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  • त्योहारों में घर जाना महंगा, जयपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट टिकट के दाम आसमान पर

    त्योहारों में घर जाना महंगा, जयपुर एयरपोर्ट से फ्लाइट टिकट के दाम आसमान पर

    जयपुर
    त्योहारों पर घर जाना है? जाइए जरूर, बस टिकट बुक करने से पहले जेब को समझा दीजिए कि इस बार सफर थोड़ा 'भावुक' करने वाला है। दिवाली अभी दूर हैं, लेकिन उसकी महंगाई ने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले ही दस्तक दे दी है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ, दिवाली और छठ… लगातार त्योहारों ने हवाई यात्रा की मांग बढ़ाई तो एयरलाइंस ने किराए का मीटर भी तेज कर दिया।

    जयपुर से कई रूट पर सामान्य दिनों की तुलना में किराया डेढ़ से तीन गुना तक बढ़ गया है। यानी त्योहारों की खरीदारी शुरू होने से पहले ही टिकट ने बजट बिगाड़ दिया। ट्रैवल एजेंट्स के अनुसार इस बार त्योहारों का सिलसिला लगातार बना हुआ है। श्राद्ध, नवरात्र, दशहरा, दिवाली और छठ के दौरान देशभर में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का घर आना-जाना बढ़ेगा। पर्यटकों की आवाजाही भी तेज रहेगी।

    ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें पैक, स्पेशल ट्रेनों में भी वेटिंग
    उधर, त्योहारी सीजन में जयपुर से संचालित होने वाली ज्यादातर प्रमुख ट्रेनें अभी से पैक हो चुकी हैं। कई रूटों पर नो रूम की स्थिति बन गई है। रेलवे की ओर से घोषित स्पेशल ट्रेनों में भी अब लंबी वेटिंग शुरू हो गई है।

    छह से आठ नवंबर के बीच किराए की पड़ताल में सामने आई तस्वीर
    जयपुर-मुंबईः
    जयपुर से मुंबई का हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं 5 नवंबर को मुंबई से जयपुर का न्यूनतम किराया 14 हजार और अधिकतम 18 हजार रुपए से अधिक है। सामान्य दिनों में यह किराया 6 से 7 हजार रुपए के बीच रहता है।

    जयपुर-पुणेः जयपुर से पुणे का किराया 10,559 रुपए से शुरू होकर 12 हजार रुपए तक पहुंच गया है। वहीं पुणे से जयपुर का किराया 20 हजार रुपए तक पहुंच गया। 9 नवंबर को दोपहर 3 बजे रवाना होने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट का किराया 20,230 रुपए दर्ज किया गया। अन्य फ्लाइट्स भी 13 हजार रुपए तक किराया वसूल रही हैं।

    जयपुर-कोलकाताः 6 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से कोलकाता का न्यूनतम किराया 10 हजार है, जो 17 हजार रुपए तक पहुंच गया है। कोलकाता से जयपुर आने वाले यात्रियों को किराए में कुछ राहत मिल रही है।

    जयपुर-दिल्लीः 5 नवंबर की बुकिंग पर जयपुर से दिल्ली का अधिकतम हवाई किराया 14 हजार रुपए तक पहुंच गया है, जो सामान्य किराए से करीब चार गुना अधिक है।

    गत वर्ष की तुलना में महंगा हुआ सफर
    गत वर्ष की तुलना में इस बार हवाई किराया अधिक महंगा है। पिछले वर्ष इन दिनों जयपुर से मुंबई का सामान्य किराया 5,190 से 5,506 रुपए के बीच था, जबकि वर्तमान में सामान्य किराया 6,744 रुपए तक पहुंच चुका है। जयपुर से कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद समेत कई रूटों पर भी किराए में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रमुख वजह एयर ट्रैफिक फ्यूल की बढ़ी हुई दरों को माना जा रहा है।

  • पंजाब में बढ़ा घरेलू पर्यटन का क्रेज, शहरों से ज्यादा गांवों के लोग घूमने निकले

    पंजाब में बढ़ा घरेलू पर्यटन का क्रेज, शहरों से ज्यादा गांवों के लोग घूमने निकले

    चंडीगढ़ 
    विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जारी आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के लोग सैर-सपाटे के काफी शौकीन हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को लेकर उत्साह अधिक है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ‘भारत में घरेलू पर्यटन’ रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के 76.2 प्रतिशत ग्रामीण परिवार हर माह कम से कम एक दिन की यात्रा कर रहे हैं। इस श्रेणी में पंजाब देशभर में छठे स्थान पर है। वहीं प्रदेश में कुल 65.4 प्रतिशत परिवार एक दिन की यात्रा पर जाते हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के शहरी क्षेत्रों में 52.2 प्रतिशत परिवार एक दिन की यात्रा करते हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 76.2 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि गांवों के लोगों में घूमने-फिरने का रुझान शहरों की तुलना में अधिक है। खान-पान और मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध पंजाब में पर्यटन गतिविधियों के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

    अगर अन्य राज्यों की बात करें तो त्रिपुरा 89.5 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद केरल में 85.9 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 83.4 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 79 प्रतिशत और कर्नाटक में 77.5 प्रतिशत ग्रामीण परिवार एक दिन की यात्रा कर रहे हैं। पंजाब इन राज्यों के बाद छठे स्थान पर है।

    मई और अक्तूबर में सबसे अधिक होती हैं यात्राएं
    देशभर में पर्यटन गतिविधियों का विश्लेषण बताता है कि मई और अक्तूबर के दौरान सबसे अधिक यात्राएं की जाती हैं। इन महीनों में धार्मिक पर्यटन का हिस्सा सबसे ज्यादा रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रा के लिए 25 प्रतिशत लोग ट्रेन और 32 प्रतिशत लोग बस को प्राथमिकता देते हैं। वहीं ठहरने के लिए होटल और गेस्ट हाउस सबसे पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं। यात्राओं के दौरान लोगों का सबसे अधिक खर्च परिवहन पर होता है। 

    पंजाब में बढ़ रही घरेलू पर्यटकों की संख्या
    पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में घरेलू पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में राज्य में 2,66,40,429 घरेलू पर्यटक आए थे। यह संख्या वर्ष 2025 में बढ़कर 3,32,45,623 तक पहुंच गई। चार वर्षों में घरेलू पर्यटकों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार का संकेत है। 

  • रायपुर से रांची तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बिलासपुर-बोकारो-धनबाद जुड़ेंगे; तीन राज्यों को मिलेगी रफ्तार

    रायपुर से रांची तक सुपरफास्ट कनेक्टिविटी, बिलासपुर-बोकारो-धनबाद जुड़ेंगे; तीन राज्यों को मिलेगी रफ्तार

    रायपुर 
    रायपुर से रांची और धनबाद तक का सफर अब आसान होने वाला है. क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बन रहा रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के बीच गेंमचेंचर होने वाला है. इसके बनने के बाद रायपुर से रांची का सफर महज 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि रायपुर से धनबाद का सफर भी 8 से 9 घंटे के बीच में पूरा हो जाएगा. इस हाईवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से और तेज हो जाएगी. 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे न केवल पश्चिम की तरफ रोड कनेक्टिविटी मजबूत होगी. बल्कि ईधन और समय की भी अच्छी बचत होनी शुरू हो जाएगी। 

    रायपुर से रांची 7 घंटे में 
    रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (EC-07) के बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और झारखंड की राजधानी रांची के बीच सफर आसान हो जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि टू-लेन रास्तों से होकर जाना पड़ता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर 7 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. वहीं दोनों शहरों के बीच 30 किलोमीटर तक का फर्क आएगा। 

    रायपुर से धनबाद का सफर 9 घंटे में 
    छत्तीसगढ़ और झारखंड के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रायपुर और धनबाद की दूरी में भी बड़ा अंतर आएगा. अभी दोनों शहरों के सफर में 14 से 16 घंटे का समय लगता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे पुराने घुमावदार रास्तों के बजाय कई जगह बिल्कुल नया और सीधा रास्ता बना देगा. रायपुर से धनबाद के बीच बनकर तैयार होने वाला है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड से लेस होगा. जिससे यहां 100 किलोमीटर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेगी। 

    छत्तीसगढ़ की तीन राज्यों तक कनेक्टिविटी
        छत्तीसगढ़: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर तक जाएगा. 
        झारखंड: गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक जाएगा.
        यहां से आगे का यह सफर छत्तीसगढ़ को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कनेक्ट कर देगा.

    छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर का हिस्सा 
    रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का 384 किलोमीटर का हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनाया जा रहा है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की तरफ से प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया कि NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक NH-43 पर इस प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है. यह राजमार्ग सीधे तौर पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों को झारखंड के धनबाद से जोड़ देगा. रायपुर से बिलासपुर के बीच का पुराना मार्ग 6-लेन के ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो रहा है. जबकि बिलासपुर से आगे धनबाद तक यह पूरी तरह से एक नया रूट होगा. यह टोटल 104.25 किलोमीटर लंबा रूट है। 

    ट्रैफिक का दवाब नहीं होगा 
    इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े शहरों जैसे रायपुर, कोरबा, जशपुर, गुमला, रांची, बोकारो के बाहर से बायपास और ओवरब्रिज दिए गए हैं. जिससे शहर के अंदर का लोकल ट्रैफिक और जाम सफर को धीमा नहीं करेगा. इस पूरे रूट पर 382 से अधिक स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और जंगली जानवरों को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अंडरपास शामिल हैं. जिससे ट्रैफिक का दवाब कम रहेगा। 

    2027 तक शुरू करने की तैयारी
    फिलहाल एनएचएआई की तरफ से छत्तीसगढ़ और झारखंड में अलग-अलग चरणों में इसका काम शुरू हो चुका है. एक्सप्रेसवे का ज्यादातर हिस्सा 2026 के दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जबकि 2027 तक इसे शुरू करने की तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लॉजिस्टिक्स लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देगा. जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी।