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  • बिहार में जमीन अधिग्रहण पर बड़ा अपडेट, शहरी जमीन पर दोगुना और ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा; भुगतान में देरी जारी

    बिहार में जमीन अधिग्रहण पर बड़ा अपडेट, शहरी जमीन पर दोगुना और ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा; भुगतान में देरी जारी

    पटना
     राज्य में प्रस्तावित 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप की जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई व्‍यवस्‍था की।

    भू-स्वामियों की जरूरत को देखते हुए उनकी जमीन की खरीद का आदेश दिया, लेकिन अब तक एक भी आवेदक को भुगतान नहीं हो सका है।

    10 सेटेलाइट टाउनशिप के लिए अधिसूचित जमीन बेचने के लिए अब तक 1264 भू-स्वामियों ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को आवेदन दिया है।

    12 ग्रीनफील्ड टाउनशिप के लिए जमीन की खरीद प्रक्रिया अटकी
    इसके बावजूद जिला और प्रमंडल स्तर की समितियों से जमीन की जांच रिपोर्ट बिहार राज्य आवास बोर्ड को नहीं मिली है। इससे जमीन बेचकर जरूरी काम निपटाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

    खासकर उन भू-स्वामियों के सामने मुश्किल है, जिन्हें इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य जरूरी काम के लिए पैसों की जरूरत है।

    जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक के कारण वे अपनी संपत्ति बेचकर जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। विभाग ने 17 जून को आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था।

    जांच रिपोर्ट नहीं मिलने से भू-स्वामी लगा रहे विभागों के चक्कर
    इसके तहत 100 करोड़ रुपये तक मूल्य वाली जमीन के प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) के पास भेजने हैं। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन के प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजे जाने का प्रावधान है।

    जिला या प्रमंडल स्तर की रैयती भूमि क्रय समिति को जमीन की जांच कर बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत दर, कुल मूल्य और अन्य पहलुओं का आकलन करना था
    संबंधित समितियों ने अब तक अपनी रिपोर्ट आवास बोर्ड को नहीं सौंपी है। इसी कारण जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।

    एक माह में भुगतान का मिला था आश्वासन
    जमीन खरीद की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विभाग विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर चुका है। 22 जुलाई को विभागीय मंत्री ने एक माह के भीतर भुगतान कराने का आश्वासन भी दिया था।

    इसके बावजूद आवेदकों को अब तक भुगतान नहीं मिला है। आवेदक जिला कार्यालयों से लेकर आवास बोर्ड तक चक्कर लगा रहे हैं।

    नियम के अनुसार, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भू-स्वामी से अंतिम लिखित सहमति ली जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    स्वीकृति मिलने पर बिहार राज्य आवास बोर्ड को सात दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। इसके बाद अधिकृत पदाधिकारी की देखरेख में विक्रय विलेख का निबंधन और जमीन का नामांतरण आवास बोर्ड के पक्ष में कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा।

    पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए सबसे अधिक आवेदन
    बिहार राज्य आवास बोर्ड के अनुसार, पटना जिले में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के लिए सबसे अधिक 859 आवेदन मिले हैं।

    मगध टाउनशिप के लिए 69 आवेदन आए हैं। इन दोनों टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में रोक बरकरार है।

    अन्य टाउनशिप के लिए मिले आवेदनों में सारण के 80, कोसी के 44, तिरहुत के 72, सीतापुरम के 92, मिथिला के 25, रोहतास के एक, मां पूरण देवी के पांच और विक्रमशिला के 17 आवेदन शामिल हैं। इन क्षेत्रों के भू-स्वामियों को जमीन बेचने और भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है।

    शहरी जमीन पर दोगुना, ग्रामीण पर चार गुना मुआवजा
    विभाग ने जमीन खरीद के लिए मुआवजे की दर भी तय की है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए बाजार मूल्य या न्यूनतम सरकारी दर (एमवीआर) में से निर्धारित आधार पर दोगुना भुगतान किया जाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए यह मुआवजा चार गुना होगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण जमीन के मुआवजे पर 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।

    हालांकि, इस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए आवेदन कर चुके भू-स्वामियों को पहले जांच, मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

  • ग्रीनफील्ड टाउनशिप की जमीन का होगा दोबारा सत्यापन, नक्शे से रिकॉर्ड तक होगी जांच

    ग्रीनफील्ड टाउनशिप की जमीन का होगा दोबारा सत्यापन, नक्शे से रिकॉर्ड तक होगी जांच

    पटना
     ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण का काम शुरू होगा। इसमें सर्वे के दौरान जुटाए गए जमीन के आंकड़ों का राजस्व विभाग के रिकार्ड से मिलान किया जाएगा।

    हर भूखंड की माप, स्थिति और क्षेत्रफल की जांच राजस्व रिकार्ड के आधार पर होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही टाउनशिप का अंतिम आधार नक्शा तैयार किया जाएगा।

    सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू
    नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एजेंसी को संबंधित विभागों के सहयोग से नवीनतम बंदोबस्त वर्ष के राजस्व रिकार्ड, अधिकार अभिलेख, मुकदमा अभिलेख, जमीन के नक्शे और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज जुटाने होंगे।

    सर्वे के बाद तैयार नक्शे का अंचल स्तर पर उपलब्ध राजस्व रिकार्ड से मिलान किया जाएगा। नक्शा सर्वे नंबर के आधार पर तैयार होगा।

    यदि मौके पर मिली जमीन की स्थिति और सरकारी रिकार्ड में दर्ज स्थिति में अंतर मिलता है तो उसे नक्शे में अलग से दर्ज किया जाएगा।

    हर भूखंड का अलग-अलग तैयार होगा डेटा
    टाउनशिप क्षेत्र के प्रत्येक भूखंड का अलग-अलग क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा। इसमें सर्वे के दौरान मिले क्षेत्रफल के साथ राजस्व रिकार्ड में दर्ज क्षेत्रफल की जानकारी भी रहेगी।

    यह पूरा डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) में भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ जमीन के स्वामित्व और उसकी श्रेणी की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

    इससे टाउनशिप की योजना बनाते समय यह साफ रहेगा कि किसी भूखंड का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है, सरकारी रिकार्ड में कितना दर्ज है और जमीन किसके नाम या किस श्रेणी में दर्ज है।

    विभाग के अनुसार राजस्व रिकार्ड और मौके पर मिली स्थिति का मिलान करने से जमीन से जुड़े संभावित विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही टाउनशिप की योजना और भूमि उपयोग तय करने में भी सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।

     

  • बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप का रास्ता साफ, जमीन देने के लिए चार विकल्प तैयार

    बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप का रास्ता साफ, जमीन देने के लिए चार विकल्प तैयार

     पटना
    Satellite Township Bihar: बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन देने को लेकर कई जगहों पर रैयतों और भू-स्वामियों का विरोध सामने आ रहा है।

    इसे देखते हुए राज्य सरकार ने जमीन मालिकों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें अलग-अलग विकल्प देने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर नगर विकास एवं आवास विभाग की टीम किसानों और रैयतों के बीच जाकर पूरी प्रक्रिया और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देगी।

    सहमत‍ि और लैंड पूलिंग पर सरकार का जोर
    सरकार की कोशिश है कि टाउनशिप के लिए अधिक से अधिक जमीन सहमति और लैंड पूलिंग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।

    हालांकि, जरूरी आधारभूत संरचनाओं के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण का विकल्प भी रखा गया है।

    टाउनशिप की सीमाओं का निर्धारण किया जा चुका है। वहीं, पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए योजना का प्रारूप भी सामने आ गया है। प्रस्तावित टाउनशिप को 30 सेक्टर में विकसित किया जाएगा।

    फिलहाल इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराया जा रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    किसानों के बीच जाकर समझाए जाएंगे विकल्प
    रैयतों के विरोध को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने सीधे किसानों से संवाद करने का निर्णय लिया है। विभाग की टीम उन्हें जमीन देने के विभिन्न विकल्पों, मिलने वाले लाभ और पूरी प्रक्रिया की जानकारी देगी।

    सरकार की प्राथमिकता पहले चरण में लैंड पूलिंग के माध्यम से जमीन हासिल करने की है। इसके बाद जरूरत के अनुसार अन्य विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
    क्या हैं जमीन देने के चार विकल्प?

    1. लैंड पूलिंग से जमीन देने का विकल्प
    पहले विकल्प के तौर पर किसानों की सहमति से लैंड पूलिंग की जाएगी। इसमें रैयत अपनी जमीन योजना के लिए उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद उस क्षेत्र में सड़क, नाली, पार्क समेत अन्य आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी।

    विकास के बाद तैयार भूमि के 55 प्रतिशत हिस्से को जमीन मालिक को वापस किया जाएगा। हालांकि, वापस मिलने वाली जमीन टाउनशिप के विकसित हिस्से के किसी भी स्थान पर हो सकती है।

    2. जरूरी सुविधाओं के लिए जमीन की खरीद या अधिग्रहण
    टाउनशिप में सड़क, नाले, पार्क, स्कूल-कॉलेज जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन की आवश्यकता होगी। इसके लिए पहले संबंधित किसानों से जमीन बेचने के लिए कहा जाएगा।

    यदि कोई रैयत जमीन देने के लिए तैयार नहीं होता है तो निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण किया जा सकेगा।

    3. आपसी समझौते के साथ अतिरिक्त लाभ
    तीसरे विकल्प के तहत किसानों से आपसी समझौते के आधार पर जमीन देने की अपील की जाएगी। इसके बदले रैयतों को अतिरिक्त लाभ दिए जाएंगे।

    4. हाइब्रिड मॉडल से जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प
    यदि किसान पहले तीनों विकल्पों में से किसी पर सहमत नहीं होते हैं तो हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें लैंड पूलिंग, आपसी सहमति, भूमि क्रय और जरूरत पड़ने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    इस मॉडल का उद्देश्य यह है कि टाउनशिप के विकास के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में किसी एक प्रक्रिया पर निर्भरता न रहे।

    पाटलिपुत्र टाउनशिप 30 सेक्टर में होगी विकसित
    प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप (Patliputra Township) को 30 सेक्टर में विकसित करने की योजना है। इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन कराया जा रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद जमीन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

     

  • बिहार सरकार का बड़ा फैसला, 4 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान होगा तैयार

    बिहार सरकार का बड़ा फैसला, 4 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान होगा तैयार

    पटना
    बिहार में बनने वाले अलग-अलग टाउनशिप को लकर सम्राट चौधरी सरकार बेहद गंभीर नजर आ रही है। अब बिहार सरकार ने राज्य की चार ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके तहत भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में बनने वाले सेटेलाइनट टाउनशिप में यह रोक 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। बिहार सरकार के नगर विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। यह भी कहा गया है कि इस प्रतिबंध के दौरान अगर जमीन की किसी तरह की कोई खरीद-फरोख्त की जाती है तो इसपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    नगर विकास विभाग ने इस दौरान टाउनशिप में किसी प्रकार के नए निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी है। जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही अब चारों टाउनशिप के मास्टर प्लान बनाने का काम शुरू होगा। विभाग ने शनिवार (4 जुलाई) को इस संबंध मं अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि प्रतिबंध के दौरान अधिसूचित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री, जमीन हस्तांतरण, भूमि के विकास और भवन निर्माण से संबंधित किसी भी प्रकार के कार्य नहीं किए जा सकेंगे।

    नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
    यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह कार्यवाही शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत की है। इस निर्णय का उद्देश्य चारों शहरों के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना और भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित करना है। बता दें कि डेहरी सहित कुल 12 टाउनशिप विकसित किया जा रहा है।
    सात शहरों में पहले लग चुकी है रोक

    बता दें कि इससे पहल राज्य सरकार ने इससे पहले 23 अप्रैल को 11 टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक लगाई थी। उसके बाद 24 अप्रैल को सात शहरों पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 31 मार्च 2027 तक रोक का आदेश जारी किया गया था। तब जमीन मालिकों ने आर्थिक जरूरत में जमीन बेचने की अनुमति मांगी। सरकार ने जून 2026 में राहत देते हुए आवास बोर्ड को जमीन खरीदने के लिए अधिकृत किया था।

    यानी इच्छुक किसान आवास बोर्ड मुख्यालय पटना में एमडी के नाम से जमीन बेचने का आवेदन दे सकते हैं। दस्तावेज की जांच के बाद संबधित जिलाधिकारी जमीन का मूल्य तय करेंगे। अब विभाग ने 4 जुलाई को चार टाउनशिप में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक की अधिसूचना जारी की है।