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  • विपक्ष में टूट का दौर तेज, NDA की ताकत बढ़ने के आसार; भाजपा ने आरोपों को किया खारिज

    विपक्ष में टूट का दौर तेज, NDA की ताकत बढ़ने के आसार; भाजपा ने आरोपों को किया खारिज

    नई दिल्ली
    भारतीय राजनीति में पिछले कुछ दिनों से लगातार बगावत का दौर जारी है। विपक्ष में कांग्रेस के बाद नंबर दो आने का दावा करने वाली तीन पार्टियों में एक के बाद एक टूट हुई है। पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद टूटकर भाजपा में शामिल हो गए। उसके बाद पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती हुई नजर आई। अब 2022 की टूट के बाद बाकी बची उद्धव ठाकरे की पार्टी में एक बार फिर से बागवत हुई है। पार्टी के 9 में से 6 सांसद शिंदे की तरफ जाने की कतार में हैं। विपक्षी पार्टियों ने इस बगावत का आरोप भारतीय जनता पार्टी के ऊपर लगाया है, तो भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसके लिए नेताओं के असंतोष को वजह बताया।

    हिन्दुस्तान से बात करते हुए भाजपा के वरिष्ठ सांसद ने इन पार्टियों में हुई टूट की वजह का भी जिक्र किया। नाम न देने की शर्त पर सांसद ने कहा कि इन पार्टियों के भीतर नेतृत्व की कमी साफ तौर पर नजर आ रही है। इसलिए सांसद और नेता भी साथ छोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "विधायक या सांसद दल बदलने का फैसला कुछ कारणों से करते हैं। पहला यह कि उन्हें उस पार्टी में अपना राजनीतिक भविष्य नजर ना आ रहा हो। दूसरा, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच में संबंध सही नहीं हों। तीसरा होता है कोई अन्य लाभ, जिसमें पैसे और अन्य चीजें शामिल होती हैं।"

    भाजपा नेता ने कहा कि उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी की पार्टी के नेता नेतृत्व को लेकर असंतुष्ट थे। इसलिए वह उनसे अलग हुए हैं। उन्होंने कहा, "शिवसेना में एक समय था कि बालासाहब ठाकरे यह सुनिश्चित करते थे कि पार्टी में नेताओं और कार्यकर्ताओं की पर्याप्त देखभाल हो। लेकिन अब उद्धव गुट में ऐसी कोई बात नहीं है। वहां नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच में अब कोई जुड़ाव नहीं रह गया। अभी भी जो लोग वफादारी की वजह से उद्धव के साथ जुड़े हुए हैं। उनमें कई लोगों को यह लगता है कि पार्टी ने कांग्रेस के साथ समझौता करके हिंदुत्व की रक्षा वाली अपनी छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है।"

    बंगाल में नेताओं ने ममता बनर्जी की पार्टी नहीं छोड़ी, यह तख्तापलट: भाजपा नेता
    भाजपा के एक दूसरे नेता ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि यहां पर विधायकों ने ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ा नहीं है बल्कि तख्ता पलट किया है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक या दो नेताओं का नाराज होकर पार्टी छोड़ना नहीं है। लगभग सभी विधायकों ने मिलकर तख्ता पलट जैसी स्थिति बनाकर रितब्रत बनर्जी को विधानसभा नेता प्रतिपक्ष बना दिया है। दूसरी तरफ 20 सांसद एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं। इतने बड़े परिवर्तन के पीछे केवल एक ही वजह है कि इन लोगों को पार्टी नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा। ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस को एक जागीर की तरह चला रही थीं। इसमें चुनकर आए नेताओं की कोई आवाज नहीं थी। इसलिए जैसे ही सत्ता गई, लोग भी साथ छोड़ते गए।"

    विपक्षी पार्टियों की टूट से सत्ता पक्ष को फायदा
    बता दें, भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भले ही इन पार्टियों को तोड़ने की बात से इनकार किया जा रहा हो। लेकिन विपक्ष इसके लिए केंद्रीय सत्ताधारी पार्टी को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया है कि सरकार संसद में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए उनके सांसदों को तोड़ रही है, ताकि दो-तिहाई बहुमत हासिल करके महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक जैसे मुद्दों को निपटाया जा सके।

    आंकड़ों की बात करें, तो विपक्षी पार्टियों में होने वाली इस टूट का फायदा भारतीय जनता पार्टी और केंद्र के सत्ताधारी गठबंधन एनडीए को मिलना तय है। क्योंकि अभी तक जिस भी पार्टी के नेता बगावत पर उतरे हैं उन्होंने केंद्र सरकार को समर्थन देने की बात कही है। इस समय पर एनडीए के पास लोकसभा के 293 सांसद हैं। अब इन बाकी सांसदों का साथ मलने के बाद यह संख्या 319 तक पहुंच जाएगी। इससे भाजपा कई मुद्दों को एक साथ निपटाने में भी कामयाब होगी।

  • जोसेफ विजय की नई कैबिनेट: एन आनंद से लेकर कीर्तना एस तक 9 मंत्री शामिल, बहुमत साबित करने की चुनौती

    जोसेफ विजय की नई कैबिनेट: एन आनंद से लेकर कीर्तना एस तक 9 मंत्री शामिल, बहुमत साबित करने की चुनौती

     तमिलनाडु

    तमिलनाडु की राजनीति में रविवार को एक नया युग की शुरूआत हो गई है। 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के संस्थापक जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। यह राज्य में पहली बार है जब किसी गैर-द्रविड़ पार्टी ने सरकार बनाई है। नई सरकार के गठन के साथ ही डीएमके और एआईएडीएमके का दशकों पुराना दबदबा खत्म हो गया है। विजय के साथ में  9 और मंत्रियों ने सपथ ली है। अब विजय को 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। विजय के साथ जिन नौ मंत्रियों ने सपथ ली है आइये उनके बार में हम आपको बताते है।

    एन आनंद
    61 साल के एन आनंद को लोग 'बुसी आनंद' के नाम से भी जानते हैं। वह विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। साल 2006 में वह पुडुचेरी से विधायक चुने गए थे। अब उन्होंने चेन्नई की टी नगर सीट से जीत हासिल की है। वह टीवीके के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और पहले विजय रसिगर मंदरम के प्रमुख  के तौर पर काम कर चुके हैं।

    आधव अर्जुना
    बास्केटबॉल खिलाड़ी और बिजनेसमैन रहे आधव अर्जुना अब राजनीति में सक्रिय हैं। वह बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। वह वीसीके पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हुए थे। पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने चुनाव अभियान में बड़ी भूमिका निभाई और चेन्नई की विल्लिवाक्कम सीट से जीत दर्ज की।

    राजमोहन अरुमुगम
    डिजिटल प्लेटफॉर्म 'पुट चटनी' से मशहूर हुए राजमोहन ने युवाओं और नए वोटरों को पार्टी से जोड़ने में मदद की। प्रचार सचिव के तौर पर उन्होंने सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के जरिए पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुँचाया। उनके मजाकिया अंदाज और रील्स को युवाओं ने काफी पसंद किया।

    सी टी आर निर्मल कुमार
    44 साल के निर्मल कुमार टीवीके की डिजिटल रणनीति के मुख्य चेहरा हैं। उनके पास बीजेपी और एआईएडीएमके के सोशल मीडिया सेल में काम करने का अनुभव है। उन्होंने व्हाट्सएप और मीम नेटवर्क का एक बड़ा जाल तैयार किया, जिससे 2025 और 2026 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का दबदबा बना रहा।

    के जी अरुणराज
    पूर्व आईआरएस अधिकारी और डॉक्टर अरुणराज ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर टीवीके जॉइन की। वह पार्टी में प्रचार और नीति के महासचिव हैं। उन्होंने तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र में आयकर विभाग में सेवा दी है। उन्होंने तिरुचेंगोडु सीट से चुनाव जीता है।

    के ए सेंगोट्टैयन
    50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव रखने वाले सेंगोट्टैयन पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वह एआईएडीएमके के दिग्गज नेता रहे हैं और नवंबर 2025 में टीवीके में शामिल हुए। उन्होंने गोबीचेट्टीपलयम सीट से नौवीं बार जीत हासिल की है। वह पार्टी की कार्यकारी समिति के मुख्य समन्वयक हैं।

    कीर्तना एस
    कीर्तना एस विजय की कैबिनेट में फिलहाल इकलौती महिला मंत्री हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके पास 22.6 लाख रुपये की संपत्ति और 12.8 लाख रुपये की देनदारी है। उनकी सालाना कमाई 6.4 लाख रुपये है और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

    पी वेंकटरमणन
    48 साल के वेंकटरमणन ने मायलापुर सीट से 70,070 वोटों के साथ जीत दर्ज की है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन पर कोई आपराधिक केस नहीं है। उनके पास कुल 5.4 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 3.2 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है।

    केटी प्रभु
    पेशे से डेंटिस्ट डॉ. केटी प्रभु ने शिवगंगा की करैकुडी सीट से चुनाव जीता है। वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति 11.4 करोड़ रुपये है। उनकी सालाना आय 54.6 लाख रुपये है और उन पर 3.3 करोड़ रुपये की देनदारी है।