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  • टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध जारी, सरपंच के नाम जारी फर्जी NOC की जांच की मांग

    टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध जारी, सरपंच के नाम जारी फर्जी NOC की जांच की मांग

    रीवा 

    रीवा जिले की सिरमौर तहसील के सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आज कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। बोरहोल का काम कराने पहुंची टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विरोध की स्थिति बनी। सरई कला, रोझौही और आसपास के गांवों के लोग मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि जब वे परमाणु बिजलीघर के पक्ष में नहीं हैं, तो उनकी आपत्तियों का निराकरण किए बिना आगे की प्रक्रिया क्यों की जा रही है।

    अधिकारियों ने समझाया, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े
    मौके पर सिरमौर तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसर चाहिए, लेकिन परमाणु बिजलीघर से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी उनकी चिंताओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में दूसरे उद्योग स्थापित करने का विकल्प देने की मांग की।

    कथित फर्जी एनओसी की जांच कराने की मांग
    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का मामला उठाया। उन्होंने पत्र क्रमांक 170/2026 की जांच कराने की मांग की। द्विवेदी के मुताबिक, ग्राम सभा में 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे।

    उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभा और स्थानीय ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी सहमति और आपत्तियों को स्पष्ट किए बिना आगे की प्रक्रिया कैसे की जा सकती है। ग्रामीणों ने भी ग्राम सभा के प्रस्तावों और एनओसी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

    विकास चाहिए, लेकिन रेडिएशन का खतरा नहीं!
    प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, रेडिएशन और परमाणु कचरे को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से उनके स्वास्थ्य, खेती, जलस्रोतों और आने वाली पीढ़ियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज कर परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

    पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारी, ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े
    बोरहोल की प्रक्रिया के दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल, एमपीआईडीसी, एनपीसीआईएल और टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका।

    मौके पर सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव, एमपीआईडीसी के यूके तिवारी, एनपीसीआईएल के वैज्ञानिक श्री जैन तथा टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी विरोध के दौरान उपस्थित थे।

    कथित फर्जी एनओसी का मामला उठा, निष्पक्ष जांच की मांग
    प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी बताए जा रहे पत्र क्रमांक 170/2026 की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका सवाल है कि यदि संबंधित ग्रामसभा और ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो फिर एनओसी किस आधार पर जारी की गई?

    शिवानंद द्विवेदी ने दावा किया कि 3 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को ग्रामसभा में इस परियोजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामसभा के निर्णयों और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लेने की मांग की। हालांकि, एनओसी के फर्जी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    ग्रामीणों की चेतावनी—परियोजना निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन
    लगातार विरोध के बीच अब प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुद्दा स्थानीय स्तर पर और अधिक गरमा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक परियोजना को निरस्त नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों, ग्रामसभा के प्रस्तावों और कथित एनओसी विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर परियोजना को लेकर टकराव आगे भी जारी रहेगा?

    फिलहाल, रोझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और ग्रामसभा के अधिकारों पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।

    मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
    विरोध प्रदर्शन में सरई कला की सरपंच कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच पति संजय सिंह,सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

    ग्रामीणों के विरोध के चलते बोरहोल का काम आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों का निराकरण और मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। फिलहाल बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी है। अब परियोजना की आगे की प्रक्रिया और ग्रामीणों की आपत्तियों पर प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी।

  • टाटा पावर की एंट्री को लेकर छत्तीसगढ़ में बढ़ा विरोध, ₹435 करोड़ के दावे पर उठे सवाल

    टाटा पावर की एंट्री को लेकर छत्तीसगढ़ में बढ़ा विरोध, ₹435 करोड़ के दावे पर उठे सवाल

    छत्तीसगढ़ में टाटा पावर के प्रवेश पर विरोध तेज, 435 करोड़ के निवेश दावे पर भी सवाल

    रायपुर
    छत्तीसगढ़
    में टाटा पावर की समानांतर लाइसेंस याचिका (क्रमांक 89/2026) का मामला गरमाता जा रहा है। सीएस रिटायर्ड पावर इंजीनियर्स-ऑफिसर्स एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के सचिव को पत्र लिखकर इस प्रकरण की सुनवाई 15 जनवरी 2027 के बाद करने की मांग की है।
    22 सितंबर 2026 को लिखे गए पत्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष पी.एन. सिंह ने कहा है कि यह विषय आम बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ा है, इसलिए लोगों को अध्ययन कर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। एसोसिएशन ने आयोग से निवेदन किया है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को 31 दिसंबर 2026 तक अपना अभिमत प्रस्तुत करने का समय दिया जाए और उसके 15 दिन बाद सुनवाई की जाए।
    पत्र में उठाए गए 6 प्रमुख बिंदु:
    1. बिजली दर पर सवाल: टाटा पावर ने याचिका के पेज नं. 485 में रु. 471 में बिजली उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन यह देखना होगा कि कंपनी मुंबई, उड़ीसा, नॉर्थ दिल्ली और अजमेर में किस दर पर बिजली खरीदती है और किस दर पर उपभोक्ताओं को देती है।
    2. कर्नाटक का उदाहरण: टाटा पावर ने कर्नाटक में समानांतर लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था, जिसे जनता के दबाव में वापस लेना पड़ा था।
    3. उत्तर प्रदेश में विफलता: 4 वर्ष पूर्व कंपनी पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल बिजली कंपनियों में व्यवस्था संभालने दल-बदल सहित पहुंची थी, जहां से उन्हें बैरंग वापस जाना पड़ा था।
    4. महाराष्ट्र की स्थिति: महाराष्ट्र में कई जगह लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है, वहां की वर्तमान स्थिति का अध्ययन जरूरी है।
    5. परफॉर्मेंस की जांच हो: जिन राज्यों में टाटा पावर बिजली वितरण कर रही है, वहां उनका परफॉर्मेंस कैसा है, इसका भी अध्ययन किया जाए।
    6. 435 करोड़ के दावे पर सवाल: टाटा पावर द्वारा दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में रु. 435 करोड़ व्यवस्था सुधारने में खर्च किया जाएगा, लेकिन इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
    एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि संपूर्ण प्रकरण टाटा पावर द्वारा अपने शेयर होल्डर्स को संतुष्ट करने के लिए किया जा रहा है और यह दिखाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की चार तहसीलों को बहुत फायदा होगा। जबकि लाइसेंस के लिए चुना गया क्षेत्र मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ का सबसे ज्यादा औद्योगिक खपत वाला क्षेत्र है, अतः इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ पर पड़ेगा।

    पत्र में नॉर्थ दिल्ली में लाइन लॉस 50% से अधिक से घटाकर 10% से कम करने के दावे पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया है कि इससे वहां के उपभोक्ताओं को कितना लाभ मिला, इसका विवरण याचिका में दर्ज नहीं है।

  • Tata Sons IPO को मिली हरी झंडी, एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल संभालेंगे जिम्मेदारी

    Tata Sons IPO को मिली हरी झंडी, एन चंद्रशेखरन अगले 5 साल संभालेंगे जिम्मेदारी

    मुंबई 

    टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक बोर्ड मीटिंग के दौरान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अकेले ऐसे सदस्य थे जिन्होंने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। बता दें कि बीते अगस्त महीने में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी, 2027 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद अगले कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला लिया था। बहरहाल, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की खबरों के बीच टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर गुलजार हो गए।

    क्यों लिस्टिंग की संभावना ?
    टाटा संस बोर्ड ने कंपनी को लिस्ट करने के मुद्दे पर भी विचार किया, लेकिन कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। दरअसल, बीते सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। इससे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो सकता है।

    अपर-लेयर एनबीएफसी है टाटा संस
    आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर' की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर, 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।

    जून, 2026 से लागू संशोधित आरबीआई नियमों के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की एसेट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र नॉन-लिस्टेड कंपनी थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में दो फाड़
    टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी मतभेद की खबरें आई हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नोएल टाटा के नेतृत्व वाला टाटा ट्रस्ट्स (गैर-लाभकारी संस्थाओं का समूह जिसके पास टाटा संस की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है) लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है जबकि लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला इसका सबसे बड़ा निजी शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह सार्वजनिक रूप से सूचीबद्धता की मांग कर रहा है।

    टाटा संस टाटा समूह की शीर्ष होल्डिंग कंपनी है और उसकी आईटी, ऑटो, स्टील, कंज्यूमर, एयरलाइल, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज समेत अलग-अलग कारोबारों में हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में लिस्टिंग से कंपनी के फाइनेंस, पूंजी आवंटन और निवेश संबंधी फैसलों में अधिक सार्वजनिक निगरानी और खुलासे की जरूरत बढ़ सकती है।

  • Tata Nexon में होगा बड़ा अपडेट, नए डिजाइन और एडवांस फीचर्स के साथ टेस्टिंग में नजर आई SUV

    Tata Nexon में होगा बड़ा अपडेट, नए डिजाइन और एडवांस फीचर्स के साथ टेस्टिंग में नजर आई SUV

    नई दिल्ली

    टाटा मोटर्स की नेक्सॉन (Tata Nexon) को लोग काफी पसंद करते हैं. इस कार के नए वर्जन पर कंपनी काम कर रही है. पिछले कुछ दिनों में कार के अपडेटेड अवतार को कई बार टेस्ट करते हुए देखा गया है. टेस्टिंग के वक्त कार कैमोफ्लॉज से ढकी हुई थी. पहले भी कार की कुछ तस्वीरे सामने आई थीं, जिसमें इसके लुक की काफी जानकारी मिली थी। 

    लेटेस्ट स्पाई शॉट्स में कार के एक्सटीरियर प्रोफाइल का क्लियर व्यू नजर आता है. खासकर रियर सेक्शन जिसे रिडिजाइन किया गया है. टाटा ने नेक्सॉन को 2017 में लॉन्च किया था. तब से अब तक कार को मल्टीपल अपडेट्स मिले है, जिसमें बहुत कुछ बदला है। 

    भले ही कार की स्टाइलिंग और फीचर्स में बीते 9 सालों में कई अपडेट्स हुए हों, लेकिन कार का बेसिक स्ट्रक्चर लगभग वैसा ही रहा है. नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में हमें बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. टाटा कार के बॉडी स्ट्रक्चर और प्रोपोर्शन में कई बदलाव कर सकती है।

    क्या होगा कार में नया? 
    भले ही ये कार कैमोफ्लॉग से ढकी हो, लेकिन इसके डिजाइन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. नेक्सॉन में ज्यादा अपराइट और स्कॉयर ऑफ लुक मिलेगा. मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले इसकी रूफलाइन ज्यादा फ्लैट होगी. वहीं रियर सेक्शन एक कूपे जैसे डिजाइन में आ सकता है। 

    नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में टाटा रियर सीट्स पर हेडरूम को बेहतर कर सकती है. साइड प्रोफाइल से भी ये एसयूवी कूपे जैसी शेप में नजर आती है. इसके अलावा डोर और ग्लासहाउस को भी रिडिजाइन किया जा सकता है. टेलगेट भी मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले ज्यादा ऊंचा लग रहा है. रियर विंड स्क्रीन बड़ी दिख रही है और इसके साथ वाइपर भी है। 

    टेस्टिंग के दौरान कार पर रूफ स्पॉयलर भी देखा जा सकता है. स्पाई शॉट्स में एक और महत्वपूर्ण चीज नजर आई है और वो है कार में फ्यूल फिलर कैप की लोकेशन. नेक्सॉन में फ्यूर कैप डोर हैंडल के बराबर में आ गया है, जबकि मौजूदा में ये डोर हैंडल से नीचे मिलता है. नई रूफ लाइन, अपराइट रियर प्रोफाइल और ऑल्टर बॉडी प्रोपोर्शन दिखाता है कि टाटा सिर्फ फेसलिफ्ट वाले बदलाव नहीं कर रही है। 

    इंटीरियर और इंजन 
    स्पाई शॉट्स में कार के इंटीरियर की झलक भी दिखती है. कार में स्टीयरिंग व्हील, इंफोटेनमेंट सिस्टम और क्लाइमेट कंट्रोल जैसे बहुत से कंपोनेंट मौजूदा नेक्सॉन वाले ही मिल सकते हैं. प्रोडक्शन के नजदीक आने पर इससे जुड़ी दूसरी डिटेल्स भी देखने को मिल सकती हैं। 

    पावरट्रेन की बात करें, तो इसमें 1.2 लीटर का टर्बो पेट्रोल और 1.5 लीटर का डीजल इंजन ही मिलेगा, जो मौजूदा नेक्सॉन में आता है. सीएनजी भी कार का हिस्सा बन रहेगा. वहीं नेक्सॉन ईवी में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ये कार अगले साल यानी 2027 में लॉन्च होगी। 

     

  • Tata Sons की लिस्टिंग का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, RBI की याचिका से Tata Group की कंपनियों में हलचल

    Tata Sons की लिस्टिंग का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, RBI की याचिका से Tata Group की कंपनियों में हलचल

     मुंबई
    टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी कानूनी तैयारी तेज कर दी है. इसका असर मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स 20% तक चढ़ गए। 

    आबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. आसान भाषा में समझें तो कैविएट का मतलब है कि अगर इस मामले में कोई याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो RBI की बात सुने बिना उसके खिलाफ या उसके पक्ष में कोई आदेश जारी न किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस कैविएट की जानकारी टाटा संस को भी दे दी है. इससे संकेत मिलता है कि RBI इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती को लेकर पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है। 

    11 सितंबर के फैसले से बढ़ी हलचल
    RBI का यह कदम 11 सितंबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस ने अनरजिस्टर्ड कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाइड होने के लिए यह आवेदन दिया था. लेकिन अर्जी खारिज होने का मतलब है कि कंपनी पर अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहने का रास्ता साफ है. यही वजह है कि टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। 

    टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरूरी
    इसकी जड़ RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी नियमों में है. टाटा संस को RBI की अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में शामिल कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी अहम है. यही वजह है कि टाटा संस के लिए निजी कंपनी बने रहना और RBI के नियमों के तहत उसकी लिस्टिंग की अनिवार्यता, दोनों के बीच टकराव का सवाल बना हुआ है। 

    यह मामला 2022 से चला आ रहा है
    RBI ने 2022 में अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की थी. इसमें टाटा संस को कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया गया था. इसके बाद जून 2026 में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के क्लासिफिकेशन के लिए नया प्रिंसिपल-बेस्ड फ्रेमवर्क लाया गया. इसने पहले लागू पैरामेट्रिक मेथडोलॉजी की जगह ली. फिर 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई. इसमें भी टाटा संस को बरकरार रखा गया. उस समय RBI ने साफ किया था कि टाटा संस को लिस्ट में बनाए रखना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के नतीजे पर कोई असर नहीं डालता. उस समय कंपनी की अर्जी RBI के पास जांच के तहत थी। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और ज्यादातर ट्रस्टी टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं. उनका फोकस शापूरजी पालनजी ग्रुप के साथ हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन को लेकर ऐसा रास्ता निकालने पर रहा है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों. यानी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के बजाय हिस्सेदारी से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाता रहा है। 

    टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उछाल
    इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया. टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे कुछ टाटा ग्रुप शेयरों में मंगलवार को 20% तक की तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के कुछ हिस्से में इन शेयरों की तेजी को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले संभावित फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसे टाटा संस की लिस्टिंग तय होने का संकेत नहीं माना जा सकता. अभी कानूनी और नियामकीय स्तर पर मामला आगे बढ़ना बाकी है। 

  • Tata Curvv Series X ने मारी एंट्री, ₹9.99 लाख की शुरुआती कीमत में SUV का नया अवतार

    Tata Curvv Series X ने मारी एंट्री, ₹9.99 लाख की शुरुआती कीमत में SUV का नया अवतार

     नई दिल्ली

    टाटा ने अपनी दमदार एसयूवी कर्व की नई रेंज को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने कर्व सीरीज एक्स रेंज को इंट्रोड्यूस किया है. कर्व एक्स रेंज मौजूदा स्टैंडर्ड वर्जन को रिप्लेस करेगा. ब्रांड की मानें, तो नई रेंज में कंज्यूमर्स को बेहतर वैल्यू मिलेगी. आसान भाषा में कहें, तो इस कार में कंज्यूमर्स को एक्स्ट्रा वैल्यू मिलेगी। 

    कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में उपलब्ध होगी. टाटा ने नई रेंज में वेरिएंट लाइनअप को रिशफल किया है. इसके लिए कम कीमत में कंपनी ने हायर वेरिएंट्स के फीचर्स को जोड़ा है, जिससे लोगों को ज्यादा बेहतर वैल्यू मिलेगी. आइए जानते हैं नई रेंज की डिटेल्स। 
     
    कितनी है कीमत? 
    कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में आती है, जिसमें स्मार्ट एक्स, प्योर एक्स, प्योर एक्स प्लस, क्रिएटिव एक्स प्लस, एकॉम्प्लिश एक्स और एकॉम्प्लिश एक्स प्लस का विकल्प मिलता है. कंज्यूमर्स 5 कलर ऑप्शन- प्रिस्टीन वॉइट, प्योर ग्रे, नाइट्रो क्रिमसन, ओपेरा ब्लू और ऑब्सीडियन ब्लैक में कार को खरीद पाएंगे। 

    टाटा कर्व सीरीज एक्स की कीमत 9.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत स्मार्ट एक्स वेरिएंट की है. वहीं प्योर एक्स वेरिएंट की कीमत 11 लाख रुपये से शुरू होती है. सीरीज का टॉप वेरिएंट एकॉम्प्लिश एक्स प्लस 18.50 लाख रुपये और इसका डार्क एडिशन 18.75 लाख रुपये एक्स शोरूम पर आता है। 

    क्या होगा कार में खास? 
    कर्व सीरीज एक्स के लोअर वेरिएंट्स में ज्यादा फीचर्स मिलते हैं. कार में 10.25 इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन प्योर एक्स वेरिएंट से मिलना शुरू हो जाएगी. इसके अलावा सीरीज में वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कार प्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, पुश बटन स्टार्ट और ऑटो फोल्डिंग ओआरवीएम्स मिलेंगे। 

    हायर वेरिएंट्स में 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, मल्टीपल ड्राइव मोड्स, फ्रंट और रियर यूएसबी पोर्ट और एक कूल्ड ग्लफबॉक्स मिलता है. कैबिन में लाइटर इंटीरियर दिया गया है, जिससे इंटीरियर ज्यादा एयरी फील होता है. रियर पैसेंजर्स के लिए कार में अलग से एसी वेंट्स, रियर आर्मरेस्ट और रिक्लाइनिंग रियर सीट्स मिलती हैं। 

    अन्य फीचर्स की बात करें, तो कार में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है. कार में पैनोरोमिक सनरूफ, ब्लाइंड व्यू मॉनिटर, रेन सेंसिंग वाइपर और ऑटोमेटिक हेडलैम्प्स मिलेंगे. सेफ्टी की बात करें, तो कार में 6 एयरबैग, ईपीएस, हिल-होल्ड कंट्रोल, एबीएस, ईबीडी और रियर पार्किंग सेंसर मिलते हैं. कार के इंजन ऑप्शन में कोई बदलाव नहीं है. ये कार तीन इंजन ऑप्शन में आएगी। 

     

  • Tata Sons Chairman Update: चंद्रशेखरन ने छोड़ा पद? AGM से पहले बड़े बदलाव की चर्चा तेज

    Tata Sons Chairman Update: चंद्रशेखरन ने छोड़ा पद? AGM से पहले बड़े बदलाव की चर्चा तेज

    नई दिल्ली
    टाटा ग्रुप के मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव हुआ है। दरअसल, एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। ईटी की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 63 साल के चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को अपने फैसले के बारे में बता दिया है। वे फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल आधिकारिक रूप से पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। इस खबर के बाद टाटा ग्रुप की कंपनी TCS समेत टाटा के दूसरे शेयरों में 4% तक की गिरावट आई।

    एजीएम से पहले फैसला
    चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त की एनुअल जनरल मीटिंग यानी एजीएम और टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के वोटिंग के तरीके को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, चंद्रशेखरन के बने रहने के खिलाफ माने जाते हैं।

    ग्रुप के दूसरे कारोबार पर भी पड़ेगा असर
    इसके साथ ही एन. चंद्रशेखरन का लगभग दस साल का कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। इस दौरान उन्होंने भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप को एयरलाइंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे कई क्षेत्रों में फैले एक बड़े ग्रुप में बदल दिया।

    चंद्रशेखरन के जाने का असर पूरे ग्रुप पर भी पड़ेगा। वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं और 2017 में टाटा संस की कमान संभालने के बाद से ग्रुप के कारोबार में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

    विजय सिंह भी दे चुके ट्रस्ट से इस्तीफा
    बता दें कि बीते कुछ समय से टाटा ट्रस्ट में कई इस्तीफे हो चुके हैं। हाल ही में टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) के न्यासी (ट्रस्टी) पद से इस्तीफा दे दिया है। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के ट्रस्टी बने रहेंगे। विजय सिंह के इस्तीफ की भी खबर सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों के बीच मतभेदों के बीच सामने आया है।

    इसके बोर्ड के गठन को नियंत्रित करने वाले नियमों के कथित उल्लंघन की जांच लंबित रहने तक महाराष्ट्र राज्य चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट को अपने बोर्ड की बैठक करने से रोक दिया है। एसआरटीटी ने प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए चैरिटी कमिश्नर से संपर्क किया है, जिसमें 18 अगस्त को टाटा संस की एजीएम में ट्रस्ट की भागीदारी पर इसके संभावित प्रभाव का हवाला दिया गया है। विजय सिंह और उनके साथी ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने सार्वजनिक रूप से टाटा संस को सूचीबद्ध करने का समर्थन किया है, जिसका टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने विरोध किया है।

  • मध्य प्रदेश पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार, पर्यटन बोर्ड और टाटा स्ट्राइव ने किया समझौता

    मध्य प्रदेश पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार, पर्यटन बोर्ड और टाटा स्ट्राइव ने किया समझौता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की गरिमामयी उपस्थिति में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और टाटा स्ट्राइव के मध्य हुआ एमओयू

    स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओ के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर होंगे सृजित
    पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में युवाओं व होम-स्टे संचालकों का होगा कौशल उन्नयन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और टाटा स्ट्राइव के मध्य 2 वर्ष की अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू निष्पादित किया गया है। इसे आवश्यकतानुसार पारस्परिक सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। एमओयू पर मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से डायरेक्टर (कौशल) डी.पी. सिंह और टाटा स्ट्राइव की ओर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमेया वंजारी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी उपस्थित रहे।

    इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण होमस्टे संचालकों की आय में वृद्धि करना, विश्वस्तरीय आतिथ्य मानकों के अनुरूप सेवाएं विकसित करना तथा स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित करना है।

    साझेदारी के प्राथमिक हितग्राही ग्रामीण होम-स्टे संचालक, स्थानीय युवा और पर्यटन सेवा प्रदाता होंगे। इस समझौते से पर्यटन निगम के होटलों और निजी क्षेत्र के अन्य होटलों के लिए कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाएगा। एमओयू से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को आतिथ्य एवं पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार निर्मित करने में मदद मिलेगी। इससे प्रदेश का ग्रामीण पर्यटन इको सिस्टम और अधिक मजबूत होगा।

    एमओयू के प्रथम चरण में ग्रामीण पर्यटन एवं होम-स्टे इको सिस्टम के लगभग 1,000 हितग्राहियों को 'पूर्व अधिगम की मान्यता' और अपस्किलिंग (कौशल उन्नयन) का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके तहत होम-स्टे संचालन, डिजिटल बुकिंग व ओटीए प्लेटफॉर्म्स का उपयोग, फ्रंट ऑफिस, हाउसकीपिंग, स्थानीय व्यंजन, फूड एंड बेवरेज, गाइडिंग, सुरक्षा, स्वच्छता, सतत पर्यटन और राजस्व प्रबंधन जैसे व्यावहारिक विषयों को शामिल किया गया है। आगामी चरणों में एमपी स्टेट टूरिज्म डेवलपमेंट कार्पोरेशन की होटल एवं रिसॉर्ट स्टॉफ हेतु रिफ्रेशर प्रशिक्षण तथा राज्य के युवाओं का आतिथ्य क्षेत्र में कौशल विकास किया जाएगा।

    बोर्ड वित्तीय दृष्टिकोण से यह अनुबंध राज्य सरकार के लिए अत्यधिक लाभकारी है, क्योंकि एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा टाटा स्ट्राइव को प्रशिक्षण संचालन हेतु किसी भी राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा। प्रशिक्षकों की उपलब्धता, उनका मानदेय तथा प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास का संपूर्ण व्यय टाटा स्ट्राइव द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि एमपी टूरिज्म बोर्ड केवल प्रशिक्षण स्थल और प्रशिक्षकों व प्रशिक्षुओं के लिए आवास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत सभी सफल हितग्राहियों को आईएचसीएल-टाटा स्ट्राइव एवं एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से उद्योग-मान्यता प्राप्त प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी व्यावसायिक साख और स्वरोजगार की क्षमताओं में वृद्धि होगी।

  • Tata Motors की कारों की जबरदस्त डिमांड, जुलाई में 113% की बिक्री वृद्धि से बनाया रिकॉर्ड

    Tata Motors की कारों की जबरदस्त डिमांड, जुलाई में 113% की बिक्री वृद्धि से बनाया रिकॉर्ड

    मुंबई 

    टाटा मोटर्स के लिए जुलाई 2026 एक बेहतरीन महीना रहा है. कंपनी ने इस महीने 59 फीसदी की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है. पिछली जुलाई के मुकाबले कंपनी की सेल घरेलू और ग्लोबल दोनों ही मार्केट में बेहतर हुई है. यहां तक की ईवी मार्केट में भी कंपनी ने अच्छी खासी सेल की है। 

    इलेक्ट्रिक कारों की सेल के मामले में टाटा मोटर्स ने एक नया मुकाम हासिल किया है. कंपनी ने एक महीने में 15 हजार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स होलसेल का आंकड़ा पहली बार पार किया है. आइए समझते हैं जुलाई का महीना टाटा मोटर्स के लिए किस तरह से खास रहा है। 

    जुलाई में कितनी हुई सेल?
    जुलाई 2026 में टाटा मोटर्स ने कुल 63,760 गाड़ियां बेची हैं. इसमें घरेलू मार्केट (भारत) और एक्सपोर्ट दोनों का डेटा शामिल है. साल 2025 की जुलाई में कंपनी ने 40,175 गाड़ियां बेची थी. यानी ईयर-ऑन-ईयर टाटा मोटर्स की सेल 58.71 फीसदी बढ़ी है. कंपनी के ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और ईवी दोनों ही पोर्टफोलियो की अच्छी डिमांड है। 

    घरेलू मार्केट की बात करें, तो कंपनी ने 62,611 यूनिट्स जुलाई में बेची हैं. 2025 की जुलाई में कंपनी ने 39,521 यूनिट्स बेची थी. यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल कंपनी ने 23,090 यूनिट्स ज्यादा बेची हैं. यहां कंपनी की ग्रोथ 58.42 फीसदी है. जून 2026 में कंपनी ने 62,076 यूनिट्स बेची थीं। 

    EV की सेल 113 फीसदी बढ़ी
    बात करें ईवी बिजनेस की, तो टाटा ने इस महीने कमाल कर दिया है. कंपनी ने पहली बार 15 हजार यूनिट्स की मंथली इलेक्ट्रिक कार सेल का आंकड़ा पार किया है. जुलाई 2026 में टाटा ने कुल 15,217 ईवी बेची हैं. पिछले साल जुलाई में कंपनी ने 7,124 इलेक्ट्रिक कारें बेची थीं. ब्रांड की सेल 8,093 यूनिट्स बढ़ी है. यानी ग्रोथ 113.6 फीसदी है। 

    फिलहाल कारों की सेल्स के आंकड़े सामने नहीं आए हैं. यानी किस कार की कितनी यूनिट्स बिकी हैं ये नहीं पता चला है. आने वाले दिनों में कंपनी ये आंकड़े भी जारी करेगी. पिछले महीने की बात करें, तो टाटा पंच और नेक्सन की डिमांड सबसे ज्यादा रही है. जून में पंच की 21,006 यूनिट्स और नेक्सन की 18,335 यूनिट्स बिकी हैं। 

  • साइबर हमले से दहली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स! 630GB डेटा लीक का दावा, Apple और Tesla की फाइलें भी खतरे में

    साइबर हमले से दहली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स! 630GB डेटा लीक का दावा, Apple और Tesla की फाइलें भी खतरे में

    नई दिल्ली

    भारत की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जो चिपसेट, स्मार्टफोन पार्ट्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ने कंपनी के सिस्टम डेटा को हैक कर लिया और कई सीक्रेट फाइल्स चुरा ली है. इसके बाद हैकर्स की तरफ से पैसे की मांग की जा रही है। 

    बताया जा रहा है कि इस डेटा लीक में कई ऐसी सीक्रेट फाइल्स शामिल हैं, जिनसे कंपनी की जरुरी जानकारियां दुनिया के सामने आ सकती हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ऐपल और टेस्ला जैसी कंपनियों को टेक्नोलॉजी और पार्ट्स की सप्लाई कर रही थी। 

    जानिए कौन-सा डेटा हुआ चोरी, जिसके बाद मचा हड़कंप

    रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम में हैकर्स ने रैनसमवेयर नाम का वायरस डाला था. यह वायरस सिस्टम की फाइल्स और डेटा को लॉक कर देता है. इसके बाद हैकर्स डेटा वापस देने के बदले फिरौती की मांग करते हैं। 

    डेटा लीक के बाद डार्क वेब पर करीब 630GB का डेटा पोस्ट किया गया है. इसमें कंपनी की सीक्रेट जानकारी, ईमेल्स, कर्मचारियों की डिटेल्स और ऐपल से जुड़े डिजाइन डॉक्यूमेंट्स शामिल बताए जा रहे हैं. ऐपल और टेस्ला दोनों ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े कस्टम में शामिल हैं। 

    कैसे लगी सेंध, क्या-कुछ हुआ लीक?
    रिपोर्ट्स में पता चला है कि डेटा लीक होने की वजह एक मिडिलवेयर फर्म के पुराने क्रेडेंशियल्स यानी कि आईडी-पासवर्ड थे। हैकर्स ने उनका इस्तेमाल करके डेटा लीक किया। बता दें कि लीक हुए डेटा में एप्पल के सप्लायर स्पेसिफिकेशन्स और टेस्ला के मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बेहद प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स देखने को मिले हैं।

    इतना ही नहीं चोरी हुए डेटा में कंपनियों के ग्राहकों की बिजनेस संबंधी जानकारी जैसे कि नाम, ईमेल आईडी, फोन नंबर और जॉब प्रोफाइल आदि भी शामिल है।(REF.)

    कंपनियों को मिली फिरौती की धमकी
    इस साइबर हमले की जिम्मेदारी एक कुख्यात साइबरक्राइम ग्रुप इकारस ने ली है। हैकर्स ने चेतावनी तक दी है कि अगर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित कंपनियां उन्हें समय पर फिरौती की रकम नहीं देती, तो वे पूरे डेटा को पब्लिक कर देंगे।

    इसे लेकर सुरक्षा कंपनी हंट्रेस ने खुलासा किया है कि हैकर्स ने उन्हें एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी के सर्वर का इस्तेमाल करके फिरौती का ईमेल भेजा था। डेटा लीक की पुष्टि होने के बाद क्लू ने सुरक्षा फर्म क्राउडस्ट्राइक को जांच के लिए बुलाया है। बाकी का डेटा सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा फर्म ने सभी लिंक्स को तोड़ दिया है।

    क्यों हुई सुरक्षा में चूक?
    यह साइबर हमला इस तरह का था जिसमें हैकर्स एक कंपनी को निशाना बनाकर उससे जुड़ी सैकड़ों कंपनियों का डेटा चुरा लेते हैं। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि क्लू के किसी कर्मचारी द्वारा अनजाने में पासवर्ड चुराने वाला मैलवेयर डाउनलोड करने की वजह से पुराने क्रेडेंशियल लीक हुए।

    यह भी बताया जा रहा है कि पिछले साल क्लू ने AI में निवेश करने के लिए आधे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसकी वजह से कंपनी की सुरक्षा कमजोर होती गई।

    जानिए साइबर अटैक के बाद टाटा का क्या था जवाब
    रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा कि उन्हें इस साइबर अटैक की जानकारी कुछ हफ्ते पहले ही मिल गई थी. हालांकि, इस हमले की वजह से कंपनी की फैक्ट्री या बिजनेस ऑपरेशन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। 

    हैकर्स की तरफ से डेटा लीक के बाद फिरौती की मांग की गई है. वहीं, इस पूरे मामले में ऐपल भी अपनी तरफ से जांच कर रहा है। 

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स टाटा ग्रुप की तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में से एक है. कंपनी ने 2023 में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग शुरू की थी. वहीं, टेस्ला ने 2024 में सेमीकंडक्टर सप्लाई को लेकर टाटा के साथ डील की थी। 

    टाटा ने कर्मचारियों को दी थी जानकारी
    रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी। 
    रिपोर्ट में बताया गया है फाइलों में 52 पेज का एक डॉक्यूमेंट भी था, जिस पर Apple के खास निशान थे और जिसमें कथित तौर पर iPhone सर्किट बोर्ड के पार्ट्स के लिए क्वालिटी जांच के स्टैंडर्ड्स की जानकारी थी। इसमें Hosur सर्च टर्म के लिए 33 फाइलें और फोल्डर भी थे। यह तमिलनाडु राज्य में टाटा के मुख्य iPhone असेंबली प्लांट की जगह है। मामले की जानकारी रखने वाले इंडस्ट्री के एक दूसरे सूत्र ने बताया कि टाटा ने पिछले हफ्ते अपने iPhone असेंबली ऑपरेशन्स में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को डेटा लीक के बारे में जानकारी दी थी। 

    इस साइबर अटैक के बाद कंपनियों की सीक्रेट जानकारी और डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।