Tag: Shardiya Navratri

  • बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश

    बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश

    रायपुर.
    शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। नवरात्र के प्रथम दिन कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए निर्मित शौचालय बेटियों के सम्मान की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत कोरबा जिले के पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत दादरकला में बालिका शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में पूर्ण हुए ये निर्माण कार्य इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।

    ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ के संदेश से सजे बालिका शौचालय
    ग्राम पंचायत नोनबिर्री एवं दादरकला में निर्मित बालिका शौचालय को आकर्षक गुलाबी रंग और सुंदर चित्रकारी से सजाया गया है। भवन की दीवार पर बड़े अक्षरों में ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ का संदेश अंकित है। इसके साथ ही ‘स्वच्छ रहें, सुरक्षित रहें’ का संदेश भी दिया गया है। शौचालय के सामने खड़ी स्कूली बालिकाओं ने वीबी-जी रामजी के अक्षरों और स्वच्छता के प्रतीकों के माध्यम से योजना के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बालिकाओं की यह सहभागिता दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बेटियों के आत्मसम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।

    नवरात्र में मातृशक्ति के सम्मान का साकार रूप
    नवरात्र का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना विशेष महत्व रखता है। विद्यालयों में अलग बालिका शौचालय की उपलब्धता छात्राओं की निजता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेष रूप से किशोरावस्था में बालिकाओं के लिए ऐसी सुविधाएं उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

    प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में लगभग 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

  • महाअष्टमी या महानवमी, किस दिन होगी पूजा? 2026 नवरात्र की तिथियों का पूरा कंफ्यूजन दूर

    महाअष्टमी या महानवमी, किस दिन होगी पूजा? 2026 नवरात्र की तिथियों का पूरा कंफ्यूजन दूर

    शारदीय नवरात्र में इस बार महाष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. खासकर उन लोगों के बीच जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या फिर नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं। 

    कई परिवारों में अष्टमी की पूजा की परंपरा है, तो कई घरों में नवमी की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है. ऐसे में सवाल है कि इस बार अष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना चाहिए? महानवमी की पूजा कब होगी? कन्या पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा? और संधि पूजा का मुहूर्त क्या है? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि महा अष्टमी और महा नवमी की तिथि के बारे में। 

    19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा

    इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी. इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। 
    अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें। 

    कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं. कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए। 

    रात में अष्टमी पूजा की परंपरा है तो क्या करें?
    कुछ परिवारों में महाष्टमी की पूजा रात्रि में करने की परंपरा होती है. खासकर कुछ परिवारों में कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है. ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। 

    महानवमी की पूजा कब होगी?
    19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। 

    अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं। 

    यानी 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है। 

    20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन
    कुछ लोग उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे लोग 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं. हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी. इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए. इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। 

    महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?
    जिन लोगों के यहां महानवमी का व्रत रखने की परंपरा है, वे नवमी के दिन यानी 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं. नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है। 

    संधि पूजा का शुभ मुहूर्त
    इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा. यह कुल 48 मिनट का समय होगा. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है. इसी दौरान संधि पूजा की जाती है। 

    शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था. इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को कमल पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।