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  • दिल्ली में अवैध निर्माण पर बड़ा प्रहार, रेखा गुप्ता ने दिए बुलडोजर चलाने के आदेश; जानें किन इलाकों में होगी कार्रवाई

    दिल्ली में अवैध निर्माण पर बड़ा प्रहार, रेखा गुप्ता ने दिए बुलडोजर चलाने के आदेश; जानें किन इलाकों में होगी कार्रवाई

    नई दिल्ली

    सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी को अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को 17 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के बाद बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में बुलडोजर ऐक्शन लिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा है कि नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारी ग्राउंड पर रहें। उन्होंने दिल्ली के सभी पीजी-हॉस्टल का सघन निरीक्षण करने को कहा है और अवैध निर्माण पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी आदेश दिया है कि जो भी निर्माण अवैध पाया जाता है उसके लिए दोषी अधिकारियों की पहचान की जाए। बिल्डिंग रिकॉर्ड खंगाला जाए और यह पता लगाया जाए कि किस वर्ष और किसके अधिकार क्षेत्र में उसका निर्माण किया गया था।

    ताबड़तोड़ चल रही है कार्रवाई
    सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम ने खतरनाक और अवैध भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार को निगम ने अलग-अलग इलाकों में 17 इमारतों को ध्वस्त किया और पांच संपत्तियों को सील कर दिया। इसके अलावा 9 लोगों को कारण बताओ नोटिस, दो को सीलिंग नोटिस और 15 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया है।

    किन इलाकों में कार्रवाई
    मंगलवार को एमसीडी ने सैदुलाजाब, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुखर्जी नगर, जामिया नगर, शाहीन बाग, तिलक नगर, करमपुरा, करोलबाग, रमेश नगर, मानसरोवर गार्डन, चांदनी चौक और नेहरू विहार समेत कई इलाकों में कार्रवाई की। इन इलाकों में बड़ी संख्या में अवैध इमारतों का निर्माण किया गया है। किसी मकान का नक्शा पास नहीं कराया गया है तो कई को तय मापदंड से अधिक ऊंचा बनाया गया है। कई इमारतों का ढांचा बेहद कमजोर पाया गया है।

    बड़े पैमाने पर जारी किए गए हैं नोटिस
    सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शीर्ष सरकारी और एमसीडी अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों को पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास वाले इलाकों में निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए। खासतौर पर उन मकानों का निरीक्षण करने को कहा गया है, जिनमें प्रथम दृष्टया ऊंचाई और मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, एक से 8 सितंबर के बीच नगर निकाय ने 48 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 15 संपत्तियों को सील किया। इसी अवधि के दौरान, निगम ने अनधिकृत निर्माण के लिए 90 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 124 कारण बताओ नोटिस और 66 तोड़फोड़ आदेश जारी किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक जून से 31 अगस्त के बीच एमसीडी ने 959 संपत्तियों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 456 संपत्तियों को सील किया। इस अवधि के दौरान अनधिकृत निर्माण के लिए 1,461 कारण बताओ नोटिस, सीलिंग के लिए 590 कारण बताओ नोटिस और 687 तोड़फोड़ आदेश जारी किए गए।

  • सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    सत्य निकेतन हादसे से जागी दिल्ली सरकार, पुराने भवनों में हॉस्टल-नर्सिंग होम को लेकर CM का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली

    दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में कई लोग घायल भी हो गए. यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई. जो ब्लिडिंग गिरी, उसमें पीजी चलता था. जिसमें कई कॉलेज छात्र रहा करते थे. इस हादसे के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. इधर आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी पॉलिसी बना रहे हैं जिसके तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा। 

    सीएम ने आगे कहा कि इसके बिना उन्हें उस जगह पर कोई भी सार्वजनिक सेवा या सुविधा—जैसे PG अकोमोडेशन, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य गतिविधि—चलाने का अधिकार नहीं होगा. इस संबंध में कड़े नियम लागू किए जाएंगे। 

    जिम्मेदार अधिकारी किए जाएंगे सस्पेंड
    दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन के हादसे पर यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. सभी अधिकारियों और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़े निर्देश दिए गए हैं; इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

    जिम्मेदार अधिकारियों का सस्पेंशन आज हीः सीएम
    सीएम ने यह भी कहा कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे. हम इन छात्रों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को कोई परेशानी न हो. सरकार की ओर से हम सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। 

    मंत्री बोले- स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अनिवार्य की नीति बनेगी
    दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर कहा, "बचाए गए 12 लोगों में से 6 की मौत हो गई है. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं. आज मुख्यमंत्री ने मेयर और MCD कमिश्नर के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि यहां चल रहे PG, हॉस्टल और सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाली नीति तुरंत बनाई जाए. स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के बिना उन्हें काम करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। 

  • स्वाइन फ्लू के 2300 पार मामले से दिल्ली में हड़कंप, हालात पर CM ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

    स्वाइन फ्लू के 2300 पार मामले से दिल्ली में हड़कंप, हालात पर CM ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

    नई दिल्ली

    दिल्ली में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में इस साल इन्फ्लूएंजा के लगभग 3,000 मामले सामने आए हैं, जिनमें 2,308 H1N1 संक्रमण के मामले शामिल हैं।

    सिंह ने कहा, डॉक्टरों, कर्मचारियों या दवाइयों की कोई समस्या नहीं है। मुख्यमंत्री ने एक इमरजेंसी रिव्यू मीटिंग बुलाई है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि कोई समस्या नहीं है, सब कुछ नियंत्रण में है। उन्होंने ये बात स्वास्थ्य विभाग, MCD, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रिव्यू मीटिंग के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि यह बैठक दिल्ली में H1N1 या मौसमी इन्फ्लूएंजा के साथ-साथ वेक्टर-जनित बीमारियों के लिए व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई थी।

    मंत्री ने कहा- सबकुछ कंट्रोल में
    पंकज सिंह ने कहा, हमने H1N1 और डेंगू पर एक मीटिंग की, जिसमें एनडीएमसी, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और कैंटोनमेंट इलाकों के अधिकारियों को भी बुलाया गया था। हमने दिल्ली में हालात का जायजा लेने और उन्हें समझने की भी कोशिश की। मैं आपके सभी चैनलों के जरिए यह बताना चाहता हूं कि कहीं भी घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। सब कुछ कंट्रोल में है। हमारे अस्पतालों में काफी बेड, डॉक्टर और दवाइयां मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा, एच1एन1 के लगभग 3,000 मरीज आए हैं (दोनों वैरिएंट्स मिलाकर), और वे ठीक होकर डिस्चार्ज हो रहे हैं। अगर H1N1 की बात करें, तो 2,308 मामले हैं। दूसरे वैरिएंट के लगभग 600–650 मामले हैं। कल तक डेंगू के 2,200 मामले सामने आए हैं। यह हमारी ताज़ा रिपोर्ट है। कोई मौत नहीं हुई है। कोई भी मरीज गंभीर हालत में नहीं है, और कोई भी वेंटिलेटर या आईसीयू में नहीं है। मरीज सामान्य बुखार के लक्षणों के साथ आ रहे हैं, इलाज करवा रहे हैं और ठीक होकर डिस्चार्ज हो रहे हैं।

    क्या है H1N1 वायरस?
    डॉक्टरों के अनुसार, एच1एन1 वायरस को स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है और इसमें आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान के लक्षण होते हैं। उन्होंने लगातार तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द से पीड़ित लोगों को तुरंत इलाज सहायता लेने की सलाह दी।

  • दिल्ली में झुग्गीवासियों को मिलेगा घर का हक! नई कटऑफ डेट तय, इस साल तक बनी झुग्गियों पर राहत

    दिल्ली में झुग्गीवासियों को मिलेगा घर का हक! नई कटऑफ डेट तय, इस साल तक बनी झुग्गियों पर राहत

    नई दिल्ली

    दिल्ली के हजारों झुग्गियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर है। डूसिब (संशोधन) विधेयक-2026 विधानसभा में पारित होने के साथ ही इनके पुनर्वास का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने  विधानसभा में साफ किया कि इस संशोधन का लाभ केवल उन झुग्गियों के निवासियों को ही मिलेगा जो एक जनवरी 2025 से पहले बनी हुई हैं। जल्द सरकार सर्वे करेगी।

    मंत्री सूद ने बताया कि इसके माध्यम से झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों की पहचान के लिए निर्धारित कट-ऑफ तिथि को वर्ष 2006 से बढ़ाकर एक जनवरी 2025 किया गया है। इन्हें पक्का मकान दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने भी जहां झुग्गी वहां मकान का वादा किया, लेकिन किसी को एक भी मकान नहीं दिया। आप ने झुग्गियां तोड़ने के झूठे नारे लगाए, लेकिन सत्ता में रहते हुए झुग्गी वासियों के विकास के लिए खास पैसा खर्च नहीं कर पाए। अब सरकार डूसिब के साथ मिलकर झुग्गीवालों को बस्तियों के पास ही घर देंगी।

    आसान नहीं होगी लागू करने की राह
    यह विधेयक भले ही दिल्ली सरकार ने विधानसभा में पास कर दिया है, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर लागू करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। राजधानी में आखिरी सर्वे वर्ष 2014-15 में किया गया था, जिसमें लगभग 3.5 लाख झुग्गियां दिल्ली में मिली थी। इसके बाद का आंकड़ा किसी के पास नहीं है। दिल्ली सरकार सबसे पहले सर्वे कर दिल्ली में झुग्गियों की संख्या का पता लगाएगी और इसके बाद ही पुनर्वास की योजना बनेगी।

    आप का दीमक साफ कर रही दिल्ली सरकार: सीएम
    कैग की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आप पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आप सरकार के दौरान का दीमक ही वर्तमान दिल्ली सरकार साफ कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में भाजपा सरकार ने 19 सीएजी की रिपोर्ट रखी। पिछली सरकार में सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में नहीं रखी जाती थी, पीएसी की बैठक नहीं होती थी। सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि आप सरकार में कितना गबन किया। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली सब्सिडी, जल बाेर्ड सहित तमाम विभागों की योजनाओं में घोटाला हुआ। उन्होंने कहा कि आप सरकार अपना बजट भी पूरा खर्च नहीं कर पाती थी। केंद्र से मिलने वाली सहायता भी वापस लौट जाती थी। यमुना की सफाई, सड़क, प्रदूषण सहित किसी मामले पर काम नहीं हुआ।

    तिरंगा यात्रा निकाली
    दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्रियों एवं विधायकों ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में आयोजित तिरंगा यात्रा में भाग लिया। महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर तिरंगा यात्रा डा. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर समाप्त हुई। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि तिरंगा केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र की जीवंत धड़कन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता के गौरव का प्रतीक। स्वतंत्रता सेनानियों की तपस्या और बलिदान की याद और 140 करोड़ भारतीयों की एकता का प्रतीक है।

  • प्राइवेट स्कूलों की बढ़ी फीस पर सरकार का एक्शन! रेखा गुप्ता सरकार ने जारी किया नया आदेश

    प्राइवेट स्कूलों की बढ़ी फीस पर सरकार का एक्शन! रेखा गुप्ता सरकार ने जारी किया नया आदेश

    नई दिल्ली

    राजधानी दिल्ली में निजी स्कूलों के मनमाने रवैये और फीस बढ़ोतरी को लेकर मिल रही शिकायतों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाया है। अब निजी स्कूलों की ओर से फीस बढ़ोतरी की जानकारी शिक्षा निदेशालय को देना अनिवार्य कर दिया गया है।

    शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को एक सर्कुलर जारी कर सभी मान्यता प्राप्त और बिना सरकारी सहायता वाले निजी स्कूलों के लिए सूचना साझा करने वाले प्रारूप में बदलाव किया है। स्कूलों को नए प्रारूप में फीस बढ़ोतरी समेत अन्य जानकारियां निदेशालय को देनी होंगी। इनकी जांच निदेशालय कराएगा।

    शिक्षकों के पद और योग्यता के बारे में बताना होगा
    निदेशालय ने नए फॉर्मेट में स्कूल के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ से जुड़ी जानकारियां भी मांगी हैं। इसमें स्कूल में मंजूर कुल पद और वर्तमान में भरे हुए पदों की संख्या के साथ शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता के बारे में भी बताना होगा। स्कूल में छात्र और शिक्षक अनुपात और कक्षा और श्रेणी के हिसाब से छात्रों के दाखिले का पूरा विवरण भी देना होगा।

    ये सूचनाएं देना अनिवार्य
    स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत होने वाले दाखिलों और कुल नामांकन की सूचना देनी होगी।

    ट्यूशन फीस के साथ अन्य सभी शुल्क, फीस बढ़ोतरी और वित्तीय खातों का पूरा ब्यौरा देना होगा।

    स्कूल के इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य सरकारी आदेशों के पालन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

    18 मानकों पर बताना होगा, क्यों फीस बढ़ाना वाजिब
    दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पिछले दिनों कहा था कि निजी स्कूलों को अब किसी भी प्रस्तावित शुल्क वृद्धि को 18 निर्धारित मानकों के आधार पर उचित ठहराना होगा और अभिभावकों को संतुष्ट करना होगा कि शुल्क बढ़ोतरी वाजिब है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 15 जुलाई तक दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत स्कूल स्तर पर शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) का गठन करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुपालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मंत्री ने कहा था कि फीस में बदलाव चाहने वाले स्कूलों को अपना प्रस्ताव समिति के सामने रखना होगा और नियमों के तहत निर्धारित 18 मानकों के आधार पर प्रस्तावित वृद्धि को उचित ठहराना होगा। मंत्री ने कहा, ''इन मानकों में बुनियादी ढांचे का विकास, परिवहन सुविधाएं, स्कूल भवन, सुरक्षा उपाय, प्रकाश व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती और अन्य संस्थागत आवश्यकताओं पर होने वाला खर्च शामिल है। स्कूलों को यह दिखाना होगा कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि वास्तविक सुधारों से जुड़ी है और उसके समर्थन में उनके पास वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।'

  • मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों का मिला सम्मान, महिला आयोग ने सुरक्षा और बालिका खोज अभियान को सराहा

    मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों का मिला सम्मान, महिला आयोग ने सुरक्षा और बालिका खोज अभियान को सराहा

    महिला सुरक्षा एवं गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की राज्य महिला आयोग ने की सराहना

    भोपाल

    राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य सुश्री साधना स्थापक ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा से महिला सुरक्षा, महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं बरामदगी तथा पीड़ित सहायता से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गुमशुदा बालिकाओं की बरामदगी के संबंध में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों में प्रभावी कार्रवाई तथा संवेदनशील पुलिसिंग को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं के प्रत्येक प्रकरण में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। आधुनिक तकनीक, साइबर विश्लेषण, अंतरराज्यीय समन्वय एवं विशेष पुलिस टीमों के माध्यम से गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं सुरक्षित बरामदगी के मामलों में निरंतर सफलता प्राप्त हो रही है।

    उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं अंतरराज्यीय गुमशुदगी के मामलों में भी समन्वित प्रयासों के माध्यम से बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की गई है। महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

    बैठक में महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने, पीड़ित सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने तथा महिला एवं बालिका संबंधी मामलों में विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय बढ़ाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा के विशेष पुलिस महानिदेशक (SDG) श्री अनिल कुमार सहित महिला शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • राशन योजना में बड़ा बदलाव, ढाई लाख कमाने वाले भी होंगे पात्र; डिजिटल करेंसी अनिवार्य

    राशन योजना में बड़ा बदलाव, ढाई लाख कमाने वाले भी होंगे पात्र; डिजिटल करेंसी अनिवार्य

    नई दिल्ली
    दिल्‍ली कैबिनेट की बैठक में आज राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और बेहद अहम फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राशन कार्ड के लिए जरूरी सालाना आय की सीमा को सीधे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है. दिल्‍ली सरकार का मानना है कि पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय की सीमा बहुत कम थी, जिससे कई जरूरतमंद परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे. मत्रभ्‍ मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से दिल्‍ली के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके साथ ही, राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और हर तरह की धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब राशन के लेन-देन में केवल डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है। 

    रेखा गुप्‍ता कैबिनेट फैसले की 5 मुख्य बातें
    • आय की सीमा में भारी बढ़ोतरी: राशन कार्ड के लिए एलिजिबिल्‍टी की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है.
    • लाखों नए परिवारों को लाभ: इस फैसले के बाद मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लाखों नए लाभार्थी इस सरकारी राशन योजना के दायरे में आ जाएंगे.
    • डिजिटल करेंसी से सीधा भुगतान: राशन योजना में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए अब केवल डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल किया जाएगा.
    • सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: डिजिटल करेंसी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे सिर्फ राशन खरीदने के लिए कर सकेंगे.
    • बिचौलियों और धांधली पर लगाम: इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से कोटेदारों की मनमानी, राशन की कालाबाजारी और फर्जी लाभार्थियों की धांधली पूरी तरह बंद हो जाएगी.

    क्यों खास है यह फैसला और क्या होगा इसका असर?

    सरकार का यह फैसला दोहरे मोर्चे पर काम करने वाला है—पहला सामाजिक कल्याण का विस्तार और दूसरा तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था का शुद्धीकरण.

    अब तक 1 लाख रुपये की सालाना आय की सीमा बेहद व्यावहारिक नहीं रह गई थी क्योंकि महंगाई के इस दौर में इतनी आय वाला परिवार भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है. आय की सीमा को ढाई लाख करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग (जैसे सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार) को मुफ्त या किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी। 

    दूसरा और सबसे क्रांतिकारी कदम है डिजिटल करेंसी (e-RUPI या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी – CBDC) का अनिवार्य इस्तेमाल. अभी तक कई जगहों पर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार राशन डकार जाते हैं या लाभार्थियों को बाजार में बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में राशन की डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो लाभार्थी उसका इस्तेमाल केवल राशन की दुकान पर ही कर पाएगा. इससे कैश की हेराफेरी खत्म होगी और राशन वितरण प्रणाली 100% पारदर्शी हो जाएगी। 

    सवाल-जवाब
    सरकार को राशन के लिए आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये क्यों करनी पड़ी?

    सरकार के अनुसार, पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय सीमा बहुत कम थी. वर्तमान आर्थिक स्थितियों और महंगाई को देखते हुए बुनियादी आय को कम आका गया था, जिससे कई वास्तविक जरूरतमंद राशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. अब ढाई लाख की सीमा होने से लाखों छूटे हुए परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा। 

    राशन वितरण में डिजिटल करेंसी कैसे काम करेगी और लाभार्थियों को इससे क्या फायदा होगा?

    सरकार लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशन के मूल्य के बराबर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी. यह करेंसी डायरेक्ट अकाउंट में जाएगी, जिससे लाभार्थी राशन की अधिकृत दुकान पर जाकर भुगतान कर सकेंगे. इससे लाभार्थियों को अपनी जेब से नकद खर्च नहीं करना पड़ेगा और वे बिना किसी कटौती के पूरा राशन ले सकेंगे। 

    इस नई व्यवस्था से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर कैसे लगाम लगेगी?

    डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ (विशेष उद्देश्य के लिए) होती है. यानी राशन के लिए मिली डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किसी अन्य काम या सामान को खरीदने में नहीं किया जा सकता. इससे राशन की कालाबाजारी, कोटेदारों द्वारा फर्जी अंगूठा लगवाना और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। 

  • ‘मेट्रो डे’ से बदलेगी शहर की रफ्तार, पीएम के संदेश के बाद सरकार ने उठाए बड़े कदम

    ‘मेट्रो डे’ से बदलेगी शहर की रफ्तार, पीएम के संदेश के बाद सरकार ने उठाए बड़े कदम

    नई दिल्ली

    दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील को लागू करने का फैसला किया है. इसमें रेखा सरकार के आदेश के अनुसार, स्कूल-कॉलेज को ऑनलाइन जारी करने का आदेश दिया गया है. दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा खपत और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ नाम के एक अभियान का घोषणा किया है. इस अभियान में कई बड़े और चौंकाने वाले प्रशासनिक बदलावों की घोषणा की गई है. इन फैसलों का सीधा असर दिल्ली की सरकारी कार्यप्रणाली, यातायात और आम जनता के रूटीन पर पड़ेगा।

    सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों की टाइमिंग में बदलाव और साथ ही हफ्ते में कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है. उन्होंने कॉलेज स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने की अपील की है. साथ ही कोर्ट से भी ऑनलाइन सुनवाई के लिए निवेदन किया है. सरकार का मुख्य फोकस ईंधन की बचत और बिजली की खपत को कम करने पर है। 

    आइए जानते हैं सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसले क्या हैं:

    दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकार ने दफ्तरों के समय में बड़ा बदलाव किया है-

    नया समय: दिल्ली सरकार के दफ्तर अब सुबह 10:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुलेंगे. वहीं, MCD के दफ्तरों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा.

    वर्क फ्रॉम होम: दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) अनिवार्य कर दिया गया है. प्राइवेट कंपनियों को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के लिए सरकार की तरफ से समान एडवाइजरी (Advisory) जारी की जाएगी। 

    ऑनलाइन ही होगी मीटिंग: सरकार की 50 प्रतिशत आधिकारिक बैठकें अब सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी। 

    ‘मेट्रो मंडे’ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक नई पहल शुरू की है. सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को ‘मेट्रो मंडे’ (Metro Monday) घोषित किया गया है, जहां लोगों से मेट्रो का इस्तेमाल करने की अपील की गई है. जो सरकारी कर्मचारी ऑफिस आने-जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे, उनके ‘ट्रांसपोर्ट अलाउंस’ में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी. सरकारी कॉलोनियों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 29 कॉलोनियों में 58 फीडर बसें (Feeder Buses) चलाई जाएंगी। 

    नो व्हीकल डे: जनता से अपील की गई है कि वे हफ्ते में कम से कम एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएं और माल ढुलाई के लिए ट्रकों की जगह ट्रेनों का इस्तेमाल करें। 

    सरकारी खर्चे और VVIP कल्चर पर लगाम
    विदेश यात्राओं पर बैन: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त निर्देश दिया है कि अगले एक साल तक दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी किसी भी आधिकारिक (Official) विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा. आम जनता से भी विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की गई है। 

        अगले 3 महीनों तक सरकार द्वारा आयोजित होने वाले सभी बड़े इवेंट्स कैंसिल कर दिए गए हैं.
        अधिकारियों के पेट्रोल कोटे (लिमिट) में 20 प्रतिशत और डोमेस्टिक अलाउंस (घरेलू भत्ते) में भी 20% की कटौती की गई है.
        अगले 6 महीनों तक सरकार के किसी भी विभाग में कोई नया वाहन नहीं खरीदा जाएगा. वाहनों का इस्तेमाल ‘न्यूनतम जरूरत’ के हिसाब से ही होगा.

    ऊर्जा बचत और EV पॉलिसी
    बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में AC का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना अनिवार्य कर दिया गया है. बिजली की बर्बादी रोकने के लिए हर कॉरिडोर में एक ‘मास्टर स्विच’ लगाया जाएगा. इसके अलावा, सीएम ने जानकारी दी है कि अदालतों से भी निवेदन किया गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा ‘ऑनलाइन हियरिंग’ (Online Hearing) करें।