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  • फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम! मिली 21 दिन की पैरोल, पांच साल में 17वीं बार रिहाई

    फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम! मिली 21 दिन की पैरोल, पांच साल में 17वीं बार रिहाई

    रोहतक.

    डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। राम रहीम को 21 दिन की पैरोल दी गई है। यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है।

    जेल से निकलने के बाद वह रोहतक से सीधा सिरसा पहुंचेगा। इससे पहले डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को मई, 2026 में 23 दिन की पैरोल दी गई थी। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने साल 25 अगस्त, 2017 में गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिया था। जिसके बाद साल 28 अगस्त, 2017 को दोनों मामलों में अदालत ने राम रहीम को 10-10 साल यानी कुल 20 साल की सजा सुनाई थी।

    पैरोल की अवधि को कारावास की अवधि में नहीं गिना जाता
    कारागार नियमों के अनुसार, दोषी प्रतिवर्ष अधिकतम 10 सप्ताह की पैरोल का लाभ उठा सकते हैं। पैरोल पर बिताया गया समय सजा की अवधि में जोड़ा जाता है और इसे जेल में बिताए गए समय में नहीं गिना जाता। 10 वर्ष से अधिक की सजा पाए दोषियों को प्रतिवर्ष तीन सप्ताह की पैरोल भी मिलती है, जिसे जेल में बिताए गए समय में गिना जाता है। राम रहीम को एक पूर्व डेरा प्रबंधक और एक पत्रकार की हत्याओं में दोषी ठहराया गया था, हालांकि उच्च न्यायालय ने उन्हें दोनों मामलों में बरी कर दिया था।

  • Ram Rahim Case: रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में SC का बड़ा कदम, राम रहीम को नोटिस; बढ़ी मुश्किलें

    Ram Rahim Case: रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में SC का बड़ा कदम, राम रहीम को नोटिस; बढ़ी मुश्किलें

    चंडीगढ़ 

    सजायाफ्ता डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बरी किए गए राम रहीम के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में गुरमीत राम रहीम और सीबीआई से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार किए जाने की जरूरत है। 

    सुप्रीम कोर्ट ने रामचंद्र छत्रपति के परिजनों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राम रहीम और सीबीआई को नोटिस जारी किया है. दोनों पक्षों से आठ हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है. अदालत ने यह भी कहा कि मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी. इस याचिका को रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने दाखिल किया है और इसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें राम रहीम को हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था। 

    हाईकोर्ट ने पलट दिया था उम्रकैद का फैसला
    दरअसल, मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं. इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को पलट दिया था. हालांकि, इस मामले में शामिल तीन अन्य दोषियों की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था। 

    पत्रकार हत्याकांड
    बता दें कि रामचंद्र छत्रपति की हत्या अक्टूबर 2002 में हुई थी. उन्हें उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी. गोली लगने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही. इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की मौत हो गई थी. उनकी हत्या के बाद यह मामला लंबे समय तक जांच और कानूनी कार्रवाई के दौर से गुजरता रहा। 

    CBI कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
    इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने की थी. पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का दोषी ठहराया था. अदालत ने राम रहीम के अलावा कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बाद राम रहीम ने हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। 

    अब रामचंद्र छत्रपति के बेटे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले में अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट नहीं आई है. अदालत ने फिलहाल राम रहीम और CBI को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है. ऐसे में अब सबकी नजर नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर है और यह तय करेगा कि हाईकोर्ट के बरी करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है।