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  • उपचुनाव से पहले जनसुराज में बड़ा सियासी झटका, केसी सिन्हा सहित कई नेता BJP में हुए शामिल

    उपचुनाव से पहले जनसुराज में बड़ा सियासी झटका, केसी सिन्हा सहित कई नेता BJP में हुए शामिल

    पटना
     बिहार के सियासी गलियारे से बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल बांकीपुर उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. राजधानी पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह के दौरान जनसुराज पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली. इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी नए सदस्यों का पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। 

    प्रशांत किशोर की पार्टी में भगदड़, जनसुराज के कई दिग्गज BJP में शामिल
    भाजपा में शामिल होने वालों में सबसे चर्चित नाम दीघा विधानसभा सीट से जनसुराज के पूर्व प्रत्याशी रहे बिट्टू सिंह का है. इसके अलावा जाने-माने शिक्षक और कुम्हरार विधानसभा सीट से जनसुराज के पूर्व प्रत्याशी रहे केसी सिन्हा ने भी भाजपा का दामन थाम लिया. दोनों नेताओं के साथ बड़ी संख्या में जनसुराज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए. इस दौरान दीघा विधायक संजीव चौरसिया समेत बीजेपी के कई नेता मौजूद रहे। 

    बता दें, बिट्टू सिंह के साथ उनकी पत्नी विनीता बिट्टू सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. विनीता बिट्टू सिंह मेयर का चुनाव लड़ चुकी हैं. वहीं जनसुराज के मनेर विधा सभा प्रत्याशी रह चुके गोपाल सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजधानी पटना की दो अहम विधानसभा सीटों दीघा और कुम्हरार से जुड़े नेताओं का भाजपा में शामिल होना जनसुराज के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. खासकर ऐसे समय में जब बिहार की चर्चित विधानसभा सीट बांकीपुर में उपचुनाव होना है। 

    गण‍ित की क‍ि‍ताबों ने दिलाई प्रसिद्ध‍ि 
    प्रो. सिन्‍हा का जन्‍म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ था। वहीं से प्राथम‍िक शिक्षा लेने के बाद बीएससी और एमएससी की। दोनों में गोल्‍ड मेडलिस्‍ट रहे। इसके बाद पटना साइंस कॉलेज में गण‍ित के प्रोफेसर बने। 

    प्रो. केसी सिन्हा लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते हैं। गणित विषय पर उनकी कई पुस्तकें देशभर के विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    करीब 70 से ज्‍यादा क‍िताबें वे लिख चुके हैं। बिहार समेत अन्य राज्यों के प्रतियोगी परीक्षार्थियों और छात्रों के बीच उनका व्यापक प्रभाव माना जाता है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्‍होंने जन सुराज की सदस्‍यता ली थी। 

    बीजेपी में शामिल हुए के.सी. सिन्हा का क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है, क्योंकि उन्होंने पिछले चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के आधिकारिक टिकट पर अपनी किस्मत आजमाई थी. उपचुनाव से ठीक पहले उनके और बिट्टू सिंह जैसे नेताओं के पाला बदलने से अब चुनावी मैदान में प्रशांत किशोर की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। 

    नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है. नीरज युवा मोर्चा से जुड़े नेता हैं. बीजेपी ने उन्हें पिछले उम्मीदवार अभिषेक कुमार (बंटी) के नाम वापस लेने के बाद मैदान में उतारा है. जहां प्रशांत किशोर खुद मैदान में हैं। 

    बता दें कि बांकीपुर समेत मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा और तीन अगस्त को नतीजे घोषित होंगे। 

    2025 में जन सुराज के टिकट पर लड़ा था चुनाव
    वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रो. केसी सिन्हा ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के टिकट पर पटना की कुम्हरार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था।

    हालांकि, त्रिकोणीय मुकाबले में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और वे तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजय कुमार ने जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरे स्थान पर कांग्रेस प्रत्‍याशी इंद्रदीप चंद्रवंशी थे। 

    प्रो. सिन्‍हा को 15017 मत मिले थे। वे तीसरे स्‍थान पर रहे थे। 
    बांकीपुर उपचुनाव के बीच बढ़े सियासी मायने

    बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान प्रो. केसी सिन्हा का भाजपा में शामिल होना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    राजधानी पटना के शैक्षणिक और मध्यवर्गीय तबके में उनकी पहचान को देखते हुए भाजपा इसे अपने पक्ष में सकारात्मक संदेश के रूप में पेश करना चाहेगी।

    वहीं, जन सुराज के लिए यह ऐसे समय में बड़ा झटका है, जब पार्टी उपचुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने की कोशिश कर रही है।

     

  • ‘पद छोड़ सकते हैं नीतीश कुमार’, प्रशांत किशोर का बयान; बिहार में सत्ता समीकरण बदलने के संकेत

    ‘पद छोड़ सकते हैं नीतीश कुमार’, प्रशांत किशोर का बयान; बिहार में सत्ता समीकरण बदलने के संकेत

    पटना
    जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अपना पद छोड़ रहे हैं क्योंकि केंद्र में सत्ता में मौजूद भाजपा, जिसने पिछले विधानसभा चुनाव में NDA को “तैयार किया हुआ जनादेश” दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है। ईद के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने दोहराया कि जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार राज्य का नेतृत्व करने के लिए “शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य” हैं।

    ‘मेरी भविष्यवाणी सही साबित हुई’
    प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से पद छोड़ रहे हैं या किसी दबाव में ऐसा कर रहे हैं। लेकिन एक तरह से मेरी बात सही साबित हुई है। विधानसभा चुनाव से पहले जब मैंने कहा था कि NDA जीत भी जाए, तब भी उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा, तब मेरी आलोचना हुई थी।”

    47 वर्षीय किशोर ने आगे कहा, “मेरी यह भविष्यवाणी कि NDA हार सकती है, भले ही गलत साबित हुई हो, लेकिन नीतीश कुमार के बारे में मेरी बात सही निकली। जो व्यक्ति स्पष्ट रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से अयोग्य है, वह कैसे कुछ ही महीनों में, जब गठबंधन को भारी बहुमत मिला हो, मुख्यमंत्री पद छोड़ सकता है?”

    ‘जनादेश तैयार किया गया था’
    IPAC के संस्थापक रहे किशोर, जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान को संभालकर बड़ी सफलता हासिल की थी, ने आरोप लगाया कि पिछले बिहार चुनाव में NDA को जो जनादेश मिला, वह “तैयार किया हुआ” था। उन्होंने कहा, “वोट 10,000 रुपये बांटकर खरीदे गए।” उनका इशारा चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की ओर था, जिसके तहत करीब 1.50 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

    भाजपा और केंद्र की भूमिका पर सवाल
    हल्के-फुल्के अंदाज में किशोर ने यह भी कहा, “केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा, केंद्रीय गृह मंत्री और चुनाव आयोग ने NDA को बड़ा जनादेश दिलाने में अपनी-अपनी भूमिका निभाई होगी। इसलिए यह स्वाभाविक है कि केंद्र की पार्टी अब बिहार में अपना हिस्सा चाहती है।” राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए नीतीश कुमार दिल्ली जा सकते हैं और उनके बाद बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बन सकता है।

    कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जवाब टाला
    हालांकि जब किशोर से पूछा गया कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठ सकता है, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मेरी अपनी पार्टी को लेकर की गई भविष्यवाणी ही गलत साबित हुई थी इसलिए इस पर कुछ कहना ठीक नहीं होगा।”

    ‘बिहार मेरा मिशन, अन्य राज्यों पर नहीं ध्यान’
    राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पहचान बनाने वाले किशोर, जिन्होंने 2021 में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार भारी बहुमत दिलाने के बाद कंसल्टेंसी छोड़ दी थी, ने पड़ोसी राज्यों के चुनावों पर कोई भविष्यवाणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने गृह राज्य बिहार के लिए एक मजबूत विकल्प तैयार करने के उद्देश्य से राजनीति में सक्रिय भूमिका अपनाई है। पिछले चुनाव में मैंने पूरी कोशिश की, और जन सुराज पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए अब फिर से जनता के बीच जा रहा हूं। जब तक बिहार में मेरा मिशन पूरा नहीं होता, मैं दूसरे राज्यों के बारे में नहीं सोचूंगा।”

    निशांत की एंट्री पर क्या बोले?
    नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर पूछे गए सवाल पर किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सार्वजनिक जीवन में आने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं, हालांकि यह बिहार में किसी नेता द्वारा अपने परिवार को आगे बढ़ाने का एक और उदाहरण है।”