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  • छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    छत्तीसगढ़ कोल लेवी केस: ₹104 करोड़ के लेनदेन को लेकर बड़ा खुलासा, कांग्रेस कार्यालय का नाम आया सामने

    रायपुर

     ईओडब्ल्यू ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कोल लेवी घोटाले में सोमवार को विशेष अदालत में छठा पूरक आरोप पत्र दाखिल कर कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से वसूले गए अवैध लेवी के 104.20 करोड़ रुपये रायपुर स्थित राजीव भवन (प्रदेश कांग्रेस कार्यालय) पहुंचाए गए। यह रकम तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक भेजी गई थी।

    जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की आनलाइन ई-परमिट प्रणाली में बदलाव कर जिला खनिज अधिकारी (डीएमओ) का मैन्युअल अनुमोदन अनिवार्य किया गया। इसके बिना डीओ जारी होना बंद कर दिया गया और परिवहन पर रोक लगा दी गई। इसी प्रशासनिक शिकंजे की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से अवैध कोयला लेवी की वसूली शुरू हुई। वसूली का मुख्य सूत्रधार सूर्यकांत तिवारी था, जो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) और वरिष्ठ अफसरों के नाम का दुरुपयोग कर पूरा सिंडिकेट चला रहा था।

    किसे कितनी मिली अवैध रकम

    रामगोपाल अग्रवाल (तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष): डायरियों में दर्ज 'भवन' और 'सी पार्टी' कोडवर्ड की 32 प्रविष्टियों के जरिए कुल 104.20 करोड़ रुपये स्वीकार करने का आरोप।

    देवेंद्र सिंह यादव (पूर्व विधायक, भिलाई नगर): खैरागढ़ उपचुनाव और व्यक्तिगत उपयोग के लिए सहयोगी नवाज के माध्यम से 3 करोड़ रुपये लेने का विवरण।

    चंद्रदेव प्रसाद राय (पूर्व विधायक, बिलाईगढ़): नकद रकम और चुनावी खर्च के अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा दिए गए लाखों रुपये के सोने के आभूषण प्राप्त किए।

    जयप्रकाश मौर्य (तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म):सिंडिकेट को मदद पहुंचाने और पैलेट उद्योगों पर 100 रुपये प्रति टन वसूली के लिए दबाव बनाने के एवज में आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

    विनोद तिवारी व रामप्रताप सिंह (कांग्रेस नेता): राजनीतिक प्रभाव और समन्वय के लिए क्रमशः 2.12 करोड़ रुपये और अन्य लेन-देन में सहभागिता के साक्ष्य।

    राजीव भवन में रकम आने और राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी
    चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने वाले लोगों के बयानों में कैश से भरा बैग राजीव भवन ले जाकर देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात है। देवेंद्र डडसेना, राम गोपाल अग्रवाल के निजी सहायक के रूप में काम करता था और राजीव भवन में उनके कक्ष के पास बैठता था। राजीव भवन में देवेंद्र डउसेना के साथ कार्यरत कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए।

    रूपेंद्र यादव और सोहन साहू ने बताया कि उन्होंने कई बार भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और देवेंद्र डडसेना के कमरे में रखे जाते देखे। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8-10 बैग आने और कई बार उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। सोहन साहू ने एक गाड़ी के नंबर में “0009” अंक होने और सफेद स्विफ्ट डिजायर का जिक्र किया।

    बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के उस हिस्से को बंद करने और कर्मचारियों को वहां से हटाने की बात भी सामने आई है। शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव ने बताया कि राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना उस समय कार्यालय में मौजूद थे। उन्होंने उस हिस्से को बंद किए जाने और बैगों के बारे में बाद में मिली जानकारी भी दी।

    शेल कंपनियों और अचल संपत्तियों में निवेश

    जांच में सामने आया कि अवैध वसूली की रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पियूष साहू, सौम्या चौरसिया के रिश्तेदार अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल (इंद्रमणि समूह) व जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। फर्जी लोन,राइस मिलों के खातों और शेल कंपनियों के जरिए 10.77 करोड़ से अधिक की बैंक एंट्री कराई गई तथा बेनामी जमीनें, वाशरी और फ्लैट खरीदे गए।
    व्हाट्सएप चैट व डायरियों से खुले राज

    ईओडब्ल्यू ने जब्त हस्तलिखित डायरियों, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट्स और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को पुख्ता साक्ष्य बनाया है। डायरियों में दर्ज 'डी','आरपी', 'जेपी', 'चंद्रा', 'भगत' और 'एमयू' जैसे कोडवर्ड की पहचान जांच के दौरान उजागर हो चुकी है।
    चालान में शामिल आरोपियों की भूमिका

    1. राम गोपाल अग्रवाल

    राम गोपाल अग्रवाल संबंधित अवधि में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्क्ष एवं छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जब्त डायरियों में ‘‘भवन’ एवं "C PARTY" के नाम से 32 प्रविष्टियों में कुल ₹104.20 करोड़ (एक सौ चार करोड़ बीस लाख रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में यह रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने तथा देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं। उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के नाम भूमि खरीदी और रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान का विवरण भी चालान में शामिल है।

    2. देवेन्द्र सिंह यादव

    भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव एवं उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से संबंधित 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹3 करोड़ ;तीन करोड़ रुपयेद्ध दर्ज हैं। इनमें खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने तथा उसका उपयोग चुनाव संबंधी कार्यों और स्वयं के लिए करने में देवेंद्र सिंह यादव की भूमिका पाई गई है।

    3. विनोद तिवारी

    विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बारह लाख ग्यारह हजार रुपये (लगभग ₹2.12 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग राजनीतिक कार्यों में करने के तथ्य मिले हैं। खैरागढ़ उपचुनाव की होर्डिंग के भुगतान तथा जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी सामने आया है।

    4. रामप्रताप सिंह

    जब्त डायरियों में "R P Singh" एवं "RP" नाम से रामप्रताप सिंह से संबंधित 25 प्रविष्टियों में कुल दो करोड़ बानवे लाख नब्बे हजार रुपये (लगभग ₹2.93 करोड़) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने तथा उसे व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक कार्यों, मीडिया प्रबंधन और वाहन व्यवस्था में उपयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है।

    5. चंद्रदेव प्रसाद राय

    तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹49.50 लाख (लगभग उनचास लाख पचास हजार रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों में करने के तथ्य मिले हैं। इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें आभूषण उपलब्ध कराए जाने का विवरण भी चालान में शामिल है।

    6. जयप्रकाश मौर्य

    तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म, जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ (लगभग एक करोड़ रुपये) दर्ज हैं। विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने, खनिज विभाग के मामलों में उसके साथ संपर्क रखने तथा अवैध वसूली की व्यवस्था में सहयोग करने में उनकी भूमिका पाई गई है। पैलेट उद्योगपतियों को ₹100 प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए जाने का विवरण भी उनके विरुद्ध चालान में शामिल है।

    7. पियूष कुमार साहू

    पियूष कुमार साहू की भूमिका अपनी बहन रानू साहू को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम संपत्तियों में निवेश कराने में पाई गई है। परिवार से संबंधित 13 संपत्तियों की खरीदी में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद भुगतान भी किया गया। रकम के लेन-देन और संपत्ति खरीदी में उनके तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।

    8. जोगेन्दर सिंह

    जोगेन्दर सिंह, सूर्यकांत तिवारी के व्यावसायिक भागीदार थे। विवेचना में जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से नकद रकम की व्यवस्था करने तथा अपनी फर्मों के खातों से बैंक प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका पाई गई है। सात फर्मों को भेजी गई लगभग ₹40 करोड़ (लगभग चालीस करोड़ रुपये) की राशि और उससे संबंधित लेन-देन का विवरण भी चालान में दिया गया है।

    9. अनुराग चौरसिया

    अनुराग चौरसिया की भूमिका सौम्या चौरसिया को कोयला लेवी से प्राप्त रकम अपने एवं परिवारजनों के नाम फ्लैट और भूमि खरीदी में लगाने में पाई गई है। इसके लिए मोटल मधुबन तथा परिवारजनों के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों में प्राप्त रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश का विवरण चालान में शामिल है।

    10. दीपेश टांक

    दीपेश टांक की भूमिका भूमि सौदे में रजिस्टी मूल्य के अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने तथा नकद रकम को कृषि आय के रूप में दर्शाने में पाई गई है। भूमि विक्रय के बाद भी वे ओम एग्रो फार्म के कार्यों एवं भुगतान से जुड़े रहे। अवैध रकम को भूमि और फार्म के कार्यों में लगाने तथा उसे वैध आय दर्शाने से संबंधित तथ्य चालान में दिए गए हैं।

    11. सुनील कुमार अग्रवाल

    इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की भूमिका सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम अपने यहां रखने, उससे आगे भुगतान करने तथा वाशरी खरीदी में निवेश कराने में पाई गई है। इंद्रमणि समूह से संबंधित लेन-देन, वाशरी एवं भूमि खरीदी और नकद रकम के उपयोग का विवरण चालान में शामिल है।

    12. राहुल मिश्रा

    राहुल मिश्रा, सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में कार्य करते थे। विवेचना में उनके पास बड़ी नकद रकम रखे जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को वापस उपलब्ध कराए जाने के तथ्य मिले हैं। निर्माण कार्यों के भुगतान और नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण चालान में दिया गया है।

     

  • भिलाई निगम में पेवर ब्लॉक घोटाला मामला गरमाया, उप अभियंता ने सौंपा स्पष्टीकरण

    भिलाई निगम में पेवर ब्लॉक घोटाला मामला गरमाया, उप अभियंता ने सौंपा स्पष्टीकरण

    भिलाई.

    नगर निगम भिलाई की परियोजना शाखा द्वारा कराए गए पेवर ब्लॉक के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत की संयुक्त जांच में पुष्टि हो गई है। लोक निर्माण विभाग दुर्ग संभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की संयुक्त जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है।

    लोकसभा सांसद दुर्ग विजय बघेल के माध्यम से 06 दिसंबर 2025 को आवेदक संतोष मौर्य, भाजपा जिला महामंत्री, पूर्व पार्षद वार्ड-15 अंबेडकर नगर द्वारा शिकायत की गई थी कि निगम की परियोजना शाखा में पेवर ब्लॉक के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इस पर कलेक्टर ने संयुक्त जांच के आदेश दिए थे।

    जांच में क्या मिला
    कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग ने कलेक्टर दुर्ग को सौंपे गए जांच प्रतिवेदन के अनुसार निगम के 29 अनुबंधों की मौके पर जांच की गई। इसमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा मौके पर कम पाई गई। एनेक्जर-1 के कॉलम 8 में दर्शाई गई कम मात्रा के अनुसार 16,85,457 रुपए का अधिक भुगतान माप पुस्तिका में दर्ज पाया गया। जांच के दौरान 9 अधिकारी उपस्थित थे, जिसमें पीडब्ल्यूडी के अनुविभागीय अधिकारी बी.एल.पीसदा, उपअभियंता मनीष तिवारी, सविता प्रसाद और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के प्रतीक मसीह, राकेश साहू तथा निगम के सहायक अभियंता श्वेता वर्मा, उपअभियंता अर्पित वंजारे, श्वेता महेश्वर, रीमा जांबुलकर शामिल थे।

    कलेक्टर ने दिए कठोर कार्रवाई के आदेश
    जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी दुर्ग अभिजीत सिंह ने भिलाई निगम के आयुक्त को आदेशित किया है। उक्त समस्त कार्यों, स्थलों पर माप दर्ज करने वाले दोषी अभियंताओं तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं आधिक्य राशि की वसूली उनसे करते हुए प्रतिवेदन 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

    उप अभियंता ने दिया स्पष्टीकरण
    कारण बताओ नोटिस मिलने पर निगम के जोन 1 के उपअभियंता पुरुषोत्तम सिन्हा ने मुख्य अभियंता को लिखित स्पष्टीकरण दिया है। वार्ड 06 नेहरू नगर चौक प्रियदर्शिनी परिसर में वेंडिंग जोन में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य के संबंध में उनका कहना है कि माप पुस्तिका में 378.56 वर्ग मीटर और जांच में 375.20 वर्ग मीटर पाया गया, अंतर 3.36 वर्ग मीटर का है, जिसकी राशि 2123.00 रुपये है। वर्तमान में पुनः माप पर 33.35 मी. गुणा 11.35 मी. 378.52 वर्ग मी. पेवर ब्लॉक लगा पाया गया हैं, जो एमबी के अनुरूप है। माप, वास्तविक प्रगति और तत्कालीन स्थल परिस्थिति के अनुसार की गई थी। माप की विधि और वर्तमान तिथि में अंतर, कार्य के निष्पादन परिवर्तन के कारण मामूली अंतर संभव है। किसी ठेकेदार को अनुचित लाभ नहीं पहुंचाया, न निगम को क्षति पहुंचाई जांच दल ने बिना सूचना के उनकी अनुपस्थिति में मापांकन किया, वे संयुक्त पुनः सत्यापन के लिए तैयार हैं।

  • PM लोन योजना के नाम पर साइबर ठगी, फर्जी लिंक खोलते ही खाते से उड़ गए 61 हजार रुप

    PM लोन योजना के नाम पर साइबर ठगी, फर्जी लिंक खोलते ही खाते से उड़ गए 61 हजार रुप

    रांची
     प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत आधार कार्ड पर हर व्यक्ति को तीन लाख रुपये का ऋण देने का दावा फर्जी है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ऐसे दावों को फर्जी बताते हुए लोगों को सावधान किया है। इसके बावजूद इस दावे की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हैं और लोगों को ऋण दिलाने का झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। 

    राजधानी रांची में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। खासकर छोटे-मोटे कारोबार करने वाले लोगों को साइबर अपराधी निशाना बना रहे हैं। साइबर अपराधी आधार कार्ड पर ऋण दिलाने का दावा करते हुए लोगों को संदेश के माध्यम से फर्जी लिंक भेज रहे हैं। लिंक खोलते ही लोग ठगी का शिकार हो जा रहे हैं और उनके बैंक खाते से कुछ ही समय में रकम गायब हो रही है।

    तीन लाख के ऋण का झांसा देकर भेजा फर्जी लिंक
    रातू के एक सब्जी व्यवसायी को किसी व्यक्ति ने बताया कि प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत आधार कार्ड पर तीन लाख रुपये का ऋण मिल रहा है। इसके बाद व्यवसायी के मोबाइल पर संदेश के माध्यम से एक लिंक भेजा गया। तीन लाख रुपये का ऋण मिलने की उम्मीद में व्यवसायी ने लिंक खोल दिया। 

    लिंक खोलने के कुछ ही देर बाद उसके बैंक खाते से 61 हजार रुपये की अवैध निकासी हो गई। खाते से रकम निकलने का संदेश मिलने पर व्यवसायी को ठगी का पता चला। उसने लिंक भेजने वाले मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन नंबर बंद मिला।

    छोटे कारोबारियों को बना रहे निशाना
    पीड़ित सब्जी व्यवसायी ऑटो से अलग-अलग बाजारों में सब्जी ले जाकर बेचता है। साइबर अपराधियों द्वारा ऐसे छोटे कारोबारियों को आसान ऋण का लालच देकर निशाना बनाया जा रहा है। कम आय वाले लोगों को कम कागजी कार्रवाई में बड़ी रकम का ऋण दिलाने का झांसा देकर फर्जी लिंक भेजे जा रहे हैं।

    पीआईबी ने दावे को बताया फर्जी
    प्रेस सूचना ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड के आधार पर हर व्यक्ति को तीन लाख रुपये का ऋण देने की ऐसी कोई सार्वभौमिक योजना नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि इंटरनेट या संदेश के माध्यम से मिलने वाले ऐसे दावों पर विश्वास न करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करें। 

    सब्जी व्यवसायी को साइबर अपराध थाना में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। पुलिस से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनजान संदेश, लिंक या फोन के माध्यम से बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।

    रांची
     प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत आधार कार्ड पर हर व्यक्ति को तीन लाख रुपये का ऋण देने का दावा फर्जी है। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ऐसे दावों को फर्जी बताते हुए लोगों को सावधान किया है। इसके बावजूद इस दावे की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हैं और लोगों को ऋण दिलाने का झांसा देकर ठगी कर रहे हैं। 

    राजधानी रांची में भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं। खासकर छोटे-मोटे कारोबार करने वाले लोगों को साइबर अपराधी निशाना बना रहे हैं। साइबर अपराधी आधार कार्ड पर ऋण दिलाने का दावा करते हुए लोगों को संदेश के माध्यम से फर्जी लिंक भेज रहे हैं। लिंक खोलते ही लोग ठगी का शिकार हो जा रहे हैं और उनके बैंक खाते से कुछ ही समय में रकम गायब हो रही है।

    तीन लाख के ऋण का झांसा देकर भेजा फर्जी लिंक
    रातू के एक सब्जी व्यवसायी को किसी व्यक्ति ने बताया कि प्रधानमंत्री ऋण योजना के तहत आधार कार्ड पर तीन लाख रुपये का ऋण मिल रहा है। इसके बाद व्यवसायी के मोबाइल पर संदेश के माध्यम से एक लिंक भेजा गया। तीन लाख रुपये का ऋण मिलने की उम्मीद में व्यवसायी ने लिंक खोल दिया। 

    लिंक खोलने के कुछ ही देर बाद उसके बैंक खाते से 61 हजार रुपये की अवैध निकासी हो गई। खाते से रकम निकलने का संदेश मिलने पर व्यवसायी को ठगी का पता चला। उसने लिंक भेजने वाले मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन नंबर बंद मिला।

    छोटे कारोबारियों को बना रहे निशाना
    पीड़ित सब्जी व्यवसायी ऑटो से अलग-अलग बाजारों में सब्जी ले जाकर बेचता है। साइबर अपराधियों द्वारा ऐसे छोटे कारोबारियों को आसान ऋण का लालच देकर निशाना बनाया जा रहा है। कम आय वाले लोगों को कम कागजी कार्रवाई में बड़ी रकम का ऋण दिलाने का झांसा देकर फर्जी लिंक भेजे जा रहे हैं।

    पीआईबी ने दावे को बताया फर्जी
    प्रेस सूचना ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड के आधार पर हर व्यक्ति को तीन लाख रुपये का ऋण देने की ऐसी कोई सार्वभौमिक योजना नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि इंटरनेट या संदेश के माध्यम से मिलने वाले ऐसे दावों पर विश्वास न करें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करें। 

    सब्जी व्यवसायी को साइबर अपराध थाना में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। पुलिस से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनजान संदेश, लिंक या फोन के माध्यम से बैंक संबंधी जानकारी साझा करने से बचें।