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  • Dollar-Rupee: रुपये ने मारी शानदार छलांग, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत; विदेशी फंड से मिला सपोर्ट

    Dollar-Rupee: रुपये ने मारी शानदार छलांग, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत; विदेशी फंड से मिला सपोर्ट

    नई दिल्ली

    आज यानी 3 सितंबर को फॉरेन करेंसी मार्केट में भारतीय रुपये का जोश हाई नजर आ रहा है.गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने शानदार रिकवरी दिखाई  और 47 पैसे की मजबूती के साथ 94.26 के स्तर पर पहुंच गया. ये लगातार दूसरा दिन है जब भारतीय रुपया अपनी ताकत दिखा रहा है. इससे पहले बुधवार को भी रुपया 22 पैसे चढ़कर 94.73 पर बंद हुआ था. डॉलर के मुकाबले रुपये में आई इस जबरदस्त तेजी की आखिर वजह क्या है ये भी जान लीजिए…

    बता दें कि भारतीय करेंसी यू ही अपनी दमखम नहीं दिखी रही बल्कि इसके पीछे रिजर्व बैंक (RBI), FCNR(B) डिपॉजिट्स से लेकर क्रूड ऑयल तक का बड़ा हाथ है। 
    रुपये में आई मजबूती की वजह क्या है?

    1. FCNR(B) स्कीम से आया रिकॉर्ड पैसा
    रुपये में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट एफडी स्कीम (FCNR-B) है. भारत ने NRI के जरिए रिकॉर्ड 127.23 अरब डॉलर का विदेशी फंड जुटाया है. यह रिस्पॉन्स इतना जबरदस्त था कि रिजर्व बैंक (RBI) ने इस स्कीम को तय समय से एक महीने पहले ही 31 अगस्त को बंद कर दिया. इस स्कीम के जरिए देश में भारी मात्रा में विदेशी करेंसी आई है, जिसने रुपये को बड़ा सपोर्ट दिया है। 

    2. RBI की मजबूत तैयारी,फॉरेक्स रिजर्व ऑल-टाइम हाई पर
    रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. बैंकों के पास भारी मात्रा में डॉलर आने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) बढ़कर 729.32 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया है. इसके अलावा, देश की GDP ग्रोथ भी पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8% रही है. इस मजबूत आर्थिक आंकड़ों के चलते रुपये में गिरावट पर ब्रेक लगा है। 

    3. शेयर बाजार में तेजी और FIIs की खरीदारी
    भारतीय शेयर बाजार में तीन दिनों की गिरावट के बाद आज तेजी देखने को मिली है. सेंसेक्स करीब 221 अंक चढ़कर 76,791 पर और निफ्टी 59 अंक बढ़कर 23,974 पर कारोबार कर रहा है. इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 6,688 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध खरीदारी की है. शेयर बाजार में विदेशी पैसे के आने से भी रुपये को सीधी मजबूती मिली है। 

    4. क्रूड ऑयल और डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी
    ग्लोबल मार्केट से भी रुपये को थोड़ी राहत मिली है. इंडेक्स' हल्का गिरकर 99.43 पर आ गया है. वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें भी थोड़ी घटकर 95.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही हैं. कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी सी भी कमी भारत के इंपोर्ट बिल को कम करती है, जिससे रुपये को फायदा मिलता है। 

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और कच्चे तेल में नरमी के चलते रुपये में यह दमदार उछाल आया है. जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह काबू में रहती हैं और भारतीय शेयर बाजार में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले और मजबूत हो सकता है। 

  • वैश्विक तनाव से भारतीय मुद्रा पर दबाव, डॉलर के सामने रुपया 92.5 तक लुढ़का

    वैश्विक तनाव से भारतीय मुद्रा पर दबाव, डॉलर के सामने रुपया 92.5 तक लुढ़का

    नई दिल्ली

    भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 92.20 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन जल्दी ही गिरकर 92.528 तक पहुंच गया।

    कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 25% से ज्यादा उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध ने तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों में डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आयातकों और तेल कंपनियों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाल सकता है।

    एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर के मुताबिक, डॉलर-रुपया जोड़ी फिलहाल अपने नए ऑल-टाइम हाई के आसपास 92.30-92.32 के दायरे में कारोबार कर रही है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल और मजबूत डॉलर रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं। तकनीकी चार्ट के आधार पर फिलहाल ट्रेंड अमेरिकी डॉलर के पक्ष में मजबूत दिखाई दे रहा है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली जारी
    फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और शेयर बाजार में भारी गिरावट ने भी रुपये की कमजोरी को बढ़ाया है। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 18 पैसे गिरकर 91.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

    घेरलू शेयर बाजार में दिखी बड़ी गिरावट
    इधर डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है, 0.66% बढ़कर 99.64 पर पहुंच गया। वहीं घरेलू शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 2,400 से ज्यादा अंक गिर गया, जबकि निफ्टी 708.75 अंक टूटकर 24,000 के नीचे पहुंच गया।

    एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि इस बीच एक सकारात्मक संकेत यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.885 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

     

  • रुपये की शानदार बढ़त: 3 साल में बेहतरीन प्रदर्शन, India-US ट्रेड डील का असर साफ

    रुपये की शानदार बढ़त: 3 साल में बेहतरीन प्रदर्शन, India-US ट्रेड डील का असर साफ

     नई दिल्‍ली ,
      
    शुक्रवार को डॉलर की संभावित निकासी और व्यापारियों द्वारा लॉन्ग पोजीशन कम करने के कारण भारतीय रुपया गिरावट पर बंद हुआ, लेकिन इस सप्‍ताह के दौरान भारतीय करेंसी ने शानदार तेजी दिखाई है. इस सप्‍ताह की तेजी ने 3 साल में सबसे तेज बढ़ोतरी को दर्ज किया है. 

    डॉलर की तुलना में रुपया शुक्रवार को 90.6550 पर बंद हुआ, जो दिन में 0.3% की गिरावट के साथ सप्ताह में 1.4% की तेजी को दिखाता है. जनवरी 2023 के बाद यह इसकी सबसे बड़ी वीकली ग्रोथ है. यह तेजी भारत और अमेरिका के बीच डील पर सहमति बनने के बाद आई है. 

    आरबीआई का बड़ा फैसला
    रुपया में तेज उछाल के साथ ही भारत के केंद्रीय बैंक (RBI) ने पॉजिटिव आर्थिक नजरिया, अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापार समझौतों के बाद कम हुए दबावों से उत्साहित होकर रेपो दर को अपरिवर्तित रखा है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि हमारा मानना ​​है कि एमपीसी बदलती व्यापक आर्थिक स्थितियों और नई श्रृंखला के आंकड़ों पर आधारित नजरिए से मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा तय करेगी. 

    वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई रेपो रेट को कम रखकर बैंकों और लोन लेने वाले लोगों को सपोर्ट देना चाहता है. यह लोन लेने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत होगी. वहीं व्‍यापारियों का कहना है कि रेपो रेट में अनचेंज रखने से रुपया के गिरावट में ज्‍यादा योगदान नहीं रहेगा. 

    मंगलवार को आई थी उछाल
    मंगलवार को अमेरिका और भारत द्वारा महीनों की बातचीत के बाद व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारतीय करेंसी में बड़ी उछाल आई थी, लेकिन शुक्रवार को  इसमें थोड़ी कमी आई.  हालांकि व्यापारियों और विश्लेषकों का कहना है कि इस व्यापारिक सफलता ने रुपये पर छाए संकट को दूर किया है. एक स्थायी तेजी विदेशी निवेश में उछाल पर निर्भर करेगी. 

    4 अरब डॉलर के शेयर बेचे
    गौरतलब है कि विदेशी निवेशकों ने पिछले महीने 4 अरब डॉलर के स्थानीय शेयरों की नेट सेलिंग के बाद फरवरी में अब तक लगभग 1 अरब डॉलर के स्थानीय शेयर खरीदे हैं. वैश्विक बाजारों में, डॉलर सूचकांक थोड़ा नीचे 97.8 पर था, जबकि एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला असर देखने को मिला. 

    बता दें शेयर बाजार शुक्रवार को तेजी पर बंद हुआ. निफ्टी 50 अंक ऊपर चढ़कर 25,693 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्‍स 266 अंक चढ़कर 83580 पर क्‍लोज हुआ. निफ्टी बैंक भी 56 अंक चढ़कर क्‍लोज हुआ.