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  • NEET और तमिल भाषा विवाद पर बढ़ी सियासत, सुधांशु त्रिवेदी ने तिरुक्कुरल से लेकर रक्षा कॉरिडोर तक गिनाईं उपलब्धियां

    NEET और तमिल भाषा विवाद पर बढ़ी सियासत, सुधांशु त्रिवेदी ने तिरुक्कुरल से लेकर रक्षा कॉरिडोर तक गिनाईं उपलब्धियां

     नई दिल्ली
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने निशाना साधा। रविवार को उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का यह दावा पूरी तरह गलत है कि NEET लागू होने से तमिल भाषा पर हमला हो रहा है। त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में तमिल भाषा को काफी सम्मान दिया गया है। इसके विभिन्न पहलुओं को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किए गए हैं।

    सुधांशु त्रिवेदी ने तमिलनाडु में केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चेन्नई में 13,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की गईं। इनमें चेन्नई मेट्रो के लिए 4,900 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 3,700 करोड़ रुपये और कराईकल-परमबूर रेल लाइन के लिए 7,750 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चेन्नई के वीओसी और कामराजर बंदरगाहों समेत तीन बंदरगाहों पर माल ढुलाई और क्रूज सुविधाओं को बेहतर बनाने के काम भी किए जा रहे हैं।

    रूस के राष्ट्रपति को भेंट किया तिरुक्कुरल
    बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी के मुताबिक, तमिलनाडु में सागरमाला योजना के तहत 41 परियोजनाओं की पहचान की गई है और तीन बंदरगाहों पर नई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि साल 2047 तक चेन्नई, कामराजर और कडलूर बंदरगाह समूह के लिए सालाना 30 करोड़ टन माल ढुलाई का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि पिछले महीने ही पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति को तमिल साहित्य की सबसे सम्मानित रचनाओं में शामिल ‘तिरुक्कुरल’ भेंट की थी। त्रिवेदी ने कहा कि भारत सरकार ने दुनिया के कई देशों में तिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र शुरू किए हैं और पहला केंद्र सिंगापुर में स्थापित किया गया है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि 1967 से तमिलनाडु की सत्ता से बाहर रहने के दौरान पार्टी ने इस तरह के प्रयास क्यों नहीं किए।

    भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने रक्षा उत्पादन और देश की रक्षा जरूरतों के लिए स्वदेशी क्षमता बढ़ाने को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया। इसके तहत 2 रक्षा गलियारे बनाए गए, जिनमें से एक उत्तर भारत और दूसरा दक्षिण भारत में स्थापित किया गया। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश को रक्षा गलियारे का केंद्र बनाया गया, जबकि दूसरा गलियारा तमिलनाडु को दिया गया। त्रिवेदी ने कहा कि तमिलनाडु में उनकी पार्टी न तो सरकार में है और न ही विपक्ष में, इसके बावजूद राज्य को यह परियोजना दी गई। यह पीएम मोदी की संतुलित सोच और सकारात्मक नजरिए को दिखाता है।

    आखिर राहुल गांधी ने क्या था?
    कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को बीजेपी सरकार पर तमिलनाडु की भाषा, संस्कृति और इतिहास को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब परिसीमन के माध्यम से राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व कम करने और यहां के लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। राहुल ने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह तमिलनाडु की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान पर हमला कर रहे हैं। शाह तमिलनाडु के लोगों पर हिंदी थोपने की बात करते हैं और तमिल भाषा व संस्कृति को कमतर मानते हैं। तमिलनाडु की भाषा, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं पर किसी भी तरह का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • ‘कांग्रेस में खानदानी कलह’, सुधांशु त्रिवेदी का बयान— जनता करेगी फैसला

    ‘कांग्रेस में खानदानी कलह’, सुधांशु त्रिवेदी का बयान— जनता करेगी फैसला

    नई दिल्ली
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समिट में एक तरफ हमारी युवा शक्ति की शैक्षिक क्षमता का बहुत उच्च कोटि का प्रदर्शन हुआ, तो वहीं कांग्रेस की निम्नता और नग्नता का कुटिल प्रदर्शन देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अभी तक पूरा देश इस विषय को लेकर आक्रोशित है और अब कांग्रेस पार्टी के गठबंधन सहयोगियों की ओर से भी इस पर आपत्ति जताई गई है।

     अब कांग्रेस पार्टी के अंदर से भी यह स्वर गूंजने लगा है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में गरिमापूर्ण आचरण की अपेक्षा होती है। ऐसे आयोजनों में इस प्रकार का हल्का, छिछोरा और नग्न आचरण करना निहायत निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रहीं और पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा ने भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों में गरिमा और अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसलिए हम यह कहना चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी को अब यह समझना चाहिए कि वह जिस प्रकार के विचारों के अनुसार चल रही है, उसे जनता नकार रही है, गठबंधन सहयोगी नकार रहे हैं और अब पार्टी के अंदर के वरिष्ठ एवं पुराने नेता भी उन्हें नकार रहे हैं। जनता उन्हें पूरी तरह ठुकरा रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या कांग्रेस के अंदर आज की नहीं है, बल्कि यह खानदानी समस्या है। मैं कहना चाहता हूं कि यह समस्या कांग्रेस के नेताओं से ज्यादा कांग्रेस के परिवार की समस्या है। एक जमाने में भारत को सपेरों का देश कहा जाता था। 28 सितंबर 1955 को जवाहरलाल नेहरू की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनसे पूछा गया था कि क्या भारत को सपेरों का देश कहना उचित है? उन्होंने उत्तर दिया था कि भारत को सपेरों का देश कहने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि इससे पर्यटकों की संतुष्टि होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि आप भारत की उसी पहचान को बनाए रखना चाहते थे। इसी कारण आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एआई की नई उड़ान की ओर बढ़ रहा है, तो यह आपसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

    उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कांग्रेस की इस खानदानी बीमारी का इलाज देश की जनता करेगी। समस्या यह है कि जो भी उनकी पार्टी या गठबंधन के साथी उन्हें समझाना चाहते हैं, उनकी बात वे सुनना ही नहीं चाहते।
    उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा था कि राज्य के पास पूंजी निवेश के लिए पर्याप्त धन नहीं है। फिर भी उन्होंने कहा कि वे गांधी परिवार और कांग्रेस के लिए 1,000 करोड़ रुपए खर्च करने को तैयार हैं। जब हम राज्य सरकार में थे, तब हमने गुजरात मॉडल पेश किया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई थी। अब कांग्रेस को जवाब देना होगा कि उन्होंने शासन का कौन सा मॉडल पेश किया है?

    सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता में है और तीन राज्यों में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार चला रही है, हिमाचल, तेलंगाना और कर्नाटक। हमने गुजरात मॉडल दिया है। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं, आपका मॉडल क्या है? आपने कर्नाटक का कौन सा मॉडल देश के सामने रखा है? हिमाचल का कौन सा मॉडल पेश किया है? दिखाइए, प्रदर्शन करके बताइए।
    तेलंगाना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वहां कांग्रेस की राजनीति की परिभाषा अलग तरह से पेश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज इन बयानों के बाद किसी भी प्रकार का किंतु-परंतु नहीं रह गया है और उनके अनुसार कांग्रेस न केवल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहती है, बल्कि जिन राज्यों में सत्ता में रहती है, वहां की जनता का भी भारी अहित करती है।