Tag: tree

  • दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    दिसंबर तक काटने हैं 1.5 लाख पेड़, डिंडौरी में अब तक 4516 की ही कटाई

    डिंडौरी

    डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है।

    डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम
    टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी

    60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा
    वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे।

    मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था।

    पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं।

    हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी
    मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

    फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही।

    80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल
    डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है।

    वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था।

    30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे
    वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे।

    इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं।

    विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी।

    डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े
    मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए।

    साल बोरर क्या है ?

    साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो। 

    पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी
    साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा। 

    अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप
    अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश, सेवा एवं समर्पण अभियान में शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण

    पर्यावरण संरक्षण का संदेश, सेवा एवं समर्पण अभियान में शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण

    सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत शाहपुरा में हुआ वृक्षारोपण                 
    भाजपा कार्यकर्ताओं ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प, प्रदेश से आए बाइकर्स ने भी लिया हिस्सा

    शाहपुरा
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सेवा एवं समर्पण अभियान के अंतर्गत शाहपुरा में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, युवा कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि एक पौधा केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पर्यावरण की नींव है।
    इस अवसर पर “हर पौधा—भविष्य की हरियाली और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी” का संदेश देते हुए आमजन से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहभागिता की अपील की गई। साथ ही पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
    कार्यक्रम में प्रदेश से आए बाइकर्स के साथ भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, जिला उपाध्यक्ष ज्ञानदीप त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष संतोष साहू, जनपद अध्यक्ष प्रियंका आर्मो, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष घनश्याम कछवाहा, चिकित्सा प्रकोष्ठ जिला संयोजक श्वेता जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन चक्रवर्ती, मंडल अध्यक्ष हिरेंद्र मरावी, नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल, उपाध्यक्ष मुकेश साहू, सत्यम मानिकपुरी, हरिहरन रजक, नंद कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।
    जिला मीडिया प्रभारी राज साहू ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा एवं समर्पण अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखा जाएगा।

  • गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरी पर हर किमी. के अंतराल पर लगेंगे हरिशंकरी (पीपल, बरगद व पाकड़) के पौधे

    गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरी पर हर किमी. के अंतराल पर लगेंगे हरिशंकरी (पीपल, बरगद व पाकड़) के पौधे

    पौधरोपण महायज्ञ-2026

    प्रदेश में सड़कों के किनारे लगेंगे 2 करोड़ से अधिक पौधे 

    पौधरोपण के लिए 2336 स्थल पर 11325 हेक्टेयर में लगेंगे पौधे 

    594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगाए जाएंगे 5.50 लाख पौधे 

    गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरी पर हर किमी. के अंतराल पर लगेंगे हरिशंकरी (पीपल, बरगद व पाकड़) के पौधे 

    हीटवेव से बचाने के लिए वन विभाग के साथ ही लोकनिर्माण, आवास-विकास, नगर विकास आदि विभागों की भी रहेगी सक्रिय भागीदारी

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश की सड़कों के किनारे भी पौधे लगाए जाएंगे। प्रदेश के सभी एक्सप्रेसवे, लोकनिर्माण, ग्राम पंचायतों, आवास विकास, पंचायती राज, नगर विकास आदि की सड़कों के किनारे भी पौधरोपण होगा। इसके लिए नोडल वन विभाग व अन्य विभागों के सहयोग से दो करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। ‘मिशन छाया’ के अंतर्गत सड़क किनारे पौधरोपण के लिए 2336 स्थल पर 11325 हेक्टेयर में पौधे रोपित होंगे। मार्गों के किनारे व सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधों का रोपण होगा। इसमें पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर, नीम, शीशम, जामुन, महुआ, आम, महोगनी, अर्जुन, चिलबिल, गुलमोहर, जकरकंडा, कचनार, अमलतास आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। 

    गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगेंगे 5.50 लाख पौधे 
    प्रदेश के एक्सप्रेसवे के किनारे भी पौधरोपण किया जाएगा। इस बार विशेष रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे लगाए जाएंगे। 594 किमी. लंबे गंगा एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर वन विभाग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.50 लाख पौधरोपण करेगा। दोनों पटरी पर हर एक किमी. पर हरिशंकरी (पीपल, पाकड़, बरगद) रोपा जाएगा। बीच में पीपल, पाकड़, बरगद के साथ-साथ नीम, गूलर, महुआ, आम, अर्जुन, चिलबिल, अमलतास, कचनार, जकरकंडा, गुलमोहर आदि प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनकी सुरक्षा के लिए तार से फेंसिंग व सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सुनिश्चित की जाएगी।

    कुछ महत्वपूर्ण मार्गों पर भी लगेंगे पौधे
    👉 दिल्ली-लखनऊ मार्ग                     
    👉 गंगा एक्सप्रेसवे                     
    👉 पूर्वांचल एक्सप्रेसवे                
    👉 गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे          
    👉 नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे हाईवे  गौतमबुद्धनगर      
    👉 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (शेखपुर से साथीपुर दाईं पटरी) 

    सड़क किनारे पौधरोपण के लिए वन संग यह विभाग करेंगे सहयोग 
    👉 ग्राम्य विकास- ग्राम सभा, ग्रामीण सड़कों के किनारे 
    👉 पंचायती राज- पंचायत सड़कों पर रोपण 
    👉 नगर विकास- शहरी क्षेत्रों में सड़कों की पटरी 
    👉लोक निर्माण- राजमार्ग, जिला मार्ग, पंचायत मार्ग, एप्रोच मार्गों के किनारे, ग्रामीण सड़कों के किनारे ट्री गार्ड के साथ पौधरोपण 

    ‘मिशन छाया’ के अंतर्गत सड़कों के किनारे छायादार व फलदार पौधे लगाए जाएंगे। हाल में ही बने गंगा एक्सप्रेसवे पर 5.50 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। वहीं अन्य एक्सप्रेसवे आदि पर भी पौधरोपण होगा। वन विभाग व अन्य विभाग मिलकर सड़कों के किनारे दो करोड़ से अधिक पौधे लगाएगा। 
    अदिति शर्मा, मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार)

  • जुलाई में विद्यालयों में चलेगा पर्यावरण संरक्षण महाअभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ को मिलेगा विस्तार

    जुलाई में विद्यालयों में चलेगा पर्यावरण संरक्षण महाअभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ को मिलेगा विस्तार

    एक पेड़ मां के नाम 3.0' से हरित चेतना को मिलेगा नया विस्तार, जुलाई में विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान

     'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के जुलाई कैलेंडर के तहत पूरे माह चलेंगी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां

    – पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, लेखन और जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में विकसित होंगे पर्यावरणीय संस्कार

    प्रत्येक विद्यार्थी बनेगा एक पौधे का संरक्षक, विद्यालयों से समाज तक पहुंचेगा हरित संदेश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रयोगशाला बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के अन्तर्गत जुलाई माह का गतिविधि कैलेंडर जारी किया गया है। जुलाई माह का यह कैलेंडर विद्यालयों में हरित संस्कृति को मजबूत करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    कैलेंडर के अनुसार जुलाई मे पूरे महीने 'स्वस्थ जीवनशैली अपनाना' विषय पर आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत जीवनशैली के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है।

    कैलेंडर में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों में ऐसे व्यावहारिक संस्कार विकसित करना है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाए।

    'एक पेड़ मां के नाम 3.0' बनेगा प्रमुख अभियान
    जुलाई माह की सबसे प्रमुख गतिविधि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान होगी। इसके अंतर्गत विद्यालय परिसर, सार्वजनिक स्थलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को पौधों के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प भी लें।

    हर छात्र निभाएगा पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी
    कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक लगाए गए पौधे की देखभाल, सिंचाई, संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही विद्यालयों में इको क्लब्स के माध्यम से पौधों की प्रगति की समीक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    रचनात्मक गतिविधियों से बढ़ेगी जागरूकता
    जुलाई के दौरान पोस्टर, स्लोगन, कोलाज, स्वतंत्र लेखन, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रकृति भ्रमण के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता, पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया जाएगा। दूसरे शनिवार को विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।