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  • ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

    ग्रीनफील्ड टाउनशिप को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, डेटा आधारित होगी नए शहरों की प्लानिंग

     पटना
    बिहार में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर काम में तेजी ला दी गई है. इस प्रोजेक्ट के तहत कई जिलों में नए शहर बसाए जायेंगे. यहां लोगों को घर, बाजार, सड़कें, बेहतर कनेक्टिविटी, विकास और पर्यावरण के साथ-साथ अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

    शहर की प्लानिंग में एक्सपर्ट को किया शामिल
    जानकारी के मुताबिक, इसके लिए अब बिहार सरकार ने शहरी विकास की प्लानिंग में एक्सपर्ट को शामिल किया गया है. नगर विकास एवं आवास विभाग ने अहमदाबाद स्थित सेंटर फॉर इनवायरमेंट प्लानिंग एंड टेक्नोलॉजी एडवाइजरी फाउंडेशन यानी CEPT के साथ तकनीकी सहायता इकाई यानी TSU स्थापित करने के लिए समझौता किया है.

    नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में समझौता हुआ साइन
    नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किया गया. विभाग की ओर से विशेष सचिव-सह-बिहार नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवल किशोर चौधरी और CEPT एडवाइजरी फाउंडेशन के निदेशक दर्शन पारिख ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार भी मौजूद रहे.

    पूरा खाका किया जाएगा तैयार
    बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायता इकाई के जरिए नए शहरी इलाकों की प्लानिंग कई लेवल पर किए जायेंगे. सबसे पहले यह देखा जाएगा कि कहां आवासीय इलाके हों, कहां व्यावसायिक इलाके विकसित किए जाएं और कहां दूसरी जरूरी सुविधाएं बनाई जाए. इसके साथ ही सड़क, आधारभूत ढांचे और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी का भी पूरा खाका तैयार किया जाएगा. इससे साफ है कि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही सभी सुविधाएं तय की जायेंगी.

    डेटा आधारित होगी पूरी योजना
    इस पूरी योजना की खास बात यह बताई जा रही है कि यह पूरी तरह डेटा आधारित होगा. शहरी विकास की योजनाएं वैज्ञानिक अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाएंगी. टाउनशिप में आधुनिक सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर रहेगा. सड़क, परिवहन, कनेक्टिविटी और दूसरी नागरिक सुविधाओं की योजना लोगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी.

    मंत्री नीतीश मिश्रा ने क्या कहा?
    इस योजना को लेकर मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि समृद्ध बिहार के विजन के अनुरूप भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए शहरी इलाकों का विकास किया जा रहा है. CEPT जैसी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से ग्रीनफील्ड टाउनशिप को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिलेगी.

  • बिहार सरकार की नई व्यवस्था, जमीन बेचने वाले रैयतों को जल्द मिलेगा भुगतान

    बिहार सरकार की नई व्यवस्था, जमीन बेचने वाले रैयतों को जल्द मिलेगा भुगतान

    पटना
    बिहार में विकसित हो रहे 12 सेटेलाइट टाउनशिप में से अगर कोई रैयत अपनी जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो आवेदन के 30 दिनों के भीतर उनको राज्य आवास बोर्ड की ओर से पैसा भुगतान कर दिया जाएगा। इसके लिए एसओपी तैयार है। बुधवार को विधान परिषद में रवीन्द्र प्रसाद सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप योजना की अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। चूंकि बिहार में राष्ट्रीय औसत की तुलना में शहरीकरण कम है, जबकि शहरी क्षेत्रों में न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है, बल्कि जीडीपी में भी योगदान अधिक होता है। एक आकलन के अनुसार 2030 तक शहरी क्षेत्र के लोगों का जीडीपी में 75 फीसदी तक योगदान हो सकता है।

    इसलिए सरकार ने सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार की यह कतई मंशा नहीं है कि वह किसानों से जबरिया जमीन ले। किसानों से स्वेच्छा से जमीन मांगी जा रही है। अब तक 750 किसानों ने स्वेच्छा से जमीन देने की सहमति जता दी है। जिस जिले में आवास बोर्ड का कार्यालय नहीं है वहां एक-एक नोडल पदाधिकारी नामित किए गए हैं। जमीन मालिक संबंधित नोडल पदाधिकारी से मिलकर आवेदन दे सकते हैं।

    इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन की भी व्यवस्था है। लैंड पुलिंग में रैयतों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। रवीन्द्र सिंह ने एक निश्चित अवधि की घोषणा कर किसानों को जमीन की बिक्री करने की अनुमति देने की मांग की, जबकि नीरज कुमार ने कहा कि किसानों में संशय की स्थिति है। सौरभ कुमार के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि सैरातों की बंदोबस्ती में नियमों का ख्याल रखा जाना है। शिकायत मिली है तो मुख्यालय से टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

    राजद के सुनील सिंह आपस में भिड़े
    सेटेलाइट टाउनशिप योजना के सवाल-जवाब के क्रम में राजद के सुनील सिंह और भाजपा के प्रो नवल किशोर यादव आपस में भिड़ गए। उच्च सदन में अमर्यादित टिप्पणी भी हुई। हालांकि सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उस शब्द को विप की कार्यवाही से बाहर कर दिया। दरअसल नगर विकास मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सुनील सिंह ने कहा कि सेटेलाइट टाउनशिप में मेरी पूरी जमीन चली गई। आज मेरे पास एक कठ्ठा भी जमीन नहीं बची। लेकिन मेरा एक प्लॉट 40 लाख रुपए कठ्ठा है तो दूसरा दो लाख है।

    ऐसे में सरकार कुल जमीन का 55 फीसदी ही हिस्सेदारी कैसे दे सकती है। हम जमीन की बिक्री करना चाहते हैं तो सरकार ने उस पर रोक लगा रखी है। सुनील सिंह ने यह भी कहा कि देश के एक नामी-गिरामी उद्योगपति सपत्नीक हाल ही में मस्तीचक गए थे। सब जानते हैं कि वे सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन देखने गए थे। इस पर नवल किशोर यादव ने कहा कि कोई किसान परेशान नहीं हैं।