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  • Ram Mandir को मिला पहला CEO, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे कमान; करगिल और ऑपरेशन सिंदूर का है अनुभव

    Ram Mandir को मिला पहला CEO, एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा संभालेंगे कमान; करगिल और ऑपरेशन सिंदूर का है अनुभव

    अयोध्या

    राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO का ऐलान हो गया है. भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी। 

    कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र शर्मा?
    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं, उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया. इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया था. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं। 

    मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल के पूर्व छात्र हैं. वे एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के भी पूर्व छात्र हैं। 

    मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. 38 साल से ज्यादा के करियर में, उन्हें 3000 घंटे से ज्यादा का फ्लाइट एक्सपीरियंस है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। 

    स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए मशहूर हमलों में किया गया था। 

    ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या से मदन मोहन पांडेय, दिल्ली से महेश भागचन्दका और शिकोहाबाद से निर्मला यादव का नाम शामिल है। 

    चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे और विमलेंद्र मोहन के निधन के बाद ट्रस्ट के तीन पद खाली थे. जिसके बाद तीन लोगों को ट्रस्टी बनाया गया है. ट्रस्टी बने महेश भागचंदका अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं. वहीं, मदन मोहन पांडेय हाईकोर्ट में मंदिर पक्ष के वकील थे. तीनों ही राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ऑनलाइन जुड़े। 

    राम मंदिर के नए CEO को जानें

    वायुसेना से रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO होंगे. बुधवार को ट्रस्ट की बैठक में उन्हें CEO चुना गया. रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा हाल ही में वायुसेना से रिटायर्ड हुए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सफेद सागर' और 'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका रही है। 

    1999 में कारगिल युद्ध के समय 'ऑपरेशन सफेद सागर' के दौरान उन्होंने मिराज 2000 से पाकिस्तानी सेना पर बमबारी की थी. वहीं, पिछले साल पहलगाम अटैक के बाद हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की कमान इन्हीं के हाथों में थी। 

    'ऑपरेशन सिंदूर' में उनकी अहम भूमिका के लिए उन्हें पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. इससे पहले 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। 

    'ऑपरेशन सफेद सागर' में अहम भूमिका
    जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया था. लगभग 40 साल के करियर में उन्होंने 3 हजार घंटे से ज्यादा उड़ान भरने का अनुभव है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। 

    स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल बाद में 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हुए हमलों में किया गया था। 

    सीईओ के पास होंगी ये जिम्मेदारियां
    राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि पेशेवर प्रशासन और पारदर्शिता के लिए एक सीईओ बेहद जरूरी है. नए नियमों के तहत सीईओ के अधिकार और शक्तियां तय की जाएंगी. सीईओ ट्रस्ट के महामंत्री को रिपोर्ट करेंगे और उनके पास सभी प्रशासनिक, वित्तीय और वैधानिक अधिकार होंगे। 

    5500 से ज्यादा आवेदन आए
    राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए कुल 5585 आवेदन आए. ट्रस्ट ने इनमें से तीन उम्मीदवार चुने उसमें से जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी मिली है. इसके लिए बुधवार को ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य लोग मौजूद रहे। 

    कैसे चुना गया नया CEO
    सीईओ के चयन की प्रक्रिया में AI आधारित स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल मूल्यांकन का इस्तेमाल किया गया. आवेदनों की जांच के लिए 600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था. प्रारंभिक मूल्यांकन में 3,577 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया. इसके बाद 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 108 आवेदकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत की गई और अंतिम रूप से 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू किया गया। 

    राम मंदिर CEO का ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब मंदिर को मिले चंदा में कथित चोरी का विवाद चल रहा है. इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई है और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और एक अन्य पदाधिकारी ने इस्तीफा दे दिया है। 

     

  • राम मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव, CEO से पहले सचिव बने जगदीश आफले; क्यों है यह नियुक्ति खास?

    राम मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव, CEO से पहले सचिव बने जगदीश आफले; क्यों है यह नियुक्ति खास?

    अयोध्या
    अयोध्या के राम मंदिर में दान चोरी के बाद हो रहे बदलावों की कड़ी में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से पहले सचिव की नियुक्ति कर दी गई है। जगदीश आफले को यहां का पहला सचिव नियुक्त किया गया है। प्रवक्ता के लिए भी चयन प्रक्रिया चल रही है। कई नामों पर चर्चा किया गया है। जल्द ही उसके लिए भी नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। हालांकि आफले की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा भी दो सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में की जाएगी। आफले को ही ट्रस्ट की तरफ से भारतीय स्टेट बैंक में हस्ताक्षरकर्ता भी बना दिया गया है। चंपत राय और डॉक्टर अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद से हस्ताक्षरकर्ता को लेकर गतिरोध चल रहा था।

    बचपन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे आफले
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यकारिणी ने यहां
    पर सीईओ, सचिव और प्रवक्ता की नियुक्ति का फैसला किया था। उसी फैसले के अनुसार सचिव का पद बनाते हुए जगदीश आफले की नियुक्ति की गई है। जगदीश आफले बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं। पेशे से इंजीनियर आफले ने राम मंदिर का निर्माण शुरू होने पर बिना वेतन ही परियोजना प्रबंधक की जिम्मेदारी संभाल ली थी।

    मुंबई आईआईटी से किया बीटेक, फिर यूरोप-अमेरिका में नौकरी
    महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले आफले ने आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रिकल में बीटेक और फिर एमटेक किया है। इसके बाद वह अलग-अलग कई मल्टीनेशनल कंपनियों में अपनी सेवाएं देते रहे। इसी कड़ी में यूरोप के कुछ देशों के अलावा अमेरिका की एक कंपनी में भी सेवाएं दीं। रिटायरमेंट के बाद वह भारत आ गए। राम मंदिर का फैसला होने के बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने पर आरएसएस की ओर से प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में यहां सेवा दे रहे हैं। तभी से यहां तीर्थ क्षेत्र भवन में पत्नी के साथ रहते हैं।

    सीईओ के लिए 5200 लोगों के आवेदन
    वहीं, सीईओ की नियुक्ति को लेकर ट्रस्ट के
    अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष बातचीत में बताया कि 52 सौ आवेदन आए हैं। इन सभी आवेदनों की स्क्रीनिंग और लिस्टिंग का काम सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में गठित कमेटी कर रही है। फिर भी इस प्रक्रिया में समय लगेगा। इसी को ध्यान में रखकर यहां सचिव का नया पद बनाने का निर्णय लिया गया था। फिलहाल दो सितंबर की बैठक में कार्यकारिणी के अनुमोदन के बाद सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभाल लेंगे।

    जगदीश आफले को ही बनाया गया अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता
    वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच खातों के संचालन को लेकर चल रहा गतिरोध भी समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ट्रस्ट ने जगदीश आफले को ही अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाने संबंधी नया प्रस्ताव पारित कर एसबीआई को भेज दिया है। बैंक ने भी औपचारिक स्वीकृति के बाद खातों का संचालन शुरू कर दिया है।

    आफले के ट्रस्टी न होने से आ रही थी दिक्कतें
    दरअसल, 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और पूर्व अभियंता जगदीश आफले के नाम बैंक को भेजे गए थे। लेकिन ट्रस्ट डीड के प्रावधानों के आधार पर एसबीआई ने जगदीश आफले के ट्रस्टी नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए कानूनी राय मांगी थी। इससे खाता संचालन में अस्थायी गतिरोध पैदा हो गया था।

    सूत्रों के अनुसार,ट्रस्ट में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतिम महासचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि ट्रस्ट ने नया प्रस्ताव पारित कर बैंक को भेज दिया, जिसमें जगदीश आफले के नाम पर सहमति दर्ज की गई है।

    वेतन और भुगतान पर पड़ा था असर
    खाता संचालन में आई रुकावट का असर ट्रस्ट के वित्तीय कार्यों पर भी पड़ा। करीब 1000 कर्मचारियों का जून माह का वेतन समय पर जारी नहीं हो सका था। इसके अलावा ट्रस्ट से जुड़ी विभिन्न आउटसोर्सिंग एजेंसियों का भुगतान भी प्रभावित हुआ। हालाकि एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक दिपेश राज ने कहा था कि एसबीआई और ट्रस्ट के बीच कोई विवाद नहीं है। ट्रस्ट के खातों से सभी लेन देन एसबीआई द्वारा किए जा रहे हैं।

  • अयोध्या पर बड़ा आतंकी खतरा? राम मंदिर को उड़ाने की साजिश के आरोप में संदिग्ध गिरफ्तार

    अयोध्या पर बड़ा आतंकी खतरा? राम मंदिर को उड़ाने की साजिश के आरोप में संदिग्ध गिरफ्तार

    अयोध्या 

    एनआईए और एटीएस ने अयोध्या के राम मंदिर को बम से उड़ाने की साजिश भंड़ाफोड़ किया है। यूपी के संदिग्ध आतंकी को कर्नाटक के दावणगेरे से गिरफ्तार किया है। संदिग्ध आतंकी ने अयोध्या में राम मंदिर को निशाना बनाने की साजिश कबूली है। आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान के नंबर, कुछ संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप और हथियारों के साथ लिए गए फोटो मिले हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज करके पूछताछ शुरू की गई है। आरोपी के संबंध में यूपी सरकार को भी सूचना भेजी गई है। इसके बाद सहारनपुर में भी छानबीन शुरू की गई है। इससे पहले दिनभर चर्चा रही कि आरोपी शाहजहांपुर का निवासी है। वहां भी कई टीमें दिनभर छानबीन में लगी रहीं।

    कर्नाटक के दावणगेरे जिले के हरिहर में एनआईए, एटीएस और पुलिस ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के लखनौती गांव के सुहैल को  गिरफ्तार किया। सुहैल फिलहाल हरिहर के पास औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में पेंटर के रूप में काम कर रहा था और सामान्य मजदूर की तरह रहकर अपनी पहचान छिपाए हुए था। आरोपी से एटीएस और पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो उसने खुलासा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में बम विस्फोट करने की साजिश कर रहे थे।

    20 साल के सुहैल के मोबाइल की जांच के दौरान पाकिस्तान का एक नंबर सेव मिला है, जिन्हें राणा बॉय के नाम से सुरक्षित किया गया था। इन नंबरों पर व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत की पुष्टि हुई है। आरोपी के मोबाइल गैलरी में हथियारों के साथ खिचवाए गए कुछ फोटो भी मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।

    सहारनपुर के एसपी ग्रामीण मयंक पाठक ने बताया कि बुधवार शाम कर्नाटक से थाना गंगोह एक फोन कॉल आई थी। कॉल करने वाले अधिकारी ने बताया कि सहारनपुर निवासी सुहेल के संबंध में एक ई-मेल भेजी गई है और उसे कर्नाटक में गिरफ्तार किया गया है। मामले में विस्तृत जानकारी मिलने पर जांच-पड़ताल की जाएगी। सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि किसी एजेंसी की ओर से सहयोग मांगा जाता है तो स्थानीय पुलिस आवश्यक कार्रवाई करेगी।

    ऐसे बनाई धमाकों की साजिश
    सुहैल ने खुलासा किया कि उसके साथ कई अन्य लोग भी साजिश में शामिल हैं। इन सभी लोगों को पाकिस्तान से ही निर्देश मिल रहे थे और अयोध्या के राम मंदिर में धमाकों की साजिश की जा रही थी। पता किया जा रहा है कि सुहैल के अलावा अन्य कौन कौन इस साजिश में शामिल है। माना जा रहा है कि स्लीपर सेल का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जा रहा है। आरोपी के मोबाइल की जांच में ये भी खुलासा हुआ कि वह मैमन जट और राणा भाई संगठन का सक्रिय सदस्य है।

    दावणगेरे के पुलिस अधीक्षक शेखर एच. टेक्कनवार ने बताया कि आरोपी सुहैल व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी मूल के व्यक्तियों के संपर्क में था। ये भी बताया कि इससे पहले चार जून को भी तुमकुरु और दावणगेरे जिलों से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो पाकिस्तानी मूल के संदिग्ध आरोपियों के संपर्क में थे।

    एडीजी भानु भास्कर के अनुसार कर्नाटक पुलिस ने एक संदिग्ध आतंकी सुहेल की गिरफ्तारी की सूचना भेजी है। सूचना के बाद यूपी एटीएस और एसटीएफ इस प्रकरण में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में लगी है। युवक के गांव और उससे संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।

  • राम मंदिर फंड पर नया विवाद? PMO की जानकारी मांगने पर ट्रस्ट ने देने से किया इनकार

    राम मंदिर फंड पर नया विवाद? PMO की जानकारी मांगने पर ट्रस्ट ने देने से किया इनकार

    अयोध्या
    अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी व चोरी मामले अब नया खुलासा हुआ है.  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर एसआइटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से इन्कार कर दिया है। 

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के स्थानीय बीजेपी नेता रजनीश सिंह के द्वारा लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने राममंदिर ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो  जांच का हवाला देकर ट्रस्ट ने आए हुए संपत्ति का विवरण देने से मना कर दिया। 

    बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन चंदा चढ़ना और जमीन खरीद फरोख्त में गड़बड़ियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. रजनीश सिंह ने पीएमओ से मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करे।  

    बीजेपी नेता ने पीएमओ से की शिकायत
    राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बीजेपी के स्थानीय नेता डा. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यलय को दो बार पत्र लिखा. रजनीश सिंह ने पहली बार नौ जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था। 

    उन्होंने मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे. इसके बाद दूसरी बार उन्होंने 12 जून को एक और पत्र लिखकर राम मंदिर के चढ़ावा को सार्वजनिक करने की मांगी की. 13 जून को एसआईटी गठित कर दी गई थी। 

    पीएमओ ने मांगा ट्रस्ट के चंदे का हिसाब
    बीजेपी नेता के पत्र को संज्ञान में लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यलय (पीएमओ) ने जिला प्रशासन को संदर्भित किया.  पीएमओ को मिली शिकायत के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को भेजा गया था. जिला प्रशासन ने इस मामले को लेकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट से संपर्क किया। 

     सूत्रों की मुताबिक 23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे एक पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने पीएमओ द्वारा शिकायत में मांगी गई जानकारी के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के चंपतराय से संपर्क किया था। 

    चंपत राय ने नहीं दिया चंदे का हिसाब 
    अयोध्या एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकां
    त द्विवेदी के मुताबिक चंपत राय ने यह कहकर कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया कि फिलहाल एसआईटी जांच चल रही है  और जांच पैनल सभी जरूरी रिकार्ड और जानकारी इकट्ठा कर रहा है.  इसीलिए अभी मांगी गई जानकारी नहीं दी जा सकती। 

    पीएमओ को बीजेपीके  नेता रजनीश सिंह के द्वारा भेजी गई शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी. इनमें 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए इकट्ठा किए गए कोष, अलग-अलग तरीकों से मिले दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर खर्च, और आडिट व निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं। 
     

  • रामलला के चढ़ावे में कथित हेराफेरी: 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट, दूसरे चरण की जांच आज से शुरू

    रामलला के चढ़ावे में कथित हेराफेरी: 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट, दूसरे चरण की जांच आज से शुरू

    अयोध्या
    अयोध्या राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अपनी अंतरिम रिपोर्ट आज देर शाम तक सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, अंतरिम रिपोर्ट पूरी हो चुकी है। इसे आज शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय को सौंपा जा सकता है।

    15 दिन बाद फाइनल रिपोर्ट
    श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के चढ़ावे में धांधली की जांच के लिए गठित एसआईटी सोमवार को प्रारम्भिक रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। रिपोर्ट पूरी करने के लिए शासन से नामित वरिष्ठ जांच अधिकारी भले शनिवार शाम लखनऊ चले गए, लेकिन उनका स्टाफ देर रात तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर के पीएफसी में कार्यरत रहा। यह टीम रविवार को भी पूरी सक्रियता से काम करती रही। 15 दिनों के बाद फाइनल रिपोर्ट सौंपी जाएगी। द्वितीय चरण की जांच एसआईटी सोमवार से शुरू करेगी।

    एसआईटी की प्रारम्भिक रिपोर्ट पर होगा मुकदमा
    टीम ने रिपोर्ट में शामिल लोगों के बयान में हुई भूल-चूक दुरुस्त करने के लिए दोबारा बुलाकर बयान दर्ज किया। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह टीम या इनका कोई अधिकृत व्यक्ति लखनऊ जाएगा और सोमवार को जांच टीम के अधिकारी रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे। पुनः शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित होगी, जिसमें प्रथम दृष्टया दोषसिद्धि के आधार पर संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

    नृपेन्द्र के बयानों से असहज हो रहे ट्रस्टी
    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में धांधली के साथ दिन-प्रतिदिन हो रहे नए खुलासों के बीच मीडिया में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य और भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र के बयान ने कठघरे में खड़े ट्रस्टियों को असहज कर दिया है। किसी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा से वरिष्ठतम अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त होकर और मंदिर ट्रस्ट में शामिल होते हुए भी उनकी ओर से बयान जारी करना उचित नहीं प्रतीत होता है। इससे ट्रस्ट की छवि ही नहीं प्रभावित हो रही, बल्कि मीडिया को भी अनर्गल प्रलाप का मौका मिल गया है।

    कई लोगों ने लगाए संगीन आरोप
    एक सप्ताह के भीतर देखें तो एसआईटी की जांच के बीच कुछ लोगों ने निर्माण से लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाने वाले रुपए और धातुओं को गायब करने का आरोप लगाया है। सूत्र बताते हैं कि अब जांच के दूसरे चरण में सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से जिन लोगों ने विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए हैं अब उनसे भी पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि उनके दावे में कितनी सच्चाई थी। इसके बाद बड़ी कार्रवाई की चर्चा है।

  • अयोध्या चढ़ावा चोरी केस: निगरानी और प्रशासनिक लापरवाही की जांच में SIT का दायरा बढ़ा

    अयोध्या चढ़ावा चोरी केस: निगरानी और प्रशासनिक लापरवाही की जांच में SIT का दायरा बढ़ा

    अयोध्या
    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी जानकारी सामने आई है. SIT के सूत्रों के मुताबिक गिनती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले कई लोग अपनी जिम्मेदारियों में विफल रहे. टिन्नू यादव समेत नकदी गिनने, रकम के प्रबंधन और कथित हेरफेर से जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी है.

    कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई एसआईटी जांच के दौरान होगी या जांच पूरी होने के बाद.

    जांच टीम ने प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में हुई नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. राम मंदिर में विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए लगभग 800 कर्मी तैनात हैं, जिनमें करीब 200 कर्मी ट्रस्ट द्वारा नियुक्त किए गए हैं.

    पुराने कर्मचारियों का डाटा जुटाने में जुटी टीम
    एसआईटी ने लंबे समय से मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और अन्य जिम्मेदार कर्मियों की सूची भी मांगी है. सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई ऐसे कर्मी का नाम सामने आया है जो पिछले कई वर्षों से मंदिर परिसर से जुड़े हुए हैं. जांच टीम पुराने कर्मचारियों की तैनाती अवधि, जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र की विस्तृत जानकारी जुटा रही है.

    जांच का फोकस अब केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि निगरानी, जवाबदेही और प्रशासनिक लापरवाही की भूमिका पर भी है. आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच और तेज होने के साथ कई नए नामों के सामने आने की संभावना है. फिलहाल एसआईटी मामले की जांच कर रही है.  

    अखिलेश बोले भाजपाई राजनीति यहीं से शुरू और यहीं पर अंत
    चढ़ावा चोरी मामले में अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि अयोध्या महापापियों के लिए कुरुक्षेत्र साबित होगी. यहीं भाजपाई राजनीति का आरंभ हुआ था, यहीं अंत भी होगा. अयोध्या में ‘चढ़ावे-चंदे-दान-शिला चोरी’ की घटना के बाद से यहां आनेवाले दर्शनार्थियों की संख्या पर नकारात्मक असर पड़ा है. लोगों की आस्थाएं खंडित हुई हैं. इसका सीधा असर अयोध्या के स्थानीय काम-कारोबार और आम आदमी की आमदनी पर पड़ा है. सरकार की गलती का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते.

    अयोध्या और आस-पास के सभी क्षेत्रों में भयंकर आक्रोश पनप रहा है. इस पावन सनातनी तीर्थ की शुचिता जिन भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की वजह से कलुषित हुई है, वो अपना कारनामा करके सदैव की तरह भूमिगत हो गये हैं.अस्पष्टता के कारण वातावरण और भी शंकापूर्ण व तनावपूर्ण हो गया है. स्थानीय लोग मंदिर जाने से भी घबरा रहे हैं कि कहीं उनको ही जांच के नाम पर फंसा न दिया जाए.

    श्रद्धालुओं में एक अज्ञात भय व्याप्त हो गया है. जांच कहां तक पहुंची इसकी डेली ब्रीफिंग होनी चाहिए क्योंकि भाजपा सरकार में हो रहे ‘चतुर्दिक महा-भ्रष्टाचार’ के कारण जनता का SIT तक पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है. मथुरा से भी आई धांधली की ख़बर बेहद गंभीर है, उसकी भी उच्च स्तरीय विश्वसनीय जांच हो.