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  • कांग्रेस ने अजित पवार के सम्मान में उम्मीदवारी वापस ली, सुनेत्रा पवार की जीत अब निर्विरोध

    कांग्रेस ने अजित पवार के सम्मान में उम्मीदवारी वापस ली, सुनेत्रा पवार की जीत अब निर्विरोध

    मुंबई 
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव नहीं लड़ेगी, जहां से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अपने पति अजित पवार के मृत्यु के बाद चुनाव मैदान में हैं। चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने की बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि है। उन्होंने कहा- अजित पवार के निधन के कारण बारामती उपचुनाव आवश्यक हो गया। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कांग्रेस इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।

    कांग्रेस के आकाश मोरे ने 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। चेन्निथला का यह बयान शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के शीर्ष नेताओं के आग्रह के बाद आया जिसमें उन्होंने कांग्रेस से बारामती उपचुनाव में राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवारी वापस लेने की अपील की थी। शरद पवार ने कहा कि यह उपचुनाव विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु की पृष्ठभूमि में हो रहा है, इसलिए वह कांग्रेस को चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने के लिए कहेंगे।

    क्या बोले थे शरद पवार?
    पवार ने कहा- कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और हम उसे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश नहीं दे सकते। हालांकि, महाराष्ट्र ने एक दुखद दुर्घटना में एक कुशल नेता को खो दिया, जिसके कारण बारामती सीट खाली हुई। अगर मुझसे पूछा जाए, तो मैं कांग्रेस को सुझाव दूंगा कि इस उपचुनाव को निर्विरोध कराया जाना उचित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय कांग्रेस का होगा।

    अजित पवार की पत्नी एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती सीट से नामांकन दाखिल किया है। हालांकि, निर्विरोध चुनाव की अपीलों के बीच कांग्रेस ने 23 अप्रैल के लिए निर्धारित उपचुनाव के लिए अधिवक्ता आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया।

    सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की
    राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की। उन्होंने कहा- अजितदादा ने पहले कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और हमेशा आपकी पार्टी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। बारामती में निर्विरोध चुनाव उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगा। उन्होंने कहा, "इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी से विनम्र अनुरोध करती हूं कि कृपया अपनी उम्मीदवारी वापस लें और यह सुनिश्चित करें कि यह चुनाव निर्विरोध हो।"

    रोहित पवार ने किया था अनुरोध
    इससे पहले, राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मुलाकात कर पार्टी से उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह किया, ताकि सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सके। रोहित पवार ने कहा, "मुझे विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।"

    सूत्रों के अनुसार, एक दिन पहले सुनेत्रा पवार ने भी सपकाल से बात कर उनसे अनुरोध किया था कि वह सुनिश्चित करें कि कांग्रेस उम्मीदवार उनके खिलाफ नामांकन वापस ले। कांग्रेस ने कहा था कि वह चुनाव से तभी हटेगी जब जनवरी में हुई विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के मामले में महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

    सुनेत्रा पवार के बेटे ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
    पवार की मृत्यु के कारण ही बारामती में उपचुनाव जरूरी हो गया है। चुनाव की तैयारियों के बीच माहौल उस समय तल्ख हो गया जब सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने हाल में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारने की आलोचना की। रोहित पवार ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने चचेरे भाई पार्थ पवार की टिप्पणियों पर खेद जताया है। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।"

    सुनेत्रा पवार और कांग्रेस के आकाश मोरे सहित कुल 53 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि नौ अप्रैल है। राकांपा (शप) नेता ने कहा कि कांग्रेस ने यह सही संदेश दिया है कि विमान दुर्घटना मामले में न्याय मिलना चाहिए और महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। बारामती विमान दुर्घटना की लगातार उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे रोहित पवार ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज दिल्ली में मौजूद सुनेत्रा पवार केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिलेंगी और मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगी।"

    भाजपा ने दी थी चेतावनी
    शरद पवार नीत राकांपा (शप) ने पहले ही घोषणा की है कि वह सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यदि कांग्रेस ने राकांपा अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को बारामती विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध जीतने नहीं दिया, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।

    बावनकुले ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, अगर कांग्रेस सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध नहीं जीतने देती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। यदि वह अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं लेती है, तो उसका पतन बारामती से ही शुरू होगा।" एक अन्य सवाल के जवाब में बावनकुले ने कहा कि असम और केरल में पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन इस बार अधिक मजबूत होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में बृहस्पतिवार को एक ही चरण में मतदान हो रहा है। उन्होंने कहा, "ये चुनाव एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाएंगे।

  • अजित पवार के निधन के बाद NCP में बदलाव, सुनेत्रा पवार को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष

    अजित पवार के निधन के बाद NCP में बदलाव, सुनेत्रा पवार को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष

    मुंबई 

    महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत सुनेत्रा पवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुन लिया गया है, जिसे पार्टी के भीतर संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया, जिसका सभी सदस्यों ने समर्थन किया और बिना किसी विरोध के उन्हें शीर्ष पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस चयन को एनसीपी के पुनर्गठन और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि हाल के वर्षों में पार्टी को आंतरिक चुनौतियों, गुटबाजी और चुनावी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा है।

     सुनेत्रा पवार ने अध्यक्ष चुने जाने के बाद अपने संबोधन में कहा कि वह संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा पार्टी की विचारधारा को देशभर में प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपी सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के अपने मूल सिद्धांतों पर कायम रहेगी और आने वाले चुनावों में मजबूती से भाग लेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में पार्टी नई रणनीति के साथ राज्यों में संगठन विस्तार, गठबंधन राजनीति और जनसंपर्क अभियानों पर विशेष ध्यान दे सकती है। सर्वसम्मति से हुआ यह चुनाव यह भी दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल एकजुटता का संदेश देना चाहता है और किसी प्रकार के आंतरिक मतभेद को सार्वजनिक रूप से उभरने नहीं देना चाहता। 

    सुनेत्रा पवार की संगठनात्मक भूमिका पहले भी सक्रिय रही है और उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों, महिला मोर्चा तथा सामाजिक अभियानों में भागीदारी के लिए जाना जाता है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने में सक्षम होंगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी की खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाना, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और विपक्षी दलों के साथ रणनीतिक तालमेल बनाना होगा। कुल मिलाकर, उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना एनसीपी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है, जिसमें संगठनात्मक पुनर्संरचना, वैचारिक स्पष्टता और चुनावी मजबूती पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

    राष्ट्रीय अधिवेशन में हुआ फैसला

    सुनेत्रा पवार ने कहा कि मैंने दादा के अधूरे सपनों को पूरा करने, अपनी पार्टी को बढ़ाने और उसे मजबूत करने के लिए यह पद स्वीकार किया है। सुनेत्रा पवार को पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ। गौरतलब हो कि 28 जनवरी को बारामती में प्लेन क्रैश की घटना में अजित पवार की मौत हो गई थी। प्लेन क्रैश के कारणों की जांच एएआईबी और सीआईडी द्वारा की जा रही है। 

    प्रफुल्ल पटेल ने रखा सुनेत्रा का नाम

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव किया। जिसका अनुमोदन सुनील तटकरे ने किया। जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। अधिवेशन में ही अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा का कैंडिडेट भी घोषित कर दिया गया। सुनेत्रा पवार ने इस मौके पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से वादा किया कि मैं हमेशा आपकी बेटी, बहन और पार्टनर के तौर पर आपके साथ खड़ी रहूंगी।

    दादा के सपनों को पूरा करेंगे

    सुनेत्रा पवार ने कहा कि दादा की जगह कोई नहीं ले सकता। उन्होंने अध्यक्ष चुने जाने के बाद कहा कि यह एक ऐसी पार्टी है जो महाराष्ट्र की खुशहाली, देश के बदलाव और सबसे ज़रूरी, आप सब और हम सबके गर्व और आत्म-सम्मान के बारे में सोचती है। इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए, हमें इस मुश्किल समय में भी पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ना होगा। दादा ने जो विचार दिए, जो विकास का रास्ता दिखाया, जो कार्यकर्ता बनाए। यही एनसीपी की असली ताकत है। सुनेत्रा ने कहा कि 30 जून, 2023 को दादा ने एनसीपी के नेशनल प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाली थी। दादा को नेशनल प्रेसिडेंट के तौर पर लगभग ढाई साल का समय मिला। इस दौरान उन्होंने पूरे महाराष्ट्र को अपनाया। पार्टी को बढ़ाया। हर कार्यकर्ता को मजबूत किया। कड़ी मेहनत, लगन और कड़ी प्लानिंग से पार्टी की ताकत बढ़ी।

  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हलचल, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सुनेत्रा पवार का नाम तय

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हलचल, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सुनेत्रा पवार का नाम तय

    मुंबई 

    अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला लेने की खबर है। पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी ने सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार तय किया है। इस निर्णय को अजित पवार के बाद पार्टी की कमान तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

     राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) की केंद्रीय कार्यकारिणी की एक बेहद अहम बैठक आज गुरुवार को मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में होने जा रही है। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। पिछले महीने बारामती में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में अजित पवार के निधन ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जिसके बाद से ही पार्टी नेतृत्व को लेकर कयासों का दौर जारी था।

    पार्थ पवार नहीं, सुनेत्रा पर लगी मुहर

    अजित पवार के निधन के बाद से ही सवाल उठ रहा था कि पार्टी का अगला मुखिया कौन होगा? चर्चाओं के बाजार में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम भी काफी ऊपर था, लेकिन पार्टी के अनुभवी नेताओं ने सुनेत्रा पवार के नाम पर भरोसा जताया है। महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ-साथ एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुनील तटकरे ने भी सुनेत्रा पवार के नाम का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आज होने वाली बैठक में कार्यकारिणी सर्वसम्मति से सुनेत्रा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपेगी। सुनेत्रा पहले ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखा चुकी हैं, और अब संगठन की कमान संभालना उनके लिए एक नई परीक्षा होगी।

    राज्यसभा की सीट पर अब बेटे का कब्जा

    नेतृत्व परिवर्तन के साथ-साथ परिवार और पार्टी के भीतर पदों का नया बंटवारा भी शुरू हो गया है। सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि वे अब राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। खाली हुई इस राज्यसभा सीट के लिए पार्टी ने पार्थ पवार को अपना उम्मीदवार बनाने का बड़ा फैसला लिया है। यानी अब पिता की विरासत को सुनेत्रा राज्य में संभालेंगी, जबकि दिल्ली की राजनीति में पार्थ पवार पार्टी का चेहरा बनेंगे। हालांकि, सुनेत्रा पवार के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए अगले छह महीने के भीतर महाराष्ट्र विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होगा।

    क्या सुप्रिया सुले देंगी सुनेत्रा को वॉकओवर?

    अजित पवार के निधन से खाली हुई बारामती विधानसभा सीट पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। एनसीपी (अजित गुट) यहाँ से सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। पार्टी की सबसे बड़ी कोशिश यह है कि इस उपचुनाव को 'निर्विरोध' कराया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अजित पवार के प्रति सम्मान प्रकट करने की यह एक राजनीतिक परंपरा होनी चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इसके संकेत दिए हैं कि मौजूदा हालात को देखते हुए चुनाव नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो बारामती से सुनेत्रा पवार की जीत तय है और यह पवार परिवार के बीच जारी राजनीतिक कड़वाहट को कम करने का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है।

    संगठन के लिए आज का दिन ऐतिहासिक

    आज वर्ली में होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि अजित पवार के बिना पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मोड़ है। कार्यकर्ताओं में अपने चहेते नेता को खोने का गम तो है, लेकिन सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में वे नई ऊर्जा तलाश रहे हैं। आगामी उपचुनाव और संगठन को मजबूती देने के लिए सुनेत्रा के पास बहुत कम समय है। क्या वे अजित पवार के उस करिश्मे को बरकरार रख पाएंगी जिसने एनसीपी को महाराष्ट्र की सत्ता के केंद्र में रखा था? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन आज का दिन महाराष्ट्र के इतिहास में सुनेत्रा पवार के उदय के रूप में दर्ज होने जा रहा है।