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  • ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, सिंधिया परिवार के महासमझौते पर आज अदालत में सुनवाई

    ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, सिंधिया परिवार के महासमझौते पर आज अदालत में सुनवाई

    ग्वालियर

    सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है।अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को अंतरिम आवेदन व आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। सात दिन पहले भी आवेदनों पर बहस हुई थी।

    बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट तय करेगी कि आगे की सुनवाई की दिशा क्या रहेगी। मतलब आज साफ हो जाएगा कि अंतरिम आवेदनों पर आगे की सुनवाई की जाएगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार कर साक्ष्य पर यह सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। बुधवार शाम तक सिंधिया राजघराने की पूरे देश में फैली संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है।

    एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप

    इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी। प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था।

    प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राजे की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं।

    हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।साथ ही इस धोखाधड़ी के आरोप पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पक्ष आया था कि हस्ताक्षर सहमति से ही हुए हैं। इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है।

    पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका
    वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था।

    लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

    पर अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

    पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद

    ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प और उलझते मोड़ पर पहुंच गई है।

    इस ऐतिहासिक केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है।

    दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।

  • मल्टीलेवल कार पार्किंग का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री सिंधिया

    मल्टीलेवल कार पार्किंग का जायजा लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री सिंधिया

    केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने राज्य के मंत्रिगणों के साथ मल्टीलेवल कार पार्किंग का किया निरीक्षण 

    पानी निकासी के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी अध्ययन कराया जाए 

    ग्वालियर 
     केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर के प्रमुख केंद्र महाराजा बाड़ा में बन रहे मल्टीलेवल कार पार्किंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति, निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा विशेष रूप से बेसमेंट-3 में पानी की समस्या और उसकी निकासी की व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी, सीईओ स्मार्ट सिटी प्रतीक राव सहित जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि विकास कार्यों में गति जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता और निर्माण की सावधानियों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बेसमेंट-3 में पानी की निकासी के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे विषय का समग्र एवं तकनीकी अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि पानी के आउटलेट और निकासी व्यवस्था का ऐसा स्थायी एवं सुरक्षित समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को इस विषय की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि महाराजा बाड़ा मल्टीलेवल कार पार्किंग ग्वालियर के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत विकसित की जा रही इस परियोजना से महाराजा बाड़ा क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में आवश्यक गति लाने के साथ गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए।
        परियोजना के तहत लगभग 77 करोड़ रुपये की लागत से 429 वाहनों की पार्किंग क्षमता विकसित की जा रही है। इसमें 353 चार-पहिया और 76 दो-पहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी।
        केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने निर्देश दिए कि बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर का कार्य जनवरी-फरवरी 2027 तक पूरा करने की दिशा में प्रभावी ढंग से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूर्ण हो सके। उन्होंने कहा कि पानी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई जा रही राशि का सदुपयोग करते हुए ऐसी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनका लाभ लंबे समय तक आम नागरिकों को मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का अंतिम उद्देश्य जनता की सेवा, बेहतर सुविधाएं और ग्वालियर का सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना है। 
     

  • सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आज कोर्ट में बड़ा फैसला

    सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आज कोर्ट में बड़ा फैसला

     ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में गुरुवार को जिला कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। अदालत में प्रतिमा देवी की ओर से दर्ज आपत्ति और पूर्व में तैयार किए गए समझौते की वैधता पर बहस होनी है।

    वसीयत और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी नहीं दी गई
    पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ कोर्ट पहुंची थीं और उन्होंने कहा था कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे सिंधिया संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर समझौता नहीं किया जा सकता।

    गलत पते पर नोटिस भेजने का आरोप
    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नेपाल के गलत पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एकतरफा कार्रवाई से बाहर किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

    अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं
    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से पहले ही प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब पेश किया जा चुका है। इन पक्षों की ओर से कहा गया है कि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और अंतिम चरण में आपत्ति उठाने का औचित्य स्पष्ट नहीं है। गुरुवार की सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों से यह तय होगा कि संपत्ति विवाद के समझौते पर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 
    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    कौन हैं प्रतिमा देवी और कनिका देवी?
    प्रतिमा देवी और कनिका देवी, ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की सबसे बड़ी बेटी स्वर्गीय पद्मावती राजे की संतानें हैं.महाराजा जीवाजीराव सिंधिया की पांच संतानें थीं। 

    त्रिपुरा राजपरिवार से संबंध: पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के तत्कालीन राजपरिवार के महाराजा किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा बहादुर से हुआ था. वर्ष 1965 में कम उम्र में ही पद्मावती राजे का निधन हो गया था। 

    नेपाल के राणा परिवार से जुड़ाव: प्रतिमा देवी का विवाह नेपाल के प्रतिष्ठित राणा परिवार के डॉ. धवल शमशेर राणा से हुआ है। 

    क्या था ‘काबिज़ वही मालिक’ का फॉर्मूला?
    बता दें कि सिंधिया राजघराने की अचल संपत्तियों  जिनमें ग्वालियर का ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, मुंबई के सिंधिया हाउस, दिल्ली में सिंधिया की अलग-अलग प्रॉपर्टी सहित देश भर के प्रमुख शहरों में फैली कोठियां और जमीनों की विशाल संपत्तियां शामिल हैं के अधिकार को लेकर विभिन्न अदालतों में करीब 12 मामले लंबित चल रहे हैं। 

    इसी संदर्भ में बीते दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के बीच जो समझौता ड्राफ्ट हुआ था, उसका मुख्य आधार “जो सदस्य जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज है, वही उसका अंतिम मालिक रहेगा” तय किया गया था.इस फॉर्मूले के तहत ग्वालियर के ऐतिहासिक जय विलास पैलेस, शिवपुरी की कोठियों, मुंबई के सिंधिया हाउस और दिल्ली स्थित सिंधिया पॉटरीज की जमीनों के मालिकाना हक का निपटारा होना था। 

    यदि यह समझौता मंजूर हो जाता, तो देश की अलग-अलग अदालतों में लंबित करीब 12 मुकदमे एक साथ खत्म हो जाते. हालांकि इन मुकदमों में से एक में प्रतिमा देवी और कनिका देवी अपनी दिवंगत मां पद्मावती राजे के कानूनी उत्तराधिकार के तहत पहले से ही पक्षकार हैं. हालांकि जिस 40 हजार करोड़ रुपये के संपत्तियों के राजीनामे का प्रारूप तैयार किया गया था, उसमें पद्मावती राजे के वारिसों को शामिल नहीं किया गया था. इसी कारण दोनों बहनों ने अदालत पहुंचकर समझौते की प्रक्रिया पर रोक लगाने और अपना हिस्सा तय करने की मांग की है.अब अगली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दशकों पुराना यह शाही संपत्ति विवाद समझौते से सुलझता है या नए कानूनी पचड़े में फंसकर लंबा खींचता है।

     

  • सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर नया विवाद, प्रतिमा देवी ने वसीयत में बराबर हिस्से का किया दावा

    सिंधिया राजघराने की संपत्ति पर नया विवाद, प्रतिमा देवी ने वसीयत में बराबर हिस्से का किया दावा

    ग्वालियर
     सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी पहली बार अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ जिला न्यायालय पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में मौजूद रहीं प्रतिमा देवी ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

    प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की प्रति भी उनके पास नहीं है। उन्होंने मुंबई की एक अदालत में उपलब्ध वसीयत की कॉपी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी के माध्यम से उन्हें कुछ जानकारी मिल सकी। उन्होंने संपत्ति में बराबर का अधिकार दिए जाने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।

    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर उठाए सवाल
    प्रतिमा देवी ने नोटिस को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उन्हें नेपाल के नेपालगंज पते पर नोटिस भेजे गए, जबकि उनका निवास काठमांडू में है। इस वजह से उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला और उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया। उन्होंने अपनी छोटी बहनों का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे भी अपनी मां के हिस्से पर दावा कर रही हैं। यहां बता दें कि प्रतिमा देवी सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे की बेटी हैं।

    नेपाल के पते पर नोटिस भेजने पर भी आपत्ति
    प्रतिमा देवी ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मामले से जुड़े नोटिस कभी प्राप्त नहीं हुए। उनके मुताबिक नोटिस नेपालगंज के ऐसे पते पर भेजे गए, जहां वह रहती ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं और उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास है।

    उन्होंने अपनी तीन छोटी बहनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े सभी पक्षों को उचित तरीके से सूचना दिए बिना संपत्ति के मामले में समझौता नहीं किया जा सकता। प्रतिमा देवी ने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

    अधिवक्ता ने मांगा समय 
    प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत से विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 तय की है। इस दिन प्रतिमा देवी की आपत्ति और संपत्ति विवाद के समाधान के लिए तैयार किए गए समझौते की वैधता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।

    वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ एवं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अधिवक्ता अदालत पहुंचे। उनके वकीलों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा।

    बंटवारे में शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति
    बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच संपत्तियों के बंटवारे का विवाद चल रहा है। सभी पक्षों के बीच बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी थी। सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे के लिए हुए आपसी समझौते (आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट) में प्रतिमा देवी को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले में कानूनी विवाद बढ़ गया।

    10 सितंबर को अगली सुनवाई
    पिछली सुनवाई पर प्रतिमा देवी के आवेदन पर सभी पक्षों ने जवाब पेश कर दिए थे। मंगलवार को इन आवेदनों पर बहस होनी थी, लेकिन सभी पक्ष बहस के लिए तैयार नहीं थे। इसके चलते बहस नहीं हो सकी। अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। ज्ञात हो कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से प्रतिमा देवी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग भी की गई है। इन आवेदनों पर भी अगली सुनवाई में बहस होगी।

    पिछली सुनवाई में ये हुआ था
    वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बंटवारे की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी की मौजूदगी और उनकी लिखित सहमति रिकॉर्ड में है, दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। बंटवारे के दौरान हस्ताक्षर किए जाने का फोटो भी कोर्ट में पेश किया गया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी जवाब पेश किया जा चुका है, जिसमें कहा गया है कि बंटवारा कानून के तहत हुआ है।

    पहले की सहमति पर भी उठे थे सवाल
    इससे पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब अदालत में पेश किया गया था। जवाब में कहा गया था कि यदि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है।

    पिछली सुनवाई में बंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सभी पक्षों को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और आगे से दस्तावेज बंद लिफाफे में पेश नहीं किए जाएं।

    मां के हिस्से का हवाला देकर मांगा अधिकार
    प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां दिवंगत पद्मावती राजे, जो राजमाता विजयाराजे सिंधिया की सबसे बड़ी पुत्री थीं, संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर किया गया कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद सिंधिया राजघराने की विशाल संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर पेचीदा हो गई है। अब 10 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत उनकी आपत्तियों और समझौते की वैधता को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ती है।