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  • संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 30 अक्टूबर को इंदौर में, मालवा प्रांत की संरचना में होगा बड़ा बदलाव

    संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 30 अक्टूबर को इंदौर में, मालवा प्रांत की संरचना में होगा बड़ा बदलाव

     इंदौर
     राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दूसरी सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल 30 अक्टूबर से चार नवंबर तक इंदौर में होगी। बैठक का संभावित स्थान डेली कॉलेज है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी सहित केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र और सभी प्रांतों के प्रचारक शामिल होंगे। बैठक में 46 प्रांतों के 450 कार्यकर्ता आएंगे।

    छह दिन की बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष में हुए कार्यों की समीक्षा होगी। साथ ही वर्ष 2027 से प्रांत संरचना समाप्त कर संभाग संरचना लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसी महत्वपूर्ण बैठक में इस विषय पर अंतिम विचार किया जाना है। बैठक से पहले शहर में पथ संचलन भी निकाला जाएगा। राष्ट्रीय पदाधिकारी तीन दिन तक इंदौर में रहेंगे।

    नई व्यवस्था में मालवा प्रांत इंदौर-उज्जैन में बंटेगा
    प्रांतीय संरचना में बदलाव के बाद मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित किया जाएगा। मालवा प्रांत की रचना 2009 में हुई थी। इसमें इंदौर और उज्जैन जिले आते थे। अब संभागों की संरचना प्रांत की तरह ही होगी और हर संभाग की जिम्मेदारी अलग प्रचारक को दी जाएगी।

    वर्तमान प्रांत में 3292 स्थानों पर 5029 शाखाएं और 527 विद्यार्थी-महाविद्यालयीन शाखाएं लग रही हैं। संघ की साल में दो बड़ी बैठकें होती हैं। मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और अक्टूबर-नवंबर में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल।

  • RSS@100: ग्वालियर में युवाओं से संवाद, राष्ट्रबोध और नेतृत्व पर मंथन

    RSS@100: ग्वालियर में युवाओं से संवाद, राष्ट्रबोध और नेतृत्व पर मंथन

     ग्वालियर
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष में ग्वालियर में आज ‘युवा संवाद’ का आयोजन किया जा रहा है। सिटी सेंटर स्थित बाल भवन में दोपहर 3 बजे होने वाले कार्यक्रम में संघ के मध्य क्षेत्र के क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त युवाओं से संवाद करेंगे। 

    आयोजकों के अनुसार संवाद का उद्देश्य समाज से जुड़े समसामयिक और संवेदनशील मुद्दों पर युवाओं के साथ विचार-विमर्श करना है। संघ का मानना है कि युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान में भी समाज और देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के साथ युवाओं में कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

    छात्र-युवा और शिक्षाविदों में उत्सुकता
    कार्यक्रम को लेकर छात्र-छात्राओं, युवा पेशेवरों और शैक्षणिक जगत से जुड़े लोगों में उत्सुकता है। आयोजकों का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं के साथ खुला संवाद उन्हें विभिन्न मुद्दों को समझने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका तय करने का अवसर देता है।

    शिक्षाविदों के मुताबिक, सामाजिक विषयों पर चर्चा से युवाओं में तर्कपूर्ण सोच और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।

    शताब्दी वर्ष में युवाओं पर फोकस
    RSS के 100वें वर्ष में आयोजित इस कार्यक्रम को युवा केंद्रित गतिविधियों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसमें भारतीय जीवन-मूल्यों, राष्ट्रसेवा और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विचारों पर चर्चा होगी। आयोजकों को उम्मीद है कि संवाद के जरिए युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने की दिशा में नई पहल को गति मिलेगी।

     

  • RSS पर कर्नाटक सरकार का शिकंजा? नए बिल में सरकारी जमीन पर कार्यक्रमों के लिए मंजूरी अनिवार्य

    RSS पर कर्नाटक सरकार का शिकंजा? नए बिल में सरकारी जमीन पर कार्यक्रमों के लिए मंजूरी अनिवार्य

    बेंगलुरु 
     गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि कर्नाटक कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद एक बयान में प्रियांक खरगे ने कहा कि इस विधेयक का मकसद निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। माना जा रहा है कि यह कानून सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेव संघ को प्रभावित करेगा। प्रियांक खरगे बीते कई दिनों से साफ बयान दे रहे थे कि कर्नाटक में संघ को बैन किया जाएगा।

    प्रियांक खरगे ने कहा कि यह विधेयक सरकारी जमीनों, इमारतों, खेल के मैदानों, पार्कों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। साथ ही, यह इनके दुरुपयोग को रोकता है और जनहित व भलाई के लिए इनकी रक्षा करता है।

    नए कानून पर क्या बोले प्रियांक खरगे
    प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि इस कानून का मकसद जवाबदेही सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है। इस अटकल पर कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को निशाना बनाने के लिए है प्रियांग खरगे ने कहा कि सरकार के मन में कोई खास संस्था नहीं है। मंत्री ने कहा कि हर कोई यह क्यों सोच रहा है कि यह किसी खास संस्था, संघ, संगठन, सोसाइटी, क्लब, यूनियन, सिंडिकेट या NGO पर रोक लगाने या उसे नियंत्रित करने के लिए है? मेरी समझ से बाहर है।

    मॉनसून सत्र में ही पेश हो सकता है विधेयक
    कर्नाटक में मौजूदा मॉनसून सत्र में ही इस विधेयक को पेश किया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के अधीन इमारतों या परिसरों जैसे कि स्कूल, कॉलेज, खेल के मैदान, पार्क, सड़क या फिर जलाशयों के किनारे कोई भी सभा करने से पहले इजाजत लेनी होगी। राज्य के गृह मंत्रालय ने 18 अक्टूबर 2025 को ही यह आदेश जारी किया था। कानून बनने के बाद यह उसी आदेश की जगह ले लेगा।

    पहले के आदेश के मुताबिक भी एक जगह पर 10 लोगों के इकट्ठा होने के लिए के लिए परमीशन लेना अिवार्य कर दिया गया था। हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद सरकार ने पुराने आदेश को वापस लेने और उसकी जगह कानून लाने का फैसला किया है। इससे सरकार को सभाओं, जुलूस और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर नियंत्रण हासिल हो जाएगा। ऐसे में आरएसएस को भी अपनी शाखाएं लगाने या फिर किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए इजाजत लेनी होगी।

    कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने कहा कि किसी भी संगठन को टारगेट करने के लिए यह कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों के रख-रखाव को ध्यान में रखते हुए यह कानून लगाया जा रहा है। कर्नाटक सरकार के इस कानून को लेकर बीजेपी ने अपना विरोध दर्ज करवाया है। ऐडवोकेट गिरीश ने कहा कि यह असंववैधानिक नियम है। यह संविधान का आर्टिकल 19 का उल्लंघन कर करता है।

    इससे पहले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों कॉलेजों औऱ अन्य स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग कीथी। उन्होंने कहा था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आरएसएस अपनी शाखाएँ चला रहा है। वे बच्चों के मन में नकारात्मक विचार भरते हैं।

    क्या है कर्नाटक का नया कानून
    अधिकारियों के अनुसार, विधेयक में कार्यक्रमों, बैठ इसमें सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं प्रस्तावित हैं। इसमें सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग या नुकसान की स्थिति में जुर्माने के प्रावधान भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों का इस्तेमाल बिना अनुमति के कार्यक्रमों, बैठकों और निजी कामों के लिए किया जा रहा था। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था और आम लोगों को दिक्कत हो रही थी। नए विधेयक में स्पष्ट प्रावधान होंगे कि कौन, कब और किस शर्त पर सरकारी परिसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और जिम्मेदारी तय की जाएगी। उल्लंघन करने पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

    सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी एक समुदाय या संगठन के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर के पैसे से बनी संपत्तियों का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से और जनहित में हो।

    मोहन भागवत को प्रियांक खरगे ने लिखा था लेटर
    2025 से ही खरगे RSS के सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल का विरोध करते रहे हैं और संगठन से औपचारिक रूप से पंजीकरण कराने की मांग करते रहे हैं। जून 2026 में, खरगे ने RSS को एक खुला पत्र लिखकर उसके कानूनी दर्जे, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर स्पष्टता मांगी थी, क्योंकि संगठन अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन भारत और विदेशों में 60,000 से ज्यादा शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है। उसकी सार्वजनिक जीवन में अहम मौजूदगी है और इसलिए उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।

     

  • RSS कार्यक्रम को लेकर शशि थरूर ने दी सफाई, कांग्रेस नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

    RSS कार्यक्रम को लेकर शशि थरूर ने दी सफाई, कांग्रेस नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

    मुंबई 

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई में आयोजित होने वाले जेन जी इवेंट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच इस कार्यक्रम में उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के भी शामिल होने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो जाने के बाद अब शशि थरूर ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ कर दी है।

    चर्चाओं पर जवाब देते हुए शशि थरूर ने बताया कि वे इस कार्यक्रम के आयोजक संस्थान 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) के सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि सलाहकार बोर्ड में शामिल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे संस्था के हर सत्र में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें या हर वक्ता के विचारों का समर्थन करें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह भी लिखा कि वे अभिव्यक्ति की आजादी में पूरा यकीन रखते हैं।

    क्या बोले थरूर?
    शशि थरूर ने एक पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा, “यह आरएसएस का संगठन नहीं है। यह छात्रों का आंदोलन है, जो अलग अलग विचारधाराओं से जुड़े शिक्षाविदों और थिंकर्स को छात्रों से बातचीत करने के लिए बुलाता है। मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करता हूं और 7 और 8 तारीख को होने वाली इसकी बोर्ड बैठक और कार्यक्रमों की अध्यक्षता करूंगा। मिस्टर भागवत 6 तारीख को इनसे मुलाकात करेंगे, उस समय मैं संसद सत्र के लिए दिल्ली में रहूंगा।”

    मोहन भागवत करेंगे जेन जी से बात
    बता दें कि IIMUN के 15 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक युवा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह 6 अगस्त 2026 को मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में आयोजित होगा। इस दौरान देश भर के 100 से अधिक शहरों के स्कूलों और कॉलेजों के 15 से 19 साल के 2,000 से अधिक छात्र हिस्सा लेंगे। सत्र का विषय "द रोल ऑफ यूथ इन यूनाइटिंग द वर्ल्ड, द इंडियन वे" रखा गया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत इस युवा सम्मेलन में छात्रों को संबोधित करेंगे और उनसे संवाद करेंगे।

    हाल ही में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर देश भर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद जेन जी चर्चा में आ गए थे। IIMUN नेतृत्व का कहना है कि यह संवाद नई पीढ़ी के विचारों को सुनने और देश के नेताओं से रूबरू कराने का एक निष्पक्ष मंच है। वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि युवाओं के साथ संवाद का स्वागत है, लेकिन अगर इसका नेतृत्व युवा या 'जेन जी' के प्रतिनिधि ही करतें तो यह और भी बेहतर होगा।

  • हरियाणा में RSS नेतृत्व का जुटान, चुनावी रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा

    हरियाणा में RSS नेतृत्व का जुटान, चुनावी रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा

    पनीपत

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की तीन दिवसीय बैठक हरियाणा के पनीपत में शुक्रवार से शुरू हो रही है. संघ के टॉप लीडरशिप की इस बैठक में आरएसएस के 100 साल के कार्य विस्तार की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 100 सालों के कार्यक्रमों-अभियानों की रूपरेखा तैयार की जाएगी. इतना ही नहीं संघ के एजेंडे में 2026 और 2027 की चुनाव से लेकर यूजीसी विवाद पर मंथन किए जाने की संभावना है।

    आरएसएस की कार्य पद्धति में निर्णय करने वाली सर्वोच्च ईकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा है. इसकी साल में महज एक बार बैठक होती है. संघ के शताब्दी वर्ष पूरे होने के बाद एबीपीएस की बैठक इस बार हरियाणा के पनीपत जिले की समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में हो रही है।

    संघ की तीन दिनों तक चलने वाली महत्वपूर्ण बैठक के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पहुंच चुके हैं. क्षेत्र-प्रांत संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. देशभर से संघ और संघ प्रेरित संगठनों के 1487 प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। 

    RSS की हरियाणा में तीन दिन की बैठक
    संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का औपचारिक आगाज शुक्रवार सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में होगा, जो रविवार तक चलेगी. बैठक में आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, एबीवीपी, सेवा भारती और भारतीय किसान संघ जैसे संगठन शामिल होंगे. इस दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों,सामाजिक चुनौतियों और संगठन विस्तार की आगामी रूपरेखा पर गहन मंथन किया जाएगा।

    सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ की चर्चाओं में सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा. माना जा रहा कि बैठक में शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा होगी. इसके साथ ही अगले वर्ष की योजनाओं पर चर्चा होगी और  जिन्हें पिछली बेंगलुरू बैठक में जिम्मेदारियों सौंपी गई थी, उन्होंने उसे कितना पूरा किया, इस पर भी चर्चा होगी. पदाधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी।

    संघ अगले एक साल का बनाएगा प्लान
    RSS के शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान के तहत, 'गृह संपर्क अभियान' ने कई राज्यों में 10 करोड़ से अधिक परिवारों से पहले ही संपर्क स्थापित कर लिया है. पिछले एक वर्ष में 5,500 से अधिक नई RSS शाखाएं शुरू की गई हैं. शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के हिस्से के रूप में पूरे देश में लगभग 97 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे. बैठक के अंतिम दिन संडे को दत्तात्रेय होसबाले मीडिया को संबोधित करेंगे और बैठक लाए गए प्रस्तावों और निर्णयों का विवरण साझा करेंगे।

    संघ के 'पंच परिवर्तन' प्रोजेक्ट पर फिर से ज़ोर दिए जाने की संभावना है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, अपनी पहचान, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्यों को बढ़ावा देना है।

    RSS के एजेंडे में UGC से चुनाव तक
    संघ सूत्रों के मुताबिक एबीपीएस की बैठक में यूजीसी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो सकती है. देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए यूजीसी ने नए नियम बनाए थे, जिसे लेकर विरोध शुरू हो गया था. संघ की कोशिश है कि यूजीसी के नियमों लागू करने का स्वरूप इस कदर बनाया जाए, जिससे सामाजिक विरोध न हो सके। 

    यूजीसी के नियम को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. एक तरफ उच्च जाति के समुदायों को लगता है कि इन नियमों से उनके साथ ज्यादती होगी और कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अदालतों द्वारा इन पर रोक लगाए जाने से दलितों के बीच जवाबी लामबंदी शुरू हो गई है।

    ओबीसी और दलित समूह कथित तौर पर नाराज माने जा रहे हैं जबकि ये समुदाय महत्वपूर्ण वोट बैंक बनाते हैं, जिन्हें बीजेपी लुभाने की कोशिश कर रही है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए, इस मुद्दे ने पार्टी को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. ऐसे में सूत्रों की माने तो संघ की इस अहम बैठक में यूजीसी के नए नियमों पर चर्चा हो सकती है. संघ इस मुद्दे पर कोई दिशा दे सकता है। 

    2026 में देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, जिसमें असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं. ऐसे में संघ की बैठक में इन राज्यों के चुनाव को लेकर भी चर्चा हो सकती है. वैचारिक रूप से बीजेपी से बंगाल, केरल व तमिलनाडु को अहम माना जाता है और सियासी तौर पर पार्टी अभी तक इन राज्यों में सत्ता में नहीं आ सकी है. इस तरह संघ की बैठक में चुनावी राज्यों के लिए मंथन कर रणनीति बनाई जा सकती है।

    घुसपैठ के मुद्दे पर भी क्या होगी चर्चा
    पड़ोसी मुल्कों से गैरकानूनी माइग्रेशन के चलते देश के कुछ राज्यों में हो रहे जनसंख्या असंतुलन को लेकर आरएसएस चिंतित है.घुसपैठ के कारण देश के कई राज्यों की जनसंख्या की स्थिति बदल रही है. असम और पश्चिम बंगाल में पहले से ही अवैध घुसपैठ का मुद्दा शुरू से ही रहा है. इन दोनों राज्यों में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी इन राज्यों में घुसपैठ को मुद्दा बनाने में जुटी है. ऐसे में एबीपीएस की चर्चाओं में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के मुद्दे पर भी बात हो सकती है। 

    एबीपीएस मीटिंग के दौरान कई 'राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों' पर एक प्रस्ताव पारित करने की भी उम्मीद है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूजीसी और एनआरसी पर कोई प्रस्ताव आएगा या नहीं, लेकिन संघ की यह सबसे महत्वपूर्ण बैठक है. इसमें सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे नंबर के नेता दत्तात्रेय होसबले सहित सभी सह सरकार्यवाह सहित अहम पदाधिकारियों की उपस्थित होगी। 

    संघ के एबीपीएस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं. इस दौरान अहम मुद्दों पर चर्चा करने साथ लिए गए फैसले न केवल अगले वर्ष के लिए संघ को दिशा देते हैं बल्कि बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी संकेत देते हैं कि वह नीतिगत स्तर पर क्या लागू करना चाहता है।

     

  • 2027 से पहले संगठन की हलचल तेज, योगी के बाद डिप्टी CMs की भागवत से अहम बैठक

    2027 से पहले संगठन की हलचल तेज, योगी के बाद डिप्टी CMs की भागवत से अहम बैठक

    लखनऊ

    . उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की हैट्रिक के लिए खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैदान में उतर चुके हैं. गोरखपुर प्रवास के बाद वे लखनऊ पहुंचे।  जहां पहले वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 40 मिनट तक मुलाक़ात की. गुरुवार को मेरठ रवानगी से पहले उनकी मुलाक़ात दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पटाहक से हुई. इन मुलाकातों को राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के अजेंडे को धार देने और जाति की राजनीति को ख़त्म करने को लेकर चर्चा की है. इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में जिस तरह से यूजीसीबिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मुद्दा उठा उससे, हिन्दू वोट बंटने का खतरा है. इसका सीधा नुकसान बीजेपी को इसलिए भी है, क्योंकि बीजेपी 80 बनाम 20 की राजनीति करती है. यानी सपा का पीडीए और बीजेपी का दलित वोट भी सिका हिस्सा है.

    सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में मोहन भागवत से करीब 30-40 मिनट तक बातचीत की. यह मुलाकात आरएसएस के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में बताई जा रही है, लेकिन सियासी गलियारों में इसे 2027 के चुनावी रोडमैप, हिंदुत्व एजेंडा, संगठन-सरकार समन्वय और सामाजिक समीकरणों पर रणनीति बनाने के रूप में देखा जा रहा है. मुलाकात के दौरान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, संगठन की भूमिका और आगामी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है.
    किस मुद्दे पर हुई होगी चर्चा?

    मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद, गुरुवार सुबह मोहन भागवत ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की. सरस्वती कुंज में हुई इन बैठकों में हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों, जातिगत राजनीति, सामाजिक समरसता और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से मोहन भागवत ने जाति को भूलने और खुद को हिंदू बताने का आह्वान किया है उससे साफ़ है कि 2027 के लिए सियासी बिसात तैयार की जा रही है. इन मुलाकातों से स्पष्ट है कि आरएसएस 2027 के चुनाव को लेकर प्रदेश स्तर पर मजबूत समन्वय और तैयारी में जुटा हुआ है.
    आरएसएस और बीजेपी के बीच समन्वय मजबूत होगा

    यह मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब उत्तर प्रदेश में सामाजिक-राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दल अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं. आरएसएस की ओर से हिंदू समाज में एकता, सतर्कता और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल को चुनावी सफलता की कुंजी माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें न केवल भाजपा की चुनावी तैयारियों को मजबूती देंगी, बल्कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगी.