Tag: Rajya Sabha

  • UP राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर सपा की जीत तय, तीसरे कैंडिडेट पर अखिलेश ने दिया बड़ा संकेत

    UP राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर सपा की जीत तय, तीसरे कैंडिडेट पर अखिलेश ने दिया बड़ा संकेत

     नई दिल्ली

    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के एक पोस्ट ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है. अखिलेश ने एक्स पर लिखा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है." उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि सपा अब राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कोई और उम्मीदवार नहीं उतारेगी और उसका पूरा फोकस विधानसभा चुनाव पर रहेगा। 

    दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है और एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट चाहिए. मौजूदा तौर पर विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है. सपा के पास 98 विधायक हैं। 

    जेल में बंद रमाकांत यादव को वोटिंग की इजाजत नहीं मिलती है तो यह संख्या 97 रह सकती है. कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास 99 वोट हो सकते हैं. ऐसे में दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट उसके पास आसानी से हैं। 

    तीसरी सीट के लिए 111 वोट की जरूरत
    सपा अगर तीसरे उम्मीदवार को उतारती तो तीनों सीटें जीतने के लिए 111 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होते. दो सीटें जीतने के बाद करीब 25 वोट बचते. ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन 
    इसी नंबर को पूरा करने के लिए सपा की नजर विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर थी. सुभासपा के तीन ऐसे विधायक, जिनकी पृष्ठभूमि सपा से जुड़ी रही है, उनके समर्थन की उम्मीद थी. सपा के कुछ बागी विधायकों के वापस आने की भी चर्चा थी. इसके अलावा आरएलडी, अपना दल और कुछ दूसरे गैर-बीजेपी विधायकों के रुख पर भी नजर थी। 

    अखिलेश के पोस्ट से बदल गया गेम
    अखिलेश यादव पहले कह चुके थे कि तीसरा उम्मीदवार तभी उतारा जाएगा, जब जरूरी नंबर पूरा हो. लेकिन अब "तीन नहीं, चार सौ तीन" वाले पोस्ट के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सपा ने तीसरी राज्यसभा सीट की दौड़ से पीछे हटने का फैसला कर लिया है। 

    ऐसे में राज्यसभा चुनाव में सपा की रणनीति फिलहाल दो सीटों तक सीमित होती दिख रही है, जबकि अखिलेश यादव की नजर अब उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर है। 

  • UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    UP राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा दांव, 8 उम्मीदवारों की सूची जारी; हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिली जगह

    लखनऊ 

    भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें कुल आठ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। हालांकि इसमें हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में दो ब्राह्मण चेहरे हैं, जबकि एक राजपूत चेहरा भी है। वहीं, दो महिलाओं को भी जगह दी गई है।

    उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है. पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रत्याशियों को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। 

    बीजेपी की ओर से जारी सूची में 3 OBC, 2 SC और 3 सामान्य वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें 2 महिलाएं भी हैं. वहीं, उम्मीदवारों में 2 ब्राह्मण और 1 राजपूत शामिल हैं. OBC वर्ग में 1 लोधी, 1 पाल और 1 कुर्मी उम्मीदवार हैं। 

    भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में इन आठ नामों की घोषणा की गई। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह का नाम प्रमुख है। इसके अलावा राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

    धर्मपाल सिंह लोधी बिरादरी से आते हैं. वह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. प्रकाश पाल संगठन में क्षेत्रीय मंत्री हैं और पाल बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समुदाय में पाल को गडेरिया बिरादरी माना जाता है. विद्यासागर सोनकर दलित बिरादरी से हैं और पार्टी के अहम पदों पर रह चुके हैं. वह पूर्व MLC और मछलीशहर से पूर्व सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह पार्टी के पूर्व महामंत्री भी हैं. इस लिस्ट में  मंत्री हरदीप पुरी-बीएल वर्मा का नाम नहीं का नाम नहीं आया है। 

    16 अक्टूबर को वोटिंग
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10
    सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तिथि छह अक्टूबर है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। चुनाव में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा गठबंधन के पास आठ सीटों पर जीत की स्थिति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में आठवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

    धर्मपाल सिंह
    धर्मपाल सिंह बरेली के आंवला से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह कई बार विधायक रह चुके हैं और फिलहाल यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. उनके पास पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी है। 

    विद्यासागर सोनकर
    विद्यासागर सोनकर जौनपुर और पूर्वी यूपी के वरिष्ठ बीजेपी नेता हैं. वह 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए सैदपुर (SC) से सांसद चुने गए थे। 

    प्रियंका सिंह रावत
    प्रियंका सिंह रावत बीजेपी की पूर्व लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बाराबंकी से जीता था. उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया को हराया था। 

    राम प्रताप सिंह चौहान
    राम प्रताप सिंह चौहान यूपी बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता हैं. जून 2026 में यूपी बीजेपी में हुए बदलाव के दौरान उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया था. अगस्त 2026 में उन्हें पश्चिमी यूपी के संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। 

    प्रकाश पाल
    प्रकाश पाल बीजेपी के वरिष्ठ संगठन नेता और यूपी बीजेपी OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं. वह पहले बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड संगठनात्मक क्षेत्र की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 

    इस बार नए चेहरों को मिला मौका
    इस बार बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए सभी नए चेहरों को मौका दिया है. पुराने चेहरों को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है. इनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, बृजलाल, दिनेश शर्मा और गीता शाक्य शामिल हैं. दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल हैं। 

    सपा का तीसरी सीट पर जोर
    समाजवादी पार्टी ने पहले ही प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। सपा के पास अपने संख्या बल के आधार पर दो सीटें जीतने की स्थिति है। हालांकि पार्टी तीसरी सीट के लिए भी प्रयास कर सकती है, जिससे चुनाव में राजनीतिक जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राज्यसभा चुनाव को अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों की नजर अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ दूसरे खेमे में सेंध लगाने पर भी है।

    मजबूत संख्याबल का संकेत
    भाजपा ने आठ उम्मीदवार उतारकर जहां अपने मजबूत संख्या बल का संकेत दिया है, वहीं उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और सपा की आगे की रणनीति पर हैं। राज्यसभा चुनाव में यदि सभी 10 सीटों पर मुकाबला होता है तो 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है।

  • राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया तेज, BJP ने 9 और सपा ने 4 पर्चे खरीदे; कल आखिरी तारीख

    राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया तेज, BJP ने 9 और सपा ने 4 पर्चे खरीदे; कल आखिरी तारीख

      लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है और इससे पहले आज बीजेपी और एनडीए अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकते हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी भी अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर पत्ते खोल सकती है। 

    राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों खेमों की तैयारियों का अंदाजा नामांकन पत्रों की खरीद से भी लगाया जा सकता है. समाजवादी पार्टी ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि बीजेपी की तरफ से नौ पर्चे खरीदे गए हैं. ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने की स्थिति में राज्यसभा चुनाव में मुकाबला देखने को मिल सकता है। 

    तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं

    समाजवादी पार्टी पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और दोनों अपना नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं. हालांकि, तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले कह चुके हैं कि अगर पार्टी पर्याप्त संख्या का इंतजाम कर लेती है तो तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारा जाएगा। 

    तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा को अपने मौजूदा संख्याबल से करीब आधा दर्जन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. ताजा रिपोर्टों में भी तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की तैयारियों का जिक्र है। 

    दूसरी तरफ बीजेपी ने भी उत्तर प्रदेश से अपने उम्मीदवारों के नामों का अभी ऐलान नहीं किया है. पार्टी की तरफ से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है. पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। 

    9 अक्टूबर तक नाम लिए जा सकेंगे वापस
    नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. ऐसे में आज बीजेपी के उम्मीदवारों और सपा के संभावित तीसरे प्रत्याशी के नाम सामने आने के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है कि राज्यसभा की अतिरिक्त सीट के लिए सीधा मुकाबला होगा या नहीं। 

    बता दें कि विधानसभा में विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी और सपा की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट को लेकर है, जिस पर काबिज होने के लिए सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है। 

    क्या है सीटों का गुणा-गणित?
    यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं. एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है। 

    वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. इसके बाद बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। 

    वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, जिसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत है. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर बना रहा है।  

  • यूपी में राज्यसभा-विधान परिषद चुनाव की तैयारी, 21 सीटों पर होगी नजर

    यूपी में राज्यसभा-विधान परिषद चुनाव की तैयारी, 21 सीटों पर होगी नजर

    लखनऊ
    यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है। 

    लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। 

    सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे। 

    बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है। 

    तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

  • यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    नई दिल्ली

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों सहित 12 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होंगे। वहीं वोटों की गिनती भी 16 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी और देर शाम तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। सबसे अहम बात यह है कि 12 में से 10 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं।

    वहीं एक सीट उत्तराखंड की है। यहां से भाजपा के श्री नरेश बंसल रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव होगा।

    गौरतलब है कि आगामी 25 नवंबर को राज्यसभा के कुल 11 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा के कुल 8 सांसद हैं। वहीं एक बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। भाजपा के नरेश बंसल, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं, सपा से राम गोपाल यादव और बसपा के एकमात्र सांसद रामजी भी रिटायर हो रहे हैं।

    चुनाव का पूरा शेड्यूल
    चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी।

    विधान परिषद चुनाव का भी ऐलान
    इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है।

    UP में NDA खेमे के पास करीब 292 विधायक
    यूपी में एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक हैं. इस लिहाज से बीजेपी गठबंधन आसानी से 7 से 8 सीटें जीत सकता है. वहीं, सपा के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सपा 2 सीटें बेहद आसानी से अपने पाले में कर लेगी. वहीं, उत्तराखंड से खाली हो रही सीट पर सत्ताधारी दल का मजबूत दबदबा है. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए यह सीट भी भाजपा के पाले में जाएगी। 

    बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा?
    पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल अप्रैल में वह राज्य सभा के लिए चुनी गईं थीं. अब यहां उपचुनाव हो रहा है। 

    चुनाव का टाइम टेबल
    राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा और नॉमिनेशन 6 अक्टूबर को बंद होंगे। नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। वोटिंग 16 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी।

    कौन-कौन हो रहा रिटायर?
    उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरजा शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ दिनेश शर्मा शामिल हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड से एकमात्र सेवानिवृत्त सदस्य हैं।

    आयोग ने निर्देश दिया है कि मतपत्रों पर प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले से तय विनिर्देशों वाले एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाए।

     

  • संसद में सियासी संग्राम, राज्यसभा में BJP सांसदों के विवादित नारों से विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

    संसद में सियासी संग्राम, राज्यसभा में BJP सांसदों के विवादित नारों से विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

    नई दिल्ली
    संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला. इस दौरान बीजेपी नेता और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल सुखदेवराव बोंडे के एक बयान के बाद सदन में कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. सदन में 'आतंकवादी कहां मिलेंगे… कांग्रेस के दफ्तर में' जैसे नारे गूंज उठे। 

    सदन में चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने साल 2014 से पहले के राजनीतिक माहौल का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2014 से पहले बच्चा-बच्चा ये बोल सकता था कि कोयला चोर, भ्रष्टाचारी और आतंकवादी कहां मिलेंगे?

    जैसे ही बोंडे ने ये सवाल किया, सत्ता पक्ष में बैठे बीजेपी के दूसरे सांसदों ने तुरंत जवाब देते हुए नारा लगाया- 'कांग्रेस के दफ्तर में। 

    'देशद्रोही कहां मिलेंगे?' पर भी लगे नारे
    इसके बाद सांसद अनिल बोंडे ने सदन में आगे कहा, 'देशद्रोही कहां मिलेंगे?, सैन्य विरोधी कहां मिलेंगे? और किसान विरोधी कहां मिलेंगे?' इन सभी सवालों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने नारे लगाए, 'कांग्रेस के दफ्तर में। 

    सदन में लगातार हो रही इस नारेबाजी और हंगामे को देखते हुए पीठासीन अधिकारी उपसभापति हरिवंश ने तुरंत हस्तक्षेप किया. उपसभापति ने बोंडे को टोकते हुए विषय पर ही बोलने की सख्त हिदायत दी और कहा कि मुद्दे से न भटकें, सिर्फ वही रिकॉर्ड पर जाएगा।

     कांग्रेस ने दी प्रतिक्रिया
    वहीं बीजेपी सांसदों के विवादित नारों पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'जिस बीजेपी सांसद ने ये बात कही है सदन में, अगर ये सच है तो ये बताएं कि 2014 के बाद उन्होंने कितने आतंकवादी गिरफ्तार किए हैं कांग्रेस दफ्तर से? आपकी सरकार आते ही आपने हमारे कांग्रेस दफ्तर में बैठे कितने आतंकवादी चिन्हित किए और फिर गिरफ्तार किए. अगर नहीं किए गिरफ्तार तो ये आपकी सरकार की नाकामी है. ये सब ध्यान भटकाने की कोशिश है। 

  • राज्यसभा चुनाव के नतीजों से बदला समीकरण, जानिए NDA कैसे हासिल कर सकता है दो-तिहाई बहुमत

    राज्यसभा चुनाव के नतीजों से बदला समीकरण, जानिए NDA कैसे हासिल कर सकता है दो-तिहाई बहुमत

    नई दिल्ली

    राज्यसभा में NDA अब ताकतवर नजर आ रही है। हालांकि, अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत से दूर है, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में खासा इजाफा कर दिया है। 18 जून तक 10 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुए थे। वहीं, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    NDA किसकी ताकत कितनी
    उच्च सदन में एनडीए का सबसे बड़ा दल भाजपा है। वहीं, गठबंधन अब 152 सीटों पर पहुंच गया है। सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें 19 एनडीए के थे। वही, गुरुवार को झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने एनडीए सांसदों की संख्या 20 पर पहुंचा दी है। खास बात है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है।

    बहुमत मिलने के आसार, पर कैसे?
    दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं।

    वहीं, राज्यसभा में बीजू जनता दल के 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं। खास बात है कि ये दोनों ही दल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं और कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और भाजपा के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है।

    क्यों जरूरी है दो तिहाई बहुमत
    संसद में संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अब जब एनडीए यह आंकड़ा हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान ही यह बिल दोबारा पेश कर सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    विपक्ष के आंकड़े
    विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं। आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आप इस समूह से अलग हो गई हैं। लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। इधर, शिवसेना यूबीटी के बागी भी उनके साथ जा सकते हैं।

  • राज्यसभा उपसभापति हरिवंश का एक और कार्यकाल, राष्ट्रपति ने किया सदस्य के तौर पर मनोनीत

    राज्यसभा उपसभापति हरिवंश का एक और कार्यकाल, राष्ट्रपति ने किया सदस्य के तौर पर मनोनीत

     नई दिल्ली

    राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का बतौर सदस्य कार्यकाल आज यानी 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. रिक्त हो रही सीट के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है. हरिवंश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उनको राज्यसभा नहीं भेजा था. हरिवंश की उच्च सदन से विदाई तय मानी जा रही थी, लेकिन ऐन मौके पर उनको एक और कार्यकाल का तोहफा मिल गया है। 

    हरिवंश को राष्ट्रपति ने अपने कोटे से राज्यसभा सांसद मनोनीत कर दिया है. इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. राष्ट्रपति कोटे से मनोनयन के बाद अब यह तय हो गया है कि अगले छह साल तक उच्च सदन में हरिवंश की आवाज अभी गूंजती रहेगी. हरिवंश का राज्यसभा सदस्य के रूप में यह तीसरा कार्यकाल होगा। 

    गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति एक नामित सदस्य की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए राज्यसभा में हरिवंश को नामित करती हैं. गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकती हैं। 

    साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किए जाने का प्रावधान संविधान में है. मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी निर्वाचित सदस्यों की ही तरह छह साल का होता है. बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरिवंश पेशे से पत्रकार रहे हैं। 

    उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के जयप्रकाश नगर निवासी हरिवंश अप्रैल, 2014 में पहली बार राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुए थे. तब उनको जेडीयू ने ही उच्च सदन में भेजा था. जेडीयू ने हरिवंश को लगातार दो बार राज्यसभा भेजा, लेकिन पार्टी ने तीसरा कार्यकाल नहीं दिया था. इसके बाद उच्च सदन में उनकी संसदीय पारी खत्म मानी जा रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर सरकार ने राष्ट्रपति के कोटे से उनको मनोनीत करा दिया। 

    हरिवंश साल 2018 में 9 अगस्त को राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित हुए थे. 14 सितंबर 2020 को उन्हें लगातार दूसरी बार उच्च सदन का उपसभापति चुना गया था. अब उनको उच्च सदन में तीसरा कार्यकाल भी मिल गया है, ऐसे में क्या उनको लगातार तीसरी बार उपसभापति भी चुना जाएगा? अब नजरें इस पर हैं। 

  • राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने खोले पत्ते, सिंघवी-रेड्डी समेत छह नेताओं को बनाया उम्मीदवार

    राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने खोले पत्ते, सिंघवी-रेड्डी समेत छह नेताओं को बनाया उम्मीदवार

    चेन्नई/नई दिल्ली
    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के नामांकन का आज यानि गुरुवार को अंतिम दिन है. कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस ने तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, हिमाचल और छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीट के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं. कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए 6 उम्मीदवार घोषित कए हैं।

    कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी को तेलंगाना से दुबारा राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. तेलंगाना से कांग्रेस ने सिंघवी के अलावा वेम नरेंद्र रेड्डी को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है. सिंघवी को जहां गांधी परिवार का करीबी माना जाता है तो वेम रेड्डी तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डा के भरोसेमंद माने जाते हैं. पूर्व विधायक रेड्डी तेलंगाना कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी हैं।  

    कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने का निर्णय किया है. इसके अलावा कांग्रेस ने हरियाणा से करमवीर बौद्ध को राज्यसभा का टिकट दिया है, जो दलित समाज से आते हैं. हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है तो तमिलनाडु से पार्टी ने एम क्रिस्टोफर तिलक को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है। 

    हरियाणा में कर्मवीर बौद्ध के नाम पर लगी मुहर
    कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवारों में सबसे चौंकाने वाला नाम है कर्मवीर सिंह बौद्ध का है, जिन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजा जा रहा है. दलित समाज से आने वाले कर्मवीर लो प्रोफाइल नेता हैं. अंबाला के रहने वाले कर्मवीर 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में मुलाना से टिकट के दावेदार रहे हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया. अब कांग्रेस ने उन्हें संसद के उच्च सदन भेजने का फैसला किया है। 

    कर्मवीर बौद्ध हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 5 साल पहले सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. इनकी पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में असिस्टेंट है. हरियाणा में दलित सामाज को संदेश देने के लिए कांग्रेस ने उनपर दांव लगाया है। 

    तेलंगाना से सिंघवी और रेड्डी को मिला मौका
    तेलंगाना की दो राज्यसभा सीटों के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है, जिसमें एक नाम अभिषेक मनु सिंघवी का है तो दूसरा नाम पूर्व विधायक वेम नरेंद्र रेड्डी का है. सिंघवी का नाम पहले ही तय माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें गांधी परिवार का करीबी माना जाता है. हिमाचल से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें तेलंगाना से राज्यसभा भेजा था, जिसके लिए रेवंत रेड्डी ने बीआरएस के मौजूदा राज्यसभा सांसद की सीट खाली कराई थी।

    छत्तीसगढ़ से फिर जाएंगी फूलो देवी राज्यसभा
    वहीं, कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से फूलो देवी नेतम को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है. कांग्रेस आसानी से एक सीट जीत लेगी. फूलो देवी को दोबारा से राज्यसभा भेजने के पीछे पहला उनका अदिवासी समुदाय से होना और दूसरा पार्टी किसी भी तरह से कोई गुटबाजी नहीं चाहती है. इसीलिए किसी नए चेहरे पर भरोसा नहीं जताया है.  हालांकि, कांग्रेस ने शुरू में उनके विकल्प पर पार्टी ने विचार कर रही थी, लेकिन नेताओं की गुटबाजी से पिंड छुड़ाने के लिए फूलो देवी नेताम को ही फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया. 

    कांग्रेस ने राज्यसभा से साधा जातीय समीकरण
    कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए बहुत ही सोची-समझी रणनीति के तहत उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. कांग्रेस ने जिन पांच नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है, उसमें पंजाबी ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अभिषेक मनु सिंघवी हैं तो दूसरे तेलंगाना की सबसे प्रभावी जाति रेड्डी समुदाय के वेम नरेंद्र रेड्डी हैं। 

    कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को प्रत्याशी बनाया है तो छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय से आने वाली फूलो देवी को दोबारा राज्यसभा भेजा है. कांग्रेस ने हरियाणा में दलित समुदाय को साधे रखने की चुनौती थी, जिसके चलते ही कर्मवीर बौद्ध पर भरोसा जताया है. ऐसे ही हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से आने वाले अनुराग शर्मा को प्रत्याशी बनाया है जबकि सीएम ठाकुर समुदाय से हैं. इस तरह कांग्रेस ने ब्राह्मण और ठाकुर केमिस्ट्री बनाने की कवायद की है।