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  • UP में राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की रणनीति पर नजर, जातीय-क्षेत्रीय समीकरण साधने की तैयारी

    UP में राज्यसभा चुनाव से पहले BJP की रणनीति पर नजर, जातीय-क्षेत्रीय समीकरण साधने की तैयारी

     लखनऊ
     भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव की दस सीटों के लिए होने वाले मतदान के लिए सोमवार को अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर सकती है।

    राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार को नामांकन का अंतिम दिन है और भाजपा ने पर्याप्त संख्या में नामांकन पत्र खरीदकर तैयारी कर ली है। अपने प्रत्याशियों के चयन के जरिए भाजपा वर्ष 2027 के विधान सभा चुनाव के लिए जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों का संदेश भी देने की कोशिश कर सकती है। भाजपा के संभावित प्रत्याशियों को लेकर स्मृति इरानी, हरीश द्विवेदी, हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, वरुण गांधी, संजीव बालियान सहित कई नाम चर्चा में हैं।

    भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधेगी। माना जा रहा है कि पार्टी युवा और महिला उम्मीदवारों को टिकट देगी। पार्टी ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी और अनुसूचित जाति के साथ अल्पसंख्यक को भी टिकट दे सकती है।

    माना जा रहा है कि भाजपा इस बार आठ प्रत्याशियों में से एक पासी, एक जाटव, दो ब्राह्मण, एक गुर्जर, एक जाट, एक कूर्मि प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। एक पूर्व मंत्री भी राज्य सभा जा सकते हैं। इस बार पूर्व पुलिस अधिकारी के साथ ही  किसी राजपूत को राज्य सभा नहीं भेजा जाएगाष उनको विधान परिषद में एडजस्ट किया जाएगा। जिन्हें नामांकन करना है उन्हें तैयारी का संकेत दे दिया गया है।

    उम्मीदवारों में राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी के नाम की चर्चा है। इनके साथ ही कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय राज्य मंत्री बी एल वर्मा का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, राजवीर सिंह उर्फ राजू भैय्या, प्रकाश पाल या पूजा पाल में से एक, दुर्विजय शाक्य या गीता शाक्य या ममतेश शाक्य में से कोई एक भी टिकट की दौर में हैं। सुब्रत पाठक या त्र्यंबक त्रिपाठी, सुरेश राणा आदि के नाम भी संभावित उम्मीदवारों में लिए जा रहे हैं। इसी तरह आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी का भी नाम लिया जा रहा है, जिन्हें भाजपा अपना समर्थन दे सकती है।

    विधायकों के संख्या बल के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी सात सीट आसानी से जीत लेगी। समाजवादी पार्टी ने भी दो प्रत्याशियों का नाम घोषित किया, जिनको वो आसानी से जीत दिला सकती है। अब सभी की निगाहें भाजपा के आठवें और समाजवादी पार्टी के तीसरे प्रत्याशी पर भी है। माना जा रहा है की भाजपा मैदान में आठवां प्रत्याशी भी उतारेगी। आठवीं सीट पर जीत के लिए उसे कुछ ही और विधायकों के वोटों की जरूरत है।

    विधायकों का संख्या बल
    उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 255 विधायक हैं, जबकि सपा के 101 सदस्य हैं। भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो तथा कांग्रेस के दो विधायक हैं, जबकि सात विधानसभा सीट रिक्त हैं।

    निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख छह अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच सात अक्टूबर को होगी और उम्मीदवार नौ अक्टूबर तक नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 16 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक होगा और उसी दिन मतगणना की जाएगी।

  • मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नया मोड़, बीजेपी के तीसरे कैंडिडेट की एंट्री से नटराजन की बढ़ी चिंता?

    मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नया मोड़, बीजेपी के तीसरे कैंडिडेट की एंट्री से नटराजन की बढ़ी चिंता?

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए शह-मात का खेल शुरू हो गया है. विधायकों की संख्या के लिहाज से दो बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के लिए कन्फर्म मानी जा रही थी, लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को उतारकर राहुल गांधी की करीबी मिनाक्षी नटरजान की सियासी टेंशन बढ़ा दी है? 

    राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के बाद महेश केवट को प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने पूर्व सांसद मिनाक्षी नटराजन पर दांव खेला है. इस तरह तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। 

    मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के नाम का ऐलान के बाद निर्विरोध चुनाव की संभावना खत्म हो गई है और वोटिंग के जरिए ही फैसला होगा.  ऐसे में अब असल पेंच विधायकों की क्रॉस वोटिंग को लेकर फंसता दिख रहा है । 

    कौन हैं महेश केवट, जिन्हें बीजेपी ने एमपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया
    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है. महेश केवट मध्य प्रदेश में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं.  महेश केवट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने मछुआरा वर्ग को संदेश दिया है. महेश केवट 1984 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े है.  वो ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक रह चुके हैं. छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ब्लॉक संयोजक के रूप में कार्य किया। 

    महेश केवट 1995 से भाजपा की सक्रिय राजनीति में हैं और विभिन्न संगठनात्मक पदों पर काम कर चुके हैं. 2000 में पार्षद निर्वाचित हुए तथा नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे. भाजपा के जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा हरियाणा विधानसभा चुनाव, शहडोल लोकसभा उपचुनाव, चित्रकूट, मुंगावली और पृथ्वीपुर उपचुनावों में संगठन की ओर से अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 

    भाजपा से तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल भी कर चुके नामांकन
    मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है. भाजपा ने दो सीटों के लिए पहले ही तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल के नाम की घोषणा कर दी थी. इन दोनों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. तीसरे सीट के लिए अब महेश केवट को उतार कर भाजपा ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब कांग्रेस विधायकों के क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडराने लगा है।

     कांग्रेस के पास 62 वोट, एकजुट रखना चुनौती
    मालूम हो कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 62 वोट हैं. एक सीट जीतने के लिए 58 वोट चाहिए. उधर बीजेपी को तीसरी सीट जीतने के लिए केवल आठ अतिरिक्त वोट चाहिए. इसी कारण कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. मीनाक्षी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस को अपने वोटों को एकजुट रखना होगा. लेकिन इससे पहले कांग्रेस विधायकों में टूट हो चुकी है. लिहाज़ा एमपी में राज्य सभा चुनाव काँटे का हो गया है। 

    कर्नाटक से भाजपा ने एम नागराज को बनाया उम्मीदवार
    भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने कर्नाटक में होने वाले राज्यसभा के ‌द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए डॉ. एम नागराज को उम्मीदवार बनाया है. आरएसएस से जुड़े नागराज अभी पार्टी का बिल्डिंग कमेटी संभाल रहे हैं. इसका काम राज्य भर में हर जिले में पार्टी कार्यालय बनाना है। 

    साथ ही कर्नाटक के विधान परिषद् द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने लिंगराज पाटील और रघु कौटिल्य को उम्मीदवार बनाया है। 

    राज्यसभा चुनाव का नंबर गेम क्या है? 
    मध्य प्रदेश में विधानसभा के कुल 230 सदस्यों की संख्या है, लेकिन फिलहाल 228 सदस्य हैं. इनमें बीजेपी के 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव की एक राज्यसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 58 विधायकों (प्रथम वरीयता के वोट) के समर्थन चाहिए। 

    विधायकों के आधार पर बीजेपी की दो सीटें कन्फर्म है और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के उतरने के बाद मामला उलझ गया है. बीजेपी 164 विधायकों की आधार पर दो राज्यसभा सीट जीतने के लिए 116 विधायकों के वोट चाहिए। 

    बीजेपी दो सीटें जीतने के बाद 48 अतिरिक्त वोट चाहिए जबकि कांग्रेस 64 विधायकों के दम पर एक सीट जीत सकती है, उसके बाद भी उसके बाद 6 विधायकों का अतरिक्त वोट हो रहा है, लेकिन मामला बीजेपी के तीसरे प्रत्याशी के उतरने से है। 

    तीसरी राज्यसभा सीट के लिए मुकाबला
    विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी 2 राज्यसभा सीटें सेफ करने के बाद 48 विधायक बचेंगे, जिसके तीसरी राज्यसभा की सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी. वहीं कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीत के लिए जरूरी संख्या बल है, लेकिन बीजेपी के द्वारा तीसरे उम्मीदवार की घोषणा ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और मिनाक्षी नटराजन की जीत की राह मुश्किल कर दी है। 

    बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतारने के फैसले ने कांग्रेस की धड़कने बढ़ा दी है. बीजेपी का यह कदम बताता है कि पार्टी या तो अपनी पार्टी से बाहर के विधायकों का समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है या उसे लगता है कि क्रॉस-वोटिंग अंतिम नतीजे को बदल सकती है। 

    राज्यसभा के लिए क्रॉस वोटिंग का खतरा
    मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव, जिसे एक सामान्य चुनाव माना जा रहा था, एक ऐसे मुकाबले में बदल दिया है, जिस पर सबकी नज़रें टिकी हैं, अब सबकी नजरें वोटिंग के दिन से होने वाली क्रॉस-वोटिंग, वोटिंग से दूर रहने और आखिरी समय की सियासी चालों पर होंगी। 

    बीजेपी के लिए, तीसरा उम्मीदवार उतारना अपर हाउस में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है. कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और उस सीट को बचाने की क्षमता का इम्तिहान है, जो मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से उसकी पहुंच में दिख रही है। 

    कांग्रेस की बढ़ी सियासी टेंशन
    कांग्रेस के पास वैसे तो 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के चलते सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव में वोट डालने से रोक दिया है. वहीं, बीना से विधायक निर्मला सप्रे लोकसभा चुनाव से पहले अनौपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गई थीं और उनकी अयोग्यता का मामला फंसा है। 

    दतिया के राजेंद्र भारती को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है. ऐसे में कांग्रेस के पास 62 वैध वोट बचे हैं. आंकड़े के लिहाज से कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती है, लेकिन बगावत के चलते क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है और एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है. इतना ही नहीं कांग्रेस ने राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, लेकिन इस फैसले से पार्टी में असंतोष दिखने लगा है. इसके चलते ही क्रॉस वोटिंग का संकट गहरा गया है। 

    मध्य प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वालों के लिए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में 'टूट' या 'बगावत' कोई नई बात नहीं है. राज्य में राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग या बगावत का एक पुराना और कड़वा नाता रहा है। 

    मार्च 2020 का घटनाक्रम याद है. उस वक्त भी राज्यसभा के चुनाव सिर पर थे और क्रॉस वोटिंग का भारी डर था, लेकिन जो हुआ उसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया. यही वजह है कि महेश केवट के मैदान में उतरने से, मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव इस सीज़न के सबसे दिलचस्प राजनीतिक मुकाबलों में से एक बन गया है। 

  • राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित: कांग्रेस ने मीनाक्षी को दिया टिकट, 18 जून को होगी वोटिंग

    राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित: कांग्रेस ने मीनाक्षी को दिया टिकट, 18 जून को होगी वोटिंग

    भोपाल 

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार दो मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं दिया गया. पार्टी ने अन्य राज्यों में भी कई अहम नामों की घोषणा की है. मध्य प्रदेश में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग की भी संभावना पर नजर रखी जा रही है। 

    MP से दो उम्मीदवार, चुनाव होगा दिलचस्प
    बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को टिकट दिया है. दोनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से यहां चुनाव होना तय माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर नजर बढ़ गई है। 

    केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला मौका
    इस बार पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन को राज्यसभा नहीं भेजा है. दोनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है, लेकिन नए सिरे से उन्हें मौका नहीं दिया गया. इस फैसले को भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

    तरुण चुग: संगठन के मजबूत रणनीतिकार
    तरुण चुग वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के
    अनुभवी संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. पंजाब के अमृतसर से आने वाले चुग ने आरएसएस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है. वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी भूमिका निभा चुके हैं और कई राज्यों में संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

    तरुण चुग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव हैं. वे पार्टी के संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं और कई राज्यों में चुनावी प्रबंधन व संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. तरुण चुग ने बेहद कम उम्र (लगभग 9 वर्ष) में RSS से जुड़कर सामाजिक कार्यों की शुरुआत की। 

    इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई.

        1989–1994: ABVP में जिला सचिव और राज्य कार्यकारिणी सदस्य
        1993: अमृतसर में BJYM (भारतीय जनता युवा मोर्चा) के जिला अध्यक्ष बने

    तरुण चुग ने युवा राजनीति से अपने करियर को मजबूती दी और धीरे-धीरे संगठन में बड़े पदों तक पहुंचे

        1997: पंजाब BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष
        राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (BJYM)
        राज्य महासचिव (युवा मोर्चा)

    उन्होंने युवाओं को जोड़ने के लिए “युवा चेतना यात्रा” का नेतृत्व किया, जो 2100 किमी लंबी थी। 

    BJP संगठन में प्रमुख पद

    तरुण चुग संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं:

        प्रदेश भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ संयोजक
        राज्य मीडिया एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रभारी
        राज्य भाजपा सचिव
        पंजाब भाजपा महासचिव
        राष्ट्रीय महासचिव (वर्तमान)

    जिम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रभारी

    तरुण चुग को पार्टी ने कई महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है:

        जम्मू-कश्मीर प्रभारी
        लद्दाख प्रभारी
        तेलंगाना प्रभारी
        अंडमान-निकोबार प्रभारी
        दिल्ली भाजपा सह-प्रभारी

    राजनीतिक महत्व

    वे चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाते हैं. तरुण चुग का राज्यसभा के लिए चयन कई कारणों से अहम माना जा रहा है. इसे संगठन को महत्व देने के संकेत के साथ-साथ पंजाब और उत्तर भारत में राजनीतिक संतुलन और भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। 

    रजनीश अग्रवाल को भी मिला मौका
    रजनीश अग्रवाल, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश बीजेपी में प्रदेश मंत्री हैं, को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है. उनकी नियुक्ति को प्रदेश संगठन में सक्रिय भूमिका और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है। 

    अन्य राज्यों में भी बड़े नाम
    बीजेपी ने अन्य राज्यों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है. राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजा जा रहा है. मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट दिया गया है, जबकि ओडिशा में देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पहले बीजेडी से जुड़े थे। 

    गुजरात में बीजेपी मजबूत स्थिति में
    गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. यह पहली बार होगा जब गुजरात से कांग्रेस का कोई भी राज्यसभा सदस्य नहीं होगा। 

    पंजाब राजनीति से जुड़ा फैसला
    रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा में अवसर नहीं मिलने से यह संकेत मिल रहा है कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि वे पंजाब लौटकर राजनीति में सक्रिय होंगे। 

    मंत्रीमंडल फेरबदल के संकेत
    दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यसभा टिकट न मिलने और “एक व्यक्ति, एक पद” की नीति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में जल्द फेरबदल हो सकता है. कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। 

    बीजेपी की रणनीतिक चाल
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस सूची के माध्यम से संगठन और नेतृत्व के संतुलन को ध्यान में रखा है. अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने भविष्य की रणनीति तैयार की है। 

    राज्यसभा चुनाव पर सभी की नजर
    अब सभी की नजर राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई है, जहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं. मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में यह चुनाव आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को दिशा दे सकता है। 

  • MP में राज्यसभा चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं, भाजपा तीसरा प्रत्याशी उतारने की तैयारी, कांग्रेस की सीट पर फोकस

    MP में राज्यसभा चुनाव के समीकरण बदल सकते हैं, भाजपा तीसरा प्रत्याशी उतारने की तैयारी, कांग्रेस की सीट पर फोकस

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. .

    एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा 
    मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं। 

    जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित 
    राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है। 

    क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति
    बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी।

    इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है।

    खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है।

    एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट 
    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है. 

    बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार
    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके। 

    एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी
    राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

    भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव
    इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।

     

  • राज्यसभा चुनाव में उलटफेर: कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने किया क्रॉस वोट, मेवात में कमल खिलाने की तैयारी

    राज्यसभा चुनाव में उलटफेर: कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने किया क्रॉस वोट, मेवात में कमल खिलाने की तैयारी

    चंडीगढ़.

    हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायकों द्वारा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में क्रॉस वोट करना भाजपा के लिए शुभ संकेत है। मेवात के नूंह जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस के इन चार विधायकों में से दो को भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में अपने समर्थन में वोटिंग के लिए तैयार कर जहां मेवात क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, वहीं कांग्रेस के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

    राज्यसभा चुनाव में हथीन के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल और पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास के वोट क्रॉस हुए हैं। इन दोनों विधायकों को कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। विधायकों के जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में क्रॉस वोट करने के आरोपी इन विधायकों को किसी भी समय कांग्रेस पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कांग्रेस का यह फैसला भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी मददगार साबित हो सकता है। भाजपा क्रॉस वोट करने के आरोपी विधायकों को अपने गले लगाने के लिए तैयार बैठी है। हरियाणा में साल 2024 के विधानसभा चुनाव में पांच मुस्लिम विधायक चुनाव जीतकर आए हैं और पांचों कांग्रेस से हैं। नूंह से चौधरी आफताब अहमद तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। फिरोजपुर झिरका से मामन खान दूसरी बार चुनाव जीते, जबकि हथीन से कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल पहली बार चुनाव जीते हैं।

    पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास की तबीयत आजकल ठीक नहीं रहती। उनका नियमित डायलिसिस होता है। मोहम्मद इलियास पुन्हाना से तीसरी बार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस से पहले वे इनेलो की राजनीति करते रहे हैं। यमुनानगर जिले की जगाधरी विधानसभा सीट भी मुस्लिम बाहुल्य है, जहां से चौधरी अकरम खान दूसरी बार चुनाव जीते हैं। उन्होंने पहला चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीता था।
    हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से एक पर भाजपा और दूसरी पर कांग्रेस की जीत हुई है। कांग्रेस को जीत हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में कांग्रेस के चार वोट निरस्त हुए और चार क्रास हुई हैं।

    जिन चार विधायकों की वोट क्रास हुई है, उनमें मेवात क्षेत्र के दो मुस्लिम विधायक मोहम्मद इसराइल और मोहम्मद इलियास भी शामिल हैं।
    इसी तरह ओडिसा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को अपना वोट दिया है। ओडिशा व हरियाणा में जिस तरह से कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों का भाजपा के प्रति राजनीतिक प्रेम बढ़ा है, वह पार्टी के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। मेवात भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से ज्यादा उपजाऊ नहीं रहा है। शुरू से यहां कांग्रेस और इनेलो का दबदबा रहा है। भाजपा ने इनेलो से शामिल हुए दो तत्कालीन विधायकों जाकिर हुसैन को नूंह और नसीम अहमद को फिरोजपुर झिरका से टिकट दिया था, मगर साल 2019 के चुनाव में दोनों ही हार गए थे।

    पिछले चुनाव में अच्छा नहीं रहा भाजपा का प्रदर्शन
    साल 2024 के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जिस तरह से मेवात क्षेत्र के दो विधायकों को तोड़कर अपने पाले में लाने में सफलता हासिल की, उससे संभावना बन रही है कि यदि कांग्रेस इन विधायकों को अपनी पार्टी से बाहर निकालने का फैसला लेती है तो भाजपा भविष्य में उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़वाने से परहेज नहीं करेगी।

    कांग्रेस के बागी मुस्लिम विधायकों के लिए भाजपा अछूत नहीं
    भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के लिए जागा मुस्लिम कांग्रेस विधायकों का प्रेम यह संकेत भी दे रहा है कि अब भाजपा उनके लिए बिल्कुल भी अछूत नहीं है। भाजपा उनका सहयोग लेना चाहती है और मुस्लिम देना चाहते हैं। ऐसे में न केवल इनेलो बल्कि कांग्रेस के लिए अपार चुनौतियां हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जगाधरी के कांग्रेस विधायक मोहम्मद अकरम खान से भी राज्यसभा चुनाव में वोट के लिए संपर्क साधा गया था, लेकिन ऐन वक्त पर बात बनते-बनते बिगड़ गई।

  • 16 मार्च को होंगे चुनाव, हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर नॉमिनेशन शुरू

    16 मार्च को होंगे चुनाव, हरियाणा राज्यसभा की 2 सीटों पर नॉमिनेशन शुरू

    पंचूकला.

    9 अप्रैल को खाली होने जा रही हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। खाली सीटों को भरने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 5 मार्च तक अपना नॉमिनेशन भर सकेंगे।

    वोटिंग के लिए 16 मार्च की डेट फाइनल की गई है। भाजपा के 2 राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। अभी ये दोनों सीटें भाजपा के पास हैं। 16 मार्च को वोटिंग के बाद शाम को रिजल्ट जारी होगा। वहीं ईसीआई के जारी नोटिफिकेशन में हरियाणा के आईएएस पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है। पंकज अग्रवाल अभी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। वहीं असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को दी गई है।

  • CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    CG में दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव तय, 16 मार्च को नतीजे आएंगे, तुलसी-फूलोदेवी नेताम की कार्यकाल समाप्ति 2 अप्रैल

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 मार्च 2026 को देश के अलग-अलग राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की भी दो सीटें हैं, जिन पर चुनाव होगा. राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में सुगबुगाहट पहले से ही शुरू हो चुकी थी. बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए एक-एक राज्यसभा सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकती है. इसके लिए अब सुगबुगाहट और तेज होने वाली है. 

    इन नेताओं का कार्यकाल पूरा 

    छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों नेताओं का कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो रहा है, ऐसे में मार्च में सीटों को भरने के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे. दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, क्योंकि अब एक सीट बीजेपी के खातें में जाने वाली है, ऐसे में बीजेपी के नेता भी सक्रिए हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता भी एक सीट के लिए एक्टिव हो रहे हैं. क्योंकि यह देखना भी दिलचस्प होगा कि बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को राज्यसभा भेजेगी या बाहरी नेताओं को भी मौका मिलेगा. 

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की 5 सीटें

    राजीव शुक्ला (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    रंजीत रंजन (कांग्रेस) कार्यकाल: 2022–2028

    फूलो देवी नेताम (कांग्रेस) कार्यकाल: 2020–2026

    केटीएस तुलसी (आईएनसी) कार्यकाल: 2020–2026

    देवेन्द्र प्रताप सिंह (भाजपा) कार्यकाल: 2024–2030

    केटीएस तुलसी का कार्यकाल 2 अप्रैल को होगा समाप्त

    केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह वर्ष 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। संसद में संवैधानिक और कानूनी मामलों पर उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    फूलो देवी नेताम का कार्यकाल भी 2 अप्रैल को होगा पूरा

    फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी वर्ष 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। उनका कार्यकाल भी 2 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

    कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई सदस्यता 3 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।

    देशभर की 37 सीटों पर चुनाव होंगे

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इन सीटों में छत्तीसगढ़ की दो सीटें भी हैं, जो अप्रैल 2026 में रिक्त हो रही हैं। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 20 मार्च तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

    छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें 

    बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती है. वर्तमान में कांग्रेस के पास चार और बीजेपी के पास एक सीट है. कांग्रेस से केटीएस तुलसी, फूलोदेवी नेताम, राजीव शुक्ला, रंजीता रंजन हैं, जबकि बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी के बाद अब राज्यसभा के समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ में बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ सकती है. क्योंकि बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, इसके अलावा एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं, ऐसे में अब बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या 3 हो सकती है, जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 2 हो सकती है. 

    किन राज्यों में कितनी सीटें खाली?

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से सात सीटें खाली हो रही हैं. इसके अलावा तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच सीटें रिक्त होंगी. ओडिशा से चार और असम से तीन सीटों पर चुनाव होंगे. हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना से दो-दो सीटों, जबकि हिमाचल प्रदेश से एक सीट पर मतदान होगा. 

    इन सीटों का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल से 9 अप्रैल के बीच पूरा हो रहा है. उनके रिटायरमेंट के बाद नए सांसद शपथ लेंगे.

    बिहार के इन दिग्गजों का कार्यकाल खत्म

    बिहार की 5 राज्यसभा सीटें भी अप्रैल में खाली हो रही हैं. रिटायर होने वाले प्रमुख चेहरों में राज्यसभा के उपसभापति और जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह शामिल हैं. इसके साथ ही, मोदी कैबिनेट के मंत्री रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, आरजेडी से अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता भी इसी लिस्ट में हैं. बिहार की इन महत्वपूर्ण सीटों पर नए चेहरों के आने या पुराने सांसदों की वापसी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

    देश के बड़े चेहरे जो होंगे रिटायर

    महाराष्ट्र से शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और रामदास आठवले जैसे बड़े नेता रिटायर हो रहे हैं. तमिलनाडु से एम तंबीदुरै, तिरुचि शिवा और कनिमोझी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. पश्चिम बंगाल से साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी जबकि असम से रामेश्वर तेली विदा होंगे. छत्तीसगढ़ से केटीएस तुलसी, हरियाणा से रामचंद्र जांगड़ा और किरण चौधरी का नाम भी शामिल है. तेलंगाना से कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी भी रिटायर हो रहे हैं. इन सभी के स्थान पर अब नए सांसदों का चुनाव होगा.