Tag: Raghav Chadha

  • राघव चड्ढा ने प्रीपेड यूजर्स को दी बधाई, TRAI के नए नियम से रिचार्ज में बदलाव

    राघव चड्ढा ने प्रीपेड यूजर्स को दी बधाई, TRAI के नए नियम से रिचार्ज में बदलाव

    नई दिल्ली
    भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स को बधाई दी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा लाए गए बदलावों के बारे में बात करते हुए चड्ढा ने कहा कि अब इससे देश के तमाम यूजर्स को लाभ होगा और उन्हें 28 दिन की जगह 30 दिन का रिचार्ज करवाने की सुविधा मिलेगी। इससे उन यूजर्स को भी लाभ होगा, जो केवल इनकमिंग सुविधा के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए इनकमिंग और मैसेज पैकेज उपलब्ध कराए जाएंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने फरवरी में ही इस मुद्दे को संसद में उठाया था। इसके बाद अब सरकार ने उनकी बात पर अमल करते हुए यह नियम लाया है।

    सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर करते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि यह एक सच्चा उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने लोगों की बात को संसद में रखा और सरकार ने उस पर ध्यान देकर फैसला किया। उन्होंने कहा, "11 मार्च 2026 को मैंने प्रीपैड मोबाइल यूजर्स की कुछ समस्याओं को संसद में उठाया था। साथ ही साथ यह भी कहा था कि कुछ लोग डेटा यूज नहीं करते हैं केवल इनकमिंग सुविधाओं को लिए फोन का उपयोग करते हैं। मुझे बताते हुए यह खुशी है कि सरकार ने आपकी उन सभी मांगों को मान लिया है। TRAI ने टेलीकॉम उपभोक्ता संरक्षण (13वां संसोधन) रेग्यूलेशन 2026 को लागू कर दिया है। इसके तहत सबसे पहले अब 28 दिन का रिचार्ज नहीं बल्कि 30 दिन का रिचार्ज मिलेगा।"

    राघव चड्ढा बोले- अब जितनी सुविधा लेंगे, उतना ही पैसा लगेगा
    चड्ढा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "जिन उपभोक्ताओं को डेटा वाले रिचार्ज नहीं चाहिए थे। उन्हें अब केवल इनकमिंग और मैसेज वाले रिचार्ज करने के लिए मिलेंगे। यानी कि अब जितनी सुविधा चाहिए, उतना ही पैसा लिया जाएगा। इसके लिए मैं सरकार को इसके लिए बधाई देता हूं। आप सभी को बधाई देता हूं। यह राजनीति का सही उदाहरण है कि कैसे एक सांसद ने संसद में लोगों की मांग को उठाया और सरकार ने उसे पूरा किया।"

    बता दें, राघव चड्ढा फरवरी 2026 में आम आदमी पार्टी के साथ थे। उस समय उन्होंने जमीन से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। इसके बाद आप के साथ हुए मतभेद के बाद उन्हें पार्टी नेता के पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया था।

    क्या है प्रीपैड यूजर्स के लिए सरकार के बदलाव?
    भारत में लंबे समय से नागरिकों द्वारा प्रीपैड प्लान्स में बदलाव की मांग चली आ रही थी। इसी को ध्यान में रखकर TRAI ने नए नियम जारी कर दिए हैं। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को अब पूरे महीने यानी की 30 दिन की वैलेडिटी वाले प्लान पेश करने होंगे।

    इसके अलावा जिन ग्राहकों को डेटा इंटरनेट की जरूरत नहीं है। उनके लिए बिना डेटा वाले केवल कॉलिंग और मैसेज के सस्ते स्पेशल टैरिफ वाउचर उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • Punjab Voter List: राघव चड्ढा का नाम कटा तो मचा सियासी बवाल, AAP पर लगाया ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप

    Punjab Voter List: राघव चड्ढा का नाम कटा तो मचा सियासी बवाल, AAP पर लगाया ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप

    चंडीगढ़ 

    पंजाब में एसआईआर की लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने के बाद राजनीति शुरू हो गई है। राघव ने कहा कि उन्हें वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से 'शिफ्टेड' मार्क करके हटाया गया है, जो बदले की राजनीति का स्पष्ट संकेत है। चड्ढा ने ईसीआई की गाइडलाइंस के उल्लंघन का भी दावा किया है। 

    राघव चड्ढा ने लगाए पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप
    भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से काम किया है। चड्ढा के अनुसार, मतदाता सूची के मसौदे में उनका नाम गलत तरीके से 'दूसरी जगह चले जाने वाला' (शिफ्टेड) दिखाया गया है। वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। चड्ढा ने एक्स पर एक पोस्ट साझा कर यह जानकारी दी। 

    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मसौदा मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। 'दावे और आपत्तियां' की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नामों में सुधार किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची अक्तूबर 2026 में प्रकाशित होगी। सांसद चड्ढा ने बताया कि वह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने इसे केवल एक लिपिकीय त्रुटि मानने से इन्कार किया। चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट मामला बताया। 

    चड्ढा ने कहा कि यह कोई सामान्य क्लेरिकल मिस्टेक नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। उन्होंने कहा कि मैंने SIR दिशा-निर्देशों के तहत पहले ही अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए ऑब्जेक्शन फाइल कर दिया है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होगी।

    सांसद ने आरोप लगाया कि जब से उन्होंने AAP छोड़ी है और भाजपा में शामिल हुए हैं, तब से आप नेतृत्व बौखलाया हुआ है। प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि उनका नाम "दूसरी जगह चले जाने वाला" किसने चिह्नित किया। इसका सत्यापन और उच्च स्तर पर प्रसंस्करण आप की पंजाब सरकार के अधिकारियों ने किया। जमीनी स्तर के बीएलओ से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस अभ्यास का हर परिचालन स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों द्वारा संचालित है। अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार के कनिष्ठ कर्मचारी होते हैं। एईआरओ, ईआरओ और डीईओ भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं।

    आगे कहा कि शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। ये अधिकारी जानते हैं कि आप सरकार उनकी चुनावी ड्यूटी समाप्त होने के बाद उनके स्थानांतरण, नियुक्तियों और कॅरिअर को नियंत्रित करती है। उन्हें पता है कि कौन उनका स्थानांतरण कर सकता है और कौन उनका जीवन मुश्किल बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक प्रतिशोध को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव डालती है।

    भाजपा सांसद ने पंजाब सरकार पर लगाए ये आरोप…

        वोट काटने के पीछे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव: राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक की पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुझे ‘शिफ्टेड’ किसने मार्क किया? आप सरकार के अधिकारी ने। उस वर्गीकरण की पुष्टि किसने की? आप सरकार के ही अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने प्रोसेस किया? आप सरकार के ही वरिष्ठ अधिकारी ने। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का ही नियंत्रण होता है, इसलिए अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं।

        राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई: सांसद ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका शीर्ष नेतृत्व गुस्से से जल रहा है। जिन नेताओं और सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा है, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया गया है। वोटर लिस्ट में गलत वर्गीकरण उसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

        चुनाव आयोग (ECI) के नियमों का उल्लंघन: राघव चड्ढा ने भारत निर्वाचन आयोग के SIR के विस्तृत दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस नियम के अनुसार न्यायाधीशों, जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) और प्रमुख हस्तियों के नाम यदि डेटाबेस में चिह्नित भी होते हैं, तो भी उन्हें ड्राफ्ट रोल में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दावे-आपत्ति की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस नियम को अनदेखा नहीं किया गया, बल्कि उनके मामले में इसका जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।

        वोटर लिस्ट किसी की निजी संपत्ति नहीं: सांसद ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही हो, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची आप की कोई निजी संपत्ति नहीं है। मतदाता सूची में पारदर्शिता होना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है।

     

  • सियासी गलियारों में हलचल, राघव चड्ढा को राज्यसभा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

    सियासी गलियारों में हलचल, राघव चड्ढा को राज्यसभा में मिली बड़ी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली

    हाल ही में आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया गया है।

    याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया
    राज्यसभा की एक अधिसूचना में कहा गया है कि राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसमें यह भी बताया गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से इस पैनल का पुनर्गठन किया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया।

    चड्ढा के अलावा पैनल के सदस्यों में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रंगव्रा नारज़ारी और संदोश कुमार पी शामिल हैं।

    एक अन्य अधिसूचना में राज्यसभा सचिवालय ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा के सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है।

    आप के 7 सांसदों ने थामा था बीजेपी का हाथ
    बता दें कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में एक रहे राघव चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पार्टी को अलविदा कह दिया था। सभी सात सांसदों ने 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। राज्यसभा में 10 सांसदों वाली आप के अब केवल 3 सांसद बचे हैं।

    आप ने की थी बर्खास्त करने की मांग
    इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी हैं।

    दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
    इस बीच राघव चड्ढा की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर उनके बारे में प्रसारित किए जा रहे फर्जी, एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित सामग्री दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा व व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर छेड़छाड़ की गई सामग्री तैयार करना और प्रसारित करना न केवल कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अपूरणीय प्रतिष्ठात्मक क्षति भी हो रही है।

    कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
    दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह राघव चड्ढा के व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं बनता। उनकी आलोचना उनके राजनीतिक फैसले को लेकर और बीजेपी में जाने को लेकर की जा रही है। हाई कोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों का व्यवसायिक इस्तेमाल और आलोचना करने में अंतर है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

  • नवजोत कौर सिद्धू का दावा: प्रियंका चोपड़ा कनेक्शन की चर्चा

    नवजोत कौर सिद्धू का दावा: प्रियंका चोपड़ा कनेक्शन की चर्चा

    इन दिनों संसद से लेकर सड़क तक राघर चड्ढा के नाम का शोर है. राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. राघव चड्ढा का ये फैसला कई लोगों के लिए शॉकिंग है. कई लोग उनके इस फैसले से खुश हैं. कुछ आहात नजर आ रहे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने राघव के बीजेपी जॉइन करने पर बड़ा खुलासा किया है.

    राघव पर बड़ा खुलासा है
    नवजोत कौर सिद्धू ने टॉप सीक्रेट के पॉडकास्ट में राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की वजह बताई है. उन्होंने कहा कि प्रियंका चोपड़ा की वजह से राघव बीजेपी में शामिल हुए. वो बताती हैं कि प्रियंका चोपड़ा को पता लग गया था कि ये (आम आदमी पार्टी) लोग राघव के पीछे पड़ गए हैं. अब राघव पर ईडी होगी. नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि प्रियंका चोपड़ा ने राघव चड्ढा को अपनी बहन परिणीति चोपड़ा के कारण बचाया है.

    नवजोत सिंह सिद्धू की वाइफ ने ये भी कहा कि उन्हें पहले से पता लग गया था कि राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी से निकलने वाले हैं. पार्टी को लगने लगा था कि राघव हमारे लिए नहीं बोल रहा है. इसके बाद वो लड़ाई में पड़ गए. मैं बता दूं कि हर खामोश बंदा पार्टी होता है. राघव चड्ढा आज जो चार साल के बाद बोल रहे हैं. उन्हें डेढ़ साल बाद ही बोलना चाहिए था. अगर कुछ गलत लग रहा है, तभी बोलना चाहिए.

    नाराज हुए जेन-जी और सेलेब्स
    राघव चड्ढा का बीजेपी जॉइन करना कई लोगों को अखरा रहा है. बीजेपी जॉइन करने के एक दिन बाद राघव चड्ढा के दो मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कम हो गए हैं. कुनिका सदनंद और प्रकाश राज जैसे सेलेब्स ने राघव चड्ढा के फैसले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है.

    नवजोत कौर सिद्धू ने राघव चड्ढा को लेकर जो भी दावा किया है. इस पर अब तक प्रियंका चोपड़ा, परिणीति चोपड़ा या राघव चड्ढा में से किसी ने भी रिएक्ट नहीं किया है. पर हां इतना जरूर कह सकते हैं कि राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद राजनीति में पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है.

  • 4 साल पुरानी कहानी: राघव चड्ढा का बिल न पास होता, तो AAP न टूटती और न BJP में जाते

    4 साल पुरानी कहानी: राघव चड्ढा का बिल न पास होता, तो AAP न टूटती और न BJP में जाते

    नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा झटका दे चुके हैं. आम आदमी पार्टी में बगावत करने वाले राघव चड्ढा अब भाजपाई हो चुके हैं. उनके साथ छह अन्य सांसद भी आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं. अब वे सभी भाजपा में हैं. राघव चड्ढा आज भले ही दल बदलकर भाजपा में जा चुके हैं. मगर राघव चड्ढा का ही लाया बिल पास हो गया होता तो वह आज आम आदमी पार्टी छोड़कर अलग नहीं हो पाते. न ही वह बगावत कर पाते. राघव चड्ढा की यह खबर सिर्फ एक नेता के पार्टी बदलने की नहीं है. इसमें एक बड़ी विडंबना छिपी है. चार साल पहले राघव चड्ढा ने खुद एक बिल लाया था, जो दल-बदल को बहुत सख्ती से रोकता. अगर वह बिल कानून बन गया होता तो आज राघव चड्ढा की कहानी कुछ और होती। 

    जी हां, चार साल पहले राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर अगस्त 2022 में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाया था. उस बिल का मकसद दल-बदल कानून को और सख्त बनाना था. वह कानून बन गया होता तो राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर नहीं जा पाते. न ही वह सदन के अपने छह अन्य पार्टी सदस्यों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल हो पाते. दो दिन पहले ही उन्होंने यह घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदन में मौजूद 10 सदस्यों की कुल संख्या में से दो-तिहाई बहुमत होने का हवाला दिया था। 

    राघव चड्ढा ने चार साल पहले लाया था बिल
     खबर के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा का प्रस्तावित बिल कानून बन गया होता तो पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के लिए राघव चड्ढा को अपनी पार्टी के छह नहीं, बल्कि सात सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ती. इतना ही नहीं पार्टी तोड़ने के आरोप में इस मौजूदा टीम पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती। 

    उस बिल में क्या था?
    ऐसा इसलिए, क्योंकि संविधान संशोधन बिल में दलबदल विरोधी कानून को और अधिक सख़्त बनाने की मांग की गई थी. यह बिल उन्होंने राज्यसभा में शामिल होने के तीन महीने बाद पेश किया था. इस बिल के तहत पार्टी में वैध रूप से टूट या विभाजन करने के लिए दो-तिहाई नहीं, बल्कि तीन-चौथाई बहुमत की जरूरत होती. इस बिल को राघव चड्ढा ने 5 अगस्त 2022 को एक ‘निजी सदस्य बिल’ के तौर पर सदन में पेश किया था. तब राघव आप चीफ अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी थे। 

    बिल में क्या मांग की गई थी?
    ‘विधायकों द्वारा पूरी तरह से लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी करते हुए गलत इरादे से पार्टी बदलने’ का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के प्रस्तावित बिल में संविधान की दसवीं अनुसूची के लिए और भी अधिक सख़्त प्रावधानों के जरिए दलबदल विरोधी नियमों को मजबूत करने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि दसवीं अनुसूची में दलबदल के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े नियम शामिल हैं। 

    दसवीं अनुसूची में क्या है
    वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य मिलकर दूसरी पार्टी में चले जाएं तो उन्हें अयोग्य नहीं माना जाता. राघव चड्ढा के बिल ने इसे बढ़ाकर तीन-चौथाई (3/4) कर दिया था. मतलब 10 सदस्यों वाली पार्टी में कम से कम 8 सदस्यों का सहमत होना जरूरी होता. सिर्फ 7 से काम नहीं चलता। 

    जानिए बिल में क्या-क्या?
        इस प्रस्तावित कानून का मकसद संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 में संशोधन करके और दसवीं अनुसूची में बदलाव करके पार्टी के भीतर विलय के लिए ज़रूरी सदस्यों की संख्या को 2/3 से बढ़ाकर 3/4 करके  लोकतंत्र को मज़बूत करना और जन प्रतिनिधियों को राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बजाय जानकार कानून निर्माता बनने में मदद करना था। 

        बिल में यह भी लिखा था कि अगर कोई सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलता है तो उसे छह साल तक कोई चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी. साथ ही ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ रोकने के लिए अगर कोई सरकार से समर्थन वापस लेता है तो उसे सात दिन के अंदर स्पीकर या चेयरमैन के सामने हाजिर होना पड़ता. अगर वह नहीं करता तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता था। 

        बिल में साफ लिखा था कि दल-बदल कानून का मकसद विधायकों-सांसदों के खरीद-फरोख्त को रोकना था, लेकिन आज भी यह समस्या बदस्तूर जारी है. दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग हो रहा है. यह हमारे लोकतंत्र पर कलंक है. बिल ने अनुच्छेद 102 और 191 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा था ताकि सांसद या विधायक अयोग्य होने पर सदन की सदस्यता चली जाए। 

    और यह विडंबना
    तब राघव चड्ढा ने बिल पेश करते समय कहा था कि जनता ने जिस उम्मीद से विधायकों को चुना है, उसके खिलाफ फ्लोर क्रॉसिंग (दल-बदल) करना गलत है. लेकिन आज वही राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की दो-तिहाई बहुमत का हवाला देकर भाजपा में चले गए हैं. अगर उनका 2022 वाला बिल कानून बन जाता तो आज उन्हें सात सदस्यों (न कि छह) का समर्थन चाहिए होता और पूरी टीम को छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता। 

  • पंजाब चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, AAP संवैधानिक लड़ाई के मूड में

    पंजाब चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, AAP संवैधानिक लड़ाई के मूड में

    नई दिल्ली

    राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और हरभजन सिंह समेत सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है। इस मामले को लेकर AAP नेताओँ और जानकारों का कहना है कि अब पार्टी राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इन सांसदों के खिलाफ एक्शन की मांग कर सकती है। बता दें कि पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका है। इसका असर निश्चित तौर पर विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा।

    राज्यसभा सांसद और AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि वह इन सांसदों के खिलाफ ऐक्शन के लिए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को पत्र लिखेंगे और सातों सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करेंगे। संजय सिंह ने कहा, जिस तरह से सात सांसद बीजेपी में गए हैं, यह असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। मैं राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखूंगा और मांग करूंगा कि इन सांसदों को अयोग्य ठहराया जाए।

    दल बदल कानून का सहारा लेना चाहती है AAP
    उन्होंने कहा, 'दलबदल विरोधी कानून के अनुसार राज्यसभा और लोकसभा में किसी तरह का अलग गुट मान्य नहीं होता, चाहे उसमें दो-तिहाई सदस्य ही क्यों न हों।' उन्होंने यह भी कहा कि इन सात सांसदों का भाजपा में जाना पूरी तरह "असंवैधानिक" और "गैरकानूनी" है।

    संवैधानिक स्तर पर मामला उठाना चाहती है AAP
    आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को संवैधानिक स्तर पर आगे बढ़ाना चाहती है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात करने के लिए अपॉइनमेंट मांगा है। जानकारों का कहना है कि आम आदमी पार्टी चाहती है कि इन सभी सांसदों से राज्यसभा की सदस्यता वापस ले ली जाए। इसके लिए वह ‘राइट टु रीकॉल’ का इस्तेमाल करना चाहती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि संविधान में इस तरह का प्रावधान नहीं है। अगर जनता चाहे तो चुने गए प्रतिनिधि को कार्यकाल खत्म होने से पहले हटा सकती है। इसे 'राइट टु रिकॉल' कहते हैं।

    शुक्रवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल हो गए, जिनमें से छह पंजाब से हैं। ये सात सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के सूत्रों के अनुसार, मान ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा, ताकि वे सांसदों की ''सदस्यता समाप्त करने'' के मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रख सकें।

  • राघव चड्ढा और अन्य नेताओं का बीजेपी में स्वागत, मिठाई खिलाकर किया अभिनंदन

    राघव चड्ढा और अन्य नेताओं का बीजेपी में स्वागत, मिठाई खिलाकर किया अभिनंदन

    नई दिल्ली 

    राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके आम आदमी पार्टी (AAP) से अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. राघव ने भारी मन से कहा कि आम आदमी पार्टी अपने उन आदर्शों और बुनियादी मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है, जिनके लिए इसे बनाया गया था. उन्होंने अपनी स्थिति तय करते हुए कहा, "मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता की ओर बढ़ रहा हूं। 

    राघव चड्ढा ने एक बेहद चुटीली और सीधी टिप्पणी करते हुए खुद को 'गलत पार्टी में सही आदमी' बताया. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर अब वे घुटन महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी का मौजूदा स्वरूप उसके शुरुआती सिद्धांतों से मेल नहीं खाता। 

    राघव चड्ढा ने बताया कि हमारे साथ दो तिहाई ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसद हमारे साथ हैं. उन्होंने साइन भी कर दिया है. इसमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेताओं राघव चड्ढा के साथ शामिल हैं। 

    राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने पर अरविंद केजरीवाल का पहला रिएक्शन आ गया है. पूरी ख़बर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

    राघव चड्ढा, संदीप सिंह और अशोक मित्तल बीजेपी दफ्तर पहुंच चुके हैं. वे पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करके औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेंगे। 

    राज्यसभा में AAP के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं. 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं. ताजा इस्तीफा होने के बाद अब AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद बचे हैं. इनमें संजय सिंह (दिल्ली), एनडी गुप्ता (दिल्ली) और जल कार्यकर्ता बलबीर सिंह सिच्चेवाल (पंजाब) हैं। 

    संदीप पाठक ने भी छोड़ी पार्टी
    AAP नेता संदीप पाठक ने कहा कि मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था कि ये स्थिति आएगी पर ये आई। 10 साल से इस पार्टी से मैं जुड़ा रहा और आज मैं AAP से अपने रास्ते अलग कर रहा हूं। संदीप पाठक भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

    स्वाति मालीवाल भी हुई बीजेपी में शामिल
    राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वह भी बीजेपी का दामन थाम चुकी है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। अशोक मित्तल ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है। राजेंद्र गुप्ता भी बीजेपी में शामिल हुए।

    2 अप्रैल को उपनेता पद से हटाए गए थे
    आम आदमी पार्टी ने बीते 2 अप्रैल को उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उप नेता के पद से हटा दिया था। इस बारे में राज्यसभा सचिवालय को पार्टी की तरफ से पत्र लिखा गया था। इसमें कहा गया था कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का टाइम न दिया जाए। पार्टी ने उनकी जगह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के अशोक मित्तल को उप नेता बनाया था। हालांकि, मित्तल ने भी आज पार्टी का दाम छोड़ दिया। 

    आम आदमी पार्टी पर लगाया गंभीर आरोप
    दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि, कि उन्होंने और राज्यसभा में आप के दो-तिहाई सदस्यों ने फैसला किया है कि वे संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी, जिसे उन्होंने अपने खून-पसीने से खड़ा किया और अपनी जिंदगी के 15 साल दिए, अब अपने सिद्धांतों और मूल्यों से भटक चुकी है। उनके मुताबिक, पार्टी अब देश के हित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है।

    राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें लग रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं। इसी वजह से उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है और अब वह जनता के और करीब जाने की बात कर रहे हैं।

    आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने से पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि, राजनीति में आने से पहले वह एक प्रैक्टिस करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) थे। उन्होंने बताया कि जब यह मंच बना था, तब इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग जुड़े थे—कुछ वैज्ञानिक थे, तो कुछ शिक्षाविद। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ने वालों में एक विश्व स्तर का क्रिकेटर, एक पद्म श्री सम्मान पाने वाला व्यक्ति और एक सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। इन सभी लोगों ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य के साथ अपना सब कुछ छोड़कर इस पार्टी को बनाया था।

    राघव चड्ढा ने बताया कि वह इस पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं और पार्टी को अच्छी तरह समझते हैं। उनके अनुसार, उन्होंने और उनके साथियों ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से दिल्ली में पार्टी को खड़ा किया, पंजाब में उसे मजबूत बनाया और दूसरे राज्यों में भी फैलाने की कोशिश की। लेकिन अब उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस पार्टी की शुरुआत भ्रष्टाचार खत्म करने के मकसद से हुई थी, वही आज भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों के हाथों में फंस गई है। उनका कहना है कि इसी वजह से जो लोग देश सेवा के इरादे से पार्टी में आए थे, वे अब या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या धीरे-धीरे छोड़ रहे हैं।

    राघव चड्ढा के मुताबिक, सभी सांसदों ने इस संबंध में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इन्हें राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है. उन्होंने कहा कि तीन सांसद उनके साथ मौजूद हैं, जबकि अन्य में हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। 

    1. स्वाति मालीवाल: जनवरी 2024 में निर्वाचित.
    2. अशोक कुमार मित्तल: पंजाब.
    3. संजीव अरोड़ा: पंजाब
    4. संदीप पाठक: पंजाब
    5. हरभजन सिंह: पंजाब
    6. बलबीर सिंह सीचेवाल: पंजाब
    7. विक्रमजीत सिंह साहनी: पंजाब

  • पंजाब मेरी रूह है, राजनीति नहीं; राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर विरोधियों को दिखाया आईना

    पंजाब मेरी रूह है, राजनीति नहीं; राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर विरोधियों को दिखाया आईना

     नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं पर तीखा हमला बोला है, जिन्होंने हाल ही में उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से AAP के कुछ नेता सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रहे थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं। राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ करीब 3 मिनट का एक वीडियो शेयर कर उन्हें आईना दिखा दिया है।

    राघव चड्ढा ने आरोपों पर पलटवार करते हुए 'एक्स' पर लिखा, "AAP के मेरे उन साथियों के लिए, जिन्हें यह वीडियो जारी करने के लिए मजबूर किया गया कि राघव चड्ढा संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में नाकाम रहे, उनके लिए पेश है एक छोटा सा ट्रेलर… पिक्चर अभी बाकी है।"

    राघव ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए आगे कहा किपंजाब उनके लिए केवल राजनीति या चर्चा का विषय नहीं है। उन्होंने लिखा, "पंजाब मेरी भूमि है, मेरा कर्तव्य है, मेरी मिट्टी है और मेरी रूह है।" उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ संसद में पंजाब के हक की आवाज उठाते हुए अपने पुराने वीडियो का एक संकलन भी शेयर किया, ताकि यह साबित किया जा सके कि उन्होंने हमेशा पंजाब के हितों की बात की है।
     
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक करता है। उनके ‘मजबूर किया गया’ शब्द के इस्तेमाल से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर ही कोई गुट उनके खिलाफ सक्रिय है। फिलहाल, इस 'ट्रेलर' के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि राघव की 'पूरी पिक्चर' में क्या खुलासे होते हैं।

    राघव संसद में पंजाब के मुद्दे उठाने में नाकाम रहे : ‘आप’ का आरोप
    ‘आप’ ने कल पंजाब से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने में संसद में नाकाम रहने का आरोप लगा राघव चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा था कि उनकी 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, ‘आप’ के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा और पार्टी नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि कई अहम मामलों पर चड्ढा की चुप्पी 'निराशाजनक' है। चीमा ने कहा कि पंजाब के विधायकों द्वारा राज्यसभा के लिए चुने गए चड्ढा से राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के मुद्दों का सशक्त प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने इससे जुड़ा 'एक भी संवेदनशील मुद्दा' नहीं उठाया। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास निधि के लगभग 8,500 करोड़ रुपये के लंबित बकाया और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित लगभग 60,000 करोड़ रुपये के नुकसान सहित प्रमुख वित्तीय मुद्दों को संसद में उजागर नहीं किया गया।

    राघव की की 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत : चीमा
    उन्होंने जीएसटी मुआवजे में बदलाव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्त पोषण से संबंधित मुद्दों के कारण हुए वित्तीय नुकसान को भी उन मामलों में गिनाया जिन्हें सांसद कथित तौर पर उठाने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि पिछले साल पंजाब में आई बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये की पूरी वित्तीय सहायता पंजाब को नहीं मिली है। चीमा ने कहा कि यह मुद्दा संसद में भी नहीं उठाया गया। मंत्री ने चड्ढा की चुप्पी को 'निराशाजनक' बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी को सांसद से उम्मीद थी कि वह इन मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे, लेकिन उनकी 'निष्क्रियता' पार्टी के सिद्धांतों के विपरीत है। 'आप' की पंजाब इकाई के प्रमुख अरोड़ा ने कहा कि जनता के मुद्दों को निडर होकर उठाना पार्टी के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है और इससे किसी भी तरह का विचलन 'अप्रत्याशित' है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लंबित वित्तीय और राहत संबंधी मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • AAP पर धोखा, लूट और बदनामी का आरोप’, कांग्रेस नेता उदित राज ने राघव चड्ढा का समर्थन किया

    AAP पर धोखा, लूट और बदनामी का आरोप’, कांग्रेस नेता उदित राज ने राघव चड्ढा का समर्थन किया

    नई दिल्ली

    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से सियासत तेज है। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा है कि राघव ने कुछ भी गलत नहीं किया है बल्कि उन्होंने सही काम किया है। उदित राज ने साथ ही यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को बदनाम करने की काफी कोशिश कि लेकिन वे कुछ भी साबित नहीं कर सके।

    आप नेता राघव चड्ढा के विवाद पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, ‘आप ने जनता को धोखा दिया, लूट मचाई और कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की, फिर भी उनके खिलाफ कभी कोई आरोप साबित नहीं हुआ। उन्हें इससे सबक लेना चाहिए था। अब वे शिकायत कर रहे हैं कि राघव चड्ढा उनका साथ नहीं दे रहे हैं। राघव चड्ढा ने कुछ भी गलत नहीं किया। वास्तव में, उन्होंने सही काम किया है और दूसरों को भी उसी रास्ते पर चलना चाहिए।’

    'बीजेपी से मिलकर ही कांग्रेस को उखाड़ा'
    उदित ने कहा ‘राघव चड्ढा ने इनके साथ (आप) सही किया बल्कि इन्हें तो और सबक सिखाना चाहिए। इन्होंने और नेताओं के साथ क्या किया और अब ये कह रहे हैं कि राघव हमारा साथ नहीं दे रहे हैं। बीजेपी से मिल गए हैं। अरे तुमने बीजेपी से मिलकर ही कांग्रेस को उखाड़ा। आज अपनी सुविधा के हिसाब से व्यक्तिगत महत्वकांक्षा को हासिल करने के लिए अपनी ही पार्टी बनाई वरना इनके पास दम था रामलीला मैदान में लाखों लोगों को खाना खिलाने में। ये लोग अपने इतिहास को देख लें। राघव चड्ढा ने कोई गलत काम नहीं किया बल्कि एकदम सही काम किया और लोगों को भी करना चाहिए।’

    'आपको बोलना चाहिए'
    उदित ने इससे पहले  भी इस मुद्दे पर कहा था कि राघव को इस मुद्दे पर खुलकर बोलना चाहिए और चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ‘खामोशी होनी ही नहीं चाहिए। अगर राजनीति में हैं तो इस मुद्दे पर तो खामोशी का मतलब ही नहीं होता। राघव जन समस्याओं को उठाते हैं और ऐसे में उन्हें सब साफ कर देना चाहिए। कोई भी खामोश नहीं रहता है। अगर पार्टी ने कोई अपमान नहीं किया है तो ये भी बताएं। और पार्टी से नाखुश हैं तो ये भी बताएं। ये क्या दोहरा चरित्र है। खामोश किसने करवाया है ये भी बताएं। पॉलिटिकल चीजें निजी नहीं होती हैं बल्कि पब्लिक होती हैं। आप क्यों इस तरह से अनुमान लगा रहे हैं या किसी को अंधेरे में रख रहे हो या लुका छिपी कर रहे हो या रहस्य पैदा दर रहे हो। आपको बोलना चाहिए।’

    पार्टी के फैसले पर राघव ने क्या कहा?
    राघव ने पार्टी के इस फैसले पर  आरोप लगाते हुए कहा पार्टी उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि 'जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं और शायद मैं ऐसे विषय उठाता हूं, जो आमतौर पर संसद में नहीं उठाए जाते लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है? मैं यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने से रोका जाए।'

  • राघव चड्ढा को ‘शीशमहल’ में पीटने का खुलासा, हरियाणा AAP के पूर्व अध्यक्ष का बड़ा दावा

    राघव चड्ढा को ‘शीशमहल’ में पीटने का खुलासा, हरियाणा AAP के पूर्व अध्यक्ष का बड़ा दावा

    रोहतक 

    हरियाणा में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष रहे नवीन जयहिंद ने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया है कि आप सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास रहे 'शीशमहल' (सीएम हाउस) में मुर्गा बनाकर पीटा गया था। नवीन के मुताबिक राघव के साथ ऐसा चार नेताओं के सामने किया गया था। यही नहीं उनका दावा है कि इस दौरान राघव की आंख पर चोट आई थी जिसका ईलाज करवाने वे इंग्लैंड गए थे जबकि लोगों को यह लग रहा था कि वे हनीमून मनाने गए हैं। यह सभी खुलासे राघव को खुद करने चाहिए।

    नवीन 2 मिनट के वीडियो में कहते हैं कि ‘आज एक वीडियो देखी हमारे पुराने साथी हैं राघव जी जो कि राज्यसभा में सांसद हैं। उन्हें पार्टी ने उप-नेता पद से हटा दिया। और अभी उनका वीडियो देखा वह कह रहे हैं कि मैं दरिया हूं सैलाब आएगा। तो मैं उन भाई को कहना चाहता हूं कि आप सबको भी बता देना चाहता हूं कि वो राजदार हैं मालदार हैं दिल्ली और पंजाब के तो वे बताएं। राघव वो चीज बताएं कि जब उनको मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शीशमहल में बुलाकर मुर्गा बनाकर पीटा गया था…तो क्यों नहीं बता रहे वे लोगों को ये बात?’
    पूछा- कौन थे वो चार लोग?

    उन्होंने आगे कहा ‘उस टाइम पर जब सैलाब आया था और रोते हुए उनको आंख में चोट लगी थी तो फिर इंग्लैंड में जाकर उन्होंने अपनी ठीक करवाई। क्यों नहीं बताते वह ये बात। वो जितने मालदार, जितने सूटकेस और जितनी डील हुई थीं वो क्यों नहीं बताते। राघव जी आप राज्यसभा में हैं और आप जब इतना बोलते हैं तो वो भी बोलिए। बताइए कौन-कौन वो चार लोग कौन-कौन थे जो वहां पर बैठे थे। जहां पर आपको मुर्गा बनाया गया और पीटा गया।’
    कौन हैं नवीन जयहिंद?

    आपको बता दें कि नवीन जयहिंद 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़े थे। वे आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। पार्टी ने उन्हें हरियाणा की कमान सौंपी थी। हालांकि उन्होंने 2022 में आपसी मतभेद के चलते खुद को पार्टी से अलग कर लिया।
    उपनेता पद से हटाए जाने के बाद क्या बोले राघव?

    आपको बता दें कि राघव ने उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि 'जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं और शायद मैं ऐसे विषय उठाता हूं, जो आमतौर पर संसद में नहीं उठाए जाते लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है? मैं यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने से रोका जाए।

    उन्होंने कहा कि अब कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? जब भी मैं बोलता हूं, मैं देश के आम आदमी की बात करता हूं। एयरपोर्ट पर महंगे खाने का मुद्दा, जोमैटो-ब्लिंकिट डिलीवरी राइडर्स की समस्या, खाने में मिलावट का मुद्दा, मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ, कंटेंट क्रिएटर्स पर स्ट्राइक का मुद्दा, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा 12 महीनों में 13 बार रिचार्ज कराने का मुद्दा समेत अन्य मुद्दे संसद में उठाए हैं।

    आप नेता ने कहा कि और इन मुद्दों को उठाने के बाद देश के आम आदमी को फायदा हुआ लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ? कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? कोई मेरी आवाज क्यों दबाना चाहेगा? खैर, आप लोग मुझे असीम प्यार देते हैं। जब भी मैं आपके मुद्दे उठाता हूं, आप मेरा हौसला बढ़ाते हैं इसके आप सभी का आभार करते हैं।