Tag: Smart Meter

  • स्मार्ट मीटर से पारदर्शी बिलिंग, सूर्यघर योजना से सोलर का लाभ; उपभोक्ताओं को राहत

    स्मार्ट मीटर से पारदर्शी बिलिंग, सूर्यघर योजना से सोलर का लाभ; उपभोक्ताओं को राहत

    स्मार्ट मीटर से पारदर्शी बिजली व्यवस्था, सूर्यघर योजना से उपभोक्ताओं को दोहरा लाभ

    – मासिक खपत के आंकड़ों में नहीं हुई वृद्धि, 43 लाख परिसरों में लग चुके स्मार्ट मीटर
    – 1.10 लाख से अधिक सोलर प्लांट स्थापित, प्रतिदिन 500 से अधिक नए प्लांट लग रहे
    – स्मार्ट मीटर और पीएम सूर्यघर योजना से उपभोक्ता सेवा में पारदर्शिता और ऊर्जा बचत को बढ़ावा

    रायपुर 
     छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के माध्यम से आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर से बिजली खपत की पारदर्शी निगरानी संभव हो रही है, वहीं पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से घरेलू उपभोक्ता सौर ऊर्जा का लाभ लेकर बिजली बिल में कमी के साथ केंद्र एवं राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

    प्रदेश में कुल 52 लाख 28 हजार घरेलू उपभोक्ता हैं, जिनमें से 47 लाख से अधिक उपभोक्ता मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ ले रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 200 यूनिट से कम मासिक खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या 41.40 लाख, 200 से 400 यूनिट वाले उपभोक्ताओं की संख्या 6.85 लाख तथा 400 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या 2.71 लाख थी। वर्ष 2026-27 में क्रमशः इनकी संख्या 42.40 लाख, 7.34 लाख और 2.56 लाख है। इस प्रकार विगत वर्ष की तुलना में मासिक खपत में अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई है, यह सामान्य वार्षिक ग्रोथ के अनुसार ही है। खपत की वृद्धि स्मार्ट मीटर और गैर स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं में एक ही अनुपात में है। 

    स्मार्ट मीटर से खपत में कोई अवांछित वृद्धि नहीं: मई 2025 से जुलाई 2026 तक के विभिन्न महीनों के आंकड़ों एवं विश्लेषण से यह निष्कर्ष सामने आया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण उपभोक्ताओं की बिजली खपत में किसी भी प्रकार की अवांछित वृद्धि नहीं हुई है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अधिक विद्युत बिल आने की शिकायत है, तो उसके परिसर में चेक मीटर लगाने का भी प्रावधान है।

    स्मार्ट मीटर लगाने का प्रावधान:-

    स्मार्ट मीटर लगाने हेतु छत्तीसगढ़ में 13 जुलाई 2022 को डी.पी.आर. स्वीकृत किया गया, इसका टेंडर 11 अप्रैल 2023 को प्रकाशित किया गया। मई 2023 में कंपनियों को प्रदेश में 55 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का एल.ओ.ए. जारी किया गया। वर्तमान में लगभग 43 लाख उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 7,780 उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया गया है। इन सभी परिसरों में चेक मीटर और स्मार्ट मीटर में दर्ज खपत का अंतर निर्धारित मानक सीमा के भीतर ही पाया गया है।

    केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम 2026 के अनुसार सभी उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य किया गया है।

    उपभोक्ताओं को मिल रही ऊर्जा राहत: घरेलू क्षेत्र में जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना के तहत 200 यूनिट की खपत पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। प्रदेश में लगभग 15 लाख बीपीएल (एलपीएस) श्रेणी के उपभोक्ता हैं, जिन्हें 30 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है। 31 से 100 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना के तहत अतिरिक्त छूट/सहायता भी दी जा रही है।

    सूर्यघर योजना से बिजली बिल में कमी: पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं को दोहरा लाभ मिल रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग शून्य अथवा अपेक्षाकृत काफी कम हुआ है। योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 3 किलोवाट क्षमता के प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर प्लांट की लागत राशि की व्यवस्था के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा 6 प्रतिशत से भी कम ब्याज दर पर 2 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

    अब तक पीएम सूर्यघर योजना के तहत प्रदेश के लाभार्थी उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार द्वारा 661 करोड़ रुपये तथा राज्य सरकार द्वारा 225 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 11 हजार 713 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 35 हजार से अधिक सोलर उपभोक्ताओं के बिल जीरो आ रहें हैं। पिछले वर्ष की तुलना में 60 हजार से अधिक लाभार्थी उपभोक्ता मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ ले रहे हैं।

    पीएम सूर्यघर योजना के प्रति बढ़ते रुझान के चलते प्रदेश में अब प्रतिदिन 500 से अधिक सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। ऐसे उपभोक्ता जो 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत के कारण मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे, वे भी तेजी से सूर्यघर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाकर योजना की सब्सिडी के साथ मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का दोहरा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अनेक उपभोक्ताओं के सोलर प्लांट लगने से उनके बिजली बिल में कमी आई है और वे निचले वाले स्लैब में शिफ्ट हुए हैं। इससे 200 यूनिट और 400 यूनिट खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है।

    इस प्रकार राज्य सरकार विद्युत उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण और ऊर्जा सुधार के लिए लगातार कार्य कर रही है। उपभोक्ता सेवा में पारदर्शिता बढ़ाने तथा सेवाओं को अधिक सुविधायुक्त बनाने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    प्रदेश में मासिक खपतवार घरेलू उपभोक्ता विवरण निम्नानुसार हैः-

    मासिक खपत यूनिट

    200 से कम

    200 – 400

    400 से अधिक

    उपभोक्ता संख्या (लाख में) वर्ष जुलाई 2025 – 26

    41.4

    6.85

    2.71

    उपभोक्ता संख्या (लाख में) वर्ष जुलाई 2026 – 27

    42.4

    7.34

    2.56

    निष्कर्षः- 400 यूनिट से अधिक मासिक खपत करने वाले उपभोक्ता पी.एम. सूर्य घर योजना के तहत सोलर प्लांट लगा कर 400 यूनिट से कम खपत के दायरे में शामिल हुए हैं एवं 200 से 400 यूनिट वाले स्लैब के उपभोक्ता 200 से कम यूनिट वाले स्लैब में आ गए हैं।

     

  • लखनऊ में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही, 18,957 शिकायतें बिना समाधान बंद; हजारों उपभोक्ताओं ने कराईं री-ओपन

    लखनऊ में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही, 18,957 शिकायतें बिना समाधान बंद; हजारों उपभोक्ताओं ने कराईं री-ओपन

    लखनऊ 
    लाखों घरों पर लगे बिजली के स्मार्ट मीटरों ने एक बार फिर लोगों को छकाया है। प्रीपेड से पोस्ट पेड हो चुके इन स्मार्ट मीटरों से राहत मिलने की जगह लोगों को आफत झेलनी हो रही है। एक बार फिर हजारों लोगों की बिजली अचानक कट गई। इस बिजली कट के पीछे बिल बकाया होना कारण बताया गया। राजधानी लखनऊ में लेसा ने करीब 5 हजार स्मार्ट मीटर वाले बिजली कनेक्शन काट दिए। इस दौरान लखनऊ सेंट्रल में करीब 3500 से अधिक परिवार प्रभावित हुए। बिजली कनेक्शन कटते ही अफरातफरी मच गई।

    हुसैनगंज, अमीनाबाद और चौक सहित कई बिलिंग केंद्रों पर बकाया बिल जमा करने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। बिल का पूरा भुगतान करने के बावजूद तकनीकी खामियों के चलते ऑटोमैटिक प्रणाली से बिजली कनेक्शन चालू नहीं हो सके। घंटों तक बिजली न आने से परेशान उपभोक्ता बर्लिंगटन चौराहे स्थित ओल्ड 1912 उपकेंद्र और लेसा कार्यालय पहुंच गए। वहां बिजली आपूर्ति बहाल न होने से नाराज लोगों ने विरोध जताया।

    तुरंत काटने की सुविधा तो तुरंत जुड़ता क्यों नहीं
    इस दौरान उपभोक्ताओं और लेसा कर्मचारियों के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई। उपभोक्ताओं का कहना था कि जब स्मार्ट मीटर तकनीक के जरिए तुरंत कनेक्शन काटने की सुविधा है, तो बिल जमा होने के बाद तुरंत आपूर्ति चालू क्यों नहीं की जा रही है? इससे कई उपभोक्ताओं के कनेक्शन देर रात तक नहीं जुड़ सके। उमस भरी गर्मी में बच्चे, बुजुर्ग और मरीज घंटों बिना बिजली के रहने को मजबूर रहे। वहीं इस मामले में लेसा अधिकारियों का कहना है कि ईईएसएल मीटर में तकनीकी कारणों से री-कनेक्शन प्रक्रिया में थोड़ा समय लगा।

    समस्याओं के निस्तारण में घोर लापरवाही
    राजधानी में बिजली समस्याओं के समाधान को लेकर लेसा का लचर रवैया एक बार फिर उजागर हुआ है। मध्यांचल विद्युत निगम के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर मिले उपभोक्ता फीडबैक की समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जनसमस्याओं के निस्तारण में घोर लापरवाही बरती जा रही है।

    विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों ने कुल 18,957 शिकायतों का बिना किसी जमीनी समाधान के ही फर्जी निस्तारण दर्ज कर दिया। कागजी खानापूरी के इस खेल में अमौसी जोन के उपभोक्ता सबसे अधिक परेशान और खफा नजर आए।

    ज्यादातर मामलों में विभागीय कर्मियों ने उपभोक्ताओं से बिना कोई संपर्क किए और बिना तकनीकी खराबी दूर किए ही शिकायतों को पोर्टल पर क्लोज (बंद) दिखा दिया। इस फर्जीवाड़े से नाराज उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मजबूरी में शिकायतें दोबारा ‘रि-ओपन’ करानी पड़ीं। आंकड़ों के मुताबिक, अमौसी जोन में सबसे ज्यादा 6,892 मामले रि-ओपन हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में शिकायतों को लेकर लीपापोती की गई है। जानकीपुरम जोन में 6,014 और गोमतीनगर जोन में 5,927 मामले दोबारा दर्ज किए गए। लखनऊ सेंट्रल जोन की स्थिति बेहतर रही, 124 शिकायतें ही रि-ओपन हुई हैं।

    अमौसी जोन के मुख्य अभियंता राम कुमार के अनुसार अधिकारियों को निर्देश हैं कि शिकायतों का नियम संगत निस्तारण करें। फर्जी तरीके से निस्तारण किया है तो पूरे प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

    बिजली सप्लाई से लेकर स्मार्ट मीटर की शिकायत
    उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों में मुख्य रूप से अनियोजित बिजली कटौती, सप्लाई में खराबी, गलत और बढ़े हुए बिजली बिल, मीटर से जुड़ी तकनीकी कमियां तथा नए स्मार्ट मीटरों से उत्पन्न आ रही परेशानियां शामिल हैं। निगम स्तर पर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद जब उपभोक्ता से फीडबैक लिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निस्तारण के ही केस क्लोज दिखाया जा रहा है। उच्चाधिकारियों ने लापरवाही बरतने वाले अफसरों और कर्मियों को चेतावनी देते हुए सभी रि-ओपन मामलों का प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शी समाधान करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

  • स्मार्ट मीटर विवाद गहराया, जांच रिपोर्ट और लैब की मान्यता पर घमासान

    स्मार्ट मीटर विवाद गहराया, जांच रिपोर्ट और लैब की मान्यता पर घमासान

    लखनऊ

     स्मार्ट मीटर की जांच मामले में नियामक आयोग ने मध्यांचल एमडी को नोटिस जारी करके दस दिनों में जवाब मांगा है। यह नोटिस नियामक आयोग में दर्ज शिकायत पर जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि मध्यांचल की हाईटेक लैब के पास स्मार्ट मीटर जांचने का लाइसेंस नहीं है। आयोग ने इस पर मध्यांचल से स्पष्टीकरण मांगा है।

    स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर आ रहीं शिकायतों की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पावर कॉरपोरेशन ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। मीटरों की जांच मध्यांचल की हाईटेक लैब में हुई और मीटरों की गुणवत्ता पर अंतरिम रिपोर्ट भी सरकार को दे दी गई। इसके बाद सवाल उठे कि यह लैब तो स्मार्ट मीटर की जांच करने के लिए अधिकृत ही नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर नियामक आयोग में शिकायत की कि लैब के पास एनएबीएल द्वारा इंडियन स्टैंडर्ड 16444 (स्मार्ट मीटर) की जांच का लाइसेंस नहीं है। ऐसे में गंभीर सवाल है कि स्मार्ट मीटर की जांच कैसे की गई? उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सभी मीटरों में एक समान पैरामीटर तो लैब में जांचे जा सकते हैं, लेकिन स्मार्ट मीटर के संवेदनशील पैरामीटर की जांच नहीं हो सकती।

    स्मार्ट मीटर पर लगातार घेर रहा विपक्ष
    बता दें कि स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों पर उत्तर प्रदेश में विपक्ष भी लगातार सरकार को घेर रहा है। खासतौर से समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव इस पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश के फतेहपुर जिले में गुरुवार को समाजवादी पार्टी पार्टी लोहिया वाहिनी के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित नौ सूत्रीय ज्ञापन भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग की। सपा लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष मो.आजम खान की अगुवाई में अन्य फ्रंटल संगठनों के कई कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।

    पोस्टपेड किए गए स्मार्ट मीटर
    वहीं सरकार के आदेश के बाद अब प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को पोस्ट पेड किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अलीगढ़ में बिजली विभाग ने सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड मोड में अपडेट कर दिया है। अब उपभोक्ताओं को पहले की तरह हर महीने बिजली का बिल मिलेगा और उसी आधार पर भुगतान करना होगा। जून के शुरुआती हफ्ते में स्मार्ट पोस्टपेड मीटर का पहला मासिक बिल जारी किया जाएगा जिसमें बिजली उपयोग का विवरण भी होगा। बिजली विभाग की ओर से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक शिविर लगाकर उपभोक्ताओं को नई व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है।

  • अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूली का फैसला वापस, 83 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूली का फैसला वापस, 83 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

     लखनऊ

    यूपी के लखनऊ के मीटर रीचार्ज करने के बाद भी दो घंटे तक कनेक्शन न जुड़ने के मामले में नियामक आयोग पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी में है। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं। नेगेटिव बैलेंस की वजह से स्मार्ट मीटर के कनेक्शन कटने के बाद अगर उपभोक्ता मीटर रीचार्ज करवाता है तो उसके अधिकतम दो घंटे के भीतर कनेक्शन जुड़ने का प्रावधान है। अन्यथा उपभोक्ता मुआवजे का हकदार है।

    स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदले जाने के बाद मार्च से पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था लागू कर दी थी। इसके तहत नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट रहे थे। उसी दरम्यान तमाम उपभोक्ताओं ने मीटर रीचार्ज करने के बाद कई घंटे तक कनेक्शन दोबारा न जुड़ने की शिकायत की थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही शिकायतों के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर करते हुए तय मियाद में कनेक्शन न जुड़ने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलवाने की मांग की थी। आयोग अब इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले में पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना अनिवार्य तौर पर लगाया जाएगा।

    अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी का फैसला वापस
    स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में बदलने के बाद उपभोक्ताओं से नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने का फैसला पावर कॉर्पोरेशन ने वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं की पहले से जमा सुरक्षा राशि ही मान्य होगी और उन्हें नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार अतिरिक्त पैसा नहीं देना पड़ेगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के विरोध के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात अपना आदेश संशोधित किया।

    दरअसल, जब पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर में बदला गया था, तब उपभोक्ताओं की जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड खाते में एडजस्ट कर दिया गया था। बाद में दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर नई दरों के अनुसार अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी मांगी जा रही थी। इसका असर करीब 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ता। उपभोक्ता परिषद ने इसे गलत और नियमों के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद कॉर्पोरेशन को फैसला वापस लेना पड़ा।

    हेल्पलाइन और व्हाट्सएप नंबर जारी
    उधर, उपभोक्ता अपना बिल प्राप्त करने और सहायता के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7859804803 का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है, वे उसे तुरंत अपडेट करा लें जिससे समय पर बिल और सूचनाएं मिल सकें।

  • प्रीपेड मीटर विवाद पर सरकार बैकफुट, उपभोक्ताओं को राहत और किस्तों में जमा होगी सिक्योरिटी

    प्रीपेड मीटर विवाद पर सरकार बैकफुट, उपभोक्ताओं को राहत और किस्तों में जमा होगी सिक्योरिटी

    लखनऊ

    यूपी में जिले-जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर मचे घमासान के बीच यूपी की योगी सरकार ने इस व्यवस्था को ही खत्म कर दिया है। अब स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। पहले से जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें पोस्ट पेड कर दिया जाएगा। सीएम योगी के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसे लेकर ऐलान किया और साथ ही नए नियमों के बारे में बताया है। अब हर महीने की 10 तारीख को बिजली का बिल आएगा। इसे जमा करने के लिए 15 दिनों यानी 25 तारीख तक का समय होगा। एक राहत यह भी है कि यदि एक महीने का बकाया होगा तो बिजली नहीं कटेगी। पुराने बिजली बिलों के बकाये के लिए भी व्यवस्था बना दी गई है। इसे अब किस्तों में जमा किया जा सकेगा। इसके साथ ही सिक्योरिटी मनी भी अब जमा करनी होगी। इसे भी किस्त में जमा करने की व्यवस्था कर दी गई है। हालांकि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ज्यादा बिल आने की शिकायतों का क्या होगा? इस पर अभी कुछ नहीं कहा गया है।

    समय से न मिले बिल तो यहां करें शिकायत
    ऊर्जा मंत्री न कहा कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिल हर महीने की 10 तारीख तक दिए जाएंगे। बिल मिलने की तारीख से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। जिन स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय से बिल न मिले वे वितरण कंपनियों के नंबर पर कनेक्शन नंबर बताकर बिल प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करके भी बिल प्राप्त किए जा सकेंगे। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को बिल संबंधी किसी भी समस्या के निपटारे के लिए खंड और उपखंड स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे।

    पूर्वांचल – 8010968292;

    मध्यांचल – 7669003409;

    पश्चिमांचल – 7859804803

    दक्षिणांचल – 8010957826

    केस्को – 8287835233
    चार किस्तों में जमा करवाई जाएगी सिक्योरिटी

    पोस्टपेड मीटर में कनेक्शनधारकों से सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जाती है जबकि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि नहीं देनी होती है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड में बदले गए उनकी सिक्योरिटी राशि वापस कर दी गई थी। अब जब दोबारा प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदला जाएगा तो उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि सिक्योरिटी राशि एकमुश्त न जमा करवाकर चार किस्तों में जमा करवाई जाए ताकि उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न आए।

    अब लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग
    प्रीपेड मीटर की जबरिया लगाने के खिलाफ मुखर रहे अवधेश कुमार वर्मा ने प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने मीटर उखाड़कर फेंकने वाले उपभोक्ताओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर पावर कॉरपोरेशन ने पहले ही नियम के मुताबिक फैसला ले लिया होता तो ऐसी घटना नहीं होती।

    यूपी में जबरिया लगाए जा रहे थे प्रीपेड मीटर
    पिछले संसद सत्र के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया था कि मीटर प्रीपेड होगा या पोस्टपेड यह चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं का है। विद्युत अधिनियम – 2003 की धारा 47 (5) में यही व्यवस्था है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भी अधिसूचना जारी करके मीटरों के प्रीपेड मोड में होने की बाध्यता समाप्त कर दी थी।इसके बाद भी यूपी में लोगों के घरों पर जबरिया प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। अचानक रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे जिले-जिले आक्रोश फैल रहा था। इस आक्रोश के कारण ही चुनावी साल में सरकार किसी तरह का खतरा मोल लेना नहीं चाह रही थी। अंततः सोमवार को प्रीपेड की व्यस्था खत्म करने का ऐलान कर दिया गया।

  • स्मार्ट मीटर ने किया दुकानदार को परेशान, 7 दिन में 5 बार भरा बिल फिर भी कटी बिजली, अब विभाग को कोर्ट घसीटने की तैयारी

    स्मार्ट मीटर ने किया दुकानदार को परेशान, 7 दिन में 5 बार भरा बिल फिर भी कटी बिजली, अब विभाग को कोर्ट घसीटने की तैयारी

    महराजगंज
    महराजगंज जिले के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई।

    बिजली विभाग को दुकानदार ने भेजा 1.69 लाख का नोटिस, अफसर दंग; जानें पूरा मामला
     आपने अक्सर बिजली विभाग से उपभोक्ताओं को नोटिस जारी होते देखा-सुना होगा। लेकिन उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्मार्ट मीटर की बीलिंग व्यवस्था से परेशान एक कामर्शियल उपभोक्ता ने बिजली विभाग को 1.69 लाख रुपये के नुकसान का नोटिस भेज दिया है। नोटिस देखकर बिजली विभाग के अधिकारी दंग रह गए हैं। उपभोक्ता का आरोप है कि विभागीय तकनीकी खामी और बिल अपडेट में देरी के कारण उसे सात दिन में पांच बार बिल जमा करना पड़ा, बावजूद इसके बिजली आपूर्ति बाधित रही।

    महराजगंज जिले के धनेवा-धनेई चौराहे के दुकानदार अजय गुप्ता ने बताया कि उनके दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा है। 23 मार्च को बिल जमा करने गए तो सर्वर खराबी के कारण भुगतान नहीं हो सका। अगले दिन 24 मार्च को वेबसाइट पर दिख रहे 8618 रुपये का भुगतान किया। इसके बावजूद 26 मार्च को अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो गई।

    शिकायत करने पर विभाग ने 5444 रुपये बकाया बताया, जिसे 29 मार्च को जमा किया गया। इसके बाद भी मीटर में बार-बार माइनस बकाया दिखता रहा।उपभोक्ता को 1500 रुपये और फिर 500 रुपये अतिरिक्त जमा करने पड़े। इसके बाद 30 मार्च को आपूर्ति बहाल हो सकी।

    दुकानदार का कहना है कि चार दिन बिजली गुल रहने से दुकान में रखा दूध, पनीर व खोया खराब हो गया, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उपभोक्ता ने कहा कि यदि पहली बार में सही बिल प्रदर्शित होता तो न तो बार-बार भुगतान करना पड़ता और न ही यह नुकसान होता।

    इस मामले में अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी के माध्यम से एक्सईएन को नोटिस भेजकर 15 दिन के भीतर 1.69 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर उपभोक्ता फोरम में वाद दाखिल किया जाएगा, जिसमें विभाग को नोटिस खर्च और अधिवक्ता फीस भी वहन करनी होगी।