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  • चंडीगढ़ में 75 करोड़ के प्रोजेक्ट की जांच लंबित, एक साल से विजिलेंस के पास मामला

    चंडीगढ़ में 75 करोड़ के प्रोजेक्ट की जांच लंबित, एक साल से विजिलेंस के पास मामला

    चंडीगढ़

    चंडीगढ़ के मनीमाजरा में 75 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किए गए जलापूर्ति प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच एक साल से ठंडे बस्ते में पड़ी है। इसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था, लेकिन इसके बाद भी परियोजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के आरोप लगाए। 

    प्रोजेक्ट में गड़बड़ी की शिकायत चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा ने केंद्र सरकार से की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच चंडीगढ़ विजिलेंस को सौंपी थी। इसके बावजूद अब तक न तो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है और न ही मामले में किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
    विजिलेंस चंडीगढ़।

    किन बिंदुओं की जांच कर रही विजिलेंस, जानिए…

        अमित शाह के उद्घाटन के बाद भी प्रोजेक्ट पर सवाल: मनीमाजरा में 24×7 जलापूर्ति परियोजना का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इस दौरान चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी मौजूद थे। परियोजना की लागत करीब 75 करोड़ रुपए बताई गई थी।

        मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी: इसका उद्देश्य मनीमाजरा के लोगों को चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति उपलब्ध करवाना था। केंद्र सरकार को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। 
    जांच में यह पता लगाया जाना था कि परियोजना पर खर्च की गई राशि किन कार्यों और उपकरणों पर खर्च हुई, सामान कहां से खरीदा गया और नगर निगम में इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किन अधिकारियों के पास थी।

        प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ तक नहीं: इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब एक साल बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ तक नहीं हुई है। जांच के दौरान नगर निगम के उन अधिकारियों की भूमिका देखी जानी है, जो परियोजना की योजना बनाने, खरीद प्रक्रिया और काम पूरा करवाने से जुड़े थे।

        एक अधिकारी चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर तैनात थे: परियोजना शुरू होने के समय एक अधिकारी चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर तैनात थे। वह अब मूल कैडर में वापस जा चुके हैं। ऐसे में जांच में देरी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित अधिकारी के चंडीगढ़ से जाने के बावजूद मामले की जांच को समय पर आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया।

        उद्घाटन के समय आनंदिता मित्रा थीं निगम कमिश्नर: उद्घाटन के समय चंडीगढ़ नगर निगम की कमिश्नर आनंदिता मित्रा थीं, जबकि वर्तमान में अमित कुमार निगम कमिश्नर हैं। जांच में परियोजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और उस समय लिए गए फैसलों की पड़ताल की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर तत्कालीन निगम कमिश्नर समेत अन्य संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

        विजिलेंस की जांच में देरी पर उठ रहे सवाल: केंद्र सरकार को शिकायत दिए जाने और जांच विजिलेंस को सौंपे जाने के बावजूद मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप हैं, दूसरी तरफ विजिलेंस की ओर से दस्तावेज नहीं मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल है कि नगर निगम से रिकॉर्ड हासिल करने के लिए क्या कार्रवाई की गई और अब तक संबंधित अधिकारियों को बुलाकर उनका पक्ष क्यों नहीं जाना गया।

        किसी अधिकारी के खिलाफ गड़बड़ी साबित नहीं: इस मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ गड़बड़ी साबित नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य परियोजना में खर्च हुई राशि, खरीद प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करना है। अब देखना होगा कि करीब एक साल से लंबित जांच में विजिलेंस कब तक आगे की कार्रवाई करती है।

    BJP अध्यक्ष ने दी केंद्र को शिकायत चंडीगढ़ बीजेपी अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने केंद्र सरकार को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मनीमाजरा में 4 अगस्त 2024 को 24×7 जलापूर्ति परियोजना का उद्घाटन किया गया, लेकिन आज तक वहां एक दिन भी पानी नहीं आया है। लोगों के घरों में गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

    केंद्र सरकार ने मामला संज्ञान में लिया मल्होत्रा ने लिखा था कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए, ताकि लोगों को पानी की दिक्कत न हो। इसी शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने मामला संज्ञान में लिया और इसकी जांच का जिम्मा चंडीगढ़ विजिलेंस विभाग को सौंपी।

    एक लाख से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई 75 करोड़ की लागत से बनी यह परियोजना मनीमाजरा के एक लाख से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इसमें मॉडर्न हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, शिवालिक एन्क्लेव, इंदिरा कॉलोनी और शास्त्री नगर के इलाके शामिल हैं। यह परियोजना स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लगातार और उच्च दबाव वाली जल आपूर्ति देना है।

    ऊर्जा की खपत की निगरानी जैसे काम किए जाने हैं इसके तहत रिसाव में कमी, स्मार्ट मीटरिंग, भूजल पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा की खपत की निगरानी जैसे काम किए जाने हैं। इसके लिए कुल 22 किलोमीटर लंबी जल पाइपलाइन बिछाई गई है और दो भूमिगत जलाशय बनाए गए हैं, जिनकी क्षमता दो-दो मिलियन गैलन प्रतिदिन है।

  • UN मिशन में दिखेगा MP पुलिस के अफसरों का दम, रेणु मुराव और नीरज वर्मा को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

    UN मिशन में दिखेगा MP पुलिस के अफसरों का दम, रेणु मुराव और नीरज वर्मा को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवा देने का अवसर मिला है. मध्य प्रदेश पुलिस की डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा को एक वर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) पुलिस मिशन में तैनात किया गया है. इस दौरान दोनों अधिकारी अंतरराष्ट्रीय पुलिस सेवा के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे और विभिन्न देशों के पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने का अवसर प्राप्त करेंगे। 

    कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन
    मध्य प्रदेश पुलिस के दो अधिकारी संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक अपनी सेवा देंगे. DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है. यह तैनाती मध्य प्रदेश पुलिस के लिए गौरव की बात मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय पुलिस मिशन में शामिल होकर अधिकारी अपने अनुभव, कार्यकुशलता और पेशेवर दक्षता का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही उन्हें विभिन्न देशों की पुलिस व्यवस्था, कार्यप्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलेगा। 

    मध्य प्रदेश की महिला अधिकारियों को भी मिला अवसर
    संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में मध्य प्रदेश से तीन महिला पुलिस अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है. इनमें डीएसपी रेणु मुराव के अलावा पांढुर्णा की रिजर्व इंस्पेक्टर (RI) अनिता और एएसपी निधि शिवहरे शामिल हैं. इन अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सेवाएं देने का अवसर मिला है. महिला अधिकारियों की इस भागीदारी को पुलिस सेवा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और उनकी पेशेवर क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

    एक वर्ष तक निभाएंगे जिम्मेदारी
    डीएसपी रेणु मुराव और टीआई नीरज वर्मा संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में एक वर्ष तक सेवाएं देंगे. जानकारी के अनुसार, टीआई नीरज वर्मा अपना एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद भारत लौटेंगे. वर्मा वर्तमान मे भोपाल के खजुरी थाना प्रभारी हैं। 

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सभी पुलिस अधिकारियो को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि, ''मप्र पुलिस के लिए ये सौभग्य की बात है की हमारे पुलिस अधिकारी अब विदेश में अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। 

    पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों समझेंगे

    संयुक्त राष्ट्र पुलिस मिशन में तैनाती पुलिस अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण पेशेवर अनुभव होता है. इस दौरान अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने और पुलिसिंग के वैश्विक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिलता है. मध्य प्रदेश पुलिस के इन अधिकारियों की तैनाती से प्रदेश की पुलिस सेवा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। 

  • छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 18 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी

    छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 18 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य की पुलिस व्यवस्था को और अधिक कसावट देने के लिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 18 अधिकारियों का स्थानांतरण आदेश जारी किया है. इस फेरबदल में वर्ष 2021 से 2024 बैच के युवा पुलिस अधिकारियों को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्तर तक अधिकारियों की तैनातियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 

    तबादला सूची के अनुसार, बीजापुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अभियान) के रूप में कार्यरत अमन कुमार रमन कुमार को अब नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में राज्य अन्वेषण एजेंसी (SIA) का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है. वहीं नारायणपुर में पदस्थ अजय कुमार को विशेष शाखा (SIB) में पुलिस अधीक्षक की कमान सौंपी गई है। 

    पुलिस मुख्यालय स्तर पर आकाश श्रीमाल को एआईजी (PHQ), अक्षय प्रमोद सबद्रा को एआईजी (योजना/प्रबंध) तथा एसटीएफ बघेरा (दुर्ग) में तैनात आकाश कुमार शुक्ला को एआईजी (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) की जिम्मेदारी दी गई है। 

    राज्य के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी नई नियुक्तियां की गई हैं. बीजापुर में पदस्थ रवींद्र कुमार मीणा को एसपी (चिटफंड एवं महिला संबंधी अपराध) बनाया गया है, जबकि सुकमा में कार्यरत रोहित कुमार शाह को बीजापुर स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) की 15वीं वाहिनी का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। 

    इसके अतिरिक्त, बस्तर और नक्सल प्रभावित संभागों में फील्ड कमान संभाल रहे नगर पुलिस अधीक्षकों (CSP) को पदोन्नत कर एएसपी (अभियान) की जिम्मेदारी दी गई है. इनमें जगदलपुर के सीएसपी सुमीतकुमार दत्ताहारी को कांकेर, रायपुर के एसीपी इशू अग्रवाल को नारायणपुर, रायगढ़ के सीएसपी मयंक मिश्रा को सुकमा, और राजनांदगांव की सीएसपी वैशाली जैन को जगदलपुर में एएसपी (अभियान) के पद पर भेजा गया है। 

    इसी तरह कोरबा के सीएसपी विमल कुमार पाठक को नारायणपुर, दुर्ग के सीएसपी हर्षित मेहर को कोंडागांव तथा अंबिकापुर के सीएसपी राहुल बंसल को बीजापुर में एएसपी (अभियान) की कमान मिली है। 

    इसके साथ ही, नए एवं प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों को भी प्रशासनिक अनुभव के लिए महत्वपूर्ण मैदानी पदस्थापना दी गई है. प्रशिक्षु आईपीएस अंशिका जैन को जगदलपुर का नया सीएसपी बनाया गया है. वहीं साकोर मानसी नानाभाऊ को रायपुर शहर के आजाद चौक क्षेत्र में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) नियुक्त किया गया है। 

    इसके अलावा, प्रशिक्षु अधिकारी आदित्य कुमार को राजनांदगांव का सीएसपी और प्रतीक बंसोड़े को अंबिकापुर का सीएसपी पदस्थ किया गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी इस नए आदेश से कानून-व्यवस्था के संचालन और विशेष अभियानों की गति में तेजी आने की उम्मीद है। 

     

  • इंदौर में हाईवोल्टेज ड्रामा: भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट के मामले में TI समेत 7 पुलिसकर्मी निलंबित

    इंदौर में हाईवोल्टेज ड्रामा: भाजपा कार्यकर्ता से मारपीट के मामले में TI समेत 7 पुलिसकर्मी निलंबित

    इंदौर 
    इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात जमकर हंगामा हुआ। पुलिसकर्मियों ने थाने के अंदर पंडित और भाजपा कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मामला विधायक गोलू शुक्ला के पंडित जयदीप दुबे और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे से जुड़ा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता और विधायक समर्थक थाने पहुंच गए। देर रात तक थाने के बाहर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चलता रहा। 

    हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। शुरुआती जांच के बाद थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह, एक सब-इंस्पेक्टर समेत 7 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया।

    पड़ोसियों से विवाद के बाद थाने पहुंचे थे पंडित
    मामले की शुरुआत जयदीप दुबे और उनके पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो मारपीट और अभद्र व्यवहार तक पहुंच गई। घटना के बाद जयदीप ने दोपहर करीब 3 बजे विधायक गोलू शुक्ला को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी।

    इसके बाद विधायक ने एरोड्रम थाने के टीआई वीरेंद्र सिंह कुशवाह से चर्चा की। बताया जा रहा है कि टीआई ने शाम करीब 6 बजे जयदीप को थाने आने के लिए कहा था। इसके बाद जयदीप दुबे अपने साथी और भाजपा कार्यकर्ता पंकज चौबे के साथ शाम करीब 7 बजे थाने पहुंचे।

    शिकायत सुनने के बजाय की मारपीट 
    आरोप है कि थाने पहुंचने के बाद जयदीप दुबे और पंकज चौबे के साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने अभद्रता की और मारपीट की। दोनों को थाने में ही बैठा लिया गया। घटना की जानकारी बाहर पहुंचने के बाद विधायक समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता थाने पहुंचने लगे।

    रात होते-होते थाने के बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई। सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे तक 500 से 1,000 लोग जमा हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की।

    सीसीटीवी फुटेज से जांच के दावे

    थाने के अंदर हुई घटना को लेकर सीसीटीवी फुटेज की भी चर्चा रही। सूत्रों का दावा है कि थाने में लगे कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में क्या दिखाई दे रहा है और उसमें मारपीट के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए फुटेज का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा मामला 
    घटना को लेकर देर रात तक पुलिस थाने के बाहर विरोध जारी रहा। बताया जा रहा है कि मामला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक भी पहुंचा। 

    विधायक गोलू शुक्ला और अन्य नेताओं ने भी वरिष्ठ स्तर पर संपर्क किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले में कार्रवाई की।

    रात करीब 3 बजे डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत और एडिशनल डीसीपी सुमित केरकट्टा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और शुरुआती जांच के बाद कार्रवाई की जानकारी दी।

    TI समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित

    मामले में एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह और एक सब-इंस्पेक्टर समेत कुल सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। देर रात तक थाने के बाहर समर्थकों की मौजूदगी बनी रही। पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई। 

  • दिल्ली पुलिस के बॉडी कैमरों पर विवाद क्यों? जानें रिकॉर्डिंग से लेकर हाईकोर्ट के फैसले तक पूरी बात

    दिल्ली पुलिस के बॉडी कैमरों पर विवाद क्यों? जानें रिकॉर्डिंग से लेकर हाईकोर्ट के फैसले तक पूरी बात

     नई दिल्ली  

    दिल्ली में प्रदर्शनों का दौर जारी है. कांग्रेस की ओर से हो रहे लगातार प्रदर्शन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी भी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करने की तैयारी में है. इसी बीच, दिल्ली पुलिस के जवानों की तस्वीरें शेयर हो रही हैं, जिसमें वो अपनी वर्दी पर एक डिवाइस लगाए हुए नजर आ रहे हैं. दिखने में ये पुलिस के वायरलैस जैसे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अब पुलिस के इस डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर काफी चर्चा हो रही है और मामला कोर्ट में भी पहुंचा है. ऐसे में जानते हैं कि ये डिवाइस है क्या और इसे लेकर क्या विवाद है?

    इस डिवाइस को लेकर क्या विवाद है, इसे जानने से पहले जानते हैं कि आखिर ये है क्या… 

    दरअसल, ये डिवाइस कोई वायरलैस नहीं हैं, जबकि कैमरे हैं. इन कैमरों को बॉडी वॉर्न कैमरा कहा जाता है. ये छोटे, पोर्टेबल वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस होते हैं, जिन्हें पुलिसकर्मी अपनी यूनिफॉर्म पर (आमतौर पर छाती, कंधे या कॉलर पर) पहनते हैं. ये आमतौर पर छोटे बॉक्स जैसे होते हैं, जो आप फोटो में देखकर समझ सकते हैं. इसमें हाई-रेजोल्यूशन वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होती है. इसे अधिकारी मैन्युअली ऑन/ऑफ कर सकते हैं, या कुछ मॉडल्स में ऑटोमैटिक एक्टिवेशन (जैसे हथियार निकालने, दौड़ने या झटके पर) की सुविधा होती है। 

    इसकी बैटरी लाइफ कई घंटों की होती है, और डेटा एन्क्रिप्टेड रहता है. पुलिस की ओर से इसका इस्तेमाल सबूत जुटाने के लिए किया जाता है, जिसमें घटनास्थल, बातचीत, गिरफ्तारी या प्रदर्शन के दौरान जो कुछ होता है उसका रियल-टाइम वीडियो-ऑडियो रिकॉर्ड रखा जाता है. पुलिस और आम नागरिक दोनों के व्यवहार का रिकॉर्ड रहता है. सीधे शब्दों में कहें तो इसका मकसद प्रदर्शन के दौरान होने वाली घटनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग रखना है, जिससे पुलिस पर अगर किसी तरह का कोई आरोप लगे तो पुलिस वीडियो सबूत के जरिए अपना पक्ष पेश कर सके। 

    अब सवाल है कि ये चर्चा में क्यों में है?
    हाल ही में एक जनहित याचिका पुलिस और आरएएफ के उन जवानों के लिए बॉडी कैमरा जरूरी करने की मांग को लेकर दाखिल की गई थी, जो भीड़ नियंत्रण, प्रदर्शन संभालने और भीड़ हटाने की कार्रवाई में तैनात होते हैं.याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे जवानों के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई जाए. इसके तहत ड्यूटी पर तैनाती के समय से लेकर ड्यूटी खत्म होने तक बॉडी कैमरा लगातार चालू रहे। 

    इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स  के जवानों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरा अनिवार्य करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में फैसला सरकार पर छोड़ दिया है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इसकी काफी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल किया जाना सही है या गलत… इसे लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। 

  • भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल पुलिस का बड़ा फैसला, दुर्गा उत्सव और दशहरे के चलते 15 दिन तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

    भोपाल 

    दुर्गा उत्सव और दशहरे के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सामान्य अवकाश पर रोक लगा दी है। डीजीपी के निर्देश पर विशेष शाखा ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    आदेश के मुताबिक 11 से 25 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का सामान्य अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। यह आदेश सभी स्पेशल डीजी, एडीजी, जोनल आईजी, भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षकों, सेनानियों और रेल पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है।

    आपात स्थिति में सीमित अवधि की छुट्टी
    पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार किसी आपात स्थिति में संबंधित एसपी या आईजी सीमित अवधि के लिए अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अवकाश के लिए डीजीपी की अनुमति अनिवार्य होगी।

    नवरात्र से दशहरे तक बढ़ेगी सुरक्षा
    नवरात्र के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में देवी पंडाल, गरबा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें देर रात तक बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रहती है। इसके अलावा दशहरे पर रावण दहन, चल समारोह और प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए पुलिस थानों में पर्याप्त बल उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च, पैदल गश्त और लगातार निगरानी बढ़ाई जाएगी। 

    सोशल मीडिया और साइबर गतिविधियों पर भी नजर
    त्योहारों के दौरान अफवाह, भड़काऊ सामग्री और असामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल, साइबर विंग और स्थानीय खुफिया इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    ड्यूटी के बाद मिलेगा क्षतिपूर्ति अवकाश
    त्योहारों के दौरान लगातार ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों
    को बाद में रोटेशन के आधार पर क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाएगा। ड्यूटी पॉइंट पर जवानों के लिए भोजन, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार  त्योहारों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

  • स्पाउस वीजा में फर्जीवाड़ा पड़ा भारी, कनाडा में ठग दूल्हा-दुल्हन पर 5 साल का बैन

    स्पाउस वीजा में फर्जीवाड़ा पड़ा भारी, कनाडा में ठग दूल्हा-दुल्हन पर 5 साल का बैन

    जालंधर
    कनाडा जाने के लिए पंजाब से फर्जी शादियां करके आना अब आसान नहीं होगा। इसके बढ़ने चलन को रोकने के लिए कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने कहा कि झूठ पकड़े जाने पर आरोपी की 5 साल के लिए कनाडा एंट्री बैन कर दी जाएगी।

    विभाग का कहना है कि शादी के जरिए कनाडा बुलाने वाले फर्जीवाड़े लगातार बढ़ रहे हैं और पंजाब से ठग दुल्हन-दूल्हों की दर्जनों शिकायतें सामने आई हैं।

    IRCC ने सलाह दी है कि किसी से भी शादी करके उसे कनाडा लाने से पहले पूरी तरह सोच-विचार कर लें।अधिकारियों ने कुछ मुख्य रेड फ्लैग्स पर ध्यान देने को कहा है।

    कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई कनाडाई नागरिक या परमानेंट रेजिडेंट (PR) इस तरह के फर्जी रिश्ते में शामिल पाया जाता है, तो उस पर क्रिमिनल चार्ज लगेंगे। झूठ पकड़े जाने पर 3 साल तक अपने साथी का पूरा आर्थिक खर्च उठाना पड़ेगा, चाहे शादी अगले ही दिन क्यों न टूट जाए। अगर इस दौरान स्पॉन्सर्ड व्यक्ति सरकारी सोशल असिस्टेंस का लाभ लेता है, तो सरकार वह पूरा पैसा स्पॉन्सर से ही वसूल करेगी, इसलिए पैसों के लालच में आकर ऐसी कांट्रैक्ट मैरिज में न पड़ें। पकड़े जाने पर वीजा तुरंत रिजेक्ट किया जाएगा अप्लाई करने वाले आवेदकों के लिए भी IRCC ने कड़ा रुख अपनाया है। झूठी शादी करके वीजा हासिल करना कानूनन गंभीर अपराध है, और ऐसा करने पर वीजा तुरंत रिजेक्ट करने के साथ-साथ कनाडा में एंट्री पर 5 साल का बैन लगा दिया जाएगा। यह चेतावनी पंजाब में बढ़ रहे कंट्रैक्ट मैरिज और चीटिंग ब्राइड के मामलों के बाद जारी की गई है ताकि लोग धोखेबाजों और ठगों से सतर्क रहें। सरकार ने अपील की है कि केवल सच्चे और असली रिश्ते ही बनाएं और फर्जीवाड़े में अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद न करें।

    कनाडा सरकार को मिल रही पति-पत्नी को छोड़ने की शिकायतें कनाडा के इमिग्रेशन अधिकारियों (IRCC) और बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) को बीते कुछ सालों में स्पॉन्सरशिप फ्रॉड की हजारों शिकायतें मिली हैं। सबसे आम समस्या यह आ रही है कि विदेशी नागरिक फर्जी विवाह करके कनाडा पहुंचते ही अपने कनाडाई स्पॉन्सर (पति/पत्नी) को छोड़कर गायब हो जाते हैं। इसके अलावा कई मामलों में मोटी रकम लेकर केवल कागजों पर शादी दिखाने वाले रैकेट और बिचौलियों की सक्रियता सामने आई है। इमिग्रेशन विभाग के अनुसार, इस प्रकार के फर्जीवाड़े से जहां वास्तविक और जरूरतमंद परिवारों के केस अटक जाते हैं, वहीं कनाडाई वेलफेयर सिस्टम पर भी आर्थिक बोझ पड़ता है क्योंकि धोखा खाए स्पॉन्सर बाद में भारी कर्ज और सामाजिक सहायता के फेर में फंस जाते हैं।

    पंजाब से हर साल 35 हजार लोग शादी करवाकर जा रहे पंजाब में कंट्रैक्ट मैरिज या IELTS पास लड़की के खर्च पर लड़के के कनाडा जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि हर साल पंजाब से औसतन 35 हजार युवा स्पॉन्सरशिप, स्टूडेंट स्पाउस वीजा और कंट्रैक्ट मैरिज के जरिए कनाडा जा रहे हैं। केवल डोंकी-कांट्रैक्ट में ही हर साल करोड़ों रुपए का लेन-देन होता है, जहां लड़की की पढ़ाई या फाइल का 20 से 30 लाख रुपए का खर्च लड़के का परिवार उठाता है। हालांकि, कनाडाई पीआर मिलते ही लड़की द्वारा रिश्ता तोड़ने के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके चलते केवल पंजाब में हर साल सैकड़ों पीड़ित परिवार पुलिस थानों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

    पंजाबी मूल का कनाडाई PR फर्जी शादी करता है तो 3 साल खर्चा देना होगा कनाडा सरकार की इस सख्ती और नए नियमों का पंजाब के इमिग्रेशन ट्रेंड्स पर सीधा और बड़ा असर देखने को मिलेगा। अब शादी के तुरंत बाद स्पॉन्सरशिप फाइल लगाने वाले आवेदनों की बेहद बारीकी से गहन जांच की जा रही है। जांच में थोड़ा भी संदेह होने पर फाइल रिजेक्ट कर 5 साल का बैन लगाया जा रहा है। इससे पंजाब के उन परिवारों को सतर्क होना पड़ेगा जो बिना सोचे-समझे केवल विदेश भेजने के लिए लाखों रुपये खर्च कर जल्दबाजी में कांट्रैक्ट मैरिज कर लेते हैं। वहीं, जो कनाडाई पीआर/नागरिक भारतीय युवक या युवतियां पंजाब आकर शादी करते हैं, उन्हें भी 3 साल की वित्तीय जिम्मेदारी का कड़ा अहसास रहेगा, जिससे फर्जी शादियों के कारोबार में शामिल एजेंटों और धोखेबाजों पर लगाम कसेगी।

  • अमृतसर में BSF का एक्शन, अफीम-हेरोइन की बड़ी खेप बरामद; घरिंडा में ड्रोन मिला

    अमृतसर में BSF का एक्शन, अफीम-हेरोइन की बड़ी खेप बरामद; घरिंडा में ड्रोन मिला

    अमृतसर

    भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे अमृतसर क्षेत्र में बीएसएफ ने अलग-अलग कार्रवाई के दौरान 5.050 किलो अफीम और 5.012 किलो हेरोइन बरामद की है। दोनों मामलों में अज्ञात लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं। एक कार्रवाई में पैकेट के साथ पैकिंग सामग्री भी मिली, जबकि दूसरे मामले में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद होने की बात सामने आई है।

    पहली कार्रवाई में 100 बटालियन बीएसएफ की 'ए' कंपनी के कमांडर मॉड सिंह राठौर की ओर से थाना लोपोके में शिकायत दी गई। शिकायत के अनुसार पुलमोरां बीओपी क्षेत्र में बीएसएफ को एक संदिग्ध पैकेट मिला। पैकेट को कब्जे में लेकर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में खोला गया तो उसमें 5.050 किलो अफीम बरामद हुई। पैकेट के साथ करीब 490 ग्राम पैकिंग सामग्री भी मिली। कुल संदिग्ध पैकेट का वजन 5.540 किलो बताया गया है।

    इस संबंध में थाना लोपोके में एनडीपीएस एक्ट की धारा 18, 61 और 85 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

    घरिंडा में हेरोइन के साथ ड्रोन बरामद
    दूसरी कार्रवाई घरिंडा थाना क्षेत्र में हुई। 181 बटालियन बीएसएफ के अधिकारी राकेश नेगी की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार बीएसएफ की टीम गश्त पर थी। इसी दौरान एक संदिग्ध पैकेट बरामद हुआ, जिसे चौकी इंचार्ज एएसआई राजबीर सिंह के हवाले किया गया। पैकेट खोलकर जांच करने पर उसमें 5 किलो 12 ग्राम हेरोइन मिली। बरामद हेरोइन के साथ डीजे आई मैट्रिस 400 ड्रोन भी बरामद किया गया है। पुलिस ने इस संबंध में थाना घरिंडा में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं  के तहत केस दर्ज किया है।  

  • इंदौर RE-2 पर बुलडोजर चला तो भड़के लोग, पथराव के बाद पुलिस ने खदेड़ा; दो घायल

    इंदौर RE-2 पर बुलडोजर चला तो भड़के लोग, पथराव के बाद पुलिस ने खदेड़ा; दो घायल

    इंदौर
     इंदौर में इस समय विकास कार्यों की तेजी और प्रशासनिक चुनौतियों की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं. एक तरफ जहां शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई है. आरई-2 प्रोजेक्ट की तीन साल से अटकी कनेक्टिविटी को पूरा करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने बड़ा अभियान शुरू किया है. बंगाली चौराहे से पिपलियाना के बीच सड़क निर्माण में बाधा बन रही तीन बस्तियों- पिपलियाना-शेरकांकड़, शिवनगर और शिव दर्शन नगर में बुलडोजर की कार्रवाई जारी है. इस दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशानस पथराव किया. इसका वीडियो भी सामने आया है. पथराव को देखते हुए पुलिस ने लाठी चार्ज किया। 

    टीम जेसीबी, पोकलेन और पुलिस बल के साथ बिचौली कांकड़, शिव नगर और शिव दर्शन नगर पहुंची। कार्रवाई का कुछ लोगों ने विरोध किया। इसके बाद रिमूवल टीम और पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्लास्टिक पाइप से लोगों को खदेड़कर स्थिति नियंत्रित की। पथराव में दो लोगों को चोटें आईं, जिन्हें अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।

    पिपलियाना-शेरकांकड़ में 70 से ज्यादा, शिवनगर में 115 और शिव दर्शन नगर में 72 आवासों को चिन्हित किया गया है.  लगभग 300 परिवारों के मकानों और अन्य अवैध निर्माणों को हटाकर सड़क के एक किलोमीटर हिस्से को खाली कराया जा रहा है. मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और नगर निगम का अमला तैनात है. इसके बावजूद लोगों ने विरोध और पथराव किया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. माहौल शांत होते ही तुरंत ही काम किया जाएगा। 

    4.25 किमी लंबी सड़क, 3.20 किमी काम पूरा
    एसडीएम घनश्याम धनगर के अनुसार, RE-2 की कुल लंबाई 4.25 किमी और चौड़ाई 45 मीटर है। इसमें 3.20 किमी सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। करीब एक किलोमीटर हिस्सा तीन साल से अधूरा है। प्रोजेक्ट पर करीब 55 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। सड़क के रास्ते में कुल सात बस्तियां बाधक हैं।

    325 परिवारों का हो चुका व्यवस्थापन
    पिपलियाहाना-बिचौली कांकड़ क्षेत्र में 325 परिवारों का पहले ही व्यवस्थापन किया जा चुका है। इनमें 303 परिवार आवासीय प्रकोष्ठों में रह रहे हैं। कोर्ट के स्थगन आदेश के कारण 22 मकान नहीं हटाए गए थे। कोर्ट के निर्णय के बाद इन परिवारों को आवास आवंटित कर 15 दिन का नोटिस दिया गया है। वहीं, 22 मकानों के अलावा बने 58 अवैध कच्चे झोपड़े हटाए जा चुके हैं।

    शांति नगर, पंचमुखी हनुमान मंदिर नायता रोड, स्कंदधाम कॉलोनी और आरटीओ के पास की बस्ती के परिवारों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना के नीलगिरि परिसर में शिफ्ट किया जा चुका है।

    अब शिव नगर और शिव दर्शन नगर की बारी
    शिव नगर में 80 मकानों में 117 परिवार और शिव दर्शन नगर में 55 मकानों में 72 परिवार रह रहे हैं। इनका भी नीलगिरि परिसर में व्यवस्थापन किया जाना है। निगम के अनुसार, बाधाएं हटने के बाद RE-2 के बचे हिस्से का निर्माण शुरू कराया जाएगा।

    सड़क पूरी होने से भूरी टेकरी, पीपल्याहाना, बंगाली और नायता मुंडला आरटीओ क्षेत्र को वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे आवागमन आसान होने के साथ मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।

    स्वच्छता पर हड़ताल की मार
    दूसरी ओर, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की पहचान पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से असर पड़ा है. अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर वाल्मीकि समाज और सफाईकर्मी काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। 

    जगह-जगह लगे कचरे के ढेर
    नेहरू नगर सहित कई रेजिडेंशियल और कमर्शियल एरिया की सड़कों पर कचरे के अंबार लग गए हैं. कचरा गाड़ियां न आने और डोर-टू-डोर कलेक्शन रुकने से गलियों में बदबू फैल रही है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्था कर शहर को वापस साफ सुथरा बनाने और हड़तालियों से बातचीत कर समाधान निकालने के प्रयास में जुटा है। 

  • भोपाल पुलिस की कार्यशैली को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, 4 थाने और DCP ऑफिस ISO प्रमाणित

    भोपाल पुलिस की कार्यशैली को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, 4 थाने और DCP ऑफिस ISO प्रमाणित

    भोपाल 
     राजधानी भोपाल के 4 थाने और एक डीसीपी कार्यालय को बेहतर कार्य के लिए आईएसओ सर्टिफिकेट मिला है. जनता की शिकायतों का निर्धारित समय पर निराकरण करने, अपराधियों को पकड़ने, थाने के रखरखाव और रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज्ड होने के साथ जनता के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के चार थानों और एक एडिशनल DCP कार्यलय जोन-3 को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ने सर्टिफिकेट जारी किया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान और ISO टीम की मौजूदगी में थाना प्रभारियों और अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 

    भोपाल के इन थानों को ISO सर्टिफिकेट
    भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा थानों को बेहतर, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी उपलब्धि मिली है. भोपाल शहर के चार थाने कोलार, बागसेवनिया, अशोका गार्डन और खजूरी सड़क सहित एडिशनल डीसीपी कार्यालय जोन-3 को ISO-9001:2015 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। 

    जर्जर थानों का किया गया कायाकल्प
    भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने शहर के जर्जर पुलिस थानों के जीर्णोद्धार को अभियान के तौर पर शुरू किया है. इन थानों की इमारतें लंबे समय से खराब स्थिति में थीं. पुलिस स्टाफ के साथ-साथ शिकायत लेकर आने वाले आम लोगों और पीड़ितों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. रिकॉर्ड के रखरखाव की स्थिति भी बेहतर नहीं थी. वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इन थानों का कायाकल्प किया गया. पुराने रिकॉर्ड को नियमानुसार नष्ट करने के साथ आवश्यक रिकॉर्ड को व्यवस्थित और संधारित किया गया. आमजन के बैठने के लिए बेहतर व्यवस्था, थाना परिसर का सौंदर्यीकरण और जनोन्मुखी सुविधाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। 

    ISO टीम ने गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का किया मूल्यांकन
    थानों में की गई व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन, जनसुविधाओं और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का ISO टीम द्वारा मूल्यांकन किया गया. मूल्यांकन के बाद बागसेवनिया, अशोका गार्डन, कोलार, खजूरी सड़क थाना और एडिशनल डीसीपी जोन-3 कार्यालय को ISO-9001:2015 प्रमाणन के लिए चयनित किया गया. इससे पहले मिसरोद, रातीबड़ और महिला थाना भी ISO सर्टिफाइड हो चुके हैं। 

    पुलिस कमिश्नर ने स्टाफ को दी बधाई
    पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने ISO प्रमाण पत्र मिलने पर चारो थानों के थाना प्रभारियों सहित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा, '' थानों में की गई जनोन्मुखी व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम नागरिकों और पीड़ितों को बेहतर वातावरण और प्रभावी पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है.'' उन्होंने अन्य थानों को भी इसी श्रेणी में लाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित किया. साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में भोपाल कमिश्नरेट के अन्य थानों का भी इसी तरह जीर्णोद्धार कर उन्हें ISO-9001:2015 प्रमाणन दिलाने का प्रयास किया जाएगा। 

    कार्यक्रम में DCP विकास सहवाल, एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित, एडिशनल डीसीपी मिनी शुक्ला, ACP उमराव सिंह, ACP मनोज कुमार, ISO टीम से योगेंद्र द्विवेदी, RI जयसिंह तोमर सहित सभी थाना प्रभारी, पुलिस स्टाफ, गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।