को दंडनीय बनाने का भी प्रस्ताव है। साथ ही लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को पैतृक संपत्ति में वैधानिक अधिकार देने की सिफारिश भी रिपोर्ट में की गई है। 

    आदिवासियों को दायरे से बाहर रखने का सुझाव
    समिति ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि गुजरात और उत्तराखंड में भी आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

    तीन खंडों में तैयार हुई अंतिम रिपोर्ट
    समिति की रिपोर्ट तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में यूसीसी लागू करने से संबंधित सिफारिशें हैं, जिन्हें देश-विदेश के कानूनों तथा मध्य प्रदेश की मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। यह भाग 10 अध्यायों में विभाजित है। दूसरे खंड में यूसीसी का मसौदा विधेयक शामिल है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं। तीसरे खंड में जिला स्तरीय बैठकों, राज्य स्तरीय परामर्श और ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त जनसुझावों तथा आपत्तियों का संकलन और विश्लेषण किया गया है।

    9.58 लाख से अधिक सुझाव मिले
    सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी।  समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। ये सुझाव जिला स्तरीय बैठकों, राज्य स्तरीय परामर्श और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिए गए। अंतिम रिपोर्ट में इन सुझावों का विषयवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।

    यूसीसी पर सियासत भी तेज- 
    – समान कानूनी अधिकार देना उद्देश्य

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना, महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना और पारिवारिक कानूनों में एकरूपता लाना है। मुख्यमंत्री लगातार कांग्रेस से यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करने की बात कह रहे हैं।
     
    – मुद्दो से ध्यान भटकाने यूसीसी ला रही सरकार
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार यूसीसी की आड़ में प्रदेश के महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। 

     

  • मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, सरकार को समिति की रिपोर्ट मिली, आदिवासी प्रावधानों पर मंथन

    मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, सरकार को समिति की रिपोर्ट मिली, आदिवासी प्रावधानों पर मंथन

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. सरकार की ओर से बनाई गई समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में सबसे अहम सिफारिश यह की गई है कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखा जाए. अब रिपोर्ट कानून विभाग को भेज दी गई है. अगले चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। 

     वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति पहले इस रिपोर्ट की समीक्षा करेगी. इसके बाद जैसे ही कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, वैसे ही UCC विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश कर दिया जाएगा. वैसे मध्य प्रदेश विधानसभा का यह पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. वहीं, तय समय के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए सीएम मोहन यादव ने समिति के सभी सदस्यों का आभार जताया है. आपको बता दें कि इस समिति को रिटायर्ड रंजना प्रकाश देसाई की देखरेख में बनाया गया था। 

    रिपोर्ट में क्या-क्या है?

    समिति की रिपोर्ट तीन हिस्सों में तैयार की गई है. पहले हिस्से में देश-विदेश और मध्य प्रदेश के मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने के बाद सिफारिशें दी गई हैं. दूसरे हिस्से में UCC का ड्राफ्ट बिल शामिल है, जबकि तीसरे भाग में जनता से मिले सुझावों का पूरा ब्योरा दिया गया है। 

    सरकार के मुताबिक इस ड्राफ्ट बिल में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं. रिपोर्ट तैयार करने के दौरान जिला, राज्य और वेबसाइट के जरिए लोगों से राय मांगी गई थी. इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले, जिनका अलग-अलग आधार पर विश्लेषण भी रिपोर्ट में जोड़ा गया है। 

    किन मामलों पर किया गया अध्ययन?
    समिति को शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, संपत्ति में उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसी आधार पर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट तैयार किया गया। 

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के साथ प्रदेश की पारंपरिक रीति-रिवाजों, सामाजिक प्रथाओं और संवैधानिक प्रावधानों का भी ध्यान रखा गया है. सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की है, जिस पर अब सरकार आगे फैसला लेगी। 

  • MP UCC Explained: लिव-इन कपल्स के लिए नए नियम, शादी जैसा रजिस्ट्रेशन और अलग होने पर तय होगी कानूनी प्रक्रिया

    MP UCC Explained: लिव-इन कपल्स के लिए नए नियम, शादी जैसा रजिस्ट्रेशन और अलग होने पर तय होगी कानूनी प्रक्रिया

    भोपाल

    मध्य प्रदेश सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा लगभग तैयार हो गया है. इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई नए नियम शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लिव-इन में रहने वाले कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, इस रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया भी शादी और तलाक की तरह तय की जाएगी। 

    मसौदे के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराया है और वह बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपना लिव-इन रजिस्ट्रेशन रद्द कराना होगा. रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी नहीं होगी. एक पक्ष भी आवेदन देकर इसे निरस्त करा सकेगा. हालांकि, दूसरा पक्ष इस फैसले से असहमत होने पर अदालत में चुनौती दे सकता है। 

    सरकार और विधि विभाग मसौदे को अंतिम रूप दे चुके हैं. अब गुरुवार को दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ अंतिम चर्चा होगी. इसके बाद सरकार मानसून सेशन में यूसीसी विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

    पहले क्या थे प्रावधान?
    ड्राफ्ट में उत्तराधिकार (संपत्ति के अधिकार) से जुड़े प्रावधानों को भी पहले के मुकाबले काफी कम किया गया है. पहले जहां ऐसे करीब 100 प्रावधान थे, अब उन्हें घटाकर लगभग 30 कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों के बाद मध्य प्रदेश की यूसीसी, गुजरात और उत्तराखंड की यूसीसी से अधिक सरल और संक्षिप्त होगी. आदिवासी, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को पहले की तरह इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 

    मसौदे के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन केवल बालिग (18 साल या उससे अधिक उम्र) लोग ही करा सकेंगे. इसके लिए दोनों पक्षों को अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे. रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास होगा। 

    लिव-इन को लेकर प्रावधान
    अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी के साथ लिव-इन में रह रहा है और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नया रजिस्ट्रेशन कराता है, तो ऐसी स्थिति की जानकारी रखने की व्यवस्था फिलहाल साफ नहीं है. इसलिए इस प्रावधान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। 

    सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उसके खिलाफ अलग से कोई आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं होगा. यह व्यवस्था काफी हद तक लोगों की जागरूकता और आपसी सहमति पर आधारित रहेगी. वहीं, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन में रहता है, तो ऐसे मामलों में पहले से लागू आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। 

    सूत्रों के मुताबिक, अगर यह विधेयक मानसून सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कुछ प्रावधानों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है।