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  • सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

    सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए सहायक ग्रेड 3 और समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी में छूट आदि से संबंधित समेकित निर्देश जारी किया है। अब जहां सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति के लिए 45 वर्ष से अधिक के कर्मियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से पूरी छूट दी है वहां अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत सभी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के संबंध में संशोधित निर्देश जारी किए हैं।सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को CPCT स्कोर कार्ड की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। साथ ही अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, उन्हें पदोन्नति के बाद 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करना होगी तथा मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा अथवा निर्धारित समकक्ष योग्यता प्राप्त करना होगी।

    यदि कर्मचारी 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में आवश्यक अर्हताएं प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनकी परिवीक्षा अवधि अधिकतम 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार उन्हें पदोन्नति के बाद कुल 5 वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। इस अवधि में आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा।उक्त प्रावधान केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होंगे।

    सीधी भर्ती आदि में नहीं मिलेगा लाभ
    सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की निर्धारित अर्हताएं यथावत अनिवार्य रहेंगी।

    45 वर्ष से अधिक वालों को बड़ी राहत
    आदेश अनुसार शासकीय सेवक अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की गई है, परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी।

  • टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    टीबी मरीजों को क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दी पोषण आहार की डलिया

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़ी है और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्परता से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से जनविश्वास अभियान के माध्यम से सरकार घर-घर पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रत्येक वर्ग को राहत देने तथा बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर योजनाएं संचालित कर रही है।

    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला चिकित्सालय पहुंचकर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया तथा मरीजों से चर्चा कर उनके उपचार एवं अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली बच्चों को निःशुल्क चश्में वितरित किए। साथ ही क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत टीबी मरीजों को पोषण सहायता के उद्देश्य से फूड बास्केट प्रदान की।

    बुजुर्ग महिला से ली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, बच्चों को किया दुलार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों से चर्चा करते हुए उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान उनका संवेदनशील अंदाज भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने एक बुजुर्ग महिला से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बुजुर्ग महिला से चर्चा करते हुऐ कुशलक्षेम पूछा, बुजुर्ग महिला ने बताया कि इलाज बहुत अच्छा मिल रहा है और अब पहले से आराम है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से दुलार करते भी नजर आए। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित बच्चों के सर पर दुलार से हाथ फेरते हुए उनका भी हाल-चाल पूछा।

    अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री द्वारा स्कूली बच्चों को वितरित किए गए निःशुल्क चश्में

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव बच्चों के बीच पहुंचे जहां उन्होंने बच्चों को निशुल्क चश्में वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा शासकीय कन्या शाला की कक्षा 12वी की छात्रा कु. शिवानी, कु. छाया एवं शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की छात्रा कु. मुस्कान को चश्मा वितरित किया।

    हरदा में जिला अन्धत्व निवारण कार्यक्रम के अन्तर्गत 135 स्कूलों में 20320 बच्चों की जांच की गई जिसमें 1156 बच्चों में दृष्टिदोष पाए जाने पर उन्हें निशुल्क चश्में वितरित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण आहार की टोकरी भी वितरित की। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से युक्त लगभग 8 किलोग्राम की प्रत्येक फूड बास्केट में आटा, मूंगफली दाना, दाल और चना आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने हरदा जिले के ग्राम झिरी की रामबाई धुर्वे, उषा गिनारे तथा टिमरनी के परसराम लोवंशी को पोषण आहार की टोकरी प्रदान की।

    उल्लेखनीय है कि नि-क्षय पोषण योजना के अंतर्गत क्षय रोगियों को पोषण सहायता के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में व्यापक स्तर पर जांच एवं स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक हरदा जिले के हाईरिस्क ग्रामों एवं मोहल्लों को कवर करते हुए घर-घर जाकर 1 लाख 86 हजार 332 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हाईरिस्क ग्रामों एवं वार्डों में एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन और बलगम (स्यूटम) जांच के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से टीबी मरीजों को पोषण आहार की फूड बास्केट भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल को मिला आईएसओ सर्टिफिकेट

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिला अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्राप्त आईएसओ सर्टिफिकेट भी कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एच.पी. सिंह को प्रदान किया। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों का किया सम्मान, वृद्धजनों ने दिया स्नेह और आशीर्वाद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम अंतर्गत हरदा में सार्थक सेवा वृद्धजन आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों से आत्मीय भेंट की। उन्होंने वृद्धजनों को शाल, फल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया। वृद्धजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति स्नेह व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धजनों से उनकी कुशलक्षेम जानी तथा आश्रम में उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृद्धाश्रम का भ्रमण किया तथा सेवा संकल्प अभियान के तहत आश्रम में आयोजित विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आश्रम में आयोजित भ्रमण, भेंट एवं सम्मान सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।

    सार्थक सेवा आश्रय समिति को सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संस्था के रूप में शासन स्तर से मान्यता प्रदान की गई है। समिति द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशन में वृद्धाश्रम का आधिकारिक संचालन किया जा रहा है। संस्था द्वारा वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को ऐसा पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें उन्हें अपनापन, सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाएं, पौष्टिक भोजन एवं मानसिक शांति का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में 50 सीटर वृद्धाश्रम में 37 वृद्धजन निवासरत हैं, जिनमें 19 महिलाएं एवं 18 पुरुष शामिल हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास उइके, पूर्व कृषि मंत्री  कमल पटेल, पूर्व विधायक  संजय शाह, जिला पंचायत अध्यक्ष  गजेंद्र शाह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दर्शन सिंह गहलोत,  राजेश वर्मा, नगर पालिका उपाध्यक्ष  अंशुल गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष टिमरनी  देवेन्द्र भारद्वाज,  विशाल सिंह बघेल, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल, सचिव मुख्यमंत्री सुदाम खाड़े, कमिश्नर नर्मदापुरम  कांत बनोठ, आईजी  चंद्रशेखर सोलंकी, कलेक्टर  सिद्धार्थ जैन, पुलिस अधीक्षक  शशांक सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास भी बनाये जायेंगे, आश्रम स्कूलों को दिए जाएंगे 143 करोड़ रुपए

    करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास भी बनाये जायेंगे, आश्रम स्कूलों को दिए जाएंगे 143 करोड़ रुपए

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने प्रजा के सुख को ही अपना धर्म माना था। उनका शासनकाल कृषि, जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। यह रानी दुर्गावती की प्रशासनिक दक्षता का ही कमाल था कि गोंड साम्राज्य के हजारों गांव समृद्धि का केंद्र बन गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती अदम्य साहस, अटल स्वाभिमान और शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती के दिखाए मार्ग पर चलकर हमारी सरकार प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण और विकास का एक नया अध्याय लिख रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खंडवा जिले के हरसूद के ग्राम छनेरा में हुए वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती उत्सव एवं तेंदूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं रानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण तथा पंच कलश के जरिये गोगोपूजन एवं बड़ादेव का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार गोंडवाना साम्राज्य के तत्कालीन 52 गढ़ों के राजशासकों के वर्तमान वंशजों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन राजवंशजों को साफा पहनाकर तथा खड्ग एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां खंडवा जिले के साथ बुरहानपुर, बड़वानी, खरगौन, देवास और हरदा के 3 लाख 54 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21 करोड़ 34 लाख रुपए से अधिक की बोनस राशि का वितरण किया। इसमें खंडवा के 32 हजार 846 तेंदूपत्ता संग्राहक भी शामिल हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने खंडवा वन मंडल क्षेत्र की 56 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के 26 हजार 400 से अधिक हितग्राहियों को 4 करोड़ 58 लाख रुपए के काष्ठ लाभांश की राशि भी वितरित की। मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले में लगभग 143 करोड़ रुपए की लागत से 18 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसमे लगभग 48 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न हाई स्कूल भवनों और छात्रावासों के साथ लगभग 20 करोड़ रूपए की लागत से खालवा में खेल परिसर का भूमिपूजन के साथ ही 68 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से 3 सामुदायिक एवं सांस्कृतिक भवनों की सौगात भी शामिल है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर क्षेत्रीय विकास एवं सुविधा उन्नयन से जुड़ी विभिन्न घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 5 साल में सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य से हरसूद विधानसभा क्षेत्र में करवानी उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां के जनजातीय क्षेत्रों में 25 करोड़ की लागत से बिजली आपूर्ति से जुड़े सभी विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खालवा तहसील क्षेत्र में 6 सांदीपनि विद्यालय बनाए जायेंगे। हरसूद में 490 सीटर नया कन्या छात्रावास बनेगा। इस क्षेत्र के सभी छात्रावासों में 34 करोड़ की लागत से रोटी मेकर मशीनें लगाई जायेंगी। छात्रावासों में वॉटर कूलर लगाए जाएंगे। यहां के छात्रावासों में ई-लाइब्रेरी बनाई जायेगी। करीब 161 करोड़ की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास बनाये जायेंगे। यहां के आश्रम स्कूलों को विकास कार्यों के लिए 143 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। खंडवा में 10 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से एक हाइटेक नर्सरी बनाई जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हरसूद सहित खंडवा जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाये जायेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार विरासत से विकास के संकल्प से साथ गरीब से गरीब के जीवन में रोशनी लाने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पंख लगाने का काम किया है। वीरांगना रानी दुर्गावती के जन्मोत्सव में आज 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान कर जीवन धन्य हो गया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती के जीवन से हमें राष्ट्र प्रथम, स्वाभिमान, विषम परिस्थितियों में नेतृत्व कौशल, नारी शक्ति का सम्मान, जल संचय, जंगल और प्रकृति के संरक्षण की सीख मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत को सम्मान देते हुए सरकार ने प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक 750 रुपये से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया है तथा शुद्ध लाभ का 75 प्रतिशत बोनस के रूप में दिया जा रहा है। आज खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, देवास और हरदा सहित कुल 6 जिलों के 3 लाख 54 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि दी गई है। उन्होंने कहा कि 32 लघुवनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर वनवासियों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए गरीब बच्चों की फीस राज्य सरकार भर रही है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप बांटे गए हैं। शासकीय स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें और साइकिलें दी गई हैं। प्रदेश के 85 हजार युवाओं को शासकीय पदों पर नौकरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी साल राज्य में 1 लाख करोड़ रूपए की लागत से जनकल्याण और विकास के काम कराए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश के गांव-गांव तक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों को भी सुगम परिवहन की बसों का लाभ मिलेगा। प्रदेश में कानून का राज है। राज्य सरकार ने बालाघाट और मंडला जिले से नक्सलवाद की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों में ग्रामीण आबादी को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिया जा रहा है। किसानों की समृद्धि के लिए दिन में भी 10 घंटे बिजली देने की शुरुआत की जा रही है। कृषक कल्याण वर्ष में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित कर अन्नदाताओं को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर धाम को पीएम हेली सेवा से जोड़ा गया है। प्रदेश में गरीब जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिल रही है। राहवीर योजना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

    केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री  दुर्गादास ऊइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर अग्रसर है। आज वीरांगना रानी दुर्गावती जन्मोत्सव में 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान किया गया है। पहली बार हमें इतिहास का सिंहावलोकन करने का अवसर मिला है। देश में 2014 के बाद बड़ा बदलाव आया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देशवासियों ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना देखा है। मध्यप्रदेश में 2003 से पहले और उसके बाद विकास स्पष्ट रूप से नजर आता है। केंद्रीय मंत्री  ऊइके ने रानी दुर्गावती के जीवन पर केंद्रित एक स्वलिखित गीत भी प्रस्तुत किया।

    जनजातीय कार्य, लोक सम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय राजवंशों के 52 गढ़ केवल मध्यप्रदेश और देश के दूसरे राज्यों में भी थे। आजादी के बाद उन्होंने देश की एकता के लिए अपना राज्य समर्पित कर दिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जनजातीय युवाओं के कल्याण के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपए की राशि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में दी जा रही है। जनजातीय युवाओं को डॉक्टर बनाने के लिए राज्य सरकार हर साल 90 लाख रुपए फीस भर रही है। प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप बांटे गए हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के मंच पर रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, क्रांतिसूर्य टंट्या मामा, संत सिंगाजी महाराज महापुरुषों के जीवन पर आधारित आकर्षक नृत्य नाटकों का मंचन किया गया।

    वीरांगना रानी दुर्गावती के बारे में

    रानी दुर्गावती का जन्म अब से 502 साल पहले 5 अक्टूबर 1524 को वर्तमान उत्तरप्रदेश के महोबा में हुआ था। वे गढ़ मंडला राज्य की शासक महारानी थीं तथा साहस, शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य और राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मुगलों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया। प्राणांत तक मातृभूमि की अस्मिता की रक्षा करते हुए 24 जून 1564 को वर्तमान मध्यप्रदेश के जबलपुर में वीरगति प्राप्त की।

    52 गढ़ों के इन राजवंशजों का किया सम्मान

    कार्यक्रम में  महेंद्र प्रताप सिंह जूदेव (नर्मदापुरम),  महेंद्र शाह (बरहेटा नरसिंहपुर), डॉ. हेमराज सिंह (जागीरदेवरी रायसेन),  अमरजीत सिंह (उदयपुरा रायसेन),रंजना सिंह (मदनपुर नरसिंहपुर),दमयंती सिंह (दियागढ़ जबलपुर),  यशवंत सिंह जूदेव (बिलोनिया नरसिंहपुर),  विमलेश ठाकुर (दमोह),  राजा वीरेंद्र शाह (देवगढ़ छिंदवाड़ा), डॉ. योगेश्वर सिंह (सिहोरा बघेलगढ़),गरिमा सिंह (मदनपुर),अर्चना सिंह कसदे (उमरिया),  अभिजीत शाह (हरदा),  ठाकुर (गोटेगांव नरसिंहपुर) तथा अन्य गढ़ों से आए राजवंशजों का भी सम्मान हुआ।

    कार्यक्रम में विधायक  नारायण पटेल, सु कंचन तनवे, सु छाया मौरे, जिला पंचायत अध्यक्षपिंकी सुदेश वानखेड़े, महापौर सु अमृत अमर यादव, पूर्व महापौरभावना शाह, कुंवर दिव्यादित्य शाह एवं  अंबाराम कराड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम में हुए वर्चुअली शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम में हुए वर्चुअली शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंधी समाज का कठिनाईयों से भरा लंबा संघर्ष रहा है। उनकी जीवटता और कर्मठता हर किसी को प्रभावित करती है। उनकी मधुर बोली और स्वभाव सबका दिल जीत लेती है। सिंधी समाज ने विभाजन की विभिषिका झेली है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि-घर और व्यापार छोड़ा लेकिन अपने संस्कार के साथ धर्म और हौसला नहीं खोया। प्राचीनतम सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास हम सभी को एक गौरवशाली अतीत से परिचित करवाता है। स्वाभिमान से जीवन जीने के प्रतीक बन चुके सिंधी समाज की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। अनेकों बार चुनौतियों को अवसर में बदलकर अपनी पहचान और गौरव को संजोए रखने वाले सिंधी समाज पर प्रदेशवासियों को गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास से इंदौर में आयोजित सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में सिंधु कला केंद्र का भव्य और दिव्य भवन बनकर तैयार होगा, जो सिंधी समाज की कला, संस्कृति और विरासत से भविष्य की पीढ़ियों को परिचित कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज के महापुरुषों की जीवनी जिनमें वीर राजा दाहिर, समाज सुधारक और संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी शामिल हैं,  स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान झूलेलाल का जयकारा लगाते हुए भूमि-पूजन कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को आश्वासन दिलाया कि वे सिंधु कला केंद्र के लोकार्पण कार्यक्रम में जरूर आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर 17 सितम्बर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर पधार रहे हैं। वे लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी से एक माह तक चलने वाले सेवा से संकल्प अभियान, स्वामित्व योजना का शुभारंभ करेंगे एवं विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इंदौर में भूमि-पूजन कार्यक्रम के अवसर पर स्थानीय सांसद शंकर लालवानी, ईश्वर झामनानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सिंधी समाज के प्रतिष्ठित जन उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनकल्याण योजना (संबल) 2.0 के हितग्राहियों को मुख्यमंत्री निवास से जारी की 11वीं किश्त

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनकल्याण योजना (संबल) 2.0 के हितग्राहियों को मुख्यमंत्री निवास से जारी की 11वीं किश्त

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रमिकों की सेवा, कल्याण और खुशी हमारे लिए सबसे पहले है। हमारे श्रमिक अपने खून-पसीने से विकसित मध्यप्रदेश की नींव तैयार कर एक-एक ईंट जोड़ रहे हैं। हर परिस्थिति में श्रमिकों की कठिनाई को दूर करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों पर विपत्ति आने, घर चलाने वाले के असामयिक निधन, अचानक आर्थिक संकट आने पर लोग साथ छोड़ दें, परंतु हमारी सरकार कभी आपका साथ नहीं छोड़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री संबल योजना 2.0 मुश्किल समय में श्रमिकों को आर्थिक सहारा भी देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से प्रदेश के श्रमिक बंधुओं को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रक्षाबंधन से पहले श्रावण के अंतिम सोमवार को श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के तहत दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि की 11वीं किश्त के रूप में 203 करोड़ रुपये की सहायता राशि सिंगल क्लिक से पात्र हितग्राहियों के खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रदेश के 9 हज़ार 149 संबल हितग्राहियों को मिली यह राशि इन सभी परिवारों में आनंद लेकर आई है। उन्होंने कहा कि संबल योजना ने प्रदेश के 1 करोड़ 84 लाख से अधिक श्रमिकों को सहारा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कठिन समय में जब सभी रास्ते बंद होंगे, तब भी सरकार उनके साथ खड़ी है। यह राशि दु:ख की घड़ी में बड़ी राहत लेकर आती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर जेब में पैसे हों, तो अनेक विपत्तियों का सामना करने की हिम्मत भी आ जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पिछला बैकलॉग खत्म करते हुए निर्बाध रूप से श्रम सहित सभी विभागीय योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों से वीसी से जुड़े श्रमिक हितग्राहियों को श्रावण सोमवार और आने वाले रक्षाबंधन पर्व की मंगलकामनाएं दी।

    श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, देश का पहला ऐसा राज्य बना है, जहां 'श्रम शक्ति संहिता' लागू की गई है। इसके साथ ही सरकार ने 'श्रम स्टार रेटिंग' की शुरुआत भी हमने की है, ताकि श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा कि हम श्रमिकों को उनके हुनर परिष्कृत कर मेहनत से आगे बढ़ना चाहते हैं। श्रमिकों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'श्रमणा' योजना की शुरुआत की गई है।

    अंत्योदय ही हमारी सरकार का संकल्प

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर में काम करने का तरीका बदल रहा है। प्रदेश के नौजवान अब ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रोजगार पा रहे हैं। इनकी आर्थिक सुरक्षा की चिंता करते हुए हमारी सरकार ने गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना 2.0 में शामिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार की सबसे बड़ी चिंता इलाज की होती है, ऐसे में संबल हितग्राहियों को भी आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जोड़ा गया है। इसके साथ ही जिन श्रमिक हितग्राहियों के बच्चे मेडिकल, कानून, इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी फीस की चिंता भी हमारी सरकार कर रही है।

    गर्भवती श्रमिक बहनों को 16 हजार की सहायता

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब संबल योजना की लाभार्थी श्रमिक बहनों को गर्भावस्था में आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ती है और मां-बच्चे को बेहतर पोषण मिल रहा है। राज्य सरकार पात्र गर्भवती श्रमिक बहनों को 16 हजार रुपये की सहायता राशि दे रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई श्रमिक अस्थायी रूप से दिव्यांग हो जाए, तो उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा न हो जाए, इसीलिए उसे अस्थायी दिव्यांगता हो जाने पर 1 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता होने पर 2 लाख रुपये की सहायता संबल योजना के माध्यम से दी जा रही है।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कार्यक्रम में वर्चुअली सहभागिता की। उन्होंने कहा कि संबल योजना के हितग्राहियों का बैकलॉग खत्म करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। आज 11वीं किश्त के रूप में उन्हें 1 जनवरी 2026 तक का भुगतान कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमारी संवेदनशील सरकार हर गरीब और श्रमिक के साथ हमेशा खड़ी है।

    मिली सहायता

    मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना 2.0 की 11वीं किश्त के लाभार्थियों में सामान्य मृत्यु अनुग्रह सहायता के 8027 हितग्राही, दुर्घटना मृत्यु अनुग्रह सहायता के 1034, आंशिक स्थायी दिव्यांगता के 66 और स्थायी दिव्यांगता के 22 हितग्राही शामिल हैं। राज्य सरकार संबल योजना के पात्र श्रमिकों को अंत्येष्टि सहायता के लिए 5 हजार रुपए, सामान्य मृत्यु के लिए 2 लाख रुपए, दुर्घटना में मृत्यु के लिए 4 लाख रुपए, आंशिक स्थायी दिव्यांगता के लिए 1 लाख रुपए और स्थायी दिव्यांगता के लिए 2 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि संबंधित हितग्राहियों या उनके निकटतम परिजन को उपलब्ध कराती है।

    संबल योजना की सहायता राशि वितरण के इस कार्यक्रम में सचिव श्रम  रानी बाटड़ सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।