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  • रक्षाबंधन के पर्व पर यूपी पुलिस की मुस्तैदी, कानून-व्यवस्था रही चाक-चौबंद

    रक्षाबंधन के पर्व पर यूपी पुलिस की मुस्तैदी, कानून-व्यवस्था रही चाक-चौबंद

    रक्षाबंधन पर दिखी यूपी में कानून-व्यवस्था की ताकत

    प्रो. सोनाली सिंह, राजनीति विज्ञान विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
    वाराणसी

    (भाई-बहन का पर्व मनाने के लिए आभूषणों से सज्जित महिलाएं, लेकिन सड़क हो या बस अड्डा, किसी बदमाश या शोहदे की हिम्मत नहीं कि उनके साथ चेन-स्नेचिंग, झपटमारी या छेड़खानी जैसी वारदात करने का दुस्साहस कर सके। रक्षापर्व पर योगी सरकार की तीन दिवसीय निशुल्क बस यात्रा के पहले दो दिन में करीब 60 लाख महिलाओं ने इसका लाभ उठाया, लेकिन कहीं कोई आपराधिक घटना नहीं। यही है योगी सरकार में क्राइम के प्रति जीरो टॉलरेंस मॉडल की सफलता का बेमिसाल उदाहरण।)

    उत्तर प्रदेश की पावन धरा पर रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और सुरक्षा का उत्सव है। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों को एक बड़ा उपहार देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की सभी श्रेणी की बसों में तीन दिनों के लिए निशुल्क बस यात्रा की ऐतिहासिक घोषणा की। सरकार ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए न केवल महिलाओं को, बल्कि उनके साथ यात्रा कर रहे एक सहयात्री (चाहे वे उनके छोटे बच्चे हों या अन्य संबंधी) को भी तीन दिनों तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी। इस जनहितैषी निर्णय का प्रभाव पूरे प्रदेश में व्यापक और अभूतपूर्व रूप से देखने को मिला।

    सुरक्षा, सेवा व सम्मान का संगम
    इस महापर्व पर सुरक्षा, सेवा और सम्मान के संगम की एक अनोखी तस्वीर उभरकर सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, निशुल्क यात्रा के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही लगभग 60 लाख महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने परिवहन निगम की बसों में सफर कर इस राज्यव्यापी सुविधा का भरपूर लाभ उठाया। बस अड्डों और मुख्य मार्गों पर यात्रियों का भारी जमावड़ा रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की पूर्व-तैयारियों के कारण यह विशाल यातायात सुचारु और अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संचालित हुआ। हर जिले, कस्बे और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बहनें बिना किसी आर्थिक या व्यावहारिक चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने आसानी से आ-जा सकीं।

    महिलाओं को मिली संपूर्ण सुरक्षा
    इस पूरे अभियान और उत्सव की सबसे अभूतपूर्व और खास बात जो सामने आई, वह थी यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा। अक्सर त्योहारों के मौके पर जब सार्वजनिक परिवहन में लाखों की भारी भीड़ उमड़ती है, तब झपटमारी,  चेन स्नेचिंग, चोरी, पॉकेटमारी, सामान गायब होने या महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश की परिवहन बसों और बस अड्डों से इन दो-तीन दिनों के दौरान अपराध की एक भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। इतने विशाल जनसैलाब के बीच एक भी आपराधिक वारदात का न होना न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह आम जनता के मन में व्यवस्था के प्रति गहरे विश्वास को भी उजागर करता है।

    अराजक तत्वों में शासन-प्रशासन का खौफ
    बसों और बस अड्डों में शून्य अपराध की यह उपलब्धि किसी संजोग का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में स्थापित हुए योगी सरकार के 'क्राइम पर जीरो टॉलरेंस मॉडल' की एक बहुत भारी और प्रत्यक्ष सफलता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कानून व्यवस्था के क्षेत्र में जो नए मानक तय किए हैं, यह घटनाक्रम उसी का जीवंत प्रमाण है। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश की बेटियों, महिलाओं और नागरिक की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। इसी नीति का खौफ असामाजिक तत्वों और अपराधियों के मन में इस कदर बैठा हुआ है कि भीड़भाड़ वाले संवेदनशील मौकों पर भी कोई अपराध करने का दुस्साहस नहीं कर पाता।

    तैनात रहा अभेद्य सुरक्षा चक्र
    इस दौरान प्रदेश भर के प्रमुख बस टर्मिनलों, डिपो और महत्वपूर्ण चौराहों पर पुलिस प्रशासन, महिला पुलिस बल (पिंक पैंथर्स/मिशन शक्ति की टीमें) और परिवहन विभाग के अधिकारियों का एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैनात रहा। तकनीक का आधुनिक इस्तेमाल, सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, इंटेलिजेंस इनपुट और बस अड्डों से लेकर यात्रा के रास्तों पर निरंतर गश्त ने अपराधियों के मन में डर और आम यात्रियों के मन में सुरक्षा की भावना पैदा की। महिला यात्रियों ने बिना किसी भय के देर रात तक सुरक्षित यात्रा की और सरकार की इस सशक्त व्यवस्था पर संतोष जताया। यह भी एक तथ्य है कि अनगिनत महिलाओं ने भयमुक्त होकर बिना किसी सहयात्री के बस सेवा का लाभ उठाया।

    अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय
    रक्षाबंधन के इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो और प्रशासनिक तंत्र चुस्त-दुरुस्त हो, तो किसी भी विशाल आयोजन को बिना किसी विघ्न और अपराध के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है। करीब 60 लाख से अधिक महिलाओं का सुगम, सम्मानजनक और पूरी तरह से भयमुक्त सफर उत्तर प्रदेश के सुशासन का नया प्रतीक बन चुका है। योगी सरकार का यह सुरक्षा और सेवा मॉडल आज न केवल प्रदेश के नागरिकों के मन में अपनी सरकार के प्रति गहरा विश्वास पैदा कर रहा है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी जनसेवा, नारी सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

  • भाई की कलाई पर राखी, आंखों में आंसू: राजस्थान की जेलों में रक्षाबंधन पर खास मुलाकात

    भाई की कलाई पर राखी, आंखों में आंसू: राजस्थान की जेलों में रक्षाबंधन पर खास मुलाकात

    जयपुर 
     रक्षाबंधन के त्योहार पर शुक्रवार को राजस्थान की जेलों में भाई-बहन के रिश्ते की भावुक तस्वीर देखने को मिली। जयपुर, अजमेर, कोटा समेत राजस्थान की अलग-अलग जेलों में सुबह से ही बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। किसी ने भाई की कलाई पर राखी बांधी, किसी ने मिठाई खिलाई तो किसी ने कुछ देर बात कर अपना मन हल्का किया। लंबे समय बाद भाई से मिलने की खुशी के साथ कई बहनों की आंखों में आंसू भी छलक पड़े।

    जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन को देखते हुए बंदियों से मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा के बीच बहनों को जेल परिसर में एंट्री दी गई और बंदी भाइयों से मुलाकात कराई। सुबह से ही कई जेलों के बाहर परिजनों की भीड़ नजर आई। बहनों के हाथों में राखियां और मिठाई थी तो दिल में भाई से मिलने की खुशी और उसके जल्द घर लौटने की उम्मीद थी।
    कोटा जेल में भाई को राखी बांधने के लिए पहुंचीं बहनें (फोटो: पत्रिका नीरज गौतम)

    जयपुर में बड़ी संख्या में पहुंचीं बहनें
    जयपुर सेंट्रल जेल में सुबह से ही बहनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जेल के मुख्य गेट के पास मुलाकात की विशेष व्यवस्था की गई थी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद बहनों को भाइयों से मिलने दिया गया। मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई।

    भाई के सामने आते ही कई बहनें भावुक हो गईं। कुछ देर की मुलाकात में किसी ने भाई का हाल जाना तो किसी ने उसे जल्द घर लौटने की बात कही। भाइयों के चेहरे पर भी बहनों से मिलने की खुशी साफ दिखाई दी।

    अजमेर में भी सलाखों के बीच बंधी राखी
    अजमेर सेंट्रल जेल में भी रक्षाबंधन पर खास मुलाकात की व्यवस्था की गई। सुबह से बहनें भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। जेल के मुख्य गेट पर ही परिजनों के डॉक्यूमेंट ले लिए, जिसके बाद मुलाकात के लिए व्यवस्था करवाई। राखी बांधने के दौरान कई बहनों और भाइयों की आंखें नम हो गईं। भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर मिठाई खिलाई और उनकी सलामती की कामना की।

    कोटा में भी दिखा भाई-बहन का प्यार
    कोटा में भी रक्षाबंधन के मौके पर जेल में बंद भाइयों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं। जेल प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए। एंट्री से पहले परिजनों के नाम-पते दर्ज किए गए और पहचान पत्र की जांच के बाद अंदर जाने की अनुमति दी। मुलाकात के दौरान भाइयों और बहनों को सीमित समय दिया। कुछ पलों की इस मुलाकात में कई भाई-बहन भावुक हो गए। राजस्थान की जेलों में रक्षाबंधन को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। जेल प्रशासन की ओर से मुलाकात के लिए अलग व्यवस्था की गई।

  • रक्षाबंधन पर महाकाल के दरबार में खास परंपरा, सबसे पहले बाबा को बांधी गई 2 फीट लंबी राखी

    रक्षाबंधन पर महाकाल के दरबार में खास परंपरा, सबसे पहले बाबा को बांधी गई 2 फीट लंबी राखी

    उज्जैन 

    रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कालों के काल बाबा महाकाल के दरबार में अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सनातन परंपरा के अनुसार सभी त्योहारों की शुरुआत महाकाल की नगरी से ही होती है। इसी कड़ी में आज श्रावण पूर्णिमा के अंतिम दिन तड़के 3 बजे होने वाली भस्म आरती के दौरान सबसे पहले बाबा महाकाल को रक्षासूत्र (राखी) बांधी गई। मान्यता है कि सृष्टि में पहला रक्षासूत्र बाबा महाकाल को ही अर्पित किया जाता है और जिन बहनों का कोई भाई नहीं होता, वे महाकाल को ही अपना भ्राता मानकर रक्षाबंधन मनाती हैं।

    इस बार बाबा महाकाल को विशेष रूप से तैयार की गई 6 आकर्षक राखियां अर्पित की गईं। पुजारी परिवार की ओर से रागिनी शर्मा द्वारा बनाई गई 1.5 से 2 फीट की विशेष दिव्य राखी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इस राखी में शैव और वैष्णव परंपरा का सुंदर संगम दिखा, जिसमें कांच वर्क, रुद्राक्ष, त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता की आकृति को भी समाहित किया गया था।

    सवा लाख लड्डुओं के भोग से खुला एक माह का उपवास
    भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार के बाद बाबा महाकाल को शुद्ध घी और बेसन से बने सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। मंदिर परिसर में ही बीते एक सप्ताह से पुजारी परिवार द्वारा यह प्रसादी तैयार की जा रही थी। पुजारी पं. ओम गुरु और पं. राघव गुरु ने बताया कि रक्षाबंधन पर बाबा को लगाए जाने वाले इस महाभोग की खास मान्यता है। पूरे श्रावण मास व्रत और उपवास रखने वाले भक्त भस्म आरती के बाद बाबा की इसी महाप्रसादी को ग्रहण कर अपना एक माह का उपवास खोलते हैं।
    रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया गया। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे श्रावण मास में व्रत और उपवास रखते हैं, वे श्रावणी पूर्णिमा पर भगवान महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण कर अपना उपवास खोलते हैं। अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंच सके, इसके लिए पुजारी परिवार की ओर से बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया। रक्षाबंधन के मौके पर महाकाल मंदिर में हुई विशेष पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और परंपरा का खास आकर्षण बनी रही।

    भस्म आरती में उमड़ा जनसैलाब
    श्रावण के अंतिम दिन और रक्षाबंधन के संयोग पर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा था। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर परिसर में 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष गूंजते रहे। पंडे-पुजारियों की बहनों और देश-विदेश से आई महिला श्रद्धालुओं ने महाकाल को राखी अर्पित कर अपने भाइयों की लंबी उम्र, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

    रात 2 बजे मंदिर पहुंचीं महिलाएं
    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती के दौरान राखी बांधने तक उन्होंने मंत्रोच्चार किया। भस्म अर्पित होने के बाद विशेष राखी बाबा महाकाल को समर्पित की गई।राखी बांधने के बाद महिलाओं ने मंदिर से मिले प्रसाद से अपना व्रत खोला। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के भाइयों को राखी बांधी।

    रेशमी कपड़े, मोर पंख और रुद्राक्ष से सजाई राखी
    पुजारी आकाश गुरु ने बताया कि करीब 2 फीट की इस विशेष राखी को रेशमी कपड़े, रेशमी धागे और आभूषणों से तैयार किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता को भी स्थान दिया गया है।

    राखी को आकर्षक बनाने के लिए इसमें कांच वर्क, मोर पंख और रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही बाबा महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी राखी के डिजाइन में शामिल किया गया है।

    राखी बनाते समय किया मंत्र जाप
    पुजारी परिवार की महिलाओं ने राखी तैयार करते समय भी धार्मिक परंपराओं का पालन किया। राखी निर्माण के दौरान वे लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं। करीब एक सप्ताह की मेहनत से तैयार इस राखी को रक्षाबंधन की भस्म आरती में बाबा महाकाल को अर्पित किया गया।

  • राखी के धागे में विष्णु भैया का साथ, महतारी वंदन की राशि से कुसुम की रक्षाबंधन की खुशियां हुईं दोगुनी

    राखी के धागे में विष्णु भैया का साथ, महतारी वंदन की राशि से कुसुम की रक्षाबंधन की खुशियां हुईं दोगुनी

    रायपुर

    भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार सरगुजा जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल की नई खुशी लेकर आया है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि त्योहार से पहले मिलने से महिलाओं को रक्षाबंधन की तैयारियां करने में सहूलियत मिली है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पुहपुटरा निवासी श्रीमती कुसुम शुक्ला के लिए भी समय पर मिली यह राशि त्योहार की खुशियों को दोगुना करने वाली साबित हुई है।

    कुसुम शुक्ला ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि से वे अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीद रही हैं। रक्षाबंधन से पहले राशि मिलने से इस बार वे बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने और परिवार के साथ पर्व मनाने की तैयारी कर पा रही हैं।

    रक्षाबंधन से पहले मिला संबल, चेहरे पर आई खुशी

    कुसुम शुक्ला ने कहा कि महतारी वंदन योजना की राशि समय पर मिलने से उन्हें बहुत खुशी हुई है। उन्होंने कहा, “राखी बांधने से पहले राशि मिल गई है। इससे राखी और मिठाई लेने में मदद मिलेगी। मैं बहुत खुश हूं। दीदी-बहनों की तरफ से विष्णु भैया को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।” उन्होंने बताया कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। त्योहारों के अवसर पर इस राशि का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि महिलाएं अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार खरीदारी कर परिवार की खुशियों में सहभागी बन पाती हैं।

    महिलाओं के आर्थिक आत्मविश्वास को मिल रहा बल

    महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक संबल का माध्यम बन रही है। योजना की सहायता राशि से महिलाएं घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत और पारिवारिक आयोजनों में भी आर्थिक योगदान दे पा रही हैं।

    कुसुम शुक्ला की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर है। उनके लिए योजना की राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम के पर्व को खुशी और आत्मविश्वास के साथ मनाने का अवसर भी है। समय पर मिली राशि ने उन्हें राखी और मिठाई की खरीदारी करने में मदद दी और त्योहार की तैयारियों को सहज बनाया।

    विष्णु भैया के प्रति जताया आभार

    कुसुम शुक्ला ने रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की राशि मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार और त्योहारों की खुशियों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर पा रही हैं।

    कुसुम के लिए इस बार रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ राखी और मिठाई की खरीदारी तक सीमित नहीं है। महतारी वंदन की राशि ने उनके भीतर यह विश्वास भी मजबूत किया है कि वे अपनी छोटी-छोटी खुशियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों में आर्थिक रूप से अपना योगदान दे सकती हैं।

    राखी के धागे में भाई-बहन के प्रेम के साथ आर्थिक संबल का विश्वास जुड़ गया है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त ने कुसुम शुक्ला जैसी महिलाओं के लिए रक्षाबंधन की तैयारियों को आसान बनाया है और त्योहार की खुशियों को नई आत्मीयता दी है।

  • भद्रा मुक्त रक्षाबंधन आज, चंडीगढ़ में 12 फीट की राखी और महिलाओं को ₹1000 का तोहफा

    भद्रा मुक्त रक्षाबंधन आज, चंडीगढ़ में 12 फीट की राखी और महिलाओं को ₹1000 का तोहफा

    चंडीगढ़ 
    रक्षाबंधन और रक्खड़ पुन्या के मौके पर पंजाब-चंडीगढ़ में आज कई खास आयोजन होंगे। रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा की छाया नहीं है और सुबह 6 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूरे दिन भी राखी बांधी जा सकती है।

    वहीं, चंडीगढ़ के सेक्टर-40 बी स्थित श्री हनुमंत धाम में 32 फीट ऊंची वीर हनुमान जी की प्रतिमा के लिए बहनों ने 12¼ फीट से अधिक लंबी पर्यावरण अनुकूल राखी तैयार की है, जिसे सुबह 11:15 बजे विधि-विधान से बांधा जाएगा।

    दूसरी ओर, रक्खड़ पुन्या के अवसर पर बाबा बकाला में राज्य स्तरीय समारोह होगा, जिसमें सीएम भगवंत मान महिलाओं को ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत सम्मान राशि जारी करेंगे। योजना के तहत अब तक 76 लाख 5 हजार महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपए और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है।

    चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा
    ज्योतिषाचार्य रचना शर्मा के अनुसार, इस बार पूर्णिमा उदया तिथि में है और सुबह का समय शुभ है, हालांकि पूरे दिन भी राखी बांधी जा सकती है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर भद्रा की छाया नहीं है, लेकिन 27 अगस्त से पंचक शुरू हो चुके हैं। इसलिए राखी बांधने से पहले घर के पूजा स्थल पर राखी चढ़ाने की सलाह दी गई है। वहीं, आचार्य सुमित वेदपाठी के अनुसार, 28 अगस्त को चंद्रग्रहण भी लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा।

    ऐसे में यहां इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु बिना किसी संशय के पूरे उत्साह व विधि-विधान के साथ रक्षाबंधन मना सकते हैं। इस साल रक्षाबंधन का ऐसा मुहूर्त आया है कि न तो भद्रा का प्रभाव है और न ही कोई अन्य बाधा। आज बहनें निश्चिंत होकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।

    सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी भद्रा
    आचार्य सोहन वेदपाठी के अनुसार, रक्षाबंधन का मुहूर्त तय करने के लिए दो चीजें देखी जाती हैं। एक पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए दूसरा भद्रा काल न हो। इस बार भद्रा काल सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गया। इसलिए सुबह राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी।

    यही कारण है कि 28 अगस्त की सुबह का समय राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम है। ज्योतिषाचार्य रचना शर्मा का कहना है कि बहनें कोशिश करें कि पूर्णिमा तिथि में ही राखी बांधे, लेकिन उसके बाद भी राखी बांधने में कोई दोष नहीं है। उनका कहना है कि हम उदया तिथि को ही पूरे दिन की तिथि मानते हैं। ऐसे में पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

    पूजा की थाली में ये चीजें रखें
    आचार्य के अनुसार, राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जा सकती है। इसमें राखी, मौली, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और फूल रखे जाते हैं। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार नारियल, मौली, फल और पानी का कलश भी रखते हैं। पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद भाई को तिलक लगाया जाता है, चावल लगाए जाते हैं और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर पहले मौली और फिर राखी बांधी जाती है।

    अटारी बॉर्डर पर जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाएंगी चावला
    पूर्व मंत्री व भाजपा नेता लक्ष्मी कांता चावला हर साल अटारी बॉर्डर पर जाकर बीएसएफ जवाने के साथ रक्षा बंधन का पर्व मनाती हैं। वो राखियां लेकर जाती हैं और जवानों को राखियां बांधकर उनके कुशल मंगल की कामना करती हैं। अन्य संस्थाओं से जुड़ी महिलाएं भी रक्षा बंधन के पर्व पर अटारी बॉर्डर जाकर जवानों की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं।

    इसके अलावा पंजाब की जेलों में हर साल कैदियों और हवालातियों को उनकी बहनें राखी बांधने जाती हैं। इसी तरह महिला जेलों में बंद बहनों से राखी बंधवाने के लिए उनके भाई भी पहुंचते हैं। जेल प्रशासन की तरफ से इस मौके पर विशेष इंतजाम किए जाते हैं।

    श्री दंडी स्वामी मंदिर में राखी बांधने आती हैं महिलाएं
    लुधियाना के दंडी स्वामी मंदिर में बड़ी संख्या में महिलाएं राखी लेकर पहुंचती हैं। महिलाएं श्री दंडी स्वामी जी को राखियां अर्पित करती हैं। इसी तरह लोग अलग अलग मंदिरों में भगवान का राखियां अर्पित करने जाती हैं।

  • रक्षाबंधन 2026: पंचक के बीच कब बांधें राखी? जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

    रक्षाबंधन 2026: पंचक के बीच कब बांधें राखी? जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

     रक्षा बंधन का पर्व अटूट प्रेम, विश्वास और आस्था का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। रक्षा सूत्र को राखी भी कहा जाता है। यह पर्व सावन माह के आखिरी दिन सावन पूर्णिमा को मनाने की परंपरा है। इस साल सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और पंचक का साया रहने के कारण लोगों के मन में सवाल है कि राखी बांधना किस समय शुभ रहेगा। सबसे पहले आप जान लें कि भारत में चंद्र ग्रहण की दृश्यता नहीं रहेगी, जिसके कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि ग्रहण देश में नजर नहीं आने के कारण इसका राखी या रक्षा बंधन पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि राखी पर पूरे दिन पंचक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में पंचक के समय राखी बांधने पर रोक नहीं है। राखी बांधने के लिए राहुकाल का भी विचार किया जाता है। आइए जानते हैं कि राहुकाल रहित 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त।

    पंचक कब से कब तक रहेगा:
    पंचांग के अनुसार, पंचक 27 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर प्रारंभ हो चुका है और 01 सितंबर की सुबह 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। यह पंचक गुरुवार से शुरू हुआ है, इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जाता है। शास्त्रों में अग्नि पंचक को भाई-बहन के त्योहार का बाधक नहीं माना गया है।

    राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त:
    28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षा बंधन के दिन सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त रहने वाला है।

    28 अगस्त को राहुकाल कब से कब तक रहेगा:
    रक्षा बंधन के दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि इस समय राखी बांधने से बचना चाहिए।

    राहुकाल रहित राखी बांधने के शुभ मुहूर्त:
    ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:39 बजे से सुबह 06:20 बजे तक।

    प्रातः सन्ध्या- सुबह 06:00 बजे से सुबह 07:02 बजे तक।

    अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:19 बजे तक।

    विजय मुहूर्त- शाम 04:08 बजे से शाम 05:03 बजे तक।

    गोधूलि मुहूर्त- रात 08:41 बजे से रात 09:02 बजे तक।

    सायाह्न सन्ध्या- रात 08:41 बजे से रात 09:43 बजे तक।

    अमृत काल- शाम 04:14 बजे से शाम 05:53 बजे तक।

    रक्षाबंधन पर राखी बांधने के चौघड़िया मुहूर्त
    लाभ चौघड़िया – सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:10 बजे तक।

    अमृत चौघड़िया – सुबह 09:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तक।

    शुभ चौघड़िया – दोपहर 12:22 बजे से दोपहर 01:58 बजे तक।

    चर चौघड़िया – शाम 05:11 बजे से शाम 06:47 बजे तक।

    राखी बांधते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए:
    राखी बांधते समय इस प्रसिद्ध पौराणिक मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है:
    येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
    तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

    अर्थ:
    इस श्लोक का अर्थ है- जिस रक्षासूत्र से सबसे शक्तिशाली और बलशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम स्थिर रहना, कभी अपने कर्तव्य से विचलित मत होना और सदैव रक्षा करना।

    तिलक और आरती:
    राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं और आरती उतारें। अब भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधे।
    राखी बांधते समय भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए:

    शास्त्रों में राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।

  • रांची की 3,95,692 महिलाओं को मिला मंईयां सम्मान योजना का लाभ, DBT से भेजे गए ₹2500

    रांची की 3,95,692 महिलाओं को मिला मंईयां सम्मान योजना का लाभ, DBT से भेजे गए ₹2500

    रांची
    रक्षाबंधन से पहले झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले की महिलाओं को सम्मान राशि का भुगतान किया है। अगस्त 2026 की राशि जिले की 3 लाख 95 हजार 692 लाभुकों के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेज दी गई है।

    योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को 2500 रुपये की सम्मान राशि दी गई है। रांची जिले के लाभुकों के खातों में कुल 98 करोड़ 92 लाख 30 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए हैं।

    रांची जिले में प्रखंड और शहरी क्षेत्रवार लाभुकों को योजना का लाभ दिया गया है। इनमें कांके में 31,620, टाउन अर्बन क्षेत्र में 26,042, मांडर में 23,008, सिल्ली में 21,335, बेड़ो में 20,620 और रातू में 20,427 लाभुक शामिल हैं।

    जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। रांची जिले में पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे। लाभुकों के भुगतान की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जा रही है और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। यह योजना आर्थिक सहायता के साथ-साथ महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। 

  • भाई से दूर हैं तो ऐसे मनाएं रक्षाबंधन, बारिश-बाढ़ में भी नहीं टूटेगी राखी की परंपरा

    भाई से दूर हैं तो ऐसे मनाएं रक्षाबंधन, बारिश-बाढ़ में भी नहीं टूटेगी राखी की परंपरा

    रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को है. देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और खराब मौसम ने बहनों की परेशानी बढ़ा दी है. इस कारण रक्षाबंधन पर बहनों का अपने भाई के घर पहुंचना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बहन भाई की कलाई पर खुद राखी न बांध पाए तो क्या त्योहार अधूरा माना जाएगा.

    राखी का मूल भाव भाई-बहन के स्नेह, मंगलकामना से जुड़ा होता है, इसलिए दूरी या परिस्थितियों के कारण भाई को राखी नहीं बांध पाएं तो कैसे मनाए ये त्योहार जान लें.

    भाई दूर हो तो कैसे बांधें राखी?
    अगर बहन किसी कारण भाई के पास नहीं पहुंच सकती, तो सबसे राखी के सा

    रोली, अक्षत, नारियल कुरियर कर दें. शुभ मुहूर्त में बहन अपने घर में भगवान के सामने भाई का स्मरण करके उसके सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना कर सकती है. इसके बाद भाई स्वयं या घर में मौजूद बहन, रिश्तेदार की सहायता से राखी बंधवा सकता है.

    वीडियो कॉल पर भी निभा सकते हैं परंपरा
    अगर बारिश, बाढ़, ट्रेन-फ्लाइट रद्द होने या किसी और मजबूरी के कारण राखी समय पर भेजना भी संभव न हो, तो बहन वीडियो कॉल के जरिए भाई के सामने पूजा कर सकती है. अगर भाई बहुत दूर है, तो भगवान के सामने राखी अर्पित करके भाई को वीडियो कॉल पर आशीर्वाद, मंगलकामना देना और बाद में राखी भेज सकते हैं, क्योंकि रक्षाबंधन का त्योहार जन्माष्टमी तक मनाया जाता है. 

    राखी बांधने की सही धार्मिक विधि
        रक्षाबंधन के दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें.
        भाई को शुभ दिशा में बैठाकर पहले भगवान गणेश और इष्टदेव का स्मरण करें.
        इसके बाद भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और आरती करें.
        फिर दाहिनी कलाई पर राखी बांधें. राखी बांधते समय भाई के सुख, समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु की कामना करें.
        इसके बाद भाई अपनी बहन को कुछ भेंट दें और उनकी सुरक्षा का वादा करें.

    1. अगर बहन भाई के घर नहीं पहुंच पाए तो क्या रक्षाबंधन अधूरा माना जाएगा?
    नहीं. रक्षाबंधन का मूल भाव भाई-बहन के स्नेह, मंगलकामना और एक-दूसरे की कुशलता की प्रार्थना से जुड़ा है. बारिश, बाढ़ या यात्रा में परेशानी जैसी परिस्थितियों में बहन भाई के पास नहीं पहुंच पाए तो त्योहार की भावना अधूरी नहीं मानी जाती. ऐसी स्थिति में राखी, रोली, अक्षत और नारियल भेजकर भाई से शुभ मुहूर्त में राखी बंधवाई जा सकती है.

    2. क्या भाई के नाम की राखी भगवान को अर्पित कर सकते हैं?
    अगर भाई दूर है और बहन स्वयं राखी नहीं बांध पा रही है, तो भगवान के सामने राखी रखकर भाई के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना कर सकती है. राखी को भगवान के चरणों में अर्पित करके भाई को बाद में भेजना भी एक भावनात्मक धार्मिक उपाय हो सकता है. हालांकि, इसे शास्त्र में भाई की कलाई पर राखी बांधने के समान मूल विधि नहीं माना जाता.

    3. क्या वीडियो कॉल के जरिए रक्षाबंधन मना सकते हैं?
    हां, मजबूरी की स्थिति में वीडियो कॉल के जरिए भी भाई-बहन रक्षाबंधन की भावना निभा सकते हैं. बहन अपने घर में पूजा करके भाई का स्मरण करे और उसकी मंगलकामना करे. भाई के पास राखी पहुंच गई हो तो वह परिवार के किसी सदस्य की सहायता से राखी बंधवा सकता है. अगर राखी समय पर नहीं पहुंची है, तो बहन भगवान के सामने राखी अर्पित करके भाई के लिए प्रार्थना कर सकती है और बाद में राखी भेज सकती है.

  • Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त? जानें राखी बांधने की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

    Raksha Bandhan 2026: 27 या 28 अगस्त? जानें राखी बांधने की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

    रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही इस बार सबसे ज्यादा उलझन इसकी तारीख को लेकर है.  सावन पूर्णिमा की तिथि दो कैलेंडर तारीखों यानी 27 और 28 अगस्त को पड़ रही है, इसलिए कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर भाई की कलाई पर राखी 27 अगस्त को बांधी जाए या 28 अगस्त को.  पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा.  पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी.

    28 अगस्त को ही क्यों मनाया जाएगा रक्षाबंधन?
    हिंदू पंचांग में रक्षाबंधन के लिए केवल पूर्णिमा तिथि का होना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. राखी बांधने के समय भद्रा का विचार भी किया जाता है.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता.

    इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होगी. 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी.  ऐसे में 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी और भद्रा भी समाप्त हो चुकी होगी. इसी वजह से रक्षाबंधन के लिए 28 अगस्त की तारीख मान्य है.

    27 अगस्त को क्या रहेगा?
    27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि की शुरुआत जरूर हो जाएगी, लेकिन इस दिन भद्रा का प्रभाव रहने के कारण दिन में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है. पंचांग गणना के अनुसार भद्रा 27 अगस्त की रात तक समाप्त हो जाएगी. इसलिए राखी बांधने के लिए 28 अगस्त की सुबह का समय ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा है.

    28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

    दिल्ली के पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय बताया गया है. यह समय पूर्णिमा तिथि के समाप्त होने तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

    रक्षाबंधन के दिन बताए गए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं—
    अमृत चौघड़िया: सुबह 6:08 बजे से 10:53 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक
    शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक
    अपराह्न काल: दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक
    चर चौघड़िया: शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक

    राखी बांधते समय किन बातों का रखें ध्यान?
    राखी बांधने से पहले भाई को आसन पर बैठाकर तिलक लगाना, अक्षत लगाना और मिठाई खिलाने की परंपरा है. पूजा की थाली में राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, चंदन, दीपक और मिठाई रखी जा सकती है.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है. इसके बाद बहन भाई की आरती उतारकर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है.

    रक्षाबंधन पर बन रहा खास संयोग
    इस साल रक्षाबंधन शुक्रवार को पड़ रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार सावन पूर्णिमा पर शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग और मीन राशि में चंद्रमा का संयोग बनने की बात कही जा रही है. शुक्रवार और सुकर्मा योग का संयोग भी इस पर्व को विशेष माना जा रहा है.

    रक्षाबंधन का महत्व
    रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. बहन भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है, जबकि भाई उसकी रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है.

  • रक्षाबंधन पर सजे बाजार, भाई-बहन के प्रेम संग दिखी भारत-नेपाल की सांस्कृतिक मिठास

    रक्षाबंधन पर सजे बाजार, भाई-बहन के प्रेम संग दिखी भारत-नेपाल की सांस्कृतिक मिठास

     फुलकाहा (अररिया)
    भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे नरपतगंज क्षेत्र के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है।

    बाजारों में रंग-बिरंगी, डिजाइनर, बच्चों की पसंदीदा कार्टून राखियों से लेकर पारंपरिक और आकर्षक राखियों की बिक्री शुरू हो गई है। दुकानदारों ने भी पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की हैं।

    रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और जीवनभर उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।

    इतिहास और परंपराओं से जुड़ा है रक्षाबंधन
    रक्षाबंधन का इतिहास भारतीय पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि प्राचीन काल से ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा समाज में प्रचलित रही है। यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि रक्षा, विश्वास और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता था।

    पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख मिलता है, जबकि ऐतिहासिक परंपराओं में भी रक्षा सूत्र के माध्यम से संबंधों को मजबूत करने की अनेक कथाएं प्रचलित हैं।

    यही कारण है कि समय के साथ रक्षाबंधन भारतीय समाज में प्रेम और सुरक्षा के एक बड़े सांस्कृतिक पर्व के रूप में स्थापित हो गया।

    नरपतगंज के बाजारों में राखियों की चहल-पहल
    रक्षाबंधन को लेकर नरपतगंज क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में इन दिनों चहल-पहल शुरू हो गई है। दुकानों पर तरह-तरह की राखियां सजाई गई हैं। बच्चों के लिए कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां, युवाओं के लिए स्टाइलिश राखियां तथा पारंपरिक पसंद रखने वालों के लिए साधारण और धार्मिक डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं।
    दुकानदारों का कहना है कि त्योहार के करीब आने के साथ बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।

    भारत-नेपाल के रिश्तों की भी दिखती है खूबसूरत झलक
    सीमावर्ती नरपतगंज क्षेत्र में रक्षाबंधन का पर्व केवल पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के सदियों पुराने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की भी सुंदर झलक प्रस्तुत करता है। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच लंबे समय से रोटी-बेटी का संबंध कायम है।

    यही दृश्य भारत-नेपाल के बीच केवल राजनीतिक या भौगोलिक संबंधों से कहीं आगे बढ़कर दिलों के रिश्ते की कहानी कहता है। सीमाएं भले ही दोनों देशों को अलग करती हों, लेकिन परिवार, संस्कृति, भाषा, परंपराएं और रिश्ते उन्हें मजबूती से जोड़े हुए हैं।

    एक ओर बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की चमक है, तो दूसरी ओर भाई-बहन के प्यार की चमक। एक ओर सीमाएं हैं, तो दूसरी ओर रिश्तों की ऐसी डोर, जिसे कोई सीमा बांध नहीं सकती।

    रक्षाबंधन का संदेश साफ है
    रिश्तों की रक्षा हो, प्रेम बना रहे और भाई-बहन का यह अटूट बंधन हर वर्ष और मजबूत होता रहे।