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  • गोल्डी बराड़ पर ₹85 करोड़ से ज्यादा का इनाम, जानें भारत के मोस्ट वांटेड नाम

    गोल्डी बराड़ पर ₹85 करोड़ से ज्यादा का इनाम, जानें भारत के मोस्ट वांटेड नाम

    वाशिंगटन
    अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआई ने कुख्यात गैंगस्टर सतविंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी 'टॉप 10 मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल कर लिया है। साथ ही FBI ने बराड़ की सूचना देने पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा भी कर दी है। इसके बाद अब भारत के दुश्मनों की चर्चा भी शुरू हो गई है। जानते हैं कौन हैं भारत के 10 मोस्ट वांटेड अपराधी।

    इससे पहले एफबीआई ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा है कि लॉरेंस बिश्नोई का गिरोह दक्षिणी कैलिफोर्निया के साथ-साथ पूरे अमेरिका और कनाडा में कई तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल है और गोल्डी बराड़ भी उसी गैंग से जुड़ा है। एफबीआई के मुताबिक गोल्डी बराड़ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की हत्या, गोलीबारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, मारपीट और नशीली पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। एफबीआई ने बताया कि वह अमेरिका में है और उत्तरी अमेरिका में गिरोह का सरगना है।

    भारत के दुश्मन कौन?
    भारत में गैर-कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 35 के तहत तैयार की गई सूची में कुल 80 लोगों को आतंकवादी घोषित किया गया है। इस सूची में गोल्डी बराड़ 56वें नंबर पर है। गृह मंत्रालय की इस मोस्ट वांटेड लिस्ट में से भारत के कई दुश्मन पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों में छिपे हैं। कौन हैं भारत के
    सबसे बड़े दुश्मन?

    1. मौलाना मसूद अजहर
    आतंकी संगठन: जैश-ए-मोहम्मद
    उम्र: 58 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान
    मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है। उसे 1 मई 2019 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया था। काले कारनामों की बात करें तो 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले, 5 जुलाई 2005 के अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर पर हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 14 फरवरी 2019 के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले का सरगना मसूद अजहर ही है। मसूद अजहर को 1999 में IC 814 विमान हाईजैक के दौरान छोड़ दिया गया था।

    2. हाफिज सईद
    आतंकी संगठन: लश्कर-ए-तैयबा/जमात-उद-दावा
    उम्र: 76 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान
    लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और संस्थापक। 10 दिसंबर 2008 को यूएन द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित। हाफिज सईद 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता है। एनआईए (NIA) ने इसे 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में भी आरोपी बनाया है।

    3. जकी-उर-रहमान लखवी
    आतंकी संगठन: लश्कर-ए-तैयबा
    उम्र: 76 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान
    लश्कर-ए-तैयबा का चीफ ऑपरेशनल कमांडर और संस्थापक सदस्य। 22 दिसंबर 2000 का लाल किला हमला, 2008 का रामपुर हमला और 26/11 मुंबई हमला इसके नेतृत्व में हुआ। इसके अलावा उधमपुर में बीएसएफ काफिले पर हुए हमले में भी इसका नाम शामिल है।

    4. दाऊद इब्राहिम कास्कर
    उम्र: 71 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान
    अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट 'डी-कंपनी' का सरगना। 1986 में भारत से भागा था। 3 नवंबर 2003 को यूएन द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित। टेरर फंडिंग, हथियारों की तस्करी, जाली नोट, मनी लॉन्ड्रिंग और 1993 के मुंबई ब्लास्ट का मास्टरमाइंड है। अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन को सहयोग देने का भी आरोप। SAFEMA के तहत इसकी संपत्तियों की नीलामी की जा चुकी है।
    5. वाधवा सिंह बराड़

    आतंकी संगठन: बब्बर खालसा इंटरनेशनल

    उम्र: 72 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान

    प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) का प्रमुख। जून 1985 में एयर इंडिया कनिष्क विमान विस्फोट (329 मौतें), अगस्त 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की मानव बम से हत्या, 2004 का बुड़ैल जेल ब्रेक, और अप्रैल 2024 में वीएचपी नेता विकास बग्गा की हत्या।

    6. लखबीर सिंह रोडे
    आतंकी संगठन: इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन
    उम्र: 74 साल, ठिकाना: पाकिस्तान (मृत होने की आशंका)
    इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) का प्रमुख। सीमा पार से भारत में हथियारों और विस्फोटकों की खेप भेजना। 2019-2020 के दौरान पंजाब में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के नेटवर्क का संचालन करने के आरोप हैं।

    7. रणजीत सिंह उर्फ नीता
    आतंकी संगठन: खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स
    उम्र: 58 वर्ष, ठिकाना: पाकिस्तान
    1993 में बने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) का संस्थापक और प्रमुख। 1996 में झेलम एक्सप्रेस ब्लास्ट, 1997 में पठानकोट बस ब्लास्ट, 1999 में पूजा एक्सप्रेस ब्लास्ट और 2 दिसंबर 2024 को पंजाब पुलिस चौकी पर हुआ ग्रेनेड हमले में हाथ है।

    8. भूपिंदर सिंह भिंडा
    आतंकी संगठन: खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स
    उम्र: 51 वर्ष, ठिकाना: जर्मनी
    खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का मुख्य सदस्य। उत्तर भारत में 1996 से 2005 के बीच हुए विभिन्न बम धमाकों में शामिल। जुलाई 2010 में विएना में डेरा सच्चा सौदा/राधास्वामी संप्रदाय के प्रमुख को निशाना बनाने की साजिश के सिलसिले में जर्मनी में गिरफ्तार हुआ था और सजा काट चुका है।

    9. गुरपतवंत सिंह पन्नू
    आतंकी संगठन: सिख्स फॉर जस्टिस
    उम्र: लगभग 50, ठिकाना: अमेरिका
    भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) का संस्थापक और कानूनी सलाहकार। 'रेफरेंडम 2020' अभियान चलाना, पंजाब के युवाओं और गैंगस्टरों को हिंसा के लिए उकसाना, सोशल मीडिया के जरिए देश की संप्रभुता को चुनौती देना और अलगाववादी गतिविधियों की फंडिंग करना।

    10. परमजीत सिंह उर्फ पम्मा
    आतंकी संगठन: बब्बर खालसा इंटरनेशनल
    उम्र: 42 साल, ठिकाना: ब्रिटेन
    बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) का मुख्य ऑपरेटिव। पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए गैंगस्टरों और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क के साथ हाथ मिलाना। मई 2026 में एनआईए ने इसके और इसके नेटवर्क के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

  • श्रद्धालुओं में दहशत: खाटूश्यामजी मंदिर में ‘2 आतंकी’ घुसे, बाद में पता चला ATS का मॉक ड्रिल

    श्रद्धालुओं में दहशत: खाटूश्यामजी मंदिर में ‘2 आतंकी’ घुसे, बाद में पता चला ATS का मॉक ड्रिल

    जयपुर
    विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर परिसर शुक्रवार को उस समय सुरक्षा छावनी में तब्दील हो गया, जब मंदिर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर एटीएस (Anti-Terrorist Squad) की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। हथियारों से लैस जवानों की त्वरित कार्रवाई और घेराबंदी को देखकर परिसर में हड़कंप मच गया, लेकिन कुछ ही देर बाद जब सच्चाई सामने आई तो सभी ने राहत की सांस ली।

    त्वरित कार्रवाई और जवाबी हमला
    आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही एटीएस के जवानों ने मोर्चा संभाला और योजनाबद्ध तरीके से मंदिर परिसर में प्रवेश किया। कुछ ही मिनटों के भीतर टीम ने कड़ा संघर्ष करते हुए दो काल्पनिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया। कार्रवाई के दौरान जवानों ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और बारूद बरामद करने का प्रदर्शन भी किया।

    सुरक्षा परखने के लिए था अभ्यास
    जैसे ही एटीएस के अधिकारियों ने इसे मॉकड्रिल घोषित किया, वहां मौजूद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन की चिंता दूर हुई। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता की जांच करना, भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर क्विक रिस्पॉन्स टाइम को मापना और मंदिर की सुरक्षा घेराबंदी और समन्वय को और अधिक पुख्ता करना है।

    चौथी बार हुआ सुरक्षा अभ्यास
    गौरतलब है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र खाटू श्याम मंदिर की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस अब तक यहां चार बार मॉकड्रिल कर चुकी है। इस सफल अभ्यास के दौरान एटीएस टीम के साथ मंदिर सुरक्षा गार्ड प्रभारी रघुनाथ सिंह, मंदिर समिति के लक्ष्मीकांत रंगलालका सहित अन्य सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी भी मुस्तैद रहे।