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  • भोपाल में घर-जमीन की रजिस्ट्री पर बढ़ सकता है खर्च, 200 से ज्यादा क्षेत्र मर्ज होने से बढ़ेंगी गाइडलाइन दरें

    भोपाल में घर-जमीन की रजिस्ट्री पर बढ़ सकता है खर्च, 200 से ज्यादा क्षेत्र मर्ज होने से बढ़ेंगी गाइडलाइन दरें

    भोपाल 
    भोपाल में कलेक्टर गाइडलाइन में पिछले दरवाजे से दरवृद्धि की फिर से तैयारी है। इस बार 200 से अधिक क्षेत्र मर्ज करने की तैयारी की जा रही है। मुख्य मार्ग से जोड़ने से अंदरूनी क्षेत्रों में दर 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी। यहां रजिस्ट्री महंगी होगी। प्रशासन दो साल से सीधे दरों में बढ़ोतरी के साथ क्षेत्रों की संख्या घटाकर अप्रत्यक्ष रूप से भी रजिस्ट्री महंगी कर रहा है। 2025 में तो 1000 क्षेत्रों को मर्ज कर दिया था। इससे कई क्षेत्रों में 200 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई थी।

    यहां के क्षेत्र मर्ज करेंगे
    अयोध्या बायपास से जुड़े 40 क्षेत्रों को मुख्यमार्ग व अंदरूनी क्षेत्रों की मर्जिंग होगी। इसके साथ संतनगर मुख्यमार्ग के 32 क्षेत्रों को अंदरूनी क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा। रातीबढ़ से लेकर नीलबड़, कलखेड़ा, बरखेड़ा नाथू में मुख्यमार्ग से 600 मीटर अंदर तक के क्षेत्र की एक समान दर की जा रही। यहां 18 क्षेत्र मर्ज करेंगे। कोलार रोड के साथ सनखेड़ी मास्टर प्लान रोड से अंदर वाले क्षेत्र मुख्यमार्ग से जोड़े जा रहे। ये भी 35 क्षेत्र है।

    ऐसे होगा असर
    क्षेत्रों को मर्ज करने की इस नीति का सबसे बड़ा नुकसान मध्यमवर्गीय और आम गृह खरीदारों पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी मुख्य मार्ग की गाइडलाइन दर 4,000 प्रति वर्गफीट है और उसके अंदर स्थित कॉलोनी की दर 2,500 प्रति वर्गफुट थी, तो विलय के बाद कॉलोनी के अंदरूनी मकान की दर भी 4,000 प्रति वर्ग फुट मानी जाएगी। जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य भले ही कम हो, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दरें मुख्य मार्ग के बराबर होने से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क का बोझ सीधा खरीदार की जेब पर पड़ेगा।

    विरोध भी बेअसर
    कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए आयोजित होने वाली जिला मूल्यांकन समिति की बैठकों में स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने लगातार इस नीति का कड़ा विरोध किया है। विधायकों का तर्क रहा है कि मुख्य मार्ग और अंदरूनी क्षेत्रों का व्यावसायिक और आवासीय मूल्य कभी एक समान नहीं हो सकता।

    ये है स्थिति
    2024: 3900 क्षेत्रों के आधार पर 25 से 95 फीसदी दरवृद्धि की थी
    2025 में 2885 क्षेत्रों के आधार पर दरें तय की थी। 18 फीसदी बढ़ोतरी तय की थी।
    2026 में अब 2680 क्षेत्र करने की स्थिति

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, हाईवे के दोनों तरफ 40 मीटर में निर्माण और लैंड कन्वर्जन पर लगी रोक

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, हाईवे के दोनों तरफ 40 मीटर में निर्माण और लैंड कन्वर्जन पर लगी रोक

    जयपुर 

    राजस्थान में नेशनल हाईवे पर अब 40 मीटर तक के एरिया में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने सभी कलेक्टर को आदेश जारी करके अगले आदेशों तक ऐसे मामलों में जमीनों के कन्वर्जन पर रोक लगा दी।

    दरअसल कुछ महीने पहले फलोदी स्थि​त नेशनल हाईवे पर भीषण सड़क हादसा हुआ था। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी नेशनल हाईवे से नियमों के तहत 75 मीटर तक (हाईवे के मिड पॉइंट से) दूरी में बने सभी होटल, ढाबों का संचालन बंद करने और अति​क्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में आदेश देते हुए 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल एक्टिविटी बंद करके नो-कंस्ट्रक्शन जोन बनाने के ​लिए कहा था।

    इसी आदेशों की पालना में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने हाल ही एक नोटिफिकेशन जारी करके नेशनल हाईवे के मिड पॉइंट से 40 मीटर की दूरी तक आ रही सभी जमीनों के लैंड यूज कन्वर्जन करने पर रोक लगा दी है।

    इसी आदेशों की पालना में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने हाल ही एक नोटिफिकेशन जारी करके नेशनल हाईवे के मिड पॉइंट से 40 मीटर की दूरी तक आ रही सभी जमीनों के लैंड यूज कन्वर्जन करने पर रोक लगा दी है। 

    रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल उपयोग के लिए जमीन के लैंड यूज पर रोक लगाई है। 40 मीटर के बाद केवल आवासीय निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी। 

    वहीं हाईवे के मिड पॉइंट से 75 मीटर तक कोई भी ढाबा, दुकान, रेस्स्टोरेंट, होटल, मोटल का संचालन नहीं होगा। न ही इस उपयोग के लिए मौजूदा कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन किया जाएगा।

    75 मीटर तक कॉमर्शियल एक्टिविटी पर रोक
    रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 40 मीटर तक आवासीय और 75 मीटर तक कॉमर्शियल उपयोग के लिए जमीन के लैंड यूज पर रोक लगाई है। 40 मीटर के बाद केवल आवासीय निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी।

    वहीं हाईवे के मिड पॉइंट से 75 मीटर तक कोई भी ढाबा, दुकान, रेस्स्टोरेंट, होटल, मोटल का संचालन नहीं होगा। न ही इस उपयोग के लिए मौजूदा कृषि भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन किया जाएगा।