Tag: Suvendu Adhikari

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले शुभेंदु का बड़ा बयान, ममता की चोट को बताया ‘राजनीतिक ड्रामा’

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले शुभेंदु का बड़ा बयान, ममता की चोट को बताया ‘राजनीतिक ड्रामा’

    कोलकाता
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद से मचा घमासान अब नंदीग्राम उप-चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में एक नया मोड़ ले चुका है। 2021 के ऐतिहासिक मुकाबले और 2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम और भवानीपुर से हराने के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम खाली करने की असली वजह का खुलासा किया है।

    शुक्रवार को नंदीग्राम में बीजेपी प्रत्याशी हसिरानी रथ के पक्ष में चुनाव प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की 2021 की चर्चित 'पैर की चोट' पर एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि वह चोट कोई हादसा या साजिश नहीं, बल्कि केवल हमदर्दी बटोरने का एक 'राजनीतिक ड्रामा' था।

    भवानीपुर छोड़कर नंदीग्राम सीट खाली करने की वजह?
    हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम- दोनों सीटों से भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवैधानिक नियमों के तहत उन्होंने भवानीपुर सीट को अपने पास बनाए रखने और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया।

    नंदीग्राम की जनसभा में इस फैसले की वजह बताते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मुझसे कई लोग पूछते हैं कि दोनों जगह जीतने के बाद मैंने भवानीपुर क्यों चुना और नंदीग्राम सीट क्यों खाली की? इसका सीधा कारण यह है कि अगर मैं भवानीपुर सीट छोड़ देता, तो जिस नेता को राज्य की जनता (ममता बनर्जी) ने खारिज कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था, उन्हें भवानीपुर उप-चुनाव के जरिए फिर से राजनीति में पैर जमाने का मौका मिल जाता। मैंने उस रास्ते को बंद किया।"

    कोई फ्रैक्चर नहीं था, मेरे पास SSKM की रिपोर्ट है: शुभेंदु अधिकारी
    10 मार्च 2021 को नंदीग्राम में नामांकन दाखिल करने के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट की घटना को याद दिलाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा किया। 2021 में ममता बनर्जी ने व्हीलचेयर पर प्लास्टर बांधकर पूरे राज्य में चुनाव प्रचार किया था और आरोप लगाया था कि शुभेंदु अधिकारी के 'बाहरी गुंडों' ने उन पर हमला कर उनका पैर तोड़ा था।

    इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मैं व्यक्तिगत हमला नहीं करता, लेकिन सच सामने आना चाहिए। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब मैं SSKM अस्पताल गया, तो मैंने वहां का मेडिकल रिकॉर्ड देखा। एक्स-रे की रिपोर्ट मेरे पास है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने रिपोर्ट में साफ लिखा था- 'नो फ्रैक्चर' (यानी कोई हड्डी नहीं टूटी थी)।"

    कैसे लगी थी चोट? शुभेंदु ने घटना की असलियत बताते हुए कहा, "गाड़ी का दरवाजा आगे लगे एक लोहे के खंभे से टकराकर वापस आया और उनके पैर में हल्की सी खरोंच आई थी। लेकिन सिर्फ राजनीतिक सहानुभूति पाने के लिए उन्होंने हफ्तों तक पैर पर प्लास्टर और पट्टी बांधकर पूरे बंगाल में प्रचार किया और मुझे बदनाम किया।"

    उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "मैं अब राज्य का पुलिस मंत्री भी हूं। अगर मुझे चुनौती दी गई, तो मैं उचित समय आने पर अस्पताल की वो आधिकारिक एक्स-रे और मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दूंगा।"

    नंदीग्राम उप-चुनाव पर पूरे राज्य की निगाहें
    शुभेंदु अधिकारी के इस दावे के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों में जबर्दस्त भूचाल आ गया है।

    6 अक्टूबर को नंदीग्राम में उप-चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे, जबकि परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित होंगे। एक तरफ बीजेपी जहां अपनी इस परंपरागत सीट को बचाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ जेल से जमानत पर बाहर आए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान और टीएमसी के बागी नेताओं के चुनावी मैदान में होने से यह मुकाबला राज्य का सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी दंगल बन चुका है।

  • कुर्मी समुदाय के लिए शुभेंदु सरकार का बड़ा पैकेज, ₹50 करोड़ विकास फंड और पुराने केस वापस लेने का ऐलान

    कुर्मी समुदाय के लिए शुभेंदु सरकार का बड़ा पैकेज, ₹50 करोड़ विकास फंड और पुराने केस वापस लेने का ऐलान

    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल
    के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बीते पुरुलिया में एक बड़ा ऐलान किया। पुरुलिया के कराडी मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुर्मी समुदाय के लोगों के खिलाफ सितंबर 2025 में दर्ज किए गए केस वापस लेने का ऐलान किया। ये मामले कुर्मी समुदाय के लोगों के अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन से जुड़े थे। सरकार के इस फैसले को जंगल महल क्षेत्र में कुर्मी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    पुरुलिया के कराडी मैदान में आयोजित बड़े कुर्मी करम फेस्टिवल में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुर्मी समुदाय के आंदोलन के दौरान पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने जो भी केस दर्ज किए थे, उन्हें अब वापस लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक में पहले ही केस वापस लेने के फैसले की घोषणा कर चुके थे। इसके बाद पश्चिमी जिलों को लेकर हुई प्रशासनिक बैठक में भी उन्होंने अधिकारियों को इस फैसले की जानकारी दे दी थी।

    सीएम शुभेंदु ने किया ये बड़ा ऐलान
    शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि जब कुर्मी समुदाय ने अपना आंदोलन शुरू किया था, तब पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने उसे दबाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर हमला किया गया, पुलिस की तैनाती की गई और उनके खिलाफ केस दर्ज किए गए। सुवेंदु ने कहा कि इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। सुवेंदु ने आगे कहा कि सरकार ने इस साल के बजट में कुर्मी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस राशि को और बढ़ाया जाएगा। साथ ही, कुरमाली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा भी पूरा किया जाएगा।

    साल 2025 में हुए थे प्रदर्शन
    बता दें कि, यह घोषणा 20 सितंबर 2025 को हुए कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। उस समय कुर्मी संगठनों ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में ‘कुरमाली’ भाषा को शामिल करने की मांग की थी। मांगों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर रेलवे ट्रैक और सड़कें जाम कर दी थीं। आंदोलन शुरू होने से पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस तरह की नाकाबंदी को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया था। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रेलवे ट्रैक पर धरना देकर रास्ता रोक दिया। इससे ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई।

    बंगाल में कुर्मी समुदाय का प्रभाव
    बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय का आंदोलन कई बार राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन चुका है। कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग कर रहा है। इसी मांग को लेकर 2022, 2023 और 2024 में भी कई जगहों पर रेलवे ट्रैक और सड़कें जाम की गई थीं। आम लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कई बार लंबे समय तक चलने वाली नाकाबंदी के मामलों में दखल दिया है। बता दें कि, कुर्मी समाज बंगाल के साथ साथ झारखंड, ओडिशा में भी बसा है। बंगाल में इनकी आबादी 40 लाख है। कुर्मी संगठनों का दावा है कि बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र की 35 विधानसभा सीटों पर इनका प्रभाव है।

  • नंदीग्राम में बदले चुनावी समीकरण, ममता गुट की प्रत्याशी ने छोड़ा मैदान; शुभेंदु से हुई मुलाकात

    नंदीग्राम में बदले चुनावी समीकरण, ममता गुट की प्रत्याशी ने छोड़ा मैदान; शुभेंदु से हुई मुलाकात

    कोलकाता

    ममता बनर्जी की पार्टी, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है. ये ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. नामांकन प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब ममता टीएमसी नंदीग्राम उपचुनाव नहीं लड़ पाएगी। बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि ममता गुट की नंदीग्राम उम्मीदवार संचिता प्रधान डे नेशाम कोलकाता में सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया। 

    उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने पर ममता बनर्जी ने कहा कि ये लोकतंत्र के लिए एक काला दिन है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी ऐसे ही तोड़ा गया. चुनाव आयोग का फैसला असंवैधानिक है. राजनीतिक बदले की भावना से ये कार्रवाई की गई है. बीजेपी ने चुनाव को हाइजैक किया है. बीजेपी का काम संविधान को खत्म करने का है. लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया गया। 

    ममता ने कहा कि बीजेपी ने मेरी पार्टी को खत्म करने की बात कही थी. उन्होंने SIR के नाम पर शुरुआत की और फिर चुनावों को हाईजैक कर लिया. बीजेपी ने AI के ज़रिए वोटरों के नाम हटा दिए. बिहार, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में वोट लूटे. बीजेपी एक 'जुमला पार्टी' है. ममता ने कहा कि उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ भी ऐसा ही किया था। 

    हालांकि, संचिता ने किस वजह से अपनी उम्मीदवारी वापस ली, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में नंदीग्राम की सियासत में इस फैसले के मायने तलाशे जा रहे हैं। 

    टीएमसी के बंटवारे के बीच नंदीग्राम में नया मोड़
    यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के दोनों गुटों को नाम और सिंबल आवंटन के बीच आया है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया है. वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को 'Democratic Trinamool Congress' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है। 

    आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए पुराने 'All India Trinamool Congress' नाम और 'जोड़ा घास फूल' वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। 

    नंदीग्राम उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. 13 सितंबर को उनके नाम का ऐलान किया गया था. वहीं बीजेपी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. ऋतब्रत गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक मैदान में हैं. कांग्रेस और वाम मोर्चे ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। 

    उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को होना है मतदान
    बता दें कि राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. नतीजे 9 अक्टूबर हो जारी होंगे. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया, जिससे यह सीट रिक्त हुई. वहीं एजेयूपी (AJUP) नेता हुमायूं कबीर ने नौदा और रेजीनगर दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था. इसके चलते नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। 

  • West Bengal Politics: TMC के तीनों गुटों को एक दिन में झटका, शुभेंदु अधिकारी ने बढ़ाया सियासी दबाव

    West Bengal Politics: TMC के तीनों गुटों को एक दिन में झटका, शुभेंदु अधिकारी ने बढ़ाया सियासी दबाव

    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की कमान अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है, सरकार बदलने के बाद तृणमूल कांग्रेस इतिहास के अपने सबसे बड़े संगठनात्मक और राजनीतिक संकट से गुजर रही है. महज दो महीनों के भीतर 28 साल पुरानी टीएमसी न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, बल्कि तीन अलग-अलग धड़ों में बंट गई है. अब तीनों ही गुट शुभेंदु सरकार के निशाने पर है। 

    टीएमसी में टूट का आगाज चुनाव से पहले ही हो गया था. हुमांयू कबीर टीएमसी से अलग होकर अपनी पार्टी बना लगी थी और दो सीटों से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. चुनाव नतीजे के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों और काकोली घोष की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसद ने ममता बनर्जी से अलग राह चुन ली. एक धड़ा ममता बनर्जी के वफादार का भी है। 

    बंगाल की सत्ता पर काबिज बीजेपी और उसकी अगुवाई कर रहे सीएम शुभेंदु अधिकारी की सरकार के निशाने पर इन दिनों टीएमसी के तीनों धड़े हैं. ममता बनर्जी का वफादार खेमा हो या फिर बागी गुट. इसके अलावा हुमायूं कबीर पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। 
     
    ममता बनर्जी गुट पर सरकार की टेंढी नजर
    विधानसभा चुनाव की शिकस्त और पार्टी में हुई ऐतिहासिक टूट (80 में से करीब 60 विधायकों का साथ छोड़ना) के बाद ममता बनर्जी अपने बचे-खुचे वफादार नेताओं के साथ सड़क पर संघर्ष कर रही हैं. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा के पटल से साफ एलान कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस अब एक बंद अध्याय है और ममता कभी सत्ता में नहीं लौटेंगी। 

    शुभेंदु सरकार अब पूरी तरह ममता बनर्जी गुट को सियासी रूप से पूरी तरह पंगु बनाने के लिए 2011 से 2026 के शासनकाल के दौरान हुए 'संस्थागत भ्रष्टाचार', भाई-भतीजावाद और राशन-भर्ती घोटालों की जांच को तेज कर रही है, शाहजहां शेख, शौकत मोल्ला और जहांगीर खान जैसे ममता के करीबी और बाहुबली नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसना सीधे तौर पर ममता गुट की रीढ़ तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है। 

    कोलकाता की राजनीति में21 जुलाई का 'शहीद दिवस' की अपनी सियासी अहमियत है. टीएमसी के लिए यह केवल एक तारीख नहीं, बल्कि पार्टी की आत्मा है. ममता बनर्जी का आधिकारिक खेमा इस दिन रैली करने की तैयारी की है, लेकिनप्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू कर कार्यक्रम के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इसके चलते ममता खेमे के शक्ति प्रदर्शन की तैयारी पर पुलिस की सख्ती ने पानी फेर दिया। 

    ऋतब्रत बनर्जी की खिलाफ सरकार गुई सख्त
    मई 2026 में दिल्ली के बंगा भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी से एक 'आकस्मिक मुलाकात' के बाद टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी  ने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था. अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से नाराज ऋतब्रत बनर्जी ने 60 विधायकों को अपने साथ मिला लिया और विधानसभा में खुद को 'असली टीएमसी' बताते हुए विपक्ष के नेता बन गए। 

    हालांकि, शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी की बगावत से शुभेंदु को फायदा हुआ, लेकिन अब ऋतब्रत गुट सरकार के निशाने पर है. हाल ही में जब शुभेंदु सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता(UCC) विधेयक की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा, तो ऋतब्रत बनर्जी  के नेतृत्व वाले इस बागी गुट ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। 

    सीएम शुभेंदु ने साफ कर दिया है कि सरकार के एजेंडे में बाधा डालने वाले किसी भी गुट को बख्शा नहीं जाएगा. ममता बनर्जी की तरह ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई वाले बागी गुट ने शहीद दिवस पर रैली करने की योजना बनाई थी. इसे बागी गुट एक नई शुरुआत के तौर पर पेश करना चाहता है, लेकिन शुभेंदु सरकार ने शहीद दिवस पर होने वाले कार्यक्रम के लिए इजाजत नहीं दिया. इस तरह ऋतब्रत बनर्जी के गुट के सियासी अरमानों पर पानी फिर गया है। 

    हुमायूं कबीर के खिलाफ कसता कानूनी शिकंजा
    टीएमसी से निलंबित होने के बाद 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) बनाने वाले नौदा के विधायक हुमायूं कबीर इस समय शुभेंदु सरकार के सबसे तीखे निशाने पर हैं. मुर्शिदाबाद में एक जनसभा के दौरान हुमायूं कबीर ने भाजपा नेतृत्व को धमकी देते हुए कहा था कि जिस दिन मैंने हजारों मुस्लिमों को एकजुट कर सड़कों पर उतार दिया, उस दिन इतना कड़ा प्रहार करूंगा कि भाजपा का झंडा उठाने वाला कोई नहीं बचेगा। 

    हुमांयू कबीर के भड़काऊ और सांप्रदायिक बयान पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बहुत हुआ, ऐसे तत्वों को स्थायी सबक सिखाने का समय आ गया है. शुभेंदु सरकार ने कबीर के खिलाफ रेजिनगर और शक्तिपुर थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं. शुभेंदु ने चेतावनी देते हुए कि यह हुमायूं कबीर का आखिरी ऐसा बयान होगा और राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए गुंडागर्दी को पूरी तरह कुचल दिया जाएगा। 
     
    बंगाल में हुमायूं कबीर जैसे नेताओं पर भड़काऊ बयानों के लिए कानूनी चाबुक चलाकर,शुभेंदु सरकार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि टीएमसी का कोई भी धड़ा यदि उनके एजेंडे के आड़े आया, तो सियासी अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। 

  • CM पद पर शुभेंदु अधिकारी की लगभग पुष्टि, दो डिप्टी CM भी लेंगे शपथ; कौन होंगे उम्मीदवार

    CM पद पर शुभेंदु अधिकारी की लगभग पुष्टि, दो डिप्टी CM भी लेंगे शपथ; कौन होंगे उम्मीदवार

    कलकत्ता

     पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की लेकर कवायद तेज हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं। यहां वह भाजपा के तमाम 206 विधायकों को संबोधित भी कर सकते हैं। इस बीच सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है वह यह है कि शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। आज शाम तक इसका ऐलान हो सकता है।

    भाजपा ने हालांकि मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दो जीत हासिल करने के बाद इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। उन्होंने नंदीग्राम सीट बरकरार रखी, जहां उन्होंने 2021 में बनर्जी को हराया था और अब उन्होंने वह भवानीपुर सीट भी तृणमूल सुप्रीमो के हाथ से छीन ली है, जिसे लंबे समय से उनका गढ़ माना जाता था।

    शुभेंदु अधिकारी कभी बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल थे और ग्रामीण पश्चिम बंगाल में तृणमूल के संगठनात्मक विस्तार के प्रमुख सूत्रधार माने जाते थे। वह दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल हुए और राज्य में पार्टी के सबसे आक्रामक प्रचारकों में से एक बन गए।

    इन्हें मिल सकता है मौका
    शुभेंदु अधिकारी के अलावा पश्चिम बंगाल सरकार में बतौर मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, रूपा गांगुली, स्वपन दासगुप्ता, शंकर घोष, तापस रॉय, अशोक डिंडा और डॉ. राजेश कुमार को भी मौका मिल सकता है।

    कोलकाता पहुंचे अमित शाह
    अमित शाह का आज शुभेंदु अधिकारी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया। हवाई अड्डे से वह न्यू टाउन स्थित एक होटल गए। दोपहर में अमित शाह विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे। शनिवार को वह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।

    हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया। राज्यपाल आर एन रवि ने बृहस्पतिवार को विधानसभा भंग कर दी, जिससे नयी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।

  • वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी का चेतावनी भरा बयान, कहा- बंगाल में बदलाव नहीं हुआ तो सनातन खत्म हो जाएगा

    वोटिंग के बीच शुभेंदु अधिकारी का चेतावनी भरा बयान, कहा- बंगाल में बदलाव नहीं हुआ तो सनातन खत्म हो जाएगा

    कलकत्ता 

    पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर आज पहले चरण में मतदान चल रहा है। बंगाल में दो राउंड में वोटिंग होनी है और अगले राउंड का मतदान 29 अप्रैल को होगा। राज्य के नेता विपक्ष और भाजपा के सीनियर लीडर शुभेंदु अधिकारी ने भी मतदान किया और इस दौरान मीडिया वालों से बात करते हुए हिंदू कार्ड भी चल दिया। उन्होंने कहा कि इस बार परिवर्तन होगा। यही नहीं इसके आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि बंगाल में इस बार बदलाव नहीं हुआ तो फिर सनातन बंगाल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहे हैं। फिर भी हर जगह कुछ गुंडे घूम रहे हैं।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमारे पोलिंग एजेंट को ही अरेस्ट कर लिया गया है। इस मामले में सख्त ऐक्शन तुरंत लिया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में अपना वोट डाला। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से किए इंतजामों की तारीफ की। उन्होंने जनता से बढ़-चढ़कर मतदान करने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं शांतिपूर्ण मतदान की प्रार्थना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इस बार टीएमसी ज्यादा व्यवधान नहीं पहुंचा पाएगी। मतदान से पहले की रात बहुत महत्वपूर्ण होती है। हम चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने व्यवस्था को बनाए रखने में बड़ा सहयोग दिया।

    नंदीग्राम वही विधानसभा सीट है, जहां से 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर चुनाव जीता था। इस बार ममता बनर्जी ने भबानीपुर से चुनाव लड़ा है और शुभेंदु अधिकारी वहां से भी मैदान में उतरे हैं। उन्होंने एक बार फिर से यह संदेश देने की कोशिश की है कि ममता बनर्जी को वही टक्कर दे सकते हैं अथवा हरा भी सकते हैं। नंदीग्राम में पहले राउंड में ही मतदान हो रहा है तो वहीं भबानीपुर सीट पर दूसरे चरण में वोटिंग होगी।

    ममता का बांग्ला कार्ड बनाम भाजपा का हिंदू कार्ड
    भाजपा को उम्मीद है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार बांग्ला कार्ड चल रही हैं, जबकि भाजपा हिंदू कार्ड के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। पहले भी ममता बनर्जी बांग्ला कार्ड चलती रही हैं। इस बार उन्होंने यह आरोप मढ़ दिया है कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो फिर बंगालियों का अंडा और मछली खाना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद से हालात ऐसे बन गए हैं कि भाजपा के नेता कई जगहों पर मछली खा रहे हैं और इसकी तस्वीरें जारी कर रहे हैं।